MP Crime News: सुबह तड़के एक कार का एक्सीडेंट हुआ और कार धूधू कर के जल गई थी. आश्चर्य की बात यह थी कि कार में सवार 4 लोगों में से 3 सुरक्षित थे, जबकि उसी कार में सवार डा. नीलेश कुर्मी की पत्नी सीमा कुर्मी जल कर राख हो चुकी थी. डा. नीलेश ने बताया कि कार एक ट्रक से टकराई और उस में ब्लास्ट हो कर आग लग गई. बर्निंग कार में जली सीमा की मौत की गुत्थी पुलिस ने सुलझाई तो एक ऐसी चौंकाने वाली कहानी सामने आई कि…
सीमा की आंखों से नींद आज भी बहुत दूर थी. हालांकि उस के लिए यह कोई नई बात नहीं थी. छोटे बेटे का जन्म होते ही उस के पति नीलेश का रवैया बदल गया था. नीलेश कुर्मी पेशे से बीएएमएस डौक्टर था और उस का अपना निजी क्लीनिक था. नीलेश रोज ही देर रात घर आने लगा था, जिस से सीमा की परेशानी बढ़ गई थी. उस की रातें बिस्तर पर करवटें बदलबदल कर बीतने लगी थीं. पति जब खूबसूरत पत्नी को नजरंदाज करने लगे तो पति पर शक होना लाजिमी है. सीमा को भी यही लगने लगा था कि नीलेश का कहीं अफेयर है.
इस बात को ले कर दोनों में अकसर विवाद भी होने लगा था. 20 मार्च, 2026 की रात तो हद हो गई. जब नीलेश के घर आने की आहट पा कर सीमा ने बैडरूम में लगी घड़ी पर नजर डाली, उस समय रात के 2 बज रहे थे.
दरवाजा खोलते हुए सीमा ने सवाल दाग दिया, ”इतनी रात कैसे हो गई, तुम्हें तो बीवीबच्चों की खबर ही नहीं रहती.’’
”क्लीनिक पर आज मरीजों की भीड़ थी, इसलिए देर हो गई.’’ सोफे पर बैठ जूते उतारते हुए नीलेश ने जबाव दिया.
”आखिर 2 बजे रात तक कौन से मरीज क्लीनिक पर इलाज करा रहे थे?’’ सीमा ने गुस्से से उबलते हुए कहा.
”कह दिया न, मरीजों के इलाज की वजह से देर हो गई.’’ नीलेश ने भी तुनक कर जवाब दिया.
”कहीं वह करमजली तो इलाज के लिए नहीं आई थी या उस के दिल के इलाज के लिए डौक्टर साहब उस के घर तशरीफ ले गए थे?’’ सीमा तंज कसते हुए बोली.
”तुम्हारे अंदर तो हर समय शक का कीड़ा घुसा रहता है और मेरे पास इस का कोई इलाज भी नहीं है.’’ नीलेश भी गुस्से से बोला.
”शक का कीड़ा नहीं, मुझे पूरा भरोसा है तुम उस लड़की पर फिदा हो और तुम्हें इस नन्ही जान की भी कोई परवाह नहीं है.’’ बिस्तर पर सोती हुई बेटी की ओर इशारा करते हुए सीमा चिल्लाई. बस, फिर क्या था देखते ही देखते दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और नौबत हाथापाई पर आ गई. गुस्से में आ कर नीलेश ने दोनों हाथों से सीमा का गला दबा दिया. नीलेश के हाथों को अपने गले से छुड़ाने की कोशिश करते हुए वह बेहोश हो गई तो नीलेश बुरी तरह घबरा गया और घटना को छिपाने की साजिश रचने लगा.
उस ने तुरंत अपने किराएदार रामकृष्ण और शुभम को दरवाजा खटखटा कर और आवाज दे कर बुलाया. इतनी रात गए डा. नीलेश की आवाज सुन कर रामकृष्ण और शुभम आंखें मलते हुए बाहर निकल आए. रामकृष्ण ने पूछा, ”डौक्टर साहब, क्या बात है, इतनी रात गए हमें आवाज लगाई, सब ठीकठाक तो है.’’
”नहीं भाई, सीमा को हार्ट अटैक आया है और वह बेहोश हो गई है. जल्दी से मेरे साथ चलो, उसे तुरंत अस्पताल ले जाना है.’’ नीलेश ने हड़बड़ाते हुए कहा.
रामकृष्ण और शुभम 5 मिनट में ही कपड़े पहन कर डा. नीलेश के बैडरूम में आ गए. तीनों मिल कर सीमा को बिस्तर से उठा कर बाहर कार तक ले जाने वाले ही थे कि इसी दौरान घर में बाजू के कमरे में सो रही बेटी की नींद खुल गई तो उस ने पूछा, ”मम्मी को क्या हो गया और उसे कहां ले जा रहे हो पापा.’’
”मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है, उसे डौक्टर के पास ले जा रहे हैं. अच्छी तरह से दरवाजा बंद कर लेना और भैया का ध्यान रखना.’’ नीलेश ने कहा.
गैरेज में खड़ी कार में सीमा को बिठा कर रामकृष्ण, शुभम और नीलेश सागर की ओर निकल गए. पीछे की सीट पर शिवम बैठ गया और उस ने सीमा के सिर को अपनी गोद में रख लिया, जबकि रामकृष्ण आगे की सीट पर बैठ गया और नीलेश कार चला रहा था. नीलेश ने रवाना होने से पहले अपने ससुर और साले को फोन करते हुए बताया कि सीमा की तबीयत खराब है, उसे ले कर सागर जा रहे हैं.
कार से रवाना होते ही डा. नीलेश कुर्मी ने अपने ससुर राधाचरण कुर्मी को फोन करते हुए बताया था कि सीमा को सीने में दर्द उठा है, हार्ट अटैक हो सकता है. उसे दिखाने के लिए हम कार से सागर के राय हौस्पिटल ले कर जा रहे हैं. यह सूचना मिलते ही राधाचरण ने अपने बेटे लोकेश को सोते से जगाया और सीमा को हार्ट अटैक आने की बात कहते हुए सागर चलने को कहा. कुछ ही देर में सीमा के मम्मीपापा और भाई भी अपने गांव जूना से रहली होते हुए सागर के लिए निकल पड़े.

मृतक सीमा कुर्मी – पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर वजह से सीमा पुरानी लगने लगी थी.
इसी दौरान रास्ते में नीलेश ने दोबारा ससुर को फोन करते हुए बताया कि रास्ते में एक ट्रक ने कार को कट मारा है और कार रोड से नीचे उतर गई है. इतना सुनते ही सीमा के फेमिली वाले परेशान हो गए. वह सागर की तरफ बढ़ रहे थे, तभी कुछ देर बाद फिर नीलेश ने फोन लगाया और बताया कि चनाटोरिया टोल प्लाजा के पास उस की कार में आग लग गई है और कार जल रही है. इस के बाद मायके पक्ष के लोगों ने किसी अनहोनी की आशंका में अपनी कार की रफ्तार बढ़ा दी.
गाड़ी चला रहे सीमा के भाई लोकेश को याद आया कि उस के जीजा डा. नीलेश कुर्मी ने करीब एक महीने पहले ही नई टाटा पंच कार खरीदी थी, जो पेट्रोल और सीएनजी से चलती थी. अभी 2 दिन पहले नीलेश ससुराल गया था, जहां उस ने बताया था कि गाड़ी में सीएनजी नहीं है, वह पेट्रोल से चल रही है. गढ़ाकोटा में सीएनजी फिलिंग स्टेशन भी नहीं है. ऐसे में गाड़ी में आग लगने की बात लोकेश के मन में संदेह पैदा कर रही थी.
गांव जूना निवासी राधाचरण कुर्मी की 38 साल की बेटी सीमा की शादी 15 साल पहले 2011 में सिमरिया निवासी डा. नीलेश कुर्मी के साथ हुई थी. नीलेश का सागर जिले के गढ़ाकोटा में क्लीनिक था. इस वजह से वह गढ़ाकोटा में रहता था और उस के 2 बेटे व एक बेटी है. 21 मार्च, 2026 की सुबह करीब 4 बजे कार में आग लगी देख डायल-112 को किसी ने सूचना दी. पुलिस कंट्रोल रूम से सानौधा पुलिस थाने को सूचना मिली कि इलाके के सागर-गढ़ाकोटा रोड पर चना टोरिया टोल प्लाजा के पास एक कार में आग लग गई है.
सूचना मिलते ही एसएचओ भरत सिंह ठाकुर दलबल के साथ घटनास्थल पहुंच गए. तब तक सुबह हो चुकी थी. घटनास्थल पर पहुंच कर देखा कि फोर लेन के बाजू में एक कार जली हुई खड़ी थी. आगजनी में कार में सवार सीमा कुर्मी की जलने से मौत हो गई थी, जबकि उस का पति और अन्य युवक सुरक्षित बाहर निकल आए थे, इस हादसे में उन्हें खरोंच भी नहीं आई. सीमा का शव आग लगने से पूरी तरह जल कर राख हो चुका था. कंकाल के रूप में कार से शव बरामद किया गया था. शव पर हड्डियां, जांघ के पास थोड़ा मांस और मुंह के दांत नजर आ रहे थे.
घटना के समय कार में मृतका सीमा कुर्मी, उन के पति डा. नीलेश कुर्मी, रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी सवार थे. अब तक सीमा के मायके पक्ष के लोग भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. एसएचओ भारत सिंह ठाकुर ने एसपी, एएसपी को घटना की सूचना दी तो मौके पर उन के अलावा फोरैंसिक टीम भी पहुंच गई और जांच शुरू कर दी. शुरुआती जांच में फोरैंसिक एक्सपर्ट और पुलिस को कार में आग लगने की घटना संदेहास्पद लगी.

पुलिस हिरासत में आरोपी डा. नीलेश कुर्मी, रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी
घटनास्थल पर पहुंच कर राधाचरण ने जब अपनी लाडली बेटी सीमा का जला हुआ कंकाल देखा तो वह फूटफूट कर रोने लगे. मौके पर मौजूद पुलिस टीम को रोरो कर कह रहे थे, ”मेरी फूल सी बेटी को मरी हुई ला कर नामोनिशान मिटाने की कोशिश की है. कार में जब 3 लोग और थे और उन की हालत बिलकुल ठीक है तो यह कैसे संभव है कि वे सुरक्षित निकल आए. यह पूरी साजिश है, मेरी बेटी को जानबूझ कर मारा गया.’’
सीमा के पापा और भाई ने डा. नीलेश पर हत्या करने का आरोप लगाया. इस के बाद पुलिस ने डा. नीलेश और उस के दोनों साथियों को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. सीमा के पापा और भाई ने पुलिस को बताया कि डा. नीलेश का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था. इसे ले कर सीमा और डौक्टर में विवाद होता था. पुलिस ने पंचनामा तैयार कर सीमा की राख हो चुकी बौडी के अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया. नीलेश ने ससुर और सास को पहले सीमा को हार्ट अटैक आने, फिर एक्सीडेंट होने और आखिर में कार में आग लगने की कहानी बताई.
पुलिस ने इन तीनों कहानियों की जांच की तो कोई भी बात सिद्ध नहीं हुई. नीलेश की कार में सीएनजी होने से आग लगने की जांच में सामने आया कि कार में सीएनजी गैस ही नहीं थी. जली कार में सीएनजी का टैंक सहीसलामत था. घटनास्थल पर माचिस की एक जली हुई तीली मिली थी और कार गढ़ाकोटा की दिशा में खड़ी थी, जबकि नीलेश का कहना था कि वह सागर की तरफ उसे ले जा रहा था. मौके पर मिली कार की पोजीशन देख कर पता चला कि कार सड़क से अनियंत्रित हो कर वारदातस्थल पर नहीं पहुंच सकती, जबकि माचिस की जली हुई तीली ताजी थी.
आगजनी की इस घटना में सीमा का शव जिस रफ्तार से जला, उतनी कार नहीं जली. जांच में सामने आया कि कार में आग पीछे की सीट से लगी थी, आग लगाने के लिए पेट्रोल का उपयोग किया गया था. पेट्रोल प्लास्टिक के जिस कनस्तर में लाया गया था, उसे घटनास्थल पर पुलिस ने बरामद किया था. प्राथमिक जांच में पुलिस को संदेह हुआ कि आगजनी की इस घटना में किसी ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग हुआ है. कार में आग लगने पर ड्राइवर साइड और उस के ठीक पीछे वाला गेट लौक हो गए थे.
ऐसे में ड्राइवर सीट पर बैठे पति नीलेश और पीछे बैठा साथी बाजू के गेट से बाहर आ गए, लेकिन तीनों लोग सीमा को बाहर नहीं निकाल पाए, यह बात नीलेश को संदेह के घेरे में ला रही थी. थाना सानौधा के एसएचओ भरत सिंह ठाकुर ने फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच कर कार के अवशेषों की बारीकी से जांच कर जो साक्ष्य जुटाए थे, वह इस बात को पुख्ता कर रहे थे कि सीमा की मौत हादसा नहीं, बल्कि एक साजिश है. पुलिस के लिए बर्निंग कार में सीमा की मौत मर्डर मिस्ट्री बनी हुई थी.

डा. नीलेश कुर्मी – पुलिस ने जब नीलेश के मोबाइल की गैलरी को खंगालना तो एक लड़की के कुछ फोटो मिले, जो उस का दूसरी लड़की से प्रेम प्रसंग की तरफ इशारा कर रहे थे
पुलिस को कुछ सवालों के जवाब नहीं मिल रहे थे, मसलन जब कार में आग लगी तो पति और उस के 2 साथी सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन सीमा बाहर क्यों नहीं निकल पाई? सीमा यदि बेहोश थी तो कार में आग लगने पर पति और उस के साथियों ने उसे बचाने की कोशिश क्यों नहीं की? कार में आग लगने पर सीमा की जल कर मौत हो गई, मगर पति और 2 साथियों को कहीं कोई खरोंच भी नहीं आई? आग लगने के बाद कार में ब्लास्ट हुआ तो शव या कार के चिथड़े क्यों नहीं उड़े? आग लगने पर ड्राइवर साइड के दरवाजे लौक हो गए थे तो पति और साथी कैसे नीचे उतरे और सीमा को क्यों नहीं उतार पाए?
नीलेश, रामकृष्ण और शुभम के बयानों के आधार पर पुलिस उस के घर पहुंची. पुलिस ने जब डा. नीलेश के घर का डिजिटल वीडियो रिकौर्डर (डीवीआर) जब्त कर जांच की तो उस में उस रात के फुटेज नहीं मिले, इस से पुलिस को संदेह हुआ कि फुटेज रात में ही डिलीट कर दिए थे. शुरुआत में डा. नीलेश कुर्मी पुलिस को गुमराह करता रहा. उस के बयानों में काफी विरोधाभास था, जिस से पुलिस का शक और गहराता गया.

आरोपी शुभम कुर्मी – एक ही जाति और एक ही फिल्ड में काम करने की वजह से डा. नीलेश से उस की अच्छी बनती थी.
पुलिस ने जब नीलेश के मोबाइल को जब्त कर उस की कौल डिटेल्स और गैलरी को खंगाला तो एक लड़की के कुछ फोटो मिले, जोकि उस का दूसरी लड़की से प्रेमप्रसंग की तरफ इशारा कर रहे थे. सीमा के परिजन भी इसी वजह से हत्या का आरोप लगा रहे थे. पुलिस की सूझबूझ के आगे शातिर आरोपी डा. नीलेश के मंसूबों पर पानी फिर गया. मोबाइल में मिले सबूतों के आधार पर नीलेश भी इस बात से इंकार नहीं कर पाया. पुलिस ने घर से डीवीआर जब्त कर जांच के लिए भेज दिया. पुलिस ने डा. नीलेश कुर्मी, रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी से सख्ती से पूछताछ की तो तीनों ने जो कहानी बताई, वह रोंगटे खड़े करने वाली थी.
नीलेश ने कुबूला कि उस ने पत्नी सीमा का गला दबाया था, जिस से उस की मौत हो गई थी. नीलेश को जानकारी थी कि गला दबाने से पत्नी सीमा की मौत हो गई है, ऐसे में यदि वह पत्नी को अस्पताल ले कर जाता तो वारदात उजागर हो सकती थी. इसलिए उस ने सबूतों को छिपाने के लिए एक्सीडेंट की साजिश रची. उस ने पहले किसी वाहन से कार की टक्कर करने का प्लान किया था, लेकिन उसे डर था कि इस में उस की जान को खतरा हो सकता है और वह भी उस की चपेट में आ सकता है. जिस के बाद उस ने सुनसान इलाके में कार खड़ी कर दी और सीमा पर पेट्रोल डाल कर कार में आग लगा दी और घटना को हादसे का रूप देने की कोशिश की.
आरोपी डौक्टर पति के साथ कार में मौजूद सहआरोपी रामकृष्ण पटेल और शुभम पटेल ने भी वारदात को छिपाने की पूरी कोशिश की. गढ़ाकोटा में मृत सीमा को कार में बैठाते समय दोनों को घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी, लेकिन कार में जब डौक्टर ने पेट्रोल डाल कर आग लगाई, तब दोनों मौके पर मौजूद थे. लेकिन उन्होंने सीमा को बचाने की कोशिश नहीं की. इस के अलावा दोनों ने पुलिस को भी घटनाक्रम की सूचना नहीं दी. संदेह होने पर पर पुलिस ने हिरासत में ले कर पूछताछ की तो शुरुआती पूछताछ में रामकृष्ण और शुभम ने वारदात को छिपाया.

रामकृष्ण कुर्मी – वारदात में डां नीलेश के साथ का आरोपी
जब सख्ती से पूछताछ की गई तो हत्याकांड की कहानी उगल दी थी. इसलिए पुलिस ने मामले में दोनों को भी आरोपी बना लिया. पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी डा. नीलेश कुर्मी बेहद शातिर है. वह कई वर्षों पहले बीएसएफ की ट्रेनिंग ले चुका है, लेकिन बीएसएफ की नौकरी करने के लिए नहीं गया था. जिस के बाद उस ने बीएएमएस की पढ़ाई की और डौक्टर बन गया. वर्तमान में गढ़ाकोटा में क्लीनिक खोल कर मरीजों का इलाज कर रहा था.
डा. नीलेश का अफेयर गढ़ाकोटा क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली युवती से चल रहा था. युवती क्लीनिक पर आती रहती थी, इसी दौरान उन की जानपहचान हुई थी, जिस के बाद दोनों फोन पर बात करने लगे थे. फोन पर बात करने और देर रात घर लौटने की बात को ले कर पत्नी सीमा को पति पर संदेह हुआ. दोनों के बीच अकसर विवाद होने लगे. बताया जा रहा है कि पत्नी सीमा ने पति की फोटो युवती के साथ देख ली थी, जिस के बाद से दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था. इन्हीं विवाद को ले कर आरोपी पति सीमा को रास्ते से हटाने की साजिश करने लगा.
वारदात की रात पति और पत्नी के बीच विवाद बैडरूम में हुआ था. इस दौरान घर में उन की 11 वर्षीय बेटी और 9 वर्षीय बेटा मौजूद था, लेकिन वे दोनों दूसरे कमरे में सो रहे थे. नीलेश का बड़ा बेटा हौस्टल में रहता था. जिस मकान में डौक्टर रहता था, उसी में कुमेरिया भटोली गांव का 25 साल का रामकृष्ण कुर्मी और सिंगपुर कलां गांव का 23 साल का शुभम कुर्मी किराए पर रहता था.
रामकृष्ण और शुभम गढ़ाकोटा में ही एक पैथोलौजी लैब चलाते थे. दोनों डा. नीलेश के क्लीनिक से ब्लड सैंपल लाते थे और लैब में जांच करने के बाद रिपोर्ट उस के क्लीनिक तक पहुंचा देते थे. एक ही जाति और एक ही फील्ड में काम करने की वजह तीनों में अच्छी बनती थी. घटना वाले दिन डा. नीलेश ने सीमा के साथ मारपीट कर उस का गला दबा दिया, जिस से वह अचेत हो गई थी. अचेत सीमा को कार में पटक कर वह रामकृष्ण और शुभम के साथ सागर की ओर निकल गया, तब तक दोनों को कुछ जानकारी नहीं थी.
चनाटोरिया के टोल प्लाजा से कार करीब 4 बजे निकली और टोल से करीब आधा किलोमीटर दूर डा. नीलेश ने सुनसान जगह पर कार रोकी और दोनों को घटना की सच्चाई बताते हुए कहा, ”मेरे और सीमा के बीच विवाद हो गया था और झूमाझटकी के दौरान मैं ने उस का गला दबा दिया, इस से सीमा की मौत हो गई है. अब यदि मैं इसे हौस्पिटल ले जाऊंगा तो पकड़ा जाऊंगा. तुम लोग मेरी मदद करो.’’
यह सुन कर पहले तो दोनों बुरी तरह घबरा गए और उन्होंने इंकार करते हुए साफतौर पर कह दिया, ”डौक्टर साहब, इस मामले में हम आप की कोई मदद नहीं कर सकते, यदि फंस गए तो जीवन भर जेल में चक्की पीसनी पड़ेगी.’’
”तुम दोनों साथ दो तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. पुलिस समझेगी कि एक्सीडेंट हुआ है और फिर मैं तुम्हें इस सच को छिपाने के लिए 2-2 लाख रुपए भी दूंगा.’’ नीलेश ने उन्हें जाल में फंसाते हुए कहा.
2 लाख रुपए के लालच में रामकृष्ण और शुभम नीलेश के बनाए प्लान में शामिल हो गए. तीनों कार से निकल कर बाहर आ गए. इस के बाद नीलेश ने कार में रखा पेट्रोल से भरा कंटेनर उठाया और ड्राइवर साइट से कार लौक कर दी. नीलेश ने पहले कार के पिछले टायर और फिर अंदर पत्नी पर पेट्रोल छिड़का और माचिस की तीली जला कर आग लगा दी.
आग लगाने के बाद तीनों ने कार को धक्का दे कर सड़क से नीचे उतार दिया. डौक्टर ने लैब कर्मचारियों से कहा, ”कोई पूछे तो बता देना कि कार का एक्सीडेंट हुआ था.’’

टीआई भरत सिंह
इस के बाद उस में आग लग गई. कार में आग लगते ही तीनों दूर खड़े हो गए. कार के अंदर पत्नी सीमा जलती रही और तीनों चुपचाप सड़क किनारे खड़े हो कर देखते रहे. कार में आग लगी देख किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम के डायल-112 को सूचना दी. सूचना मिलते ही बहेरिया व सानौधा पुलिस मौके पर पहुंची. सागर के मकरोनिया से फायर ब्रिगेड बुलाई गई.

एएसपी लोकेश सिन्हा
एडिशनल एसपी लोकेश सिन्हा, रहली एसडीओपी प्रकाश मित्ता, गढ़ाकोटा थाने के एसएचओ शिवम दुबे व सानौधा थाने के एसएचओ भरत सिंह ठाकुर के साथ साइबर सेल ने इस मर्डर मिस्ट्री को 48 घंटों के अंदर सुलझा लिया. 25 मार्च, 2026 को सागर जिले के एडिशनल एसपी लोकेश सिन्हा ने प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर बर्निंग कार के रहस्य का खुलासा कर दिया. एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चक्कर में हंसताखेलता परिवार विखर गया और डा. नीलेश और सीमा के नाबालिग बच्चों के सिर से मांबाप का साया छिन गया. कथा लिखे जाने तक तीनों हत्यारोपी सागर जेल में बंद थे और डा. नीलेश और सीमा के बच्चे अपने नानानानी की कस्टडी में थे. MP Crime News






