MP Crime: मीनाक्षी ने खुशहाल परिवार के व्यवसाई मनीष से प्रेम विवाह किया था. फिर ऐसा क्या हुआ कि यार के साथ मिल कर उसे पति की हत्या करानी पड़ी.

भोर की लालिमा फैलनी शुरू हुई ही थी कि उज्जैन के महाकाल मंदिर से उठते आरती के स्वर फिजा में गूंजने लगे. रोजाना की तरह घंटेघडि़यालों की गूंज के बीच इस दिन यानी 18 अगस्त, 2015 को भी उज्जैन अंगड़ाई लेने लगा. शहर की विवेकानंद कालोनी के विष्णुनगर की रहने वाली मीनाक्षी भी मंदिर से आने वाली आवाज सुन कर जाग गई. अब लेटे रहना उस के वश में नहीं था. उस ने जल्दी से बिस्तर छोड़ दिया.

आमतौर पर सुबहसुबह के इस शोर से जागने के बाद मीनाक्षी चिड़चिड़ा उठती थी लेकिन वह दिन उस के लिए कुछ खास था, तभी तो उसे पहली बार मंदिर के घंटों की आवाज मधुर लग रही थी. फ्रैश होने के लिए वह बाथरूम में घुस गई और करीब आधे घंटे बाद जब बाहर निकली तो उस का पति मनीष पहले की तरह गहरी नींद में सो रहा था. अपने गीले बालों का जूड़ा बांधते हुए उस ने पति को झकझोरते हुए उठाया. मनीष अलसाया सा उठ गया. उसे भी अपने औफिस जाना था इसलिए वह भी जाने की तैयारी में जुट गया. मीनाक्षी घर के रोजाना के काम करने लगी. काम निपटातेनिपटाते करीब साढ़े 9 बज गए.

सुबह के 10 बजने को थे. मनीष और मीनाक्षी दोनों के काम पर जाने का वक्त हो चुका था. इसलिए दोनों एक ही कमरे में तैयार हो रहे थे. इसी दौरान कंघी करते मनीष ने आईने में अपने पीछे खड़ी मीनाक्षी को कुरता पहनते देखा तो उसे शरारत सूझी. उसे छेड़ने के लिए वह पीछे मुड़ा ही था कि इस बीच मीनाक्षी का मोबाइल बज उठा. रिंगटोन सुन कर मीनाक्षी ने हवा में उठी अपनी बांहें नीचे झुका लीं. इस से मनीष अपनी सोची शरारत अधूरी रह जाने से मन मसोस कर रह गया.

‘‘हैलो, हां बस 5 मिनट में निकलने वाली हूं.’’ कहते हुए मीनाक्षी ने मोबाइल पर बात खत्म की और जल्दी से कपड़े ठीक करने के बाद पैरों में सैंडिल डालते हुए बोली, ‘‘तुम तैयार हो मनीष?’’

‘‘हां.’’ मनीष ने भी कह दिया.

‘‘तो चलो.’’ कहते हुए मीनाक्षी कमरे से बाहर आ गई. मनीष भी कमरे से निकल आया तो मीनाक्षी ने दरवाजे पर ताला लगाया और पास बैठे सासससुर को उपेक्षा की नजर से देखती हुई मनीष के साथ घर से बाहर निकल गई.

मनीष मीणा उज्जैन की विवेकानंद कालोनी में रहने वाले आर.के. मीणा का एकलौता बेटा था. उज्जैन के टावर चौराहे के पास वसावड़ा पैट्रोल पंप के पीछे की गली में वह श्रीजी नाम से एक फाइनैंस कंपनी चलाता था. जबकि मीनाक्षी बेगमगंज इलाके में स्थित अरुणोदय सर्वेश्वरी कल्याण समिति नाम के एनजीओ में काम करती थी. पतिपत्नी दोनों सुबह एक साथ स्कूटी पर घर से निकलते थे.

मनीष को टावर चौराहे पर उस के औफिस छोड़ कर मीनाक्षी अपने औफिस चली जाती थी. उस रोज भी वह हमेशा की तरह स्कूटी चला रही थी और मनीष पीछे बैठा था. हवा के झोंकों में उड़ते मीनाक्षी के खुले बाल मनीष के चेहरे से टकरा कर उस के मन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहे थे. इस से रोमांचित हो कर मनीष ने अपनी बाहें पत्नी की कमर में डाल दीं. तभी मीनाक्षी ने उसे रूखे स्वर में टोका, ‘‘हम अपने कमरे में नहीं, सड़क पर हैं.’’

‘‘जानता हूं, मैं तुम्हें भगा कर नहीं लाया, बैंडबाजे के साथ तमाम लोगों के सामने ब्याह कर लाया हूं.’’ मनीष ने शरारत से कहा.

‘‘मुझे भी पता है. लेकिन शादीशुदा होने का मतलब यह तो नहीं कि सड़क पर ही कपड़े उतार दूं.’’ मीनाक्षी ने चिढ़ कर कहा.

मीनाक्षी के इस व्यवहार पर मनीष को गुस्सा आ गया. उस ने अपने हाथ वापस खींच लिए. इस के बाद वह टावर चौराहे तक न केवल चुप रहा, बल्कि मीनाक्षी ने जब स्कूटी रोकी तो बिना उस की ओर देखे अपने औफिस की तरफ चल पड़ा तो मीनाक्षी बोली, ‘‘सुनो, नाराज हो गए क्या?’’

मनीष कुछ नहीं बोला तो मीनाक्षी ने फिर पूछा, ‘‘नाराज हो गए?’’ मनीष फिर भी चुप रहा. इस पर मीनाक्षी ने हंसते हुए कहा, ‘‘अच्छा बाबा, आज शाम को जल्दी घर आ जाऊंगी. फिर अपनी सारी नाराजगी दूर कर लेना, ओके.’’

मनीष हलके से मुसकरा दिया और वापस मुड़ कर औफिस की तरफ चल पड़ा. उस के जाते ही स्कूटी मोड़ कर मीनाक्षी भी आगे बढ़ गई. कुछ दूरी पर जा कर उस ने सड़क के किनारे स्कूटी खड़ी कर के पीछे मुड़ कर मनीष की तरफ देखा. इस के बाद मोबाइल पर कोई नंबर डायल कर के 2-3 सेकेंड बात की और फिर तेजी से स्कूटी चला कर वहां से चली गई.

इधर मनीष ने रोज की तरह अपने औफिस से पहले पड़ने वाली चाय की एक दुकान पर चाय पी. इस के बाद वह पैट्रोल पंप के पास की गली में घुस गया. उस का औफिस उसी गली में था. उस समय सुबह के करीब साढ़े 10 बजे थे. वह औफिस पहुंच पाता, उस से पहले ही किसी ने उसे गोली मार दी. गली के दुकानदार मनीष को जानते थे. जैसे ही लोगों को इस घटना का पता चला, लोग वहां जमा हो गए और किसी ने फोन द्वारा इस की सूचना थाना माधोनगर को दे दी.

किसी को गोली मारने की खबर पा कर थानाप्रभारी एम.एस. परमार कुछ ही देर में घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां पता चला कि मनीष मीणा के सिर पर नजदीक से गोली मारी गई है. थानाप्रभारी ने गंभीर रूप से घायल मनीष को सिविल अस्पताल भेज दिया और घटना की जानकारी एसपी एम.एस. वर्मा, एएसपी अमरेंद्र सिंह और एसपी (सिटी) विजय डाबर को दे दी. थानाप्रभारी को किसी तरह मनीष की पत्नी और उस के घर वालों के फोन नंबर हासिल हो गए तो उन्होंने उन्हें भी फोन कर के अस्पताल बुला लिया. थानाप्रभारी को लोगों ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुन कर जब वे दुकानों से बाहर आए तो उन्होंने एक मोटरसाइकिल पर सवार 2 युवकों को जाते देखा था.

घटनास्थल पर 7.65 एमएम कारतूस का एक खाली खोखा मिला. पुलिस को लगा कि यह हमलावरों द्वारा चलाई गई गोली का ही होगा. कुछ ही देर में एसपी, एएसपी और सीएसपी भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने भी घटना के बारे में लोगों से बात की. पुलिस द्वारा सूचना देने के कुछ देर में ही मनीष की पत्नी मीनाक्षी अस्पताल पहुंच गई. गंभीर अवस्था में घायल पति को अस्पताल में देख कर मीनाक्षी जोरजोर से रोने लगी. रोतेरोते ही वह बेहोश हो गई. उसी समय मनीष के मातापिता भी अस्पताल पहुंच गए.

मनीष की हालत इतनी गंभीर थी कि पुलिस उस का बयान तक नहीं ले सकती थी. डाक्टरों की टीम आईसीयू में उस का उपचार करने में लगी थी. बहरहाल पुलिस ने हत्या की कोशिश करने का मामला दर्ज कर घटना की जांच शुरू कर दी. उस गली में कुछ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. पुलिस ने उन कैमरों की फुटेज देखी तो उस में 2 लड़के मोटरसाइकिल पर दिखाई तो दे रहे थे, लेकिन तसवीर इतनी धुंधली थी कि न तो उन के चेहरे पहचाने जा सके और न ही मोटरसाइकिल का नंबर.

इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि हमलावर काफी शातिर रहे होंगे. उधर मनीष की न तो बेहोशी टूट रही थी और न ही पुलिस को जांच की कोई दिशा मिल रही थी. चूंकि मनीष फाइनैंस एजेंसी के अलावा विवादित प्रौपर्टी की खरीदफरोख्त भी करता था. इसलिए पुलिस को लग रहा था कि उस की हत्या के पीछे कोई प्रौपर्टी विवाद हो सकता है. इस बिंदु को ध्यान में रखते हुए पुलिस इस बात की जांच की कि वह किनकिन लोगों से ज्यादा मिलताजुलता था और उस ने कौनकौन से विवादित प्रौपर्टी का सौदा किया था.

एसपी एम.एस. वर्मा ने साइबर सेल प्रभारी इंसपेक्टर दीपिका शिंदे को मृतक और उस से जुड़े लोगों के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स की जांच करने की जिम्मेदारी सौंप दी. दीपिका शिंदे सेल के आरक्षक राहुल कुशवाहा के साथ इस काम में जुट गईं. दीपिका शिंदे ने सब से पहले मृतक मनीष के अलावा उस की पत्नी मीनाक्षी के मोबाइल नंबरों की भी काल डिटेल्स निकाल कर उस की स्कैनिंग की.

जांच में पता चला कि मनीष को टावर चौराहे पर छोड़ने के बाद मीनाक्षी ने जिस नंबर पर बात की थी, घटना के कुछ समय बाद उसी नंबर से मीनाक्षी के पास भी फोन आया था. इंसपेक्टर शिंदे ने दोनों फोन के समय के साथ मीनाक्षी के अस्पताल पहुंचने के समय का मिलान किया तो यह बात सामने आई कि पति को गोली मारे जाने की सूचना मिलने पर मीनाक्षी आश्चर्यजनक रूप से बहुत कम समय में ही अस्पताल पहुंच गई थी.

मीनाक्षी जिस एनजीओ में नौकरी करती थी, इंसपेक्टर शिंदे ने उस एनजीओ के संचालक से पूछताछ की तो पता चला कि मीनाक्षी उस रोज सुबह 10 बज कर 35 मिनट पर औफिस पहुंची थी और केवल 5 मिनट रुक कर वापस चली गई थी. इधर पुलिस जांच में कड़ी से कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही थी. घटना को हुए 3 दिन बीत चुके थे. मीनाक्षी पुलिस पर दबाव बनाने के लिए कुछ लोगों के साथ आईजी औफिस गई.

पति के हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग को ले कर उस ने आईजी औफिस का घेराव करने की कोशिश की. पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह उसे समझाया. उस के हंगामे को देखते हुए वह खुद पुलिस के शक के दायरे में आ गई. इसी के मद्देनजर आरक्षक राहुल कुशवाहा मीनाक्षी के फोन को सर्विलांस पर लगा कर उस की निगरानी करने लगे. इस से यह पता लग रहा था कि वह फोन पर किसकिस से बातें कर रही थी.

कुशवाहा मीनाक्षी के हर मूवमेंट की जानकारी इंसपेक्टर दीपिका शिंदे को दे रहे थे. इस से यह बात निकल कर सामने आ रही थी कि मनीष भले ही अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा था, लेकिन मीनाक्षी ने घटना के पहले और बाद में जिस मोबाइल नंबर पर बात की थी, उसी नंबर पर उस की अब भी लगातार लंबीलंबी बातें हो रही थीं. वह मोबाइल नंबर हनीफ का था.

जबकि घटना के बाद से 2 दिन तक मीनाक्षी अस्पताल नहीं आई थी. मनीष के मातापिता ही उस की देखभाल कर रहे थे. पुलिस ने जब उन से मीनाक्षी के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मीनाक्षी मनीष की जान बचाने के लिए घर पर रह कर 48 घंटे की अखंड पूजा कर रही है. उस का कहना था कि पूजा के बाद वह महाकाल से अपने पति को मौत के मुंह से वापस ले आएगी. लेकिन घटना के पांचवे रोज ही मनीष जिंदगी की जंग हार गया. उस की मौत के बाद पुलिस ने इस मामले में हत्या की धारा जोड़ कर जांच आगे बढ़ाई.

पुलिस को यह बात हजम नहीं हुई थी कि एक ओर तो वह अस्पताल में पति को उस के हाल पर छोड़ कर घर में थी, वहीं दूसरी ओर मोबाइल पर उस की किसी से लंबीलंबी बातें चल रहीं थी. इंसपेक्टर शिंदे ने एसपी एम.एस. वर्मा के सामने मीनाक्षी पर अपनी शंका व्यक्त की तो एसपी ने मीनाक्षी से पूछताछ करने के निर्देश दिए. एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम मीनाक्षी के घर पहुंची तो मनीष के पिता ने मीनाक्षी को थाने ले जाने पर कड़ा विरोध जताया. लेकिन पुलिस ने उन की एक न सुनी. पुलिस मीनाक्षी को साइबर सेल ले आई. जैसे ही मीनाक्षी साइबर सेल पहुंची, आरक्षक राहुल ने उसे देखते ही पहचान लिया. क्योंकि उन्होंने उसे इसी साल अप्रैल महीने में अंबरनगर कालोनी के एक सूने मकान में अपने प्रेमी हनीफ के संग रंगरलियां मनाते पकड़ा था. तब मीनाक्षी के पति को भी साइबर सेल बुलाया गया था.

जिस युवक के साथ उसे पकड़ा गया था, वह मीनाक्षी के साथ एनजीओ में काम करता था. काल डिटेल्स से पता चला कि इसी हनीफ के साथ मीनाक्षी की फोन पर लंबीलंबी बातें हो रही थीं. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस की एक टीम हनीफ की तलाश में उस के एनजीओ के औफिस पहुंची. पुलिस को देख कर हनीफ डर गया. उस ने झट से अपने मोबाइल का सिम और मेमोरी कार्ड निकाल कर अपने मुंह में छिपा लिया. लेकिन पुलिस ने उसे ऐसा करते हुए देख लिया था. पुलिस ने हनीफ को हिरासत में ले कर उस के मुंह से सिमकार्ड और डाटा कार्ड निकलवा कर बरामद कर लिया.

जांच में यह भी पता चला कि घटना वाले दिन एनजीओ के हाजिरी रजिस्टर में हनीफ के औफिस आने का समय साढ़े 11 बजे का लिखा था, जिसे ओवर राइट कर के साढ़े 10 बनाया गया था. मनीष को गोली साढ़े 10 बजे के करीब मारी गई थी. इस से पुलिस समझ गई कि वह साढ़े 10 बजे औफिस में नहीं था. लेकिन उस ने अपनी मौजूदगी औफिस में दिखाने के लिए रिकौर्ड में छेड़खानी की कोशिश की थी. पुलिस हनीफ को हिरासत में ले कर साइबर सेल आ गई. उन दोनों से पुलिस ने पूछताछ की तो उन्होंने यह बात तो स्वीकार कर ली कि उन के आपस में प्रेमसंबंध हैं, लेकिन मनीष की हत्या की बात से दोनों मुकर गए.

काल डिटेल्स के आधार पर पुलिस को पता लग गया था कि जिस वक्त मनीष को गोली मारी गई थी, उस वक्त हनीफ के फोन की लोकेशन टावर चौराहे के पास थी. जबकि मनीष उस समय अपनी उपस्थिति अपने औफिस की बता रहा था. इस के बाद पुलिस ने उन दोनों से सख्ती से पूछताछ की. फलस्वरूप दोनों ने मनीष की हत्या की बात स्वीकार करते हुए पूरी कहानी सिलसिलेवार सुना दी, जो इस प्रकार निकली. विवेकानंद कालोनी निवासी आर.के. मीणा के एकलौते बेटे मनीष की करीब 5 साल पहले मीनाक्षी से मुलाकात हुई थी. दरअसल मनीष पहले एक एनजीओ चलाता था. मीनाक्षी उसी के एनजीओ में काम करती थी. मीनाक्षी तराना की रहने वाली थी. रोजरोज तराना से औफिस आनेजाने में उसे बड़ी परेशानी होती थी. इसलिए वह उज्जैन में किराए का मकान ले कर अकेली रहने लगी. यह बात मनीष भी जानता था.

मनीष उस का बौस था, सो वह मीनाक्षी के अकेलेपन का फायदा उठा कर उस के नजदीक आने की कोशिश करने लगा. इस में वह सफल भी हो गया. दरअसल मीनाक्षी को पता था कि मनीष एक रईस मातापिता की एकलौती संतान है. उसे लगा कि मनीष से मोहब्बत कर के उसे बड़ा फायदा हो सकता है, इसलिए उस ने मनीष के लिए अपने तनमन की लगाम ढीली छोड़ दी. इस के बाद उन दोनों के बीच की दूरियां कुछ ही मुलाकातों में खत्म हो गईं. मीनाक्षी मनीष के दिल और दिमाग पर छा गई.

मनीष के घर वाले बेटे के लिए किसी शरीफ परिवार की बहू चाहते थे. लेकिन जब उन्हें बेटे के द्वारा पता चला कि वह अपने ही औफिस में काम करने वाली मीनाक्षी को चाहता है तो उस की खुशी देख कर उन्होंने अपनी रजामंदी दे दी. इस तरह 2 साल पहले मीनाक्षी अपने बौस की पत्नी बन कर उस के घर आ गई.

चूंकि दोनों का प्रेमविवाह था, इसलिए शादी के बाद का शुरुआती वक्त तो पंख लगा कर बीत गया. शादी के कुछ समय बाद मनीष ने एनजीओ बंद कर के टावर चौराहे के पास श्रीजी फाइनैंस कंपनी खोल ली. कंपनी के माध्यम से मनीष केवल लोगों को विभिन्न बैंकों से लोन ही नहीं दिलवाता था, बल्कि उस ने विवादित प्रौपर्टी की खरीद- फरोख्त का काम भी शुरू कर दिया था.

मीनाक्षी चाहती तो अपने पति की कंपनी में सहयोग कर सकती थी, लेकिन उस ने ऐसा न कर के बेगमगंज इलाके में स्थित अरुणोदय सर्वेश्वरी कल्याण समिति नामक एनजीओ में नौकरी कर ली. मनीष ने मीनाक्षी के इस फैसले का विरोध इसलिए नहीं किया क्योंकि वह अपनी फाइनैंस कंपनी के माध्यम से न केवल ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर रहा था, बल्कि विवादित प्रौपर्टियों में भी रुचि ले रहा था. इसलिए वह मीनाक्षी को कंपनी से दूर ही रखना चाहता था.

उस की योजना मीनाक्षी के लिए नया एनजीओ खुलवा कर लाखों कमाने की थी. लेकिन पति से अलग रह कर नौकरी करते हुए मीनाक्षी की मुलाकात खंदार मोहल्ले में रहने वाले हनीफ से हुई. हनीफ एकदूसरे एनजीओ में काम करता था. मुलाकात के बाद वे वाट्सएप के माध्यम से अपने विचारों का आदानप्रदान करते रहे. उन के बीच गहरी दोस्ती हो गई. दोनों दिनभर एकदूसरे के संपर्क में रहने लगे. फिर रोज ही उन की मुलाकातें होने लगीं.

मीनाक्षी बचपन से ही महत्त्वाकांक्षी थी. अपने बारे में बढ़ाचढ़ा कर बातें करना उस की आदत में शुमार था. उस ने हनीफ को भी यही बताया था कि मनीष करोड़पति है और उस की ज्यादातर प्रौपर्टी मेरे ही नाम पर है. हनीफ मीनाक्षी जैसी कितनी लड़कियों को रंगीन सपने दिखा कर उन का शारीरिक शोषण कर चुका था. इसलिए उसे लगा कि मीनाक्षी के हाथ आने पर वह आसानी से करोड़पति बन सकता है. उस ने मीनाक्षी के नजदीक आने की कोशिश करनी शुरू कर दी.

2 साल पहले मनीष के साथ मोहब्बत की कमसें खाने और उस से प्रेमविवाह करने वाली मीनाक्षी ने भी अपनी तरफ बढ़ते हनीफ के कदमों को रोकने की कोशिश नहीं की. इस बीच मीनाक्षी और हनीफ के बीच शारीरिक रिश्ते भी कायम हो गए. इस के बाद तो मीनाक्षी को मनीष में 50 कमियां और हनीफ में हजार अच्छाइयां नजर आने लगीं.

हनीफ दूसरे एनजीओ में काम करता था, इसलिए दोनों का आसानी से मिलना संभव नहीं हो पाता था. इसलिए मीनाक्षी ने उस की नौकरी अपने ही एनजीओ में लगवा दी. इस से दोनों का मिलना काफी आसान हो गया. काम के नाम पर हनीफ और मीनाक्षी औफिस से बाहर निकल जाते. इस के बाद हनीफ मीनाक्षी को ले कर अपने एक दोस्त के कमरे पर चला जाता. वहीं पर दोनों अपनी हसरतें पूरी करते. हसरतें पूरी कर के वह औफिस आ जाते थे.

इस तरह धीरेधीरे मीनाक्षी मनीष से दूर हो कर हनीफ के पास होती गई. लेकिन इन का खेल ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रह सका. हुआ यह कि हनीफ अकसर मीनाक्षी को ले कर अंबरनगर स्थित अपने एक दोस्त के कमरे पर जाता था. लेकिन रोजरोज का यह खेल मोहल्ले वालों की नजरों में आ गया. अप्रैल, 2015 में जब एक दिन मीनाक्षी और हनीफ उस दोस्त के यहां गए तो मोहल्ले वालों ने दोनों को पकड़ कर पुलिस को खबर कर दी. पुलिस आने पर विवाद की स्थिति बन गई. खबर मिलने पर मीनाक्षी का पति भी वहां आ गया. तब मीनाक्षी का कहना था कि वह अपने दोस्त के घर खाना खाने आई थी. बहरहाल पुलिस ने उन्हें हिदायत दे कर छोड़ दिया.

मीनाक्षी ने मनीष को लाख सफाई देने की कोशिश की, लेकिन मनीष समझ गया था कि मीनाक्षी जैसी लड़की केवल खाना खाने के लिए तो ऐसे गंदे माहौल में नहीं जा सकती. वह कभी अंडे को हाथ तक नहीं लगाती थी. वह हनीफ का मन रखने के लिए मांसाहार कैसे कर सकती है. घर पहुंच कर मनीष ने गुस्से में मीनाक्षी की पिटाई कर दी. इतना ही नहीं, उस ने मीनाक्षी को चेतावनी भी दे दी कि उस के 1-2 दोस्त जेल में बंद हैं, जिन के बाहर आते ही वह हनीफ को ठिकाने लगवा देगा. मीनाक्षी पति की आदत और पहुंच को जानती थी. इसलिए उसे विश्वास था कि वह हनीफ को जरूर मरवा देगा. इसलिए वह फिर हनीफ से मिली और उस ने उसे बता दिया कि मनीष उस की हत्या करवा सकता है.

हनीफ डर गया. उस के सोचा कि इस से पहले मनीष उस के खिलाफ कोई कदम उठाए, क्यों न मनीष को ही ठिकाने लगा दिया जाए. उस ने मीनाक्षी को अपनी योजना बताई तो वह राजी हो गई. क्योंकि वह जानती थी कि एक बार मनीष की नजरों में गिरने के बाद अब वह उस घर में कभी अपनी पुरानी हैसियत नहीं पा सकती. तब हनीफ ने मीनाक्षी को सलाह दी कि वह मनीष के साथ गहरे प्यार का नाटक कर उस का मकान और जायजाद सब अपने नाम करवा ले, ताकि मनीष की हत्या के बाद उस के मातापिता को घर से निकाल कर दोनों आपस में निकाह कर आराम से रह सकें.

मीनाक्षी को भी प्रेमी की बात पसंद आ गई. इसलिए घटना से कुछ दिनों पहले जब मनीष ने 35 लाख की एक जमीन खरीदी तो मीनाक्षी ने जिद कर के उस की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली. इस के बाद हनीफ और मीनाक्षी ने मिल कर मनीष की हत्या की फूलप्रूफ योजना बनाई. इस के लिए हनीफ ने 2 महीने तक मनीष के औफिस के चारों तरफ रैकी कर गली में गोली मारने का फैसला किया. मीनाक्षी और मनीष जानते थे कि हत्या के बाद मीनाक्षी की काल डिटेल्स भी निकाली जाएगी, जिस के चलते हनीफ और मीनाक्षी से पुलिस पूछताछ कर सकती है. इसलिए पुलिस के सभी संभावित प्रश्नों के जवाब भी उन्होंने पहले से ही तैयार कर लिए थे.

यह सब करने के बाद हनीफ ने अपनी मौसी के लड़के रिजवान को साथ देने के लिए तैयार किया. दोनों ने कई बार मनीष की गली से मोटरसाइकिल ले कर तेजी से निकलने की प्रैक्टिस की. अंतत: परफेक्ट हो जाने के बाद 18 अगस्त, 2015 को हनीफ ने मनीष की हत्या कर दी. इतनी फूलप्रूफ योजना के तहत हत्या करने के बावजूद भी आखिर वे पुलिस के चंगुल में फंस ही गए. काली करतूतों की बुनियाद पर रंगीन सपने सजाने वाले हनीफ और मीनाक्षी से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर के सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

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