Hindi Story: इंसपेक्टर नवाज खान को शक था कि चंदरमल के गायब होने के पीछे उस की मंझली बहू के प्रेमी का हाथ है. लेकिन जब उन्होंने इस मामले की जांच की तो…

उन दिनों मेरी पोस्टिंग अमृतसर के एक देहाती इलाके में थी. वहां लाला चंदरमल के बेटे अर्जुन से मेरा अच्छा दोस्ताना था. वह एक शरीफ और मुखलिस नौजवान था. अर्जुन का शालों का कारोबार था. उस की बीवी भी अच्छी औरत थी और मेरे घर आती थी. मेरी बीवी से उस की अच्छी पटती थी. उस का नाम सीता था. आज जो किस्सा मैं आप को सुनाने जा रहा हूं, उस में सीता की खास भूमिका है. वह एक नेक और भली औरत थी और चंदरमल की चहेती बहू थी. चंदरमल के दोनों बड़े बेटों की औरतें नाम की बहुएं थीं. न वे दोनों ससुर की कोई सेवा करती थीं, न उसे पूछती थीं. उस की सारी खिदमत और देखरेख सिर्फ सीता करती थी.

वैसे चंदरमल ने दोनों बड़े बेटों, विकास और प्रकाश को पहले ही अलग कर दिया था, जबकि अर्जुन ने अलग होने से साफ इनकार कर दिया था. वह और सीता बाप से अलग नहीं होना चाहते थे. पर चंदरमल ने समझाबुझा कर अपने घर के पास ही घर दिला कर उन्हें भी अलग कर दिया था. लेकिन अलग होने के बाद भी सीता सुबहशाम आ कर ससुर का खाना बनाती, खिलाती, सेवा करती. उस की जरूरतों का खयाल रखती.

लाला की बीवी मर चुकी थी. न चाहते हुए भी अर्जुन और सीता को लाला से अलग होना पड़ा था, इस के पीछे लाला चंदरमल की शराब की लत थी. वह रात होते ही पीना शुरू कर देता था, इसलिए वह नहीं चाहता था कि उस की बहू व उस के बच्चे नशे की हालत में उसे देखें. इसी वजह से उस ने अर्जुन को भी अलग कर दिया था. सोमवार के दिन वह सोमरस का पान कुछ ज्यादा ही कर लेता था. मदहोशी की हालत में कोई उसे गलत हरकतें करते न देखे, इसलिए वह अलग अकेले रहना पसंद करता था. ये सब बातें अर्जुन की बीवी मेरी बीवी को बताती थी.

फिर अचानक एक दिन लाला चंदरमल गायब हो गया. सीता ने बताया कि वह उस के घर के 3-4 चक्कर लगा चुकी है, पर वह नहीं मिला दरवाजे पर भी ताला लगा हुआ है. सीता बहुत परेशान थी. 2 दिनों बाद दीवाली थी और लाला दीवाली उस के घर पर मनाने वाला था. वह जब उस से मिलने गई तो घर बंद था. उसे खाना भी बनाना था, पर वह नहीं लौटा था. वह मेरे पास आ गई. हम ने समझाया, लौट आएंगे, कहीं काम से गए होंगे. समझदार आदमी हैं. पर हमारी तसल्ली कुछ काम न कर सकी. वह रोती रही, परेशान होती रही. उस की परेशानी अपनी जगह ठीक थी. वह ऐसा गायब हुआ कि लौट कर ही नहीं आया. कई दिन गुजर गए, उस का कोई सुराग न लगा. मैं ने भी काफी कोशिश की.

अर्जुन व सीता ने भी आसपास, रिश्तेदारों में काफी तलाश की, पर अब तक कुछ पता नहीं चला. मेरी तलाश भी बेकार गई. यह भी पता न चल सका कि वह खुद गया या कोई उसे उठा कर ले गया. वह कोई बच्चा नहीं था कि गुम हो जाता. मैं ने उसे सलाह दी कि वे लोग कानूनी तौर पर मामला उठाएं तो सही तरीके से तफ्तीश हो सकती है. इस पर वह बोली, ‘‘हम लोग राजी हैं, पर भाई प्रकाश और उन की पत्नी भगवती नहीं मान रहीं. वह कहती हैं कि फालतू के लफड़े में पड़ने से क्या फायदा? आप उसे जाने दें, मैं और मेरे पति कानूनी काररवाई करेंगे.’’

मुझे अर्जुन के भाईभाभी की बात समझ में नहीं आई. दूसरे दिन अर्जुन ने चंदरमल की गुमशुदगी दर्ज करा दी. मैं ने उस से पूछा, ‘‘प्रकाश और उस की पत्नी भगवती रिपोर्ट के विरोध में क्यों हैं? क्या वे नहीं चाहते कि चंदरमल मिल जाएं?’’

इस पर अर्जुन ने कई बातें बताईं. प्रकाश व भगवती की लाला से नहीं पटती थी. वह उन से नाराज रहता था. भगवती चाहती थी कि लाला की सारी दौलत उन दोनों को मिल जाए. प्रकाश की शादी भी लाला ने नहीं करवाई थी. उस ने ऐसी ही चलतीफिरती औरत से अपनी मरजी से शादी कर ली थी.

लाला प्रकाश व भगवती से जरा भी खुश नहीं था. मैं ने लाला के दुश्मनों के बारे में पूछा तो कहने लगा, ‘‘मेरे बाबू जुबान के व धंधे के बड़े खरे थे. उन की कभी कोई शिकायत नहीं आई. ईमानदारी से लेनदेन करते थे. उन का ऐसा कोई दुश्मन भी नहीं था, जो उन्हें गायब करवा दे. मुझे तो कभीकभी भगवती पर शक होता है.

‘‘वह प्रकाश पर भी दबाव डालती थी कि लाला से हिस्सा मांगो. प्रकाश ने बापू से नहीं, मुझ से हिस्से की बात की थी. मैं ने उसे समझाया था कि बापू सब की बराबर मदद करते हैं, इसलिए हमारी गृहस्थी अच्छी चल रही है.

‘‘अगर हिस्से की बात करोगे तो बापू नाराज हो कर कहीं ये मदद भी बंद न कर दें. तब उस ने बेबसी से कहा था कि वह भगवती की वजह से मजबूर है. उस वक्त बात टल गई. बापू के गायब होने से उन की मुराद पूरी हो जाएगी, क्योंकि बापू के न रहने से हिस्से बंट जाएंगे.’’

अर्जुन की बातों से मुझे तफतीश शुरू करने में काफी मदद मिली. सब से पहले मैं प्रकाश के घर गया. उन के दरवाजे पर बड़ा सा ताला लगा था. दोनों गायब थे. इस का मतलब कुछ गड़बड़ तो थी. मुझे उन की वापसी का इंतजार करना था.

मैं ने अर्जुन से कहा कि वह अपने सगेसंबंधियों, जानने वालों में उन के बारे में पता करवाए. मकान मालिक भी अर्जुन से उन के बारे में पूछ रहा था. यह तय था कि वे लोग जानबूझ कर गायब हुए थे. भगवती कोई अच्छी औरत नहीं थी. हो सकता है, उस का ताल्लुक जरायमपेशा लोगों से रहा हो. मैं ने सीता से, भगवती के मांबाप का पता मालूम किया और अपने मुखबिर से कहा कि मुझे किसी ऐसे आदमी से मिलवाओ, जिस का जरायमपेशा लोगों से याराना हो. उस ने एक ताड़ी बेचने वाले से मुझे मिलवाया, वह नाजायज धंधा करता था. इसलिए पुलिस के लिए कुछ भी काम करने को तैयार था.

मैं ने उसे भगवती के मांबाप का पता दे कर कहा कि इस घराने के बारे में मुझे पूरी मालूमात पता कर के खबर करे. उस के बाप का नाम सुन कर वह बोला, ‘‘साहब, भगवानदास मेरा ग्राहक है. उस का बदमाश गिरधारी से भी याराना है और ऐसा सुना है कि भगवानदास के मरने के बाद उस का याराना उस की लड़की भगवती से हो गया था. अब वह लड़की कहां है, मुझे नहीं मालूम. यह पुराने दिनों की बात है.’’

मैं ने उसे गिरधारी का पता लगाने को कहा और भगवती व उस के घराने के बारे में जानकारी लाने को कहा. कुछ दिनों बाद ताड़ी बेचने वाला, जिस का नाम मकरंदी था, बोला, ‘‘साहब, गिरधारी बड़ा बदमाश है. सारे गलत काम करता है, जुएं का बड़ा अड्डा चलाता है. मैं आप को मौका देख कर ऐसे समय उस के अड्डे पर ले चलूंगा, जब वह वहां मौजूद हो.’’

मुझे और कोई सुराग नहीं मिला था. चंदरमल अभी तक गायब था. मैं ने गिरधारी को निशाना बनाने की सोची, क्योंकि भगवती से भी उस के संबंध थे. मकरंदी के कई शराब के अड्डे थे, जहां वह ताड़ी बेचता था और पूरे वक्त पुलिस की खुशामद में लगा रहता था. उस दिन वह अपने साथ एक आदमी तिवारी को ले कर आया, जो सूरत से ही बदमाश लगता था. वह कहने लगा, ‘‘यह तिवारी गिरधारी का खास आदमी है, पर आजकल इस की गिरधारी से लड़ाई है. यह हमें उस तक पहुंचा देगा.’’

उसी रात को मैं तिवारी और मकरंदी के साथ गिरधारी के अड्डे के लिए रवाना हो गया. शहर के आखिरी छोर पर एक बड़े मैदान के बाद एक 2 मंजिला मकान था. नीचे तो अंधेरा था, ऊपर के कमरों में उजाला था. यही गिरधारी का अड्डा था. अभी हम सीढि़यों के पास खड़े थे कि एक आदमी सीढि़यों से लुढ़कता हुआ हमारे सामने आ कर गिरा. तिवारी ने बताया कि जब कोई जुआरी पैसे नहीं अदा करता तो गिरधारी उसे इसी तरह ऊपर से नीचे लुढ़का देता है.

हम चुपचाप ऊपर पहुंचे. सामने के कमरे में 5-6 लोग बैठे जुआ खेल रहे थे. उन के पास ताश व पैसे रखे थे. तिवारी मेरा हाथ पकड़ कर दूसरे कमरे में ले गया, जहां एक सांडनुमा आदमी एक टेबल के पीछे बैठा था. तिवारी धीरे से बोला, ‘‘यही है गिरधारी.’’

वह हट्टाकट्टा काला आदमी था. उस के बाजू मुगदल की तरह थे. चौड़ी छाती, भैसें जैसी गरदन, निस्संदेह वह एक मजबूत कदकाठी वाला अडि़यल आदमी था. गिरधारी तिवारी की आवाज सुन कर फुरती से खड़ा हो गया. उस ने अपने कुत्ते को इशारा किया तो उस ने तिवारी पर छलांग लगा दी. मेरा ध्यान गिरधारी पर था, वह सांड की तरह झूमता सिर की टक्कर मारने के लिए मेरी तरफ बढ़ा. मैं फुरती से एक तरफ से हो गया, वह अपनी पूरी ताकत से जा कर अलमारी से टकराया. अलमारी का पट टूट गया.

मैं ने सोचा, अगर यह मुझ से टकराया होता तो मेरा क्या हाल होता? मुझे उसे दूसरा मौका नहीं देना था. मैं ने खुद को तैयार कर लिया. जैसे ही वह मेरी तरफ बढ़ा, मैं ने सीधे हाथ का मुक्का इस के माथे पर जड़ दिया. मुझे लगा, जैसे मेरा हाथ किसी दीवार पर पड़ा हो. उस वक्त पिस्तौल निकालना खतरनाक हो सकता था. मुक्का जबरदस्त था, वह बिलबिला कर माथे पर हाथ रख कर पीछे हटा. उस की अंगुलियों से खून बाहर निकल रहा था. वह चकरा कर जमीन पर बैठ गया.

मैं ने तिवारी को इधरउधर देखा. वह कोने में गिरा पड़ा था. कुत्ते ने उस का पेट फाड़ दिया था, पर उस ने भी चाकू से कुत्ते को खत्म कर दिया था. मकरंदी पता नहीं कहां गायब हो गया था. तिवारी को देखना जरूरी था, मैं उस की तरफ बढ़ा. गिरधारी ने इस का फायदा उठाया, वह कमरे से खिसक गया. मुझे बड़ी हैरत हुई. नामीगिरामी गुंडा मेरे एक ही मुक्के में मुकाबले से डर गया. शायद और कोई वजह रही होगी, जो वह वहां से भाग गया. मुझे जल्द से जल्द तिवारी को अस्पताल भेजना था. मैं ने बाजू के कमरे से 2-3 लोगों को बुलाया, जो डरतेडरते आए.

मैं ने उन के साथ तिवारी को अस्पताल भिजवाया. सब मुझ से डर रहे थे. वे मुझे गिरधारी से बड़ा बदमाश समझ रहे थे, जिस ने गिरधारी के अड्डे पर आ कर उस का यह हाल कर दिया था. वे लोग तिवारी को एक चारपाई पर डाल कर अस्पताल ले गए. इस चक्कर में मकरंदी कब और कहां गायब हो गया, पता ही नहीं चला. मैं अपने थाने चला गया. तीसरे दिन मकरंदी मेरे पास आया. उसे देख कर मुझे गुस्सा तो बहुत आया, पर उस ने यह कहते हुए हाथ जोड़ कर माफी मांग ली कि वह दिल का कमजोर है. लड़ाईभिड़ाई से घबरा कर भाग गया था. मकरंदी को मैं ने माफ कर दिया, क्योंकि उस ने एक अच्छा काम किया था. जब गिरधारी छिपतेछिपाते वहां से भाग रहा था तो उस ने उस का पीछा किया था और यह मालूम कर लिया था कि वह कहां जा कर छिपा था.

मैं ने फैसला कर लिया कि मैं मकरंदी के साथ गिरधारी तक जरूर पहुचूंगा. मैं अर्जुन से मिलने उस के घर चला गया. उन दोनों को मैं ने सारी बातें बताईं. इस पर सीता कहने लगी, ‘‘मुझे पता था कि भगवती का ताल्लुक गिरधारी से है, पर मैं ने इस डर से यह बात किसी को नहीं बताई कि सब कहते कि मैं अपनी भाभी पर जलन में दोष लगा रही हूं. मैं ने कई बार प्रकाश की गैरमौजूदगी में एक काले सांड जैसे आदमी को उस के घर में देखा था.’’

अब मेरा गिरधारी तक पहुंचना जरूरी हो गया था. मकरंदी ने तिवारी का हाल भी बताया कि अब वह अच्छा है. उस के पेट में टांके लगे हैं, पर खतरे की कोई बात नहीं है. मकरंदी ने मुझे बताया कि उस ने गिरधारी को एक महंत की धरमशाला में जाते देखा था. जिस वक्त हम धरमशाला पहुंचे, शाम हो चुकी थी. धरमशाला की चारदीवारी काफी नीची थी, बीच में बड़ा मैदान था, जिस में एक तालाब सा बना हुआ था. सामने बड़ा सा बरामदा था, पीछे कमरों की लाइन थी. बरामदे में एक चारपाई पर एक आदमी लेटा था, दूसरा आदमी उस का बदन दबा रहा था.

मकरंदी धीरे से बोला, ‘‘जो लेटा है, वह महंत सोमनाथ है और जो बदन दबा रहा है, वह यहां का नौकर है. यहां आने से पहले मुझे मकरंदी बता चुका था कि सोमनाथ बड़ा अय्याश आदमी है. सब तरह के बुरे काम करता है, यहां तक कि लड़कियां भी उठवा लेता है.

हमें देख कर सोमनाथ उठ बैठा और हैरानी से देखने लगा. उस की हैरत देख कर मकरंदी जल्दी से बोला, ‘‘महाराज, हम गिरधारी से मिलने आए हैं. उस ने मुझे बुलवाया था.’’

महंत ने एक कमरे की तरफ इशारा कर दिया. मकरंदी महंत के पास चारपाई पर बैठ कर बातें करने लगा. मैं समझ गया कि वह डरपोक आदमी है, इसलिए गिरधारी के पास नहीं जाएगा. मैं ने सोमनाथ को सुनाने के लिए कहा, ‘‘तुम यहीं बैठो, मैं बात कर के आता हूं.’’

फिर मैं उस कमरे की तरफ बढ़ गया. इस बार मैं अचानक हमला करना चाहता था. मैं ने धीरे से दरवाजा खोला और तेजी से अंदर दाखिल हुआ. कमरे में एक ही चारपाई थी और उस पर वह सांड लेटा हुआ था. मुझे देख कर वह बड़ी फुरती से उठा, पर मैं ने उसे टक्कर मारने का मौका नहीं दिया. मैं ने पिस्तौल के दस्ते से वार कर के उस की गरदन का पुट्ठा तोड़ दिया. वह चकरा कर नीचे गिरा तो मैं ने उस के पेट पर कस कर घुटना मारा. उस ने हाथपैर ढीले छोड़ दिए. इस तरह सांड ने आसानी से हार मान ली.

मैं उसे थाने ले आया और 2 मजबूत बंदे उस की धुलाई पर लगा दिए. जब उस के सिर से गुंडागर्दी का भूत उतर गया तो मैं ने उस से सीधा सवाल किया, ‘‘तुम ने किस के कहने पर लाला चंदरमल को गायब किया है?’’

वह कानों को हाथ लगा कर बोला, ‘‘आप सच मानें यह काम मैं ने नहीं किया है, आप चाहे कसम उठवा लें.’’

मै ने कहा, ‘‘तुम नहीं जानते, मुझे सब पता है. भगवती लाला से दौलत में हिस्सा चाहती थी. उस ने प्रकाश को आगे कर दिया था कि ससुर से हिस्सा मांगे. जब लाला नहीं माना तो उस ने तुम से कहा कि लाला चंदरमल को गायब करवा दो. तुम्हें दौलत का लालच आ गया. तुम्हारा और भगवती का संबंध है, मुझे यह भी मालूम है, इसलिए तुम यह काम करने पर राजी हो गए.’’

मेरी बातें सुन कर गिरधारी सिर झुका कर बोला, ‘‘मेरा और भगवती का ताल्लुक है, यह बात सच है. मैं मानता हूं, पर लाला को मैं ने गायब नहीं किया. हां, मैं ने भगवती और प्रकाश को गायब हो जाने को जरूर कहा था, क्योंकि मुझे पता लग गया था कि आप उन दोनों पर शक कर रहे हैं और जल्द ही उन्हें पकड़वा लेंगे.

‘‘भगवती भी डर गई थी, इसलिए वे दोनों छिप गए. हम से गलती हो गई. गायब होने से आप का शक और बढ़ गया. अब मैं आप को बताता हूं, वह अपने पति के साथ अपने चाचा के घर छिपी है. मैं पता बताता हूं. मुझे पता है, मकरंदी ने आप को मेरे खिलाफ भड़काया है. उस की मुझ से दुश्मनी चल रही है. उसी के चलते उस ने आप को मेरे बारे बताया है.’’

‘‘तुम्हारी और मकरंदी की क्या दुश्मनी है और क्यों?’’

‘‘मैं कसम खा कर सच कह रहा हूं. इस कमीने मकरंदी ने एक दिन मुझ से कहा था कि चलो लाला को गायब कर देते हैं. उस के पास काफी दौलत है. काफी कुछ दे दिला कर वह हम से अपनी जान छुड़वाएगा. हमें अच्छाखासा पैसा भी मिल जाएगा. मैं नहीं माना, इसी पर हमारी कहासुनी हो गई.

‘‘इसी वजह से उस ने मुझे कुरबानी का बकरा बनाया. आप के मुखबिर की मुट्ठी गरम कर के मुखबिर के तौर पर आप तक पहुंचा. आप चाहें तो अपने मुखबिर से पूछ सकते हैं. उस ने खुद अपना नाम आप तक भिजवाया है, ताकि आप की नजर में मुझे मुजरिम बना सके. वह बड़ा शातिर और कमीना आदमी है, यह सब उसी की चाल है.’’

मैं ने अपने मुखबिर को बुला कर सख्ती से पूछा तो उस ने कबूल कर लिया कि मकरंदी ने ही पैसे दे कर अपना नाम मुखबिर की तौर पर बताने को कहा था. इस के बाद वह हाथ जोड़ कर माफी मांगने लगा. गिरधारी का बयान मुझे सच्चा लगा. एक बात और मैं ने नोट की थी कि मकरंदी गिरधारी के सामने आने से बचता था. मैं ने गिरधारी से कहा, ‘‘मैं तुम्हें अभी तो छोड़ रहा हूं, पर तुम रोज थाने आओगे. अगर नहीं आए या फरार हुए तो मैं तुम्हें ही मुजरिम समझ बंद करवा दूंगा.’’

वह हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘साहब, मैं ने सब सच कहा है. यह मकरंदी ही बदमाश है. उस ने ही लाला को उठाने की बात उस के शराबखाने के नौकर दीनानाथ के सामने कही थी. आप चाहें तो उस से भी पूछ लें, मैं बेकुसूर हूं.’’

गिरधारी के बयान के बाद मेरी अब तक की सारी तफतीश बेकार चली गई. अब मेरे सामने फिर वही सवाल खड़ा था कि लाला को किस ने गायब किया? मैं ने दूसरे दिन मकरंदी को थाने बुलाया और अपने हवलदार से कह दिया कि उसे बिठा कर पूछताछ करते रहो और मैं खुद मकरंदी के शराबखाने पहुंच गया. वहीं अड्डे पर मैं ने दीनानाथ को खूब धमकाया. उस से कहा कि एक चोर ने एक वारदात में उस का नाम लिया है. वह मुझे पहचानते ही डर गया, धमकी से भी घबराया. मैं ने कहा, ‘‘कल तुम थाने आओ, वहां कुछ पूछताछ करनी है, पर किसी को कुछ बताना नहीं. अगर किसी को कुछ पता चला तो मैं तुम्हें ही बंद कर दूंगा.’’

दूसरे दिन दीनानाथ मेरे पास थाने पहुंच गया. मैं ने उस से कहा, ‘‘मुझे लाला चंदरमल और मकरंदी के बारे में पूरी बात सचसच बताओ.’’

वह कहने लगा, ‘‘लाला शराब खूब पीता था और मकरंदी उस के पास शराब पहुंचाता था. इसलिए उन दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई थी. लाला पैसों के मामले में एकदम खरा था. उस का कारोबार बहुत अच्छा चलता था. वह अपने बेटों में पैसे बांटता था, बाकी की शराब पी कर बराबर कर देता था. उस की बीवी तो मर गई थी, घर में अकेला था, इसलिए कोई रोकटोक नहीं थी.’’

‘‘अच्छा यह बताओ कि क्या कभी मकरंदी ने तुम से कहा था कि लाला को गायब कर दें और उस से पैसे ऐंठ लें?’’ मैं ने पूछा.

‘‘यह बात पहले मुझ से नहीं, गिरधारी के साथ हुई थी साहब, मुझे याद है कि गिरधारी कुछ रकम का हिसाब करने मकरंदी के पास आया था. उस वक्त मैं भी अड्डे पर मौजूद था. गिरधारी ने मकरंदी से कहा था कि इस वक्त जरा हाथ तंग है, बाकी के पैसे कुछ दिनों बाद दे देगा, इस पर मकरंदी ने कहा कि किसी साहूकार से ले लो. गिरधारी  ने कहा, ‘साहूकार (लाला) तो तुम्हारा यार है.’

मकरंदी ने कहा था, ‘‘चलो गिरधारी, लाला को गायब कर देते हैं. अच्छीखासी रकम ले कर उसे छोड़ेंगे, काफी पैसा मिल जाएगा.’’

गिरधारी ने इनकार करते हुए कहा था, ‘‘मैं इस तरह के गंदे काम नहीं करता, न किसी जुर्म में शामिल होना चाहता हूं.’’

इस पर उन दोनों में कुछ कहासुनी भी हुई थी. फिर गिरधारी ने बाकी बचे पैसे 2 दिनों में तिवारी से भिजवा दिए थे. उसी दिन मकरंदी ने मुझ से कहा, ‘‘दीनानाथ, चलो अपन दोनों मिल कर लाला को गायब करते हैं. जो पैसे मिलेंगे, आपस में बांट लेंगे.’’

मैं ने साफ इनकार कर दिया. मैं शराब का धंधा करता हूं, बुरा आदमी हूं, पर किसी की जान जोखिम में नहीं डाल सकता. ऐसा काम नहीं करूंगा. दीनानाथ के इनकार के बाद मकरंदी ही बचता था, जिसे इस सवाल का जवाब देना था कि आखिर लाला कहां गया? गिरधारी और दीनानाथ दोनों ही मकरंदी की तरफ इशारा कर रहे थे. दोनों के बयान एक जैसे थे और सच्चे थे. अब मेरा शक मकरंदी की तरफ गया. मैं ने दीनानाथ को कहीं बाहर न जाने का पाबंद कर के जाने दिया.

दीनानाथ के बयान के बाद जब मकरंदी थाने आया तो मैं ने उसे कमरा बंद कर के बिठा लिया और सख्ती से कहा, ‘‘तुम ने काफी चक्कर दिए. लाला को तुम ने ही गायब किया है. अभी सच बता दो, नहीं तो मुश्किल में पड़ जाओगे.’’

वह एकदम से परेशान हो गया कि कल तक थानेदार उस के साथ था, आज एकदम से खिलाफ हो गया और उस पर शक कर रहा है. मुजरिम का घबराना तफतीश के लिए अच्छा रहता है. मैं उस पर दबाव बना सकता था. मैं ने उसे हवालात में डाल दिया. वह बड़ा ढीठ आदमी था. एक दिन तक तो साफ इनकार करता रहा. दूसरे दिन मैं ने दीनानाथ को बुलवा लिया. उसे मकरंदी के सामने बिठा कर पूछा. उस ने साफसाफ कह दिया कि मकरंदी ने गिरधारी से और उस से लाला को उठवाने की बात कही थी.

दीनानाथ पुलिस से छूटना चाहता था, इसलिए उस ने पूरा सच उगल दिया. सच सुन कर मकरंदी का चेहरा फक पड़ गया. मैं ने कहा, ‘‘मकरंदी भलाई इसी में है कि तुम सच्चाई कबूल कर लो, नहीं तो पुलिस की मार के आगे टिक नहीं सकोगे.’’

मकरंदी ने सिर झुका लिया. अब मेरे सामने बैठा, वह अपने जुर्म का इकरार कर रहा था, ‘‘दीनानाथ के इनकार करने के बाद मैं ने खुद यह काम करने का फैसला कर लिया. वह सोमवार का दिन था. मुझे पता था कि उस दिन वह जम कर पीता था. इसलिए उस के घर मैं ने जो शराब भिजवाई थी, वह बिना मिलावट की असली शराब थी. मैं चाहता था कि इस सोमवार को जब लाला शराब पिए तो ऐसा नशा चढ़े कि अपना होश खो बैठे.

‘‘मैं उस के घर चला गया. जब मैं वहां पहुंचा तो वह पूरे होशोहवास में घर से निकल रहा था. मुझे बड़ी हैरानी हुई. सोमवार के दिन लाला इतनी ठीक हालत में कैसे? मैं ने लाला से पूछा, ‘क्या बात है? जलपानी नहीं लिया क्या?’ इस पर वह कहने लगा, ‘आज मैं ने जलपानी नहीं लिया (वह शराब को जलपानी कहता था). मैं अभी दिवाली के लिए अपनी छोटी बहू के घर जा रहा हूं. मैं उन लोगों के सामने शराब पी कर नहीं जाता.’

‘‘लाला की इस बात ने मेरा सारा प्लान खतरे में डाल दिया. मैं ने लाला से कहा कि दिवाली की खुशी में मैं खुद उस के साथ जलपानी लेने आया हूं. एक गिलास से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पहले वह हिचकिचाया, ‘नहीं..नहीं..’ करने लगा. लेकिन मैं ने थोड़ा जोर डाला तो वह मान गया.

‘‘हम दोनों बातें करतेकरते अड्डे की तरफ चले. वहां मैं ने लाला को एक गिलास दिया. उस के बाद तो थोड़ा कहने पर वह पीता चला गया. उस के ढह जाने से पहले मैं उसे श्मशानघाट की तरफ ले कर चला गया. वहां एक जगह ऐसी है, जहां कुम्हार मिट्टी खोदते हैं. उस जगह बड़ेबड़े गड्ढे बन गए हैं.

‘‘उस के करीब एक सूखा कुंआ है. वहां बड़ी वीरानी थी. दूरदूर तक कोई नहीं था. मैं लाला को बातों में लगा कर वहां तक ले गया, फिर हम कुएं के पास आ गए. उस वक्त तक लाला नशे में धुत हो चुका था. उस के पांव सीधे नहीं पड़ रहे थे. वह बुरी तरह लड़खड़ा रहा था.

‘‘मैं ने उस की सदरी की जेब टटोली और चाबी निकाल कर संभाल कर रख ली. उस में एक तिजोरी की चाबी भी थी. फिर मैं ने लाला को कुएं में धकेल दिया. लाला की एक चीख सुनाई दी और अंदर से धप्प की आवाज आई. फिर सन्नाटा छा गया. कुछ देर मैं मुंडेर पर बैठा रहा और फिर वापस आ गया.’’

मकरंदी का बयान सुन कर मैं एकदम शौक्ड रह गया. एक बूढ़े भले आदमी को उस शराब बेचने वाले ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था. वह आगे बोला, ‘‘वापसी के पहले मैं ने एक बार कुएं में झांक कर देखा, मुझे दूर नीचे एक गठरी सी दिखाई दी, वह लाला चंदरमल था. मैं वहां से सीधा लाला के घर गया, चाबियां मेरे पास थीं.

‘‘उस के घर का दरवाजा खोल कर मैं अंदर गया. घर में मैं ने सेफ तलाश ली. मैं ने उसे खोला उस में मुझे सोने की चंद इंटें और 10 हजार नकद मिल गए. मैं ने वह सब कुछ समेटा और ताला बंद कर के घर आ गया.

‘‘मैं ने घर में सारा सामान सुरक्षित रख दिया. फिर योजना बना कर आप को गिरधारी की राह पर लगा दिया, ताकि मुझ पर से शक हट जाए. लेकिन लगता है, लाला की रूह को चैन नहीं मिला, उस ने मुझे पकड़वा कर ही छोड़ा.’’

मकरंदी का बयान मैं ने मुंशी से लिखवाया. इस केस में आलाएकत्ल मिलने का कोई सवाल ही नहीं था. बस मुजरिम का इकबाली बयान था, जिस पर पूरा केस टिका था. मैं ने मकरंदी को हवालात में डाला और उस के घर खबर भिजवा दी. उस की बीवी और उस का एक भाई रोते हुए मेरे पास थाने आ पहुंचे. मैं ने उस के भाई को बता दिया कि उस ने कत्ल किया है. उसे मकरंदी से मिलवा भी दिया. उस की बीवी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि उस का शौहर खून कर सकता है. अब लाश को बरामद करने का काम करना था.

फिर मैं अर्जुन के घर पहुंचा, दोनों तपाक से मिले. मैं ने उस के दूसरे दोनों भाइयों को भी बुलवा लिया. जब वे सब इकट्ठा हो गए तो मैं ने उन्हें सारी बात बता दी. उन्हें बातया कि लाला इस वक्त कहां है. वे सारे रोनेधोने लगे. सीता का तो रोरो कर बुरा हाल था. उस का ससुर जिस वक्त उस के घर आने को निकल रहा था, उसी वक्त उस का कत्ल हो गया था. मैं तीनों भाइयों और 3-4 सिपाहियों को ले कर कुएं पर पहुंचा. लाला के 2 बेटे अर्जुन और प्रकाश कुएं में नीचे उतरे. ऊपर से लटकाए गए रस्से में लाश बांध कर ऊपर लाई गई. लाश की खराब हालत देख कर अर्जुन और प्रकाश की तबीयत खराब होने लगी.

थाने आ कर मैं ने बरामदगी व तलाशी के कागजात बनाए. मकरंदी के घर से सोना व पैसा बरामद करवाया. चालान तैयार किया, फिर कागजी और अदालती कामकाज शुरू हो गया. इस केस में मकरंदी को उम्रकैद की सजा हुई, क्योंकि मौके का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था. अदालत की नजर में गिरधारी और दीनानाथ की गवाही संदेहास्पद थी.

इस पूरे केस को हल करने में छोटी बहू सीता की खास भूमिका थी, उसी के रोनेधोने पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी और बाकायदा तफ्तीश की गई थी. Hindi Story

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