Child Murder Case. मां के बारे में कहा जाता है कि वह अपने बच्चे के लिए खुद की जान दे सकती है. लेकिन कुछ ऐसी भी माएं होती हैं जो यारों से मिलने या रंगेहाथों पकड़ी जाने पर अपने ही बच्चे की जान लेने से नहीं चूकतीं.
बलजिंदर कौर ने घर के आंगन के कोने में गुमसुम बैठी बलजीत कौर की ओर देखा तो उस के दिल से आह सी निकली. उस के पास ही उस का 2 साल का बेटा हरमन मस्ती से खेल रहा था. उसे इस तरह खेलते देख बलजिंदर कौर न जाने क्याक्या सोचती रही. इस के बाद वह अपनी जगह से उठी और बलजीत कौर के पास जा कर बैठ गई, जो अपने ही खयालों में गुम थी.
उस ने प्यार से बलजीत कौर के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘बेटा, इस तरह खाली बैठी दिन भर न जाने तुम क्या सोचती रहती हो? तेरा दर्द मैं समझती हूं. वीर सिंह को यही लगता है कि तुझे पूछने वाला कोई नहीं है. उसे पता नहीं कि तेरी मौसी जिंदा है. वैसे भी तू मेरे घर ही पलीबढ़ी है. मैं तेरी मौसी नहीं, मां हूं, इसलिए जब तक मैं हूं, तुझे चिंता करने की जरूरत नहीं है .’’
बलजीत मौसी के गले लग कर सिसकने लगी तो बलजिंदर ने उसे सांत्वना देते हुए कहा, ‘‘देख बेटी, पतिपत्नी के बीच छोटीमोटी बातों को ले कर कहासुनी तो होती रहती है. पर इस की वजह से कोई अपना घर नहीं छोड़ देता. ऐसा करने से बच्चों का भविष्य बरबाद हो जाता है. मैं तुझ से ही नहीं, वीर सिंह से भी कहूंगी कि तुम दोनों को अब हरमन के बारे में सोचना चाहिए. तू कहे तो मैं खैराबाद जा कर वीर सिंह से बात करूं?’’






