Fake Rape Case. रेप की रिपोर्ट दर्ज करा कर काजोल ने अपने पिता के अलावा कई लोगों से लाखों रुपए ऐंठे थे. अगर उस की हकीकत उजागर न होती तो पता नहीं और कितने लोग उस का शिकार बनते.
21 वर्षीया काजोल बेहद खूबसूरत नवयौवना थी. वह आधुनिकता के रंग में सराबोर खुले विचारों वाली थी. बचपन से ही उस की महत्त्वाकांक्षाएं आसमान की बुलंदियों को छूने के लिए कुलांचे मारने लगी थीं. सतरंगी सपने रहरह कर उस के दिलोदिमाग में हिलोरें भर रहे थे. ऐश भरा जीवन जीने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार थी. वहीं दूसरी ओर उस के घर वाले संस्कारवान थे. उन्हें काजोल का इस तरह बनठन कर रहना एकदम पसंद नहीं था.
काजोल के पिता राजकिशोर पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर में किराए के मकान में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और 3 बेटियां थीं. बेटियों में काजोल सब से छोटी थी. राजकिशोर गांधीनगर की एक गारमेंट्स फैक्टरी में कपड़े सिलते थे. उन के दोनों बेटे भी उसी फैक्टरी में नौकरी करते थे. पत्नी और 2 बेटियां भी गांधीनगर में नौकरी करती थीं. कुल मिला कर परिवार ठीक तरह से चल रहा था.
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10वीं पास करने के बाद काजोल का पढ़ाई में मन नहीं लगा तो मां ने उसे भी किसी गारमेंट्स फैक्टरी में नौकरी करने की सलाह दी तो काजोल मां का मखौल उड़ाते हुए बोली, ‘‘मम्मी, नौकरी करने से कितना मिलेगा. यही कोई 8-10 हजार रुपल्ली. मेरे ख्वाब इतने छोटे नहीं हैं. देखना, एक दिन मैं कुछ ऐसा काम करूंगी कि 8-10 हजार तो मेरा रोज का खर्चा होगा.’’
‘‘ना नौ मन तेल होगा और ना राधा नाचेगी. बेटा जितनी चादर हो, उसी हिसाब से पैर फैलाने चाहिए. तू न तो इतनी पढ़ीलिखी है और न ही तेरे अंदर कोई ऐसा हुनर है, जिस से तू इतना कमा सके. इसलिए मैं यही कहूंगी कि यह खयाली पुलाव पकाना छोड़ और जैसा मैं कह रही हूं, वैसा कर ले, यही ठीक रहेगा.’’ मां ने समझाया. ‘‘नहीं मम्मी, मैं नौकरी के खूंटे से बंध कर नहीं रह सकती.’’ काजोल ने मन की बात कह दी.
मां ने उसे बहुत समझाया, लेकिन काजोल पर कुछ भी असर नहीं पड़ा. वह तो आसमान में उड़ना चाहती थी, मस्ती के समंदर में डुबकियां लगाना चाहती थी. खूब ढेर सा पैसा कमा कर ऐश्वर्य भरा जीवन जीने की उस की इच्छा थी. लेकिन यह सब कैसे हो, इसी बारे में काजोल सोचती रहती. उसी दौरान एक परिचित महिला के सहयोग से वह देहव्यापार के दलदल में कूद पड़ी.
मात्र 4 घंटे तक ग्राहक के बिस्तर पर रहने की एवज में उसे 5 हजार रुपए मिले तो उसे लगा कि इस बिजनैस से उस के सभी अरमान पूरे हो जाएंगे. इस के बाद न तो उस ने अपने घरपरिवार की इज्जत देखी और न ही समाज के बारे में सोचा कि वह क्या कहेगा. पैसों की खातिर वह रातरात भर घर से गायब रहने लगी.
घर वालों ने इस तरह उस के गायब रहने की वजह पूछी तो उस ने बता दिया कि उस ने एक गारमेंट फर्म में नौकरी कर ली है, जहां उस की ड्यूटी बदलती रहती है. पर काजोल के हावभाव से घर वाले जान गए थे कि वह कोई नौकरी वगैरह नहीं करती, बल्कि दूसरा ही काम कर रही है. पहले तो मांबाप ने उसे प्यार से समझा कर सही रास्ते पर लाने की कोशिश की, पर वह नहीं मानी तो वे समझ गए कि अब यह सुधरने वाली नहीं है. रातरात भर जवान बेटी के घर से गायब रहने पर समाज में उन की भी बदनामी हो रही थी. इसलिए उन्होंने एक दिन कजोल को घर से निकाल दिया.
इस से काजोल पर कुछ भी फर्क नहीं पड़ा. उसे तो इस बात पर खुशी हुई कि अब उसे कोई भी रोकनेटोकने वाला नहीं होगा.
एक दिन काजोल की एक दोस्त के यहां कोई कार्यक्रम था. उसी कार्यक्रम में उस की मुलाकात किशन से हुई. किशन बिहार के जिला धनबाद का रहने वाला था और किसी कालसेंटर में नौकरी करता था. पिछले 7 सालों से वह दिल्ली में रह रहा था. फिलहाल वह जगतपुरी में रघुनाथ मंदिर के पास किराए के कमरे में रह रहा था. उस दौरान उन्होंने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए थे.
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काजोल तो वैसे भी लड़कों को पटाने में माहिर थी. उस ने किशन पर अपनी बातों का ऐसा जादू चलाया कि वह उस का दीवाना हो गया. उस के साथ वह घूमनेफिरने लगी. उसी दौरान उन के जिस्मानी संबंध बन गए. किशन को इस बात की जानकारी नहीं थी कि काजोल जिस्मफरोशी का धंधा भी करती है. बाद में काजोल उसी के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी. किशन उसे बेपनाह मोहब्बत करता था, उस की हर फरमाइश पूरी करता था. किशन की चाहत ने काजोल का मन ऐसा बदला कि वह अपना धंधा बंद कर पूरी तरह से किशन के लिए समर्पित हो गई.
11 जून, 2016 की सुबह दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना सनलाइट कालोनी पुलिस को पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि चलती कार में एक लड़की के साथ रेप करने के बाद लड़के उस लड़की को आईटीओ पुल के पास धकेल कर चले गए हैं. मामला बेहद संगीन था, इसलिए यह खबर मिलते ही थानाप्रभारी अनिल कुमार आईटीओ पुल पर पहुंच गए. वहां उन्हें एक युवती मिली, जिस ने अपना नाम काजोल बताया.
काजोल ने उन्हें बताया कि रात 9 बजे के करीब वह निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर स्थित कौमसम रेस्टोरेंट आई थी. वहां खापी कर वह वापसी के लिए रिंग रोड फ्लाई ओवर के पास पहुंची, तभी एक मारुति स्विफ्ट कार उस के नजदीक आ कर रुकी.
कार में 3 युवक थे. पिछली सीट पर बैठा युवक उस से सनलाइट कालोनी का पता पूछने लगा. उसी दौरान उन युवकों ने मुंह बंद कर के उसे कार की पिछली सीट पर खींच लिया. फिर उन्होंने कोई नशीली चीज मिली कोल्डड्रिंक जबरदस्ती उसे पिला दी, जिस से उसे नशा हो गया. इस के बाद उन युवकों ने बारीबारी से उस के साथ चलती कार में बलात्कार किया और सुबह उसे यहां पुल के पास डाल गए. चलती कार से धकेलने पर युवती को कुछ न कुछ चोट आनी चाहिए थी, जबकि वह मना कर रही थी कि उसे कोई चोट नहीं आई है.
बहरहाल, काजोल के बयान के आधार पर पुलिस ने भादंवि की धारा 365, 328, 376डी, 34 के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. इस केस की जांच साइबर सेल के प्रभारी इंसपेक्टर राजीव मलिक के हवाले कर दी गई. इंसपेक्टर मलिक एसआई मनीष कुमार व 2 हैडकांस्टेबलों के साथ इस केस की छानबीन में लग गए.
राजीव मलिक ने भी काजोल से पूछताछ की तो उन्हें मामला कुछ संदिग्ध लगा. इस की एक वजह तो उस की बौडी लैंग्वेज थी और दूसरी वजह उस के शरीर पर एक भी चोट का निशान नहीं पाया जाना था, जबकि वह खुद को चलती कार से धक्का दिए जाने की बात कह रही थी.
काजोल ने उन्हें यह भी बताया कि जब उन युवकों ने उसे आईटीओ पुल पर चलती कार से धक्का दिया था. उस ने उसी समय उस कार का नंबर पढ़ लिया था. जबकि हकीकत यह थी कि फ्लाईओवर पर इतनी रौशनी नहीं होती, जिस से गाड़ी का नंबर पढ़ा जा सके. और चलती कार से फेंके गए व्यक्ति की हालत एकदम ऐसी नहीं हो सकती कि वह तुरंत उस गाड़ी का नंबर पढ़ सके.
काजोल ने इंसपेक्टर को उस स्विफ्ट कार का नंबर भी बता दिया. पुलिस को तो अपनी काररवाई करनी थी. इसलिए जांच की तो वह कार हरियाणा के मुरथल में रहने वाले एक व्यक्ति की निकली. दिल्ली पुलिस की टीम मुरथल पहुंची और वहां से एमबीए छात्र आशीष, तपन व पवन को हिरासत में ले कर दिल्ली लौट आई. तीनों से पूछताछ की तो वे पुलिस को बेकसूर लगे. उन्होंने बताया कि वे तीनों उस रात दिल्ली गए जरूर थे, लेकिन उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया था.
काजोल ने बताया था कि तीनों युवकों ने उसे रात 12 बजे से पहले अपनी कार में खींचा था. पुलिस ने उन तीनों के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस रात 2 बजे तक उन के फोन की लोकेशन दिल्ली के हौजाखास इलाके की थी. उन्होंने बताया कि उस रात वह हौजखास के एक पब में थे.
आशीष ने थानाप्रभारी अनिल कुमार को एक नई जानकारी दी कि 11 जून की सुबह 10 बजे के करीब उस के मोबाइल पर किसी ने फोन किया था. उस ने भी उस के ऊपर दिल्ली की किसी लड़की से चलती कार में रेप करने का आरोप लगाया था. उस ने इस मामले को रफादफा कराने के लिए उस से 10 लाख रुपए मांगे थे.
पुलिस को यह एक नई बात सुनने को मिली थी. पुलिस को मामला दूसरा ही नजर आने लगा. आशीष के पास जिस फोन नंबर से फोन आया था, पुलिस ने उस की काल डिटेल्स निकलवाई. वह फोन नंबर जगतपुरी के रहने वाले किशन का निकला.
पुलिस टीम जगतपुरी से किशन को पूछताछ के लिए ले आई. वह किशन और कोई नहीं, काजोल का प्रेमी था. पूछताछ के दौरान वह पुलिस को काफी देर तक घुमाता रहा. जब उस के साथ थोड़ी सख्ती की गई तो उस ने एक चौंकाने वाला रहस्य उजागर किया.
पिता राजकिशोर ने जब काजोल को घर से निकाल दिया था तो वह किशन के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी थी. कुछ महीने बाद जब प्यार और मस्ती की खुमारी उन के ऊपर से उतरी तो उन के पैर वास्तविकता की धरातल पर आ पड़े. तब उन्हें महसूस हुआ कि सुखसुविधाओं से भरा जीवन जीने के लिए बेशुमार दौलत होनी जरूरी है.
एक दिन किशन ने काजोल से बात कर उस के पिता से ही मोटी रकम ऐंठने की योजना बनाई. योजना के तहत काजोल ने अपने पिता के खिलाफ मारपीट एवं छेड़छाड़ का आरोप लगा कर थाना जगतपुरी में रिपोर्ट लिखा दी. रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस ने उस के पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. बेटी के साथ रेप का आरोप लगने से राजकिशोर की पूरे मोहल्ले में बदनामी हुई.
उन के जेल जाने पर किशन को अगली चाल चलनी थी. वह राजकिशोर से जेल में मुलाकात करने गया. उस ने उन से कहा, ‘‘तुम्हारी इतनी हैसियत तो जरूर होगी कि अपनी इज्जत पर लगे दाग को धोने के लिए डेढ़ लाख रुपए खर्च कर सको. यदि तुम डेढ़ लाख रुपए दे दोगे तो काजोल कोर्ट में अपने बयान बदल देगी. इस के बाद तुम जेल से बाहर आ सकते हो. सौदा मंजूर हो तो हां करो.’’
राजकिशोर ने हां कर दी और अपनी पत्नी को जेल में बुला कर किशन को डेढ़ लाख रुपए देने को कह दिया. किशन को रुपए मिल गए तो काजोल ने कोर्ट में अपना बयान बदल दिया. इस के बाद राजकिशोर जेल से बाहर आ गया. पिता से बड़ी आसानी के साथ डेढ़ लाख रुपए ठगने पर काजोल बहुत उत्साहित हुई. इस के बाद किशन और काजोल ने लोगों को गैंगरेप में फंसा कर उन्हें ठगना शुरू कर दिया.
दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद रेप के मामलों में इतने सख्त कानून बना दिए गए हैं कि रेपिस्ट को उम्रकैद या फांसी की सजा निर्धारित कर दी गई है. कुछ लोग इस का दुरुपयोग भी कर रहे हैं.
किशन और काजोल ने आनंद विहार के रहने वाले एक फल व्यापारी को इसी तरह ब्लैकमेल करने की योजना बनाई. योजनानुसार काजोल नौकरी मांगने के बहाने उस फल व्यापारी के पास गई. पहली मुलाकात में ही उस ने अपनी अदाओं से उसे दीवाना बना लिया. अगले ही दिन उस ने उस व्यापारी से शारीरिक संबंध भी बना लिए. यह सब काजोल ने रजामंदी से किया.
इस के बाद उस ने आनंद विहार थाने में उस फल व्यापारी के खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने काजोल का डाक्टरी परीक्षण कराया तो उस में उस के बयान की पुष्टि हो गई, जिस से फल व्यापारी को जेल जाना पड़ा.
किशन ने फल व्यापारी से जेल में मुलाकात की और उसे रेप केस से छुड़ाने के एवज में 5 लाख रुपए मांगे. व्यापारी ने किसी तरह बंदोबस्त कर के 5 लाख रुपए किशन को दिला दिए. फिर कोर्ट में धारा 164 के बयान में काजोल ने व्यापारी को पहचानने से इनकार कर दिया. इस तरह फल व्यापारी को इस झूठे केस से मुक्ति मिली. किशन ने जो 5 लाख रुपए लिए थे, उन से उस ने आइटेन कार खरीदी. कार होने से दोनों को शिकार फंसाने में आसानी होने लगी.
इसी तरह दोनों सम्मानित व रईस लोगों को रेप के झूठे मामले में फंसा कर लाखों रुपए ऐंठने लगे. दोनों अधिकतर पब व बारों में अपने शिकार की रैकी करते थे. जब उन्हें शिकार की हैसियत पता चल जाती थी तो उसे रेप के झूठे केस में फंसा कर 5-10 लाख रुपए ऐंठ लेते थे.
किशन व काजोल ने आशीष व उस के दोनों दोस्तों को फंसाने के लिए 8 व 9 जून, 2016 की रात में उन की भी रैकी हौजखास स्थित एक पब में की थी. उन्होंने यह भी पता लगा लिया था कि तीनों यहां मुरथल से आते हैं. उन्हें फंसाने के लिए 10 जून की रात पक्की कर ली. आशीष व उस के दोनों दोस्त 10 जून की रात भी दिल्ली के हौजखास इलाके में स्थित उस पब में गए. रात को लगभग डेढ़ बजे पब से निकल कर वे घर की तरफ चल पड़े. किशन अपनी कार से आशीष की कार का पीछा करते हुए तेजी से आगे निकल गया. उस ने काजोल को रिंग रोड पर उतारा और जगतपुरी चला गया.
जब काजोल को आशीष की कार दिखी तो वह बीच सड़क पर खड़ी हो कर लिफ्ट मांगने लगी. रात में अकेली लड़की देख कर आशीष ने कार रोकी तो वह बोली, ‘‘मुझे बस नहीं मिल रही, क्या आप मुझे मुरथल चौराहे के पास छोड़ सकते हैं? आप की बहुत मेहरबानी होगी.’’
‘‘हां, क्यों नहीं. हम भी वहीं जा रहे हैं, आइए बैठ जाइए.’’ आशीष ने कहा तो काजोल कार में बैठ गई. वह मुरथल चौराहे के पास कार से उतरी और वहां से औटो में बैठ कर आईटीओ फ्लाईओवर पर आ गई. फिर उस ने 100 नंबर पर फोन कर दिया. पुलिस की जिप्सी वहां आई. ड्यूटी अफसर ने उस की व्यथा सुनी. वहीं से उस ने सूचना सनलाइट थाने में दे दी तो सनलाइट के थानाप्रभारी भी वहां पहुंच गए. तब काजोल ने पुलिस को मनगढ़ंत कहानी बता दी.
मुरथल में कार से उतरते समय काजोल ने आशीष का फोन नंबर ले लिया था. आशीष से पैसे ऐंठने के लिए किशन ने 11 जून को आशीष को फोन किया. उस ने धमकी दी कि उस के व उस के दोस्तों के खिलाफ दिल्ली में रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है. यदि वे 10 लाख रुपए दे देंगे तो रेप के मुकदमे से बच सकते हैं. इस बात पर आशीष परेशान हो गया. इसी बीच दिल्ली पुलिस उसे व उस के दोस्तों को पूछताछ के लिए उठा लाई. तब आशीष ने सारी बात दिल्ली पुलिस को बता दी.
किशन से पूछताछ के बाद पुलिस ने काजोल को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उन के खिलाफ भादंवि की धारा 584/389/120बी/34 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 13 जून, 2016 को जेल भेज दिया गया. Fake Rape Case






