UP Honor Killing. सोनी अपने प्रेमी से रात को घंटों फोन पर बात तो करती ही थी, घर वालों की चोरी से नदी किनारे उस से मिलने भी जाती थी. भाई शिवम ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो उस ने उस से स्पष्ट कह दिया कि अगर उस ने रोका तो वह प्रेमी के साथ भाग जाएगी. शिवम से बहन की यह धमकी बरदाश्त नहीं हुई और…
28 अप्रैल, 2016 की सुबह संतकबीरनगर जिले के थाना महुली के थानाप्रभारी संतोष तिवारी थाने में बैठे सहयोगियोंसे पुराने मामलों पर चर्चा कर रहे थे कि बदहवास हालत में आए एक युवक ने घबराए स्वर में कहा, ‘‘सर, मेरी 17 साल की बहन सोनी कल रात से गायब है.’’
इस तरह की और वीडियो देखने के लिए मनोहर कहानियां का चैनल सब्सक्राइब करें
संतोष तिवारी ने उस युवक को सामने पड़ी कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए कहा, ‘‘साफसाफ बताओ क्या बात है?’’ ‘‘सर, मेरा नाम शिवम यादव है. मैं मुखलिसपुर का रहने वाला हूं. मेरी बहन सोनी कल रात से गायब है, जिसे हम लोगों ने बहुत खोजा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली.’’ अपना नाम शिवम बताने वाले युवक ने कहा.
‘‘ऐसा करो, तुम गुमशुदगी की तहरीर थाने में दे दो, जिस से हम पुलिसिया काररवाई कर सकें.’’ संतोष तिवारी ने कहा. ‘‘सर, मैं अपने घर वालों को साथ ले कर आता हूं, जिस से अपनी बहन की गुमशुदगी की तहरीर दे सकूं.’’ शिवम ने कहा और थाने से चला गया.
संतोष तिवारी को शिवम का यह व्यवहार कुछ अजीब लगा. लेकिन उन्होंने सोचा कि हो सकता है वह अपने घर के बड़ेबुजुर्गों द्वारा बहन की गुमशुदगी दर्ज कराना चाहता हो. लेकिन वह गया तो पूरा दिन बीत जाने के बाद भी लौट कर नहीं आया. इस से संतोष तिवारी को लगा कि शायद उस की बहन घर लौट आई है, इसीलिए वह थाने लौट कर नहीं आया.
30 अप्रैल की सुबह यही कोई साढ़े 7 बजे संतोष तिवारी के मोबाइल फोन की घंटी बजी तो उन्होंने फोन रिसीव किया. दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘सर, शिवम यादव बोल रहा हूं. 2 दिन पहले मैं अपनी बहन सोनी की गुमशुदगी के सिलसिले में आप के पास आया था. आज सुबह मैं नदी की ओर गया तो वहां मुझे दुर्गंध महसूस हुई. जहां से दुर्गंध आ रही थी, वहां पहुंचा तो पता चला कि बोरी में लाश है. कहीं वह लाश मेरी बहन सोनी की तो नहीं है?’’
संतोष तिवारी ने फोन द्वारा मिली यह जानकारी सीओ वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं एसपी शैलेश कुमार पांडेय को दी और खुद पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए, जहां लाश पड़ी होने के बारे में बताया गया था. कुआनो नदी के किनारे काफी भीड़ लगी थी. कुछ लोग दहाड़े मार कर रो रहे थे. थानाप्रभारी ने भीड़ को हटा कर लाश की बोरी बाहर निकलवाई.
उन्होंने बोरी खुलवाई तो उस में लाश के साथ कई ईंटें निकलीं. वे ईंटें शायद लाश को डुबोने के लिए उस के साथ रखी गई थीं. बोरी से निकली लाश की तुरंत शिनाख्त हो गई. वह सोनी की ही लाश थी. साफ था कि हत्या कहीं और कर के लाश को ठिकाने लगाने के लिए नदी में फेंका गया था.
वहां पुलिस को कोई ऐसी चीज नहीं मिली थी, जिस से हत्या के कारणों या हत्यारों का पता लगाया जा सकता. पुलिस ने घर वालों से काफी पूछताछ की, लेकिन उन से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली, जिस से पुलिस को जांच आगे बढ़ाने में मदद मिलती.
पुलिस घटनास्थल की काररवाई कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी कर रही थी कि मृतका सोनी के भाई शिवम ने कहा कि वह अपनी बहन की लाश का पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहता.
लेकिन संतोष तिवारी ने ऐसा करने के लिए मना कर दिया. इस के बाद उस ने पोस्टमार्टम रुकवाने के लिए कई नेताओं से फोन करवा कर दबाव डलवाया. संतोष तिवारी को यह बात बड़ी अजीब लगी. लेकिन किसी के दबाव में न आ कर उन्होंने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.
आज ही सब्सक्राइब करें सरिता
आपके लिए स्पेशल छूट

30 अप्रैल को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो पता चला कि मृतका के गले की हड्डी टूटी थी. सिर में भी चोट के निशान पाए गए थे. इस के बाद अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर के एसपी शैलेष पांडेय ने मामले की जांच के लिए थानाप्रभारी संतोष तिवारी के नेतृत्व में चौकीइंचार्ज असलम खान, जमीर अहमद, सिपाही ज्ञानचंद्र यादव, शम्स तबरेज, मिथलेश गुप्ता, शंभूनाथ यादव की एक टीम गठित कर दी.
टीम ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि सोनी ने इस साल विज्ञान वर्ग से 12वीं की परीक्षा दी थी, लेकिन घर वाले उसे स्कूल नहीं जाने दे रहे थे. पढ़ाई के लिए उसे स्कूल के बजाय कोचिंग सैंटर भेजा जाता था.
पुलिस ने कोचिंग सैंटर के अध्यापक अरविंद यादव से भी पूछताछ की. पुलिस को उन से ऐसा कोई सूत्र नहीं मिला, जिस से सोनी हत्याकांड का खुलासा होता. पुलिस ने मृतका सोनी के घर वालों से कई बार पूछताछ की, लेकिन इस का भी कोई लाभ नहीं हुआ.
पुलिस इस मामले को प्रेमसंबंध से जोड़ कर देख रही थी. क्योंकि मृतका के घर वालों का व्यवहार उसे शुरू से ही अजीब लग रहा था. मुखबिर का सहारा लिया गया तो पता चला कि सोनी की अकसर फोन द्वारा लड़कों से बात होती रहती थी. इस के बाद पुलिस ने सोनी के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि 2 नंबरों पर उस की बातें ज्यादा होती थी. उन में एक नंबर विशाल का था.
पुलिस ने विशाल से सोनी के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की अकसर सोनी से फोन पर बात होती रहती थीं. लेकिन उस के भाई को यह बात अच्छी नहीं लगती थी. एक दिन सोनी के भाई शिवम ने फोन पर गाली देते हुए उसे धमकी दी कि वह उस की बहन से बात करना छोड़ दे, वरना इस का अंजाम बहुत बुरा होगा.
इस के बाद विशाल ने सोनी से बात करना बंद कर दिया था. अब पुलिस की शक की सुई मृतका सोनी के भाई शिवम पर जा कर टिकी. पुलिस ने शिवम से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उसे न बहन की हत्या के बारे में पता है और न हत्यारों के बारे में.
लेकिन जब पुलिस ने शक के आधार पर 5 मई को उसे गिरफ्तार कर के पुलिसिया अंदाज में पूछताछ की तो उस ने अपनी बहन सोनी की हत्या करने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि उस ने गोरखपुर के जबरैला हरपुर बुदहट गांव के रहने वाले अपने मामा पन्नेलाल यादव, चाचा सीताराम, घनश्याम और पड़ोसी परमात्मा के साथ मिल कर उस की हत्या की थी.
इस के बाद पुलिस ने शिवम की मदद से उसी दिन ताबड़तोड़ छापा मार कर उस के मामा पन्नेलाल, चाचा सीताराम और पड़ोसी परमात्मा को गिरफ्तार कर लिया, जबकि पांचवां अभियुक्त घनश्याम फरार हो गया. गिरफ्तार किए गए चारों अभियुक्तों ने पूछताछ में पुलिस को जो बताया, उस के आधार पर सोनी की हत्या की कहानी कुछ इस प्रकार थी.
संतकबीरनगर जिले के थाना महुली के गांव मुखलिसपुर में रहते थे रवींद्रनाथ यादव. उन का परिवार यहीं गांव में रहता था, जबकि वह मारीशस में नौकरी करते थे. वह 2 साल में गांव आते थे. उन की बेटी सोनी सयानी हुई तो उस का भाई शिवम उसे स्कूल नहीं भेजना चाहता था. लेकिन रवींद्रनाथ बेटी को बहुत चाहते थे, इसलिए वह उसे पढ़ालिखा कर कुछ बनाना चाहते थे.
यही वजह थी कि उन्होंने उसे 12वीं में गणित और विज्ञान विषय दिलाए थे. उन्होंने उस का दाखिला कोचिंग में भी करा दिया था. सोनी कालेज के बजाय कोचिंग पढ़ने जाती थी.
एक दिन सोनी के भाई शिवम ने उसे रात 11 बजे मां के फोन से चोरी से किसी से बातें करते देख लिया तो पूछा कि इतनी रात को वह किस से बातें कर रही है? इस पर सोनी ने कहा, ‘‘कोचिंग में साथ पढ़ने वाली अपनी एक सहेली से बात कर रही हूं.’’
लेकिन शिवम को सोनी की इस बात पर विश्वास नहीं हुआ. वह चोरीछिपे सोनी पर नजर रखने लगा. इसी का नतीजा था कि एक दिन उस ने रात को मां के फोन से सोनी को घंटों किसी से बात करते पकड़ लिया. इस के बाद उस ने उस नंबर पर फोन किया तो पता चला कि वह विशाल का नंबर था. उस ने विशाल को फोन कर के धमकी दी कि आज के बाद अगर उस ने सोनी से बात की तो वह उसे जान से मार देगा.
सोनी ने विशाल को फोन कर के कहा कि वह उस के बिना नहीं रह सकती तो विशाल ने साफ कह दिया कि उसे अपनी जान प्यारी है, इसलिए वह उस से बातें नहीं कर सकता. सोनी ने फोन पर विशाल से अपने प्यार की बहुत दुहाई दी, लेकिन विशाल ने सोनी से बात करने से साफ मना कर दिया.
इस से शिवम को लगा कि सोनी सुधर गई है. लेकिन कुछ दिनों बाद उस ने सोनी को रात में मां के फोन से फिर किसी से बातें करते देख लिया. इस के बाद उस ने उसे घर से बाहर जाते देखा तो वह भी उस के पीछेपीछे दबे पांव चल पड़ा.
सोनी नदी के बांध पर पहुंची तो वहां एक लड़का उस का इंतजार कर रहा था. सोनी उस के पास बैठ कर उस से बातें करने लगी. शिवम खून का घूंट पी कर वापस चला आया और सोनी के लौटने का इंतजार करने लगा.
सोनी लौट कर आई तो शिवम ने उसे धमकाया कि वह अपनी आदतें सुधार ले, वरना ठीक नहीं होगा. सोनी ने उसे टका सा जवाब दे दिया कि वह उस की निजी जिंदगी में दखलंदाजी न करे. अगर उस ने उसे परेशान किया तो वह घर छोड़ कर भाग जाएगी.
सोनी की यह बात सुन कर शिवम सन्न रह गया. सोनी दिनोंदिन बेलगाम होती जा रही थी, जिस से अकसर उस की भाई से तूतू मैंमैं होती रहती थी. इस के बावजूद सोनी की आदतों में कोई सुधार नहीं हो रहा था.
उसी बीच रवींद्रनाथ यादव मारीशस से गांव आए तो बात आईगई हो गई. इस की वजह यह थी कि बहुत दिनों बाद पिता को पा कर सोनी और शिवम सब भूल गए थे. लेकिन सोनी घर वालों से छिप कर प्रेमी से फोन पर लगातार बातें कर रही थी. रात के अंधेरे में उस से मिलने भी जाती थी.
इस बात की जानकारी शिवम को हुई तो वह पिता के मारीशस जाने का इंतजार करने लगा. क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उस के पिता को सोनी के बारे में कुछ पता चले. क्योंकि उस के पिता सोनी को बहुत प्यार करते थे. इसलिए उन के रहते वह सोनी को कुछ नहीं कह सकता था.
सोनी धीरेधीरे बागी बनती जा रही थी, इसलिए मन ही मन शिवम ने सोनी का किस्सा खत्म करने का खौफनाक निर्णय ले लिया. रवींद्रनाथ के मारीशस जाने का वीजा आ गया तो 22 अप्रैल को वह चले गए. उन्हें एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए उन का साला पन्नेलाल भी आया था.
बहनोई को एयरपोर्ट पर पहुंचा कर वह बहन के घर आया तो शिवम ने मामा के साथ मिल कर सोनी को खत्म करने की योजना बना डाली. 26 अप्रैल की रात शिवम ने सोनी को घर से बाहर जाते देख लिया. उस ने उस का पीछा किया तो पता चला कि वह प्रेमी से मिलने गई थी.
शिवम ने छिप कर उस की बातें सुनी तो वह प्रेमी से कह रही थी कि उस का भाई नहीं चाहता कि वह उस से मिलने आए, इसलिए वह चाहती है कि वह उसे ले कर भाग चले.
सोनी के प्रेमी ने कुछ दिन और इंतजार करने को कहा. उस के बाद वह उसे भगा ले जाएगा. जब सोनी उस से मिल कर घर लौटी तो घर आते ही फिर उसी से फोन पर बातें करने लगी. इस के बाद शिवम गुस्से में उबलता उस के कमरे में जा कर बोला, ‘‘तुम जिस आदमी से मिल कर आ रही हो, उस से मिलना छोड़ दो, वरना मैं दोनों को जान से मार दूंगा.’’
सोनी ने भी उसे उसी तरह जवाब दिया, ‘‘अगर तुम ने ज्यादा रोेकटोक की तो मैं घर छोड़ कर उसी के साथ भाग जाऊंगी.’’
इस के बाद शिवम ने मामा पन्नेलाल, चाचा सीताराम और घनश्याम को बुला लिया. चारों ने सोनी को पकड़ कर मुंह दबा लिया, जिस से वह चीख नहीं सकी. इस के बाद दुपट्टे को गले में लपेट कर उस की हत्या कर दी गई. उन का जी नहीं माना तो उन्होंने वजनी चीज से उस के सिर पर प्रहार कर के सिर फोड़ दिया कि वह बच न सके.
उस रात उन्होंने लाश को घर में रखे भूसे में छिपा दी. अगले दिन 27 अप्रैल की रात लाश ले जा कर गांव के बगल से बहने वाली कुआनो नदी में फेंक दी. सुबह सोनी की मां उठी तो सोनी को घर में न पा कर रोनेचिल्लाने लगी. इस के बाद सभी उस की तलाश करने लगे.
जब सोनी का कहीं पता नहीं चला तो सभी ने शिवम से सोनी के गायब होने की सूचना पुलिस को देने को कहा. जबकि शिवम टालमटोल करता रहा. लेकिन लोगों को उस पर शक न हो, इसलिए 28 अप्रैल की सुबह वह सोनी के गायब होने की मौखिक सूचना थाना पुलिस को दे आया.
इस के बाद शिवम के चाचा घनश्याम ने कहा कि पानी में लाश फूल कर ऊपर आ जाती है, इसलिए लाश को किसी वजनी चीज के साथ बांध कर पानी में डुबोना होगा. चारों अभियुक्तों ने रात में गांव के ही परमात्मा की मदद से एक नाव मंगाई और लाश को जिस जगह डाला था, वहां से निकाल कर पास ही स्थित मजार से कुछ ईटें ला कर लाश को ईंटों के साथ बोरी में डाल कर नदी के बीचोबीच ले जा कर फेंक दी.
इस के बाद शिवम अन्य लोगों के साथ सोनी को खोजने का नाटक करता रहा. यही नहीं, उस ने अपने बचाव के लिए कुछ सबूत भी जुटा रखे थे. उस ने हत्या वाले दिन रात 11 बजे अपने मोबाइल फोन का स्विच औफ कर के एक शादी में जा कर वहां उपस्थिति दर्ज करा दी. पूछताछ में उस ने बताया भी था कि वह हत्या वाली रात घर पर नहीं था, क्योंकि उस दिन तो वह अपने एक दोस्त की बारात में गया था.
सबूत के तौर पर वीडियो रिकौर्डिंग में उस ने अपनी उपस्थिति भी दिखाई थी. जबकि उस के चाचा का कहना था कि वह गाड़ी ले कर किसी शादी में गए हुए थे. लेकिन उन लोगों की यह योजना पुलिस के आगे फेल हो गई.
थानाप्रभारी ने हत्याभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त दुपट्टा घर के भूसे से बरामद कर लिया था, साथ ही लाश को डुबोने के लिए लाई गई ईंटें और बोरी भी बरामद कर ली थी.
तरबेज ने 6 मई को एसपी औफिस में शैलेश पांडेय की मौजूदगी में प्रैसवार्ता बुला कर चारों अभियुक्तों को प्रैस वालों के सामने पेश किया, जहां अभियुक्तों ने सोनी की हत्या की पूरी कहानी सुना दी.
इस के बाद पुलिस ने चारों को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. एसपी ने खुश हो कर अभियुक्तों को पकड़ने वाली टीम को ढाई हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है. कथा लिखे जाने तक पांचवां अभियुक्त घनश्याम पुलिस की गिरफ्त से बाहर था.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






