Mobile Tower Fraud. अखबारों या फोन पर मोबाइल टावर लगवाने के लिए ठग ऐसा औफर देते हैं कि अनजान लोग उन के जाल में फंस जाते हैं. इस के बाद वे सिक्योरिटी मनी के नाम पर मोटी रकम अपने बैंक खाते में जमा करा लेते हैं. जब तक उन्हें अपने ठगे जाने का आभास होता है तब तक ये ठग गायब हो चुके होते हैं.
सरकारी नौकरी करने वाले लोग रिटायर होने के करीब पहुंचने पर योजना बनाने लगते हैं कि उन्हें जो पैसे मिलेंगे, उसे वे कहां इनवैस्ट करेंगे, जिस से उन्हें घर बैठे मोटी कमाई होती रहे. राजस्थान के जिला जैसलमेर के गांव सोनू निवासी जेठू सिंह कुछ दिनों पहले ही सेना से रिटायर हुए थे. उन्होंने पहले से ही सोच रखा था कि अब वह गांव में ही बच्चों के साथ रहेंगे. करीब 15 हजार रुपए महीने जो पैंशन मिलेगी, उसी से घर का खर्च चलाएंगे.
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इस तरह बाकी की जिंदगी मौजमजे से कट जाएगी. एक दिन वह अपने परिवार के साथ बैठे थे, तभी उन के मोबाइल पर किसी अजनबी नंबर से फोन आया. जेठू सिंह ने फोन रिसीव किया तो दूसरी तरफ से कहा गया, ‘‘मैं रिलायंस कंपनी दिल्ली से राजीव रंजन बोल रहा हूं.’’
‘‘जी, बताइए.’’ जेठू सिंह ने कहा. ‘‘जेठू सिंह जी, हमें पता है कि आप फौज से रिटायर हो चुके हैं. आज के महंगाई के दौर में आप को जो पेंशन मिलती है, उस से घर का खर्च चलना आसान नहीं होगा. ऐसे में आप को कहीं न कहीं नौकरी करनी पड़ेगी. हमारे पास ऐसा प्लान है, जिस में आप को घर बैठे ही नौकरी मिल जाएगी.’’
‘‘घर बैठे नौकरी करना किसे अच्छा नहीं लगेगा.’’ राजीव रंजन की बात सुन कर जेठू सिंह ने कहा, ‘‘वह कैसे?’’ ‘‘देखिए जेठू सिंह जी, हमें आप के गांव सोनू में रिलायंस कंपनी का टावर लगवाना है. अगर आप के पास 500 वर्गगज जमीन हो तो यह टावर हम आप के यहां लगवा सकते हैं.’’ राजीव रंजन ने कहा.
जेठू सिंह आसपास के गांवों के ऐसे कई लोगों को जानते थे, जिन के यहां मोबाइल टावर लगे थे. टावर लगने के बाद उन्हें फोन कंपनियों की तरफ से जोजो सुविधाएं मिल रही थीं, उन की भी उन्हें जानकारी थी. इसलिए यह उन के लिए अच्छा औफर था. उन्होंने तुरंत कहा, ‘‘हां, मेरे पास जगह है.’’
‘‘हम ने तभी तो आप को फोन किया है. आप इस का फायदा उठा सकते हैं.’’ राजीव रंजन ने कहा. ‘‘मगर मुझे क्या करना होगा?’’ ‘‘आप को सिर्फ इतना करना है कि आप अपनी जमीन की रजिस्ट्री या अन्य कोई कागजात की कौपी हमें दें. कागज देखने के बाद हम उस पर टावर लगवा देंगे.’’ राजीव रंजन ने कहा. ‘‘ठीक है, हम अपनी जमीन के कागजों की फोटो कौपी आप को दे देंगे.’’ जेठू सिंह ने खुश हो कर कहा. यह बात 14 जनवरी, 2015 की है.
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इस के बाद राजीव रंजन अकसर जेठू सिंह से बात करने लगा. एक दिन उस ने फोन पर अपने एमडी, जीएम, और एरिया मैनेजर की कौन्फ्रेंस से जेठू सिंह की बात करा दी. इस के बाद राजीव रंजन ने उन्हें बताया कि टावर लगाने के बाद आप को कंपनी की तरफ से 74 लाख रुपए मिलेंगे. इस के अलावा 36 हजार रुपए महीने आप को किराया मिलेगा.
टावर की देखरेख के लिए एक आदमी की जरूरत पड़ेगी. उसे कंपनी 18 हजार रुपए महीने तनख्वाह देगी. अगर वह खुद उस की देखरेख करेंगे तो यह तनख्वाह उन्हें ही मिलती रहेगी.
इतने औफर को सुन कर जेठू सिंह का खुश होना लाजिमी था. उन्होंने तुरंत कहा, ‘‘आप गांव आ कर जमीन देख लीजिए.’’ ‘‘हां…हां… हमारी कंपनी की टीम आप की जमीन देख कर रिपोर्ट देगी. उस के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.’’ राजीव रंजन ने कहा.
एक दिन कृष्णदास नाम के युवक के साथ 4-5 युवक जेठू सिंह की जमीन देखने उस के गांव पहुंच गए. वह जमीन टावर लगाने के लिए उन्हें उपयुक्त लगी. जेठू सिंह ने खुश हो कर उन सभी की खूब खातिरदारी की.
इस के 2 दिन बाद राजीव रंजन ने जेठू सिंह को फोन किया, ‘‘जेठू सिंह जी, मुबारक हो. कंपनी के एरिया मैनेजर ने आप की जमीन पर टावर लगाने के लिए ओके कर दिया है.’’ ‘‘धन्यवाद सर, यह सब आप की ही मेहरबानी से हुआ है.’’ जेठू सिंह ने कहा. ‘‘जेठू सिंह जी, आप की यह फाइल आगे बढ़ाने से पहले आप को एक काम करना है.’’ राजीव रंजन ने कहा.
उस की बात सुन कर जेठू सिंह चौंक कर बोले, ‘‘क्या काम, बताइए.’’ ‘‘काम यह है कि आप को 60 लाख रुपए सिक्योरिटी के रूप में जमा कराने होंगे.’’ राजीव रंजन ने कहा, ‘‘देखिए, कुछ दिनों बाद आप को 74 लाख रुपए मिल ही जाएंगे. किराया और नौकरी के 54 हजार तो हर महीने मिलते ही रहेंगे.’’
जेठू सिंह को उस की बात ठीक लगी कि कुछ दिनों में उन के पास 74 लाख रुपए आ ही जाएंगे. इस के अलावा जगह का किराया और तनख्वाह भी मिलती ही रहेगी. उन्हें नौकरी से रिटायर होने पर अच्छीखासी रकम मिली थी. कुछ इधरउधर से जुगाड़ कर के उन्होंने 55 लाख रुपए का इंतजाम कर लिया.
पैसे इकट्ठे कर के उन्होंने राजीव रंजन को बताया तो उस ने जेठू सिंह को एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, भारतीय स्टेट बैंक और बैंक औफ बड़ौदा के एकाउंट नंबर दे कर उन में अलगअलग धनराशि जमा कराने को कहा.
जेठू सिंह ने अलगअलग बैंक के खातों में रुपए जमा करा दिए तो वहीं राजीव रंजन ने पोस्टडेटेड 74 लाख रुपए के अलगअलग चैक जेठू सिंह को दे दिए. उन्होंने सारे चैक संभाल कर रख लिए.
यह सारी लिखापढ़ी राजीव रंजन, कृष्णदास आदि ने उस के गांव में आ कर की थी. काररवाई पूरी कर के ये लोग दिल्ली लौट गए. दिल्ली लौटने के बाद इन सभी के मोबाइल फोन बंद हो गए. 2 दिनों बाद जेठू सिंह ने राजीव रंजन को फोन किया तो वह बंद मिला.
जेठू सिंह के पास जो नंबर थे, उन सभी पर उन्होंने फोन किया. पता चला सभी नंबर बंद हैं. कई बार कोशिश करने के बाद भी उन की बात नहीं हो सकी. सभी नंबर बंद हो चुके थे. जिस तारीख पर उन्होंने टावर लगाने का वादा किया था, वह तारीख भी निकल गई.
न तो जेठू सिंह के यहां टावर लगा और न ही उन की उन लोगों से बात हो रही थी. उन्हें अब शक होने लगा. गांव वालों ने उन से कहा कि जरूर उन के साथ ठगी हुई है, वरना वे लोग अपने मोबाइल फोन बंद नहीं करते. अब जेठू सिंह के पास अपने पैसे मिलने की एक ही उम्मीद बची थी कि वे पोस्टडेटेड चैक जो उन लोगों ने उन्हें काट कर दिए थे, उन्हें वे जमा करा दें. निर्धारित तारीखों पर जब उन्होंने वे चैक बैंक में जमा किए तो सारे के सारे बाउंस हो गए.
चैक बाउंस होते ही जेठू सिंह के होश उड़ गए. वह 25 जनवरी, 2016 को नजदीकी थाना रामगढ़ पहुंचे और थानाप्रभारी अरुण कुमार को तहरीर दे कर 55 लाख रुपए ठगे जाने की जानकारी दी. शिकायत में यह भी बताया था कि राजीव रंजन नामक व्यक्ति ने फोन पर रिलायंस कंपनी के एमडी, जीएम और एरिया मैनेजर से भी बात कराई थी.
थानाप्रभारी ने जेठू सिंह की तरफ से राजीव रंजन, कृष्णादास और उन के अन्य साथियों के खिलाफ ठगी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी. पूर्व सैनिक के साथ 55 लाख रुपए की ठगी के इस मामले को जैसलमेर के एसपी डा. राजीव पचार ने भी गंभीरता लिया.
आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए उन्होंने एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया, जिस में थानाप्रभारी अरुण कुमार, एएसआई खुशालचंद, कांस्टेबल दिनेश चारण, जगदीश दान, मुकेश बीरा को शामिल किया गया. पुलिस ने अभियुक्तों के फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की.
इस के बाद यह पुलिस टीम उन की तलाश में दिल्ली चली गई. जिन बैंक खातों में जेठू सिंह ने पैसे जमा किए थे, पुलिस ने उन बैंकों से संपर्क किया. खाता खोलने के लिए उन लोगों ने जो आईडी प्रयोग की गई थीं, जांच में वे फरजी पाई गईं. दिल्ली में डेरा डाले राजस्थान पुलिस अभियुक्तों की तलाश में नोएडा, गुड़गांव आदि शहरों में छापे मारे, लेकिन पुलिस को कुछ नहीं मिला.
जैसलमेर पुलिस की विशेष टीम को जांच के दौरान मुखबिर से एक महत्त्वपूर्ण सुराग हाथ लगा. उसी सुराग के आधार पर पुलिस ने दिल्ली के बुद्ध विहार में छापा मार कर सचिन को हिरासत में लिया. वह अपने परिवार के साथ वहां रह रहा था.
इस के बाद उस की निशानदेही पर पुलिस टीम ने विभिन्न जगहों पर रात भर छापेमारी कर के शुभम अग्रवाल उर्फ करण चौहान को विष्णु गार्डन से, दीपक शाह उर्फ पे्रम वर्मा को सुदर्शन पार्क (मोतीनगर) से, संजीव नागपाल उर्फ सन्नी और राहुल सक्सेना को संतनगर बुराड़ी से गिरफ्तार किया.
इन के पास से पुलिस ने 28 मोबाइल फोन, एक लैपटौप, सिमकार्ड, एटीएम कार्ड व रजिस्टर बरामद किए. अभियुक्तों ने जेठू सिंह से 55 लाख रुपए ठगने की बात स्वीकार कर ली. इस के अलावा उन्होंने महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, मुंबई, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं राजस्थान के कई जिलों में मोबाइल टावर लगाने के नाम पर करोड़ों रुपए ठगने की बात स्वीकार की.
उन्होंने यह भी बताया कि ठगी के इस धंधे में दिल्ली के चावड़ी बाजार का रहने वाला अभिषेक मल्होत्रा उर्फ निर्मल जैन, मंगोलपुरी का तरुण कुमार, मोतीनगर का ज्ञानेश्वर कौशिक, भजनपुरा का राजीव रंजन उर्फ अनिल कुमार पांडेय भी शामिल था. उन्होंने बताया कि धंधे को चलाने के लिए उन्होंने बाकायदा एक कालसेंटर खोल रखा था, जिस में लगभग 100 कर्मचारी काम करते थे.
अन्य फरार अभियुक्तों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अनेक जगहों पर छापे मारे, पर वे नहीं मिले. उन्होंने बताया कि दिल्ली में ऐसी और कई फरजी कंपनियां सक्रिय हैं. जो टावर लगवाने के नाम पर लोगों को ठग रही हैं. जैसलमेर में इस प्रकार की ठगी का अब तक का यह सब से बड़ा मामला था. इस गिरोह की जड़ें देश के 15 राज्यों में फैली हुई थीं, जिन का हर साल करीब 100 करोड़ रुपए का टर्नओवर था.
चारों अभियुक्तों को कोर्ट में पेश कर के पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें राजस्थान ले जा रही थी, तभी राजस्थान के नागौर जिलातंर्गत कुचामन के पास अचानक गाड़ी का आगे वाला टायर फट गया, जिस से अनियंत्रित हो कर गाड़ी पलट गई. इस दुर्घटना में पुलिसकर्मियों और अभियुक्तों के चोटें आई.
घायल अवस्था के बाद पुलिस ने गाड़ी के शीशे तोड़ कर अभियुक्तों को बाहर निकाला और दूसरी गाड़ी से सुरक्षित जैसलमेर ले गए. एसपी डा. राजीव पचार ने थाने पहुंच कर अभियुक्तों से पूछताछ की तो पता चला कि वे चारों अभियुक्त कालसैंटर में नौकरी करते थे. वे चारों जेठू सिंह से हुई ठगी में शामिल थे.
गैंग के मुखिया राजीव रंजन उर्फ अनिल पांडेय, अभिषेक मल्होत्रा, तरुण कुमार ने एक कंपनी बना रखी थी. उसी के मार्फत वे मोबाइल टावर लगवाने, एटीएम बूथ खुलवाने, इंश्योरेंस पौलिसी करने के नाम पर ठगी करते थे. इस तरह की ठगी करने के लिए एक हजार से भी ज्यादा लोगों को उन्होंने काम पर लगा रखा था.
इन के दिल्ली में 4 कालसेंटर चल रहे थे, हर 2-3 महीने बाद ये कंपनी का स्थान बदल देते थे. ठगी के इस धंधे में एक व्यक्ति को टीम लीडर बनाया जाता था, वहीं टीम के 7-8 सदस्यों को निर्देशित करता था. इतना ही नहीं, प्रत्येक टीम को हर महीने ठगी करने का टारगेट दिया जाता था.
पुलिस पूछताछ में ठगों ने बताया कि वे किसी तरह विभिन्न संगठनों के वेंड्रों से भारत के विभिन्न राज्यों के नागरिकों के पते, मोबाइल नंबर, बैंक खाता नंबर, पैन कार्ड की संपूर्ण जानकारी आदि प्राप्त कर मोबाइल द्वारा उन से संपर्क करते थे.
वे उन्हें मोबाइल फोन के टावर लगाने, इंश्योरेंस पौलिसी का बोनस देने आदि झूठे प्रलोभन दे कर फंसाते थे. गैंग के लोग ही विश्वास जमाने के लिए एमडी, जीएम और एरिया मैनेजर बन कर संभावित शिकार से बात किया करते थे. शिकार के फंस जाने पर उन से विभिन्न बैंक खातों में पैसे जमा करा लेते थे.
पुलिस पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्होंने अब तक की सब से बड़ी 1 करोड़ 50 लाख रुपए की ठगी की थी. पुलिस ने चारों अभियुक्तों को 7 मार्च, 2016 को जैसलमेर की अदालत में पेश कर 7 दिनों के रिमांड पर लिया.
रिमांड अवधि में उन की निशानदेही पर कई सबूत एकत्र किए. रिमांड समाप्ति पर पुन: उन्हें कोर्ट में पेश किया गया. जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. अन्य फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार टोह में लगी है. कथा लिखने तक उन की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. थानाप्रभारी अरुण कुमार का ट्रांसफर हो जाने के बाद अब इस केस की तफ्तीश नए थानाप्रभारी जेठाराम कर रहे हैं. Mobile Tower Fraud
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






