Meerut Crime. शादीशुदा अनुज को एक लड़की से प्यार हो गया था. उस के साथ शादी कर के लिए पत्नी रजनी को रास्ते से हटाना जरूरी था. इस के लिए उस ने योजना तो बड़ी सटीक बनाई जो कामयाब भी रही, पर…

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के गढ़ रोड स्थित आनंद हास्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में भरती उस युवक के इर्दगिर्द काफी लोगों का जमावड़ा था. पुलिस अधिकारी भी वहां मौजूद थे. गोली लगने से युवक के दोनों पैर जरूर जख्मी हो गए थे, लेकिन उस की जान को कोई खतरा नहीं था. उस के चेहरे पर दहशत और बेचैनी के साथसाथ चिंता की लकीरें भी साफ नजर आ रही थीं. ऐसा स्वाभाविक भी था, क्योंकि वह जिस भयानक घटना से रूबरू हुआ था, वह वाकई दहशत पैदा करने वाली थी. रहरह कर उस की आंखों में आंसू आ रहे थे. उस के घर वाले उसे धीरज बंधा रहे थे.

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‘‘मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगा, सबकुछ मेरी आंखों के समाने हुआ और मैं रजनी को बचा नहीं सका. इस से अच्छा तो यह होता कि वे लोग मेरी जान ले लेते, मेरी बेटी के लिए रजनी तो जिंदा रहती. उस मासूम का अब क्या होगा..?’’ कहतेकहते एक बार फिर उस का गला रुंध गया. एक पुलिस अधिकारी ने उस के कंधे पर हाथ रख कर सांत्वना दी, ‘‘जो हुआ बहुत बुरा था, लेकिन भरोसा रखो. यह सब करने वालों को हम सलाखों के पीछे पहुंचा कर रहेंगे. हम ने बदमाशों की तलाश में सर्च औपरेशन भी चलाया, पर अभी तक उन कोई पता नहीं चल सका है. कुछ भी हो, हम उन्हें जल्द ही पकड़ लेंगे. तुम हमें घटना के बारे में विस्तार से बताओ, ताकि बदमाश जल्द पकड़े जा सकें.’’

पल भर के लिए वह इस तरह खामोश हो गया, जैसे घटना की कडि़यां जोड़ रहा हो. फिर उस ने जो कुछ बताया, वह वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाला था.

दरअसल, अस्पताल में भर्ती युवक का नाम था अनुज उर्फ बिजेंद्र. 23 वर्षीय अनुज मेरठ के ही कस्बा परीक्षितगढ़ के गांव सोना के प्रधान सत्यवीर का बेटा था. 19 मई, 2016 को अनुज और उस की पत्नी रजनी बदमाशों के चंगुल में फंस गए थे. वारदात उस वक्त हुई, जब वह रजनी को नजदीकी कस्बे मवाना स्थित उस के मायके हंसापुर छोड़ने जा रहा था.

उस वक्त दोपहर के करीब ढाई बज रहे थे. गर्मी की वजह से परीक्षितगढ़-मवाना मार्ग पर इक्कादुक्का वाहन ही आजा रहे थे. अनुज की सैंट्रो कार सड़क पर दौड़ी जा रही थी. ड्राइविंग सीट पर अनुज बैठा था, जबकि उस के बराबर वाली सीट पर पीले रंग की खूबसूरत साड़ी पहने उस की पत्नी रजनी बैठी थी.

रजनी की 14 महीने की बेटी प्रिंसी उस की गोद में थी. कार जब गांव बहादरपुर के समीप पहुंची तो अनुज ने ट्यूबवैल से पानी लाने के लिए कार रोक दी. वह कार से उतर कर बोतल में पानी लाया और अपनी सीट पर बैठ गया. वह कार आगे बढ़ाता, इस से पहले ही एक सैंट्रो कार वहां आ कर रुकी.

जब तक अनुज और रजनी कुछ समझ पाते, उस कार से तेजी से 4 युवक उतर कर उन के पास पहुंच गए. उन्हें देख कर अनुज चौंका, क्योंकि उन के हाथों में हथियार थे. अनुज और रजनी समझ गए कि ये बदमाश हैं, जो उन्हें लूटना चाहते हैं. दोनों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं. आगे वाली दोनों खिड़कियों के शीशे खुले हुए थे.

एक बदमाश तमंचा तान कर गुर्राया, ‘‘खबरदार, अगर अपनी जगह से हिले तो गोली भेजे के पार कर दूंगा.’’

डरेसहमे अनुज और रजनी खामोश बैठे रहे. वे बदमाशों से घिरे हुए थे, ऐसे में उन की बात मान लेने में ही भलाई थी. उन बदमाशों ने तमंचों के बल पर उन दोनों को कवर कर लिया था.

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‘‘क…क्या चाहते हो तुम?’’ अनुज ने लड़खड़ाती आवाज में पूछा. ‘‘तुम लोगों के पास जो कुछ भी है, हमें चुपचाप दे दो.’’ एक बदमाश ने गुर्राते हुए कहा. ‘‘तुम ऐसा नहीं कर सकते,’’ अनुज ने विरोध किया. ‘‘लगता है, तुझे अपनी जिंदगी से प्यार नहीं है. हम कुछ भी कर सकते हैं, कुछ भी. बोल, गोली चला कर दिखाऊं.’’

अनुज अंदर तक कांप गया. दूसरे बदमाश ने रजनी की तरफ इशारा कर के कहा, ‘‘अपने जेवर उतार कर हमारे हवाले कर दे.’’ ‘‘ल… लेकिन…’’ डर से कांपती रजनी की बात पूरी होने से पहले ही उस बदमाश ने घुड़की दी, ‘‘खामोश… एक भी शब्द जुबान से निकाला तो मार डालूंगा. क्यों अपनी जान गवाना चाहती है.’’

बदमाशों की धमकी के बावजूद दोनों विरोध करने लगे. बदमाशों ने आंखों ही आंखों में कोई मूक इशारा किया. अनहोनी की आशंका से रजनी व अनुज के दिल की धड़कनें तेज हो गईं. बदमाशों को जब लगा कि दोनों विरोध कर रहे हैं तो एक ने दूसरे से कहा, ‘‘शूट कर दो इस को.’’

अनुज कुछ समझ पाता, इस से पहले ही एक बदमाश ने पलक झपकते रजनी के सीने को निशाना बना कर फायर झोंक दिया. दूसरे बदमाश ने उसे एक गोली और मारी. गोलियां रजनी के सीने और पेट में लगीं. लहूलुहान हो कर वह सीट पर लुढ़क गई और चंद पल तड़पने के बाद उस की सांसों की डोर टूट गई. उस की बेटी रोतेरोते नीचे गिर गई.

रजनी को गोली लगने से हक्काबक्का अनुज चीखने लगा. इस बीच बदमाशों ने अनुज की जेब से 25 हजार रुपए लूट लिए. अनुज कार से उतर कर बदमाशों से भिड़ गया तो उन्होंने उस के दोनों पैरों में गोली मार दी. वारदात को अंजाम दे कर बदमाश अपनी कार से भाग निकले.

बदमाशों ने अनुज की आंखों के सामने ही उस की पत्नी को मार दिया था और वह कुछ नहीं कर सका था. उस ने रजनी को काफी हिलायाडुलाया, लेकिन वह मर चुकी थी. पत्नी की लाश देख कर अनुज के होश उड़ गए. उस की जगह कोई और भी होता तो उस का भी यही हाल होता.

होश कायम हुए तो उस ने फोन कर के रोतेरोते अपने घर वालों को इस घटना की जानकारी दी. बेटेबहू को गोली लगने की खबर सुन कर सत्यवीर के परिवार में कोहराम मच गया. आननफानन में सत्यवीर अपने बेटों के साथ मौके पर पहुंच गए. इस बीच राहगीर भी वहां एकत्र हो गए थे. अनुज रो रहा था. उस की हालत पागलों जैसी हो गई थी. घटना से हर कोई अवाक था.

क्या पता रजनी में कुछ सांसें बची हों और उस की जिंदगी बच जाए, यह सोच कर वे लोग उसे परीक्षितगढ़ के एक निजी अस्पताल में ले गए. लेकिन डाक्टरों ने प्राथमिक परीक्षण कर के रजनी को मृत घोषित कर दिया. जबकि अनुज को आनंद हास्पिटल रैफर कर दिया गया.

घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई थी. इस सनसनीखेज घटना से पुलिस हरकत में आ गई. इलाके में इस तरह दिनदहाड़े दुस्साहसिक ढंग से रोड होल्ड अप और हत्या की वारदात हो जाना मामूली बात नहीं थी. बदमाशों ने वारदात को बेखौफ अंजाम दिया था. थाना परीक्षितगढ़ के प्रभारी श्यामवीर सिंह, सीओ ज्ञानवती तिवारी पुलिस टीम सहित मौका-ए-वारदात पर पहुंच गए. कुछ देर बाद पुलिस अधीक्षक (देहात) डा. प्रवीन रंजन सिंह भी वहां आ पहुंचे.

पुलिस ने बदमाशों की तलाश में चेकिंग अभियान चलाया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. अफसरों ने घटनास्थल का मुआयना किया तो वहां से 315 बोर के 2 खोखे बरामद हुए. पुलिस अनुज से मिलने अस्पताल गई.

वह काफी दुखी था. उस के दर्द को पुलिस भी समझ रही थी. दुख की इस घड़ी में ढांढस बंधा कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने बदमाशों के रोकने से ले कर गोली मारने तक की कहानी बयान कर दी. उधर उस की मासूम बेटी बुरी तरह सहमी हुई थी.

प्रिंसी की फ्रौक पर गोली की बारूद का निशान था. वह चूंकि रजनी की गोद में थी, इसलिए वह निशान फ्रौक पर आ गया था. इसी बीच पुलिस ने अनुज के भाई ब्रजवीर की तहरीर पर थाना परीक्षितगढ़ में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट व हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस ने पंचनामा भर कर रजनी की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने पुलिस अफसरों को वारदात का जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए. पुलिस जांचपड़ताल में जुट गई. उस ने अनुज के घर वालों से भी गहराई से पूछताछ की. आखिर वह इस नतीजे पर पहुंची कि लूट की इस वारदात को इलाके के बदमाशों ने ही अंजाम दिया होगा. क्योंकि किसी दूसरे इलाके के बदमाश चलते रास्ते पर इस तरह बेखौफ हो कर लूटपाट नहीं कर सकते. पुलिस ने इलाके के बदमाशों की सुरागसी शुरू कर दी. कार की भी ठीक से जांचपड़ताल की गई.

पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की कडि़यां जोड़नी शुरू कीं तो उलझ कर रह गई, क्योंकि कुछ तथ्य चौंकाने वाले थे. मसलन रजनी का पर्स बदमाशों ने नहीं लूटा था, उन्होंने केवल अनुज से ही 25 हजार रुपए लूटे थे. जबकि रजनी के पर्स में 15 हजार रुपए थे. उस के पहने हुए गहने भी सुरक्षित थे, साथ ही बदमाशों ने दोनों में से किसी का मोबाइल भी नहीं लूटा था.

ये बातें बड़ी अजीब लग रही थीं. अक्सर बदमाश मोबाइल लूट लेते हैं. तीसरे बदमाशों ने रजनी को दोनों गोलियां करीब से मारी थीं. बदमाशों का मकसद उसे डराना या घायल करना नहीं, बल्कि हत्या करना था. दूसरी तरफ अनुज के पैरों को निशाना बनाया गया था, जबकि विरोध की गुंजाइस उस की तरफ से अधिक थी. इन सब बातों के मद्देनजर पुलिस अनुज की कहानी को हजम नहीं कर पा रही थी.

पुलिस हमेशा शक की बिनाह पर काम करती है. पुलिस अधिकारी लूट और हत्या की इस वारदात को आसानी से पचा नहीं पा रहे थे. घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था. अनुज की कहानी में पुलिस को कई छेद नजर आने लगे थे.

अनुज शक के दायरे में था, इसलिए पुलिस ने उस से दोबारा पूछताछ करने का मन बनाया. पूछताछ हुई तो उस ने वारदात की कहानी को फिर से दोहरा दिया. उस ने यह भी बताया कि जो 25 हजार रुपए बदमाशों ने लूटे थे, वे रजनी का मंगलसूत्र खरीदने के लिए थे. इस के लिए वे दोनों परीक्षितगढ़ में एक ज्वैलर के यहां गए भी थे, लेकिन रजनी को वहां मंगलसूत्र पसंद नहीं आया था. इस बार उस ने बताया कि प्रिंसी पिछली सीट पर सो रही थी. यहां बड़ा सवाल यह था कि अगर वह पिछली सीट पर थी तो उस की फ्रौक कैसे झुलसी.

पुलिस ने अनुज के बताए ज्वैलर्स से जा कर पूछताछ की तो उस ने ऐसे किसी भी ग्राहक के अपने यहां आने से इंकार कर दिया, जो मंगलसूत्र खरीदने आया हो. अनुज की भूमिका संदिग्ध हो चली थी. 2 दिन बीत चुके थे. यह वारदात पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी. घटना के खुलासे के लिए एसपी डा. प्रवीन रंजन के निर्देशन में एक पुलिस टीम का गठन कर दिया गया था.

इस टीम में थानाप्रभारी श्यामवीर के अतिरिक्त एसआई विजय कुमार, कांस्टेबल जगपाल सिंह, जयवीर सिंह, प्रदीप भाटी, ज्ञानेंद्र सिंह, मुनेंद्र भाटी, रविंद्र सिंह और महिला कांस्टेबल प्रियंका शर्मा आदि को शामिल किया गया था. क्राइम ब्रांच प्रभारी संजीव कुमार और उन की टीम को भी इस में लगा दिया गया. इस के बाद पुलिस बदमाशों की तलाश में जुट गई. इस बीच पुलिस ने अनुज के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स भी हासिल कर ली.

अनुज की काल डिटेल्स में एक नंबर पुलिस को ऐसा मिला, जिस पर वह लंबीलंबी बातें करता था. पुलिस ने उस नंबर की पड़ताल की तो वह एक युवती का निकला. इस से यह मामला प्रेमप्रसंग का नजर आने लगा. इस के अलावा अनुज के मोबाइल में एक दूसरा सिमकार्ड इस्तेमाल किए जाने का ब्यौरा भी मिला.

खास बात यह थी कि उस नंबर से केवल एक नंबर पर ही बातें की गई थीं. यह नंबर कुछ दिनों पहले ही सक्रिय हुआ था और उस पर घटना वाले दिन भी बातें की गई थीं. दोनों नंबर एक ही पते पर लिए गए थे, लेकिन जांच में पता गलत पाया गया. अनुज के नंबरों में कुछ और नंबरों की तलाश हुई तो एक और संदिग्ध नंबर मिला. वह आशीष नामक युवक का था. उस के जिन नंबरों से संपर्क थे, उन की भी जांच की गई. इन सभी नंबरों की लोकेशन घटनास्थल पर पाई गई.

कडि़यां जुड़नी शुरू हुईं तो पुलिस ने 23 मई को पूठी नहर के पास से दोपहर करीब 2 बजे सैंट्रो कार में सवार 3 संदिग्धों को पकड़ लिया. इन में आशीष और अजय कुमार गांव लालपुर के रहने वाले थे, जबकि नितिन नाई गांव अमरसिंहपुर का निवासी था. इन तीनों के कब्जे से पुलिस को 315 बोर के 2 तमंचे भी मिले. पुलिस ने तीनों को थाने ला कर गहराई से पूछताछ की तो उन्होंने रजनी की हत्या के राज से ऐसा परदा उठाया कि पुलिस भी हैरान रह गई. रजनी की हत्या की साजिश किसी और ने नहीं, उस के पति अनुज ने ही रची थी. पुलिस ने अनुज को भी अस्पताल से हिरासत में ले कर उस से भी पूछताछ की.

दरअसल, रजनी से अनुज का विवाह 2 साल पहले हुआ था. रजनी उम्र में उस से 4 साल बड़ी थी. वह कम पढ़ीलिखी घरेलू व संस्कारी युवती थी. घर वालों की मर्जी से अनुज ने विवाह तो कर लिया था, लेकिन रजनी को पा कर वह कतई खुश नहीं था. जबकि रजनी पति के रूप में अनुज को पा कर पूरी तरह खुश थी.

एक साल बाद उस ने बेटी को जन्म दिया तो उस की खुशियां और भी बढ़ गईं. आदमी अगर किसी रिश्ते से खुश न हो तो उस की कमी वह बाहर पूरी करने की कोशिश करता है. अनुज ने भी ऐसा ही किया. वह एक इंस्टीट्यूट से एमबीए की पढ़ाई कर रहा था. इसी दौरान एक युवती रीता (परिवर्तित नाम) से उस की दोस्ती हो गई. बाद में यह दोस्ती प्रेम में बदल गई. कुछ ही महीनों में दोनों के रिश्ते गहरा गए. दोनों ने साथ जीनेमरने की कसमें भी खाईं.

इस तरह के रिश्ते छिपाए नहीं छिपते. अप्रैल, 2016 में एक दिन अनुज रीता के साथ मोबाइल पर बातों में डूबा हुआ था. वह जीनेमरने की कसमें खा कर अपने प्यार को दर्शा रहा था. तभी रजनी ने उस की बातें सुन लीं. इस से रजनी के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे अनुज से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. उस ने अनुज को खूब खरीखोटी सुनाई और उस की करतूत सभी को बताने की धमकी दी.

अनुज रंगेहाथों पकड़ा गया था. उस ने रजनी के सामने अपनी गलती मानने में ही अपनी भलाई समझी. उस दिन के बाद दोनों के बीच तकरार शुरू हो गई. अनुज पूरी तरह रीता को चाहता था और अब उसे ही अपनी जीवनसाथी बनाने का सपना देखता था. वह समझ गया कि रजनी को चूंकि शक हो गया है, इसलिए उस के रहते उस का सपना पूरा नहीं हो सकता.

अनुज रजनी से छुटकारा पाने की सोचने लगा. उस ने सोचा कि अगर रजनी ही न रहे, तो रीता से उस के विवाह का सपना साकार हो जाएगा. अनुज कई दिन इसी उधेड़बुन में लगा रहा. फिर एक दिन उस ने अपने बचपन के दोस्त आशीष और अजय से संपर्क किया. वे दोनों पौलीटैक्निक कर रहे थे. अनुज ने उन से कहा कि वह अपनी पत्नी से छुटकारा पाना चाहता है. अनुज ने इस के बदले 50 हजार रुपए खर्च करने की बात भी की.

आशीष और अजय ने उसे अपने 2 दोस्तों नितिन नाई व सालिम मलिक से मिलवाया. कुछ पैसे का लालच और कुछ दोस्ती का तकाजा, वे इस काम में साथ देने को तैयार हो गए. इस के बाद पांचों ने रजनी की हत्या की योजना बना डाली.

योजना को फूलपू्रफ बनाने के लिए अनुज ने कुछ दिन क्राइम सीरियल देखे और पूरी योजना तैयार कर ली. योजना के तहत उस ने फर्जी पते पर 2 सिमकार्ड खरीदे और उन में से एक सिम आशीष को दे दिया. उस ने आशीष को समझाया कि वे लोग केवल उसी नंबर पर बात किया करेंगे. इस के बाद एक दिन उस ने 2 तमंचे खरीद का आशीष और अजय को देने के साथ 5 हजार रुपए एडवांस भी दे दिए.

उस ने समझाने वाले अंदाज में कहा, ‘‘बाकी के रुपए मैं काम होने के बाद दूंगा. मैं 19 मई को रजनी को मायके ले कर जाऊंगा, तभी तुम लोग रास्ते में उस की हत्या कर देना. वह जो जेवर पहने होगी, उन्हें भी ले लेना. मैं लूट की कहानी बना दूंगा. इस से लूट भी असली लगेगी.’’

नितिन नाई के पास सैंट्रो कार थी. आशीष, अजय, नितिन व सालिम इस के लिए पूरी तरह तैयार हो गए. 19 मई की सुबह अजय ने आशीष को फोन कर के बता दिया कि वह दोपहर में रजनी को ले कर निकलेगा और रास्ते में पानी लेने के बहाने कार रोक देगा.

योजना के अनुसार, वह रजनी को ले कर चल दिया. उस के चारों सुपारी किलर दोस्त भी कार से पीछेपीछे चल दिए. ट्यूबवैल पर कार रुकने के बाद चारों नीचे उतरे और रजनी से जेवर उतारने को कहा.

उन के हाथों में हथियार देख कर रजनी को खुद से ज्यादा पति की फिक्र सताने लगी. वह उन के सामने गिड़गिड़ाई, ‘‘तुम सब कुछ ले लो, लेकिन मेरे पति को कुछ नहीं होना चाहिए.’’

रजनी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस पति की जान के लिए वह गिड़गिड़ा रही है, वही बेवफाई कर के उसे मरवाना चाहता है. अनुज ने भी घबराहट का नाटक करते हुए अपनी जेब से 25 हजार रुपए निकाल कर उन्हें दे दिए और इशारा कर दिया. रजनी के सामने उस ने रुपए इसलिए दिए, ताकि गलती से वह जिंदा बच भी जाए तो लूट की असली घटना सब को बताए. इसी बीच अनुज ने इशारा किया तो आशीष व उस के साथी ने रजनी को गोली मार दी.

अनुज के कहने पर उन्होेंने उस के पैरों में भी गोली मारी, ताकि लूट की घटना बिलकुल असली लगे. घटना के बाद चारों घबरा गए और रजनी के जेवर लूटे बिना ही भाग गए. जब अनुज को विश्वास हो गया कि रजनी मर चुकी है तो अपने दर्द को जब्त करते हुए उस ने घर वालों को घटना की जानकारी दी. रोतेबिलखते दुख जताते हुए उस ने बदमाशों द्वारा लूट व हत्या की बात बताई.

बाद में जब पुलिस अस्पताल में उस के बयान लेने आई तो उस ने सोचीसमझी योजना के तहत मनगढ़ंत कहानी सुना दी. आशीष अपनी साजिश में कामयाब तो हो गया था, लेकिन प्रेमिका से विवाह करने का उस का सपना साकार हो पाता, उस से पहले ही पुलिस के शिकंजे में आ गया.

गिरफ्त में आए तीनों हत्यारोपियों को पूछताछ के बाद पुलिस ने अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

अगले दिन अस्पताल से डिस्चार्ज करा कर अनुज को भी जेल भेज दिया गया. एक लड़की के प्रेम में पड़ कर अनुज ने अपना विवेक खो दिया.

इस से उस ने अपना घर तो बर्बाद किया ही, अपने साथ 4 साथियों का भविष्य भी खराब कर दिया. अनुज अपनी हरकत पर पछता रहा था. पत्नी को तो उस ने रास्ते से हटा दिया, अब प्रेमिका भी गई, साथ ही उस की करतूत से परिवार को भी शर्मसार होना पड़ा. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस आरोपी सालिम की तलाश कर रही थी. Meerut Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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