Canada: विदेश में रह रहे गुरजिंदर ने अगर भारतीय सभ्यता से इतर वेस्टर्न कल्चर अपना कर अपनी प्रेमिका मेपल को उसी नजरिए से देखा होता तो आज मेपल जिंदा होती और उसे जेल में उम्रकैद भी न काटनी पड़ती. लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया और…

रोज की तरह 28 सितंबर, 2011 को भी मेपल बटालिया सुबह यूनिवर्सिटी जाने के लिए तैयार हुई तो बड़ी बहन रोजलीन ने कहा, ‘‘आज मैं ने कार अच्छे से साफ कर दी है, कई दिनों से साफ नहीं हुई थी न. तू मेरा एमपी-3 प्लेयर भी ले जा. म्यूजिक सुनते हुए ड्राइविंग में बड़ा मजा आता है.’’

‘‘ठीक है दीदी, लेकिन मुझे यूनिवर्सिटी जल्दी पहुंचना है. क्लास से पहली स्टडी भी करनी है. मुझे म्यूजिक का ज्यादा शौक है नहीं, सिर्फ खाली समय में खुद को हल्का महसूस करने के लिए सुन लेती हूं.’’ मेपल ने कहा.

‘‘चल ठीक है, अब देर मत कर.’’ रोजलीन ने कहा.

मेपल किताबें और पर्स ले कर कार में बैठी और यूनिवर्सिटी चली गई. वह कनाडा के सुर्रे की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में हेल्थ साइंस ग्रैजुएशन की प्रथम वर्ष की छात्रा थी.  मेपल ही नहीं, उस का पूरा परिवार कनाडा का नागरिक था. लेकिन वे मूलरूप से भारत के रहने वाले थे. मेपल भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में पैदा हुई थी. उस के परिवार में पति हरकीरत उर्फ हैरी बटालिया, मां सरबजीत, 2 बड़ी बहनें रोजलीन उर्फ रोजी और सिमरन थीं.

मुंबई में रहने के दौरान हरकीरत ड्राइवर की नौकरी कर के किसी तरह परिवार को पाल रहे थे. आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. मेपल 3 महीने की थी, तभी हरकीरत के किसी दोस्त ने उस से कहा कि यहां रह कर उस की आर्थिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होने वाला है. उस की 3 बेटियां हैं, उन्हें पढ़ानेलिखाने और शादी करने में ही उस की जिंदगी खप जाएगी. फिर भी वह पैसों के अभाव में न बेटियों को अच्छी शिक्षा दिला पाएगा और न अच्छे घरों में उन की शादियां कर पाएगा.

‘‘तो फिर क्या करूं?’’ हरकीरत ने पूछा था.

‘‘तू कनाडा चला जा. उसे तो मिनी पंजाब कहा जाता है. तुझे वहां कोई न कोई रोजगार मिल ही जाएगा. कुछ नहीं होगा तो टैक्सी चला कर अच्छी कमाई कर लेगा. वहां रह कर बेटियों को अच्छी तरह पढ़ा भी लेगा और अच्छे घरों में उन की शादियां भी कर देगा.’’ दोस्त ने कहा.

‘‘भाई, तू कह तो ठीक रहा है, मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं. जब वे गए थे, खस्ताहाल थे, अब दौलत में खेल रहे हैं. मैं भी कोशिश करता हूं.’’ हरकीरत ने कहा.

और फिर किसी तरह कोशिश कर के हरकीरत परिवार सहित कनाडा चला गया. कुछ दिनों तक उस ने वहां टैक्सी चलाई, उस के बाद अपना रोजगार कर लिया. धीरेधीरे रोजगार बढ़ा तो आर्थिक स्थिति बेहतर होती गई. बेटियों का अच्छे स्कूल में एडमिशन करा दिया. उस की दोनों बड़ी बेटियां पढ़ाई में बस ठीकठाक कही जा सकती थीं. लेकिन सब से छोटी मेपल काफी तेज दिमाग की थी. वह स्कूल की हर तरह की गतिविधियों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. हरकीरत को अपनी इस बेटी से काफी उम्मीदें थीं. मेपल पढ़ाई में जितनी तेज थी, उतनी ही खूबसूरत भी थी. हंसमुख और खुले विचारों की भी थी.

अपनी दोनों बहनों के मुकाबले मेपल का हाथ भी ज्यादा खुला था. वह खुल कर खर्च करती थी. उस का कहना था कि जिंदगी खुल कर जीने के लिए है. एकएक पल ऐसा जीना चाहिए कि यादगार बन जाए. स्कूल में उस की दोस्ती लड़कियों से ही नहीं, तमाम लड़कों से भी थी. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद मेपल ने डाक्टर बनने के लिए हेल्थ साइंस में एडमिशन लिया था. लेकिन वह सिर्फ स्टूडेंट ही नहीं थी, मौडल और अभिनेत्री भी थी. वह मौडलिंग तो कर ही रही थी, ‘डायरी औफ विंपी किड’ फिल्म में छोटी सी भूमिका भी की थी. सेंट्रल सिटी मौल द्वारा आयोजित मौडल खोज प्रतियोगिता में हिस्सा ले कर वह फाइनल राउंड तक पहुंच गई थी. उस का फाइनल होना अभी बाकी था.

मेपल यूनिवर्सिटी पहुंची तो पार्किंग में ही उस की एक दोस्त मिल गई. दोनों पार्किंग की एक बैंच पर बैठ कर पढ़ाई कर करने लगीं. अचानक मेपल किताब ले कर उठी और टहलते हुए पढ़ने लगी. उसी बीच उस से कूछ दूरी पर एक कार आ कर रुकी. कार से 2 लड़के उतरे. कार चला रहे युवक ने इधरउधर देखा और स्वचालित आधुनिक रिवौल्वर से मेपल पर गोलियां चला दीं. गोलियों की गूंज से कैंपस गूंज उठा. गोलियों की आवाज सुन कर मेपल की सहेली दौड़ कर जब तक उस के पास पहुंचती, वह लहूलुहान हो जमीन पर गिर चुकी थी. गोलियां चलाने वाला लड़का अपने साथी के साथ कार से भाग गया था.

यूनिवर्सिटी स्टाफ, प्रोफेसर, स्टूडेंट एकत्रित हो गए. घटना की सूचना पुलिस को भी दे दी गई थी. सुर्रे सिटी के तमाम पुलिस अधिकारी कुछ ही मिनटों में वहां पहुंच गए थे. एंबुलैंस द्वारा मेपल को सिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मेपल के पिता हरकीरत को भी दे दी गई थी. वह पत्नी और बड़ी बेटी रोजलीन के साथ अस्पताल पहुंचे. इस के बाद लाश का पोस्टमार्टम कराया गया. उस के बाद लाश उन्हें सौंप दी गई. 8 अक्तूबर को उन्होंने डल्टास रिवर के किनारे उस का अंतिम संस्कार कर दिया. पूरा परिवार मेपल की मौत से काफी दुखी था.

पुलिस को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, गोलियां थोड़ी दूर से चलाई गई थीं. 2 गोलियां उस के दिल के करीब, एक पेट में, एक माथे पर तथा एक गरदन पर लगी थी. ये पांचों गोलियां एक ही रिवौल्वर से चलाई गई थीं. हमलावर कौन थे? यह किसी को पता नहीं था. उस समय यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित पार्किंग में खास चहलपहल नहीं थी. 2-4 स्टूडेंट ही इधरउधर थे. क्योंकि उस समय यूनिवर्सिटी के क्लास शुरू होने में काफी देर थी. मेपल, उस की सहेली और जो अन्य स्टूडेंट थे, वे पढ़ने की गरज से समय से पहले आ गए थे. वहां के शांत वातावरण में ठीक से पढ़ाई हो जाती थी.

मेपल की सहेली बस इतना ही बता पाई थी कि पढ़तेपढ़ते अचानक मेपल उठी और टहलते हुए पढ़ने लगी. अचानक गोलियां चलने की आवाज से वह चौंकी. जब उसे लगा कि गोलियां उसी पर चलाई गई हैं तो वह उस की ओर भागी. जब उस ने पलट कर देखा तो हमलावर कार में बैठ रहे थे. इसलिए उस ने सिर्फ उन की पीठ देखी थी, शक्ल नहीं. करीब 50 पुलिस अधिकारी इस मामले की जांच में लगे थे. मेपल के दोस्त सायर से पूछताछ की गई. उस ने बताया, ‘‘मेपल समझदार और खुशमिजाज लड़की थी. सालों से उस का प्रेमसंबंध पंजाबी समुदाय के गुरजिंदर धालीवाल उर्फ गैरी से था, जो उस की हत्या के कुछ दिनों पहले ही टूटा था. गुरजिंदर उस का पहला प्रेम था.

प्रेमसंबंध टूटने के बाद दोनों के बीच तनाव चल रहा था. गुरजिंदर अकसर उस का पीछा करता था. हत्या से पहले 24 सितंबर, 2011 को मेपल ने सुर्रेटिम होर्टंस में गुरजिंदर धालीवाल पर हमले का आरोप लगाया था. उस ने अपने बयान में कहा था कि जिस समय वह अपने एक बौयफ्रैंड के साथ कौफी शौप में थी तो गुरजिंदर वहां पहुंच गया था. लड़ाईझगड़ा करते हुए वह मारपीट पर उतारू हो गया था. उस ने उसे देख लेने की धमकी भी दी. बाद में मेपल ने अपने बयान वापस ले लिए थे, जिस से गुरजिंदर पर कोई केस नहीं चला था.’’

हरकीरत ने भी गुरजिंदर पर शक जाहिर किया था. गुरजिंदर शक के दायरे में था. लेकिन उस से पूछताछ से पहले पुलिस यूनिवर्सिटी में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देख लेना चाहती थी. फुटेज में यह तो दिख रहा था कि मेपल की हत्या में 2 युवकों का हाथ है, जो कार से वहां आए थे. लेकिन उस फुटेज से उन की पहचान करना आसान नहीं था.

पुलिस ने गुरजिंदर को हिरासत में ले लिया. उस से लंबी पूछताछ की गई, लेकिन उस के चेहरे के हावभाव और बातों से जरा भी नहीं लग रहा था कि उस ने किसी की हत्या की है. पुलिस के पास उस के खिलाफ कोई ठोस सबूत भी नहीं थे, इसलिए उसे छोड़ दिया गया. लेकिन पुलिस उस की चोरीछिपे निगरानी करती रही. पुलिस ने मेपल और गुरजिंदर के मोबाइल फोनों की काल डिटेल्स भी निकलवाई थी. इस से भी किसी खास आधार पर गुरजिंदर को दोषी करार नहीं दिया जा सकता था.

हालांकि कामयाबी नहीं मिल रही थी, फिर भी पुलिस हार मानने को तैयार नहीं थी. मेपल जिस मौडल खोज प्रतियोगिता में भाग ले रही थी, उस का फिनाले 15 अक्टूबर, 2011 को होना था. मेपल के विजेता बनने की संभावना थी. कहीं किसी प्रतिद्वंद्वी ने उस की हत्या न करा दी हो, पुलिस ने इस की भी जांच की. दूसरी ओर आयोजकों ने मेपल की हत्या से दुखी हो कर प्रतियोगिता को जनवरी तक के लिए टाल दिया था.

धीरेधीरे 5 महीने बीत गए, मेपल की हत्या की गुत्थी नहीं सुलझी. पुलिस ने तमाम अपराध करने वालों से भी पूछताछ कर ली थी, ड्रग्स रैकट से भी जोड़ कर छानबीन की गई थी, पर कोई तथ्य हाथ नहीं लगा था. न तो मेपल किसी तरह के ड्रग्स की आदी थी और न ही उस के किसी दोस्त के ड्रग्स गिरोह से किसी प्रकार के संबंध थे. कहीं ये सैक्स माफियाओं का काम न हो, इस दृष्टि से भी जांच की गई थी, लेकिन सारी कोशिशें बेकार गई थीं.

मेपल की हत्या को एक साल गुजर गया. 28 सितंबर, 2012 को उस की पहली बरसी थी. बरसी वाले दिन सुर्रे पार्क में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिस में करीब 2 सौ लोगों ने भाग ले कर मेपल को श्रद्धांजलि दी. इस सभा में लोगों ने कामना की कि उस का हत्यारा जल्द से जल्द पकड़ा जाए, ताकि उस की आत्मा को शांति मिल सके.

इसी आयोजन में हरकीरत बटालिया ने बटालिया परिवार की ओर से मेपल स्कौलरशिप मेमोरियल फंड्स की स्थापना की घोषणा की. इस संस्था की ओर से साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी, जिस में मेपल पढ़ती थी, में आर्ट्स और हेल्थ साईंस पढ़ने वाली आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों की अर्थिक मदद का ऐलान किया गया. बटालिया परिवार की ओर से इस संस्था में 50 हजार डालर की राशि दान स्वरूप दी गई. इस संस्था में सामाजिक कार्य करने वाले तथा व्यवसाई भी दान कर सकते थे.

इस के अलावा उन्होंने पुलिस से लिखित रूप से मेपल के हत्यारे को पकड़ने की अपील करने के साथ अब तक की गई कोशिशों के लिए धन्यवाद भी दिया. पुलिस के लिए मेपल हत्याकांड पहेली बना हुआ था. पुलिस ने हर तरकीब अपना ली थी, पर कोई सुराग नहीं मिला था. लेकिन उस के मुखबिर अब भी मुस्तैद थे और गुरजिंदर तथा उस के खास दोस्तों की अभी तक निगरानी रखी जा रही थी. आखिर पुलिस को एक दिन सफलता मिल ही गई. 1 दिसंबर की रात गुरजिंदर का 22 वर्षीय दोस्त गुरसिमर बेदी एक बार में दोस्तों के साथ शराब पी रहा था. तभी उस के मुंह से निकला, ‘‘देखो, एक साल पहले हम ने कितनी होशियारी से मेपल की हत्या की कि आज तक पुलिस कोई सुराग नहीं लगा पाई.’’

अगली ही टेबल पर बैठे पुलिस के मुखबिर ने यह बात सुन ली. उस ने तुरंत पुलिस को फोन कर के बुला लिया. मुखबिर के इशारे पर गुरसिमर को पकड़ लिया गया. खुद को पुलिस से घिरा देख वह घबरा गया और उस का सारा नशा उतर गया. उस की समझ में आ गया कि अब बचना मुश्किल है. उसे पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां सीधे पूछा गया कि मेपल बटालिया की हत्या किस ने की और क्यों की?

बिना किसी लागलपेट के गुरसिमर ने सच बोल दिया, ‘‘मेपल की हत्या गुरजिंदर धालीवाल उर्फ गैरी ने की थी. उस के साथ मैं भी था. मैं ने ही उसे वह रिवौल्वर उपलब्ध कराई थी, जिस से मैपल को गोली मारी गई थी. उस ने यह हत्या क्यों की, यह मुझे मालूम नहीं. मैं तो उस का साथ दोस्ती की वजह से देने को तैयार हो गया था. मेरी समझ में अभी तक नहीं आया कि दोनों गहरे दोस्त थे, एकदूसरे को प्यार भी करते थे, इस के बावजूद उस ने मेपल की हत्या कर दी?’’

‘‘इस समय वह कहां मिलेगा?’’ पुलिस ने पूछा.

‘‘अपने घर पर.’’ गुरसिमर ने कहा.

गुरसिमर बेदी को साथ ले कर पुलिस ने गुरजिंदर के घर छापा मारा. उस समय रात के साढ़े 12 बज रहे थे. वह अपने बैडरूम में सो रहा था. उस के घर वालों से उस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पूछा, ‘‘आप लोग उसे क्यों पूछ रहे हैं?’’

‘‘एक साल पहले उस ने एक लड़की की हत्या की थी. उसी अपराध में उसे गिरफ्तार करना है.’’ एक पुलिस अधिकारी ने कहा.

‘‘वह ऐसा कतई नहीं कर सकता, आप को कोई गलतफहमी हुई है. वह एक होनहार और नेक चालचलन वाला लड़का है.’’ उस के पिता ने कहा.

घरवालों की लाख कोशिश के बावजूद पुलिस गुरजिंदर को गिरफ्तार कर के पुलिस स्टेशन ले आई. वह बारबार कहता रहा, ‘‘मैं ने मेपल की हत्या नहीं की. मैं तो उसे दिल की गहराई से प्यार करता था. भला मैं उस की हत्या कैसे कर सकता हूं.’’

गुरसिमर को उस के सामने बैठा कर एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘इस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और सबूत भी दे दिए हैं. तुम्हारे पास बचाव का अब कोई रास्ता नहीं है. सच्चाई स्वीकार करने में ही तुम्हारी भलाई है.’’

‘‘मैं ने किसी की हत्या नहीं की.’’ गुरजिंदर अपनी बात पर अड़ा रहा.

‘‘ठीक है, अब लाई डिटेक्टर से ही पता चलेगा कि तुम सच बोल रहे हो या झूठ?’’ पुलिस अधिकारी ने उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया.

इस के बाद गुरजिंदर घबरा गया. झूठ के सहारे आगे चलना उसे कठिन लगा. ऐसे में उसे सच बोल देना ही ठीक लगा. उस ने कहा, ‘‘हां, मैं ने ही की है मेपल की हत्या. मैं उस की हत्या करना नहीं चाहता था. मैं तो उस के साथ सारी जिंदगी बिताना चाहता था, लेकिन उस ने काम ही ऐसा किया कि मजबूर हो कर मुझे उस की हत्या करनी पड़ी.’’

19 वर्षीया मेपल बटालिया जिस एंवर करिक सैकेंडरी स्कूल में पढ़ती थी, उसी में गुरजिंदर भी पढ़ता था. मेपल जब हाईस्कूल में पढ़ रही थी, तभी उस की मुलाकात गुरजिंदर से हुई थी. दोनों ने एकदूसरे को आकर्षित किया तो उन के बीच दोस्ती हो गई. बाद में उन्हें पता चला कि उन के परिवार एकदूसरे से परिचित हैं. इस से दोस्ती और भी गहरी हो गई. दोनों का एकदूसरे के घर भी आनाजाना होने लगा. दोनों की मम्मियां अकसर साथसाथ शौपिंग के लिए जाती थीं.

मेपल चंचल स्वभाव की थी, जबकि गुरजिंदर गंभीर और शर्मीला. विपरीत स्वभाव का होने के बावजूद दोनों में खूब पटती थी. मेपल सैकेंडरी में पहुंची तो दोनों का आकर्षण और बढ़ गया. गुरजिंदर यूनिवर्सिटी में पहुंच गया था. नजदीकी तो पहले से ही थी. अब दोनों इस दोस्ती को एक रिश्ते का नाम देना चाहते थे. गुरजिंदर शर्मीले स्वभाव की वजह से दिल की बात जुबान पर नहीं ला पाया. पर मेपल ने पहल करते हुए एक दिन प्रपोज कर दिया, ‘‘क्या मेरे साथ डेट पर चलोगे?’’

दोनों अकसर साथसाथ घूमते थे, पर डेट पर जाने का अर्थ दूसरा ही था. इसलिए मेपल के प्रस्ताव पर गुरजिंदर शरमा गया. उस ने मुसकरा कर सिर हिला दिया. छुट्टी के दिन दोनों ने डेट पर जाने का प्रोग्राम बनाया. गुरजिंदर अपनी कार से उसे डोनियाल पार्क ले गया, जहां वे एकांत में बैठ कर बातें करने लगे. अचानक मेपल ने पूछा, ‘‘क्या तुम मुझ से प्यार करते हो?’’

गुरजिंदर इधरउधर देखने लगा. उसे जवाब न देते देख मेपल ने अपना प्रश्न दोहराया. इस पर उस ने सिर्फ यही कहा, ‘‘क्या तुम…?’’

‘‘पहले तुम बताओ, सवाल पहले मैं ने किया है तो जवाब पहले तुम दोगे.’’ मेपल ने शरारती अंदाज में कहा.

‘‘अगर मैं हां कहूं तो.’’ गुरजिंदर ने कहा.

‘‘ऐसे नहीं, मुझे प्रपोज करो.’’ मेपल बोली.

‘‘मुझे प्रपोज करना नहीं आता.’’ गुरजिंदर अब भी शरमा रहा था.

‘‘अच्छा बाबा, मैं ही प्रपोज करती हूं, मैं तुम से बेहद बेहद प्यार करती हूं.’’ मेपल ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘मैं भी तुम से प्यार करता हूं. साथ ही वादा करता हूं कि हमेशा इसी तरह प्यार करता रहूंगा.’’ गुरजिंदर ने कहा.

इस के बाद दोनों एकदूसरे से खुल गए. उन की बातचीत का अंदाज बदल गया. उन के होंठ भी कई बार आपस में टकराए, पर उन्होंने इस से आगे की हद पार नहीं की. इस के बाद मेपल और गुरजिंदर ज्यादा से ज्यादा एकदूसरे के करीब रहने लगे. उन के घर वालों को उन के प्यार का पता नहीं था. उन्हें तो सिर्फ यही मालूम था कि दोनों अच्छे दोस्त हैं.

मेपल ने सेकेंडरी पास कर के साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में हेल्थ साइंस में एडमिशन ले लिया. वहीं वह मौडलिंग भी करने लगी. वहीं से उसे लघु फिल्म ‘डायरी औफ विंपी किड’ में एक भूमिका मिल गई. इस से उस के हौसले और बढ़ गए. वह अकसर मौडलिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगी. इस के बावजूद उस ने पढ़ाई को नजरअंदाज नहीं किया. वह पढ़ाई को भी पूरा समय देती थी. वहीं गुरजिंदर ग्रैजुएशन पूरा कर के पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाने लगा था.

प्यार की नींव विश्वास पर टिकी होती है. दोनों के बीच विश्वास था भी पर गुरजिंदर का विश्वास उस दिन डगमगा गया, जब उस ने मेपल को एक अन्य युवक के साथ यूनिवर्सिटी में हाथ में हाथ डाले घूमते देख लिया. उस दिन वह मेपल से मिलने यूनिवर्सिटी गया था. यह उसे अच्छा नहीं लगा, इसलिए निराश मन से वह बिना मिले ही लौट गया. जब दोनों दूसरे दिन मिले तो गुरजिंदर ने पूछा, ‘‘कल तुम्हारे साथ कौन लड़का था?’’

‘‘क्लास में पढ़ता है. हम दोनों में अच्छी दोस्ती है. पर तुम्हें मेरा उस के साथ घूमना बुरा क्यों लगा, यह तो आम बात है.’’ मेपल ने कहा.

गुरजिंदर उस के जवाब से संतुष्ट नहीं था. उस ने कहा, ‘‘मुझे यह अच्छा नहीं लगता. मैं नहीं चाहता कि कोई तुम्हें छुए भी.’’

बात आईगई हो गई. कुछ दिनों बाद गुरजिंदर कौफी शौप में कुछ दोस्तों के साथ गया तो वहां एक प्राइवेट केबिन में उस की नजर चली गई. वहां मेपल किसी लड़के के साथ अश्लील मुद्रा में बैठी थी. यह देख कर वह गुस्से से कांपने लगा. उस ने उस केबिन में जा कर दोनों को भलाबुरा कहने के साथसाथ मेपल से अपना कौमार्य टेस्ट कराने को कहा. उस ने कहा कि उसे शक है कि उस के कई लड़कों से शारीरिक संबंध हैं.

इस पर मेपल खुद पर काबू नहीं रख पाई. वह गुस्से में बोली, ‘‘तुम कौन होते हो मुझ पर इस तरह का इल्जाम लगाने वाले. किस हक से तुम मुझे कुंवारेपन का टेस्ट कराने को कह रहे हो. हमारे बीच प्यार है, हम ने शादी नहीं की, जो तुम इस तरह हक जता रहे हो.’’

‘‘लेकिन मैं तो तुम्हारे साथ जिंदगी गुजारने की सोच बैठा हूं.’’ गुरजिंदर ने कहा.

‘‘यह तुम्हारी सोच है, जरूरी नहीं कि मेरी भी यही सोच हो. मैं जिंदगी को बांधना नहीं चाहती. मैं खुल कर जीने में विश्वास रखती हूं. तुम्हें अच्छा नहीं लगता तो तुम अपना रास्ता अलग कर सकते हो.’’ मेपल ने दो टूक जवाब दिया.

गंभीर स्वभाव का गुरजिंदर बौखला गया. पर उस ने खुद पर संयम रखा. 24 सितंबर, 2011 को उस ने मेपल को उसी लड़के के साथ फिर देखा तो खुद पर काबू नहीं रख पाया और दोनों से उलझ पड़ा. वह मारपीट तक पर उतारू हो गया. उस का यह रूप देख कर मेपल ने इस की शिकायत पुलिस से कर दी, पर दूसरे दिन उस ने अपनी शिकायत वापस ले ली. हां, उस ने गुरजिंदर को चेतावनी जरूर दी कि आइंदा वह उस की जिंदगी में दखल न दे, वरना परिणाम अच्छा नहीं होगा.

‘‘परिणाम किस का अच्छा होगा, किस का बुरा यह तो अब पता चलेगा.’’ गुरजिंदर बड़बड़ाया.

उस ने मेपल को सबक सिखाने की योजना बना कर अपने दोस्त गुरसिमर बेदी से बात की. गुरजिंदर ने उस से सहयोग मांगा तो वह तैयार हो गया. उस ने साथ देने का वादा तो किया ही, साथ ही उस के कहे अनुसार एक रिवौल्वर का इंतजाम भी कर दिया. इस के बाद उस ने मेपल पर नजर रखनी शुरू कर दी. 28 सितंबर, 2011 को मेपल यूनिवर्सिटी के लिए घर से निकली तो दोनों उस का पीछा करते हुए वहां पहुंच गए और मौका देख यूनिवर्सिटी कैंपस में कार रोक कर गुरजिंदर ने उस पर गोलियां चला दीं और भाग खड़े हुए. मेपल के मरने की खबर गुरजिंदर को अपने घर वालों से मिल चुकी थी, क्योंकि वे मेपल के अंतिम संस्कार में गए थे, पर वह मेपल के घर शोक जताने भी नहीं गया.

पुलिस ने शक के आधार पर उसे हिरासत में भी लिया, पर वह झूठ बोल कर शक के दायरे से निकल गया. अंत में साल भर बाद उस का गुनाह सामने आ गया और वह पकड़ा गया. गुरजिंदर और गुरसिमर को सुर्रे सिटी कोर्ट में पेश किया गया, वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. 17 सितंबर, 2012 को अगली पेशी पर गुरजिंदर के वकीलों ने उसे निर्दोष बताते हुए सबूत भी दिए, पर कोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया.

30 अप्रैल, 2013 को पुलिस ने दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी. चार्जशीट, गवाह और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया. यह संयोग ही था कि 28 सितंबर, 2011 को मेपल की हत्या हुई थी और 28 सितंबर, 2014 को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए गुरजिंदर धालीवाल उर्फ गैरी को साजिश रचने व हत्या करने के आरोप में 19 साल की सश्रम कारावास की सजा तथा उस के साथी गुरसिमर बेदी को साजिश में शामिल होने और हथियार मुहैया कराने के आरोप में 8 साल की सजा सुनाई.

कथा लिखे जाने तक 15 नवंबर, 2015 को गुरजिंदर के वकील ने जमानत की अर्जी कोर्ट में लगाई थी, पर कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अर्जी खारिज कर दी थी. Canada

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