Teen Love Crime Story : जिस प्रेमी के साथ अंजू दीसारी रामैया ने लव मैरिज की थी, वही उसे छोड़ कर चला गया. तब अंजू ने अपनी दोनों बेटियों की परवरिश की. फिर एक दिन 17 वर्षीय छोटी बेटी स्वाति ने अंजू की न सिर्फ हत्या कर दी, बल्कि उसे कमरे में दफन कर दिया. आखिर बेटी ने ऐसा क्यों किया?

योजना पहले से तैयार थी. हैदराबाद निवासी स्वाति की मम्मी अंजू दीसारी रामैया काम से लौट कर शाम को घर आई. उसे यह पता नहीं था कि मोंटी घर के अंदर ही छिपा है. स्वाति ने मम्मी के साथ सामान्य व्यवहार किया. दोनों ने खाना बना कर खाया और अपनी दिनचर्या के अनुसार अंजू और स्वाति सोने के लिए चारपाई पर लेट गईं.

अंजू थकी हुई थी, जिस से उसे रोजाना की तरह जल्दी ही नींद आ गई. मम्मी के गहरी नींद में जाते ही स्वाति ने ताली बजा कर अपने प्रेमी मोंटी कुमार सिंह को संकेत दिया कि मौका है, निकल कर काम तमाम कर दो. मोंटी पहले से ही तैयार था. 20 वर्षीय मोंटी ने गहरी नींद में सोई अंजू पर चाकू से हमला कर दिया और उस के सीने पर कई वार किए, योजना के अनुसार 17 वर्षीय स्वाति ने अपनी मम्मी को कस कर पकड़ रखा था.

अंजू की चीख भी न निकल सकी और कुछ ही देर में उस की मौके पर ही मौत हो गई. अपनी बड़ी बहन निर्मला के लौटने से पहले स्वाति प्रेमी मोंटी से मिल कर शव को बिस्तर के नीचे छिपा दिया. कमरे की धुलाईसफाई इस तरह कर दी कि यह पता ही न चले कि यहां कोई हत्या की गई है.

दूसरे दिन जब निर्मला काम से वापस आई तो एकदो घंटे रुकने के बाद वह फिर से ड्यूटी करने के लिए चली गई.

देर शाम जब वह वापस लौटी तो उस ने स्वाति से मम्मी के बारे में पूछा. स्वाति ने अपनी बहन को गुमराह करते हुए कहा, ”मम्मी के फोन पर किसी फोन आया था. इस के बाद किसी के साथ चली गई हैं. बड़ी बहन ने स्वाति की बात पर यकीन कर लिया, क्योंकि अकसर मम्मी कभी भी किसी का फोन आने पर चली जाया करती थी. दूसरे दिन निर्मला ने मोंटी को घर पर ही स्वाति के साथ देखा तो निर्मला ने चाह कर भी कोई आपत्ति नहीं की. उस ने सोचा कि मम्मी आ जाएंगी तो अपने आप जो चाहेगी करेगी.

दरअसल, स्वाति और उस का प्रेमी शव को ठिकाने लगाने की चिंता में थे. दोनों यही सोच रहे थे कि आखिरकार इस लाश का क्या करें? क्या न करें? कहीं पुलिस पकड़ लेगी तो..? बहन को पता चल गया तो क्या होगा? इस तरह की बातों में रात कब गुजर गई पता ही नहीं चला. घटनास्थल पर जो भी सबूत थे उन्हें मिटाने के लिए दोनों में लगातार चिंतन चल रहा था.

दोनों ने शुरू में शव को बाहर ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन वे इस में नाकाम रहे. जब शव सडऩे लगा और उस में से हल्की बदबू आने लगी तो वे घबरा गए. चौंकाने वाली बात यह है कि कत्ल करने के बाद उन्होंने सबूत मिटाने के लिए हर एक कदम इतने ठंडे दिमाग से उठाया कि यकीन करना मुश्किल है. उन्होंने पहले लाश को पौलीथिन में लपेटा. फिर बैडरूम के फर्श में ही गड्ढा खोदा और लाश को वहीं दफना दिया. सीमेंट व रेत का इस्तेमाल कर के गड्ढे के ऊपर फर्श कर दिया.

तीसरे दिन जब निर्मला काम से वापस आई तो  कमरे में फर्श देख कर हैरान हुई. निर्मला के पूछने पर स्वाति ने बताया कि चूहों के आतंक के कारण फर्श की मरम्मत कराई गई है. बात आई गई हो गई. यह जोड़ा कुछ समय तक उसी घर में रहता रहा,सबसे ज्यादा भयानक यह है कि स्वाति अपने प्रेमी के साथ उसी कमरे में रही. जिस के फर्श के नीचे उस की मम्मी की लाश दफन थी.

इसी दौरान स्वाति गर्भवती हो गई तो मोंटी कुमार सिंह ने 8 जनवरी 2026 को उस के साथ यादगिरिगुट्टा मंदिर में शादी कर ली. उस के बाद वे भारत नगर रिसाला बाजार में एक किराए के मकान में शिफ्ट हो गए. तब से यह जोड़ा साथ रह रहा था. लगभग 2 महीने पहले ही स्वाति ने एक बेटे को जन्म दिया. हैरानी की बात यह है कि निर्मला उसी घर में रहती रही, जहां उस की मम्मी का शव दफनाया गया था, लेकिन उसे इस बात की भनक तक नहीं लगी.

इसी बीच में एक दिन स्वाति ने बड़ी बहन से कहा कि दीदी मम्मी का कोई पता नहीं चला. तब निर्मला ने कहा कि हां उन का पता नहीं चल रहा और उन का फोन भी बंद आ रहा है. तब स्वाति ने कहा, दीदी मैं तुम्हें बताना नहीं चाहती थी. मेरे अफेयर पर तो तुम्हें इतनी दिक्कत थी, परेशानी थी, लेकिन तुम्हें पता नहीं कि मम्मी का भी अफेयर चल रहा था. जैसे पापा का अफेयर चल रहा था तो वो घर छोड़ के चले गए हैं. मम्मी का भी अफेयर चल रहा था. देख लेना वह यहां से गायब हो चुकी है. अपने प्रेमी के साथ भाग चुकी है.

इस के बाद फिर वह दोनों बहनें मिल कर अपनी मम्मी को जगहजगह ढूंढती रहीं, स्वाति तो कुछ ऐसी ऐक्टिंग कर रही थी, जैसे अपनी मम्मी को ले कर वो कितनी ज्यादा सजग है सतर्क है. लेकिन मम्मी अंजू का कहीं कोई सुराग नहीं मिला और न ही वह वापस लौट कर आई. ऐसे ही करतेकरते 5 महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया. इसी बीच निर्मला को याद आया कि मम्मी के तो 80 हजार रुपए थे.

उन्होंने एक चिट फंड कंपनी में जमा किए थे. कंपनी ने जो पासबुक दी थी, वह ले कर दोनों बहनें कंपनी पहुंची और कंपनी के कर्मचारियों से वह पैसे दिए जाने की मांग करने लगीं. पासबुक देख कर कंपनी के लोगों ने कहा कि यह पैसा तो अंजू ने जमा किया है. इस पैसे को वही निकाल सकती हैं. तब दोनों बहने अपनी मम्मी के लापता होने की दास्तान कंपनी के अधिकारियों को सुनाने लगी. वह उन के सामने गिड़गिड़ा और रोने लगीं.

इस से कंपनी के अधिकारियों का दिल पसीज गया. तब उन्होंंने कहा, आप को उन की एक गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कराना होगा. तब उस एफआईआर की छाया प्रति ले कर आना. हम लोग कोशिश करेंगे कि आप का पैसा आप को मिल जाए.

दोनों बहनें फैसला कर के 17 अक्तूबर 2025 को नजदीकी पुलिस स्टेशन गईं और मम्मी अंजू दीसारी रामैया की गुम होने की पूरी कहानी बताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने की दरखास्त की. उन्होंने मम्मी का फोटो जब एसएचओ को दिया तो वह भी सोचने के लिए मजबूर हो गए कि इतनी सुंदर महिला जरूर किसी के प्रेम प्रसंग में ही घर से भागी होगी. पुलिस  ने भी मामला प्रेम प्रसंग का ही समझा. पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करने के बाद जांच पड़ताल शुरू कर दी. जांच पड़ताल से पुलिस को कुछ भी हासिल नहीं हुआ. फिर पुलिस ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

मार्च, 2026 की बात है एक स्कूटर सवार युवक को हैदराबाद शहर के क्षेत्र जवाहर नगर में लालबत्ती क्रास करते हुए पुलिस ने पकड़ लिया. पुलिस ने उस से पूछा, बताओ यह स्कूटर किस का है? उस ने बताया कि स्कूटर मेरा ही है. तब पुलिस ने उसी समय स्कूटर का रजिस्ट्रैशन नंबर औनलाइन चेक किया तो वह अंजू दीसारी रामैया नाम की महिला के नाम पर रजिस्टर्ड निकला. पुलिस ने उस से पूछा, अंजू कौन है? उस से बात कराओ.

अंजू का नाम सुनते ही युवक एकदम से सकपका गया. इसी बीच में घबराते हुए बोला,  साहब मैं ने इस स्कूटर को अभी हालफिलहाल में ही खरीदा है. स्कूटर मैं ने एक मिलने वाले से ही लिया है. पुलिस वालों को शक  हो गया कि यह युवक स्कूटर किसी का चुरा कर लाया है. पुलिस ने कहा ठीक है, उस मिलने वाले से बात कराओ, जिस से यह स्कूटर खरीदा था.

आखिरकार स्कूटर बेचने वाले युवक को भी पुलिस के सामने आना पड़ा. उस ने बताया कि साहब स्कूटर तो मैं ने ही इसे बेचा था. पुलिस ने उस युवक की फेमिली के बारे में जब डिटेल खंगाली तो न तो उस की मां का नाम अंजू था और न ही उस के किसी रिश्तेदार का नाम अंजू था. फिर उस से पूछा कि बताओ यह अंजू कौन है?

तब उस ने बताया अंजू उस की सास का नाम है. उस की सास का स्कूटर है. जब इस तरह की बात आई तो पुलिस ने कहा कि फिर अपनी सास से बात कराओ. तब वह युवक सकपका गया. उस ने कहा कि साहब, मैं सास से बात नहीं करा सकता, लेकिन उन की बेटी से बात करा सकता हूं. आप चाहो तो उन की बेटी से बात कर लो. उस युवक ने स्वाति को फोन मिला दिया. पुलिस वाले ने स्वाति से कहा कि स्कूटर किस का है और क्यों बेचा है? स्कूटर का पूरा मामला पुलिस को बता दो.

स्वाति, पुलिस को इधरउधर के जवाब दे रही थी. पुलिस के डांटने पर उस ने फूटफूट कर रोना शुरू कर दिया. पुलिस ने पूछा कि तुम रो क्यों रही हो? फिर उस ने बताया कि साहब साल 2021 में उस के पिता हमें छोड़ कर किसी और महिला के पास चले गए और साल 2025 में मम्मी भी किसी और के साथ हमें छोड़ कर चली गई. पापा ने भी अलग शादी कर ली.

मम्मी अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई. उनका आज तक कोई पता नहीं चला है. मैं क्या करूं? कहां से जा कर  अपनी मम्मी को ले कर आऊं? हम ने तो एक एफआईआर भी दर्ज कराई थी और पुलिस वालों ने इस मामले में कोई जांचपड़ताल भी नहीं की. पुलिस ने स्कूटर अपने कब्जे में ले लिया चालान की रसीद स्कूटर चलाने वाले को थमा दी और कहा कि इसे अदालत  से छुड़ा लेना.

स्कूटर के मालकिन की जांच के लिए इतना काफी नहीं था कि  वह भाग गई. पुलिस ने कहानी पर आंख बंद कर के भरोसा नहीं किया. पुलिस ने स्कूटर के असली मालिक की तलाश शुरू कर दी. सब से पहले पुलिस ने 17 अक्तूबर, 2025 को लिखे गई गुमशुदगी की रिपोर्ट का अध्ययन किया. पुलिस को इस बात पर शक हुआ की 12 मई, 2025 की लापता औरत की गुमशुदगी 4 महीने बाद यानी 17 अक्तूबर, 2025 को क्यों लिखाई गई?

पुलिस को जांच में पता चला कि स्वाति नाबालिग है और अपने प्रेमी मोंटी से शादी कर के एक बच्चा भी पैदा कर लिया है. अनोखा मामला होने पर अंजू दीसारी रामैया के लापता होने का राज पुलिस को मोंटी और प्रीति के अंदर ही होने का शक हुआ. बात इंसपेक्टर सायदुलु तक पहुंची. उन्होंने स्वयं ही मामले की जांचपड़ताल शुरू की. इंसपेक्टर सायदुलु ने स्वाति और मोंटी से अलगअलग पूछताछ की. दोनों को आमनेसामने बिठा कर सवाल किए गए.

पुलिस की सख्त पूछताछ के आगे आखिरकार वे दोनों टूट गए. स्वाति और मोंटी दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. इंसपेक्टर सायदुलु ने डीसीपी च. श्रीधर (मलकाजगिरी) को पूरे मामले से अवगत कराया, क्योंकि गड्ढे में दबे शव को खोदने के लिए मजिस्ट्रैट की स्वीकृति जरूरी थी.

फिर तहसीलदार की मौजूदगी में इंसपेक्टर सायदुलु पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने सूचना दे कर स्वाति की बड़ी बहन निर्मला को अपने घर पर पहुंचने को कहा, क्योंकि वह घर बंद कर के ड्यूटी पर गई गई थी.

निर्मला ने समझा कि उस की लापता मम्मी शायद पुलिस ने बरामद कर ली हैं. वह घर पहुंची तो उस के थोड़ी ही देर बाद पुलिस की कस्टडी में मोंटी और स्वाति भी उस के घर पहुंच गए. निर्मला उन्हें पुलिस कस्टडी में देख कर दंग रह गई. बोली, सर, मामला क्या है?

पुलिस ने स्वाति की निशानदेही पर कमरे के फर्श की खुदाई शुरू कर दी. जब उस जगह को खोदा गया तो वहां से अंजू दीसारी रामैया का शरीर नहीं, बल्कि सिर्फ एक कंकाल मिला. ये सब देख कर निर्मला को पूरा मामला समझाया गया कि इन दोनों ने ही उस की मम्मी की हत्या कर के शव को जमीन में गाड़ दिया था.

कंकाल देख कर वह फूटफूट कर रोने लगी. आसपास के लोग भी पुलिस को देख कर वहां आ गए. उन्हें जब इस घटना का पता चला तो वह भी आश्चर्य चकित रह गए. एसीपी चक्रपाणि और इंसपेक्टर सायदुलु ने डीसीपी च. श्रीधर के साथ मिल कर नेरेडीमेड स्थित कमिश्नर कार्यालय में प्रैस वार्ता आयोजित कर पत्रकारों को इस केस की जानकारी दी.

पुलिस ने दोनों आरोपियों स्वाति और उस के प्रेमी मोंटी को गिरफ्तार कर के अदालत में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया. मोंटी कुमार सिंह जो 20 साल का था, उसे अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया और स्वाति नाबालिग यानी 37 साल की थी, इसलिए अदालत द्वारा उसे बाल सुधार गृह भेज दिया.

दोनों आरोपियों स्वाति और मोंटी से पूछताछ के बाद अंजू दीसारी रामैया के मर्डर से ले कर घर में दफन करने की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद को ‘मोतियों का शहर’ भी कहा जाता है. चारमीनार, गोलकुंडा किला, हुसैन सागर झील और रामोजी फिल्म सिटी यहां के मुख्य पर्यटन स्थल हैं.

हैदराबाद में जवाहर नगर नाम से एक क्षेत्र है. यहां का शामीरपेट वाला इलाका शिक्षा के लिए बहुत प्रसिद्ध है. यहां अनेक प्रतिष्ठित संस्थान स्थित हैं.

बिट्स पिलानी हैदराबाद भारत के बेहतरीन इंजीनियरिंग कालेजों में से एक है. नलसर ला यूनिवर्सिटी यह कानून की पढ़ाई के लिए देश के टौप संस्थानों में गिना जाता है.

जवाहर नगर में जीएचएमसी डंपिंग यार्ड है. ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन का बड़ा कचरा निपटान केंद्र है.

पहले यह क्षेत्र कम विकसित था, लेकिन अब आसपास रिहायशी कालोनियां तेजी से बढ़ रही हैं. रियल एस्टेट की गतिविधियां बढ़ रही हैं. इसी जवाहर नगर में अंजू दीसारी रामैया नाम की एक महिला अपनी 2 बेटियों के साथ रहती थी. वह एक घरेलू कामगार थी और मूल रूप से झारखंड की रहने वाली थी.

करीब 20 साल पहले की बात है. झारखंड के एक छोटे से गांव में रहने वाली अंजू दासानी की उम्र मुश्किल से 19 साल थी. सुंदर चेहरा, बड़ीबड़ी आंखें और हर वक्त हंसते रहने वाली अंजू गांव की बाकी लड़कियों से अलग थी.

मासूमियत और परिपक्वता का एक अनूठा संगम उस के चेहरे से झलकता था. उस का सौंदर्य भोर की पहली किरण जैसा स्वाभाविक और शीतल था.

त्वचा मखमली और कंचन जैसी साफ थी. गालों पर प्राकृतिक गुलाबीपन और एक स्वस्थ चमक उस के स्वास्थ्य और खुशहाली की गवाही देती थी.

उस की चाल में एक खास तरह का आत्मविश्वास और लयबद्धता थी. उस के बाल घने, काले और रेशम की तरह मुलायम. जब वे अपनी लंबी चोटी में मोगरा या चमेली के फूलों का गजरा लगाती तो उन की पूरी शख्सियत महक उठती थी.

वह शृंगार के बजाय सादगी को तरजीह देती थी. कानों में छोटे झुमके और गले में एक पतली सी सोने की चेन उस की सुंदरता में चार चांद लगा देती थी.

ईश्वर दीसारी रामैया नामक युवक से अंजू के नैन लड़ गए. दोनों में प्रेम धीरेधीरे परवान चढ़ता गया. दोनों के परिजनों को भी उन के प्रेम प्रसंग की जानकारी हो गई. अंजू के फेमिली वाले ईश्वर से शादी करने के लिए राजी नहीं थे. लेकिन अंजू की जिद के सामने वह मजबूर हो गए और दोनों का विवाह कर दिया.

ईश्वर का कोई टिकाऊ कारोबार नहीं था. अंजू के फेमिली वालों ने इन दोनों से लगभग वास्ता खत्म कर दिया था. ईश्वर को भी अपने परिवार से कोई सपोर्ट नहीं मिलती थी. धीरेधीरे एक साल बीत गया. घर में एक बेटी ने जन्म लिया. जिस का नाम निर्मला रखा.

गांव में काम कम था. कभी दो वक्त की रोटी जुट जाती, कभी नहीं. एक रात, जब दोनों  घर के बाहर बैठे थे, ईश्वर ने कहा, यहां रह कर कुछ नहीं होगा अंजू. लोग कह रहे हैं कि हैदराबाद में बहुत काम है. चलो वहां चलते हैं. अंजू कुछ देर चुप रही. उस ने कभी गांव से बाहर कदम नहीं रखा था, लेकिन उस ने ईश्वर की आंखों में उम्मीद देखी और धीरे से बोली, ‘हां तुम रहोगे, वहीं मेरा घर होगा.

कुछ दिनों बाद दोनों एक ट्रेन में बैठ कर हैदराबाद के लिए निकल पड़े. रास्ता लंबा था, जेब में बहुत कम पैसे थे और दिल में डर भी. जब वे शहर पहुंचे तो उन्हें लगा जैसे किसी दूसरी दुनिया में आ गए हों. चारों तरफ बड़ीबड़ी इमारतें, भीड़, शोर और अनजानी भाषा. एक झुग्गी किराए पर ली. काम तलाशना शुरू कर दिया. एक फैक्ट्री में अच्छी मजदूरी का काम मिल गया. दोनों अपने जीवनयापन में जुटे रहे.

दिन बीतता रहा. 3 साल बाद दूसरी बेटी स्वाति हुई. ईश्वर और अंजू की शादी के 15 साल किसी सुनहरे सपने जैसे थे. धीरेधीरे घर का माहौल बदलने लगा. अंजू, जो कभी ईश्वर की हर छोटी जरूरत का खयाल रखती थी, अब पूरी तरह मम्मी के किरदार में ढल चुकी थी. उस का दिन बच्चों के स्कूल, उन के होमवर्क और उन की सेहत के इर्दगिर्द सिमट गया था.

ईश्वर को अब घर में खुद के लिए वह ‘पुराना कोना’ नहीं मिलता था. वह काम से थककर आता तो अंजू अकसर बच्चों की बातों में व्यस्त होती. ईश्वर को लगा कि वह अब उस घर में सिर्फ नाम का पति बन कर रह गया है. इसी अकेलेपन और उपेक्षा के बीच, ईश्वर के जीवन में एक महिला की एंट्री हुई. वह उसी कारखाने में नौकरी करती थी. उसे अकेलापन घेरे हुए था. उसे प्यार की तलाश थी. ईश्वर की आंखों में उसे वह सब कुछ दिखाई देता था, जिस की वह कल्पना करती थी.

अंजू जहां घर पर ईश्वर को बच्चों की समस्याओं की फेहरिस्त थमाती थी, वहीं प्रेमिका उस की बातें सुनती थी, उसे सराहती थी. ईश्वर को वह अहमियत वापस मिलने लगी थी, जिस की उसे भूख थी. अंजू इस बात से बेखबर थी कि उस के बच्चों के प्रति समर्पण ने उस के और पति ईश्वर के बीच एक ऐसी खाई पैदा कर दी थी, जिसे कोई और भर रहा था.

खटास बढ़ती गई. छोटीछोटी बातों पर बहस अब रोज का हिस्सा बन गई थी. आखिर 5 साल पहले एक शाम ईश्वर डीआर ने अपने बैग पैक किए. फिर वह पत्नी से बोला, अंजू, तुम्हें अब मेरी जरूरत नहीं है, तुम्हें बस इन बच्चों की जरूरत है. मुझे कोई मिल गया है, जो मुझे समझता है. इतना सुनते ही अंजू हक्कीबक्की खड़ी रह गई. उस ने जिसे अपना संसार मान कर अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था, वही संसार आज बिखर रहा था.

ईश्वर उसे और बच्चों को छोड़ कर चला गया. उस ने अपनी प्रेमिका से शादी कर ली और एक नया जीवन शुरू किया. इतना ही नहीं वह हैदराबाद शहर भी छोड़ कर चला गया. अंजू ने खुद को संभाला. बच्चों की परवरिश को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया.

समय पंख लगाए उड़े जा रहा था. अंजू की 2 बेटियों में एक बेटी बालिग हो चुकी है और दूसरी  की उम्र लगभग 15 साल के आसपास हो चुकी थी. बड़ी बेटी निर्मला भी अपनी मम्मी की तरह घरों में चौका बरतन करने जाने लगी. यह बात है साल 2024 की. छोटी बेटी स्वाति जो पढ़ाई लिखाई के साथ ही घर पर रहती है.

एक दिन की बात है अंजू अचानक ही काम से वापस लौट कर आ  गई. मेन दरवाजा खुला हुआ था. वह घर के अंदर घुसी तो घर के अंदर के कमरे का दरवाजा बंद था. कमरे के अंदर से कुछ अनजानी आवाजें अंजू के कानों में गूंजीं तो वह ठिठकी. तभी उस ने खिड़की से झांक कर कमरे के अंदर का दृश्य देखा तो उस के होश उड़ गए. छोटी बेटी बिलकुल नग्न अवस्था में थी और उस के साथ एक लड़का था. वो भी एकदम नग्न अवस्था में था.

वह एकदम से घबरा गई और समझ गई कि यह इतनी कम उम्र में बिगड़ गई. इस से पहले कि वो लड़का वहां से भागता, अंजू ने बाहर से दरवाजा बंद करने के बाद पुलिस को कौल कर दी. पुलिस मौके पर आ गई और उस लड़के को पकड़ कर थाने ले गई. उस लड़के ने अपना नाम मोंटी कुमार सिंह बताया. जिस की उम्र लगभग 20 साल के आसपास थी. पेशे से वह एक ड्राइवर था. जबकि स्वाति की उम्र साढ़े 15  साल की थी. पुलिस ने मोंटी को गिरफ्तार किया और पोक्सो एक्ट में उसे जेल भेज दिया.

अंजू भी अपनी स्वाति को समझाती. बड़ी बहन  भी उसे समझाती कि तुम्हारी उम्र अभी बहुत कम है. तुम्हें इस तरह का कोई काम नहीं करना चाहिए. दोनों ने जब स्वाति को समझाने की कोशिश की तो बेटी उस वक्त शांत हो गई. पुलिस वालों ने भी उसे समझाया कि बेटा यह गलत है. तुम दिल लगा कर पढ़ाई करो, जिस से तुम्हारा भविष्य उज्जवल हो और तुम अपनी मम्मी का भी सहारा बन सको.

स्वाति हर रोज शहर के सरकारी कन्या विद्यालय जाती थी. स्कूल के रास्ते में एक बड़ी कोठी पड़ती थी, जिस के बाहर सफेद रंग की एक चमचमाती लग्जरी कार खड़ी रहती थी. मोंटी कुमार सिंह उसी कोठी के मालिक का पर्सनल ड्राइवर था.

अकसर जब स्वाति अपनी सहेलियों के साथ स्कूल से लौटती तो मोंटी कुमार गाड़ी साफ कर रहा होता या मालिक के इंतजार में गेट पर खड़ा रहता. दिसंबर, 2023 में एक दिन तेज धूप में स्वाति का सिर चकरा गया और वह कोठी के गेट के पास ही लडख़ड़ा गई. मोंटी कुमार ने फुरती से आगे बढ़ कर उसे संभाला और पास की दुकान से ठंडा पानी ला कर दिया. ठीक हो? धूप बहुत तेज है, संभल कर चला करो. मोंटी कुमार ने सादगी से कहा था.

स्वाति ने जब उस की आंखों में हमदर्दी देखी तो उसे लगा जैसे बरसों बाद किसी ने उस की फिक्र की है. स्वाति भी सुंदरता में अपनी मम्मी अंजू से कम नहीं थी. लोग तो कहा करते थे की यह अपनी मम्मी की फोटो कौपी है. मोंटी कुमार उस की सुंदरता और पर्सनेलिटी पर फिदा हो गया.

दोनों तरफ आग बराबर की लगी हुई थी. उस के बाद मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया. स्वाति जब भी उस रास्ते से गुजरती, उस की नजरें अनजाने में उस सफेद गाड़ी और उसे चलाने वाले नौजवान को ढूंढने लगतीं. मोंटी कुमार भी उस की राह ताकता रहता. कभी वह उसे चौकलेट दे देता तो कभी स्कूल की पढ़ाई के बारे में पूछता.

स्कूल की छुट्टी के बाद, स्कूल से थोड़ी दूर एक पुराना बरगद का पेड़ था. मोंटी कुमार अकसर अपनी ड्यूटी से समय निकाल कर वहां खड़ा रहता. वहीं खड़े हो कर दोनों घंटों बातें करते. स्वाति उसे अपने घर की स्थिति, पापा का दूसरी शादी करना और मम्मी का चौकाबरतन करना, सब कुछ बता देती. स्वाति को लगता था कि मोंटी कुमार ही वह शख्स है, जो उसे इस तंग जिंदगी से बाहर निकाल सकता है. मोंटी कुमार के लिए भी स्वाति वह मासूम लड़की थी, जिसे वह दुनिया की मुश्किलों से बचाना चाहता था.

धीरेधीरे यह मासूम प्यार मस्ती और लापरवाही में बदलने लगा. स्वाति को लगा कि जब मम्मी और बड़ी बहन काम पर चली जातीं तो प्रेमी से मिलने के लिए घर से सुरक्षित जगह और कोई नहीं. उस ने मोंटी कुमार को घर बुलाना शुरू कर दिया. मोंटी कुमार भी, जो शुरू में उसे सिर्फ सहारा देना चाहता था, स्वाति के आकर्षण और सूने घर की आजादी में बहक गया.  स्वाति के छोटे से घर में उसे वह सुकून मिलता था जो उसे अपनी नौकरी की भागदौड़ में नहीं मिलता था.

अक्तूबर 2024 में एक दिन मोंटी को  घर पर ही अंजू ने स्वाति के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया. इस घटना के बाद, अंजू की तहरीर पर जवाहरनगर पुलिस ने मोंटी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया. पुलिस ने मोंटी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. लगभग 50 दिनों तक जेल में रहना पड़ा. जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद भी दोनों का रिश्ता जारी रहा.

इस के बाद जनवरी 2025 में मोंटी और स्वाति को उस के ही मकान में अंजू ने फिर से आपत्तिजनक हालत में देख लिया. अंजु ने फिर से मोंटी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई. पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि स्वाति अभी भी नाबालिक थी. इसलिए पुलिस ने पोक्सो एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर मोंटी को फिर जेल भेज दिया.

जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद, मोंटी फिर मौका देखकर स्वाति से मिला. दोनों ही दुनिया से बेखबर एकदूसरे को बेइंतहा प्यार करते थे. दोनों साथसाथ जीवन व्यतीत करने की कसमें खा चुके थे, लेकिन स्वाति की मम्मी अंजू इस में बारबार पुलिस काररवाई कर के एक गंभीर बाधक बन गई थी.

दोनों ने बड़ी सावधानी से मुलाकातें जारी रखीं. स्वाति अपनी मम्मी को अपने प्यार की बाधा समझने लगी. फिर उस ने प्रेमी मोंटी कुमार सिंह से मिल कर मम्मी को ही रास्ते से हटाने की खतरनाक योजना बना डाली. 12 मई, 2025 को इस योजना पर अमल कर दिया और मम्मी  अंजू की हत्या कर दी. Teen Love Crime Story

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