Swachh Bharat: हमारे यहां स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है. इस के लिए सरकार ने टैक्स भी वसूलना शुरू कर दिया है. लेकिन क्या घरों, मोहल्लों और सड़कों की
सफाई से भारत स्वच्छ हो जाएगा? स्वच्छता तभी संभव है, जब हर नागरिक स्वच्छता के महत्व को समझे या फिर दंडात्मक तरीके से इस के महत्त्व को समझाया जाए. अगर बात सड़कों की करें तो सड़कें तो साफ हो जाएंगी, लेकिन उन पर चलने वाले वाहनों का क्या? सड़कों पर अगर आप गौर से देखें तो 20-25 प्रतिशत वाहन ही साफसुथरे नजर आएंगे. ज्यादातर वाहनों पर धूल, मिट्टी या कीचड़ लगी मिलेगी. खासकर नंबर प्लेटों पर. इस के लिए हमारे यहां भी चीन जैसी कोई शुरुआत होनी चाहिए.
चीन के नानजिंग शहर में एक नई शुरुआत हुई है, जिस का आम लोगों ने समर्थन भी किया है और स्वागत भी. वहां जो भी वाहन गंदा नजर आता है, उस के मालिक को जुरमाना भरना होता है. खासतौर पर लोक परिवहन से जुड़े वाहनों को इस नियम का सख्ती से पालन करना होता है. दरअसल, कुछ समय पहले लोगों ने लोक परिवहन से जुड़े वाहनों के फोटो खींच कर औनलाइन कर दिए और लिख दिया, ‘ये वाहन पर्यटकों के बीच देश की छवि खराब कर रहे हैं.’ इस बात को प्रशासन ने गंभीरता से लिया और इस के लिए नियम बना डाला. परिणाम यह निकला कि सड़कों पर दौड़ने वाले सभी वाहन साफसुथरे नजर आने लगे. यह नियम निजी वाहन चालकों पर भी लागू किया गया.
जिस किसी वाहन के पहियों, चेसिस या फिर बौडी पर धूल, मिट्टी अथवा कीचड़ दिखाई देती है, उस पर पहली बार में 11 सौ रुपए जुरमाना लगाया जाता है. इस का पूरा डाटा औनलाइन दर्ज किया जाता है. अगर दूसरी बार वही वाहन नियम तोड़ता मिलता है तो जुरमाने की राशि बढ़ जाती है.






