Love Obsession Crime. 22 वर्षीय प्रियांशी ने अपने सहपाठी 25 वर्षीय मनीष साहू से प्यार किया तो उसे पूरी ईमानदारी से निभाया भी. लेकिन 7 साल बाद मनीष ने भावना से शादी कर ली. इस से प्रियांशी के दिल को इतनी गहरी ठेस लगी कि उस ने हमेशाहमेशा के लिए प्रेमी मनीष से ब्रेकअप कर लिया. इस के बाद पत्नी को तलाक दे कर वह प्रियांशी को पाने के लिए हक जमाने लगा, लेकिन… 

ललितपुर उत्तर प्रदेश का एक जिला है. इसी शहर के तालाबपुरा मोहल्ला निवासी 25 वर्षीय मनीष साहू ने अपने परिवार के दवाब में साल 2024 में  अपनी पे्रमिका प्रियांशी चौबे के बजाय भावना से शादी कर ली. यानी उस ने प्रेमिका प्रियांशी से बेवफाई की. प्रियांशी तालाबपुरा मोहल्ले में ही रहती थी. मनीष की शादी के बाद 22 वर्षीय प्रियांशी चौबे ने मनीष से पूरी तरह से दूरी बना ली और हर तरह के संबंध खत्म कर लिए. जबकि पहले दोनों मोबाइल पर घंटों बतियाते थे, वहीं अब बात पूरी तरह से बंद हो गई.

प्रेमिका से दूरी प्रेमी मनीष को बरदाश्त नहीं हुई. इस के चलते उस की पत्नी से भी अनबन रहने लगी. प्रेमिका की चाहत में मनीष ने अपने परिवार से झगड़ा कर के करीब 3 माह पहले गांव में पंचायत बुला कर अपनी पत्नी को तलाक दे दिया. तलाक के एवज में पत्नी को ढाई लाख रुपए नकद एवं दहेज का सारा सामान भी लौटाया.

प्रेमिका की खातिर पत्नी को तलाक देने के बाद भी प्रेमिका मनीष से बात करने को राजी नहीं हुई. होती भी कैसे? प्रियांशी के बचपन के प्यार को मनीष ने एक ही झटके में बिखेर जो दिया था. मनीष साहू की प्रियांशी चौबे के प्रति हद से ज्यादा दीवानगी थी. मनीष उत्तर प्रदेश के जिला ललितपुर से झांसी प्रियांशी चौबे से आखिरी बार मिलने आया था.

प्रियांशी झांसी की बुंदेलखंड यूनिवॢसटी से एमबीए की पढ़ाई कर रही थी और यूनिवॢसटी के ही गल्र्स हौस्टल में रहती थी. 25 वर्षीय मनीष साहू का इरादा था कि अगर इतने प्रयास के बाद भी प्रियांशी उस के पास वापस आने को तैयार नहीं होती है तो वह उस की हत्या कर देगा.

मनीष की प्रियांशी के प्रति दीवानगी जानलेवा जुनून की थी. उसे उस की दूरी नागवार गुजर रही थी. उस के दिमाग में चल रहा था कि प्रियांशी यदि मेरी नहीं हुई तो उसे किसी की होने भी नहीं दूंगा. अपनी प्लानिंग को पूरा करने के लिए उस ने .315 बोर का तंमचा और कारतूसों का इंतजाम करने के बाद उसे अपने बैग में रखा और प्रियांशी से मिलने झांसी पहुंच गया.

हौस्टल के सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को जानकारी दी कि मनीष ने 2 दिन पहले भी हौस्टल में घुुसने की कोशिश की थी. कहने को प्रियांशी मनीष से मिलने को तैयार नहीं थी. उस ने मनीष से संबंध भी खत्म कर लिए थे. अब वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रही थी, इसलिए उस ने मनीष से दूरी बना ली थी.

इस के बाद मनीष के काफी चिरौरी के बाद रविवार यानी 9 नवंबर, 2025 के दिन  प्रियांशी मनीष से मिलने को राजी हुई थी. तब मनीष बैग में तमंचा ले कर उस से मिलने आया. उस के इस खतरनाक इरादे का भान प्रियांशी को नहीं था.

पुलिस की जांच में सामने आया है कि मनीष पूरी तैयारी से प्रियांशी से मिलने आया था. उस के पास अब 2 ही रास्ते बचे थे. पहला यह कि प्रियांशी मान जाए तो दोनों शादी कर अपना घर बसा लें और दूसरा प्रियांशी यदि उस की बात नहीं मानती है तो उस को मार डाले.

मानमनौव्वल के बीच जब मनीष ने खुद को नाकाम पाया तो उस ने 22 वर्षीय प्रियांशी चौबे के सीने में गोली मार दी. जहां ये दोनों खड़े हो कर बातचीत कर रहे थे वह पब्लिक प्लेस था, इसलिए मनीष ने तुरंत तमंचे में दूसरी गोली भरी और खुद की कनपटी पर नाल लगा कर गोली चला दी. एक ही पल में वह भी ढेर हो गया.

वारदात वाले दिन शाम लगभग 4 बजे पुलिस ने मनीष और प्रियांशी के फेमिली वालों को घटना की जानकारी दी और झांसी आने को कहा गया. जानकारी मिलते ही दोनों के फेमिली वाले झांसी पहुंच गए.

ललितपुर के मोहल्ला तालाबपुरा निवासी बिहारी लाल के 2 बेटे महेंद्र और मनीष के अलावा एक बेटी है. बेटी की शादी हो चुकी है. बिहारीलाल पेंटर थे. बड़ा बेटा महेंद्र बाइक के शोरूम पर काम करता था. महेंद्र और बिहारीलाल 8 साल पहले सड़क हादसे में घायल हो गए थे, तब उन का एक हाथ कट गया.

एक्सीडेंट के बाद महेंद्र के शरीर का काफी हिस्सा काम नहीं करता था. इस से वह परेशान रहता था. लगभग 3 साल पहले उस ने खुदकुशी कर ली. तब उस की 8 महीने की बेटी थी, इस के बाद महेंद्र की पत्नी ने दूसरी शादी कर ली.

बिहारीलाल ने पुलिस को बताया कि महेंद्र की बेटी को हम लोग किसी तरह पाल रहे थे. मनीष की हरकतों से हम लोग परेशान हो चुके थे. 22 वर्षीय प्रियांशी 3 बहनों में दूसरे नंबर की है.

मनीष पर ही परिवार का पूरा दारोमदार था, लेकिन परिवार को मंझधार में छोड़ कर उस ने भी मौत की राह चुन ली थी. उस की मौत से परिवार में रोनापीटना मच गया. दोनों के ही परिजन घटना की सूचना मिलने के बाद उसी दिन देर शाम झांसी पहुंच गए. वे मीडिया व अन्य किसी से बात करने को राजी नहीं हुए. उन लोागों ने चुप्पी साध रखी थी.

उधर ललितपुर में मनीष के जानने वाले और दोस्त हैरान रह गए. उन का कहना था कि मनीष स्वभाव से बेहद शांत एवं मिलनसार था. ऐसे में उस ने यह खौफनाक कदम कैसे उठा लिया?

वारदात के बाद पुलिस दोनों की कुंडली खंगालने में जुट गई. जानकारी मिली कि ललितपुर में मनीष और प्रियांशी एक साथ पढ़ते थे. एक ही मौहल्ले का होने के नाते साथ में आनाजाना था. 2018 से दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए. प्यार परवान चढऩे लगा.  दोनों साथ में जीनेमरने की कसमें खा बैठे. मनीष को नेतागीरी का शौक था. मनीष समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता था. वह लोहिया वाहिनी विंग से जुड़ा था. छात्र सभा का पूर्व नगर अध्यक्ष भी रह चुका था.

प्रियांशी और मनीष का प्रेमप्रसंग पिछले 7 सालों से चल रहा था. दोनों एकदूसरे को देखे बिना एक पल भी नहीं रह पाते थे. दोनों साथसाथ घूमते, मस्ती करते और वीडियो बनाते. दोनों के फेमिली वाले भी इस बात को अच्छी तरह जानते थे. मनीष ग्रैजुएशन के बाद भी बेरोजगार था. इस बीच पारिवारिक स्थिति की वजह से मनीष कामकाज में जुट गया. वह जीवनयापन के लिए सरकारी विभाग में गाड़ी चलाने लगा, जबकि प्रियांशी एमबीए करने के लिए झांसी चली आई.

साल 2024 में मनीष ने परिवार के दवाब में पूराकलां गांव निवासी भावना से शादी कर ली थी. प्रेमी मनीष द्वारा धोखा देने से प्रियांशी अंदर तक टूट गई. उस के संजोए सारे सपने एक ही पल में चकनाचूर हो गए. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उस का प्यार इस तरह लुट जाएगा. वह अपने प्रेमी मनीष साहू से इस कदर नाराज हो गई कि वह अब उस से बात करना तक पसंद नहीं करती थी.

Love Obsession Crime

प्रियांशी ने प्रेमी से दूरी बना ली थी. प्रियांशी से दूरी मनीष को बरदाश्त नहीं हुई. इस के चलते शादी के बाद पत्नी से अनबन रहने लगी. क्योंकि उस के दिल में तो प्रियांशी बसी थी. परिवार से झगड़ा करके करीब 3 माह पहले उस ने पत्नी भावना को तलाक दे दिया.

अपनी पत्नी भावना को तलाक देने के बाद मनीष साहू ने सोचा कि अब उस की प्रेमिका प्रियांशी चौबे उसे फिर से प्यार करने लगेगी और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन इस के बाद भी प्रियांशी मनीष से बात करने को राजी नहीं हुई. बारबार फोन करने पर प्रियांशी ने उस का मोबाइल नंबर ब्लौक भी कर दिया था. यह बात मनीष को और परेशान करने लगी. इस से वह डिप्रेशन में चला गया. वह प्रियांशी से मिलने की आस में उस के हौस्टल के आसपास घूमने लगा था.

मनीष प्रियांशी के इस व्यवहार से मानसिक रूप से परेशान हो गया. वह किसी तरह प्रियांशी से मिलकर अपने किए के लिए उस से माफी मांग कर अपने रिश्ते को पहले की तरह बनाना चाहता था. उसे इत्मीनान था कि अब सबकुछ ठीक हो जाएगा. इस के बावजूद प्रियांशी मनीष से बात करने को राजी नहीं हुई.

दोनों परिवारों ने पुलिस पूछताछ में जानकारी दी कि मनीष और प्रियांशी दीपावली से पहले मिलने के लिए झांसी में आए थे. तब प्रियांशी ने प्रेमी मनीष को साफसाफ शव्दों में बता दिया था, अब हमारी आगे से बात नहीं होगी. तुम भले ही अपनी पत्नी को छोड़ रहे हो, मगर मैं तुम से शादी नहीं कर सकती.

इस के बावजूद मनीष प्रियांशी को फोन कर के आखिरी बार मिलने के लिए बुला रहा था. पुलिस को प्रियांशी के मोबाइल की जांच से मनीष के नंबर से लगातार कालिंग मिली हैं. 7 नवंबर, 2025 को मनीष ने फिर प्रियांशी को दूसरे फोन नंबर से कौल कर के कहा, मैं अब दिल्ली जा रहा हूं. तुम्हें कभी परेशान नहीं करूंगा. अब हमारे रास्ते अलगअलग होंगे. मगर जुदा होने से पहले एक बार मिल लेते हैं.

इस के चलते प्रियांशी काफी मानमनौव्वल के बाद मनीष से मिलने के लिए राजी हो गई. दोनों के बीच मुलाकात के लिए कालेज की छुट्टी वाला दिन यानी 9 नवबंर रविवार तय हुआ. मनीष ने झांसी जाने का विचार बनाया और 9 नवंबर, 2025 को वह प्रियांशी से मिलने के लिए घर से बिना बताए निकल गया.

उस ने एक बैग में अपना जरूरी सामान तमंचा आदि रखा और झांसी जा पहुंचा. प्रियांशी से मिलने के लिए उसके हौस्टल के कई चक्कर भी काटे. 1-2 बार उस ने हौस्टल में अंदर जाने की कोशिश भी की, लेकिन हौस्टल गेट पर तैनात गार्ड ने उसे हौस्टल में घुसने नहीं दिया. काफी परेशान होने के बाद मनीष ने किसी तरह हौस्टल में प्रियांशी के पास मिलने के लिए सूचना भिजवाई. काफी चिरौरी के बाद प्रियांशी उस से सिर्फ आखिरी बार मिलने के लिए राजी हो गई.

दोपहर करीब 12 बजे प्रियांशी अपने हौस्टल से बाहर आई और वहां इंतजार कर रहे मनीष के पास पहुंची. दोनों साथसाथ चहलकदमी करते व बतियाते हुए यूनिवर्सिटी के गेट नंबर एक के पास स्थित स्ट्रीट फूड की दुकानों के पास पहुंचे. इस के बाद दोनों वहां से लगभग 3 किलोमीटर दूर हवाना रेस्टोरेंट गए. जहां मनीष ने हक्का नूडल्स, बर्गर और फ्रेंच फ्राई मंगवाई. कुछ खाया शेष पैक भी करवाया. मनीष ने 604 रुपए का बिल भी पेंमेंट किया. दोनों के बीच पुराने गिले शिकवे सामने आने लगे.

यहां मनीष ने प्रियांशी को शादी के लिए मनाने का काफी प्रयास भी किया, लेकिन प्रियांशी उस से फिर से नाता जोडऩे और शादी करने को तैयार नहीं हुई. इस बीच दोनों में बहस भी हुई. फिर करीब 2 मिनट तक दोनों रेस्टोरेंट की लौबी में रील्स बनाते रहे. कभी गार्ड से फोटो खींचने को कहते, कभी मनीष प्रियांशी की फोटो खींचता दिखा. इस के बाद दोनों हंसते और बात करते हुए रेस्टारेंट के बाहर निकल गए. यह सब वहां के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया.

वहां से दोनों यूनिवर्सिटी गेट की ओर आए. यहीं फुटपाथ पर बनी पट्टी पर बैठ कर दोनों हंसहंस कर बातचीत करते रहे. उन्होंने स्ट्रीट फूड वाले से सैंडविच खरीदा और वहीं बैठ कर खाते रहे. उस दिन रविवार 9 नवंबर, 2025 की दोपहर का समय था. सामान्य दिनों की तरह खासी भीड़ थी. हौस्टल में रहने वाले छात्र एवं छात्राएं भी मौजूद थे. दोपहर करीब सवा 2 बजे के बाद मनीष और प्रियांशी गेट नंबर एक के पास फुटपाथ पर टहल रहे थे. इस के बाद प्रियांशी जब अपने हौस्टल वापस जाने लगी तो मनीष ने कहा, अपना सामान ले लो. जैसे ही प्रियांशी उस की तरफ मुड़ी, मनीष ने अचानक नीचे झुक कर अपने साथ लाए बैग से तमंचा निकाल कर उसे गोली मार दी. उस के अगले क्षण प्रियांशी जमीन पर गिर पड़ी.

उस के महज 30 सेकेंड के अंदर मनीष ने अपनी कनपटी से तमंचा सटा कर फायर किया. गोली कनपटी को चीरते हुए आरपार हो गई. दोनों फुटपाथ पर गिर कर तड़पने लगे. गोली की आवाज सुन कर एकबारगी लोग कुछ समझ नहीं सके. युवक मनीष और युवती प्रियांशी के जमीन पर गिरते ही सब से पहले यूनिवर्सिटी गेट के सामने दूसरी पटरी पर मौजूद लोगों ने ‘मार दिया…मार दिया’ का शोर मचाया.

इस के बाद वहां अफरातफरी और चीख पुकार मच गई. उधर से गुजर रहे वाहन वहां का नजारा देखते ही तेज रफ्तार में भाग निकले, जबकि कुछ लोग थोड़ी दूर पर जा कर खड़े हो गए. वहां मौजूद कुछ युवकों ने घटना का वीडियो बना लिया. इस में प्रियांशी जमीन पर पड़ी तड़पती नजर आ रही थी. जबकि मनीष निर्जीव पड़ा था.

घटना के तुरंत बाद यूनिवर्सिटी गेट के पास स्थित स्ट्रीट दुकानों के शटर धड़ाधड़ बंद हो गए. दुकानदार भाग निकले. सड़क पर दोनों का खून फैल गया था. यूनिवर्सिटी पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक किसी ने उन्हें अस्पताल नहीं पहुंचाया था. दोनों घायलों को पुलिस ने कुछ राहगीरों की मदद से झांसी मैडिकल कालेज पहुंचाया. डौक्टरों ने जांच के बाद युवक को मृत घोषित कर दिया, जबकि छात्रा का इलाज शुरू कर दिया.

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डौक्टरों ने बताया कि छात्रा के शरीर से काफी खून बह चुका है. उधर घटनास्थल पर इस बीच घंटों तमाशबीनों की भीड़ जुटी रही. जितने मुंह उतनी बातें. पुलिस की शुरुआती जांच में मामला लव अफेयर का बताया गया. फोरैंसिक टीम भी वहां पहुंच गई, जिस ने सारे सबूत इकट्ठा किए. हौस्टल के भी सैकड़ों छात्रछात्राएं पहुंच गए.

गोली लगने के बाद प्रियांशी कुछ देर के लिए बेहोश हो गई थी. कुछ पल बाद ही उसे होश आया. तब उस ने पुलिस को बताया, वह मनीष के साथ खड़ी थी. तभी मनीष ने कहा, अपना सामान वापस ले लो. इतना कह कर वह नीचे झुका और अपना बैग खोला, वह कुछ समझ पाती इस से पहले ही उस ने उस के ऊपर गोली चला दी. पुलिस ने घटनास्थल से 315 बोर का तंमचा बरामद किया. इस के साथ ही 2 चले हुए खोखे भी मिले. मनीष के हाथ में नस काटे जाने के 7 निशान भी मिले.

अपने बैग से तंमचा निकाल कर एक ही झटके में उस ने सामने खड़ी प्रियांशी के सीने में गोली मार दी. वह गोली उस के सीने के दाएं हिस्से को चीरते हुए पीठ के रास्ते बाहर निकल गई. डौक्टरी जांच में पता चला कि गोली का एक हिस्सा अभी रीढ़ की हड्डी में फंसा हुआ है. प्रियांशी को आईसीयू में भरती किया गया. डौक्टरों की एक टीम लगातार उस की निगरानी में जुट गई.

डौक्टरों का कहना है कि स्पाइनल में गोली का एक टुकड़ा फंसा होने से प्रियांशी के शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं कर रहा है. इस के बाद देर रात हालत गंभीर होने पर प्रियांशी को भोपाल रैफर कर दिया गया. फेमिली वाले उसे ले कर आगे के इलाज के लिए भोपाल ले गए.

वारदात से लभग 2 घंटे पहले प्रियांशी चौबे नाम की फेसबुक आईडी से एक रील पोस्ट की गई. 44 सेकेंड की रील में प्रियांशी और मनीष नजर आ रहे हैं. यह रील अनेक वीडियो मिक्स करके बनाई गई थी. इस में गाना भी लगाया गया.

इस रील के कैप्शन में लिखा गया, आज ही के दिन इस रिश्ते के 7 साल पूरे हुए. इसके साथ ही लिखा था कि ‘अगर सच्चा प्यार करो तो निभाओ, धोखा मत दो.’ यह रील वारदात के बाद वायरल हो गई, जिसे उस समय तक 43 हजार लोग देख चुके थे.

रील अपलोड होते ही फेसबुक प्रोफाइल पर मनीष और प्रियांशी की एक साथ की तसवीर भी लगा दी गईं. पुुलिस की छानबीन से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि प्रियांशी चौबे की आईडी से यह रील अपलोड किस ने की? प्रियांशी चौबे नाम की फेसबुक आईडी पर 9.7 हजार फोलोअर थे.

इंस्टाग्राम और फेसबुक पर प्रियांशी को रील बनाने का बेहद शौक था. वह नामी ब्लौगर बनना चाहती थी. इस के लिए उस ने फेसबुक एवं इंस्टाग्राम पर अलगअलग पेज बना रखे थे. वह वर्तमान राजनीतिक घटनाओं  के छोटेछोटे वीडियो बना कर अपलोड करती थी. उस की प्रोफाइल पर 200 से अधिक वीडियो हैं. वह कंटेट क्रिएटर बनना चाहती थी. हालांकि प्रियांशी के फेमिली वाले उसे उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे. इसी के चलते उसे एमबीए करने झांसी भेजा गया था.

पोस्टमार्टम के बाद मनीष का शव 10 नवंबर को ललितपुर पहुंचा. गोविंद सागर बांध की तलहटी स्थित सीतापाठ के निकट उस का अंतिम संस्कार किया गया. मनीष के चचेरे भाई ने उसे मुखाग्नि दी. प्रियांशी का 33 घंटे औरपरेशन चला. डौक्टरों ने रीढ़ की हड्ïडी के पास फंसी हुई गोली को तो निकाल दिया, मगर प्रियांशी के दोनों पैर सुन्न (बेजान) बताए जा रहे हैं. वह चल सकेगी या नहीं, ये अब घाव भरने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

भोपाल एम्स के डौक्टरों की टीम ने औपरेशन के बाद रीढ़ की हड्डी में छल्ले डाले हैं. डौक्टरों का कहना है कि गोली ज्यादा देर तक रीढ़ की हड्डी में फंसने की वजह से इंफेक्शन का खतरा बढ़ गया था. फिलहाल प्रियांशी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी.

यूनिवर्सिटी के बाहर प्रेमिका प्रियांशी को गोली मारने वाले उस के प्रेमी मनीष साहू ने प्यार के चक्कर में अपनी वैवाहिक जिंदगी को खत्म कर लिया था. वहीं उस ने जिस प्रेमिका की खातिर पत्नी को छोड़ा, उसी को पाने की चाहत में नाकाम रहने पर प्रेमिका को गोली मार कर स्वयं खुदकुशी कर ली. यह जुनूनी इश्क का खौफनाक नतीजा था. Love Obsession Crime

(कथा में प्रियांशी परिवर्तित नाम है)

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