True Crime Story: महत्त्वाकांक्षी नंदिनी पति को छोड़ कर लखनऊ में प्रौपर्टी का कारोबार करने के साथसाथ सैक्स रैकेट भी चलाने लगी थी. यही सैक्स का कारोबार उस की जान का दुश्मन बन गया.
9 सितंबर की दोपहर लखनऊ के थाना इंदिरानगर की राहुल विहार कालोनी में रोज की तरह सब ठीकठाक चल रहा था. तभी अचानक सायरन बजाती पुलिस की गाडि़यां कालोनी के एक मकान के सामने आ कर रुकीं तो लोग किसी अनहोनी की आशंका से घरों से बाहर निकल आए. घटना पंकज कुमार सिंह के मकान में घटी थी, जिसे इंदिरानगर के सेक्टर 17 के मकान नंबर 646 में किराए पर रहने वाली नंदिनी तिवारी ने किराए पर ले रखा था. पुलिस के पहुंचते ही उत्सुकतावश भारी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे.
दरअसल, थाना इंदिरानगर पुलिस को उस मकान में किराए पर रहने वाली नंदिनी तिवारी के बेटे मनीष ने अपनी मां को गोली मारे जाने की सूचना दी थी. उसी की सूचना पर पुलिस वहां पहुंची थी. दिनदहाड़े महिला को गोली मारे जाने की सूचना पा कर डीआईजी डी.के. चौधरी, एसएसपी राजेश पांडेय, सीओ (गाजीपुर) दिनेश पुरी और थानाप्रभारी धीरेंद्र यादव पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए थे.
पुलिस अधिकारी मकान के बाहरी कमरे को पार कर के पीछे वाले कमरे में पहुंचे तो बैड के पास पड़ी कुरसी पर 45-46 वर्षीया नंदिनी तिवारी घायल पड़ी थी. उस का सिर दाईं ओर झुका था. सिर के नीचे गरदन के ऊपरी हिस्से पर घाव था. इस के अलावा पीठ पर भी गहरा घाव था. इन घावों से बहा खून फर्श पर फैला था. अनुमान लगाया गया कि गोली काफी नजदीक से खड़े हो कर मारी गई थी, जो गरदन से घुस कर पीठ से निकल गई थी.
नंदिनी की सांसें चलती हुई महसूस हुईं तो पुलिस उसे लोहिया अस्पताल ले गई, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस के बाद धीरेंद्र यादव ने पुलिसिया काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भिजवा दिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. बैड पर चाय के कप रखे थे, जिन में सिगरेट के कई टुकड़े पड़े थे. इस का मतलब हत्यारे एक से अधिक थे और मृतका के परिचित थे. कमरे में ही कई मोबाइल फोन टूटे पड़े थे, जिन्हें पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. कुर्सी के पास ही नंदिनी का मंगलसूत्र टूटा पड़ा था.
मकान का कोनाकोना खंगाला गया, लेकिन हत्यारों से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला. मकान में फर्नीचर न के बराबर था. ड्राइंगरूम में एक तख्त, फ्रिज और टीवी था. दूसरे कमरे में डबलबैड और अलमारी थी, जिस में कपड़े और कौस्मैटिक्स का सामान रखा था. जिस बैडरूम में हत्या हुई थी, उस में एक बैड, कुर्सी और अलमारी थी. अलमारी में कपड़े थे. इन के अलावा तीनों कमरों से शराब की बोतलें, डिब्बे और भारी मात्रा में आपत्तिजनक चीजें बरामद हुईं, जिस से अंदाजा लगाया गया कि नंदिनी सैक्स रैकेट चलाती थी. इस का मतलब उसी धंधे से जुड़े किसी आदमी से उस का विवाद हो गया था, जिस में उस की हत्या हो गई थी.
पुलिस अधिकारियों ने नंदिनी के बेटे मनीष से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की मां नंदिनी उस के और भाई संदीप के साथ इंदिरानगर के सेक्टर 17 में रहती थी. वह प्रौपर्टी डीलिंग का काम करती थी. 3 महीने पहले उस ने यह मकान किराए पर लिया था. इस में वह दिन में एक बार जरूर आती थी. इस मकान में उस की परिचित एक महिला पुनीता उर्फ खुशी करीब एक महीने से पति संजय यादव और बेटे के साथ रह रही थी. लगभग ढाई बजे खुशी और एक अन्य महिला सोनिया मेहरोत्रा ने आ कर उसे घटना की सूचना दी थी. सोनिया एलआईसी एजेंट थी. वह चौक में पान वाली गली में रहती थी. नंदिनी को गोली मारी गई तो खुशी और सोनिया घर में ही मौजूद थीं, इस का मतलब हत्या उन के सामने हुई थी.
इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने खुशी और सोनिया से पूछताछ की. खुशी ने बताया कि लगभग डेढ़ बजे 2 लड़के आए तो नंदिनी उन्हें ले कर पीछे वाले कमरे, जो बैडरूम था, में चली गईं. उन के कहने पर वह उन के लिए चायनाश्ता भी दे आई. लगभग 2 बजे सोनिया जन्माष्टमी का प्रसाद ले कर मिलने आई तो नंदिनी के व्यस्त होने की वजह से वह बाहरी कमरे, जो ड्राइंगरूम था, में रुक गई और उस के साथ बैठ कर टीवी देखने लगी.
कुछ देर बाद नंदिनी ने आवाज दे कर उन्हें बैडरूम में अपने पास बुला लिया. उस समय नंदिनी की दोनों लड़कों से कहासुनी हो रही थी. दोनों लड़कों ने उसे और सोनिया को एक तरफ खड़ा कर दिया और उन में से एक लड़के ने जेब से पिस्तौल निकाल कर नंदिनी को गोली मार दी. उन्होंने उन्हें भी गोली मारने की कोशिश की, लेकिन किसी कारण से गोली नहीं चली.
इस के बाद उन लड़कों ने उन के और नंदिनी के गहने तथा मोबाइल छीन लिए. मोबाइलों को तो उन्होंने तोड़ कर वहीं फेंक दिए और बाहर से कमरा बंद कर के भाग गए. कमरे में बने रोशनदान से किसी तरह वह निकल कर बाहर आई और कमरा खोल कर सोनिया को निकाला. इस के बाद उस ने घटना की सूचना मनीष को दी. सोनिया ने खुशी की बात की पुष्टि की. उस ने बताया कि वह नंदिनी को 6 साल से जानती थी. उस ने नंदिनी का बीमा किया था. इस के बाद नंदिनी ने उस से कई लोगों का बीमा करवाया था. आज वह जन्माष्टमी का प्रसाद देने आई थी, तभी यह घटना घट गई. इस के बाद खुशी और सोनिया ने दोनों अज्ञात हत्यारों का जो हुलिया बताया था, उस के हिसाब से उन की उम्र 22-23 साल रही होगी.
अब तक फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड आ गए थे. फोरैंसिंक टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लग गई. डौग स्क्वायड का खोजी कुत्ता कमरे से निकल कर बाहर आया और कालोनी की गलियों में घूमता हुआ करीब 2 सौ मीटर दूर बनी झोपड़पट्टी के पास जा कर रुक गया. आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई, लेकिन उन से भी कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका.
थाने से चंद कदमों की दूरी पर यह घटना घटी थी. नंदिनी के घर से थाने के लिए 2 रास्ते थे. एक तो काफी खराब था, दूसरा पक्का था. दोनों रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे तलाशे गए, लेकिन कहीं भी कैमरा लगा नहीं मिला. हत्यारों के थाने के सामने से निकलने के बारे में सोच कर थाने के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली गई तो उस में भी ऐसा कोई आदमी नजर नहीं आया, जैसा हुलिया खुशी और सोनिया ने बताया था. पुलिस ने घर वालों, सभी करीबियों तथा परिचितों के मोबाइल नंबर ले लिए. इस के बाद थाने आ कर धीरेंद्र यादव ने मृतका के बेटे मनीष तिवारी की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. सोनिया और खुशी को बुला कर उन के बताए अनुसार, हत्यारों के स्कैच बनवाए गए.
अब तक की जांच में पता चला था, नंदिनी अपने पति अजय तिवारी से 19 सालों से अलग रह रही थी. अजय बिहार के सीवान जिले में नौकरी करता था. नंदिनी के बेटे मनीष ने अपने पिता को घटना की खबर न दे कर लखनऊ में ही रहने वाले अपने मौसीमौसा को खबर दी थी. घटना की खबर पा कर सभी रिश्तेदार पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए थे. रिश्तेदारों ने अजय को भी नंदिनी की हत्या की सूचना दी थी, पर वह नहीं आया था. पोस्टमार्टम के बाद शव मिलने पर बेटों ने रिश्तेदारों की मदद से उस का अंतिम संस्कार कर दिया था.
अगले दिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उस में गोली मारने से पहले नंदिनी के साथ मारपीट किए जाने की भी पुष्टि हुई. नंदिनी की गरदन के पीछे ऐसे निशान पाए गए थे, जो उस के साथ हुई मारपीट की तरफ इशारा कर रहे थे. धीरेंद्र यादव ने नंदिनी के तीनों मोबाइल नंबरों को चेक किया. उस के वाट्सएप नंबर वाले मोबाइल पर कई लड़कियों के ऐसे फोटो और मैसेज मिले, जिस से उस के गलत कामों में लिप्त होने के संकेत मिल रहे थे.
घटनास्थल से मिली आपत्तिजनक चीजों और मोबाइल से मिले फोटो से लग रहा था कि नंदिनी सैक्स रैकेट चलाती थी. सोशल मीडिया द्वारा भेजे गए संदेशों से भी लग रहा था कि नंदिनी के कई लड़कियों से संपर्क थे. पुलिस ने जब नंदिनी के बड़े बेटे संदीप का मोबाइल चेक किया तो उस के मोबाइल में भी कई लड़कियों के फोटो मिले, जो उस ने वाट्सएप से दूसरों को भेजे थे. पुलिस ने नंदिनी के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में जिन नंबरों पर नंदिनी की ज्यादा बातचीत होती थी, उन नंबरों को अलग कर लिया गया. उन नंबरों की घटना के दिन की लोकेशन देखी गई. जिस नंबर की लोकेशन घटनास्थल के नजदीक की थी. उन का रिकौर्ड देखा गया.
उन नंबरों में से एक नंबर की लोकेशन पहले इंदिरानगर और फिर खुर्रमनगर की थी. उस नंबर से घटना के दिन नंदिनी के नंबर पर फोन भी आया था. उस नंबर के बारे में पता किया गया तो वह नंबर लखनऊ के गोमतीनगर थानाक्षेत्र के विनीत खंड निवासी अभिषेक कनौजिया का निकला. थानाप्रभारी ने अभिषेक के कालेज का पता कर के कालेज से उस की फोटो निकलवाई. इस बात की भनक अभिषेक और उस के किसी करीबी को भी नहीं लगने दी गई. वह फोटो उन्होंने खुशी और सोनिया को दिखाया तो उन्होंने उसे पहचान लिया. वह दोनों हत्यारों में से एक था और उसी ने नंदिनी की गोली मार कर हत्या की थी.
इस के बाद पुलिस ने अभिषेक के घर पर दबिश दी तो वह घर से फरार मिला. 12 सितंबर को धीरेंद्र यादव ने एक गुप्त सूचना पर गोमतीनगर में हुसडि़या पुल के पास से अभिषेक कनौजिया को उस के एक साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया. अभिषेक के साथ गिरफ्तार हुए युवक का नाम विनय चौहान था और वह गोमतीनगर में विनय खंड में रहता था. अभिषेक से पूछताछ की गई तो उस ने विनय के साथ मिल कर नंदिनी की हत्या करने का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने हत्या के पीछे की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.
नंदिनी बिहार के सीवान जिले की रहने वाली थी. उस के पति अजय तिवारी कृषि विभाग में नौकरी करते थे. उन के 2 बेटे थे, संदीप और मनीष. नंदिनी पहले तो ठीकठाक थी, लेकिन 2 बेटों के होने के बाद उस में अचानक आश्चर्यजनक परिवर्तन आ गया था. इस की वजह थी, उस की संगति कुछ अमीर घर की महिलाओं से हो गई थी. वे महिलाएं दिल खोल कर पैसे खर्च करती थीं और ठाठ से रहती थीं. संगति का असर तो होना ही था. नंदिनी को भी उन महिलाओं की तरह पैसे खर्च करने की आदत पड़ गई. वैसे भी साथ में रह कर खर्च करना ही पड़ता है.
इस फिजूलखर्ची को ले कर नंदिनी की पति से रोज कहासुनी होने लगी. अजय ने उसे काफी समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ. रोजरोज झगड़े होने लगे तो नंदिनी को अजय के साथ रहना दुश्वार लगने लगा. आखिर उस ने अजय से अलग होने का फैसला कर लिया. अजय ऐसा नहीं चाहता था, लेकिन वह भी नंदिनी की हरकतों से आजिज हो चुका था. इसलिए वह भी अलग होने को तैयार हो गया. अजय ने उसे एक निश्चित रकम दे कर पीछा छुड़ा लिया. दोनों बेटों के साथ नंदिनी 1996 में लखनऊ आ गई. यहां उस ने जानकीपुरम के सेक्टर 3 में एक तीनमंजिला मकान नंबर 407 खरीद लिया और उसी में अपने दोनों बेटों के साथ रहने लगी. उस ने घर में किराएदार भी रख लिए, जिस से उस का खर्च चलने लगा.
लखनऊ में उस ने कुछ परिचितों की मदद से प्रौपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया. यहां पारा थानाक्षेत्र में उस के बहनोई रहते थे, उन से भी उसे मदद मिलती थी. धीरेधीरे नंदिनी का काम चल निकला. इस काम से उसे अच्छा मुनाफा होेने लगा. जल्दी ही उस का परिचय रसूखदारों, नेताओं और अधिकारियों से हो गया. महिला होने का उसे फायदा भी काफी मिला. हाईसोसायटी के लोगों में उठनाबैठना शुरू हुआ तो तरहतरह के लोगों से उस का वास्ता पड़ने लगा. नंदिनी उन के साथ रह कर शराब भी पीने लगी. वह अमर सिंह की पार्टी से भी जुड़ गई, जिस में उसे महिला लोकमंच का नगर अध्यक्ष बना दिया गया.
हाईसोसायटी में 2 चीजें प्रसिद्ध होती हैं, एक शराब और दूसरी शबाब. इस की वजह यह है कि ऐसे लोगों के पास पैसों की कमी तो होती नहीं. जब इंसान के पास अथाह पैसा होता है तो उस में ऐब आ ही जाते हैं. इन में सब से बड़े ऐब शराब और शबाब हैं. इन चीजों की जानकारी नंदिनी को भी हो गई. उस ने देखा, इस काम में बैठेबिठाए जितना पैसा मिलता है, उतना किसी काम में नहीं है. कमाई देख कर नंदिनी ने इस काम को अपनाने का फैसला कर लिया. उस के संपर्क में कुछ ऐसी लड़कियां थीं, जो पैसों की खातिर कुछ भी करने को तैयार थीं. नंदिनी ने उन से बात की तो वे चोरीछिपे यह काम करने को तैयार हो गईं. कुछ घंटों में हजारों कमाने की चाहत में वे लड़कियां इस दलदल में उतर गईं.
लड़कियों के आने के बाद नंदिनी उन की डीलिंग करने लगी. अपने संबंधों का फायदा उठा कर वह लोगों को पैसों के बदले लड़कियां होटलों या उन के बताए ठिकाने पर उपलब्ध कराने लगी. उस का यह धंधा दिन दूना रात चौगुना तरक्की करने लगा. इसी बीच नंदिनी ने देखा कि कई ग्राहक ऐसे होते हैं, जो होटलों में जाने का खतरा नहीं उठाना चाहते. ऐसे लोगों के लिए नंदिनी ने इंदिरानगर के सेक्टर 17 में मकान नंबर 646 किराए पर ले लिया. यह मकान एलआईसी में नौकरी करने वाले विनोद सिंह का था. इसी मकान में लोगों को लड़कियां मुहैया कराती थी. नंदिनी ग्राहकों से मिले रुपयों से 25 प्रतिशत लड़कियों को देती थी, बाकी खुद रख लेती थी.
इस के बाद वह अपने बेटों के साथ इंदिरानगर वाले मकान में शिफ्ट हो गई. यहां आने के बाद उस ने सैक्स वाला धंधा बंद कर दिया. उस ने जानकीपुरम वाला अपना मकान किराए पर उठा दिया था. धंधे के लिए उस ने राहुलविहार में एक मकान किराए पर ले लिया. वह अपना काम इतने गुपचुप ढंग से करती थी कि किसी को खबर नहीं लगती थी. उस के बेटों तक को इस बात की खबर नहीं थी कि उन की मां ने और भी कोई मकान किराए पर ले रखा है. थोड़ेथोड़े समय पर वह मकान बदल देती थी.
चूंकि वह प्रौपर्टी डीलिंग के धंधे से जुड़ी थी, इसलिए उस के घर बड़ेबड़े लोगों का आनाजाना लगा रहता था. इस की वजह से आसपास के लोगों को उस पर शक नहीं होता था. यही वजह थी कि वह कभी पकड़ी नहीं गई. कोई भी मकान किराए पर लेने पर मकानमालिक सत्यापन कराता तो वह पाकसाफ निकलती. इसलिए आसानी से उसे मकान किराए पर मिल जाता था. दूसरी ओर नंदिनी के दोनों बेटे अपनी मां के कार्य से अंजान अपना कैरियर बनाने की कोशिश कर रहे थे.
इस समय बड़ा बेटा संदीप माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से मासकौम की पढ़ाई कर रहा है तो छोटा मनीष पीसीएस की तैयारी कर रहा है. नंदिनी ने स्पीक एशिया जैसी कंपनी में भी अपना पैसा लगा रखा था. उस ने कई बीमे भी करा रखे थे. ये सारे बीमे उस ने चौक की पान वाली गली निवासी सोनिया मेहरोत्रा से कराए थे. 35 वर्षीया सोनिया एलआईसी एजेंट थी. उस का पति आजाद मेहरोत्रा भी एलआईसी एजेंट था. सोनिया के नंदिनी से इतने घनिष्ठ संबंध थे कि नंदिनी ने अपनी पहुंच से उसे कई मालदार आसामियों के बीमे कराए थे.
लखनऊ के गोमतीनगर थानाक्षेत्र के विनीत खंड में अभिषेक कनौजिया उर्फ विस्सू रहता था. वह बाराबंकी के एक कालेज से बीकौम की पढ़ाई कर रहा था. उस के पिता अनिल कुमार कनौजिया लेखाविभाग में क्लर्क थे. कालेज के कुछ मित्रों की संगत में पड़ कर अभिषेक ने गलत राह पकड़ ली थी. वह इतना खूबसूरत नहीं था कि कालेज की लड़कियां उस की ओर आकर्षित होतीं. दोस्तों के बीच हमेशा लड़कियों के बारे में बातें होती रहती थीं, लेकिन लड़कियों का सान्निध्य मिलना तो दूर, उन लोगों की तरफ कोई देखती तक नहीं थी.
सभी दोस्त शराब और पोर्न फिल्मों के शौकीन थे. महंगे स्मार्टफोन पास में होने के कारण सोशल मीडिया के जरिए वे एकदूसरे को अश्लील फोटो व वीडियो क्लिप भेजते रहते थे. अभिषेक के कुछ दोस्त अपने तन की गरमी शांत करने के लिए कालगर्ल्स के पास भी जाने लगे थे. कालगर्ल्स से मिलने वाले आनंद को वे दोस्तों के सामने आ कर बढ़ाचढ़ा कर बताते, जिस से अभिषेक के मन में भी वह आनंद पाने की चाहत जाग उठी. इस के लिए उस ने अपने बहराइच निवासी एक दोस्त सलमान से बात की तो उस ने उस की मुलाकात नंदिनी तिवारी से करा दी. सलमान नंदिनी के यहां मौजमस्ती करने जाता रहता था.
अभिषेक की मुलाकात नंदिनी से हुई तो वह हर हफ्ते उस के यहां जाने लगा. नंदिनी उसे उस की पसंद की लड़की 2 घंटे के लिए अपने ही घर में उपलब्ध करा देती थी, बदले में उस से 8 से 10 हजार रुपए ले लेती थी. अभिषेक नंदिनी के मकान में शराब पीता और पसंद की हुई लड़की के साथ रंगरलियां मनाता. धीरेधीरे अभिषेक ने इस मौजमस्ती में अपने सारे रुपए उड़ा दिए. जब उस के पास पैसे नहीं रहे तो उस ने दूसरों से कर्ज लेना शुरू कर दिया. वह शराब और सैक्स का इतना आदी हो गया था कि इन दोनों के बिना रह नहीं सकता था. कर्ज में लिए गए रुपए भी खत्म हो गए. ऐसी हालत में जब वह बिना पैसों के नंदिनी के यहां जाता तो नंदिनी उसे लड़कियों के सामने ही दुत्कारने लगती.
जून, 2015 में नंदिनी ने किराए पर मकान दिलाने वाले ब्रोकर का पैंफ्लेट देखा तो उस में लिखे मोबाइल नंबर पर फोन किया और किराए का मकान दिलाने को कहा. उस ब्रोकर ने मूलरूप से सीतापुर निवासी प्रौपर्टी डीलर विनीत से नंदिनी को मिलवाया. नंदिनी ने प्रौपर्टी डीलर विनीत को अपनी आईडी के तौर पर आधार कार्ड की छायाप्रति दी और कहा कि उस के पति बाहर नौकरी करते हैं और उस के 2 बच्चे हैं, जो स्कूल में पढ़ते हैं.
यह झूठ बोल कर नंदिनी ने किसी तरह प्रौपर्टी डीलर को झांसे में ले लिया, जिस के बाद उस प्रौपर्टी डीलर ने नंदिनी को इंदिरानगर थानाक्षेत्र के राहुल विहार में पंकज कुमार सिंह का मकान 10 हजार रुपए मासिक किराए पर दिला दिया. मकान मालिक पंकज सिंह हरिद्वार में नौकरी करता था और परिवार के साथ रहता था. पंकज का भाई इंदिरानगर में रहता था, उसे ही हर महीने किराया देने की बात तय हुई. इस मकान की देखभाल और आने वाले मेहमानों की आवभगत के लिए नंदिनी ने 8 अगस्त को पुनीता उर्फ खुशी को रख लिया. 30 वर्षीया खुशी नंदिनी के जानकीपुरम वाले मकान के पड़ोस में रहती थी. वहीं उस का नंदिनी से परिचय हुआ था.
मूलरूप से बिहार निवासी पुनीता उर्फ खुशी तिवारी ने सीतापुर के संदना थानाक्षेत्र निवासी संजय यादव उर्फ छोटू से विवाह किया था. उस का 3 साल का बेटा था. संजय लखनऊ के विकासनगर थानाक्षेत्र की एक कपड़े की दुकान पर काम करता था. वह सुबह घर से निकलता था तो देर रात लौटता था. इस मकान में 3 कमरे थे, जिन में से 2 कमरे बैडरूम और एक कमरा ड्राइंगरूम बना दिया गया. जो मिलने आता था, उसे ड्राइंगरूम में बैठा दिया जाता था और दोनों बैडरूम लोगों को लड़कियों के साथ मौजमस्ती के लिए मुहैया कराए जाते थे. नंदिनी इस मकान में अकसर दिन में आती थी, कभीकभी रात में भी रुक जाती थी.
दूसरी ओर नंदिनी के तानों से आजिज अभिषेक ने उसे सबक सिखाने की ठान ली थी. उस ने अपनी मोटरसाइकिल खरगापुर निवासी सुरेंद्र बहादुर को 20 हजार रुपए में बेच दी और उसी पैसों से उस ने एक पिस्तौल खरीदी. इस के बाद उस ने अपने दोस्त विनय चौहान से बात की. वह उस का साथ देने को तैयार हो गया. विनय गोमतीनगर में विनय खंड में रहता था. वह ताज होटल में वेटर था, लेकिन इधर उस ने नौकरी छोड़ दी थी.
9 सितंबर की सुबह अभिषेक ने नंदिनी को मिलने के लिए फोन किया तो उस ने उसे बुला लिया. लेकिन उस ने उसे अपने लिए वोदका शराब की एक बोतल लाने को कहा. अभिषेक ने नंदिनी के लिए वोदका शराब और अपने दोनों के लिए बीयर के 2 केन खरीदे. इस के बाद वह विनय के साथ औटो से नंदिनी के इंदिरानगर के राहुल विहार वाले मकान पर पहुंच गया. अभिषेक ने नंदिनी के सामने आते ही पैर छुए. नंदिनी उन दोनों को ले कर बैडरूम में चली गई. उसी बीच उस ने खुशी से चायनाश्ता दे जाने के लिए कहा. नंदिनी से अभिषेक बातें करने लगा. खुशी चाय बना कर दे गई. तीनों ने चाय पी. इस के 15 मिनट बाद नंदिनी ने शराब पी तो अभिषेक और विनय ने बीयर पी.
नंदिनी ने उन दोनों की बीयर में अपनी थोड़ी शराब भी डाल दी. तभी सोनिया जन्माष्टमी का प्रसाद देने आई. नंदिनी को 2 लड़कों से बातें करते देख वह ड्राइंगरूम में बैठ कर टीवी देखने लगी. जब शराब का नशा चढ़ा तो नंदिनी ने अभिषेक को ताना मारा कि उस के पास रुपए नहीं है तो वह क्यों चला आता है. इस के बाद दोनों में कहासुनी होने लगी. नंदिनी से अभिषेक ने मारपीट की तो उस ने ड्राइंगरूम में बैठी खुशी और सोनिया को कमरे में बुला लिया. उस ने दोनों को कमरे में एक किनारे खड़ा कर दिया. विनय ने उन्हें कवर किया तो अभिषेक ने जेब से पिस्टल निकाल कर खड़ेखड़े कुर्सी पर बैठी नंदिनी को पास से गरदन के ऊपरी हिस्से में गोली मार दी, जो कि पीठ से बाहर निकल गई.
नंदिनी घायल अवस्था में बेहोश हो गई. अभिषेक ने नंदिनी, खुशी और सोनिया के मोबाइल ले कर तोड़ दिए. अभिषेक को उन दोनों से खतरा नहीं था, क्योंकि वे उसे पहचानती नहीं थीं. फिर उन्हें कमरे में बंद कर के दोनों वहां से बाहर निकले और औटो से चले गए. कमरे में एसी लगाने के लिए रोशनदान में गत्ता लगा हुआ था, जिसे हटा कर खुशी बाहर निकली और कमरे का दरवाजा खोल कर सोनिया को बाहर निकाला. इस के बाद उन्होंने नंदिनी के बेटे मनीष को घटना की सूचना दी.
धीरेंद्र यादव ने अभियुक्तों की निशानदेही पर अंसल से हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल बरामद कर ली. खुशी और सोनिया से हुई लूट की बात पुलिस जांच में गलत निकली. आवश्यक काररवाई के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. True Crime Story
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






