Love Crime Story: सोनम जिस नवीन से प्रेम करती थी, वह उसी के गोत्र का था. इसलिए मांबाप उस की शादी नवीन से करने को तैयार नहीं थे. जबकि सोनम अपनी जिद पर अड़ी थी. जब उस के पिता ने कहा कि उन के जीतेजी यह विवाह नहीं हो सकता तो सोनम ने तय कर लिया कि…

हरियाणा के जिला रोहतक के गांव कबूलपुर निवासी फौजी भूपेंद्र सिंह की आंखों के सामने बारबार वह हृदयविदारक घटना घूम जाती थी, जब उन की मां भूरी देवी, बड़े भाई सुरेंद्र सिंह, भाभी प्रमिला, बड़े भाई के बेटे अरविंद, उन की खुद की बेटियों सोनिका, मोनिका और बेटे विशाल की गला घोंट कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. दिल दहला देने वाले इस हत्याकांड को किसी और ने नहीं, उन के बड़े भाई सुरेंद्र सिंह की लाडली बेटी सोनम ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर अंजाम दिया था. वह हवस में इस कदर अंधी हो गई थी कि जिन मांबाप ने उसे पैदा किया था, जिस दादी की गोद में पलीबढ़ी थी और जिन भाईबहनों के साथ खेलकूद कर जवान हुई थी, प्रेमी के साथ मिल कर उन्हीं लोगों को मार दिया था.

इस अपराध को अंजाम देने में सोनम, उस का प्रेमी नवीन और नवीन का दोस्त जसबीर शामिल था. इस मामले में 6 मार्च को अदालत में उन के किए की सजा सुनाई गई. उस दिन फौजी भूपेंद्र सिंह ने सुबह नहाधो कर मन ही मन यही प्रार्थना की थी कि जिन लोगों ने उन के घर वालों की बेरहमी से हत्या की है, उन्हें कठोर से कठोर सजा मिले, जिस से उन्हें भी पता चले कि जिंदगी की कीमत क्या होती है.

इस के बाद वह अपने बच्चों की फोटो निकाल कर उन के मासूम चेहरों को काफी देर तक एकटक ताकते रहे. फोटो देखतेदेखते उन की आंखों से आंसू की धारा बह निकली. तभी उन के पिता तकदीर सिंह ने कमरे में आ कर कहा, ‘‘देख लेना बेटा, कानून उन्हें उन के किए की ऐसी सजा देगा कि फिर जल्दी कोई ऐसा करने की सोचेगा भी नहीं.’’

पिता की बात पर भूपेंद्र सिंह ने भर्राई आवाज में कहा, ‘‘अगर ऐसा हुआ तो बाबूजी मां, भाइयाभाभी और बच्चों की आत्मा को जरूर शांति मिल जाएगी.’’

इस के बाद बापबेटे बोझिल मन से कमरे से बाहर निकले और नाश्ता कर के रोहतक के लिए रवाना हो गए. आम दिनों की अपेक्षा 6 मार्च को रोहतक के सेशन जज श्री सुशील कुमार गुप्ता की अदालत के बाहर कुछ ज्यादा ही भीड़भाड़ दिखाई दे रही थी. जिन लोगों के मुकदमों की तारीखें थीं, वे तो आए ही थे, इस के अलावा वहां तमाम पत्रकार भी जमा थे. उस दिन न्यायालय की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या को देख कर ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता था कि उस दिन श्री सुशील कुमार गुप्ता की अदालत में किसी खास मुकदमे का फैसला आने वाला है.

भूपेंद्र सिंह भी अपने पिता के साथ अदालत पहुंच गए और बाहर पड़ी बैंच पर बैठ कर पुकार का इंतजार करने लगे. थोड़ी देर बाद जज श्री सुशील कुमार गुप्ता अदालत में आ कर अपनी कुर्सी पर बैठे तो वहां सन्नाटा पसर गया. उन के इशारे पर पेशकार ने पुकार कराई तो भूपेंद्र सिंह के मुकदमे की अभियुक्ता सोनम, उस के प्रेमी नवीन और उस के साथी जसबीर को ला कर कटघरे में खड़ा कर दिय गया. लंबी सुनवाई के बाद उस दिन उन के मुकदमे का फैसला आने वाला था. बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकीलों के बीच सजा को ले कर अंतिम बहस शुरू हुई. इस मामले में क्या फैसला आया, जानने से पहले आइए हम यह जान लेते हैं कि यह सोनम कौन है, उस ने अपने प्रेमी नवीन के साथ मिल कर अपने ही घर के 7 लोगों की बेरहमी से हत्या क्यों की थी?

हरियाणा के जिला रोहतक के गांव कबूलपुर में तकदीर सिंह डागर अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी भूरी देवी के अलावा 2 बेटे थे, बड़ा सुरेंद्र सिंह और उस से छोटा भूपेंद्र सिंह. तकदीर सिंह ने बेटों की परवरिश और शिक्षादीक्षा पर विशेष ध्यान दिया था. इसी का नतीजा था कि पढ़ाई पूरी होते ही सुरेंद्र सिंह को वन विभाग में नौकरी मिल गई थी तो भूपेंद्र सिंह को सेना में. दोनों बेटे अपने पैरों पर खड़े हो गए तो उन के रिश्ते आने लगे.

तकदीर सिंह ने बड़े बेटे सुरेंद्र सिंह की शादी साल्हावास से विधायक रह चुके जिले सिंह की बेटी प्रमिला से की थी. प्रमिला सुंदर, सुशील और संस्कारी युवती थी. इसलिए उसे पत्नी के रूप में पा कर सुरेंद्र सिंह खुद को धन्य समझ रहे थे. प्रमिला भी कमाऊ और जान से बढ़ कर प्यार करने वाला पति पा कर खुद को भाग्यशाली मान रही थी.

परिवार में किसी को किसी से कोई शिकायत नहीं थी. समय हंसीखुशी से गुजर रहा था. इसी गुजरते समय में प्रमिला और सुरेंद्र सिंह बेटे अरविंद और बेटी सोनम के मांबाप बन गए. पतिपत्नी बच्चों का लालनपालन लगन से करने लगे. भूपेंद्र सिंह की भी सेना में नौकरी लग गई थी तो तकदीर सिंह ने उस की भी शादी कर दी थी. भूपेंद्र सिंह के 3 बच्चे हुए, 2 बेटियां सोनिका, मोनिका और एक बेटा विशाल. लेकिन शायद कुदरत को भूपेंद्र की यह खुशी अच्छी नहीं लगी, इसलिए घटना के डेढ़ साल पहले उन की पत्नी की अचानक मौत हो गई थी.

बच्चे छोटे थे और भूपेंद्र सिंह नौकरी की वजह से बाहर रहते थे, इसलिए सुरेंद्र सिंह ने भूपेंद्र सिंह के बच्चों को अपने साथ रख लिया था. सुरेंद्र सिंह की बेटी सोनम सयानी हुई तो जीवन के रंगीन सपने देखने लगी. उन्हीं में भावी राजकुमार का सपना भी था. उसी बीच एक दिन वह अपने घर के बाहर खड़ी थी, तभी उस की नजर सामने साइकिल से उतर रहे एक युवक पर पड़ी.

वह युवक एकटक उसे ही ताक रहा था. युवक की हरकत उसे अच्छी तो नहीं लगी, पर उस की नजरों में ऐसा आकर्षण था कि वह चाह कर भी उसे कुछ नहीं कह सकी. वह युवक उसे उसी तरह ताकता रह गया तो सोनम को उस की हिम्मत पर हैरानी हुई. कुछ देर तक वह उसे उसी तरह एकटक ताकता रहा, उस के बाद मुसकराते हुए सोनम के घर से कुछ दूरी पर स्थित एक घर में घुस गया. युवक तो चला गया, लेकिन उस ने नजरों का जादू चला कर सोनम के दिल में हलचल मचा दी थी. उस का चेहरा अब उस की नजरों के सामने नाचने लगा था. उसे जब भी उस की मुसकराहट याद आती, वह बेचैन हो उठती.

युवक कौन था, कहां का रहने वाला था, यह जानने के लिए सोनम की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. धीरेधीरे उस की स्थिति अजीब होती जा रही थी. वह उस युवक के बारे में जितना सोचती थी, उस के आकर्षण का जादू उतनी ही तेजी से उस के रोमरोम में समाता जा रहा था. आखिर जब उस की बेचैनी हद पार करने लगी तो उस ने युवक के बारे में अपनी एक सहेली से पता किया. सहेली के बताए अनुसार, युवक का नाम नवीन था और वह कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा कर रहा था. वह उस की खूबसूरती और गदराए जिस्म का दीवाना हो चुका था. उस की एक झलक पाने के लिए वह हमेशा लालायित रहता था.

आग दोनों तरफ बराबर लग चुकी थी, इसलिए नवीन को शीशे में उतारने के लिए सोनम ने पहल की तो जल्दी ही उसे कामयाबी मिल गई. इसे टीवी का प्रभाव कहें या किशोर उम्र की फिसलन, सोनम को पढ़ाई के दौरान ही यह प्रेमरोग लग गया था. जल्दी ही दोनों मिलनेजुलने ही नहीं लगे, बल्कि घंटोंघंटों फोन पर प्यार में डूबी बातें भी करने लगे थे. सोनम का जब भी नवीन से मिलने का मन होता या समय मिलता, वह फोन कर के समय और जगह बता देती. नवीन वहां समय से पहले पहुंच जाता. इस तरह दोनों एकांत में भी मिलने लगे थे. समय के साथ दोनों का प्रेम परवान चढ़ा तो मन के साथ तन मिलने में भी देर नहीं लगी.

बुराई कोई भी हो, ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रहती. यहां भी यही हुआ. सोनम और नवीन के प्यार की खुशबू फैली तो घर वालों की नाक तक पहुंच गई. जब सुरेंद्र सिंह और प्रमिला तक सोनम के प्यार की महक पहुंची तो पतिपत्नी सन्न रह गए. इस की एक वजह यह थी कि एक तो सोनम ने अपने मन से प्यार कर के उन्हें आघात पहुंचाया था, दूसरे इस से भी बड़ा आघात यह था कि नवीन उन्हीं के गोत्र का था.

हरियाणा में तो प्यार करना ही गुनाह है, ऊपर से अगर प्यार सगोत्री है तो प्यार करने वालों को मौत तक का फरमान सुना दिया जाता है. भला ऐसे में सुरेंद्र सिंह और उन का परिवार कैसे बरदाश्त करता कि उन की बेटी एक सगोत्री लड़के से प्यार करे. लिहाजा सोनम के घर वाले बंदिशें लगा कर उस पर नजर रखने लगे. घर वालों ने उस का मोबाइल भी छीन लिया. मिलना तो मुश्किल हो ही गया था, बातचीत में भी बाधा पड़ी तो नवीन ने एक मोबाइल फोन और सिम ला कर सोनम को दे दिया. इस के बाद दोनों एकदूसरे से अपनी पीड़ा बयां करने लगे. सोनम ने बारहवीं पास कर के बीए में दाखिला लिया तो एक बार फिर नवीन से मिलने का उस का रास्ता खुल गया.

जब सोनम के घर वालों को पता चला कि वह नवीन से घर के बाहर मिलती है तो घर वालों ने घरपरिवार की इज्जत की दुहाई दे कर उसे नवीन से संबंध खत्म कर लेने के लिए खूब समझाया. लेकिन नवीन के प्यार में पागल सोनम को घर वालों की बातें अच्छी लगने के बजाय बुरी लगीं. इस के बाद भी वह नवीन से चोरीछिपे मिलती रही. सुरेंद्र सिंह बेटी की हरकतों से तंग आ गए तो उन्होंने उसे हौस्टल में डाल दिया. सोनम के घर वालों का सोचना था कि नवीन से दूर रह कर शायद सोनम उसे भूल जाएगी, लेकिन उन की यह सोच उलटी पड़ गई.

सोनम के हौस्टल में भेजे जाने की जानकारी नवीन को हुई तो वह भी शहर में किराए पर कमरा ले कर रहने लगा. वहां कोई रोकनेटोकने वाला तो था नहीं, इसलिए दोनों खुल कर मिलनेजुलने लगे. परिणामस्वरूप उन का प्यार इतना गहरा हो गया कि वे जुदाई की बात से ही सहम उठते थे. शायद यही वजह थी कि दोनों ने घर वालों की चोरी महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पार्क में शादी कर ली थी.

जब इस बात की जानकारी घर वालों को हुई तो उन्होंने सोनम की पढ़ाई छुड़वा कर घर में कैद कर दिया. लेकिन सोनम की मोबाइल फोन से नवीन से बातें होती रहती थीं. घर वालों की सख्ती से सोनम परेशान थी और उन की बातों से वह जान गई थी कि घर वाले किसी भी कीमत पर उस का ब्याह नवीन से नहीं करेंगे. जबकि उसे लगता था कि नवीन के बिना वह रह नहीं पाएगी. नवीन भी बारबार उस से यही कहता था कि वह भी उस के बिरा नहीं रह सकता. किसी दिन बातचीत में जब सुरेंद्र सिंह ने कहा कि उन के जीतेजी यह शादी नहीं हो सकती तो सोनम के मन में आया कि उन के मरने के बाद तो हो सकती है. बस उस ने तय कर लिया कि वह ब्याह करेगी तो नवीन से ही, भले ही घर वालों को मारना ही क्यों न पड़े.

इस के बाद सोनम ने इस विषय पर नवीन से बात की तो वह भी राजी हो गया. दोनों ने इस विषय पर गहराई से सोचाविचारा. इस तरह नवीन के प्यार में अंधी सोनम ने अपने घर वालों को खत्म करने की योजना बना डाली. इसी योजना के अनुसार, नवीन ने अपने दोस्त जसबीर से नशे की गोलियां मंगवाई. जसबीर का दोस्त ओमवीर कैमिस्ट था. जसवीर उस से नशे की 100 गोलियां ले आया और नवीन को दे दीं. नवीन ने वे सारी गोलियां सोनम को दे दीं. उस दिन रात का खाना सोनम ने ही बनाया. उस ने नवीन द्वारा दी गई नशे की गोलियां आटे और सब्जी में मिला दीं. नशे की गोलियां पड़ी होने की वजह से रात का खाना खाने के बाद घर के सभी लोग गहरी नींद सो गए. इस के बाद सोनम ने फोन कर के नवीन को बुला लिया.

जिस समय नवीन सोनम के घर आया, उस समय रात के 10 बज रहे थे. सोनम ने सब से पहले अपने मातापिता सुरेंद्र सिंह और प्रमिला के गले में रस्सी डाल कर गला घोंटा. इस के बाद सामने वाले मकान में सो रही दादी भूरी देवी, भाई अरविंद और फिर चाचा की बेटियों सोनिका, मोनिका तथा बेटे विशाल की कपड़े से गला घोंट कर हत्या कर दी. अपने ही घरपरिवार के 7 लोगों की हत्या करने के बाद सोनम को खुद को बचाने की चिंता हुई. इस के लिए उस ने सोचाविचारा तो उसे लगा कि कुछ ऐसा किया जाए कि लोगों को लगे कि ये हत्याएं लूट के लिए की गई हैं. इस के लिए उस ने नवीन के साथ मिल कर घर का सामान इधरउधर फैला दिया. इतना सब कर के दोनों ने लाशों के बीच अपने जिस्म की प्यास भी बुझाई.

इस के बाद नवीन अपने घर चला गया तो सोनम ने बेहोशी का नाटक करते हुए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया. इस के अगले दिन नवीन छारा गांव के रहने वाले अपने मामा के घर चला गया. तकदीर सिंह रात को सोने के लिए गांव के बाहर वाले मकान पर चले जाते थे. सुबह की चाय उन के लिए वहीं पहुंचाई जाती थी. उस दिन वह फ्रैश हो कर रोज की तरह चाय का इंतजार करने लगे. काफी देर तक जब उन के लिए कोई चाय ले कर नहीं आया तो उन्हें चिंता हुई कि आखिर कोई चाय ले कर क्यों नहीं आया.

जब काफी देर हो गई तो तकदीर सिंह घर की ओर चल पड़े. घर पहुंच कर उन्होंने दरवाजा खटखटाने के लिए हाथ बढ़ाया तो वह खुल गया. घर का दरवाजा खुला देख कर उन्हें हैरानी हुई. उन्होंने आवाज लगाई. आवाज लगाने पर जब कोई जवाब नहीं आया तो उन का दिल धड़क उठा. धड़कते दिल से वह अंदर दाखिल हुए तो उन का दिल जिस आशंका से धड़का था, वह गलत नहीं थी. अंदर कमरे में बेटा सुरेंद्र और उस की पत्नी प्रमिला बैड पर बेसुध पड़ी थी.  नजदीक पहुंच कर जब उन्होंने उन के गले पर पड़े निशान देखे तो उन के मुंह से चीख निकल गई.

चीख इतनी तेज थी कि आसपड़ोस वाले जैसे थे, उसी हालत में उन के पास पहुंच गए. देखते ही देखते काफी संख्या में लोग जमा हो गए. तकदीर सिंह सामने वाले घर में पहुंचे तो वहां पत्नी और पोतेपोतियों की लाशें देख कर सिर थाम कर जमीन पर बैठ गए. सुरेंद्र की बड़ी बेटी सोनम कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. उस की तलाश शुरू हुई तो वह बाथरूम में बेहोश मिली. उसे तत्काल इलाज के लिए पीजीआई भेज दिया गया.

मकान के चौबारे में 2 इलैक्ट्रीशियन सोए थे. दोनों सुरेंद्र के मकान में बिजली फिटिंग करने आए थे. रात को वे वहीं रुक गए थे. दोनों को सुबह गांव वालों ने जगाया तो उन्हें घटना का पता चला. पूछताछ में उन्होंने बताया कि रात का खाना खाने के बाद पता नहीं क्या हुआ कि वे इतनी गहरी नींद सो गए कि उन की आंख उन लोगों के जगाने पर खुली है. एक ही परिवार के एक साथ 7 लोगों की हत्या से पूरे गांव में मातम फैल गया था. किसी ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दे दी थी. घटना अति गंभीर थी, इसलिए सूचना मिलते ही थाना पुलिस ही नहीं, जिले के सभी पुलिस अधिकारी भी गांव कबूलपुर पहुंच गए थे.

पुलिस जांच शुरू होते ही पुलिस को पता चल गया कि पुलिस का ध्यान बंटाने के लिए घर का सामान फैलाया गया है, जबकि असल में ऐसा कुछ भी नहीं था. पुलिस ने फोरैंसिक एक्सपर्ट, डौग स्क्वौयड आदि को भी बुला लिया था. लेकिन इस सब से पुलिस को तत्काल कोई सफलता नहीं मिली थी. तकदीर सिंह का कहना था कि उन की किसी से ऐसी दुश्मनी नहीं थी कि इस तरह उन के परिवार को मार देता. पुलिस ने घटनास्थल की सारी औपचारिकताएं पूरी कर के सभी लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद सुरेंद्र सिंह के मामा की शिकायत पर कर्मवीर, उस की पत्नी और एक अन्य रिश्तेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर के जांच शुरू कर दी गई.

चूंकि मामला एक पूर्व विधायक की बेटीदामाद और सैनिक के बच्चों की हत्या का मामला था, इसलिए पुलिस इस मामले के खुलासे के लिए जीजान से जुट गई थी. लेकिन कहीं से कोई सुराग नहीं मिल रहा था. लेकिन जब डीएसपी हैडक्वार्टर दलवीर यादव ने सोनम के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस की एक नंबर पर लगातार और लंबीलंबी बातें होती थीं. जब उस नंबर के बारे में पता किया गया तो वह नवीन का नंबर निकला.

इस बीच पुलिस को पता चल गया था कि सोनम और नवीन के बीच प्रेमसंबंध चल रहा था, जिस को ले कर सोनम के घर में कलह चल रही थी. 2 दिनों बाद पीजीआई से डिस्चार्ज होने के बाद पुलिस ने पूछताछ के लिए सोनम को थाने बुला लिया. पूछताछ शुरू हुई तो सोनम ने इधरउधर की बातें कर के पुलिस को बरगलाने की काफी कोशिश की. लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की तो हवस में अंधी एक ऐसी लड़की की कहानी उस ने सुनाई, जिस ने जिस मांबाप ने पैदा किया था, जिस दादी की गोद में वह पलीबढ़ी थी और जिन भाईबहनों के साथ खेलकूद कर जवान हुई थी, उन सभी को प्रेमी के साथ मिल कर मार दिया था.

सोनम के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने नवीन को उस के मामा के गांव छारा से गिरफ्तार कर लिया था. इस के बाद पुलिस ने उस के दोस्त जसबीर और उस के कैमिस्ट दोस्त ओमवीर को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया गया. इस के बाद पुलिस ने समय से अदालत में चार्जशीलट पेश कर दी, जिस के बाद अदालती काररवाहियों का सिलसिला शुरू हुआ. सुनवाई के दौरान इस बहुचर्चित हत्याकांड में सोनम और नवीन के लिए फोरैंसिक टीम की रिपोर्ट और नवीन द्वारा सोनम को दिया गया फर्जी पते पर सिम गले की फांस बन गया. फोरैंसिक टीम ने जांच में घर के अंदर खड़ी मोटरसाइकिल के शीशे पर नवीन के फिंगरप्रिंट पाए थे. इस के अलावा मृतकों के विसरा में मिला नशीला पदार्थ और सब्जी तथा आटे में मिला पदार्थ एक ही पाया गया था.

पूछताछ में इलैक्ट्रीशियन ने बताया था कि उस रात सोनम ने ही खाना बना कर सभी को खिलाया था. उन्हें भी वही खाना दिया गया था, जो परिवार के अन्य सदस्यों को दिया गया था. उन की भी गवाही मुकदमे में अहम साबित हुई थी. नवीन की निशानदेही पर पुलिस ने दवा के रैपर एक खंडहर से बरामद किए थे. यह मुकदमा करीब साढ़े 4 साल तक चला. अंत में सेशन जज श्री सुनील कुमार गुप्ता की अदालत ने सोनम, उस के प्रेमी नवीन और जसवीर को दोषी करार दिया, जबकि इस हत्याकांड में ड्रग्स एक्ट के तहत नामजद ओमवीर को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया.

सजा के लिए हुई बहस में पीडि़त पक्ष के वकीन ने फांसी की मांग की. इस के लिए रेलूराम पुनिया हत्याकांड और उत्तराखंड के सुंदर मामले का उदाहरण दिया गया. इन दोनों मामलों में परिवार के लोगों की सामूहिक हत्या की गई थी और इन में फांसी की सजा सुनाई गई थी. जबकि बचाव पक्ष ने जीने का अधिकार की बात करते हुए फांसी न दिए जाने की मांग की.

दोनों पक्षों की बहस के बाद जज श्री सुशील कुमार गुप्ता लंच के बाद 2 बज कर 5 मिनट पर कुर्सी पर बिना बैठे ही एक मिनट में फैसला सुना कर अपने केबिन में चले गए थे. अपने प्रेमी के साथ मिल कर परिवार के 7 लोगों को गला घोंट कर मौत के घाट उतारने वाली सोनम और उस के प्रेमी नवीन को उन्होंने फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि साजिश में शामिल नवीन के साथ गांव छारा निवासी जसबीर को आजीवन कारावास की सजा दी थी. शाम करीब साढ़े 4 बजे तीनों दोषियों को फैसले की कापी दे कर सुनारिया जेल भेज दिया गया था. Love Crime Story

 

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