Love Story: अगर कोई लड़की किसी लड़के से दोस्ती कर ले और दोनों की दोस्ती गहरा जाए तो इस का मतलब यह नहीं है कि वह लड़के को प्यार करने लगी है. ज्यादातर लड़के ऐसी गलतफहमी पाल लेते हैं. सिद्धार्थ के साथ भी ऐसा ही हुआ, जिस का अंजाम डारिया को तो भुगतना ही पड़ा, वह भी जेल चला गया.
दुनिया में हर आदमी ख्वाब देखता है. कुछ सोते में तो कुछ जागते में. लेकिन यह भी सच है कि किसी के ख्वाब पूरे हो जाते हैं तो किसी के टूट कर किरचाकिरचा बिखर जाते हैं. कहने का अभिप्राय यह है कि ख्वाबों के मामले में सब खुशनसीब नहीं होते. डारिया यूरिएवा प्रोकीना के साथ भी कुछ ऐसा ही था. किशोर होते ही डारिया का झुकाव संगीत की ओर हो गया था. उस ने सुना था कि संगीत के मामले में भारत अग्रणी देश है, जहां बड़ेबड़े संगीतज्ञ रहते हैं. संगीतज्ञों के घराने हैं. इसलिए उस ने मन बना लिया था कि समय आने पर वह भारत जा कर संगीत की शिक्षा लेगी.
यही वजह थी कि 22 वर्ष की होते ही वह मन में संगीत सीखने की इच्छा लिए भारत आ गई. डारिया ने भारत के बारे में जैसा सुना था, ठीक वैसा ही पाया. उस ने यहां की ढेरों यादों को अपने दिलोदिमाग में संजो कर रख लिया. इन यादों को वह कभी खोना नहीं चाहती थी. 6 महीने के दौरान उस ने भारत के कई मनमोहक पर्यटकस्थल घूम लिए थे. इस के साथ ही उस ने संगीत के सुरों को अपनी नाजुक उंगलियों और मीठी आवाज से साधने की कला भी सीख ली थी.
डारिया मूलरूप से बुलगारिया के प्रमुख शहर वारना की रहने वाली थी. समुद्र किनारे बसे इस खूबसूरत शहर के समुद्री बीच पर देशीविदेशी पर्यटकों का खूब आवागमन रहता है. डारिया यूरी प्रोकीना की बेटी थी. यूरी के परिवार में पत्नी एंटोनिना प्रोकीना के अलावा 2 ही बेटियां थीं, जिन में बड़ी थी जेन प्रोकीना और छोटी डारिया. डारिया का परिवार साधन संपन्न था. उस ने रूस की राजधानी मास्को स्थित मास्को यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की थी. पढ़ाई के दौरान ही उस ने रूस की नागरिकता भी ले ली थी. बाद में इसी यूनिवर्सिटी में वह रिसर्च स्कौलर हो गई.
इस के लिए उसे 60 हजार यूरो मिलते थे. मास्को में वह सावेटेक्सिया क्षेत्र स्थित स्ट्रीट नंबर 21 के फ्लैट नंबर 22 में रह रही थी. उस का आवागमन दोनों देशों के बीच बना रहता था. इसी दौरान वह भारत आई थी. दरअसल, डारिया ने भारत के बारे में काफी कुछ सुन रखा था. इसी से उसे यहां के प्रति लगाव पैदा हुआ. मई, 2015 में उस का यह ख्वाब साकार हुआ. भारत में कई जगहों का भ्रमण करने के बाद उस ने अपना ठिकाना उत्तर प्रदेश की पर्यटक नगरी वाराणसी को बनाया. डारिया की खूबसूरत यादों की एक कड़ी सिद्धार्थ श्रीवास्तव भी था.
सिद्धार्थ का परिवार बनारस के लंका थानाक्षेत्र की नंदनगर कालोनी के मकान नंबर 37 में रहता था. साधनसंपन्न श्रीवास्तव परिवार की रीढ़ पूर्व एक्साइज कमिश्नर हृदयनाथ श्रीवास्तव थे. सिद्धार्थ उन का पोता था. सिद्धार्थ के पिता प्रदीप श्रीवास्तव का दूध का कारोबार था. उन के परिवार में पत्नी वीना के अलावा 2 बेटे थे, जिन में सिद्धार्थ छोटा था. सिद्धार्थ बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में बैचलर औफ म्यूजिक (बीम्यूज) तृतीय वर्ष का छात्र था. उस से मुलाकात के बाद डारिया उस के घर पर ही पेइंगगैस्ट के रूप में रहने लगी थी. भारत भ्रमण का उस का 6 महीने का सफर यादगार रहा. अब वह भारत की अपनी यादों के साथ 18 नवंबर को अपने देश वापस जाने की तैयारी कर रही थी. उस ने अपनी एयर टिकट भी बुक करा ली थी.
यादें खूबसूरत ही रहें तो बेहतर हैं. तकलीफ तब होती है, जब या तो वे कड़वाहट में तब्दील हो जाएं या फिर कोई गहरा जख्म देने वाला तूफान उन से टकरा जाए. डारिया को भी अचानक एक ऐसे भयानक तूफान से रूबरू होना पड़ा, जिस की उस ने कभी कल्पना भी नहीं की थी. 2 नवंबर, 2015 की रात डारिया घर की छत पर बिछे तख्त पर मच्छरदानी लगा कर सो रही थी. रात बीत चुकी थी और भोर होने वाली थी. तड़के तकरीबन 4 बजे का वक्त था, जब डारिया की तेज चीखें सुन कर प्रदीप श्रीवास्तव की नींद खुल गई.
प्रदीप, उन की पत्नी वीना व बेटा सचिन दौड़ कर ऊपर पहुंचे तो डारिया रोतेरोते चिल्ला रही थी, ‘‘हैल्प…हैल्प…प्लीज हैल्प मी.’’ उसे देख कर सभी के पैरों तले से जमीन खिसक गई. डारिया के चेहरे, शरीर की खाल और कपड़ों से गंधयुक्त धुंआ निकल रहा था. श्रीवास्तव परिवार समझ गया कि उस पर किसी ने तीक्ष्ण तेजाब से हमला किया है. एकाएक किसी को कुछ सुझाई नहीं दिया तो वह डारिया को उठा कर नीचे बाथरूम में लाए और उस के जले हिस्से को पानी से धोया. इस बीच वह अचेत हो गई थी. आननफानन में वह उसे ले कर बीएचयू अस्पताल पहुंचे और प्राईवेट वार्ड में भर्ती करा दिया.
इस की सूचना उन्होंने पुलिस को दे दी थी. घटना जितनी गंभीर थी, उतनी ही दिल दहला देने वाली भी. मामला विदेशी युवती पर तेजाब डालने का था. सूचना पा कर लंका॒ थानाप्रभारी संजीव कुमार मिश्र मय पुलिस बल के मौके पर पहुंच गए. उन्होंने अपने अधिकारियों को इस घटना से अवगत कराया तो एसएसपी आकाश कुलहरि, एसपी (सिटी) सुधाकर यादव और सीओ डी.पी. शुक्ला भी वहां आ पहुंचे. जिस बिस्तर पर डारिया पर तेजाब डाला गया था, उस का आधा हिस्सा जल कर काला पड़ चुका था. मौके से पुलिस को तेजाब का जग मिला, जो आधा भरा हुआ था. फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी मौके पर बुलवाया गया. पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर बिस्तर व जग को अपने कब्जे में ले लिया. इस के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची. तब तक जिलाधिकारी राजमणि यादव भी वहां आ गए थे.
डारिया की हालत नाजुक थी. तेजाब से उस के चेहरे से ले कर पैर तक का दायां हिस्सा 45 प्रतिशत तक जल चुका था. डाक्टर उस का प्राथमिक उपचार कर रहे थे. इसलिए उस से तत्काल पूछताछ नहीं की जा सकती थी. पुलिस ने प्रदीप आदि से पूछताछ कर के युवती का ब्यौरा जुटाया. उस के कमरे से उस की दोहरी नागरिकता वाले पासपोर्ट भी मिल गए. घटना को ले कर अधिकारी असमंजस की स्थिति में थे. उन्हें आरंभ में ही लग गया था कि हमले के पीछे कोई बड़ा कारण है, लेकिन वह कारण आखिर क्या है, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था.
पुलिस का अनुमान था कि हमलावर या तो पीडि़ता को जानता था या फिर किसी ने निजी खुन्नस के चलते किसी को पैसा दे कर यह काम कराया था. जो भी रहा हो, यह काम करने या कराने वाले का मकसद युवती का चेहरा बिगाड़ना था. चिकित्सकों की इजाजत पर पुलिस ने डारिया से पूछताछ की तो उस ने इस के लिए सिद्धार्थ श्रीवास्तव को जिम्मेदार बताया. पुलिस ने सिद्धार्थ के परिजनों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वह घटना के बाद से ही लापता है. वे लोग डारिया की चीखें सुन कर छत पर गए थे. उन्हें नहीं पता कि हमले के पीछे सिद्धार्थ का हाथ है या नहीं?
एक तो शहर में तेजाब को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की यह बड़ी घटना थी, दूसरे घटना की शिकार हुई युवती विदेशी थी. इन दोनों ही बातों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी थी. कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अमरेंद्र सेंगर और पुलिस उप महानिरीक्षक एस.के. भगत ने अपने अधीनस्थ अफसरों को आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए. विदेशी युवती का प्रकरण होने की वजह से इस की गूंज प्रदेश मुख्यालय से ले कर दिल्ली तक पहुंची तो प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने डीजीपी जगमोहन यादव से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ले कर डारिया का उपचार सरकारी खर्चे पर कराने के निर्देश दिए.
दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से रूस व बुल्गारिया के दूतावासों को इस घटनाक्रम का ब्यौरा प्रेषित कर दिया गया. इस बीच पुलिस ने डारिया के बयानों पर महिला एसआई संजू सरोज के माध्यम से लिखित तहरीर के आधार पर धारा 326 (ए) के अंतर्गत नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया.
मामले की गंभीरता के मद्देनजर आरोपी को जल्द गिरफ्तार करना जरूरी था. एसएसपी आकाश कुलहरि ने थानाप्रभारी संजीव कुमार मिश्र को आरोपी की तलाश में जुट जाने को कहा. थानाप्रभारी ने आरोपी सिद्धार्थ की तलाश में कई स्थानों पर दबिश डाली, लेकिन वह हाथ नहीं आ सका. फिर भी पुलिस उस की सुरागसी में लगी रही. शाम को एक मुखबिर से पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी सिद्धार्थ को कुछ देर पहले बसस्टैंड के पास घूमते देखा गया है.
सूचना मिलते ही संजीव कुमार ने एक पुलिस टीम बनाई. इस टीम में एसआई संजय कुमार सिंह, एसआई महेंद्रराम प्रजापति, कांस्टेबल अखिलेश कुमार व संजय कुमार को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने बसस्टैंड पहुंच कर सिद्धार्थ की तलाश शुरू कर दी. पुलिस चूंकि आरोपी के घर से उस का फोटो ले चुकी थी, इसलिए उसे पहचानने में देर नहीं लगी. पुलिस ने पीछे से जा कर उसे दबोच लिया.
सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर के पुलिस थाना लंका ले आई. संजीव कुमार ने उस की गिरफ्तारी की सूचना उच्चाधिकारियों को भी दे दी. पुलिस ने सिद्धार्थ से पूछताछ की तो उस ने बिना किसी सख्ती के अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने उस से विस्तृत पूछताछ की तो दोस्ती व एकतरफा प्यार की वजह से डारिया को हमेशा के लिए अपना बनाने का ख्वाब देखने वाले हारे हुए जुनूनी प्रेमी की चौंकाने वाली कहानी निकल कर सामने आई.
दरअसल डारिया टूरिस्ट वीजा पर 1 मई, 2015 को भारत आई थी. पहले वह हिमाचल प्रदेश की वादियों में घूमी, फिर वाराणसी आ गई. डारिया का एक हमवतन दोस्त एलेक्जेंडर भी वाराणसी आया हुआ था. एक शाम दोनों गंगा घाट पर घूम रहे थे, तभी डारिया के कानों में टकराई बांसुरी की मधुर धुन ने जैसे उस के मन में मिठास घोल दी. उस ने घूम कर देखा तो एक युवक बांसुरी की धुन में खोया हुआ था. दोनों उस के नजदीक पहुंचे और उस की जम कर तारीफ की. यह युवक सिद्धार्थ श्रीवास्तव था.
बांसुरी बजाने का शौकीन सिद्धार्थ अक्सर गंगा किनारे चला जाया करता था और बांसुरी बजाने का अभ्यास करता था. उस दिन भी वह इसीलिए वहां गया था. डारिया की तारीफ से सिद्धार्थ बहुत खुश हुआ. इसी बीच तीनों के बीच औपचारिक परिचय हुआ. डारिया बांसुरी की धुन सुन कर जिस अंदाज से खिलखिला कर उस के पास आई थी, उसी अंदाज में वापस भी चली गई. लेकिन पहली ही मुलाकात में उस ने सिद्धार्थ के दिल के तारों को झंकृत कर दिया था.
डारिया खुद भी संगीत सीखना चाहती थी. सिद्धार्थ उसे भला लड़का लगा. इसलिए अगले दिन वह फिर गंगा किनारे उसी स्थान पर गई. सिद्धार्थ उस दिन भी वहां मौजूद था. डारिया ने संगीत के प्रति अपने लगाव की बात सिद्धार्थ को बताई तो उसी दिन से उन के बीच बातों और मुलाकातों का सिलसिला बढ़ गया. रफ्तारफ्ता उन की दोस्ती गहराती गई. डारिया होटल में ठहरी थी. एक दिन सिद्धार्थ ने उस से कहा, ‘‘डारिया, तुम्हें यदि अपने इस दोस्त पर भरोसा हो तो तुम मेरे यहां पेइंगगैस्ट बन कर रह सकती हो. इस से तुम्हें संगीत सीखने में भी आसानी होगी.’’
सिद्धार्थ का प्रस्ताव अच्छा था. संगीत सीखने की ललक की वजह से उस ने इस के लिए स्वीकृति दे दी. बनारस में अनेक सैलानी कईकई महीने रुकते हैं. होटल चूंकि महंगे पड़ते हैं, इसलिए कई बार वे होटल के बजाय पेइंगगैस्ट बन कर लोगों के यहां रुक जाते हैं. यह साधारण सी बात थी. सिद्धार्थ एक दिन डारिया को अपने घर ले गया और उस ने उस का परिचय अपने घर वालों से कराया. डारिया का स्वभाव सभी को पसंद आया. सिद्धार्थ की सहमति पर डारिया को बतौर पेइंगगैस्ट रहने के लिए एक कमरा दे दिया गया.
वह श्रीवास्तव परिवार के साथ रह कर संगीत सीखने लगी. डारिया को प्राकृतिक सौंदर्य से बहुत प्यार था. वह जी भर कर घूमना चाहती थी. वह खुले विचारों वाली युवती थी. इस बीच उस का दोस्त एलेक्जेंडर भी कहीं घूमने जा चुका था. वैसे भी वे दोनों अलगअलग आए थे. डारिया सिद्धार्थ के साथ सिक्किम, दार्जिलिंग और लेह घूमने के लिए गई. दोनों जहां भी जाते थे, एक साथ ही ठहरते थे. इस दौरान दोनों दोस्ती से उपजे वक्ती प्यार की वजह से एकदूसरे के बेहद नजदीक आ गए थे. नजदीकियों की रोशनी थोड़ी और फैली तो डारिया के दिल में क्या है? बिना यह जानेसमझे सिद्धार्थ ने मन ही मन डारिया को अपनी जिंदगी का हमसफर बनाने का फैसला कर लिया.
चूंकि डारिया की रजामंदी के बिना यह संभव नहीं था, इसलिए अच्छे वक्त के इंतजार में उस ने वक्ती तौर पर अपने जज्बातों को जब्त कर के रखना ही बेहतर समझा. यह बात अलग थी कि डारिया के लिए यह रिश्ता केवल और केवल वक्ती था. कई जगहों पर घूम कर सिद्धार्थ और डारिया सितंबर में वाराणसी आ गए. इस बीच डारिया ने बांसुरी, हारमोनियम और तबले पर संगीत सीखने का अभ्यास कर लिया था. वह अपना ज्यादातर वक्त संगीत के रियाज और किताबें पढ़ने में बिताती थी. सिद्धार्थ के दिल में चूंकि कुछ और था, इसलिए वह उस का ख्याल रखने में दिनरात एक कर रहा था. एक तरह से वह उस पर अपना हक भी समझने लगा था, जबकि डारिया उसे एक घनिष्ठ दोस्त से ज्यादा कुछ नहीं समझती थी.
डारिया श्रीवास्तव परिवार से काफी घुलमिल गई थी. उस का दोस्त एलेक्जेंडर सिक्किम गया हुआ था. उस ने डारिया को वहां आने को कहा, तो वह अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में अकेली ही उस के पास चली गई और एक सप्ताह बाद वापस आई. सिद्धार्थ के दिल में उस के लिए एकतरफा प्यार का जुनून था. उस के इस तरह जाने से उसे गुस्सा तो आया. लेकिन उस ने अपनी नाराजगी प्रकट नहीं की. सिद्धार्थ जिद्दी व गुस्सैल प्रवृत्ति के विकार का शिकार था. उस के घर वाले उस का इलाज भी करा रहे थे. डारिया और सिद्धार्थ के बीच चूंकि संबंधों के मामले में कभी भी खुल कर बात नहीं हुई थी, इसलिए दोनों ही एकदूसरे की भावनाओं और अंदरूनी सोच को नहीं समझ पाए थे.
डारिया अब अपने देश वापस जाना चाहती थी. इस बारे में वह अपने घर वालों से अकसर बात भी करती थी. एक दिन जब वह अपनी मां से मोबाइल पर बात कर रही थी तो सिद्धार्थ कमरे में आ गया. कुछ देर बातें कर के डारिया ने चहकते हुए कहा, ‘‘एक सरप्राइज है माम, आई कम बैक होम. बट आफ्टर सम डेज. ओके बाय.’’ कहते हुए उस ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया. वह बहुत खुश थी. उस का अंतिम वाक्य सुन कर सिद्धार्थ को करंट सा लगा. एकाएक वह तनाव में आ गया. वह उस के नजदीक जा कर बोला, ‘‘कहां जाने की बात कर रही थीं डारिया?’’
‘‘अपनी कंट्री.’’ उस ने हंस कर जवाब दिया.
‘‘व्हाट?’’ सिद्धार्थ ने चौंक कर पूछा तो डारिया ने उस की तरफ देखा, ‘‘इतना हैरान क्यों हो रहे हो सिद्धार्थ? अपने देश तो मैं जाऊंगी ही.’’
सिद्धार्थ अपने दिल की बात छिपाते हुए बोला, ‘‘यह बात नहीं है, दरअसल मैं चाहता हूं कि तुम अभी कुछ दिनों और यहां रहो.’’
‘‘बट व्हाय? मैं यहां हमेशा के लिए तो कतई नहीं आई थी.’’
‘‘तुम नहीं जानती, तुम्हारे बिना मैं बहुत अकेला हो जाऊंगा.’’
‘‘सौरी डियर, मुझ से रुकने की बात मत करो. ऐसा नहीं हो सकता.’’
‘‘तुम चाहो तो सब हो सकता है.’’
‘‘उदास नहीं होते बेबी, दिस इज नौट बिग मैटर.’’ कहने के साथ ही डारिया उस की बातों को हंसी में टाल गई. जबकि सिद्धार्थ के साथ ऐसा नहीं हो सका.
उस दिन से सिद्धार्थ की चिंता का दौर शुरू हो गया. वह अजीब से तनाव में रहने लगा. उस की रातों की नींद उड़ गई. दरअसल वह मन ही मन फैसला कर चुका था कि वह डारिया को अपनी दुलहन बनाएगा. वह सोचता था कि डारिया इतने दिनों साथ रही है. उस के दिल में भी उस के लिए जगह होगी. वह पति के रूप में उसे अपना कर हमेशा के लिए भारत में बस जाएगी. इसलिए अब उस ने जल्द से जल्द अपने दिल की बात उस से करने का मन बना लिया.
इस बीच डारिया भारत को अलविदा कह कर जाने की तैयारी करने लगी थी. उस ने एक एजेंट के जरिए 18 नवंबर की अपनी टिकट भी बुक करा ली थी. यह बात पता चलने पर सिद्धार्थ बौखला गया. एक दिन वह डारिया के कमरे में आया तो उस की आंखों व चेहरे पर उदासी के बादल मंडरा रहे थे. उस की परेशानी छिपने वाली नहीं थी. उस ने डारिया से कहा, ‘‘मैं तुम से एक बात कहना चाहता हूं डारिया.’’
‘‘क्या?’’ डारिया ने आंखों में आंखें डाल कर पूछा तो वह बोला, ‘‘हमारा धर्म, संस्कार और देश भले ही अलग हों, लेकिन मेरे दिल ने सिर्फ तुम्हारी धड़कन को महसूस किया है. मैं तुम्हें सच्चा प्यार करता हूं. जब से तुम मेरी जिंदगी में आई हो, मैं ने अपनी हर खुशी और हर गम को तुम से जोड़ कर देखा है. मैं तुम से शादी करना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि तुम हमेशा के लिए यहीं रह जाओ.’’
‘‘कैसी बात कर रहे हो सिद्धार्थ? मैं यहां शादी करने नहीं, घूमने के लिए आई थी.’’
‘‘लेकिन…’’ उस ने कुछ कहना चाहा तो डारिया ने उसे बीच में ही टोक दिया, ‘‘प्लीज सिद्धार्थ, रिश्ते अपनी जगह हैं, लेकिन मैं ने इस बारे में कभी नहीं सोचा.’’
‘‘अब तो सोच सकती हो?’’
‘‘सौरी सिद्धार्थ.’’
‘‘तुम्हारे जाने से मैं बहुत दुखी हो जाऊंगा.’’ सिद्धार्थ ने कहा तो डारिया उसे समझाते हुए बोली, ‘‘मैं तुम से दूर नहीं जा रही सिद्धार्थ. महसूस कर के देखना, मुझे हरदम अपने साथ पाओगे. मैं तो यहां सिर्फ घूमने आई थी. मेरा लक्ष्य तुम नहीं थे. मुझे यहां तुम जैसा अच्छा दोस्त मिला, यह मेरे लिए खुशी की बात है. हमारी दोस्ती की डोर इतनी कमजोर नहीं, जो दूरियों से टूट जाए.’’
‘‘प्लीज एक बार शादी के बारे में सोच लो. मैं तुम्हें बहुत खुश रखूंगा.’’ सिद्धार्थ ने गिड़गिड़ाने वाले अंदाज में कहा तो वह उस के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए बोली, ‘‘नेवर सिद्धार्थ, यह सच है कि मैं तुम्हारे साथ रही. तुम ने मेरा खयाल भी रखा. इसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी. थैंक्यू सो मच.’’
सिद्धार्थ के सपने जैसे एक झटके में चकनाचूर हो गए. उसे डारिया से ऐसी उम्मीद नहीं थी. उस की हालत हारे हुए जुआरी जैसी हो गई. अब जैसेजैसे दिन बीत रहे थे, सिद्धार्थ और भी परेशान होता जा रहा था. वह दिनरात डारिया के बारे में सोचता और वक्त बेवक्त उसे मनाने की कोशिश भी करता, लेकिन हर बार डारिया का जवाब ना ही होता. डारिया उस की उदासी की वजह जानती थी, लेकिन उस की अपनी मजबूरी थी. इस से सिद्धार्थ बुरी तरह चिढ़ गया. प्यार की नाकामी ने उस के दिल में नफरत का सैलाब भर दिया. गुस्सैल प्रवृत्ति का होने से इस में और भी इजाफा हुआ.
उसे लगा कि डारिया ने उस के साथ बेवफाई की है और उसे अपनी खूबसूरती पर घमंड है. अगर वह उस की बात नहीं मानेगी तो वह भी उसे किसी के काबिल नहीं छोड़ेगा. उस की हालत पागलों जैसी हो गई. आखिर सिद्धार्थ ने डारिया पर तेजाब से हमला करने का फैसला कर लिया. इंटरनेट पर उस ने खतरनाक एसिड के बारे में जानकारी जुटाई और शहर में उस की दुकान का पता भी खोजा. 6 नवंबर को उस ने गांधीनगर मार्केट स्थित कैमिकल की एक दुकान से 750 रुपए में ढाई लीटर सल्फ्युरिक एसिड खरीद कर अपने पास रख लिया. यह एसिड एक जार में था. 12 नवंबर की शाम उस ने डारिया से अंतिम बार कहा, ‘‘डारिया एक बार फिर सोच लो.’’
लेकिन वह उस की बात से चिढ़ कर बोली, ‘‘तुम पागल हो गए हो सिद्धार्थ.’’
‘‘पागल ही सही, मुझे सोच कर जवाब दे देना.’’ कहते हुए वह उस के कमरे से बाहर निकल गया.
रात में डारिया छत पर सोने के लिए चली गई. वह खुली छत पर बिस्तर लगा कर सोती थी. डारिया तो अपने घर जाने के सपने लिए नींद के आगोश में चली गई. लेकिन सिद्धार्थ की आंखों से नींद कोसों दूर थी. उसे पूरी रात नींद नहीं आई. वह तड़के छत पर पहुंचा. डारिया उस वक्त सो रही थी. उस ने उसे जगाया. डारिया ने आंखे मलते हुए पूछा, ‘‘क्या बात है सिद्धार्थ?’’
‘‘क्या सोचा तुम ने जाने के बारे में?’’ सिद्धार्थ ने कठोरता से पूछा तो उस के इरादे से अंजान अलसाई डारिया बोली, ‘‘ओफ्हो तुम अब भी इसी बात को ले कर बैठे हो. मुझे जाना है यार.’’ कहने के साथ वह दोबारा लेटने लगी, लेकिन तभी बिजली की सी गति से सिद्धार्थ के हाथ हरकत में आ गए. उस ने पीछे की तरफ किया हुआ अपना हाथ आगे किया और जग में लिया हुआ तेजाब डारिया की तरफ उछाल दिया.
इस के बाद वह चीते की सी फुर्ती से भाग गया. यह सब अप्रत्याशित था. तेजाब गिरते ही डारिया दर्द से बिलबिला उठी. उस के हलक से दर्दनाक चीखें निकलने लगीं. इस के बाद ही सिद्धार्थ के घर वाले दौड़ कर ऊपर पहुंचे थे और उसे अस्पताल में दाखिल कराया था. सिद्धार्थ चूंकि घर में नजर नहीं आ रहा था, इसलिए घर वालों को उस पर शक तो था, पर वह इस बात को छिपाए रहे. बाद में जब डारिया ने उस का नाम पुलिस को बताया तो उन्होंने सिद्धार्थ के फरार होने की बात पुलिस को बता दी. उधर सिद्धार्थ दिनभर इधरउधर छिपता घूमता रहा. घूमतेघूमते शाम को वह बस स्टैंड पहुंचा. उस ने शहर को हमेशा के लिए छोड़ देने का फैसला कर लिया था. लेकिन इस से पहले ही वह पुलिस के शिकंजे में आ गया. सिद्धार्थ की करतूत पर हर कोई हैरान था.
अगले दिन यानी 14 नवंबर को रूसी दूतावास के अधिकारी बनारस पहुंचे और पीडि़त डारिया से मिले. दूतावास के जरिए ही उस के घर वालों को हादसे की जानकारी दी गई. वे लोग चाहते थे कि बेहतर उपचार के लिए बेटी अपने देश आ जाए. गृह मंत्रालय के निर्देश पर डाक्टरों की एक टीम डारिया को एयर एंबुलैंस के जरिए दिल्ली ले गई और उसे सफदरजंग अस्पताल में भरती करा दिया.
डाक्टरों ने जांच की तो पता चला कि डारिया की बाईं आंख की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है. विदेश मंत्रालय के अधिकारी वाराणसी से उस का सामान ले गए. इस के बाद डारिया को उस के परिजनों की इच्छानुसार विदेशी दूतावास के जरिए उस के देश भेज दिया गया. केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने घोषणा की है कि डारिया के इलाज का खर्चा भारत सरकार उठाएगी. इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने भी डारिया के नाम 5 लाख रुपए का एक चैक भारत सरकार को भेज दिया था. उधर आरोपी के दादा हृदयनाथ श्रीवास्तव का कहना था कि वह डारिया के लिए खुद नेत्रदान करने को तैयार हैं.
हमले से आहत डारिया का कहना था कि वह सिद्धार्थ से एक बार मिल कर पूछना चाहती है कि क्या किसी से दोस्ती या उस पर विश्वास करना गलत है? उस ने पुलिसकर्मियों से कहा कि सिद्धार्थ को माफ कर दिया जाए. सिद्धार्थ उस का अच्छा दोस्त है. डारिया ने यह भी कहा कि भारत एक अच्छा देश है. वह भविष्य में भी यहां आती रहेगी.
इधर पुलिस ने आरोपी सिद्धार्थ से विस्तृत पूछताछ व जरूरी कागजी औपचारिकताओं को पूरा कर के जिला अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा तैयार करने तक आरोपी जेल में था. पुलिस उस के खिलाफ चार्जशीट तैयार करने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) की काररवाई करने की तैयारी कर रही थी.
डारिया से सिद्धार्थ को पहचानने की भूल हो गई थी. दूसरे सिद्धार्थ डारिया की दोस्ती और संबंधों को प्यार समझ कर उस के साथ दुनिया बसाने का ख्वाब देखने लगा था. अगर दोनों पहले ही एकदूसरे को ठीक से परख लेते तो न डारिया दर्दनाक हादसे से रूबरू होती और न सिद्धार्थ का भविष्य खराब होता. Love Story
—कथा पुलिस सूत्रों






