Uttar Pradesh Crime: पति के बाहर रहने की वजह से कमला ने गांव के ही संजय से संबंध बना लिए. लेकिन जब कमला के बेटे विशाल ने उसे संजय के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया तो वह दोनों के लिए खतरा बन गया. तब इस खतरे से निपटने के लिए संजय ने जो किया, वह कतई ठीक नहीं था.

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के थाना मारहरा के गांव पिदौरा के रहने वाले बालकिशन के परिवार में पत्नी कमला के अलावा 5 बच्चों में, 2 बेटियां, गीता, रमा तथा 3 बेटे दरवेश, दीपक और विशाल थे. बालकिशन अलीगढ़ से ताले खरीद कर गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के शहरों में घूमघूम कर बेचने का काम करता था. इसलिए वह कईकई महीनों बाद घर आता था. उस के पीछे घर और बच्चों की जिम्मेदारी पत्नी कमला संभालती थी.

कहने को तो उस का बड़ा भाई जयराम पत्नी मीना के साथ पड़ोस में ही रहता था, लेकिन भाई से उस की बिलकुल नहीं पटती थी, इसलिए वह बालकिशन के घरपरिवार से कोई मतलब नहीं रखता था. वह निस्संतान था, इसलिए बालकिशन का छोटा बेटा विशाल जब कभी उस के यहां जाता, पतिपत्नी उसे बहुत प्यार करते थे, इसलिए वह जबतब ताईताऊ के यहां जाता रहता था.

कमला जब से ब्याह कर आई थी, पति का साथ ज्यादा नहीं मिला था, इसलिए बालकिशन जब भी घर आता, वह उस से शिकायत करती कि उस के जाने के बाद उस का मन नहीं लगता. तब बालकिशन उसे समझाता कि रोजीरोटी के लिए तो लोग देश छोड़ देते हैं, कम से कम वह देश में रह रहा है. 4-6 महीने में उस के पास आ जाता है, इसलिए उसे इसी में खुश रहना चाहिए. कमला ने हालात से भले समझौता कर लिया था, लेकिन कभीकभी मन में अकेली होने की कसक जरूर उठती थी.

उस के घर के सामने ही शराब का ठेका था, जिस पर गांव का पूर्व बीडीसी संजय लगभग रोज शराब पीने आता था. कमला ने घर के बाहरी हिस्से में दुकान खोल रखी थी, इसलिए आतेजाते संजय उस से दुआसलाम कर के हालचाल पूछ लेता था. कभीकभार कुछ देर बैठ भी जाता था और जरूरत पड़ने पर उस के छोटेमोटे काम भी कर देता था.

जवान और आकर्षक कमला की बातों से संजय को लगने लगा था कि कमला पति के बाहर रहने से बेचैन रहती है. इस के बाद वह कमला के घर कुछ ज्यादा ही आनेजाने लगा. इस की एक वजह यह भी थी कि वह अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं था, क्योंकि उस की पत्नी अधपगली थी. यही वजह थी कि कमला के पास बैठतेबैठते उस की अतृप्त कामनाएं जाग उठी थीं.

गांव के रिश्ते से कमला उस की भाभी लगती थी, इसलिए वह उस से हंसीमजाक पहले से ही करता रहा था. कमला भी उस के हंसीमजाक का जवाब उसी के अंदाज में देती थी. इन बातों से संजय का आकर्षण कमला के प्रति बढ़ता गया. अब वह जब भी कमला के घर आता, उस के दिल की धड़कनें बढ़ जातीं. दिल कुछ कहना चाहता, लेकिन कहने की हिम्मत नहीं होती. संजय ने सोचा आखिर इस तरह कब तक चलेगा, अगर उसे कमला को पाना है तो दिल की बात कहनी ही होगी.

एक दिन दोपहर को संजय बैठा था, तभी कमला ने कहा, ‘‘बच्चों के जाने के बाद दोपहर तक का समय बिताना मुश्किल हो जाता है. तुम्हारे भैया के बाहर रहने की वजह से घर सूनासूना लगता है, बच्चे आ जाते हैं तो थोड़ा मन लग जाता है.’’

‘‘भाभी, मैं आप की परेशानी अच्छी तरह समझता हूं. तुम इतनी सुंदर हो, इस के बावजूद भाई तुम्हें छोड़ कर न जाने कहांकहां भटकता रहता है.’’

अपनी तारीफ हर किसी को अच्छी लगती है, खासकर महिलाओं को और ज्यादा. कमला को भी अपनी तारीफ अच्छी लगी. आह सी भरते हुए उस ने कहा, ‘‘भइया, सब नसीब का खेल है.’’

संजय को लगा कि दिल की बात कहने का यह अच्छा मौका है. उस ने कमला का हाथ थाम कर कहा, ‘‘भाभी, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं तुम्हारे दर्द को अच्छी तरह समझता हूं, इसलिए तुम्हारी तन्हाई बांटना चाहता हूं.’’

कमला ने हैरानी से संजय को देखा. उस की यह हरकत उसे अच्छी नहीं लगी. इसलिए उस ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, ‘‘संजय, अब अच्छा यही होगा कि तुम चुपचाप यहां से चले जाओ.’’

संजय घबरा गया और तुरंत वहां से चला गया. उस के जाने के बाद थोड़ी देर कमला गुमसुम बैठी रही. बच्चे स्कूल से आ गए तो वह काम में लग गई. लेकिन रात में जब वह सोने के लिए लेटी तो उसे संजय की याद आने लगी. उस ने अपना दिल टटोला तो उसे लगा, संजय ने जो कहा है, बुरा नहीं कहा है. उसे भी तो वह अच्छा लगता है. लेकिन उस ने उस के बारे में इस तरह की बातें अब तक सोची ही नहीं थीं.

अगले कुछ दिनों तक संजय दिखाई नहीं दिया तो कमला बेचैन हो उठी. दिल और दिमाग की कशमकश में दिल जीत गया. कमला ने बेटे को भेज कर संजय को बुला लिया. उस के आने पर कमला ने कहा, ‘‘तुम कैसे मर्द हो, जो अपना हक भी नहीं ले सकते. अरे तुम तो अपना हक ताकत से ले सकते हो. भई, जब प्यार करते हो तो डर क्यों रहे हो?’’

संजय ने बुलाने का मतलब समझ लिया था. उस समय बच्चे थे, इसलिए उस ने कहा, ‘‘भाभी, रात को आऊंगा, दरवाजा खुला रखना.’’

बालकिशन जिस पत्नी के सुख के लिए शहरशहर भटक रहा था, उस रात उस ने पराए मर्द के साथ उस की इज्जत को तारतार कर दिया. इस के बाद जब भी दोनों को मौका मिलता, बालकिशन की इज्जत से खिलवाड़ कर लेते. कुछ समय तक तो दोनों पर किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन एक दिन ठेके पर बैठे किसी आदमी ने जब कहा कि आजकल संजय का बालकिशन के घर कुछ ज्यादा ही आनाजाना है तो लोगों को लगा कि जरूर कुछ गड़बड़ है. लोग कमला और संजय पर नजर रखने लगे. कमला लापरवाह हो गई थी, इसलिए उस की हरकतों को देख कर लोगों को अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि उन के बीच जरूर कुछ है.

बालकिशन इस बार घर लौट कर आया तो उसे घर का माहौल कुछ बदला सा लगा. कमला ने अकेलेपन की भी शिकायत नहीं की. उस ने बिस्तर पर भी महसूस किया कि कमला उस के पास नहीं है. 2 दिनों बाद कमला ने पूछा, ‘‘कितने दिनों तक रहोगे?’’

बालकिशन ने आह भरते हुए कहा, ‘‘अब मैं अपने इस काम से ऊब गया हूं. जाने का मन नहीं हो रहा. मन करता है, यह काम छोड़ कर कोई दूसरा काम कर लूं.’’

‘‘तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या?’’ कमला ने बेचैन हो कर कहा, ‘‘यह घर कैसे चलेगा?’’

बालकिशन ने सोचा, पहले तो कमला कहती थी कि यह काम छोड़ कर कोई ऐसा काम कर लो, जिस में घर से बाहर न जाना पड़े. अब ऐसा क्या हो गया कि वह घर में नहीं रहने देना चाहती. उस ने उसे तीखी नजरों से घूरा तो कमला बोली, ‘‘बच्चों को पालने के लिए कुछ तो करना ही होगा.’’

बालकिशन की समझ में नहीं आया कि वह दूसरा कुछ क्या करे, इसलिए उस ने कहा, ‘‘2 दिनों बाद जाने का मन है.’’

बालकिशन के जाते ही संजय का उस के घर आनाजाना फिर शुरू हो गया. कमला का सब से छोटा बेटा 10 साल का विशाल अकसर बच्चों के साथ सड़क पर खेला करता था. आतेजाते लोग उस से पूछते, ‘‘बच्चा, यह संजय तुम्हारे घर क्यों आता है, तुम्हें पता है?’’

विशाल न में सिर हिलाता तो वे कहते, ‘‘वह तुम्हारी मम्मी का यार है, इसलिए अब वही तुम्हारा पापा है.’’

विशाल को जब लगने लगा कि लोग उस की मां को गाली देते हैं तो उस ने सोचा कि अब वह संजय चाचा को अपने घर नहीं आने देगा. संजय अकसर तभी कमला के घर आता था, जब बच्चे घर में नहीं होते थे. इसलिए विशाल और संजय का आमनासामना कम ही होता था. लेकिन एक दिन जब शाम को उस ने मम्मी के पास संजय को बैठा देखा तो भड़क उठा, ‘‘चाचा, तुम मेरे यहां मत आया करो. लोग तुम्हें ले कर मेरी मम्मी को गाली देते हैं.’’

यह सुन कर कमला हक्कीबक्की रह गई. उस ने विशाल को डांटा, ‘‘बड़ों से इस तरह की बातें नहीं करते. क्या मैं ने तुम्हें यही सिखाया है?’’

मां की डांट से विशाल चुप तो हो गया, लेकिन उस की बातों से कमला और संजय सहम उठे. इस का मतलब किसी ने बच्चे को भड़काया है. एक दिन स्कूल में तबीयत खराब होने की वजह से विशाल अचानक घर आ गया तो उस ने कमला को संजय के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया.

संजय जल्दी से कपड़े संभाल कर भाग खड़ा हुआ, कमला ने कपड़े संभालते हुए पूछा, ‘‘आज तू इतनी जल्दी कैसे आ गया?’’

विशाल की समझ में नहीं आया कि वह मम्मी से क्या कहे? गांव वाले उस की मम्मी को ले कर उस से जो कहते थे, आज उस की समझ में आ गया था. उसे मम्मी से नफरत हो गई. वह कुछ कहे बगैर ही ताई के पास चला गया. वहां उस ने कहा, ‘‘ताई, संजय चाचा और मम्मी गंदा काम करते हैं, मैं संजय चाचा को कभी अपने घर नहीं आने दूंगा.’’

मीना को भी संजय और कमला के संबंधों की जानकारी थी. लेकिन बच्चे ने जो कुछ देखा था, उस से उसे चिंता हुई कि बच्चे के मन पर इस का क्या असर पड़ेगा. उस ने विशाल को समझाने की कोशिश की. उस ने विशाल के मन से इस बात को निकालने की कोशिश तो की, लेकिन उस की नाराजगी बढ़ती ही गई. विशाल को अब संजय फूटी आंख नहीं सुहा रहा था. उसे अपनी मां से भी नफरत होने लगी थी. संजय भी उस से कतराने लगा था. आखिर एक दिन संजय ने कहा, ‘‘कमला, अब मुझे विशाल से डर लगने लगा है. यह लड़का हमारे लिए खतरा बनता जा रहा है. इस का कुछ तो करना ही पड़ेगा.’’

कमला ने कहा, ‘‘विशाल, अभी बच्चा है, उस की बात का क्या बुरा मानना. फिर उस की बात पर कौन विश्वास करेगा.’’

संजय न तो कमला को छोड़ सकता था और न ही विशाल को और अधिक सह सकता था. उसे लगता था कि विशाल कभी भी उसे फंसा सकता है. इसलिए बालकिशन घर लौट कर आए, उस के पहले ही उसे विशाल का कुछ करना था. उसे यह भी पता था कि कमला उस की इस साजिश में शामिल नहीं होगी, इसलिए यह काम उस की चोरी उसे अकेले ही करना था.

वह विशाल को खत्म कर देना चाहता था, लेकिन सवाल यह था कि यह काम वह करे कैसे? इस की वजह यह थी कि वह चाह कर भी विशाल को कहीं नहीं ले जा सकता. जबकि वह विशाल को कहीं एकांत में ले जा कर उसे मार कर उस की लाश को छिपा देना चाहता था. लेकिन विशाल उस के साथ कहीं जा नहीं सकता था. इसलिए उस के लिए यह काम कठिन था. एक दिन वह इस बारे में सोच रहा था कि उस की नजर सामने से चले आ रहे मुकेश पर पड़ी. मुकेश संजय का दोस्त था और पक्का शराबी था. जबतब वह संजय से पैसे भी उधार लेता रहता था. संजय ने मुकेश को बुला कर कहा, ‘‘चलो, ठेके पर चलते हैं, 2-2 पैग पी लेते हैं.’’

मुकेश तो ऐसे मौके ढूंढ़ता ही रहता था. वह संजय के साथ ठेके पर पहुंच गया. संजय ने बोतल मंगाई तो उस ने पूछा, ‘‘आज किस खुशी में यह पार्टी दे रहे हो?’’

‘‘तुम शराब पियो, पार्टी की बात बाद में बताऊंगा.’’

दोनों शराब पीने लगे. जब थोड़ा नशा चढ़ा तो संजय ने कहा, ‘‘मुकेश मेरा एक काम है, कर दोगे?’’

मुकेश ने हां में सिर हिलाया तो संजय ने कहा, ‘‘ठीक है, कल 6 बजे यहीं मिलना, तभी काम बताऊंगा.’’

इस के बाद दोनों शराब पी कर अपनेअपने घर चले गए. उस रात संजय को नींद नहीं आई. वह रात भर सोचता रहा कि उसे अपने रास्ते के कांटे को किसी भी तरह निकाल फेंकना है.

आदमी जब कुछ ठान लेता है तो उसे कर गुजरता है. तब वह अंजाम की भी चिंता नहीं करता. ऐसा ही संजय ने भी किया. अगले दिन शाम को विशाल खेलने बाहर निकला तो लौट कर घर नहीं आया. देर होने लगी तो कमला ने बच्चों को उसे ढूंढ़ने के लिए भेजा. बच्चे विशाल को ढूंढ़ते रहे, पर वह कहीं नहीं मिला. देर रात तक विशाल का कुछ पता नहीं चला तो कमला ने बालकिशन को फोन किया. बालकिशन उस समय दिल्ली में था, वह उसी समय घर के लिए चल पड़ा. सुबह वह घर पहुंचा तो कमला ने उसे सारी बात बताई.

परेशान बालकिशन गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर थाने जाने की तैयारी कर रहा था कि संजय आ गया. उस ने कहा, ‘‘भाई, थाने जाने से पहले हमें गांव में विशाल को ढूंढ़ लेना चाहिए. चलो, तुम्हारे घेर में देख लेते हैं. कहीं ऐसा न हो, वह किसी बात पर गुस्सा हो कर घेर में ही छिपा बैठा हो.’’

सभी लोग घेर में पहुंचे तो यह देख कर हैरान रह गए कि बालकिशन के घेर में पुआल के नीचे विशाल की लाश पड़ी थी. किसी ने गला घोंट कर उस की हत्या कर दी थी. जिस रस्सी से गला घोंटा गया था, वह भी वहीं पड़ी थी. बेटे की लाश देख कर बालकिशन फूटफूट कर रोने लगा. थाना मारहरा पुलिस को सूचना दी गई. थोड़ी ही देर में थानाप्रभारी यशवंत सिंह सहयोगियों के साथ आ गए. लाश का निरीक्षण करने के बाद यशवंत सिंह ने पूछताछ शुरू की. लेकिन उस समय उन्हें ऐसी जानकारी नहीं मिली कि वह हत्यारे तक पहुंच पाते. लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर वह थाने आ गए और बालकिशन की ओर से अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस के सामने सवाल यह था कि बच्चे से किस की क्या दुश्मनी हो सकती थी, जो उस ने उसे मार दिया. बालकिशन बाहर ही रहता था, इसलिए उस की किसी से दुश्मनी हो नहीं सकती थी. आगे की पूछताछ में जब पता चला कि बालकिशन की पत्नी कमला के गांव के ही संजय से नाजायज संबंध थे तो यशवंत सिंह ने उसे पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. थाने में संजय से पूछताछ की गई तो उस ने कहा कि वह खुद हैरान है कि बच्चे की हत्या किस ने और क्यों कर दी? बच्चे से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है? इस के बाद उस ने कुछ सोचते हुए कहा, ‘‘कहीं उस के ताईताऊ ने तो उसे नहीं मरवा दिया? बालकिशन से वे रंजिश भी रखते हैं.’’

पुलिस जयराम और मीना को थाने ला कर पूछताछ करने लगी. तब मीना ने कहा, ‘‘विशाल संजय से काफी नफरत करता था, क्योंकि उस ने उसे अपनी मां के साथ रंगेहाथों देख लिया था. वह अकसर संजय को गालियां देता रहता था. कहीं पोल खुलने के डर से संजय ने तो उसे नहीं मार दिया?’’

इस बात की पुष्टि गांव के अन्य लोगों ने भी की थी. यशवंत सिंह ने संजय को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ करनी चाही तो उस के बचाव में कमला आ गई. उस ने कहा, ‘‘संजय मेरे बेटे को क्यों मारेगा?’’

संजय लगातार कहता रहा कि उस ने बच्चे की हत्या नहीं की. लेकिन तभी यशवंत सिंह को कहीं से पता चला कि जिस दिन विशाल की हत्या हुई थी, संजय का दोस्त मुकेश उस के साथ था. संजय ने उसे शराब पिलाई थी और दोनों साथसाथ ठेके से निकले थे. यशवंत सिंह मुकेश को पकड़ लाए. जब थाने में उस से पूछताछ की गई तो उस ने कहा, ‘‘मैं ने कुछ नहीं किया साहब, मुझे तो पता भी नहीं था कि संजय उस बच्चे को मार डालेगा.’’

‘‘उस दिन क्या हुआ था, विस्तार से बताओ?’’ यशवंत सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, संजय ने मुझे शराब पिला कर कहा कि मैं विशाल को बहलाफुसला कर उस के घेर में ले आऊं. मुझे मालूम नहीं था कि संजय उसे वहां क्यों लाने को कह रहा है. सच तो यह था कि मैं शराब के नशे में था, इसलिए मैं ने कुछ जानने की जरूरत ही नहीं समझी. लेकिन मैं जैसे ही विशाल को ले कर घेर में पहुंचा, संजय उसे मारने के लिए तैयार बैठा था. विशाल को देखते ही उस ने उस के गले में रस्सी का फंदा डाल कर कस दिया. मासूम छटपटा कर मर गया. इस के बाद उस ने मुझे धमकी दी कि अगर मैं ने यह बात किसी से कही तो हमें पुलिस पकड़ कर ले जाएगी, इसलिए मैं चुप रहा.’’

मुकेश के अपराध स्वीकार कर लेने के बाद संजय ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. उस ने बताया कि विशाल ने उसे कमला के साथ देख लिया था, इसलिए उसे डर था कि वह उस के संबंधों के बारे में बालकिशन को बता देगा. अपने संबंधों को छिपाए रखने के लिए ही उस ने उसे मार दिया था.

बालकिशन को जब पता चला कि उस के बेटे की हत्या की वजह उस की अपनी पत्नी है तो उस ने अपना सिर पीट लिया. कमला ने भी कभी नहीं सोचा रहा होगा कि उस का बेटा उस की अय्याशी की बलि चढ़ जाएगा. पूछताछ के बाद पुलिस ने संजय और मुकेश को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Uttar Pradesh Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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