Medical College Scam :जब खेत के चारों तरफ लगी बाड़ ही खेत में लगी फसल चरने लगे तो फसल की रखवाली की उम्मीद किस से करें? कुछ इसी तरह का हाल देश में मैडिकल और इंजीनियरिंग कालेज को मान्यता देने वाली एजेंसियों का है. इस तरह की एजेंसियां लाखों रुपए की घूस ले कर महज कागजों में इस तरह के कालेजों को मान्यता दे देती हैं. सीबीआई ने एक ऐसे ही गैंग का परदाफाश किया है, जो लाखों रुपए की घूस ले कर मैडिकल कालेजों में सीट अलौटमेंट को धड़ल्ले से मान्यता दे रहा था. पढ़ें, इस गैंग के गठजोड़ की चौंकाने वाली कहानी

डौक्टर मंजप्पा सी.एन. कर्नाटक के मंड्या इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज के जानेमाने प्रोफेसर और आर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख थे. इस के अलावा वह देश भर के मैडिकल संस्थानों को मान्यता देने वाले केंद्रीय दल के हैड भी थे, लिहाजा उन की सारी अंगुलियां घी में और मुंह कड़ाही में था.

उन्होंने अपने साथ ऐसे लोगों की एक गैंग तैयार कर ली थी, जो कालेजों की मान्यता के लिए मिलने वाली रकम की बंदरबांट से अपनी जेबें भर रही थी. इस गैंग का यह काम देश में फरजी डौक्टरों की नस्ल तैयार करने में मददगार हो रहा था.

उस दिन रात करीब 10 बजे का वक्त रहा होगा. डा. मंजप्पा अपने सरकारी आवास पर खाना खा कर टीवी के सामने बैठे हुए थे, मगर उन के दिमाग में कोई और प्लानिंग चल रही थी. उन्होंने अपना सेलफोन हाथ में लिया और किसी नंबर को सेलेक्ट कर काल करते हुए सेलफोन कान से सटा लिया. दूसरी तरफ से जैसे ही कौल रिसीव हुई तो डा. मंजप्पा के चेहरे पर मुसकान आ गई.

बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, ‘डा. सतीश, क्या चल रहा है, कोई नई डील हुई है क्या? जी सर, अभी तो कोई डील नहीं हुई. डा. सतीश ने जबाव देते हुए कहा. अच्छा तो सुनो, मैं तुम्हें एक डील सौंप रहा हूं. रायपुर के एक मैडिकल कालेज का इंसपेक्शन करना है. यदि हम ने सब कुछ ओके कर दिया तो बड़ी रकम हाथ आ जाएगी. डा. मंजप्पा ने कहा. ‘सर, लेकिन रकम किस माध्यम से हमारे पास आएगी.

मैं ने सब इंतजाम कर लिया है. तुम्हारे पास हवाला एजेंट से कौल आएगी, वह तुम्हें बताएगा रकम कैसे कलेक्ट करनी है. ओके सर, आप के रहते मुझे किस बात का डर. मैं सब मैनेज कर लूंगा. ओके टेक केयर… कहते हुए डा. मंजप्पा ने कौल डिसकनेक्ट कर दी. इस के बाद डा. मंजप्पा ने निरीक्षण दल की एक अन्य सदस्य अटल बिहारी वाजपेयी मैडिकल कालेज, बेंगलुरु की एसोसिएट प्रोफेसर डा. चैत्रा से भी बात की. डा मंजप्पा ने उसे बताया कि कालेज की मान्यता को ओके रिपोर्ट देने से जो रकम कालेज प्रबंधन की तरफ से मिलेगी, उस में से उन का हिस्सा डा. सतीश ए. उन के निवास पर पहुंचा देंगे.

1-2 दिन के भीतर ही यह डील हो गई और रिश्वत की रकम इंसपेक्शन टीम के हाथों पहुंच भी गई. डा. मंजप्पा ने निरीक्षण दल के अन्य सदस्य बेंगलुरु के डा. अशोक शेलके से भी इस बारे में बात कर सभी को बराबर हिस्सा देने को कहा. डा. सतीश ने हवाला औपरेटर के जरिए मिले 55 लाख रुपए बेंगलुरु में चैत्रा के पति रविचंद्रन के साथ जा कर एकत्र किए थे.

इधर देश की सब से बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को काफी समय से यह इनपुट मिल रहा था कि इंसपेक्शन दल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रिश्वत ले कर बिना मापदंड पूरा किए चल रहे मैडिकल कालेजों को  न केवल मान्यता दे रहे हैं, बल्कि मनमाने ढंग से कालेजों की सीटों की संख्या बढ़ा रहे हैं. इस वजह से ही सीबीआई लंबे समय से नैशनल मैडिकल काउंसिल और उस से जुड़े लोगों को ट्रैप कर रही थी, मगर सफलता नहीं मिल पा रही थी.

इस बार सीबीआई ने 30 जून, 2025  को बेंगलुरु में जाल बिछाया और यहां से 55 लाख रुपए की रिश्वत की रकम बरामद कर ली. रिश्वत की कुल रकम में से 16.62 लाख रुपए डा. चैत्रा के पति रविचंद्रन से और 38.38 लाख रुपए डा. मंजप्पा के सहयोगी डा. सतीश ए. से बरामद किए गए. 30 जून, 2025 को सेंट्रल ब्यूरो औफ इनवैस्टिगेशन द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में 36 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए गए.

जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया, उन में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के पूर्व चेयरमैन डी.पी. सिंह भी शामिल हैं, जो फिलहाल टाटा इंस्टीट्यूट औफ सोशल स्टडीज (मुंबई) के चांसलर हैं. साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नैशनल हेल्थ अथौरिटी के अधिकारी और नैशनल मैडिकल कमीशन के सदस्य भी शामिल हैं.

बड़ी मछलियां बाहर

पहली जुलाई, 2025 को सीबीआई ने इंसपेक्शन टीम के डा. मंजप्पा, डा. चैत्रा, डा. अशोक, रावतपुरा मैडिकल कालेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया. वहीं बेंगलुरु से सतीश ए. और रविचंद्र के. को भी गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया. 2 जुलाई को सभी को रायपुर की स्पैशल कोर्ट में पेश किया गया.

डी.पी. सिंह के अलावा सीबीआई ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRSIMSR) और उस के प्रमुख रविशंकरजी महाराज, राजस्थान के उदयपुर में गीतांजलि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार मयूर रावल और मध्य प्रदेश के इंदौर में इंडेक्स मैडिकल कालेज के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई.

जिन लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वे लोग विभागीय जानकारी को अनधिकृत रूप से कालेज प्रबंधन को शेयर करते थे. इतना ही नहीं, ये लोग आने वाले इंसपेक्शन की जानकारी कालेजों को पहले से ही दे देते थे और इन के इशारों पर ही कालेजों में फरजी तरीके से घोस्ट फैकल्टी रखने को प्रोत्साहित किया जाता था.

इसी तरह रजिस्टर में फरजी मरीजों को भरती करना और प्राइवेट संस्थानों के लिए मनमाफिक रिपोर्ट देने के एवज में बड़े पैमाने पर रिश्वत का लेनदेन करते थे. सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि नई दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी से सीधे जुड़े सरकारी अधिकारियों के एक समूह ने मैडिकल कालेजों के इंसपेक्शन, मान्यता और रिन्यूअल प्रक्रियाओं से संबंधित गोपनीय फाइलों को इन संस्थानों तक पहुंचाने में गैरकानूनी रूप से मदद की.

इस काररवाई के बाद पता चला कि इस में जो लोग सीबीआई के चंगुल में आए, वह छोटी मछलियां थीं. इस गंदे तालाब की बड़ी मछलियां साफ बच निकलीं. जैसे कि केवल कालेज के निदेशक अतुल तिवारी की गिरफ्तारी हुई, जबकि रविशंकर महाराज, संजय शुक्ला, लेखापाल लक्ष्मीनारायण तिवारी और डा. अतिन कुंडू सीबीआई की गिरफ्त से बाहर हैं.

सीबीआई की जांच में यह साफ हुआ है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी), आईटी और यूजीपीजी बोर्ड के भीतर एक सुनियोजित रैकेट चल रहा है. इस में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों की मिलीभगत भी है. इस रैकेट ने मोटी रिश्वत के बदले कई निजी मैडिकल कालेजों को नियमों के विपरीत मंजूरी दी.

इस मामले में मध्य प्रदेश के एक संत रविशंकर महाराज की सीधे तौर पर संलिप्तता पाई गई है. रविशंकर महाराज ने ही टीआईएसएस के चेयरमैन डी.पी. सिंह से सौदेबाजी करने के बाद श्री रावतपुरा मैडिकल कालेज के निदेशक अतुल तिवारी को इंसपेक्शन टीम से संपर्क साधने को कहा था.

डौक्टर हुए निलंबित

30 जून को ही रायपुर पहुंची एनएमसी की टीम टाटीबंध स्थित एक निजी होटल में ठहरी थी. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग निरीक्षण दल के प्रमुख और मांड्या इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंस बेंगलुरु में आर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के एचओडी डा. मंजप्पा सी.एन. से अतुल तिवारी ने मुलाकात की और कालेज को मान्यता देने के लिए सीधे 55 लाख रुपए का औफर किया. इस बीच भनक लगने पर सीबीआई ने डा. मंजप्पा, डा. चैत्रा एम.एस., डा. अशोक शेलके और अतुल तिवारी को रायपुर और डा. सतीश व रविचंद्रन को बेंगलुरु में घेराबंदी कर दबोचा.

रावतपुरा मैडिकल कालेज मान्यता मामले में फंसे 3 डौक्टरों को कर्नाटक की मैडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने निलंबित कर दिया. ये सभी डौक्टर मैडिकल कालेज का निरीक्षण करने जून महीने में रायपुर आए थे. इस दौरान सीबीआई की टीम ने मान्यता दिलाने के एवज में 55 लाख रुपए रिश्वत के साथ कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया था.

निलंबित डौक्टरों में राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद की सदस्य डा. चैत्रा एम.एस., एसोसिएट प्रोफेसर (अटल बिहारी वाजपेयी मैडिकल कालेज, बेंगलुरु), डा. मंजप्पा सी.एन., प्रोफेसर और प्रमुख (आर्थोपेडिक्स विभाग, मंड्या इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज), डा. अशोक शेलके, असिस्टेंट प्रोफेसर (कम्युनिटी मैडिसिन डिपार्टमेंट, बीदर इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज) शामिल हैं.

डौक्टरों को नवा रायपुर स्थित रावतपुरा चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान संस्थान के लिए पौजिटिव इंसपेक्शन रिपोर्ट जारी करने के आरोप में निलंबित किया गया. जांच में सामने आया कि इंसपेक्शन प्रोग्राम और मूल्यांकनकर्ताओं की पहचान कालेज को पहले ही लीक कर दी गई थी. संस्थान ने रिकौर्ड और दस्तावेज पहले से तैयार कर लिए, ताकि मानकों को पूरा करता हुआ दिखाया जा सके. इस तरीके से कालेज को सीट मंजूरी मिल गई.

केस में हुई ईडी की एंट्री

गौरतलब है कि मामले के खुलासे के बाद सीबीआई ने आरोपी डौक्टरों को रंगेहाथों गिरफ्तार किया था. आरोपियों के खिलाफ काररवाई भी की गई. साथ ही इस वर्ष के लिए रावतपुरा चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान संस्थान की मान्यता को रद्द करते हुए इस वर्ष जीरो इयर घोषित कर दिया गया.

इस साल प्रदेश के रावतपुरा कालेज को मान्यता नहीं मिलने के कारण मैडिकल की सीटें कम हो गईं, जिस के बाद प्रदेश के 3 निजी मैडिकल कालेजों में सीटें बढ़ाई गईं. 27 नवंबर, 2025 को ईडी की टीमों ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अलगअलग मैडिकल कालेजों में एक साथ रेड की तो हड़कंप मच गया. ईडी की टीमों को कई कालेजों में हुए फरजीवाड़े के डिजिटल साक्ष्य मिले, जिन की तकनीकी टीम जांच रही है.

शुरुआती जांच में यह बात पता चली है कि ईडी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिन में मान्यता निरीक्षण से पहले गोपनीय जानकारी लीक होने और फरजी तैयारियों की पूरी प्रक्रिया से जुड़े डेटा शामिल हैं. ईडी ने यह जांच सीबीआई की एसी थ्री शाखा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर शुरू की है. एफआईआर में निजी मैडिकल कालेजों, स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों और बिचौलियों के नेटवर्क द्वारा निरीक्षण प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और हेरफेर करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे.

सीबीआई की जांच में सामने आया था कि निरीक्षण से पहले ही कालेजों को गोपनीय जानकारी मिल जाती थी, जिस के आधार पर वे दिखावटी तैयारियां कर के मान्यता हासिल कर लेते थे.

Medical College Scam
सीबीआई की जाल में फंसी इंस्पेक्शन टीम

ईडी टीम जब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंची तो वहां के रावतपुरा सरकार मैडिकल कालेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी से भी पूछताछ की. अतुल तिवारी को इस से पहले सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल जमानत पर बाहर है. जांच एजेंसियों के अनुसार रावतपुरा कालेज में सीट बढ़ाने के नाम पर बड़ी रकम का लेनदेन हवाला के जरिए हुआ था और मामला मनी लौंड्रिंग से जुड़ा होने के कारण ईडी की एंट्री हुई.

देश भर में मैडिकल कालेज मान्यता के लिए रिश्वतखोरी केस में इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने छत्तीसगढ़ समेत 8 राज्यों में रेड मारी, इन में रायपुर का रावतपुरा सरकार मैडिकल कालेज भी शामिल था. ईडी अधिकारियों ने रेड के दौरान कई डिजिटल सबूत जब्त किए. ईडी के मुताबिक रावतपुरा सरकार मैडिकल कालेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी के घर पूछताछ की गई. रेड के दौरान मोबाइल फोन, डीवीआर, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क जब्त किए गए. बैंक से अकाउंट की जानकारी भी मांगी गई. ईडी की टेक्निकल टीम सबूतों की जांच कर रही है.

ईडी के मुताबिक मैडिकल कालेज से जुड़े लोगों के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लोग संपर्क में थे. मंत्रालय के अधिकारियों ने गोपनीय जानकारी लीक की, ताकि जब इंसपेक्शन टीम आए तो मैडिकल कालेजों के अंदर सब कुछ सेट नजर आए.

मैडिकल कालेज को मान्यता दिलाने के लिए इस में फरजी मरीजों को पैसा दे कर भरती किया जाता था. मरीजों को दलाल ईश्वर पटेल के जरिए पैसों का लालच दे कर अस्पताल में भरती कराया जाता था. जांच टीम आती थी और अस्पताल के बैड पर पड़े फरजी मरीजों के साथ फोटोग्राफी होती थी.

मैडिकल कालेज में इंसपेक्शन टीम कालेज गई तो उन्हें रजिस्टर में नकली मरीजों के एडमिशन, नाम मात्र की फैकल्टी दिखाई गई. अस्पताल की कैपेसिटी भी बढ़ाचढ़ा कर बताई गई. दलाल अधिकारियों से मिले और उन्हें पैसे दिए, जिस से मैडिकल कालेज के पक्ष में गुड रिपोर्ट बन सके.

बन गए चोरचोर मौसेरे भाई

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के चंदन कुमार और मध्य प्रदेश के इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन सुरेश भदौरिया की पूरे मामले में सांठगांठ का पता चलता है. चंदन कुमार भदौरिया को मान्यता संबंधी निरीक्षण टीम, सदस्यों की जानकारी, दौरा, रिपोर्ट आदि को ले कर गोपनीय जानकारी भेजते थे.

इसी जानकारी के आधार पर भदौरिया डील करता था. इस पूरे कांड में रावतपुरा सरकार यानी रविशंकर महाराज मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आए हैं. भदौरिया ने रावतपुरा के साथ संपर्कों का लाभ उठाया और धीरेधीरे सरकारी सिस्टम में पैठ बना ली.

इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया : रावतपुरा के साथ जुगलबंदी ने भदौरिया को मेडिकल कालेजों को मान्यता दिलाने के गोरखधंधे का सिरमौर बना दिया.

वहीं रावतपुरा को भदौरिया के मैडिकल कालेजों से संपर्कों का लाभ हो रह दोनों की इसी जुगलबंदी ने भदौरिया को मान्यता दिलाने के गोरखधंधे का सिरमौर बना दिया. था. इस के साथ ही इस काम में उस ने जम कर कमीशन खाया. एकएक कालेज की मान्यता के लिए लाखों नहीं, बल्कि 2 से 3 करोड़ रुपए तक की डील होती थी.

भदौरिया को ले कर सीबीआई की रिपोर्ट में है कि इंडेक्स ग्रुप में चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, पैरामैडिकल साइंसेज और प्रबंधन में शिक्षा देने वाले संस्थान शामिल हैं, जो शैक्षणिक वर्ष 2015-16 से मालवांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं.

भदौरिया मालवांचल विश्वविद्यालय का संचालन करने वाली मूल संस्था मयंक वेलफेयर सोसाइटी का अध्यक्ष भी है. भदौरिया द्वारा इंडेक्स मैडिकल कालेज अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, इंदौर में डाक्टरों और कर्मचारियों को अस्थायी आधार पर नियुक्त किया, लेकिन कालेज की मान्यता के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की न्यूनतम मानक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्हें गलत तरीके से स्थायी फैकल्टी बताया. इस के लिए आधार सक्षम बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के तहत बायोमेट्रिक अटेंडेंस में हेरफेर करने के लिए इन व्यक्तियों के क्लोन फिंगर इंप्रेशन बनाने तक के काम किए गए.

सीबीआई ने यह खुलासा भी किया है कि भदौरिया अपने करीबी सहयोगियों की मदद से मालवांचल विश्वविद्यालय और उस से जुड़े संस्थानों के माध्यम से कई तरह की अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था. इन गतिविधियों में अकसर अयोग्य उम्मीदवारों को फरजी स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री जारी करना शामिल है. स्वास्थ्य मंत्रालय के राहुल श्रीवास्तव और चंदन कुमार रिश्वत के बदले में विभिन्न मैडिकल कालेजों के निरीक्षण, नवीनीकरण और अनुमोदन पत्र (10ए) जारी करने के काम में शामिल थे.

सीबीआई की एफआईआर में मध्य प्रदेश के स्वयंभू संत रावतपुरा सरकार उर्फ रविशंकर महाराज का नाम आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई. सत्ता से नजदीकी के कारण उन्हें अकसर ‘बाबा विद पावर’ कहा जाता है . मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी जनप्रतिनिधियों के साथ उन की नजदीकियां सोशल मीडिया पर वायरल तसवीरों में साफ दिखाई देती हैं.

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के लहार में उन का आश्रम है, जो रावतपुरा सरकार ट्रस्ट के नाम से संचालित होता है. ट्रस्ट ने अपने रसूख के दम पर सरकारी योजनाओं, सड़क परियोजनाओं और बिजली सब्सिडी में अनुचित लाभ लिया है. हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब रावतपुरा सरकार विवादों में रहे हों. उन के ट्रस्ट पर जमीन पर कब्जा करने, बिना अनुमति के कालेज चलाने, छात्रों को धार्मिक गतिविधियों में जबरन शामिल कराने और महिला अनुयायियों के मानसिक उत्पीडऩ जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं.

भिंड जिले के लहार से आने वाले सुरेश भदौरिया और रावतपुरा सरकार ने एक ऐसा गठजोड़ बना लिया था, जो 3 से 5 करोड़ ले कर किसी भी निजी कालेज को एनएमसी से मान्यता दिला देता था, चाहे कालेज में मूलभूत ढांचा हो या नहीं.

सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, मैडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड का पूर्व सदस्य जीतूलाल मीणा इस पूरी साजिश की मुख्य कड़ी था. आरोप है कि उस ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कालेजों से मोटी रिश्वत वसूली. सीबीआई ने खुलासा किया है कि मीणा ने इन अवैध पैसों का इस्तेमाल राजस्थान में 75 लाख की लागत से एक हनुमान मंदिर बनाने में किया.

सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि आंध्र प्रदेश के कडिरी निवासी एजेंट बी. हरि प्रसाद, हैदराबाद के अंकम रामबाबू और विशाखापट्टनम के कृष्ण किशोर ने एनएमसी निरीक्षण के दौरान फरजी फैकल्टी और मरीजों की व्यवस्था की.

एक मामले में कृष्ण किशोर ने गायत्री मैडिकल कालेज के निदेशक से 50 लाख की रिश्वत ली, जबकि वारंगल के फादर कोलंबो इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज जैसे संस्थानों ने 4 करोड़ से अधिक की रिश्वत दे कर मंजूरी प्राप्त की. यह रकम बैंकिंग चैनल के जरिए भेजी गई, ताकि उन्हें वैध दिखाया जा सके.

निजी मैडिकल कालेजों को मान्यता देने के एवज में घूसखोरी मामले में सीबीआई ने जो आरोपपत्र पेश किया, उस में रावतपुरा मैडिकल कालेज के चेयरमैन रविशंकर महाराज के कालेज के डायरेक्टर अतुल तिवारी का एक वाट्सऐप चैट भी है.

श्री रावतपुरा सरकार इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के डायरेक्टर अतुल तिवारी

अतुल कुमार तिवारी विस्तार मल्टीमीडिया का मालिक होने के साथसाथ मैडिकल कालेज का डायरेक्टर भी था. मीडिया के रसूख का इस्तेमाल वह अपने मैडिकल कालेज में फरजी तरीके से सीटों की संख्या बढ़ाने में कर रहा था. मुन्ना भाई एमबीबीएस फिल्म की तर्ज पर वह भी छत्तीसगढ़ में फरजी ढंग से मैडिकल कालेज का संचालन कर रहा था.

सीबीआई ने 135 पेज के चालान में रावतपुरा मैडिकल कालेज की मान्यता के लिए आए निरीक्षण दल के सदस्यों को घूस देने का जिक्र किया है. 55 लाख रुपए की यह घूस हवाला के जरिए निरीक्षण दल के सदस्यों को दी गई. रावतपुरा महाराज घूस की रकम तय कर रहे थे. वाट्सऐप चैट में रेरा चेयरमैन संजय शुक्ला और रायपुर मैडिकल कालेज के एसोसिएट प्रो. अतिन कुंडू का भी जिक्र आया है. दोनों ही मामले से सीधेसीधे जुड़े हैं. सीबीआई ने 2 जुलाई को पहले देशभर के निजी मैडिकल कालेजों के कुल 35 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इन में से 6 लोग जेल में हैं.

कौन है रविशंकर शर्मा

रावतपुरा सरकार का असली नाम रविशंकर शर्मा है, जिस का जन्म 5 जुलाई 1968 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के छिपरी गांव में हुआ था. इस के पिता कृपाशंकर शर्मा और मां रामसखी देवी हैं. रविशंकर शर्मा का बचपन काफी आर्थिक परेशानियों के बीच गुजरा.

रावतपुरा सरकार के नाम से प्रसिद्ध रविशंकर शर्मा

आगे चल कर उस के मातापिता ने रविशंकर महाराज का दाखिला ओरछा के रामराजा संस्कृत विद्यालय में करवा दिया ताकि वह पुरोहित का काम सीख सके, लेकिन यहां उस का मन नहीं लगा और वह 9 साल की उम्र में पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर रावतपुरा गांव पहुंच गया.

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के रावतपुरा गांव में एक पुराना हनुमान मंदिर था, जहां देवराहा बाबा को अपना आध्यात्मिक गुरु बना लिया और यहां स्थित हनुमान मंदिर में साधना शुरू कर दी. स्थानीय लोग बताते हैं कि इसी मंदिर में रविशंकर महाराज ने अपना दरबार लगाना शुरू कर दिया. धीरेधीरे मंदिर में रविशंकर महाराज को मानने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढऩे लगी, बाद में वहां जगह की कमी को देखते हुए रावतपुरा धाम की स्थापना की गई, जहां एक विशाल आश्रम बनाया गया.

आज पूरे देश में उस के अनुयायियों की संख्या लाखों में है. खासतौर पर मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड इलाके में उस के मानने वाले अधिक लोग हैं. धार्मिक कार्यक्रम के जरिए धनदौलत कमा कर उस ने कई आश्रमों की स्थापना की है. छत्तीसगढ़ में रायपुर, धनेली में आश्रम, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है.

देश के दूसरे संतमहंतों की तर्ज पर साल 2000-2001 में रविशंकर महाराज ने रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट बनाया, जिस के तहत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई स्कूल और अस्पताल खोले गए. यही नहीं, इसी ट्रस्ट के अधीन रावतपुरा सरकार के कई आश्रम, संस्कृत स्कूल, नर्सिंग कालेज, ब्लड बैंक, फार्मेसी कालेज और रायपुर में रावतपुरा सरकार मैडिकल कालेज भी है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर में रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी समेत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और यूपी में कई शिक्षण संस्थान हैं. रावतपुरा सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी पहल करते हुए रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय और श्री रावतपुरा सरकार आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान शुरू कर दिए.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...