Bihar Crime Story: रविकांत को किसी से कोई मतलब नहीं था, वह अपना कमाताखाता था. लेकिन उस की कमाई पर जब कुछ बदमाशों की नजर लगी तो वह तो मारा ही गया, बेटे की मौत के गम में बाप की भी मौत हो गई.

26 जनवरी, 2016 की सुबह पटना के बेउर मोहल्ले में रहने वाले 45 वर्षीय रविकांत अपनी दुकान पर जाने के लिए घर से मोटरसाइकिल से निकले थे. राजापुर बाजार में उन की ज्वैलर्स शौप थी. करीब पौने 10 बजे वह अपनी दुकान पर पहुंच गए. दुकान की साफसफाई कर के वह अपनी गद्दी पर बैठे ही थे कि उन की दुकान में 3 लड़के घुस आए. रविकांत उन सभी को जानते थे. वे तीनों इलाके के बदमाश थे. सुबहसुबह उन्हें अपनी दुकान में देख कर वह समझ गए कि ये आज भी कुछ लेने आए हैं. वह सहम उठे. उन का भयभीत चेहरा देख कर एक लड़के ने कहा, ‘‘चल, सोने की चेन और 2 लाख रुपए अभी निकाल.’’

रविकांत उस लड़के का चेहरा ताकने लगे. इस पर वह लड़का थोड़ा गुस्से में बोला, ‘‘सुना नहीं? चल, जो कहा है, जल्दी निकाल वरना जान से मार देंगे.’’

‘‘तुम जब भी आते हो, मैं तुम लोगों को कुछ न कुछ देता रहता हूं, मैं ने कभी मना नहीं किया. लेकिन आज मेरे पास पैसे नहीं हैं, इसलिए आज मैं कुछ नहीं दे सकता.’’ रविकांत ने कहा.

लड़के ने फिर धमकाया, ‘‘रुपए निकाल नहीं तो अंजाम ठीक नहीं होगा.’’

‘‘तुम मेरी बात समझने की कोशिश करो. सुबहसुबह इतने पैसे मैं कहां से लाऊं?’’ रविकांत गिड़गिड़ाए.

‘‘लगता है, मेरी बात सीधी तरह से तेरे भेजे में नहीं घुस रही है.’’ लड़के ने धमकाते हुए कहा, ‘‘मैं आखिरी बार कह रहा हूं. बात मान ले, वरना जान से हाथ धो बैठेगा.’’

इसी बात पर उस बदमाश और रविकांत में बहस होने लगी. एकदम से गुस्से में आ कर बदमाश ने देसी कट्टे से रविकांत के सीने में एक के बाद एक कर के कई गोलियां दाग दीं. चीख कर रविकांत वहीं ढेर हो गए. उन बदमाशों ने रविकांत को हिलाडुला कर देखा. जब उन्हें विश्वास हो गया कि वह मर चुका है तो वे वहां से पैदल ही मैनपुरा मोहल्ले की ओर चले गए. गोलियों की आवाज सुन कर दुकानदारों ने दुकानों के शटर गिराने शुरू कर दिए थे. बाजार में भगदड़ मच गई थी. थोड़ी ही देर में बाजार में सन्नाटा पसर गया था.

कुछ लोग हिम्मत कर के रविकांत की दुकान पर पहुंच गए. उन्होंने रविकांत को लहूलुहान हालत में देखा तो घबरा गए. उन्होंने तुरंत उन्हें औटो में लादा और पटना मैडिकल कालेज अस्पताल ले गए. जांच के बाद डाक्टरों ने रविकांत को मृत घोषित कर दिया. इसी बीच किसी ने इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर जरूरी काररवाई की और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. रविकांत के करीबियों ने पुलिस को बताया कि अपराधी दुर्गेश शर्मा और मुनचुन गोप पिछले 3 महीने से रविकांत से 10 लाख रुपए की रंगदारी मांग रहे थे. जब उन्होंने इतनी बड़ी रकम देने में मजबूरी जताई तो वे उन से सोने के गहनों की मांग करने लगे.

एक बार रविकांत ने उन्हें 36 ग्राम सोने की चेन बना कर दी भी थी. इस के बाद भी वे चुप नहीं बैठे और पैसे मांगते रहे. घटना के समय रविकांत के पिता सुरेश्वर प्रसाद अस्पताल में भरती थे. जब उन्हें पता चला कि उन के बेटे की हत्या कर दी गई है तो उन्हें इतना गहरा सदमा लगा कि उन्हें हार्टअटैक आ गया और उन की भी मौत हो गई. इस तरह 24 घंटे में घर में 2 मौतें हो गईं. पति और बेटे की मौत पर लाडली देवी टूट गईं. वह रोरो कर बारबार बेहोश हो रही थीं. रिश्तेदार उन्हें किसी तरह संभाल रहे थे. रविकांत के घर में मातमी सन्नाटा पसरा था.

गनीमत इस बात की थी कि रोज की तरह उस दिन रविकांत का बेटा सौरभ उन के साथ शोरूम पर नहीं गया था, वरना उस की जान को भी खतरा हो सकता था. संयोग से उस दिन सौरभ अपने बीमार दादा को देखने अस्पताल गया था. रविकांत ने ही सौरभ को 10 हजार रुपए दे कर अस्पताल भेजा था. पुलिस ने रविकांत की पत्नी शोभा से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि बदमाश दुर्गेश शर्मा, मुनचुन गोप आदि उस के पति को बारबार फोन कर के 100 ग्राम सोने की चेन और 10 लाख रुपए की मांग कर रहे थे. ये सब न देने पर उन्होंने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी.

मोबाइल पर बारबार धमकी आने से उस के पति बेहद परेशान रहते थे. जब बदमाशों ने उन्हें ज्यादा ही परेशान करना शुरू कर दिया तो पति ने मोबाइल का सिमकार्ड तोड़ कर फेंक दिया और नया सिमकार्ड ले लिया. चूंकि वे बदमाश काफी खतरनाक थे, इसलिए पति ने डर की वजह से पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखाई थी. जिस दिन रविकांत की हत्या हुई थी, उसी दिन शाम को अपराधी मुनचुन गोप ने लूटपाट और मारपीट के केसों में वांछित रहने की वजह से अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था. उस के खिलाफ ये दोनों मामले पिछले साल दर्ज हुए थे. दोनों ही मामलों में पुलिस को उस की तलाश थी.

पुलिस को जब पता चला कि मुनचुन गोप ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है तो पुलिस ने उसे रिमांड पर ले कर पूछताछ की. इस पूछताछ में उस ने बताया कि वह अपने साथियों गणेश राय और करमू राय के साथ रविकांत की दुकान पर रुपए लेने गया था. उस का मकसद रविकांत की हत्या करना नहीं, बल्कि वह उसे डराने व अन्य दुकानदारों में दहशत फैलाने के लिए उस के पैर में गोली मारना चाहता था, लेकिन करमू राय ने हड़बड़ी में उस के सीने में गोली मार दी.

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गणेश राय काफी दिनों से दुर्गेश के लिए काम कर रहा था. गणेश के ही कहने पर करमू राय ने 12 जनवरी, 2016 को रविकांत से 100 ग्राम सोने की चेन और 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी. रविकांत ने रंगदारी देने से साफ मना कर दिया था. उसी रात गणेश राय ने करमू राय, मुनचुन गोप और पगला विक्रम को अपने घर पर बुलाया था. सभी ने मिल कर योजना बनाई कि रविकांत और बाकी कारोबारियों में खौफ फैलाने के लिए रविकांत की दुकान पर फायरिंग की जाए. अगर ज्यादा जरूरी हो तो रविकांत के पैरों में गोली मार कर उसे जख्मी कर दिया जाए.

रविकांत हत्याकांड में दुर्गेश का नाम आने के बाद भी पुलिस ने उसे ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की. इस की वजह शायद यह थी कि उस की राजनीतिक पहुंच बहुत ऊंची थी. पुलिस ने उस के गुर्गों पगला विक्रम उर्फ राजा, रंजीत उर्फ भोला, जितेंद्र कुमार और पप्पू कुमार को गिरफ्तार कर लिया था. ये उस के ऐसे गुर्गे थे, जो उस के इशारे पर कुछ भी करने को तैयार रहते थे. यही बोरिंग रोड, राजापुर, मैनपुरा, मंदिरी और दानापुर इलाके में व्यवसायियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलते थे. पगला विक्रम तो दुर्गेश का दाहिना हाथ माना जाता है. मूलरूप से नालंदा का रहने वाला पगला विक्रम बड़ी ही ईमानदारी से दुर्गेश के साथ काम करता था. यही वजह थी कि जब पिछले साल वह जेल गया था तो दुर्गेश ने ही उस के घर का सारा खर्च चलाया था.

जेल से निकलने के बाद पगला विक्रम उस के लिए खुल कर काम करने लगा था और दुर्गेश की गैरमौजूदगी में वही गिरोह को चलाता था. पिछले 15 सालों से दुर्गेश अपराध की दुनिया में छाया हुआ था. उस में एक खास बात यह थी कि वह ऊंची पहुंच रखने वाले लोगों से अपने संबंध बनाए हुए था. इसी वजह से पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं करती थी. उस के खिलाफ आपराधिक मामले तो दर्ज होते थे, लेकिन वह गिरफ्तार नहीं होता था. पिछले साल 12 फरवरी को मैनपुरा के राजकीय माध्यमिक विद्यालय के पास पूर्व पार्षद रंतोष के भाई संतोष की हत्या में भी उस का नाम आया था. उस के कुछ दिनों पहले राजापुर पुल के पास मधु सिंह की हत्या में भी उस का नाम उछला था. हर अपराध में पुलिस ने उस के गुर्गों को तो पकड़ कर जेल भेज दिया था, लेकिन वह खुलेआम रंगदारी वसूलता रहता था.

बिहार के जिला छपरा के थाना गरखा के फुलवरिया गांव का रहने वाला दुर्गेश ने सन 2000 के आसपास पटना के मैनपुरा इलाके में अपना अड्डा बनाया था. उस के खिलाफ पहला केस 10 अक्तूबर, 2000 को बुद्धा कालोनी थाने में डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ था. शुरूशुरू में उस ने दुर्दांत अपराधी सुल्तान मियां और चांदीलाल गोप के गिरोह में शूटर के रूप में काम किया था. लेकिन कुछ ही दिनों बाद उस ने अपने इन दोनों आकाओं को ठिकाने लगा दिया और खुद ही गिरोह की कमान थाम ली. सन 2008 में उस ने आरा में बैंक डकैती डाली. केवल इसी मामले में वह गिरफ्तार हुआ था. पुलिस ने गिरफ्तार कर के उसे बेऊर जेल भेज दिया था.

पर किसी तरह उस ने माननीय उच्च न्यायालय में फरजी जमानती आदेश बनवा लिए और जेल से बाहर आ गया. इस के बाद वह पुलिस के लिए दूर की कौड़ी हो गया. धीरेधीरे उस पर पटना के थाना पाटलिपुत्र, राजीवनगर, बुद्धा कालोनी, एस.के. पुरी, दीघा और कोतवाली में 30 मुकदमे दर्ज हो गए. सुल्तान और चांदीलाल के गायब होने के रहस्य का आज तक खुलासा नहीं हो सका है. इस के बाद उस ने अपनी राह में बड़ी बाधा बन कर उभरे संतोष को भी 12 फरवरी, 2015 को मार डाला. संतोष अपराधियों से कारोबारियों की सुरक्षा मुहैया कराने लगा था. इस से दुर्गेश को रंगदारी का पैसा मिलना बंद हो गया था.

इस के बाद दुर्गेश पहले से ज्यादा खूंखार हो गया. उस ने रंगदारी वसूलने के लिए कड़ा रवैया अपना लिया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक दुर्गेश पिछले कई सालों से आरा में रह कर अपना गैंग चला रहा था. वह अकसर अपने गिरोह के लोगों से मिलने पटना और आरा के बीच स्थित नेउरा स्टेशन पर आता था. आखिरी बार वह फरवरी, 2015 में पटना आया था. इलेक्ट्रीशियन रह चुका दुर्गेश अपने पास कोई मोबाइल फोन नहीं रखता. उस के साथ रहने वाले बदमाश भी कुछकुछ दिनों में अपना सिमकार्ड बदल लेते थे. जब भी उसे किसी व्यवसायी को धमकी देनी होती थी या उस से रंगदारी वसूलनी होती थी, वह फोन का इस्तेमाल करने के बजाय अपने किसी गुर्गे के जरिए व्यवसायी तक संदेश भिजवा देता था.

पुलिस को यह भी पता चला है कि दुर्गेश ने कोलकाता में अपना बिजनैस फैला रखा है. दुर्गेश राजापुर पुल के पास अपने नाम से एक शौपिंग कौम्पलेक्स बनवा रहा है. इस कौम्पलेक्स में उस के साथी पप्पू, बबलू, गिरीश और गुड्डू सिंह भी पार्टनर हैं. रंगदारी और लूट के पैसे से दुर्गेश ने पटना और उस के आसपास के इलाकों में अच्छीखासी प्रौपर्टी बना ली है. रविकांत की हत्या के बाद एसएसपी मनु महाराज ने उस की और उस के गिरोह के लोगों की जांच करानी शुरू कर दी है. उन का कहना है कि वह उन सब की संपत्ति का पता कर के उसे जब्त करने की काररवाई करेंगें. Bihar Crime Story

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