Haryana Crime: एक बार किसी के हस्ताक्षर देख कर हूबहू वैसे ही हस्ताक्षर कर लेना धनीराम मित्तल के बाएं हाथ का खेल था. उस के द्वारा किए गए फरजी हस्ताक्षरों को हैंडराइटिंग एक्सपर्ट भी नहीं पकड़ सकते थे. फरजी हस्ताक्षरों के सहारे वह अफसर ही नहीं बना, झज्जर की कोर्ट में सवा महीने तक जज बन कर उस ने तमाम मुलजिमों को जेल से रिहा भी करा दिया था.
अब तक एक हजार से अधिक आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुके धनीराम मित्तल का जन्म 29 जून, 1939 को हरियाणा के भिवानी शहर के रहने वाले अमीलाल मित्तल के घर हुआ था. अमीलाल एक साधनसंपन्न व्यक्ति थे. उन के परिवार में पत्नी किन्नी देवी के अलावा 4 बेटियां और 5 बेटे थे. उन की एक आटा मिल थी, जिस से आमदनी अच्छी हो रही थी, सो उन्हें 9 बच्चों का पालनपोषण करने में कोई दिक्कत नहीं आई. अमीलाल ने उस जमाने में अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाई थी. धनीराम ने रोहतक के हिंदू कालेज से बीएससी की थी.
धनीराम तेजतर्रार होने के साथ पढ़ाई में भी होशियार था. बीएससी करने के बाद उस ने राजस्थान के श्रीगंगानगर के खालसा कालेज से एलएलबी की. इस के बाद उस ने करनाल स्थित ‘मौडर्न सेल’ नाम के इंस्टीट्यूट से हस्तलिपि विशेषज्ञ का एक साल का डिप्लोमा किया. इसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए उस ने कोलकाता में रह कर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट का 3 साल का डिप्लोमा किया. पढ़ाई के साथसाथ वह सरकारी नौकरी पाने की भी तैयारी कर रहा था. उस की मेहनत रंग लाई. रेलवे में क्लर्क की परीक्षा पास करने के बाद सन 1942 में वह दिल्ली जंक्शन पर बुकिंग क्लर्क बन गया. सरकारी नौकरी मिलने से घर वाले भले ही खुश थे, लेकिन धनीराम इस नौकरी से खुश नहीं था.






