Family Dispute: 34 वर्षीय राहुल हरिभाऊ म्हस्के के जीवन में एक तरफ बेरोजगारी के ताने थे तो वहीं दूसरी तरफ बीवी की बेवफाई का संदेह. इसे ले कर पतिपत्नी के बीच अकसर जुबानी जंग छिड़ जाती थी. उन के मासूम बच्चे तमाशा देखते थे. एक रात बेरोजगार पति बेकाबू हो गया. फिर जो कुछ हुआ, वह कतई नहीं होना चाहिए था. क्या हुआ, पढ़ें इस डबल मर्डर की स्टोरी में…

रूपालीः बेरोजगार पति राहुल को कामधंधा करने के लिए ताने दिया करती थी, जो उसे नागवार लगता था. फिर तो एक दिन के लिए अपने फादर के पैसों पर ही निर्भर था. रूपाली पास के ही गांव मोला से व्याह कर आई थी.
राहुल हरिभाऊ म्हस्के 34 साल का युवक था. वह 2 बच्चों का बाप बन चुका था. सुंदर पत्नी और बच्चों के अलावा उस का अपने मम्मीपापा के साथ एक खुशहाल संयुक्त परिवार था. वे सभी महाराष्ट्र के अमरावती मंडल के तहत बुलढाना जिले में स्थित मेहकर की टीचर्स कालोनी में रहते थे. राहुल अपने पेरेंट्स का दुलारा था, लेकिन उस में एक ही ऐब था कि वह बेरोजगार था. उस की बेरोजगारी का कारण भी वह खुद था. उस का आलसी स्वभाव और कामचोरी के चलते वह कहीं काम नहीं कर पाता था या फिर इस वजह से उसे कहीं काम नहीं मिलता था.
यही बात उस की पत्नी रूपाली को चुभती थी. उसे उस का निकम्मापन खटकता था. इस बात ले कर वह राहुल को बारबार टोकती थी. उसे कहीं काम करने की सलाह देती थी. अपनी मेहनत का पैसा कमाने के लिए कहती थी. इस पर वह चिढ़ जाता था. उल्टे पत्नी को ही भलाबुरा कहने लगता था. देखते ही देखते उन के बीच बहस होने लगती. बात इतनी बढ़ जाती कि वे गालीगलौज पर उतर आते थे और एकदूसरे के चरित्र पर लांछन लगाने लगते थे. ऐसा करते हुए उन्हें जरा भी खयाल नहीं आता था कि बच्चों पर उन के इन झगड़े का क्या असर होगा.
बच्चे उन को लड़तेझगड़ते देखते रहते थे. उन के झगडऩे के चलते उन्हें कई बार खाना तक नहीं मिल पाता था. वे बिस्तर पर दुबक कर चुपचाप सो जाते थे. उस के पापा हरिभाऊ राठौर आर्मी से रिटायर होने के बाद अपने निवास स्थान मेहकर में ही स्टेट बैंक औफ इंडिया की एक ब्रांच में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे. उन के परिवार में पत्नी, 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. राहुल उन में बड़ा बेटा था.
कहने को तो राहुल के पास एक गाड़ी थी, जिस की मदद से उस ने अपना धंधा शुरू किया था, लेकिन उसे कामचोरी के चलते चला नहीं पाया और गाड़ी बेचनी पड़ गई थी. गाड़ी के बिकते ही राहुल अपनी पत्नी की निगाह में पूरी तरह से बेरोजगार पति बन कर रह गया था. उस का बेरोजगार होना रूपाली की आंखों में चुभता था. इसे ले कर वह बारबार ताने मारती थी. राहुल अपने परिवार के लिए अपने फादर के पैसों पर ही निर्भर था. रूपाली पास के ही गांव मोला से ब्याह कर आई थी.
ताने नहीं हुए बरदाश्त
बात सर्दी की उस रात की है, तारीख थी 24 दिसंबर, 2025. रात के करीब डेढ़ बज रहे थे. रूपाली तेवर में थी. रात का खाना पकाते वक्त रसोई में सास से थोड़ी बहस हो गई थी. सास ने उसे तेल का सही इस्तेमाल करने की हिदायत दी थी. सास ने कहा था कि महीना खत्म होने में अभी हफ्ते बचे हैं. तेल हिसाब से खर्च किया करे. इसी बात पर वह बिफर गई थी. किसी तरह गुस्से को दबाए हुए थी. घरेलू काम निपटा कर जब वह बैडरूम में आई, तब उस ने बिस्तर पर बिखरे कपड़े देखे. सो रहे बच्चों के शरीर पर से कंबल हटे हुए थे. उसी कंबल में राहुल लेटालेटा मोबाइल देख रहा था.
कमरे में घुसते ही वह चिल्लाती हुई बोली, ”तुम कितने बेशर्म और कमीने इंसान हो? बच्चों का कंबल खुद ओढ़ रखा है…और बच्चे बेचारे ठंड से सिकुड़े हुए हैं.’’
पीछे से आई रूपाली की अचानक तेज आवाज से राहुल हड़बड़ा कर बैठ गया. उस ने बच्चों पर नजर दौड़ाई. वाकई बच्चे आधे कंबल में लेटे ठंड में सिकुड़े हुए थे.
”अरे! मैं ने ध्यान नहीं दिया…अभी ढंक देता हूं.’’ राहुल धीमी आवाज में बोला.
”तुम्हारा ध्यान तो मोबाइल पर पिक्चर और रील देखने में लगा रहता है. कुछ कामधाम तो है नहीं और न कुछ करना है. कम से कम घर का ही कुछ काम कर लिया करो.’’ रूपाली बोलने लगी. मगर राहुल चुप्पी साधे बच्चों को कंबल ओढ़ाने के बाद बैड पर बिखरे सामान को सहेजने लगा.
उस के हाथ से अपना स्वेटर छीनती हुई बोली, ”चलो, इधर दो मुझे…नामर्द… हरामजादे कहीं के… कोई काम करना है नहीं… घर में पूरे दिन रोटियां ठूंसना और तरहतरह की फरमाइश करना. बाप बेचारा दिन भर गार्ड की नौकरी कर 4 पैसे लाता है और बेटा 2 पैसा कमाने लायक भी नहीं है…’’
”देखो बहुत हो गया… गालियां मत बको… मेरा दिमाग मत खराब करो.’’ राहुल अब थोड़ा सख्ती से बोला.
”हां, दूंगी गालियां… तुम इसी लायक हो नामर्द, कमीना… हरामजादा. कुछ कमा कर लाओ, तब जानूं तुम मर्द कहलाने के लायक भी हो या नहीं?’’
”बकवास करने की जरूरत नहीं है…देख रहा हूं, जब से तुम ने घर से बाहर कदम रखा है, तब से तुम्हारे रंगढंग बहुत बदल गए हैं. बाहर क्या जाने लगी, पति को गालियां देने लगी हो!’’
”मेरा घर से बाहर जाना भी तुम्हारी नामर्दी की वजह से हुआ है…सिलाई सीखने जाती हूं. सीख लूंगी, तब घर पर ही कोई काम कर दोचार पैसे कमा लूंगी.’’

”मुझे सब मालूम है…तुम इसी बहाने बाहर क्या करती हो.’’
”मैं क्या करती हूं…सुनूं तो जरा…तुम्हारे दिमाग में क्या जहर भरा हुआ है.’’ रूपाली बोली.
”यही कि तुम किसी और के साथ देखी गई हो…सिलाई के बहाने से अपने पुराने प्रेमी से मिलने जाती हो.’’ राहुल बोला.
”तुम मुझ पर झूठा लांछन लगा रहे हो…शर्म नहीं आती है, अपनी पत्नी पर ऐसे शक करते हुए?’’
”शक नहीं कर रहा, सच्चाई बता रहा हूं… यह छिपाने के लिए तुम गालियां दे कर मुझे दबाना चाहती हो. छोटीछोटी बात पर आग उगलती हो.’’
”क्या सच्चाई बता रहे हो…मैं एक बार नहीं हजार बार कहूंगी… तुम हरामजादे हो तो हो. हरामजादे, कमीने किस्म के इंसान हो. तुम्हारी कोई औकात नहीं है… जो मर्दानगी दिखा सको. अगर इतनी ही ताकत है तो पैसे कमा कर दिखाओ, अपनी कमी और नकारेपन का दोष छिपा कर मुझे दोषी मत ठहराओ.’’ रूपाली तेजतेज आवाज में बोलती चली गई.
इसी के साथ उस ने कमरे के दरवाजे की कुंडी भीतर से लगा दी, ताकि बाहर आवाज न निकले और घर में सो रहे दूसरे लोगों को उन के झगड़े के बारे में पता न चल पाए.
झगड़ा पहुंचा चरम पर
दोनों के बीच झगड़ा चरम पर पहुंच चुका था. उन की आवाज सुन कर सो रहे बच्चों की नींद खुल गई. उन्हें रूपाली ने तुरंत थपकी दे कर सुला दिया. कुछ मिनट में उन्हें नींद में आते ही रूपाली ने फिर से वही राग छेड़ दिया, लेकिन इस बार चीखनेचिल्लाने की बारी राहुल की थी.
वह शांत बैठा था, लेकिन उस के भीतर गुस्सा भर चुका था. जैसे ही रूपाली ने बोलना शुरू किया, ”तुम्हारे साथ निभाना बहुत मुश्किल हो गया है…अब और बरदाश्त नहीं करूंगी…’’

मासूम रियांशः पापा के वार से बचने के लिए मम्मी से लिपट गया, फिर भी बच नहीं पाया
और आगे बोलने से पहले ही राहुल ने उस के बाल खींचते हुए गरदन पकड़ ली. दूसरे हाथ से मुंह बंद कर दिया. उस के कानों के पास मुंह लगा कर चीखते हुए बोला, ”कुतिया कहीं की… जगहजगह मुंह मारती फिरती है कमीनी… हरामजादी! पुराने यार से मिलती है!… और मुझ पर ही ताने मारती है.’’
पति के हाथों में जकड़ी रूपाली ने किसी तरह से खुद को छुड़ाया और राहुल का कौलर पकड़ गाल पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ दिया. थप्पड़ उस के कान पर भी लगा था. वह तिलमिला कर गिर गया. चोट लगे कान को सहलाने लगा. महसूस हुआ जैसे कान के परदे फट गए हों. सनसनाहट की आवाज आ रही थी. कुछ सुन नहीं पा रहा था. सामने तन कर खड़ी रूपाली नजर आ रही थी. उस के हाथ में कुल्हाड़ी थी. उस ने राहुल को धमकाने के लिए कमरे के कोने में रखी कुल्हाड़ी उठा ली थी.

ससुर राहुल हरिभाऊ की पत्नी की हत्या करने के बाद बेटे रियांश को भी कुल्हाड़ी से काट डाला. बाएं पेज पर – राहुल के घर के बाहर एकत्र भोड़
”तो…तो! तू अब इस हरकत पर उतर आई है?’’ राहुल बोला और एक झटके में उठ कर खड़ा हो गया. झट से रूपाली के हाथ से कुल्हाड़ी छीन ली और उसे धक्का दे कर बिस्तर पर गिरा दिया.
उस के गिरते ही राहुल ने उस पर उसी कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया. हमले से रूपाली बच नहीं पाई. उस की चीख निकल पड़ी थी. चीख इतनी तेज थी कि ठीक बगल में सोए 4 साल के बेटे रियांश की नींद खुल गई. उस के सामने मम्मी खून से लथपथ पड़ी थी. सामने पापा के हाथ में कुल्हाड़ी से खून टपक रहा था. इस डरावने दृश्य को देख कर वह डर गया. न रो पा रहा था, न कुछ बोल पा रहा था.
जब बेटे की पड़ी नजर...
राहुल ने जब जाग उठे बेटे रियांश को देखा तो सहम गया. वह उसे आंखें फाड़े देख रहा था. आशंका से घिर गया, क्योंकि बेटा रियांश ही उस के कारनामे का एकलौता चश्मदीद था. इसलिए राहुल ने तुरंत कुल्हाड़ी का एक वार रियांश पर भी कर दिया. तब तक रूपाली की सांस चल रही थी और रियांश मम्मी से लिपटने के कारण हमले से बच गया था. राहुल और भी आक्रामक हो चुका था. उस ने पत्नी को जमीन पर गिरा दिया और उन पर कुल्हाड़ी से कई वार कर डाले.
रूपाली दर्द से कराहती, चिल्लाती रही. वह खून से लथपथ जमीन पर गिर कर तड़पने लगी. रियांश भी तड़पता हुआ कुछ सेकेंड में ही बिस्तर पर ढेर हो गया. उस के सिर पर कुल्हाड़ी लगी थी. दोनों की मौत के बाद राहुल वहीं बगल में बैठ गया. तब तक इस का शोरगुल कमरे के बाहर राहुल के पेरेंट्स सुन चुके थे. वे दरवाजा खटखटा कर खोलने को कह रहे थे, किंतु राहुल दरवाजा नहीं खोल रहा था. मजबूरन उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया और दरवाजा तोड़ कर खोल दिया.
भीतर कमरे का दृश्य बेहद भयाभह था. वह नजारा जिस ने भी देखा, वह दहल गया. भारी ठंड में भी सभी पसीने से तरबतर हो गए थे. रूपाली खून से लथपथ जमीन पर मृत पड़ी थी, जबकि बेटा रियांश बिस्तर पर मृत था. उस के सिर से खून बह रहा था. वहीं राहुल पड़ा था. इस खूनखराबे को देख कर मौजूदा लोगों के साथ म्हस्के परिवार के लोग भी काफी सन्नाटे में आ गए. म्हस्के परिवार के घर के सारे लोग इस घटना से आक्रोशित भी हो उठे. तब तक कुछ पड़ोसी भी आ चुके थे. उन्हीं में से किसी ने इस वारदात की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 112 पर दे दी.


घायल रूपाली और उस के बेटे की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई थी फिर भी उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया
कुछ देर में ही पुलिस आ गई. साथ में एंबुलेंस भी थी. दोनों को तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया गया. किंतु वहां के डौक्टरों ने नन्हें बच्चे रियांश को मृत घोषित कर दिया. खून से लथपथ रूपाली की सांस चल रही थी. इसे देखते हुए उसे संभाजी नगर के अस्पताल में ले जाने को कहा गया. बुलढाना के मेहकर थाने के सीनियर इंसपेक्टर वेंकटेश मालेवार ने अपनी टीम के साथ मौकाएवारदात की जांच की. फोरैंसिक टीम को बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल पर पड़ी खून से सनी कुल्हाड़ी कब्जे में ली और राहुल म्हस्के को हिरासत में ले लिया गया. दूसरी तरफ संभाजी नगर के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाते समय घायल रूपाली ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.
उन दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद उन के परिजनों को सौंप दिए गए. रूपाली और उस के बेटे रियांश की हत्या के मामले में रूपाली के फादर भास्कर शंकर वानखेड़े (55 वर्ष) ने अपने दामाद राहुल हरिभाऊ म्हस्के पर दफा 103 (1) भारतीय न्याय संहिता के तहत रिपोर्ट दर्ज करवा दी. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में राहुल ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. क्रूरता से भरी इस अपराध की जांच के लिए बुलढाना के एसपी निलेश तांबे ने एडिशनल एसपी अमोल गायकवाड़ के निर्देशन एवं डीवाईएसपी संतोष खाडे की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई.
टीम में मेहकर पुलिस थाने के सीनियर इंसपेक्टर वेंकटेश मालेवार, एपीआई अवचार नरवाड़े, बिरंजे, हैडकांस्टेबल लक्ष्मण कटक, रवि चिचोले, सुखदेव गव्हाणे एवं प्रभाकर शिवनकर को शामिल किया गया. हत्या की मुख्य वजह पत्नी के चरित्र पर शक करना सामने आया. आरोपी ने बताया कि पत्नी उस पर ताने मारती थी और वह उस पर लंबे समय से किसी और व्यक्ति से प्रेम करने का संदेह करता था, जिस से घर में विवाद होता था.
इस मामले में आरोपी की मानसिक स्थिति और पारिवारिक विवाद की भी जांच की गई. इस डबल मर्डर केस की सभी तरह के जांच में पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बयान, मोबाइल कौल डिटेल्स और आरोपी की मानसिक स्थिति का आकलन शामिल था. इस की फोरैंसिक जांच रिपोर्ट में हथियार और घटनास्थल से मिले सबूत मैच कर गए. साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हथियार से गंभीर हमला होने की पुष्टि कर दी.
पुलिस द्वारा तैयार की गई चार्जशीट की प्रक्रिया लिखे जाने तक जारी थी. इस के तहत आरोपी का कबूलनामा, हत्या का हथियार (कुल्हाड़ी), पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान, कौल रिकौर्ड और पारिवारिक विवाद के सबूत इकट्ठा किए जाने थे. पुलिस ने आरोपी राहुल हरिभाऊ म्हस्के से पूछताछ करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. Family Dispute






