उधार का चिराग
औरत को समझना बड़ा मुश्किल है. कभी प्यार तो कभी दौलत, तो कभी जरूरत के हिसाब से वह कब और किस ओर झुक जाए, कहना मुश्किल है. नाज़नीन भी ऐसी ही औरत थी जिसने अपना मतलब निकलते ही शहबाज़ को किनारे कर दिया.
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