UP Crime: पिस्टल गर्ल के नाम से फेमस 27 वर्षीय अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा ने अपनी एक गैंग बना रखी थी. इस लेडी डौन के नाम से पुलिस वाले तक खौफ खाते थे. डीएसपी, एसएचओ और मालूम कितने पुलिसकर्मियों को वह हनीट्रैप के जाल में फांस कर उन से मोटी रकम वसूल चुकी थी. एक शरीफ और सीधेसादे परिवार में जन्मी अंशिका सिंह आखिर अपराध के दलदल में कैसे पहुंची? पढ़ें, सोशल मीडिया क्राइम की यह खास स्टोरी.

शराब से भरा कांच का गिलास हाथ में थामे अंशिका सिंह बोली, ”यार बंटी, 50 हजार रुपए और कहां से लाऊं, समझ में नहीं आ रहा है. वरना कल की पार्टी किरकिरी हो जाएगी.’’

इस से पहले अंशिका 2 पैग ले चुकी थी. शराब उस पर अपना असर दिखा चुकी थी. दिमाग और जुबान दोनों उस का साथ नहीं दे रहे थे. तभी वह लडख़ड़ाती जुबान में आगे बोली, ”तेरे पास हो तो तू दे दे, बाद में तेरे को वापस कर दूंगी, पक्का. आई प्रौमिस.’’ कह कर गिलास थामे वह बंटी की तरफ देखती रही.

”यार, तू कैसी बातें करती है. तेरे हुस्न के पिटारे में कई नगीने कैद हैं, फिर भी तू परेशान है. किसी के भी द्वार पर दस्तक दे दे, फट से तेरी झोली भर जाएगी.’’ बंटी भी हाथ में शराब से भरा कांच का गिलास पकड़े हवा में झूम रहा था.

”तू कह तो सच रहा है भाई, मेरे हुस्न के पिटारे में बहुतेरे नगीने कैद हैं, किसी एक को भी आवाज दे दूं तो वो नंगे पांव दौड़ेभागे चले आएं मेरे पास. 50 हजार की बात कौन करे, इस जवानी पर लाखलाख रुपए लुटा दें. ‘‘

”तो किस बात की देर है, निकाल पिटारे से किसी नगीने को और अपने हुस्न के हंटर से लगा 2 कोड़े. ससुरा फडफ़ड़ाता हुआ तेरी जूती पे नाक रगड़ता दिखेगा.’’

”तू ही बता दे मेरे बेवड़े आशिक, किस पर चलाऊं अपने हुस्न का हंटर.’’

”वो तेरा नया आशिक विशाल मित्ता है न, उसी को लगा दे दांव पर. साला मालदार तो है ही, उस के लिए 25-50 हजार क्या चीज है. तू जो कहेगी, ला कर तेरे कदमों में डाल देगा अभी के अभी. वैसे मानना पड़ेगा तेरे को अंशिका, तू लोमड़ी से भी ज्यादा शातिर है.’’

”वो कैसे बंटी?’’

”देख अंशिका, तू मेरे से सयानपट्टी मत कर, मैं तेरी नसनस से वाकिफ हूं, तूने कैसे विशाल को कब्जे में लेने की तरकीब निकाली है. अपनी इज्जत बचाने के लिए पूरी जिंदगी तेरे इशारों पर नाचेगा वो, तू जो कहेगी वो करेगा.’’

”तू मानता है न मेरे को, मेरे शातिर दिमाग को. एक ही झटके में कैसे उसे चित कर डाला. ऐसे ही नहीं बीड़ू उस की बीवी से दोस्ती की है. उस ने मेरे को जब से पत्नी के साथ देखा है, तब से उस के माथे पर इस ठंड के मौसम में भी पसीना चुहचुहा उठा है. बेचारा विशाल मेरे को फोन कर के पत्नी को कुछ भी न बताने के लिए गिड़गिड़ा रहा था.’’

”तो ठोक दे साले पे 50 हजार की मोहर, रकम हंसता हुआ तेरी झोली में डाल जाएगा.’’

”आइडिया बुरा नहीं हैं, बीड़ू. लगाती हूं 50 हजार की मोहर उस की जेब पर. सांप के माफिक फन उठाए रेंगता हुआ मेरे कदमों में आ गिरेगा बेचारा आशिक.’’

”तो हुआ डन.’’

”यस, माई डियर, डन डना डन डन.’’

”तो हो जाए चीयर्स.’’

”चीयर्स.’’ कह कर अंशिका हाथ में थामे शराब के गिलास से बंटी के गिलास से टकरा कर चीयर्स किया और एक ही झटके में हलक के नीचे उतार दी. और पल भर बाद लडख़ड़ाते कदमों से बिस्तर की ओर बढ़ी और धड़ाम से बैड पर गिरी. कुछ ही देर में वह खर्राटा भरने लगी.

इस से पूर्व उस ने बंटी को जाते हुए दरवाजे को आपस में भिड़का कर अपने घर जाने को कह दिया था. उस ने अंशिका की बातों को सिरआंखों पर रखते हुए वैसा ही किया था, जैसा करने को उस ने कहा था. यह बात 20 जनवरी, 2026 की रात करीब साढ़े 9 बजे की थी.

हो गया खूनी बर्थडे

उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर मुख्यालय से डेढ़ किलोमीटर दूर दक्षिण में वीआईपी थाना कैंट स्थित है. इसी थानाक्षेत्र के अंतर्गत दीवानी कचहरी, मंत्री आवास, जजों के अपार्टमेंट्स सहित तमाम पौश कालोनियां आती थीं. पुलिस सुरक्षा की जिम्मेदारी थाना कैंट पुलिस पर ही है. कैंट थाने से करीब 5 किलोमीटर पूरब में सिंघडिय़ा कालोनी बसी है. इसी कालोनी में एक किराए का कमरा ले कर अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा भी रह रही थी, जो मूलरूप से गोरखपुर के हरपुर बुदहत थाने के झुडिय़ा बाबू की रहने वाली थी. वह यहां अकेली रहती थी. हालांकि उस के पापा राजकुमार सिंह (परिवर्तित नाम), जो पेशे से एक किसान थे, कोरोना काल में गुजर गए थे.

राजकुमार के परिवार में पतिपत्नी सहित कुल 7 सदस्य थे, जिन में 4 बेटियां और एक बेटा था. उन की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी पत्नी पर आ गई थी. जैसेतैसे उन्होंने अपनी गृहस्थी की बागडोर थामी. राजकुमार ने अपने जीते जी 2 बेटियों की शादी कर दी थी, जबकि बेटा मुंबई निकल चुका था और वहीं रह कर एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करने लगा था. उस की भी शादी हो चुकी थी. वह हमेशा के लिए अपना घर छोड़ कर मुंबई में बस गया था.

फेमिली से तोड़े संबंध

तीसरे नंबर की बेटी अंशिका सिंह परिवार से अलग रह रही थी और फेमिली वालों ने भी उस से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे. स्वच्छंद खयालातों वाली अंशिका अपनी मरजी की मालिक थी. करीब 4 साल हो चुके थे न तो वह अपने घर लौट कर गई थी और न ही घर वालों ने उस की खोज खबर ही ली थी.

खैर, बला की खूबसूरत 27 साल की अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा अपने परिवार से अलग रहती थी. 20 जनवरी, 2026 को उस का बर्थडे आने वाला था. इस बार अपना बर्थडे बड़ी धूमधाम से मनाने की योजना दोस्तों के साथ बना चुकी थी. बर्थडे पार्टी में खर्च कुछ ज्यादा ही आ रहा था. कुछ पैसे उस ने इधरउधर से अरेंज कर लिए थे. बावजूद इस के 50 हजार रुपए की और जरूरत थी. वरना पार्टी उस तरीके से नहीं बनती जैसी उस ने योजना बनाई थी. समझ में नहीं आ रहा था कि 50 हजार रुपए का कहां से इंतजाम करे.

21 जनवरी, 2026 यानी अगले दिन अंशिका का बर्थडे था. सुंदर और गुलाबी चेहरा सुबह से ही खिला हुआ था. सुबह से ही उस के चाहने वालों के फोन आ रहे थे और उसे शुभकामनाएं दे रहे थे. इसीलिए वो कुछ ज्यादा ही खुश थी. शाम 6 बजे के करीब अंशिका ने फोन कर के अपने दोस्तों आकाश वर्मा उर्फ बंटी, शिवम सिंह, विकास और अर्जुन वर्मा को अपने घर पर बुलाया, फिर कार बाहर निकाल कर बंटी को ड्राइविंग सीट पर बैठा कर खुद आगे की सीट पर बैठ गई तो पीछे वाले सीट पर विकास और अर्जुन वर्मा बैठ गए.

थोड़ी देर बाद अंशिका दोस्तों के साथ कैंट थानाक्षेत्र स्थित मौडल शौप सिंघडिय़ा पहुंची. कार से चारों बाहर निकले और मौडल शौप के भीतर गए और एक कार्नर की टेबल के सामने चारों बैठ गए. फिर वहीं से बैठी अंशिका ने विशाल मित्ता को फोन किया, ”हैलो! अरे विशालजी, कहां हो आप?’’

”कुछ काम से बाहर निकला हूं. बताओ, किसलिए फोन किया?’’ कौल रिसीव करते ही विशाल के चेहरे पर परेशानियों की लकीरें उभर आई थीं, ”कोई बात तो नहीं है?’’

”आप जैसे लोग मेरे शुभचिंतक हों तो मेरे को काहे की चिंता करनी. वैसे आप को बता दूं कि आज मेरा बर्थडे है, मेरे को 50 हजार चाहिए, मेरे अकांउट में तुरंत ट्रांसफर कर दो.’’

”50 हजार…’’ सुन कर विशाल ऐसे उछला था, जैसे उस ने कोई अजूबा देख लिया हो, ”क्यों खालीपीली मजाक करती हो? अभी मजाक के मूड में नहीं हूं. ‘‘

”तुम मेरे खसम तो हो नहीं, जो मैं तुम से मजाक करूंगी. फिलहाल मैं भी मजाक के मूड में नहीं हूं और न ही मजाक कर रही हूं. 10 मिनट में पैसे ट्रांसफर कर दो. मैं वेट कर रही हूं.’’ अंशिका की आवाज में धमकी की बू आ रही थी.

”देख अंशिका, इतने पैसे तो मेरे पास नहीं है. थोड़ा वक्त दो, कहीं से मैं जुगत कर के पैसों का इंतजाम करता हूं फिर पैसे देता हूं.’’ अंशिका के सामने उस ने अपनी लाचारी जाहिर कर दी.

”50 हजार बोले तो 50 हजार. तू कहीं से ला कर दे.’’ अंशिका के तेवर बदल गए थे, ”कर्ज ले, भीख मांग या कुछ और कर, मैं नहीं जानती, मेरे को पैसे चाहिए तो चाहिए.’’

”पैसे नहीं दिए तो?’’

”तो तू जानता है न, तेरी बीवी मेरी अच्छी सहेली बन गई है, मेरे साथ बहुत मजे करती है, तेरी पोल उस के सामने खोल दूंगी तो सोच तेरा क्या होगा?’’ अंशिका ने धमकी दी.

”फिर भी न दूं तो… ‘‘

”तो रेप केस में जेल जाने के लिए तैयार हो जाना. तूने मेरा रेप किया है या नहीं, पुलिस यह नहीं पूछेगी, सीधा तुझे जेल भेज देगी. फिर उस के बाद तेरी जो घरसमाज में बदनामी होगी और लोग जब तुझ पर थूथू करेंगे, तब ज्ञान का ढक्कन खुल जाएगा कि किस से पंगा लिया है.’’ अंशिका ने फिर से ढीठ बन कर धमकी दी.

”ठीक है, मैं पैसे इंतजाम कर के आ रहा हूं. तू है कहां?’’

”सिंघडिय़ा मौडल शौप. जल्दी आ, वेट कर रही हूं मैं तेरा.’’

”ठीक, पहुंचता हूं मैं.’’ फिर विशाल फोन डिसकनेक्ट कर दिया और अपने कार ड्राइवर अमिताभ निषाद और दोस्त शैलेष को साथ ले कर मौडल शौप सिंघडिय़ा रवाना हो गया.

उस समय वो दोस्त के साथ कडजहां किसी काम से गया हुआ था. वहीं उस ने रमन से उधार पैसे मांगे. उस समय उस के पास 20 हजार रुपए थे, उस ने पूरे के पूरे दे दिए. वही रुपए ले कर विशाल दोस्त के साथ सिंघडिय़ा पहुंचा था.

अंशिका मौडल शौप के बाहर अपने दोस्तों के साथ चहलकदमी करती हुई अंदर बाहर कर रही थी. जैसे ही उस की नजर विशाल पर पडी, वह उछल गई. यही नहीं, वह लपक कर उस के नजदीक जा पहुंची और हाथ बढ़ाती हुई पैसों की मांग करने लगी, ”लाओ, पैसे दो मेरे को.’’

विशाल ने पैंट के दाहिनी जेब में हाथ डाल कर रुपए निकाले और अंशिका की ओर बढ़ा दिए.

”कितने हैं?’’ अंशिका कड़क आवाज में बोली.

”20 हजार. यही था मेरे पास. अब और नहीं दे सकता. ‘‘

”मेरा मूड खराब मत करो, विशाल. मैं बिलकुल भी मजाक के मूड में नहीं हूं. 50 हजार चाहिए मेरे को. बाकी के 30 हजार फटाफट निकालो.’’

”अब कोई पैसे नहीं हैं मेरे पास. जो था, वह मैं ने दे दिया. रही बात मजाक की तो मैं भी मजाक के मूड में नहीं हूं. बहुत पैसे तुम्हें दे दिया मैं ने, अब बस. एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा. जो करना हो कर लेना.’’ विशाल भी अपनी जगह अड़ गया.

”मेरे गुस्से को और न भड़का, वरना…’’

”वरना क्या. गोली मार दोगी मुझे?’’

विशाल का इतना ही कहना था कि अंशिका का गुस्सा लावा बन कर फूट पड़ा. उस ने आव देखा न ताव, कमर में खोंस रखी पिस्टल निकाली और विशाल के सीने पर सटा दी.

यह देख कर विशाल की घिग्घी बंध गई. उस की समझ में नहीं आया कि क्या करे. इतने में अंशिका ने पिस्टल का ट्रिगर दबा दिया.

इस से पहले कि गोली उसे लगती, बड़ी फुरती के साथ उस ने ड्राइवर अमिताभ निषाद को अपनी ओर खींच लिया. पिस्टल से निकली गोली उस के पेट में जा लगी और वो हवा में लहराते हुए वहीं सड़क पर जा गिरा और तड़पने लगा. इतने में अंशिका और उस के दोस्त मौके का फायदा उठाते हुए कार का दरवाजा खोलने लगे.

लेकिन दरवाजा खुला नहीं. तब तक गोली की आवाज सुन कर आसपास खड़ी पब्लिक ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और अंशिका को धर दबोचा. इस बीच मौके का फायदा उठा कर उस के दोस्त फरार हो गए. तभी किसी ने कैंट थाने को फोन कर घटना की सूचना दी.

थार लूट में भी अरेस्ट

घटना की सूचना मिलते ही थाना कैंट के इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह मय दलबल मौके पर पहुंच गए और अंशिका को अपनी कस्टडी में ले कर थाने लौट आए. उधर गोली लगने से घायल अमिताभ निषाद को आननफानन में कार से नर्सिंगहोम ले जाया गया, जहां उस की हालत गंभीर देख कर उसे एम्स मैडिकल इंजीनियरिंग कालेज रेफर कर दिया गया. वहां डौक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू कर दिया, जिस से उस की स्थिति स्थिर बनी रही.

पुलिस अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा को हिरासत में ले कर थाने पहुंची और उस से कड़ाई से पूछताछ की तो यह जान कर पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसकती नजर आई कि यह तो पुलिस के लिए वांछित अभियुक्त है और करीब 5 महीने पहले दिल्ली से चुराई थार कार में इसकी और इस के 4 साथियों की भी तलाश की जा रही थी. इस का नाम अंशिका सिंह है और यह संगठित गिरोह चलाती हैं.

यह चोरी के मामले के साथ कइयों को हनीट्रैप का शिकार भी बना चुकी थी. इस मामले में भी इस की तलाश चल रही थी. कार चोरी वाले मामले में पुलिस से बचने के लिए इस ने अग्रिम जमानत ले ली थी. जिस कारण पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई थी. जमानत लेने के बाद वह भूमिगत हो गई थी और अब जा कर पुलिस के हाथ लगी थी. इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह ने मामले की सूचना सीओ (कैंट) योगेंद्र सिंह, एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी और एसएसपी राजकरन नैयर को दी. सूचना पा कर पुलिस अधिकारी पूछताछ के लिए कैंट थाने पहुंचे.

पूछताछ में अंशिका ने बताया कि वह एक डीएसपी, एक थानेदार सहित करीब 150 लोगों को हनीट्रैप का शिकार बना चुकी है. फिर उस ने पूरी कहानी विस्तार से बताई तो उस की दर्द भरी कहानी सुनकर पुलिस अधिकारियों ने दांतों तले अंगुली दबा ली. आइए पढ़ते हैं, एक साधारण परिवार में संस्कारों के बीच पलीबढ़ी अंशिका हनीट्रैपर और गैंगस्टर कैसे बनी? साल 2019-20 का वह समय शायद ही कोई भूला होगा, जब देश में कोरोना नामक महामारी सुरसा के समान मुंह बाए कइयों के घरपरिवार को लील गई थी. रोटी के अभाव में कितने परिवार टूट कर बिखर गए थे.

उसी दौर में अंशिका का परिवार भी शिकार बना था तब कोरोना के महामारी का निवाला अंशिका के पिता राजकुमार सिंह बने. अंशिका के घर वालों पर अचानक दुखों का ऐसा पहाड़ टूट पड़ा था, जहां उन्हें एक वक्त की रोटी के लिए दुश्वारियों की काली चादर ओढऩे के लिए मजबूर होना पड़ा था, क्योंकि राजकुमार ही परिवार का भरणपोषण करने वाले व्यक्ति थे. उन्हीं के कंधों पर 7 सदस्यों का दारोमदार टिका था.

उन्होंने 4 बेटियों में से 2 बेटियों की शादी कर के अपनी जिम्मेदारी से थोड़ी मुक्ति पा ली थी. इकलौते बेटे राजन की भी शादी कर चुके थे. सिर्फ 2 बेटियां अंशिका और वंशिका (परिवर्तित नाम) ही शादी करने के लिए शेष रह गई थीं. उन की भी शादी कर के जल्द से जल्द गंगा नहा लेना चाहते थे, लेकिन इस से पहले ही उन की मृत्यु हो गई. घर की जिम्मेदारियों का बोझ अंशिका की मम्मी के कंधों पर आ चुका था. अचानक आई जिम्मेदारियों के बोझ से वह थोड़ी विचलित जरूर हो गई, लेकिन टूटी नहीं थी. बस दिनरात हाड़तोड़ मेहनत कर के गृहस्थी चलाने में जुटी हुई थी.

सूत्रों के अनुसार, बेहद खूबसूरत और चंचल स्वभाव की अंशिका अपने भाई और बहनों से बिलकुल अलग थी. कम उम्र में ही शानोशौकत से जीना, रईसी ठाठबाट का रुतबा दिखाना उस की प्रवृत्ति में शुमार हो चुका था. शाही अंदाज में जीने के लिए उसे ढेर सारे पैसे चाहिए थे. उन पैसों के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए रजामंद हो चुकी थी, जबकि उसे घरपरिवार की माली हालत के  बारे में बखूबी पता था.

ऐसे बहके कदम

यहीं से उस के पांव बहकने शुरू हुए. वह दिनदिन भर घर से गायब रहती थी. लड़के और लड़कियों के साथ घूमा करती थी. मम्मी उसे समझाती थी, लेकिन उन के समझाने का उस पर कोई खास असर नहीं पड़ता था. अपनी ही मस्ती में वह जीती थी और छोटेछोटे रील बनाकर सोशल मीडिया यूट्यूब पर डालती थी और अपने रूपसौंदर्य को कैश करती थी. अपने चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए पब्लिक से रिक्वेस्ट भी करती थी. रील से उसे पैसे मिलने लगे थे. उन पैसों को वो यारदोस्तों के ऊपर उड़ा देती थी. अब तो उस ने शराब से भी यारी कर ली थी और उसे अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया था.

अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा ने देखा कि रील पोस्ट करने से कोई खास कमाई नहीं हो रही है, जिस की उसे जरूरत थी तो उस ने अपने ट्रेंड को चेंज करने का मूड बना लिया. इस में कोई दोराय नहीं है कि वह गजब की सुंदर थी. बलखा कर जब चलती थी, दीवाने आहें भरते थे. मनचलों की इसी दीवानगी को उस ने कैश कराने का नायाब तरीका ढंूढ निकाला. और उसी हथियार से दीवानों को घायल करने की योजना भी बना डाली.

इसी दरमियान, उस के जीवन में एक नया मोड़ आ गया था. लड़के और लड़कियों के साथ दिन भर गायब रहने वाली अंशिका मोहल्ले में चर्चा का विषय बन गई थी. मसलन आज किसी और लड़केलड़कियों के साथ घूमते देखा जाता था तो कल नए के साथ घूमती नजर आती थी. कपड़ों की तरह लड़कों को बदलती थी. खुद से ही खुद के पैरों को बदनामी के दलदल में धंसाए जा रही थी. अंशिका की बदनामी की आंच से पूरा घर जल रहा था. नित नएनए किस्से लोगों के जुबान से सुने जाने लगे थे और वे चटखारे ले ले कर मजे लेने लगे थे. लोगों के भद्देभद्दे कमेंट सुनसुन कर घर वालों के कान पक गए थे. मोहल्ले में उन का रहना और जीना दुश्वार हो गया था.

और तो और लोग फेमिली वालों को अच्छी नजरों से नहीं देख रहे थे. बेटी को सुधारने की मां ने पूरी कोशिश की थी, लेकिन उन के शासन का उस के कान पर जूं तक नहीं रेंगी थी. वह अपने अल्हड़पन टोली में ही मस्त रही और जीती रही. बेटी अंशिका की बदनामी की आंच अब घर वाले किसी और सदस्य पर पडऩे देना नहीं चाहते थे, लिहाजा वे उस सेे दूरियां बनाने में ही अपनी भलाई समझ रहे थे, सो उन्होंने उस से सारे रिश्ते तोड़ उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. तब वे खलीलाबाद से आ कर गोरखपुर में बस गए थे.

भाई तो पहले ही परिवार से रिश्ते तोड़ कर परिवार सहित मुंबई में बस गया था. जब से घर वालों से रिश्ता तोड़ा था, उस के बाद से पलट कर कभी घर की ओर नहीं देखा था और न ही मम्मी की सुध ही ली थी. फेमिली वालों ने अंशिका से रिश्ते तोड़ लिए थे, इस का उसे तनिक भी मलाल नहीं था, अब तो वह खुद को आजाद पंक्षी समझने लगी थी और पूरे आसमान में स्वच्छंद विचरण करना चाहती थी, जहां उसे उस की आजादी पर न तो कोई रोकने वाला हो और न ही टोकने वाला हो.

अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को उस ने और हवा दे दी. जिस पैसे की भूख के नाते उस ने घरपरिवार से रिश्ते तोडऩे में समय नहीं लगाया, उन पैसों को हासिल करने की ओर कदम बढ़ा दिया था. अंशिका रील बनाने में थोड़ा कम फोकस करती थी. ऐसे मालदार लड़कों की तलाश में जुटी हुई थी, जो आसानी से उस की गिरफ्त में फंस जाए और पैसे दे दें. यह बात साल 2021 की है. अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा गोरखपुर के कैंट थानाक्षेत्र के सिंघडिय़ा इलाके में किराए का एक कमरा ले कर रहने लगी. उस ने अपना पहला शिकार देवरिया के पवन को बनाया था.

अंशिका ने फेसबुक पर अपना एक खूबसूरत फोटो डाला और फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी. पवन ने उस की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली. उस के बाद अंशिका ने मैसेंजर पर एक मैसेज डाला. उसे भी पवन ने पढ़ लिया और उसे अपना मोबाइल नंबर सेंड कर दिया. फिर दोनों के बीच वाट्सऐप के जरिए बातचीत होती रही. दोनों ने एकदूसरे को अपने फोटो भी भेज दिए.

इसी दरमियान अंशिका ने पवन के फोटो अपने मोबाइल में सेव कर लिए और फिर एक ऐप के जरिए दोनों के आपत्तिजनक न्यूड फोटो तैयार कर के वह न्यूड फोटो उसे भेज दीं. आपत्तिजनक हालत में फोटो देखकर पवन के पैरों तले से जमीन खिसक गई थी. वह बुरी तरह परेशान हो गया. समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? अपने मन की तकलीफ किसे शेयर करे? अभी वो इसी ऊहापोह में डूबा हुआ था कि अंशिका ने उसे न्यूड फोटो वायरल करने की धमकी दे कर इज्जत बचाने के लिए मोटी रकम की मांग कर बैठी.

पवन ने अपनी इज्जत बचाने के लिए कुछ पैसों का बंदोबस्त कर उसे दिए. पैसे हाथ लगते ही अंशिका के चेहरे पर कुटिल मुसकान थिरक उठी. इस के बाद उस ने इसी को अपने जीवन जीने का मजबूत हथियार बना लिया. अंशिका पवन से फिर से मोटी रकम की डिमांड कर बैठी तो उस ने पैसे देने से साफतौर पर मना कर दिया. फिर क्या था? अंशिका ने पवन के खिलाफ कोतवाली थाने में दुष्कर्म करने का एक फरजी मुकदमा दर्ज करा दिया. मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस ने पवन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. उस का यह हथकंडा काम कर गया तो उस ने इसे ब्लैकमेल करने का मजबूत हथियार बना लिया.

ऐसे फांसती गई शिकार

दूसरा शिकार अंशिका ने खलीलाबाद के उस मकान मालिक को बनाया, जिस के मकान में वह किराए पर रहती थी. पवन की तरह ही मकान मालिक को छेड़छाड और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे कर 2 लाख रुपए की डिमांड की, लेकिन वहां उस की दाल न गली. क्योंकि अंशिका की धमकियों के बाद मकान मालिक ने घर के कई हिस्सों में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे, ताकि उस की हरकतें कैमरे में कैद हो सकें और सचझूठ का सही से पता चल सके.

अंशिका छेडख़ानी और दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे कर कइयों को अपनी हनीट्रैप का शिकार बना कर पैसे ऐठ चुकी थी. अब ऐसी आसामी को अपने रूपजाल में फांस कर शिकार बनाना चाहती थी, जो लाइफटाइम सोने का अंडा देता रहे. जल्द ही उस की तलाश पूरी भी हो गई. इस बार उस ने अयोध्या जिले के एक डीएसपी (सीओ) को अपना शिकार बनाया. उस से लाखों रुपए ठगे. जब उस ने पैसे देने बंद कर दिए तो वह तिलमिला उठी.

वो इतनी आसानी से डीएसपी को हाथ से जाने देने वाली नहीं थी. उसे तो सोने की खान समझती थी, लेकिन डीएसपी भी समझ चुका था कि वो हनीट्रैप का शिकार बन चुका है. यहां मुफ्त में बदनामी ही मिलनी है, लिहाजा खुद को संभाल ले. जब डीएसपी को खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ तो उस ने अपने हाथ खींच लिए. इस से नाराज अंशिका ने डीएसपी के खिलाफ छेडख़ानी और दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया.

मामला सुर्खियों में आते ही डीएसपी की काफी बदनामी हुई और उसे पद से निलंबित कर दिया गया. इस के बाद अंशिका ने गोरखपुर के गीडा थाने के एसएचओ सहित करीब दरजनभर पुलिसकर्मियों को अपने हनीट्रैप का शिकार बनाया और उन्हें फरजी मुकदमे में फंसाने की धमकी दे कर लाखों रुपए वसूले. पते की बात तो यह है कि मामला सुर्खियों में आने के बाद गीडा इंसपेक्टर को भी थानेदारी गंवानी पड़ी थी.

अंशिका दिन पर दिन अपने जुर्म की खेती को बढ़ाती जा रही थी. उस के गैंग में आकाश वर्मा उर्फ बंटी वर्मा उस का खास सिपहसलार था तो बंटी के हाथों को देवरिया के भदेली गांव का निवासी शिवम सिंह मजबूत कर रहा था. बंटी ने ही अंशिका को पिस्टल मुहैया कराई थी. पिस्टल पा लेने के बाद उस के पैर जमीन पर नहीं थे. वह हवा में उडऩे लगी थी. अपराध की खेती के पैदावार से अंशिका का बैंक बैलेंस काफी मजबूत हो गया था. यारदोस्तों पर पानी की तरह पैसे बहाती तो थी ही, नशे को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लिया था.

कच्ची दारू की बड़ी शौकीन बन गई थी. शराब की बोतल लिए रील बनाती और उसे पोस्ट करती थी. लग्जरी जीवन जीने की आदी बन गई थी. वह चमचमाती गाड़ी में घूमती थी. अपराध के नशे में चूर अंशिका शायद भूल गई थी कि जुर्म की उम्र बहुत छोटी होती है. जिस रास्ते पर वह निकल चुकी है, वह रास्ता सीधा जेल की ओर जाता है. अपराधी भले ही कुछ पल के लिए कानून की आंख में धूल झोक कर अपनी बादशाहत बघार ले, लेकिन वो कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता है.

बात, सितंबर, 2025 की है. अंशिका अपने 5 साथियों आकाश वर्मा, अर्जुन, शिवम सिंह, देवेंद्र कुमार रावत उर्फ सोनू रावत और प्रिय प्रवास दुबे उर्फ विक्की के साथ दिल्ली घूमने गई थी. राजधानी घूमने के लिए उस ने किराए पर थार कार दिन भर के लिए बुक कराई थी. कार नई थी. अंशिका का कार पर मन डोल गया और कार ले कर फरार हो गई. कार गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले चंदन नारायण की थी. कार चोरी करने और उस पर फरजी नंबर प्लेट लगाने के मामले में चंदन नारायण ने एक लिखित तहरीर खोराबार थाने में अंशिका और साथियों के खिलाफ दी. मुकदमा पंजीकृत होने के बाद पुलिस तेजी से जांच में जुट गई थी.

अगले दिन 13 अक्तूबर को खोराबार के वनसप्ती चौराहे के पास बड़हलगंज निवासी प्रिय प्रवास दुबे उर्फ विक्की और आकाश वर्मा उर्फ बंटी को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह काले रंग की थार कार ले कर देवरिया की ओर जा रहा था. कार की जामा तलाशी लेने पर उस में से 4 फरजी नंबर प्लेट मिली थीं, जिन में 2 हरियाणा, एक बिहार और एक गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) की थी. बंटी और विक्की से पूछताछ करने पर पता चला कि सितंबर में दिल्ली घूमने गए थे. दिल्ली से गाड़ी किराए पर ली और उसे ले कर भाग गए थे.

पकड़े जाने के डर से फरजी नंबर प्लेट लगा कर घूम रहे थे. पुलिस अधिकारियों के पूछताछ में बंटी और विक्की ने अंशिका के आदेश पर चोरी करने की बात कुबूली थी.

अंशिका हुई अंडरग्राउंड

2 साथियों आकाश वर्मा उर्फ बंटी और विक्की के गिरफ्तार होने और अपना नाम सामने आने के बाद अंशिका सिंह अंडरग्राउंड हो गई थी. अंडरग्राउंड रहते उस ने अग्रिम जमानत ले ली थी. जिस से पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी और इसी का लाभ उठा कर लोगों को हनीट्रैप का शिकार बनाती रही. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब 150 लोगों को उस ने अपना शिकार बनाया था और भिन्नभिन्न ऐक्शन में रील बना कर 700 रील फेसबुक पर पोस्ट की थीं. उस के करीब साढ़े 7 हजार फालोवर बन गए थे.

सोशल मीडिया पर मोहक अदाओं में अंशिका की रील देख कर विशाल मित्ता उस का दीवाना हुआ था. फिर दोनों फेसबुक के जरिए एकदूसरे से चैटिंग करना शुरू किए थे. दोनों ने एकदूसरे को अपना मोबाइल नंबर आदानप्रदान किए. फिर मोबाइल पर देर तक बातचीत होती थी. विशाल को अंशिका से प्यार हो गया था. जबकि वह शादीशुदा था. लेकिन उसे पता नहीं था कि जिस खूबसूरत बला के मोह में वह दीवाना हुआ है, वह एक हनीट्रैपर थी, जो अपनी अदाओं का जादू बिखेर कर ठगती थी.

उस के बाद अंशिका वीडियो काल के जरिए विशाल से बात करने लगी और उस की फोटो मोबाइल में कैद कर लीं. फिर उस का न्यूड वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल करने लगी थी. ब्लैकमेलिंग की बोतल में विशाल को उतारने के बाद पहली बार अंशिका अपने साथी आकाश वर्मा उर्फ बंटी के साथ उस से पैसे वसूलने द्विवेदी चाइल्ड केयर हौस्पिटल, दिव्यनगर पहुंच गई थी. वहां उस ने विशाल को जब उस का न्यूड वीडियो दिखाया तो देख कर उसे पसीना छूट गया था. फिर क्या था? अंशिका ने उसी वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करते हुए उस से 12 हजार रुपए की मांग की.

मरता क्या न करता, विशाल ने उसे पैसे दे कर अपनी इज्जत बचाई थी. लोमड़ी से भी ज्यादा शातिर अंशिका शिकार को इतनी आसानी से जाने देने वाली कहां थी, उसे पता था कि वह शादीशुदा है, इसलिए उस ने विशाल के घर तक अपनी पहुंच बना ली थी और उस की पत्नी से अच्छी दोस्ती कर ली थी, ताकि विशाल उस के चंगुल में फंसा रहे. ऐसा नहीं था कि विशाल को उस की हरकतों के बारे में जानकारी नहीं थी, जब उस ने पत्नी को अंशिका के साथ घूमते हुए देखा था, तभी उस के पैरों तले जमीन खिसक गई थी. उस ने पत्नी से अंशिका से दूर रहने के लिए कह दिया था.

फूटा गुनाहों का घड़ा

कहते हैं कि जब गुनाहों का घड़ा भर जाता हे तो फूटना लाजिमी होता है, शायद अंशिका का गुनाहों का घड़ा भर चुका था. उस की लग्जरी जीवन जीने की आदत जो बन गई थी. 21 जनवरी, 2026 को अंशिका का बर्थडे था. इस बार वह अपने बर्थडे को यादगार बनाना चाहती थी. पार्टी के लिए उस ने कुछ पैसों का इंतजाम कर लिया था, अभी भी उसे 50 हजार रुपए कम पड़ रहे थे, तभी उस ने बंटी से बात करके विशाल से वसूलने का प्लान बनाया.

जैसेतैसे कर के विशाल ने 20 हजार रुपए का इंतजाम किया और वह रुपए अंशिका को देने उस के बताए स्थान मौडल शौप सिंघडिय़ा पहुंचा भी था, लेकिन रुपए कम होने के नाते अंशिका ने लेने से इंकार कर दिए और पास रखे पिस्टल से विशाल पर फायर झोंक दिया, जो बीचबचाव में गोली विशाल के ड्राइवर अमिताभ निषाद के पेट में जा गई. विशाल मित्ता की तहरीर पर इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह ने अंशिका सहित उस के साथियों आकाश वर्मा उर्फ बंटी, अर्जुन वर्मा और शिवम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. मौके से अंशिका ही पकड़ी गई थी, जबकि बंटी, अर्जुन और शिवम फरार हो गए थे. 2 मार्च, 2026 को अर्जुन वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

14 मार्च, 2026 को खोराबार थाने के एसएचओ सुधांशु सिंह की तहरीर पर अंशिका सहित आकाश वर्मा उर्फ बंटी, अर्जुन, शिवम सिंह, देवेंद्र कुमार रावत उर्फ सोनू रावत और प्रिय प्रवास दुबे उर्फ विक्की के खिलाफ थार कार चोरी के अपराध में उत्तर प्रदेश गिरोहबंद समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया. गैंगस्टर ऐक्ट के तहत काररवाई की सूचना मिलते ही अंशिका की सारी अकड़ ढीली पड़ गई थी. वह जेल में फूटफूट कर रो रही थी.

यही नहीं 24 मार्च को आकाश वर्मा उर्फ बंटी और 25 मार्च को शिवम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर और संगीन मामले में लगभग दरजन भर मुकदमे दर्ज हैं. पुलिस सभी की हिस्ट्रीशीट खोलने की तैयारी कर चुकी है.    अपराध के सतरंगी रथ पर सवार तब अंशिका को तनिक भी इल्म नहीं हुआ कि जिस रथ पर सवार हो कर मुट्ठी भर सिपहसलारों के दम पर दंभ भर रही है, एक दिन उस का अंत जेल की सलाखों के पीछे जा कर होगा.

जिला ही नहीं प्रदेश स्तर पर कुख्यात हुई अंशिका की कलाई में जब पुलिस ने हथकड़ी पहनाई तो जहान भर का दर्द उस की आंखों के रास्ते आंसू बन कर छलक उठा और अपने किए पर पछतावा होने लगा.

पुलिस ने 17 अप्रैल, 2026 को इस गैंग के एक और सदस्य देवेंद्र कुमार रावत उर्फ सोनू को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की. पूछताछ के बाद उसे भी जेल भेज दिया. अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा के साथी एक एक कर के सलाखों के पीछे पहुंच गए. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस ने किनकिन पुलिस वालों को अपने हनीट्रैप के जाल में फंसा कर कितने पैसे ऐंठे हैं?

अपराध की काली कमाई से अंशिका ने जो भी संपत्ति अर्जित की, उस पर बुलडोजर चलाने की तैयारी पुलिस कर रही थी. कथा लिखे जाने तक जांच जारी थी. UP Crime

—कथा में कई पात्रों के नाम परिवर्तित किए गए हैं.

 

 

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