Friendship Betrayal. गौरव राहुल का जिगरी दोस्त था. लेकिन सपना को ले कर दोनों में जो दुश्मनी पैदा हुई, उस में गौरव को जान से हाथ धोना पड़ा तो राहुल को उस की हत्या के अपराध में जेल जाना पड़ा.

दो पहर को कुछ बच्चे इंदिरानगर स्थित बुद्धा पार्क में क्रिकेट खेलने आए तो झाडि़यों के बीच खून से तरबतर लाश देख कर उन्होंने इस की सूचना पार्क के गार्ड राजेश सिंह को दे दी. उस ने भी झाडि़यों में जा कर देखा तो सचमुच वहां एक युवक की लाश पड़ी थी. उस ने तुरंत इस बात की जानकारी थाना कल्याणपुर पुलिस को दी. यह 13 फरवरी, 2016 की बात है.

थाना कल्याणपुर के थानाप्रभारी इंसपेक्टर संतोष कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी और खुद पुलिस बल के साथ इंदिरानगर स्थित बुद्धा पार्क के लिए निकल पड़े. घटनास्थल पर पहुंच कर लाश के निरीक्षण में उन्होंने देखा, मृतक युवक 20-22 साल का रहा होगा. उस के सिर में पीछे की ओर सटा कर गोली मारी गई थी, जहां से उस समय भी खून रिस रहा था. वह नीले रंग की जींस, कालेसफेद रंग की शर्ट और काले रंग के स्पोर्ट्स शूज पहने था. वहीं भूरे रंग की एक जैकेट भी पड़ी थी.

तलाशी में मृतक की जींस पैंट की जेब से पुलिस को 2 टिकट मिले, जिन में से एक टिकट कस्बा छिबरामऊ से गुरसहायगंज तक का बस का तथा दूसरा गुरसहायगंज से कल्याणपुर रेलवे स्टेशन (कानपुर) तक का ट्रेन का था.

टिकटों से अंदाजा लगाया गया कि मृतक कस्बा छिबरामऊ या उस के आसपास किसी गांव का रहने वाला था. वह छिबरामऊ से बस द्वारा गुरसहायगंज आया होगा और वहां से रेल द्वारा कल्याणपुर (कानपुर) आया था. वह यहां किसी के बुलाने पर आया था, जहां उस की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.

संतोष कुमार सिंह घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे थे कि एसएसपी शलभ माथुर, एसपी (ग्रामीण) सुरेंद्रनाथ तिवारी तथा सीओ राजेश कुमार सिंह भी आ गए. पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया.

इस के बाद पार्क के गार्ड राजेश सिंह से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस की ड्यूटी पार्क के मुख्य गेट पर रहती है. पार्क के पीछे की बाउंड्री टूटी है, इसलिए अपराधी प्रवृत्ति के लोग उधर से आ जाते हैं. मृतक युवक और उस के साथी भी पार्क में पीछे से ही आए होंगे. उस ने गोली चलने की आवाज भी नहीं सुनी थी.

अब तक घटनास्थल पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी. लेकिन उन में से कोई लाश की शिनाख्त नहीं कर सका था. पहचान न होने से पुलिस ने फोटोग्राफर बुला कर लाश के विभिन्न कोणों से फोटो कराए. इस के बाद घटनास्थल की अन्य काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया.

मृतक की शिनाख्त के लिए संतोष कुमार सिंह ने लाश के फोटो अखबारों में छपवाए तो जब इसे छिबरामऊ निवासी अवनींद्रमोहन यादव ने देखा तो वह घबरा गए. क्योंकि उन का बेटा गौरव एक दिन पहले यह कह कर घर से निकला था कि वह कानपुर अपने दोस्त राहुल से मिलने जा रहा है.

लेकिन उस के बाद उन का उस से संपर्क नहीं हुआ था. क्योंकि उस का मोबाइल फोन स्विच औफ हो गया था. किसी अनहोनी की आशंका से घबराए अवनींद्रमोहन कुछ खास लोगों के साथ थाना कल्याणपुर पहुंच गए.

थानाप्रभारी संतोष कुमार सिंह को उन्होंने अपना परिचय दे कर थाने आने की वजह बताई तो वह उन्हें पोस्टमार्टम हाउस ले गए. अवनींद्रमोहन ने वहां रखी लाश देखी तो फफक पड़े. उन्होंने संतोष कुमार को बताया कि लाश उन के बेटे गौरव की है.

इस के बाद संतोष कुमार सिंह ने उन्हें धैर्य बंधा कर पूछा, आप बता सकते हैं कि गौरव की हत्या किस ने की होगी? सर, मुझे गौरव के दोस्त राहुल पर शक है. राहुल भी छिबरामऊ का ही रहने वाला है. इधर कुछ महीने से दोनों में किसी बात को ले कर अनबन चल रही थी. उसी से मिलने मेरा बेटा यहां आया था. मुझे लगता है कि राहुल ने ही दोस्तों के साथ मिल कर गौरव की हत्या की है. उसी ने गौरव का महंगा मोबाइल भी गायब किया है.

शक के आधार पर संतोष कुमार सिंह ने अवनींद्रमोहन की ओर से अपराध संख्या 110/2016 पर गौरव की हत्या का मुकदमा राहुल एवं उस के अज्ञात दोस्तों के खिलाफ दर्ज कर जांच शुरू कर दी. उन्होंने राहुल की गिरफ्तारी के लिए छिबरामऊ के मोहल्ला गोपालनगर स्थित उस के घर छापा मारा तो वह घर पर नहीं मिला.

उस के पिता रमेशचंद्र कमल ने बताया कि राहुल पनकी रोड, कल्याणपुर स्थित सेंगर हौस्टल में रह कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के साथ बीएससी की पढ़ाई कर रहा है. इस के बाद संतोष कुमार सिंह ने सेंगर हौस्टल पर छापा मारा, लेकिन वह वहां भी नहीं मिला. वह अपने रूमपार्टनर अजय के साथ गायब था. उस के कमरे पर ताला लगा था.

संतोष कुमार सिंह ने सर्विलांस की मदद लेने के साथ उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि गौरव की आखिरी बार राहुल के रूमपार्टनर अजय से बात हुई थी. इस के बाद राहुल के साथ अजय भी शक के घेरे में आ गया. क्योंकि वह भी राहुल के साथ गायब था.

17 फरवरी, 2016 की सुबह 10 बजे संतोष कुमार सिंह ने सर्विलांस की मदद से राहुल और उस के दोस्त अजय को कल्याणपुर के बिठूर रोड से पकड़ लिया. थाने ला कर उन से हत्या के संबंध में पूछा गया तो दोनों साफ मुकर गए.

राहुल का कहना था कि गौरव उस का जिगरी दोस्त था, ऐसे में वह उस की हत्या क्यों करेगा. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो राहुल और अजय को टूटते देर नहीं लगी. राहुल ने गौरव की हत्या का अपराध स्वीकार कर के बताया कि गौरव ने उस की प्रेमिका छीन कर उस के साथ विश्वासघात किया, इसीलिए उस ने अपने दोस्त अजय के साथ मिल कर उसे मौत के घाट उतार दिया.

यही नहीं, इस के बाद उस ने बुद्धा पार्क की झाडि़यों में छिपा कर रखा वह तमंचा भी बरामद करा दिया, जिस से उस ने गौरव की हत्या की थी. अजय के पास से गौरव का मोबाइल भी बरामद कर लिया गया, जिस में से गौरव का सिम निकाल कर उस ने अपना सिम डाल लिया था. पूछताछ में प्रेमसंबंधों में हुई गौरव की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.

कन्नौज जनपद का एक औद्योगिक कस्बा है छिबरामऊ. यहां अनाज और खोया की बड़ी मंडी है. इसी कस्बे के गोपालनगर में जगदीप कमल अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी माला के अलावा 2 बेटियां सपना, पूनम तथा एक बेटा राजू था. जगदीप का खोया का कारोबार था. उसी से उन के परिवार का भरणपोषण होता था.

जगदीप कमल की बेटी सपना भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह पढ़ने में तेज थी, इसलिए जगदीप चाहते थे कि वह पढ़लिख कर कुछ बन जाए.

राहुल गोपालनगर में ही सपना के घर के पास रहता था. उस के पिता रमेशचंद्र कमल व्यापारी थे. परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे अशोक और राहुल थे. अशोक पिता के कारोबार में हाथ बंटाता था, जबकि राहुल पढ़ने में ठीकठाक था, इसलिए रमेशचंद्र उसे पढ़ालिखा कर अफसर बनाना चाहते थे. वह उस की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दे रहे थे.

एक ही जाति का होने की वजह से राहुल का सपना के घर आनाजाना था. इसी आनेजाने में सपना और राहुल का एकदूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ा तो धीरेधीरे यह आकर्षण प्रेमसंबंध में बदल गया. दोनों एकदूसरे को प्यार ही नहीं करने लगे थे, बल्कि समय के साथ उन का यह प्यार शारीरिक मिलन में बदल गया.

राहुल का जिगरी दोस्त था गौरव यादव. दोनों ही हमउम्र थे, इसलिए उन में गहरी दोस्ती थी. गौरव के पिता अवनींद्रमोहन यादव भी गोपालनगर में ही रहते थे. गौरव उन का एकलौता बेटा था. अवनींद्रमोहन प्रतिष्ठित और पढ़ेलिखे थे, इसलिए बेटे की पढ़ाई में विशेष रुचि लेते थे और उस का मार्गदर्शन भी करते रहते थे.

राहुल के तीन दोस्त थे, गौरव, अभिषेक और रोहित. इन में गौरव उस का सब से घनिष्ठ दोस्त था. उस से वह कभी कोई बात नहीं छिपाता था. उस ने गौरव से अपने और सपना के प्रेमसंबंधों के बारे में भी बता दिया था. एक दिन उस ने सपना से उसे मिला भी दिया था.

एक बार राहुल का किसी से झगड़ा हो गया तो राहुल ने गौरव से तमंचा दिलवाने को कहा. गौरव राहुल का जिगरी दोस्त था, इसलिए उस ने राहुल को एक अपराधी से 27 सौ रुपए में तमंचा दिलवा दिया. इस के बाद राहुल उस तमंचे को अपने साथ रखने लगा.

सपना और राहुल के प्रेमसंबंधों की जानकारी राहुल के घर वालों को हुई तो उस के बड़े भाई अशोक ने उसे डांटाफटकारा और पढ़ाई में मन लगाने को कहा. यही नहीं, उस ने पिता से कह कर जुलाई, 2015 में उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और बीएससी करने के लिए कानपुर भेज दिया.

सपना के प्रेम में पड़े राहुल का मन घर छोड़ने का नहीं हो रहा था, लेकिन पिता और भाई के दबाव में उसे कानपुर  जाना पड़ा. कानपुर में उस ने पनकी रोड स्थित सेंगर हौस्टल में एक कमरा किराए पर लिया और अजय को रूमपार्टनर के रूप में रख कर पढ़ाई करने लगा.

अजय झारखंड के सौदाडी रामगढ़ पतरात का रहने वाला था. वह भी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग करने कानपुर आया था. दोनों काकादेव कोचिंग में एडमीशन ले कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे. राहुल के कानपुर आने के बाद से सपना से उस की मुलाकातें बंद हो गई थीं. अब रात में ही दोनों की मोबाइल फोन पर बातें हो जाती थीं. प्रेमी के जाने से सपना उदास और खोईखोई सी रहने लगी थी.

राहुल के जाने के बाद गौरव का ध्यान सपना पर केंद्रित हुआ. वह उसे मन ही मन चाहता था, लेकिन दोस्त की वजह से अपने दिल की बात जुबान पर नहीं ला सका था. उस का सोचना था कि दोस्त की अनुपस्थिति में सपना उस के प्यार को आसानी से स्वीकार कर सकती है.

गौरव सपना से मिलने की जुगत सोचने लगा. इसी जुगत में उस ने सपना के भाई राजू से दोस्ती कर ली. राजू को मालूम नहीं था कि गौरव के मन में क्या है? वह तो यों ही एक दिन दोस्त के नाते गौरव को अपने घर ले आया और उस का परिचय अपने मातापिता तथा बड़ी बहन सपना से कराया.

सपना चाय ले कर आई तो गौरव उसे एकटक ताकता रहा. उस की चितवन में चाहत साफ झलक रही थी, जिसे सपना ने भांप भी लिया था. गौरव दिखने में स्मार्ट था, जिसे कोई भी लड़की पसंद कर सकती थी. इसलिए गौरव के मन में पैदा हुई चाहत सपना को अच्छी लगी.

इस के बाद गौरव सपना के दीदार के लिए बेचैन रहने लगा. यह बेचैनी जब दिल में दर्द बन जाती तो वह किसी न किसी बहाने राजू के घर पहुंच जाता. एक नजर सपना को देख लेता तो उस के कलेजे को ठंडक मिल जाती. धीरेधीरे गौरव के मन में सपना के प्रति चाहत बढ़ती गई. अपने प्रति गौरव को बेचैन देख कर सपना के मन में भी गौरव के लिए बेचैनी होने लगी, जिसे गौरव ने सपना की आंखों में पढ़ लिया.

इस के बाद जल्दी ही दोनों ने प्रेम पथ पर अपने कदम बढ़ा दिए. दोनों घर के बाहर मिलने लगे. कहते हैं, खुशबू को जितना ही दबा कर रखा जाता है, वह उतना फैलती है.   सपना ने गौरव को दिल में बसाया तो राहुल को निकाल फेंका. उस ने राहुल से मोबाइल पर बात करना भी बंद कर दिया. राहुल जब भी उस से बातें करने की कोशिश करता, कभी नेटवर्क की प्रौब्लम बता कर फोन काट देती तो कभी कहती घर वाले हैं.

सपना की हरकतों से राहुल को शक हुआ तो उस ने सपना की निगरानी के लिए अपने दोस्त रोहित को लगा दिया. रोहित ने सपना पर निगरानी रखनी शुरू की तो सारी सच्चाई सामने आ गई. रोहित ने यह सच्चाई राहुल को बताई तो उसे बड़ा दुख हुआ. इस के बाद राहुल का गौरव से आमनासामना हुआ तो सपना को ले कर दोनों में झगड़ा और गालीगलौच हुई.

इस की शिकायत गौरव ने राहुल के बड़े भाई अशोक से की तो उस ने राहुल को खूब डांटाफटकारा और जलील किया. अशोक ने सपना के घर वालों से भी कहा कि वे उस पर नजर रखें, क्योंकि सपना के कारण 2 लड़कों का भविष्य चौपट हो रहा है. इस के बाद सपना के घर वालों ने उस पर पाबंदी लगा दी.

राहुल कानपुर लौट आया. लेकिन उस की अकसर मोबाइल पर गौरव से तूतू मैंमैं होती रहती थी. दोनों एकदूसरे को देख लेने की धमकी भी देते रहते थे. राहुल को पूरा विश्वास था कि गौरव और सपना के बीच प्रेमसंबंध ही नहीं, अनैतिक संबंध भी हैं. यह सोच कर उस का खून खौल उठता था. राहुल को गौरव से नफरत हो गई थी. उस ने दोस्ती में दगा किया था, इसलिए वह उसे माफ नहीं करना चाहता था. वह बदले की आग में जलने लगा. आखिर प्रेमिका छीनने वाले दोस्त गौरव को राहुल ने ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.

अपनी इस योजना में राहुल ने अपने रूमपार्टनर अजय को भी शामिल कर लिया. राहुल अब अजय के मोबाइल से गौरव से बातें करने लगा. इस बातचीत में वह यह दिखाता था कि अब उसे उस से कोई शिकायत नहीं है. कभीकभी वह गालीगलौच के लिए माफी भी मांग लेता. ऐसा वह इसलिए कर रहा था, ताकि गौरव को उस पर किसी तरह का शक न हो.

13 फरवरी, 2016 की सुबह राहुल ने अजय के मोबाइल से गौरव से बात की और सपना को ले कर पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने के लिए कल्याणपुर (कानपुर) आने को कहा. गौरव से बात करने के बाद राहुल ने उसी का दिया हुआ तमंचा लोड किया और कमर में खोंस कर अजय के साथ कल्याणपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया.

दूसरी ओर गौरव घर वालों से राहुल से मिलने की बात कह कर घर से निकला और छिबरामऊ से गुरसहायगंज तक बस से आया और वहां से ट्रेन पकड़ कर कल्याणपुर आ पहुंचा.

कल्याणपुर स्टेशन पर राहुल और अजय गौरव को मिले. वहां से वे पैदल ही बुद्धा पार्क की ओर चल पड़े. पार्क के पिछले गेट से अंदर आते समय गौरव आगे चल रहा था, बीच में राहुल और सब से पीछे अजय. तभी राहुल ने तमंचा निकाल कर गौरव के सिर में सटा कर पीछे से गोली मार दी.

गौरव जमीन पर गिर कर तड़पने लगा और कुछ ही पलों में दम तोड़ दिया. दोनों ने लाश और तमंचा झाडि़यों में छिपाया और गौरव का फोन ले कर फरार हो गए.

18 फरवरी, 2016 को थाना कल्याणपुर पुलिस ने अभियुक्त राहुल और अजय को कानपुर की अदालत में रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उन की जमानतें नहीं हुई थीं.

आखिर राहुल को दोस्त को मार कर क्या मिला? दोस्त तो गया ही, उस की अपनी खुद की भी जिंदगी बरबाद हुई. अपने साथ उस ने अजय की भी जिंदगी बरबाद की. घर वाले उसे पढ़ालिखा कर अफसर बनाना चाहते थे, जबकि झूठे प्यार में वह अपराधी बन गया.Friendship Betrayal

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