Family Crime Story : एक तरफ काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों से बोझिल रवि काले थका हुआ था, जबकि 4 बच्चे जनने के बाद भी उस की पत्नी अंबिका काले को प्रेमी की यादें गुदगुदाती रहती थीं. 12 साल के वैवाहिक जीवन के बावजूद विवाहिता अंबिका नाजायज रिश्ते की डोर थामे थी. उस के बाद जो कुछ हुआ, उस में पति का संयम टूटा और फिर

रवि काले शाम को जब घर आया, तब पत्नी अंबिका काले को सजीसंवरी देख कर हैरान रह गया. वह अन्य दिनों की तरह बेहद खूबसूरत लग रही थी. वैसे वह बहुत सुंदर थी. मौडल की तरह चिकना शरीर, कमर, पेट, पीठ, बड़ी आंखें, रसीले होंठ, गाल और स्तनों के उभार आदि को देख कर उस की उम्र का अंदाजा लगाना आसान नहीं था, जबकि वह 3 बेटियों और एक बेटे की मां थी. उन की शादी के 12 साल बीत चुके थे.

रवि उस के सजने का कारण पूछने ही वाला था, तभी बच्चों ने आ कर बताया कि आज उन के घर कौन आया था. उस का नाम सुनते ही रवि के चेहरे पर खुशी की जगह तनाव दिखने लगा. तुरंत वह अंबिका पर बरस पड़ा, तुम्हें बारबार उस से मिलने से मना किया है, लेकिन तुम पर कोई असर नहीं हो रहा है. बताओ, अब मैं क्या करूं तुम्हारा? तुम को मेरी फिक्र ही नहीं है. अंबिका भन्नाते हुए बोली. क्या फिक्र नहीं है? जो तुम कहती हो, जो तुम मांगती हो, वह सब कुछ हैसियत से अधिक देता हूं… रवि बोला.

एक औरत को पति से और भी कुछ चाहिए होता है. वह तुम दे नहीं नहीं पाते हो. अंबिका तीखेपन के साथ बोली. और क्या चाहिए तुम्हें? रवि बोला. कोई औरत मर्द से क्या चाहती है तुम्हें नहीं पता है क्या? अंबिका अब तुनकती हुई बोली. अब मैं क्या करूं? कमजोरी है तो है… इलाज करवाओ मर्दाना कमजोरी का वरना? वरना क्या? किसी दिन उडऩछू हो जाऊंगी मैं…तुम देखते रहना. फिर मत कहना कि पहले क्यों नहीं बताया.

रवि और अंबिका के बीच काफी समय तक इस तरह की अपसी बातें होती रहीं. दोनों एकदूसरे की निजी खामियों को उजागर करते रहे. साधारण परिवार की अंबिका जब 12 साल पहले रवि के साथ सात फेरे ले कर आई थी, तब दोनों ने खुशहाल जिंदगी की शुरुआत की थी. दोनों की जोड़ी की परिवार और समाज में तरीफ होती थी.

कुछ सालों में ही दोनों 3 बेटियों और एक बेटे के पेरेंट्स बन गए. रवि पर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ आ गया. परिवार का खर्च उठाने के लिए वह मेहनतमशक्कत करने लगा. एक तरफ घर की जरूरतें पूरी होने लगी थीं, जबकि दूसरी तरफ अंबिका के प्यार और देहसुख की प्यास बढऩे लगी थी.

जब वह खाली समय में घर पर होती, तब तन्हाई से तनाव में आ जाती थी. बेचैनी बढऩे लगती थी. ऐसे वक्त में न तो मोबाइल के रील्स से मन को शांति मिलती थी और न ही मनोरंजन के दूसरे साधनों से इच्छापूर्ति हो पाती थी. इसी क्रम में बीते दिनों की याद सताने लगती थी. तब अकसर पूर्व प्रेमी उस के दिलोदिमाग में आ जाता था. उस की अचानक आई छवि से वह और भी बेचैन हो जाती थी. बारबार ऐसा होने पर उस से मिलने को बेताब हो गई थी. किसी तरह उस ने पूर्व प्रेमी का मोबाइल नंबर मालूम कर लिया था.

बात पहली दिसंबर, 2025 की है. रवि उस रोज दोपहर में ही काम से घर लौट आया था. अंबिका घर में नहीं थी. उस के बच्चे अपने ननिहाल गए थे. पत्नी का बैग घर में नहीं था. छिटपुट सामान बैड पर बिखरा हुआ था. उस के रोजाना पहनने वाले कपड़ेलत्ते भी नहीं थे.

उसे समझने में देर नहीं लगी कि अंबिका कहां गई होगी, लेकिन यह नहीं समझ पाया कि वह अपने सारे नए कपड़े और जेवर वगैरह क्यों साथ ले गई? कुछ सेकेंड रुक कर रवि ने अंबिका के मायके में फोन मिलाया. फोन उस की सास ने रिसीव किया. अभी वह पत्नी के बारे में पूछने वाला ही था कि उधर से ही वही पूछ बैठी, दामादजी, आप कैसे हैं? अंबिका कैसी है? बच्चे अपनी मम्मी को याद कर रहे हैं…

रवि आश्चर्य में पड़ गया. कारण वह जो समझ रहा था, वह गलत था. सास की बात से लगा कि अंबिका मायके नहीं गई है. उस ने तुरंत फोन कट कर दिया. सोचने लगा अंबिका अपने मायके नहीं गई है तो कहां गई होगी? मायके जाती जो वहां जाने के लिए पैसे जरूर मांगती. इस का मतलब वह कहीं और चली गई है. फिर उसे कुछ दिनों पहले उस के द्वारा कही गई बात याद आई, मैं उडऩछू हो जाऊंगी!

वह सोच में पड़ गया, जरूर उस दिन के झगड़े का असर है. वह अपने प्रेमी संग फुर्र हो गई है! अब उसे कहां ढूंढा जाए? कुछ मिनट सोचने के बाद उस ने महाराष्ट्र के सोलापुर के करकब थाने में पत्नी अंबिका की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. पुलिस ने अंबिका के गुमशुदा होने की सूचना जारी कर दी. उस ने पुलिस को उस रिश्तेदार के बारे में भी बताया, जिस के साथ अंबिका के होने की संभावना थी. वह उस का प्रेमी था. अकसर उस की अनुपस्थिति में वह घर आता रहता था.

इस पर रवि ने कई बार उस पर आपत्ति भी जताई थी. अंबिका पर इस का कोई असर नहीं हुआ था. उलटे वह उस से उलझ जाती थी. पिछले हप्ते तो उस ने गजब ही आरोप मढ़ दिया था. उस पर नामर्द होने का आरोप लगाया था और भाग जाने की चुनौती दे डाली थी.

कुछ दिन पहले जब अंबिका घर छोड़ कर चली गई थी, तब रवि ने रिश्तेदारों की मदद से ढूंढ कर बच्चों की खातिर उसे समझाबुझा कर लाया गया. अंबिका ने भी पति की बात मान ली थी और अपनी गलती सुधारने की कसम खाई थी. रवि ने भी उस की गलतियों पर चादर डाल दी थी. कुछ दिन तक तो अंबिका ठीक से रही. अपने बच्चों का ख्याल रखने लगी. पति से भी प्यार से बातें करने लगी.

किंतु एक दिन फिर वही हरकत करने लगी. पति के घर पर नहीं होने पर अपने प्रेमी को बुलाने लगी. उस के साथ रंगरलियां मनाने लगी. एक बार जब रवि ने रंगेहाथों पकड़ लिया, तब पति पर ही आगबबूला हो गई. दरअसल, अंबिका पति को नजरंदाज कर चुकी थी. उसे प्रेमी की बाहों में कुछ पल गुजारना अच्छा लगने लगा था. पति से शरीरसुख से वंचित अंबिका अपने प्रेमी से वासना की आग बुझाने लगी थी. उस का पति के प्रति नजरिया ही बदल चुका था. उसे इस बात का जरा भी मलाल नहीं था कि उस की इस हरकत का बच्चों पर क्या असर होगा? पति की परिवार और समाज में क्या इज्जत रहेगी?

पति के समझाने पर भी अंबिका ने अपने प्रेमी का साथ नहीं छोड़ा. जब पति काम पर चला जाता था, तब अंबिका प्रेमी को घर बुला लेती थी. रवि को पूरा विश्वास था कि इस बार भी अंबिका जरूर अपने प्रेमी के पास ही गई होगी. पिछली बार उसे गोवा से ढूंढ निकाला था. सो रवि गोवा चला गया. उस का अनुमान सही निकला था. अंबिका अपने प्रेमी संग मिल गई.

इस बार उस ने धैर्य और शांति से काम लिया, उस के पिता के बीमार होने का बहाना बनाया. यह भी वादा किया कि एक बार अपने पापा को चल कर देख ले. उन्हें दिल का दौरा पड़ा है. आईसीयू में हैं. उस के बाद वह जिस के साथ रहना चाहे रहे, उसे कोई आपत्ति नहीं होगी.

अंबिका पति की बातों में आ गई और 7 दिसंबर, 2025 की रात अपने गांव लौट आई. घर आ कर उस ने पाया कि पति उसे झूठ बोल कर गोवा से लाया है. इस पर वह बहुत गुस्से में आ गई. उसे मारने को दौड़ी. रवि अपना बचाव करने लगा. अंबिका ने चोट खाई नागिन की तरह फुंफकारते हुए उस की गरदन पर अपने दांत गड़ा दिए.

दर्द से तड़पते रवि ने उसे धकेल दिया. वह काफी गुस्से में आ चुका था. उस ने पास पड़ी लाठी से अंबिका की पिटाई कर दी. रात का समय था. अंबिका चीखतीचिल्लाती रही, रवि उसे बेरहमी से पीटता रहा. लाठी की मार से जब अंबिका अधमरी हो गई, तब घर के दूसरे कमरे से खेती में काम आने वाला लोहे का औजार ले आया. उस ने अंबिका के सिर पर जोर का हमला कर दिया.

इस हमले से अंबिका के सिर से खून बह निकला. वह वहीं जमीन पर बेसुध पड़ी रही. कुछ देर में ही उस की मौत हो गई. रवि डर गया और वहां से फरार हो गया. 8 दिसंबर, 2025 को सुबह के समय सोलापुर के करकंब पुलिस थाने में खड़भोसे गांव में महिला की हत्या की सूचना मिली.

यह सूचना गांव की पुलिस द्वारा मिली थी. घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने तहकीकात की. मृतक की पहचान विवाहित अंबिका काले के रूप में हुई, जिस की उम्र 30 वर्ष के करीब थी. इस की जांच की जिम्मेदारी एपीआई सागर कुंजीर को दी गई थी. उन्होंने एसआई नीलेश गायकवाड़, हैडकांस्टेबल बापूसाहेब मोरे, बालाजी घोलवे और अभिषेक के साथ जांच पूरी की.

मौकाएवारदात पर हत्या में इस्तेमाल लाठी और लोहे का औजार बरामद कर लिया गया. पुलिस ने वहां मौजूदा लोगों से पूछताछ की. उन्होंने घटना की रात चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुनी थीं. इस पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया. क्योंकि ऐसा वे अकसर सुनते रहे थे. इस वारदात के बारे में अंबिका के पापा अरुण सोनबा चव्हाण रैना, जो सोलापुर के तहसील पंढरपुर स्थित गांव बादलकोट के रहने वाले हैं, करकंब पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवा दी.

उन्होंने पुलिस को बताया कि उन की बेटी अंबिका पर उस का पति रवि हमेशा शक किया करता था. उस की वजह से उन दोनों में 7 दिसंबर की रात काफी झगड़ा हो गया था. इस झगड़े में ही रवि ने अंबिका की हत्या कर दी. अंबिका के पापा की इस शिकायत पर रवि ही हत्याकांड का मुख्य आरोपी था. उस की तलाश जल्द ही कर ली गई. पकड़ा गया और उस ने अपने बयान में हत्या में शामिल होना कुबूल कर लिया. उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Family Crime Story

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