Struggle Story : भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पाश्र्वगायिका आशा भोसले ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा और जादुई आवाज से विश्व भर में अपनी पहचान बनाई. 7 दशकों से अधिक के करिअर में उन्होंने शास्त्रीय संगीत से ले कर पौप और गजल तक, हजारों गाने गाए. सब से अधिक रिकौर्डिंग का 'गिनीज बुक औफ वल्र्ड रिकौर्डउन के नाम है. उन्हें 'दादा साहब फाल्केऔर 'पद्म विभूषणजैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया है. पढि़ए कि इस के लिए उन्हें कैसेकैसे संघर्षों से गुजरना पड़ा?

जानीमानी पाश्र्वगायिका और पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी आशा भोसले का 12 अप्रैल, 2026 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. आशा भोसले पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं. उन के पिता का जन्म गोवा के एक छोटे से गांव मंगेशी में 29 दिसंबर, 1900 को हुआ था.

दीनानाथजी बहुत कम उम्र में ही अपनी संगीत यात्रा और काम की तलाश में गोवा से महाराष्ट्र आ गए थे. वे अपने जन्म स्थान से इतना प्यार करते थे कि जब वे महाराष्ट्र आए तो उन्होंने अपना पुराना उपनाम 'अभिषेकी’ या 'नवाथे’ छोड़ कर 'मंगेशकर’ अपना लिया, ताकि उन की पहचान हमेशा उन के गांव मंगेशी से बनी रहे. पंडित दीनानाथ मंगेशकर की 5 संतानें हुईं, जिन में सब से बड़ी लता मंगेशकर, मीना खडीकर, आशा भोसले, ऊषा मंगेशकर व हृदयनाथ मंगेशकर थीं.

दीनानाथ मंगेशकर की मृत्यु 24 अप्रैल, 1942 को महाराष्ट्र के पुणे में हुई थी. बताया जाता है कि 1930 के दशक के अंतिम वर्षों में वे गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, जिस के कारण उन का स्वास्थ्य काफी गिर गया था. उन्हें पीलिया और लिवर संबंधी बीमारियां हो गई थीं. महान गायक दीनानाथ मंगेशकर की बेटी होने के कारण संगीत मानो बच्चों के खून में था. बचपन से ही घर का माहौल सुरों से भरा रहता था. महाराष्ट्र के सांगली में सितंबर 1933 में आशा ने अपनी आंखें खोलीं तो उस के कानों में सब से पहले शास्त्रीय संगीत की गूंज पड़ी.

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