Family Crime Case. कादिर ने अपनी बीवी को ठिकाने लगाने के लिए जो तरीका अपनाया, उस में उसे बीवी से तो छुटकारा मिल गया लेकिन उस की खुद की भी जान चली गई.
अब्दुल कादिर शहर से बाहर पहाडि़यों के बीच बने कौटेज में पत्नी के साथ रहता था. उस इलाके में उतनी ज्यादा आबादी नहीं थी. कुछ ही कौटेज थे, जिन में लोग रहते थे. कादिर अपनी बीवी रूबी के साथ ढाई साल पहले इस कौटेज में रहने आया था, जिसे रूबी के डैडी ने उन्हें दिया था.
वैसे तो रूबी और कादिर में काफी मोहब्बत थी, लेकिन आमदनी का जरिया समुचित न होने की वजह से दोनों में अकसर लड़ाईझगड़ा होता रहता था. कादिर एक शायर था. उस की आमदनी का जरिया मुशायरों में बुलाए जाने पर मिलने वाला मेहनताना था.
कभीकभी तो उसे महीने में 3-4 मुशायरों का निमंत्रण मिल जाता था और कभीकभी पूरा महीना सन्नाटे में गुजर जाता था. इस स्थिति में घर का खर्च चलाना रूबी के लिए मुश्किल हो जाता था. यही वजह थी, जिस से दोनों में तूतू, मैंमैं होती रहती थी.
उस दिन भी लड़ाई की जड़ यही थी. रूबी ने कादिर को निखट्टू कह दिया था, जिस से नाराज हो कर वह घर से बाहर जाने की जिद पर अड़ा था, जबकि रूबी उसे किसी भी कीमत पर घर से बाहर नहीं जाने देना चाहती थी.
इस पर कादिर ने गुस्से में कहा, ‘‘तुम्हें मालूम था कि मैं एक शायर हूं और शायर की आमदनी राजाओंमहाराजाओं की तरह नहीं होती. फिर भी तुम ने मुझ से शादी कर ली. मुझ से शादी करने की ख्वाहिश भी तुम्हारी ही थी.’’
इतना कह कर कादिर दरवाजे की ओर बढ़ा तो रूबी दरवाजे के बीचोबीच खड़ी हो कर तेज आवाज में बोली, ‘‘तुम बाहर जाने की मूर्खता बिलकुल मत करना, वरना अच्छा नहीं होगा.’’
कादिर पर रूबी की इस चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ. वह लापरवाही से दरवाजे की ओर बढ़ा. बस फिर क्या था, रूबी कादिर से चिपट गई तो दोनों में हाथापाई शुरू हो गई. ऐसे में कादिर रूबी के हाथों झटका खा कर जमीन पर गिर पड़ा, जिस से उस के सिर में चोट लग गई.
रूबी तुरंत शांत हो गई. वह गुस्सा और नाराजगी भूल कर तेजी से आगे बढ़ी और कादिर को बांहों में भर कर रोती हुई बोली, ‘‘कादिर…कादिर, मुझे माफ कर दो.’’
सिर में चोट लगने से कादिर की आंखें बंद हो गई थीं. लेकिन रूबी की आंखों से कादिर के चेहरे पर गिरे आंसुओं ने उस की आंखें खोल दीं. रूबी रोती हुई आगे बोली, ‘‘कादिर, मुझे माफ कर दो, मुझ से गलती हो गई. अब मैं तुम से कभी लड़ाई नहीं करूंगी. आखिर हम लोग एकदूसरे से लड़ते ही क्यों हैं? हम एकदूसरे से इतनी मोहब्बत करते हैं, फिर यह लड़ाईझगड़ा क्यों…?’’
इस से आगे रूबी कुछ नहीं बोल सकी. थोड़ी देर बाद कादिर की हालत में सुधार हुआ तो वह उठने की कोशिश करने लगा. रूबी उसे सहारा दे कर बैडरूम में ले गई. कादिर की हालत सुधर गई तो रूबी ने उस के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगाते हुए कहा, ‘‘कल तुम ने कुछ नए शेर लिखे थे, मुझे सुनाओ न… सुनाओगे न..?’’
‘‘हां… जरूर सुनाऊंगा.’’ ‘‘तुम बहुत अच्छे हो.’’ रूबी ने पति को दुलारते हुए कहा.
रूबी और कादिर की शादी को 3 साल बीत गए थे. लेकिन अभी तक उन्हें कोई औलाद नहीं हुई थी. रूबी के डैडी ने उन की काफी मदद की थी. लेकिन शादी के एक साल बाद ही वह इस दुनिया से चल बसे थे.
उन्होंने अपनी बेटी को शादी में सुखसुविधाओं की तमाम चीजें दी थीं. लाल रंग की एक कार भी दी थी. शादी के बाद जहां रूबी की सुंदरता में निखार आ गया था, वहीं वह थोड़ी मोटी हो गई थी. रूबी ने एक बार फिर कादिर से माफी मांगी तो वह बोला, ‘‘कोई बात नहीं, जो हुआ, उसे भूल जाओ.’’
बिस्तर पर लेटे कादिर से लिपट कर रूबी बोली, ‘‘तुम बहुत अच्छे हो. तुम इस देश के सब से बेहतरीन और बड़े शायर हो. तुम्हारा दिल सोने का है. तुम्हारे होते हुए मुझे किसी दौलत की जरूरत नहीं है.’’
रूबी ने बैड लैंप औफ कर दिया और उस से लिपट कर लेट गई. उसे अपने हनीमून की यादें आने लगीं. कादिर भी खामोशी से लेटा कुछ सोच रहा था.
रूबी ने प्यार से पूछा, ‘‘क्या सोच रहे हो कादिर?’’ ‘‘जो तुम सोच रही हो, वही मैं भी सोच रहा हूं.’’ कादिर ने जवाब दिया, ‘‘तुम्हारी हर सोच मेरी सोच है.’’
इस के बाद रूबी के दोबारा कहने पर कादिर ने उसे अपने नए शेर सुनाए. हालांकि उस के सिर में दर्द हो रहा था, लेकिन बीवी की बात वह टाल नहीं सका. रूबी बहुत ध्यान से कादिर के शेर सुन रही थी. शेर सुनतेसुनते ही वह सो गई.
कादिर भी सोना चाहता था, मगर नींद उस की आंखों से कोसों दूर थी. वह सोच रहा था कि इस देश में शायरों की कोई हैसियत नहीं है. वह अपना दिल निकाल कर शेरों में जान डाल देते हैं और श्रोताओं तथा पाठकों को अनोखेअछूते विचार देते हैं, फिर भी उन्हें रोटी मुश्किल से मिलती है.
अखबार और पत्रिकाएं भी उन की शायरी छाप कर बहुत कम पैसे देते हैं. महीने में भला एकदो मुशायरों में बुलाए जाने से क्या किसी के घर का खर्च चल सकता है? ऐसे में रूबी द्वारा कम आमदनी होने की शिकायत उचित ही थी. यही कारण था कि उसे गुस्सा आता था, वह उसे निकम्मा ओर निखट्टू कह देती थी. इस काटेज को रूबी के डैडी ने ही मरने से पहले उस के नाम कर दिया था.
रूबी के डैडी के बारे में सोचते हुए कादिर को उन से हुई पहली मुलाकात याद आ गई, जब रूबी उसे अपने घर ले गई थी. वह एक सरकारी अफसर थे. वह अपनी बेटी की शादी किसी ऐसे व्यक्ति से करना चाहते थे, जिस के साथ वह आराम से जिंदगी गुजार सके. रूबी के डैडी ने पहले तो कादिर को नापसंद कर दिया था, क्योंकि उस की आमदनी का जरिया मुशायरे और पत्रपत्रिकाएं थीं. उन्हें मालूम था कि एक शायर शायरी की बदौलत दांपत्यजीवन नहीं चला सकता.
कादिर भी अपनी स्थिति से वाकिफ था, लेकिन रूबी ने दोनों को मजबूर कर दिया था और आखिर उस की बीवी बन कर यहां रहने आ गई थी. शुरूशुरू में रूबी के डैडी ने दोनों को अपने फ्लैट में रखा था, जो शहर में था. कुछ दिनों बाद दोनों इस कौटेज में रहने चले आए थे.
रूबी को कादिर से ही नहीं, उस की शायरी से भी बहुत प्यार था. वह शादी से पहले कादिर की दीवानी थी. कोई भी ऐसा मुशायरा उस से नहीं छूटता था, जिस में कादिर को बुलाया गया हो. वह कादिर से मिलतीजुलती भी रहती थी. उस के लिए कादिर का साथ छोड़ना बड़ा मुश्किल हो गया था.
शादी के बाद रूबी के डैडी ने कहा था कि उन के पास जो भी जमापूंजी है, वह सब उन्हीं लोगों की है. इसलिए उन की मौत के बाद बैंक बैलेंस, सेविंग सर्टिफिकेट्स, बांड्स, शेयर्स और यह कौटेज उन्हें मिल गया था.
रूबी तो कादिर की शायरी सुनतेसुनते कब की सो चुकी थी, लेकिन कादिर अब भी जाग रहा था. रूबी के डैडी की मौत के बाद कादिर निश्चिंत हो गया था. उसे मालूम था कि उस के ससुर इतनी दौलत छोड़ गए हैं कि वह आसानी से पूरी जिंदगी गुजार सकता है.
यही सोचते हुए उस के दिमाग में एक विचार आया, अगर रूबी का कत्ल कर दिया जाए तो सब कुछ उसे तुरंत मिल जाएगा, लेकिन उस की मौत पर शक भी उसी पर किया जाएगा. अगर वह रूबी को रास्ते से हटाने के बाद इस मामले में फंस जाता तो फिर क्या होगा?
वैसे तो रूबी का सबकुछ उसी का था, लेकिन इन दिनों रूबी ने उस का जीना मुश्किल कर दिया था. अब वह इस नरक में नहीं रहना चाहता था. सुबह कादिर की आंखें देर से खुलीं. रातभर उस के दिमाग में रूबी को हटाने के तरहतरह के विचार आते रहे. वह सोचने लगा कि क्या वह रूबी का कत्ल कर पाएगा?
कादिर हिम्मत कर के बिस्तर से उठा और फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस गया. रूबी नाश्ता बना रही थी. फ्रेश होने के बाद कादिर ने नाश्ता किया. रूबी ने कहा, ‘‘तुम्हें अभी आराम करने की जरूरत है. जाओ, आराम करो. कहीं इधरउधर जाने की जरूरत नहीं है.’’
लेकिन कादिर नहीं माना. वह अपनी मेज पर जा बैठा और किसी पत्रिका के लिए कविता लिखने का मूड बनाने लगा. उस पत्रिका के संपादक ने उसे शीर्षक दे कर कविता लिख कर भेजने को कहा था, वह उस शीर्षक पर कलम चलाने का प्रयास करने लगा, लेकिन वह नाकाम रहा. उस का दिमाग काम नहीं कर रहा था. उस ने गुस्से में कलम को मेज पर पटक दिया.
उस का दिमाग बारबार बस एक ही काम के लिए उकसा रहा था, ‘रूबी का कत्ल कर दो… उसे अपने रास्ते से हटा दो.’
लेकिन कैसे? तभी उसे जहर द्वारा रूबी की हत्या करने का विचार आया. हां, यह ठीक रहेगा. आजकल जहर भी इस तरह पैकेट में आ रहा है, जैसे चीनी. चाय या शरबत में मिला देने पर पता नहीं चलेगा.
अचानक उस के दिमाग में एक दूसरा विचार आया, ‘अगर रूबी के सिर पर पीछे से किसी लकड़ी या भारी चीज से वार किया जाए तो भी वह आसानी से मर सकती है.’
कादिर बड़ी देर तक इसी बारे में सोचता रहा. अचानक उसे अपने एकमात्र पड़ोसी शकील के घर के पीछे बने कुएं की याद आई. वह कुआं काफी गहरा था. अगर किसी तरह रूबी को वहां ले जा कर कुएं में धक्का दे दिया जाए तो वह आसानी से मर सकती है. कादिर तरहतरह की बातें सोचता रहा और बारबार उन्हें दिमाग से झटकता रहा. लेकिन रूबी की मौत की ख्वाहिश उस के मन से निकलने का नाम नहीं ले रही थी.
शाम को कादिर टहलने के लिए निकला तो शकील के घर के पीछे से हो कर गुजरा. शकील अपनी बीवीबच्चों के साथ मुंबई गया था. कादिर ने कुएं में झांक कर देखा तो उसे कुछ भी नहीं दिखाई दिया. पास ही कुएं को ढकने वाला बोर्ड पड़ा था. उस ने बोर्ड उठा कर कुएं को ढक दिया और वापस घर की ओर चल दिया.
वह जानता था कि कुआं काफी गहरा है और उस में पानी भी काफी है, इसलिए उस का काम आसानी से हो जाएगा. अब कादिर की आंखों में एक खास चमक थी और उस के दांत भिंचे हुए थे. अगले दिन शाम को अंधेरे में कादिर और रूबी साथसाथ टहलने के लिए निकले. कादिर कुछ नर्वस नजर आ रहा था. उस का दिल जोरजोर से धड़क रहा था और दिमाग बारबार कह रहा था कि वह वक्त आ गया है, जिस का उसे इंतजार था.
रूबी उस के साथ चलते हुए बहुत खुश थी. वह बातबात पर खिलखिला रही थी. कादिर भी उस की खुशी के लिए मुसकरा देता था और यह दिखाने की कोशिश करता था कि वह भी बहुत खुश है. लेकिन उस के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था. तभी रूबी बोली, ‘‘आज मैं कैसी लग रही हूं?’’ ‘‘तुम तो मुझे हमेशा ही अच्छी लगती हो.’’ कादिर बोला.
‘‘लेकिन तुम तो कहते हो कि मैं गोश्त और चर्बी का पहाड़ बन गई हूं. खैर, मैं कल से डायटिंग शुरू कर दूंगी और अपना वजन कम कर के तुम्हें दिखाऊंगी.’’
तभी कादिर ने रास्ते में पड़ी एक मोटी लकड़ी उठा ली. रूबी थोड़ा आगे बढ़ चुकी थी. जब वह वार करने के लिए आगे बढ़ा तो रूबी ने उसे हाथ में लकड़ी लिए देख लिया. उस ने पूछा, ‘‘इस का क्या करोगे?’’
कादिर ने कोई जवाब नहीं दिया. ‘‘अच्छा, समझ गई. रास्ते में भौंकने वाले कुत्तों को डराने के लिए ले रखी हैं?’’ रूबी ने कहा.
उस की बात सुन कर कादिर हंस दिया. दोनों धीरेधीरे आगे बढ़ने लगे. रूबी ने कादिर का एक हाथ अपने हाथ से पकड़ रखा था. वे बातें करते आगे बढ़ रहे थे. तभी कादिर ने चुपके से अपना हाथ छुड़ा लिया. रूबी आगे बढ़ गई. कादिर ने जैसे ही पीछे से वार करने के लिए हाथ उठाया, वैसे ही रूबी घूम पउ़ी और कादिर का लकड़ी वाला हाथ उठा देख कर हैरान रह गई. उस ने पूछा, ‘‘क्या हुआ डियर?’’
कादिर ने पास ही रेंगते एक बिच्छू की ओर इशारा कर दिया. रूबी बिच्छू को देख कर बोली, ‘‘हां, इसे मार डालो.’’
कादिर ने राहत की सांस ली कि रूबी को कोई शक नहीं हुआ. उस ने बिच्छू को मार दिया. दोनों फिर धीरेधीरे चलने लगे. कुछ ही दूरी पर शकील का कौटेज था, जो मुंबई गया था.
कादिर को लगा कि अब वह रूबी को नहीं मार सकता. उस ने कई बार कोशिश की, लेकिन असफल रहा. कादिर की निगाह बारबार उस कुएं की ओर उठ रही थी, जबकि रूबी उस की नजरों से बेपरवाह खुशीखुशी आगे बढ़ रही थी. वह लगातार इधरउधर की बातें कर रही थी और कादिर ‘हूं हां’ कह कर जवाब दे रहा था.
तभी चलतेचलते अचानक रूबी लड़खड़ाई और जमीन पर गिर पड़ी. कादिर ने सही समय जान कर उस पर लकड़ी से वार कर दिया. रूबी उसे नहीं देख सकी. सिर पर लगने वाली चोट से रूबी को लगा कि उस का सिर जमीन पर पड़ी किसी चीज से टकरा गया है. कादिर ने इधरउधर देखा. दूरदूर तक कोई नहीं दिखाई दिया.
उस के लिए यह बेहतरीन मौका था. कादिर ने रूबी की ओर देखा, वह बेहोश हो गई थी. उस ने उसे हिलाडुला कर तसल्ली कर लिया कि वह वाकई बेहोश है. उस ने रूबी को उठाया और आगे बढ़ने लगा. लेकिन रूबी के भारी जिस्म की वजह से कादिर के कदम डगमगा रहे थे. उस के सिर में चक्कर सा आने लगा. लेकिन किसी तरह उस ने खुद को संभाला और कुएं की तरफ धीरेधीरे बढ़ने लगा. उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वह कुआं कोसों दूर है.
रात हो चुकी थी. अंधेरा गहरा था. उसे तुरंत रूबी को कुएं में फेंक कर अपना अधूरा काम पूरा करना था. अगर यह मौका हाथ से निकल गया तो वह रूबी को कभी नहीं मार पाएगा.
रास्ते में कादिर को 2 जगह रुकना पड़ा, लेकिन उस ने अपना इरादा नहीं बदला. आखिर वह कुएं के पास पहुंच गया. रूबी अभी तक बेहोश थी. उस ने थोड़ी देर अपनी सांस दुरुस्त की. उस के बाद रूबी को कुएं की दीवार पर लिटा कर कुएं का ढक्कन हटाने लगा. तभी रूबी के गले से कराह निकली. वह होश में आ रही थी.
कादिर ने जल्दी से कुएं का ढक्कन हटाया और रूबी को सिर के बल कुएं में गिराने लगा. उसी समय रूबी को होश आ गया. वह जोरजोर से चीखने लगी, ‘‘कादिर…कादिर. यह क्या कर रहे हो?’’
लेकिन कादिर ने उस की एक न सुनी. उसे रूबी के भारी शरीर को कुएं में गिराते हुए पसीना आ रहा था. इधर रूबी भी अपनी जिंदगी बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रही थी. उस का सिर नीचे की तरफ था. उस ने एकदम से अपनी दोनों टांगें कादिर के गले में फंसा दीं. कादिर ने रूबी को कुएं में गिराया तो उस के साथसाथ वह भी अंदर चला गया. कुएं में गिरते हुए सिर्फ रूबी की ही नहीं, उस में कादिर की भी चीखें शामिल हो
— एम.एस. शुजाअ रिजवी प्रस्तुति : कलीम आनंद






