संबंधों का कातिल : जब आंखों पर चढ़ जाए स्वार्थ का चश्मा
हर इंसान के जीवन में संबंधों की अहमियत होती है. इनके बिना व्यक्ति अधूरा है. पर जब स्वार्थ का चश्मा आंखों पर चढ़ जाए तो व्यक्ति उन्हीं संबंधों का गला घोंट आगे बढ़ना चाहता है. क्या यह सफलता बेमानी नहीं?
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