Hindi Crime Stories: प्यार तो प्यार से ही होता है. किसी से जबरदस्ती प्यार नहीं किया जा सकता. अगर एकतरफा प्यार करने वाले गुरमीत सिंह की समझ में यह बात आई होती तो शायद आज वह अमनदीप की हत्या के आरोप में जेल में नहीं होता.
अमनदीप एक हाथ में दूध का पैकेट थामे सहेलियों से बातें करती हुई मोहाली के फेज-5 की मार्केट की पिछली गली से निकल कर बगल की कोठी नंबर 1869 की ओर बढ़ी. उसी में वह पेईंगगैस्ट के रूप में रहती थी. वह मार्केट से बाहर आई थी कि अचानक एक लड़के ने उस के नजदीक आ कर उस का हाथ पकड़ा और सहेलियों से अलग खींच ले गया. एक तरह से यह निहायत बेहूदगी थी, इसलिए सहेलियों ने शोर मचाना चाहा, लेकिन अमनदीप ने इशारे से उन्हें मना कर दिया. शायद लड़का उस का परिचित और घुलामिला था, वरना किस की मजाल थी कि इस तरह पैदल आ कर सरेराह चलती लड़की को पकड़ कर खींच ले जाए.
यही सोच कर अमनदीप की सहेलियां चुप हो गईं और ध्यान से उन्हें देखने लगीं कि क्या हो रहा है? उन्होंने देखा कि एक कोने में ले जा कर लड़के ने अमनदीप का हाथ छोड़ दिया और उस से बातें करने लगा. उन के हावभाव से यही लग रहा था कि वे प्यार से बातें कर रहे हैं. लड़का दोनों हाथ जोड़ कर अमनदीप से कोई गुजारिश कर रहा है. लग रहा था, वह उस से कोई बात मनवाने की कोशिश कर रहा है. इस बीच उस ने एकदो बार उस के पैर छूने की भी कोशिश की थी.
दोनों के बीच क्या बातें हो रही हैं, इस का अंदाजा अमनदीप की सहेलियों को बिलकुल नहीं हो रहा था. अलबत्ता अमनदीप के हावभाव से यह अनुमान जरूर लग रहा था कि लड़का जो भी कह रहा है, वह उसे मना करते हुए उसे समझाने की कोशिश कर रही है. एकाध बार वह नाराज होती भी लगी थी. अचानक पता नहीं क्या हुआ कि धांयधांय कर के एकसाथ कई गोलियां चलीं और अमनदीप जोर से चीख कर लहरा कर जमीन पर गिर पड़ी.
अमनदीप पर गोलियां उसी लड़के ने चलाई थीं, जो उसे पकड़ कर ले गया था और बातें कर रहा था. गोलियां चला कर हाथ में रिवौल्वर थामे वह पैदल ही भागने लगा तो पैरों से अपंग एक औरत ने लपक कर उसे पकड़ना चाहा. लेकिन लड़के ने उस का गला पकड़ कर गिरा दिया और खुद रिवौल्वर लहराते हुए चला गया. हाथ में रिवौल्वर होने की वजह से किसी भी आदमी की उसे पकड़ने की हिम्मत नहीं हुई. अमनदीप के गिरते ही उस की सहेलियां चीखते ही उस की ओर दौड़ीं. खून से लथपथ पड़ी अमनदीप को उठा कर उन्होंने किसी की गाड़ी से फेज-4 के चीमा अस्पताल पहुंचाया. डाक्टरों ने अमनदीप को मृत घोषित कर इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी.
थोड़ी ही देर में थाना फेज-1 की पुलिस अस्पताल पहुंच गई और लाश को कब्जे में ले लिया. उस के बाद सारी औपचारिक कानूनी काररवाई निपटा कर लाश को फेज-6 के सिविल अस्पताल ले जा कर मौर्चरी में रखवा दिया. घटना को वायरलैस द्वारा फ्लैश कर दिया गया था. इसलिए मोहाली के एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर, एसपी सिटी-1 आशीष कपूर, डीएसपी सिटी-1 आलम विजय सिंह और थाना फेज-1 के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सुखविंदर सिंह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. यह घटना 12 जनवरी, 2015 की रात के करीब 8 बजे की थी.
घटनास्थल पर की गई पूछताछ में पुलिस को कुछ खास जानकारी नहीं मिली. वहां मौजूद लोग तमाशबीन ही साबित हुए थे. मृतका की सहेलियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए पुलिस को एक अहम बात यह बताई कि हमलावर सफेद रंग की वरना कार में आया था.
निरीक्षण में घटनास्थल पर उसी तरह की एक वरना कार खड़ी भी दिखाई दे गई, जिस का नंबर था पीबी 05 एक्स 2114. वह कार लौक नहीं थी, लेकिन उस की चाबी भी इग्नीशन में नहीं लगी थी. कार की सीटों पर अन्य गाडि़यों की 2 नंबर प्लेट्स, लाल रंग की एक चुनरी और मिठाई का एक डिब्बा रखा था. उस कार के पास एक अन्य वरना कार खड़ी थी, जिस का नंबर था पी.बी. 05 एफ 0069. पुलिस ने क्रेन मंगवाई और दोनों कारें उठवा कर थाने ले गई.
अमनदीप की सहेलियों में उस की चचेरी बहन नवनीत कौर भी थी. उसी से तहरीर ले कर पुलिस ने अमनदीप की हत्या का मुकदमा थाना फेज-1 में दर्ज कर लिया. इस के बाद हमलावर का हुलिया फ्लैश कर के मोहाली से बाहर जाने वाली सभी सड़कों पर नाकाबंदी कर दी गई. संदेह के आधार पर कुछ लड़कों को थाने ला कर पूछताछ भी शुरू कर दी गई. इन लड़कों में एक ऐसा लड़का पुलिस के हाथ लग गया, जो न केवल हमलावर को जानता था, बल्कि फोन द्वारा वहां हो रही काररवाई की जानकारी भी उसे दे रहा था.
पकड़े जाने के बाद पहले तो वह कुछ भी जानने से मना करता रहा, लेकिन थाने ला कर जब उस के साथ थोड़ी सख्ती की गई तो उस ने सारा रहस्य उगल दिया. उस लड़के ने जो बताया था, उस के अनुसार, हमलावर का नाम गुरमीत सिंह था. वह फिरोजपुर के थाना सदर के गांव रज्जोवाला के रहने वाले मोड़ा सिंह का बेटा था. वह मृतका अमनदीप से एकतरफा प्यार करता था और उस से शादी करने के सपने देखता था. इसलिए वह उस के पीछे हाथ धो कर पड़ा था.
जबकि अमनदीप कतई तैयार नहीं थी. कुछ दिनों पहले अमनदीप मोहाली आ कर रहने लगी तो गुरमीत उस के पीछे यहां भी पहुंच गया. यहां वह यह तय कर के आया था कि अमनदीप से वह साफसाफ बात करेगा. वह मान गई तो ठीक, वरना मामले को हमेशा के लिए खत्म कर देगा. लड़के का कहना था कि गुरमीत मार्केट में अचानक उसे मिल गया था. उस ने उसे सब कुछ बता कर कहा था कि अगर बात बढ़ जाती है तो वह उस की मदद के लिए आ जाएगा. इस के बाद गुरमीत अमनदीप को उस की सहेलियों से अलग ले जा कर बातचीत करने लगा था. उस ने शायद उस की बात मानने से मना कर दिया था, इसलिए गुरमीत उसे गोली मार कर भाग गया था. इस के बाद उस ने फोन कर के वहां की स्थिति के बारे में पूछा था. इस के बाद उस का फोन बंद हो गया तो अभी तक बंद है.
पुलिस को उस से गुरमीत का मोबाइल नंबर मिल गया था. अमनदीप की चचेरी बहन से उस के घर का पता और फोन नंबर मिल गया था. वह फिरोजपुर के गांव ढोलेवाल की रहने वाली थी. उस के पिता कुलबीर सिंह गांव के नंबरदार थे और फिरोजपुर से बीजेपी के पिछली जाति प्रकोष्ठ के प्रधान थे. अमनदीप का एक बड़ा भाई था मनप्रीत सिंह, जो शादीशुदा था. अमनदीप घर की एकलौती बेटी थी. वह पढ़नेलिखने में काफी होशियार थी. फिरोजपुर के देवसमाज कालेज से बीसीए एवं बीएड करने के बाद वह देवराज ग्रुप औफ कालेजेज से एमसीए कर रही थी.
यह उस का लास्ट सैमेस्टर चल रहा था, इसीलिए वह मोहाली इंडस्ट्रियल एरिया के एक इंस्टीट्यूट में पीएचपी प्रोग्रैमिंग कोर्स के आई थी. यह ट्रेनिंग पूरी होते ही घर वाले उस की शादी कर देना चाहते थे. लेकिन इस से पहले अमनदीप आईटी इंडस्ट्री में अच्छी नौकरी हासिल करना चाहती थी. कुलबीर सिंह को बेटी की मौत का समाचार मिला तो घर में कोहराम मच गया. परिवार के कुछ लोगों को ले कर वह रात में ही मोहाली के लिए रवाना हो गए.
अगले दिन मोहाली के सिविल अस्पताल में अमनदीप के शव का पोस्टमार्टम डा. कुलदीप सिंह और डा. विनीता नागपाल की टीम द्वारा किया गया. उसे 3 गोलियां लगी थीं. एक गोली दाहिने कंधे को चीरते हुए गाल को पार कर के दूसरी ओर जबड़े में फंस गई थी. दूसरी गोली उस के दिल को छेदते हुए फूड पाइप के पास पहुंच गई थी और तीसरी उस की बगल में लगी थी. तीनों ही गोलियां मृतका के लिए घातक सिद्ध हुई थीं. सभी गोलियां उस के शरीर में फंसी रह गई थीं. एक खूबसूरत लड़की को गोलियों से इस तरह छलनी देख कर पोस्टमार्टम करते समय एक ट्रेनी नर्स बेहोश हो गई थी.
खैर पोस्टमार्टम के बाद लाश घर वालों को सौंप दी गई थी. इस के बाद घर वाले लाश ले कर अपने गांव चले गए थे. लाश पहुंचते ही गांव का माहौल गमगीन हो गया था. मातापिता और भाई के अलावा अन्य रिश्तेदारों का भी रोरो कर बुरा हाल था. पूरा गांव लड़की के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पउ़ा था. शाम को गांव के श्मशान घाट पर अमनदीप का अंतिम संस्कार करने के बाद गुरुद्वारा में अरदास की गई. अमनदीप पूरे गांव की लाडली बेटी थी. पढ़ाई में होशियार होने की वजह से सभी को उस पर फख्र था कि एक दिन वह पूरे गांव का नाम चमकाएगी.
शायद इसीलिए उस की इस दर्दनाक मौत से गांव का हर चेहरा उदास था. हर गांववासी को उस की इस मौत का गहरा दुख था. हत्यारे की पहचान हो गई थी. अब सिर्फ उसे गिरफ्तार करना बाकी था. मगर वह भूमिगत हो गया था. उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने अपने मुखबिरों को सतर्क करने के साथ खुद भी उस की तलाश में जगहजगह छापामारी शुरू कर दी. इस के अलावा उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए उस के घर वालों की धरपकड़ शुरू कर दी. इस काररवाई से पुलिस को यह जानकारी मिली कि हत्या में फिरोजपुर के ही गांव मोहेवाल के रहने वाले बलदेव सिंह का बेटा जगरूप भी शामिल था. इस के बाद पुलिस उस की भी तलाश में लग गई.
गुरमीत के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने सोशल साइट फेसबुक पर भी उस का एकाउंट चैक किया. इस से पता चला कि गुरमीत सिंह छात्र राजनीति में भी सक्रिय था. उस का संबंध सोपू (स्टूडेंट और्गेनाइजेशन औफ पंजाब यूनिवर्सिटी) पार्टी से था. अपने फेसबुक एकाउंट पर उस ने सोपू पार्टी से जुड़े तमाम फोटो शेयर कर रखे थे. पुलिस गुरमीत के साथसाथ जगरूप की भी तलाश कर रही थी. छापेमारी के अलावा पुलिस ने दोनों के बारे में फोटो सहित अखबारों में छपवा कर लोगों से अपील की कि अगर इन के बारे में कुछ पता चलता है तो पुलिस वालों को सूचना दें. लेकिन पुलिस को इस का कोई फायदा नहीं मिला. इस के बाद पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी करा दिया, जिस से अपराधी देश से बाहर न जा सके.
इस बीच पुलिस को इस बात की जानकारी मिल गई थी कि फिरोजपुर के कस्बा ममदोर के रहने वाले गुरमीत की बूआ के बेटे अंगरेज सिंह ने 32 बोर का अपना लाइसैंसी रिवौल्वर उसे दिया था. जगरूप के बारे में ताजी जानकारी यह मिली कि गुरमीत को उस ने चंडीगढ़ के सेक्टर-49 की अपनी पीजी एकौमोडेशन में अपने साथ ठहराया था. इस के बाद गुरमीत रिवौल्वर ले कर अमनदीप से मिलने गया तो वह भी अपनी गाड़ी से उस के पीछेपीछे गया था. लेकिन गोली चलने के बाद लोग जमा हो गए तो उन्हें गाडि़यां निकालना मुश्किल हो गया था. तब गुरमीत के पीछेपीछे वह भी पैदल ही भाग निकला था.
यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने अंगरेज सिंह को भी अमनदीप मर्डर केस का अभियुक्त बना दिया था. हत्या हुए 72 घंटे बीत गए थे, जबकि कोई भी आरोपी हाथ नहीं लगा था. उस के बाद पुलिस ने सभी बैंक खाते सीज करवा दिए थे. अभी तक पुलिस चंडीगढ़, मोहाली के अलावा पंजाब के अन्य शहरों, कस्बों व गांवों में ही छापामारी कर रही थी, लेकिन अब अभियुक्तों की तलाश में दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी अनेक जगहों पर छापे मारे गए.
आखिर 16 जनवरी, 2015 को गुरमीत ने फिरोजपुर के एक राजनेता के साथ मोहाली आ कर थाना फेज-1 के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सुखविंदर सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. वारदात में इस्तेमाल रिवौल्वर भी उस ने पुलिस के हवाले कर दी थी. पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर के 5 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले कर पूछताछ की तो उस के एकतरफा प्यार की बलि चढ़ी अमनदीप कौर की निर्मम हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह थी :
फिरोजपुर के गांव रज्जोवाला और ढोलेवाल एकदम आमनेसामने पड़ते हैं. रज्जोवाला में रहता था गुरमीत सिंह का परिवार. उस के परिवार में एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई था. बहन की शादी हो चुकी थी, जबकि भाई पढ़ रहा था. बरसों पहले उस के पिता मोड़ा सिंह अपने साथ एक अन्य औरत को ले आए थे, जिस से पूरे गांव में बवाल हो गया था. इस के बाद शर्मिंदा हो कर मोड़ा सिंह और उन के साथ आई महिला ने आत्महत्या कर ली थी.
नरसरी क्लास से ले कर ग्यारहवीं तक गुरमीत और अमनदीप ढोलेवाल के सरकारी स्कूल में एकसाथ पढ़े थे. बारहवीं गुरमीत ने प्राइवेट की थी. इसी तरह बीए पार्ट-वन करने के बाद वह इधरउधर घूमते हुए राजनीति में जाने की कोशिश में लग गया था. अमनदीप को वह बचपन ही से पसंद करता आया था, इसीलिए उस से शादी के सपने देखा करता था.
अमनदीप पढ़ाई में होशियार थी, शायद इसीलिए अपने भविष्य के प्रति गंभीर थी. एक असफल व्यक्ति के रूप में वह गुरमीत को ज्यादा पसंद नहीं करती थी. जबकि गुरमीत ने उसे अपने दिलोदिमाग में पूरी तरह बसा लिया था. अमनदीप सफलता की सीढ़ी फलांगती हुई आखिर अपनी मंजिल के एकदम करीब पहुंच गई थी. अपने घर वालों की मरजी से उस ने शादी के लिए हामी भी भर दी थी.
इसी बात ने गुरमीत को परेशान कर दिया था. वह तुरंत अमनदीप से मिला और उसे समझाया, ‘‘हमारा जन्मजन्मांतर का साथ है अमन, बचपन से मैं ने तुम्हारे सिवाय किसी और के बारे में सोचा तक नहीं, इसलिए प्लीज मेरा दिल मत तोड़ो.’’
‘‘देखो गुरमीत, ऐसा सोच कर तुम खुद को धोखा देते रहे हो. हम दोनों पड़ोसी गांव से हैं, इसलिए भाईबहन जैसा रिश्ता है हमारा. फिर हमारी जाति भी अलग है. फालतू की बातें सोच कर क्यों अपना दिमाग खराब करते रहते हो. जिंदगी को सीरियसली लेना सीखो. मैं तुम्हारी भावनाओं की कदर करती हूं, मगर इस का मतलब यह नहीं कि मैं तुम से शादी कर लूं. ऐसा बिलकुल नहीं हो सकता.’’ अमनदीप ने भी उसे अपने तरीके से समझाने का प्रयास किया था.
गुरमीत पर उस की किसी बात का कोई असर नहीं पड़ा. वह लगातार उस का पीछा करते हुए उसे शादी के लिए राजी करने की कोशिश करता रहा. आखिर अमनदीप परेशान हो गई तो उस ने मोहाली में रहने का फैसला किया. वहां उस की चचेरी बहन अपनी सहेलियों के साथ पहले से ही फेज-5 के एक पीजी में रह रही थी. अमनदीप भी आ कर उन्हीं के साथ रहने लगी. गुरमीत को उस ने इस बारे में कुछ नहीं बताया, लेकिन उस ने पता कर ही लिया.
पता चलने पर वह काफी नाराज हुआ. अंगरेज सिंह उस की बूआ का बेटा था. उस से उस की निभती भी खूब थी. उस के पास जा कर किसी शादी में जाने का बहाना बनाते हुए उस ने उस से उस का लाइसैंसी रिवौल्वर ले लिया. इस के बाद मिठाई की दुकान से एक किलोग्राम मिठाई और किसी दुकान से लाल रंग का दुपट्टा खरीद कर वह कार से मोहाली पहुंच गया. यह वरना कार उस के मामा की थी, जिस में उस ने अन्य नंबरों की 2 प्लेट्स भी तैयार करवा कर रख ली थीं.
गुरमीत ने तय कर लिया था कि इस बार अमनदीप से वह आरपार की बात करेगा. वह मान गई तो दुपट्टा और मिठाई का डिब्बा थमाते हुए गुरुद्वारा ले जा कर उस से शादी कर लेगा. इस के बाद गाड़ी की नंबर प्लेट बदल कर वह उसे ले कर घुमाने चला जाएगा. और अगर वह नहीं मानी तो उसे सदा के लिए मौत की नींद सुला देगा. मोहाली पहुंच कर वह बगल ही में पड़ने वाले चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित अपने परिचित युवक जगरूप सिंह की पीजी एकौमोडेशन पर चला गया. जगरूप को उस के खतरनाक इरादों के बारे में बिलकुल पता नहीं था, हालांकि अमनदीप से प्यार करने और उस से शादी करने की कोशिश वाली बात उस ने उसे बता दी थी. जगरूप ने उसे समझाया भी था कि वह इस तरह किसी लड़की को जबरन शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकता.
गुरमीत ने जगरूप की एक नहीं सुनी और वहीं रहते हुए अमनदीप के बारे में पता लगाने लगा. 12 जनवरी को किसी ने उसे फोन पर बताया कि अमनदीप अपनी सहेलियों के साथ मोहाली के फेज-5 की मार्केट में है. वह तुरंत मोहाली की ओर चल पड़ा. उसे समझाने के लिए जगरूप भी अपनी गाड़ी से उस के पीछेपीछे चल पड़ा. लेकिन उसे पहुंचने में देर हो गई. उस के आने से पहले ही गुरमीत ने अमनदीप से बातचीत कर के अपनी जैकेट से रिवौल्वर निकाल कर उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं. इस के बाद वहां भगदड़ मच गई थी.
गुरमीत के अनुसार, अमनदीप जब अपनी सहेलियों के साथ फेज-5 मार्केट के पीछे की ओर आई तो वह उस का हाथ पकड़ कर एक किनारे ले गया था और दयनीय भाव से गिड़गिड़ा कर बोला था, ‘‘अमनदीप, आज मैं शायद तुम से आखिरी बार मिलने आया हूं. तुम सिर्फ इतना बता दो कि मुझ से शादी करोगी या नहीं?’’
‘‘गुरमीत, तुम समझने की कोशिश…’’
‘‘मुझे न कुछ सुनना है और न समझना. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं, पैर पड़ता हूं, मना मत करो. मेरा दिल बैठा जा रहा है, पता नहीं अभी मुझे क्या हो जाए.’’ कहते हुए गुरमीत ने अपने दोनों हाथ जोड़े और नीचे झुक कर अमनदीप के पैर छूने की भी कोशिश की.
अपनी बात मनवाने की वह लगातार कोशिश करता रहा. आखिर मैं अमनदीप ने कहा, ‘‘देखो गुरमीत, मेरे घर वालों ने मेरे लिए लड़का देख लिया है और मैं उन्हीं की मरजी से शादी करूंगी. तुम बेकार में मुझे परेशान मत करो.’’
‘‘ठीक है, लेकिन मैं भी निश्चय कर के आया हूं कि अगर तुम मेरी नहीं हो सकती तो मैं तुम्हें किसी और की भी नहीं होने दूंगा.’’ कहने के साथ ही उस ने जैकेट से रिवौल्वर निकाली और तड़ातड़ 3 गोलियां अमनदीप के जिस्म में उतार दीं.
गुरमीत के अनुसार, अमनदीप की हत्या करने के बाद वह खुद को भी गोली मार कर अपनी इहलीला खत्म कर लेना चाहता था. लेकिन हड़बड़ाहट में उस ने रिवौल्वर में भरी सभी की सभी गोलियां चला दी थीं. 19 जनवरी को गुरमीत की बूआ का बेटा 26 वर्षीय अंगरेज सिंह गिरफ्तार हुआ तो उस ने बताया कि उस के रिवौल्वर में कुल 5 गोलियां थीं. लेकिन निरीक्षण में मौके पर पुलिस को 2 अन्य गोलियों के निशान अथवा खोखे नहीं मिले थे. अंगरेज को भी 2 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले कर पूछताछ की गई, लेकिन उस ने कोई नई बात नहीं बताई. 21 जनवरी को गुरमीत और अंगरेज का पुलिस रिमांड खत्म होने पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था.
23 जनवरी को अन्य वांछित अभियुक्त जगरूप सिंह ने भी अकेले ही थाने आ कर आत्मसमर्पण कर दिया था. पूछताछ में वह बेकसूर पाया गया, इसलिए अगले दिन यह कह कर उसे रिहा कर दिया गया कि इस वारदात में उस का कोई हाथ नहीं है. मामले की जांच करने वाले इंसपेक्टर सुखविंदर सिंह ने समय से दोनों दोषियों गुरमीत सिंह और अंगरेज सिंह के खिलाफ चालान तैयार कर के इलाका मजिस्ट्रेट के यहां पेश कर दिया, जहां से सैशन कमिट हो कर यह केस मोहाली के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सैशन जज दिलबाग सिंह जौहल की कोर्ट में चला. माननीय जज महोदय ने इस केस का फैसला महज 4 महीने में सुना दिया.
फैसला कुछ इस तरह से था. गुरमीत सिंह उर्फ गोरा को अमनदीप की हत्या के आरोप में आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपए जुरमाना तथा आर्म्स ऐक्ट 27(1) (बिना लाइसेंस का रिवौल्वर इस्तेमाल करने के लिए) 5 साल की कैद व 5 हजार रुपए जुरमाना की सजा सुनाई. अंगरेज सिंह को आर्म्स एक्ट 27बी के तहत 3 साल की कैद और 5 हजार रुपए जुरमाना की सजा सुनाई. जुरमाना की रकम से 5 हजार रुपए सरकारी खजाने में जमा करने के बाद शेष एक लाख 5 हजार रुपए की रकम अमनदीप के मातापिता को देने का आदेश दिया. Hindi Crime Stories
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






