Surat Crime News: यह जान कर ज्यादातर लोगों को हैरानी होगी कि समुद्र की सब से बड़ी मछली व्हेल की उल्टी होती है कीमती है. कारण इस का इस्तेमाल महंगे इत्र बनाने के काम आता है. मोम की तरह दिखने वाला खुशबूदार यह पदार्थ एंबरग्रीस कहलाता है.
पिछले दिनों इसी एंबरग्रीस यानी व्हेल की उल्टी के साथ सूरत के डिंडोली इलाके में 3 लोग गिरफ्तार किए गए. इस का वजन कुल 1.071 किलोग्राम था, जिस की कीमत 1.07 करोड़ रुपए आंकी गई. इस मामले में गिरफ्तार किए गए 3 लोगों की पहचान अंबरीश मिश्रा, सोनू उर्फ बबलू उपाध्याय और संदीप उपाध्याय के रूप में हुई.
अंबरीश उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का रहने वाला है और डिलीवरी एग्जीक्यूटिव का काम करता है, जबकि बाकी दोनों जौनपुर के ही रहने वाले रिक्शाचालक हैं. कुछ समय से तीनों ही सूरत में रह रहे थे. व्हेल की ‘उल्टी’ यानी एंबरग्रीस को कुदरत का खजाना कहा जाता है, जो व्हेल के शरीर में बनने वाला एक दुर्लभ पदार्थ है. यह समुद्र में समय के साथ कीमती और खुशबूदार बन जाता है. यह महंगे परफ्यूम बनने के काम आता है, लेकिन कई देशों में इस का व्यापार प्रतिबंधित है.
यह पदार्थ दुनिया के सब से कीमती प्राकृतिक संसाधनों में से एक है. यह खासतौर पर स्पर्म व्हेल के शरीर में बनता है. व्हेल के पाचन तंत्र में यह तब बनता है, जब वह समुद्री जीव स्क्पिड को खा लेती है. स्क्विड के नलीनुमा शरीर में 10 भुजाओं, जिस के नलीनुमा शरीर में 8 हाथ और 2 टेंटकल्स होते हैं. यह तेज तैरने वाला जीव है.
स्क्विड की कठोर चोंच को पचाना व्हेल के लिए मुश्किल होता है, इसलिए व्हेल के शरीर में एक खास तरह का मोम जैसा पदार्थ बनता है, जो इन हिस्सों को ढक लेता है. समय के साथ यह पदार्थ सख्त हो कर समुद्र में बाहर निकल जाता है और फिर सालों तक समुद्र में तैरता रहता है. एंबरग्रीस समुद्र में लंबे समय तक रहने के बाद हल्का, खुशबूदार और बेहद कीमती बन जाता है. शुरुआत में इस की गंध तेज और असहनीय होती है, लेकिन समय के साथ इस से एक मीठी, मिट्टी जैसी खुशबू निकलने लगती है.
इस कारण इसे ‘तैरता हुआ सोना’ भी कहा जाता है. इस की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपए तक आंकी जाती है. यह इत्र को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है. व्हेल एक संरक्षित जीव है, इसलिए कई देशों में एंबरग्रीस का व्यापार पूरी तरह से प्रतिबंधित है. भारत में भी इसे रखना, खरीदना या बेचना गैरकानूनी है, क्योंकि यह वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत आता है. इस के पीछे मुख्य कारण यह है कि व्हेल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और किसी भी तरह से उन के शोषण को रोका जा सके.
बरामद एंबरग्रीस एक सफेद और लाल रंग के डिजाइन वाले प्लास्टिक बैग में मिला था. डीसीपी एसओजी (स्पेशल औपरेशंस ग्रुप) राजदीप सिंह नकुम के अनुसार गिरफ्तार लोगों को यह पदार्थ करीब 3 महीने पहले भरुच समुद्र तट के पास धीरू वाघेला और उमेश पलिया ने दिया था. तीनों इसे बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे थे. इसी दौरान किसी को इस की जानकारी मिली और उस ने एसओजी को सूचना दे दी, जिस के बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. Surat Crime News






