TV Actress Suicide: ग्लैमर की दुनिया से जुड़ी प्रत्यूषा बनर्जी की आत्महत्या का मामला पहला नहीं है. टेलीविजन और फिल्मों से जुड़ी कई लड़कियां पहले भी आत्महत्या कर चुकी हैं. वजह होेती है, उन का जज्बाती होना. जबकि ग्लैमर की दुनिया में जज्बात  काम नहीं आते...

प्रत्यूषा यानी अलसभोर. रात ढलने और सूर्योदय से पहले अंधेरेउजाले का रेशमी समीकरण. 2013 में प्रत्यूषा बनर्जी जब कलर्स चैनल के धारावाहिक ‘बालिका वधू’ के माध्यम से छोटे परदे पर आई थी तो वाकई अलसभोर सी ही थी. सुंदर भी चंचल भी, फूलों सी कोमलांगी भी और झील के ठहरे हुए शांत जल सी गंभीर भी. भले ही बात अभिनय की थी, लेकिन वह हंसती थी तो फूल से झरते थे और उदास होती थी तो लगता था जैसे शाम ढल रही हो. उस के व्यक्तित्व में भी अनूठा आकर्षण था और अभिनय में भी. अभिनय की यही खूबियां कलाकार को लोकप्रिय बनाती हैं. उस के चित्ताकर्षक सौंदर्य और सीधे दिल में उतर जाने वाले अभिनय ने उसे भी लोकप्रिय बनाया.

यही वजह थी कि बीती 1 अप्रैल की शाम को जब उस की मौत का समाचार आया तो उस के परिचित ही नहीं, उसे छोटे परदे की आनंदी के रूप में जानने वाले लाखोंलाख लोग भी सन्न रह गए. लगा जैसे मौत के बादलों ने सूर्य की किरणों का मुंह देखने से पहले अलसभोर को अपने विकराल पंजों में दबोच लिया हो.

बालिका वधू की आनंदी बन कर रातोंरात लाखों दिलों की चहेती बन जाने वाली प्रत्यूषा के उत्थान और पतन की कहानी को रोचक तो नहीं कह सकते, लेकिन यह एक ऐसी लड़की के जीवन का थ्रिल जरूर था, जो न तो अपनी शोहरत को पचा पाई और न गमों को पी सकी. वह खिली तो उस फूल की तरह, जो सूरज की पहली किरण का स्पर्श पा कर खिलता है और सब का मन मोह लेता है, लेकिन बुझी तो शमा की उस लौ की तरह, जो हवा के एक तेज झोंके की ताब न ला कर क्षणभर में दम तोड़ देती है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD48USD10
सब्सक्राइब करें

डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD100USD79
सब्सक्राइब करें

बुकलेट की सुपर डील!

(डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन + बुकलेट!)
₹ 1514₹ 999
सब्सक्राइब करें
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...