Love Crime: सविता का पति देहसुख देने लायक तो था नहीं, जो कमाता था उसे भी शराब में उड़ा देता था. सविता भला ऐसे पति का क्या करती, जो उस की भी कमाई छीन लेता था. 

घनश्याम गोलपानी ऐसे लोगों में था, जिन के लिए जिंदगी का कोई खास मकसद नहीं होता. ऐसे लोग उतना ही कमाते हैं, जितने में उन की जरूरतें पूरी हो जाएं. अगर पैसा ज्यादा आ गया तो वे उसे नशापत्ती या फिजूलखर्ची में उड़ा देते हैं. 38 साल का घनश्याम भोपाल के गौतमनगर के नारियलखेड़ा में चाय का ठेला लगाता था, जिस से वह 2-3 सौ रुपए रोज कमा लेता था. लेकिन इस में से वह पत्नी को एक भी पैसा घर खर्च के लिए नहीं देता था.

आमतौर पर रोज कमानेखाने वालों को शाम को काम खत्म होने के बाद घर पहुंचने की जल्दी होती है, लेकिन घनश्याम इस का अपवाद था. वजह यह थी कि उसे अपनी खूबसूरत जवान बीवी से कोई खास मतलब नहीं था. दरअसल उस में कमी यह थी कि वह पत्नी को जिस्मानी सुख नहीं दे पाता था. शादी हुए 10 साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी वह पत्नी को संतानसुख नहीं दे सका था. इस की वजह थी उस का नपुंसक होना. इस पर अगर पति का साथ और प्यार न मिले तो पत्नी को तकलीफ होगी ही, यही हाल सविता का भी था.

पिछले कुछ दिनों से घनश्याम ने घर में पैसे देने बिलकुल बंद कर दिए थे. पति से पैसा न मिलने पर घर चलाने के लिए सविता को खुद मेहनतमजदूरी करनी पड़ रही थी. पहले उस ने पापड़ और बड़ी बेचनी शुरू की, इस में आमदनी भले कम हो रही थी, लेकिन उस का काम चल रहा था. उसे परेशानी तब होने लगी, जब उस की इस कमाई पर भी घनश्याम की बुरी नजर पड़ने लगी.

सविता की कमजोरी का फायदा उठा कर घनश्याम उस से पैसे छीन लेता. पति की इस हरकत पर सविता का तिलमिलाना स्वाभाविक था. उस ने विरोध किया तो घनश्याम ने उस के साथ मारपीट शुरू कर दी. बच्चों की किलकारियां और घरगृहस्थी के दूसरे सुखचैन तो नसीब में थे नहीं, उस पर पति का यह बरताव, भला सविता कैसे बरदाश्त करती?

इस पर रात को शरीर की मांगें सिर उठातीं तो वह बेचैनी से करवटें बदलने लगती. खर्राटे मारते चैन की नींद सो रहे घनश्याम की तरफ देखती तो उसे उस हालत में देख कर वह खीझ उठती. कभी उस पर दया भी आती कि जब कमजोरी कुदरती है तो इस में इस का क्या दोष. पता चला कि शादी के बाद सिर्फ एक बार ही घनश्याम उस से शारीरिक संबंध बना पाया था.

लेकिन इधर घनश्याम बेलगाम हो कर पूरी तरह से अपनी पर उतारु हो चुका था. कुछ दिनों पहले ही उस ने पैसों के लिए 6 हजार रुपए में अपना स्कूटर बेच दिया था. पति की हरकतों से सविता को जो जिंदगी अब तक भार लग रही थी, वह बेकार लगने लगी थी. वह दिन भर मेहनत करे, पैसे कमाए, घर चलाए और जब मन हो, निकम्मा मारपीट कर छुड़ा ले, बातबात में जलील करे. आखिर उस के होने, न होने से फायदा क्या?

यह सोच कर सविता का सिर चकराने लगता. पति सुख और औलाद नहीं दे सकता, यहां तक तो उस ने समझौता कर लिया था, लेकिन रोजरोज की कलह और मारपीट से वह तंग आ चुकी थी. ऐसे वह क्या करे, उस की समझ नहीं आ रहा था. लेकिन कुछ दिनों की कशमकश के बाद उस की समझ में जो आया, वह बेहद खतरनाक था. सविता को विश्वास हो गया था कि अब घनश्याम रास्ते पर आने वाला नहीं है. लिहाजा उस से छुटकारा पाने से बेहतर रास्ता कोई दूसरा नहीं है. उसे रास्ते से हटा देना ही उस के लिए अच्छा है.

इस के लिए उस ने सहारा लिया रविशंकर का. उस से उस की जानपहचान पहले से थी. सविता की यह दूसरी शादी थी, जिस से वह घनश्याम का एहसान मानते हुए 14 सालों तक उस से दबी रही. लेकिन अब उसे लगने लगा था कि अपने किए एहसान की कीमत वह वसूल चुका है, इसलिए उस ने रवि की तरफ प्यार की पींगे बढ़ाना शुरू कर दिया था.

कमानेखाने, लालच और निठल्लेपन के मामले में रवि घनश्याम से भी 2 कदम आगे था. सविता यह बात जानती थी, इसीलिए उस ने उसे दाना डालना शुरू किया था. बैरसिया के नजदीक बड़ौरी गांव का रहने वाला रवि मजदूरी करता था. मजदूरी की ही वजह से वह भोपाल आताजाता था. नारियलखेड़ा में मजदूरी करने के दौरान ही उस की जानपहचान सविता से हुई थी.

पापड़बड़ी के साथसाथ सविता कभीकभी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी कर लेती थी, इस में एक सिलेंडर पर उसे ढाई, 3 सौ रुपए मिल जाते थे. लेकिन यह काम वह छोटे स्तर पर बहुत एहतियात बरतते हुए करती थी. क्योंकि डर लगता था कि कहीं वह पकड़ी न जाए.

कल तक कामचलाऊ बातचीत कर के टरका देने वाली खूबसूरत सविता अचानक उस पर क्यों मेहरबान हो रही है, यह बात रवि एकदम से समझ नहीं सका. लेकिन जब एक दिन सविता ने उसे प्यार से समझाया तो वह पशोपेश में पड़ गया कि क्या करे? एक तरफ पकड़े जाने का डर था तो दूसरी तरफ सविता के हुस्न के साथसाथ एक लाख रुपए नकद का लालच भी था.

सविता ने उस से साफ कहा था कि अगर वह घनश्याम की हत्या में उस का साथ देता है तो उस का शरीर तो हमेशाहमेशा के लिए उस का हो ही जाएगा, उस ने एक लाख रुपए जो बचा रखे हैं, वे भी उसे मिल जाएंगे. यह एक तरह से तन और धन की सुपारी थी. कुछ दिनों तक तो रवि सोचता रहा. लेकिन देह और एक लाख रुपए के लालच ने उसे डिगा दिया. रवि को पूरी तरह से वश में करने के लिए सविता ने उसे एकाध बार शारीरिक सुख भी दे दिया. जिस से रवि की भूख और भड़क उठी. लेकिन अब इसे बुझाने की शर्त घनश्याम का कत्ल था, जिसे वह करने को तैयार हो गया था. इस के बाद दोनों ने 27 मार्च को इस काम को अंजाम देने की योजना बना डाली.

दूसरी ओर दुनियाजहान से बेपरवाह और घरगृहस्थी से लापरवाह घनश्याम को भनक तक नहीं लगी कि सविता ने खुद को विधवा करने का इंतजाम कर लिया है. सविता की समझ में आ गया था कि इस दुनिया में अब उस का कोई नहीं है. अगर वह घनश्याम को छोड़ती तो लोग उसे ही दोष देते कि खोट उसी में है, जबकि ऐसा करने और कहने वाले लोग उस के लिए कुछ नहीं कर रहे थे. ऐसा नहीं था कि इस बात पर सविता ने गौर नहीं किया था. उस ने देखा था कि लोग कुछ करने के बजाय उस की बरबादी और बेचारगी का तमाशा भर देख रहे थे. गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता और जो होते हैं, वे दूर से ही दुआसलाम कर के चले जाते हैं.

खुदगर्ज और मतलबपरस्त दुनिया का असली रूप देख चुकी सविता का झुकाव अगर छोटी जाति के रवि की तरफ हुआ था तो शायद इस की एक वजह उस का यह सोचना भी था कि रवि भले ही घनश्याम की तरह निकम्मा सही, पर नामर्द तो नहीं है. अगर घर में बैठा कर कमा कर ही उसे खिलाना है तो घनश्याम से रवि लाख अच्छा है, जो उसे कम से कम शारीरिक सुख तो देगा. और रही बात बातें करने वालों की तो उन की परवाह करने से अब कोई फायदा नहीं है.

27 मार्च की शाम सविता ने घनश्याम से कहा कि उस का एक जानपहचान वाला बैरसिया में एक लाख रुपए उधार दिलवाने को तैयार है.  पैसों के चक्कर में घनश्याम बगैर सोचेसमझे पत्नी के साथ चलने को तैयार हो गया. निकम्मों पर लालच कितना भारी पड़ता है, यह अंदाजा इन दोनों मर्दों की सोच से आसानी से लगाया जा सकता कि पैसों के लिए एक मरने को तो दूसरा मारने को तैयार था.

सविता और घनश्याम अगले दिन बैरसिया के लिए स्कूटर से निकले तो भोपाल के ही लांबाखेड़ा में तय योजना के मुताबिक उन्हें रवि मिल गया. सविता ने घनश्याम से कहा कि यही वह जानपहचान वाला है, जो हमें पैसे दिलाने ले जा रहा है. घनश्याम ने रवि को भी स्कूटर पर बैठा लिया. इस के बाद तीनों बैरसिया की ओर चल पड़े.

भोपाल और बैरसिया के बीच घने जंगलों की भरमार है और उजाड़ पड़ी जमीनों की भी कमी नहीं है. रात 8 बजे के लगभग जब ये लोग हर्राखेड़ा गांव पहुंचे तो पुराना स्कूटर दगा दे गया. स्कूटर भले ही खराब हो गया, लेकिन सविता और रवि ने अपनी योजना नहीं खराब होने दी. लांबाखेड़ा में इन से मिलने से पहले रवि ने नायलौन की रस्सी खरीद कर जेब में रख ली थी.

स्कूटर किनारे खड़ा कर के सविता और रवि घनश्याम को बातों में लगा कर पैदल ही चलने लगे. उसी दौरान सुनसान जगह देख कर दोनों ने घनश्याम को पकड़ लिया. रवि ने पीछे से उस के गले में रस्सी का फंदा डाल कर कसा तो घनश्याम ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन सविता ने उस के पांव पकड़ लिए तो वह बेबस हो गया. इस के बाद रवि ने फंदा कसा तो कुछ देर छटपटा कर घनश्याम ने दम तोड़ दिया.

पति की हत्या इतनी आसानी से हो जाएगी, सविता को भरोसा नहीं था. काम हो गया तो दोनों ने लाश को घसीट कर झाडि़यों में छिपा दिया, जिस से आनेजाने वालों की नजर जल्दी से उस पर न पड़े. सविता को अंदाजा था कि जल्दी किसी की नजर घनश्याम की लाश पर नहीं पड़ेगी. इस बीच वह सड़ जाएगी या जंगली जानवर और चीलकौवे खा जाएंगे. अपनी तरफ से पूरी सावधानी बरतते हुए उस ने भोपाल लौट कर थाना गौतमनगर में पति की गुमशुदगी दर्ज करा दी, जिस से अगर लाश मिल भी जाए तो कोई उस पर शक न करे और पुलिस हत्यारे को ढूंढती रह जाए.

30 मार्च की सुबह बैरसिया के थाना गुनगा की पुलिस चौकी इमला के चौकीइंचार्ज रमेश शर्मा को किसी अज्ञात व्यक्ति ने केशुखेड़ी गांव के पास झाडि़यों में एक लाश पड़ी होने की सूचना दी. घटनास्थल के लिए रवाना होने से पहले रमेश शर्मा ने इस की सूचना थानाप्रभारी नरेंद्र कुलस्ते और बैरसिया की एसडीओपी सुश्री बीना सिंह को दे दी थी.

पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो लाश सड़ने लगी थी. लेकिन इतनी भी नहीं सड़ी थी कि उस की शिनाख्त न हो सके. फिर भी दिक्कत यह थी कि लाश मिलने की खबर से आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में जुट तो गए थे, पर कोई लाश की शिनाख्त नहीं कर सका था. इस से अंदाजा लगाया गया कि मृतक इस इलाके का नहीं था. उसे यहां ला कर उस की हत्या की गई थी या फिर हत्या कहीं और कर के लाश को यहां ला कर फेंकी गई थी.

लाश की पहचान नहीं हो सकी और घटनास्थल पर किसी तरह का कोई सबूत नहीं मिला तो पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी करने लगी. तभी एकाएक एक महिला भीड़ को चीरती हुई आई और लाश को देख कर कहने लगी कि यह तो उस के पति की लाश है, जिस की गुमशुदगी उस ने 3 दिन पहले भोपाल के थाना गौतमनगर में दर्ज करा रखी है.

शव की शिनाख्त हो जाने से पुलिस की सिरदर्दी थोड़ी कम हो गई. हत्यारा कौन है, यह पहेली अभी नहीं सुलझी थी. एसडीओपी बीना सिंह ने अपनी नौकरी के दौरान ऐसे दर्जनों मामले देखे थे. इसलिए उन का शक सविता पर ही गया. इस की वजह यह थी कि सविता किस जादू के जोर से घटनास्थल पर पहुंच गई थी. सब्र से काम लेते हुए उन्होंने घनश्याम की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर रिपोर्ट का इंतजार करना बेहतर समझा.

शुरुआती पूछताछ में सविता ने बताया था कि एक बाबा ने उसे बताया था कि उस का पति पूर्व दिशा की ओर हो सकता है, इसलिए वह घनश्याम को ढूंढ़तेढूंढ़ते यहां तक चली आई थी. यहां स्कूटर खड़ा देख कर वह उसे ढूंढ़ने लगी. तभी उसे पता चला कि यहां घनश्याम नहीं, उस की लाश है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि घनश्याम की मौत गला घोंटने से हुई थी. इस के बाद बीना सिंह ने सविता से पुलिसिया अंदाज में पूछताछ की तो वह उम्मीद से कम वक्त में ही टूट गई. इस के बाद उस ने सारी कहानी उगल दी. रवि को पकड़ने में भी पुलिस वालों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. वह भोपाल के निशातपुरा इलाके में रेलवे लाइन के पास आवारा घूमता मिल गया.

प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या की इस वारदात में दिलचस्प और अनूठी बात पत्नी का खुद 30 किलोमीटर दूर घटनास्थल पर पहुंच जाना था. दरअसल पति की लाश समय पर न मिलने से सविता बेचैन थी. उस की यही बेसब्री उस पर भारी पड़ गई. जबकि सही बात यह थी कि पुलिस का उस तक पहुंचना चुनौती वाला तो नहीं, पर मुश्किल काम जरूर था. सविता को एक डर यह भी था कि पति की लाश अगर बरामद नहीं होती तो वह जल्दी रवि से शादी नहीं कर सकती थी, क्योंकि ऐसी हालत में घनश्याम गुमशुदा ही कहलाता, जबकि वह घोषित तौर पर विधवा हो जाना चाहती थी.

सविता की ग्लानि भी हो सकती थी, जो हत्या के 3 दिनों बाद पति के मरने की तसल्ली होने के बाद उसे आखिरी बार देखने जा पहुंची थी. इत्तफाक से वह उस वक्त वहां पहुंची, जब खासी भीड़ जमा हो चुकी थी. जेल में बैठी सविता को लगता होगा कि जिंदगी से उसे कभी कुछ नहीं मिला. पहले पति के साथ वह 2 साल रही. इस बीच उसे शारीरिक सुख तो मिला, पर उस से अनबन रहने लगी. दूसरे पति से न शारीरिक सुख मिला, न अनबन दूर हुई. तीसरा महज प्रेमी बन कर रह गया, जिसे करार के मुताबिक न पैसा मिला और न देहसुख.   Love Crime

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