Story in Hindi. सपा के प्रदेश स्तर के नेता मनीष तिवारी ने नौकरी दिलाने का झांसा दे कर विनीता से शारीरिक संबंध बना कर उस की वीडियो भी बना ली. इस के बाद वह उसी वीडियो के बल पर उसे ब्लैकमेल करने लगा तो…
1 जून, 2016 को देर रात पार्टी से घर लौटा तो मनीष काफी थका हुआ था, इसलिए खाना खा कर तुरंत सो गया. अगले दिन सुबह 10 बजे वह फाइल ले कर घर निकला तो वापस नहीं लौटा. घर वालों ने उसे फोन किया तो फोन बंद मिला. इस के बाद जानपहचान वालों को फोन करने के साथसाथ संभावित जगहों पर उस की तलाश की गई, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला.
इस तलाश में सिर्फ इतना पता चला कि वह रानीगंज स्थित तांत्रिक मनीष दुबे के घर गया था, लेकिन वहां से वह शाम 4 बजे चला गया था. वहां से वह कहां गया, किसी को पता नहीं था. मनीष के पिता विजय कुमार सरकारी नौकरी में थे. वह शाम को घर लौटे तो बेटे के गायब होने की बात जान कर परेशान हो उठे. उन्होंने भी इधरउधर फोन कर के बेटे के बारे में पता किया, पर कोई जानकारी नहीं मिली.
कोई उपाय न देख विजय कुमार थाना कर्नलगंज पहुंचे और थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शुक्ला को बेटे मनीष तिवारी के गायब होने की जानकारी दी. चूंकि मनीष सत्ताधारी पार्टी का प्रदेश स्तर का नेता था, इसलिए प्रमोद कुमार शुक्ला ने उस की गुमशुदगी दर्ज कर के इस बात की जानकारी सीओ और एसपी को दे दी. इस के बाद पुलिस मनीष की तलाश में जुट गई.
जवान बेटे के इस तरह गायब होने से विजय कुमार के घर मायूसी छाई थी. जैसेजैसे समय बीत रहा था, घर वालों की चिंता बढ़ती जा रही थी. 4 जून, 2016 की सुबह विजय कुमार को अज्ञात शव मिलने की जानकारी मिली, जिसे थाना चकेरी पुलिस ने बरामद किया था. अखबार में प्रकाशित हुलिया पढ़ कर उन्हें आशंका हुई. वह पत्नी सरोज तिवारी को साथ ले कर हैलट अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस जा पहुंचे.
थाना चकेरी पुलिस ने बरामद लाश उन्हें दिखाई तो विजय कुमार और उन की पत्नी फफक कर रो पड़े. उन्होंने रोते हुए बताया कि यह लाश उन के बेटे मनीष तिवारी की है. चूंकि उन्होंने बेटे की गुमशुदगी थाना कर्नलगंज में दर्ज कराई थी, इसलिए वे थाना कर्नलगंज पहुंचे और प्रमोद कुमार शुक्ला को बेटे की लाश मिलने की जानकारी दी.
प्रमोद कुमार शुक्ला ने चकेरी थाना पुलिस से बात की और विजय कुमार की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 364, 201, 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी. मामले के खुलासे के लिए एसपी (पश्चिम) सचिंद्र पटेल ने सीओ कर्नलगंज के नेतृत्व में इंसपेक्टर प्रमोद कुमार शुक्ला, एसआई राकेश बहादुर सिंह, सुमित सिंह चौहान, सिपाही पुष्पेंद्र सिंह, हरिओम, कमल सिंह चंदेल, सीमांत सिंह सिकरवार और महिला सिपाही रीमा पाल की एक टीम गठित कर दी.
उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर के थाना कर्नलगंज की मकराबटगंज कालोनी के रहने वाले विजय कुमार तिवारी के 2 बेटियों के अलावा एकलौता बेटा मनीष तिवारी था. विजय कुमार ने पुलिस को बताया था कि मनीष तांत्रिक मनीष दुबे के घर गया था, इसलिए पुलिस रानी घाट निवासी तांत्रिक मनीष दुबे और उस के छोटे भाई संजू दुबे व 2 अन्य लोगों को हिरासत में ले कर थाने ले आई.
पूछताछ में संजू दुबे ने पुलिस को बताया कि मनीष उन के भाई के पास लड़कियों एवं महिलाओं को अपने वश में करने के लिए तंत्रमंत्र करवाने आता था. 2 जून को भी वह उस के भाई के पास आया था और शाम 4 बजे के करीब वह विनीता के घर जाने की बात कह कर अपनी मोटरसाइकिल से चला गया था.
पुलिस ने जब उस से विनीता के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि वह उस के बारे में कुछ नहीं जानता. पुलिस को अब तक जो भी जानकारियां मिली थीं, उन के आधार पर यह मामला अवैध संबंधों का लग रहा था. इस के बाद पुलिस ने मनीष तिवारी के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकवलाई तो पता चला कि मनीष ने सब से ज्यादा फोन विनीता को ही किए थे.
2 जून की शाम 4 बज कर 18 मिनट पर भी उस ने विनीता को फोन कर के बात की थी. विनीता से पूछताछ करने के बजाय पुलिस ने उस के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. उस में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर कभीकभार ही बात होती थी. वह फोन नंबर सावित्रीनगर, सनिगंवा रोड, थाना चकेरी कानपुर के रहने वाले उस के भाई का था. पुलिस ने उस के बारे में पता किया तो पता चला कि वह इनकम टैक्स विभाग में नौकरी करता था.
पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया कि विनीता उस की बहन है, जो कानपुर के ही नजीराबाद की कौशलपुरी कालोनी स्थित अपनी ससुराल में रहती है. पुलिस ने जब मनीष की हत्या के बारे में उस से पूछताछ की तो वह पुलिस को गुमराह करने लगा. लेकिन जब पुलिस ने काल डिटेल्स में उस का मोबाइल नंबर होने का जिक्र किया तो उस ने बताया कि 1-2 जून की रात विनीता ने उसे फोन कर के खुद के संकट में होने की बात कह कर अपनी ससुराल बुलाया था. जब वह उस के घर पहुंचा तो उस के कमरे में एक युवक की अर्धनग्न लाश पड़ी थी. लाश देख कर वह हैरान रह गया.
विनीता और उस के पति संदीप ने गिड़गिड़ाते हुए लाश को ठिकाने लगवाने में उस से मदद मांगी. चूंकि वह सरकारी नौकरी में था, इसलिए पुलिस के लफड़े में फंसने पर उस की नौकरी खतरे में पड़ सकती थी, इसलिए उस ने इस मामले में कोई सहयोग करने से साफ मना कर दिया, साथ ही बहनबहनोई को सलाह दी कि बेहतर यही होगा कि वे पुलिस को सूचना दे दें. यह सलाह दे कर वह घर चला आया. उस के आने के बाद बहनबहनोई ने लाश को कहां और कैसे ठिकाने लगाया, उसे नहीं मालूम.
विनीता के भाई से मिली जानकारी से साफ हो गया कि मनीष की हत्या विनीता और उस के पति संदीप सिंह ने की थी. दोनों की तलाश में पुलिस 7 जून, 2016 को उन के घर पहुंची तो दरवाजे पर ताला लगा था. इस के बाद प्रमोद कुमार शुक्ला ने उन पर नजर रखने के लिए उन के मकान के बाहर 2 सिपाही लगा दिए. देर रात मकान की तीसरी मंजिल के छज्जे पर सिपाहियों ने किसी को चहलकदमी करते देखा तो उन्होंने यह जानकारी प्रमोद कुमार शुक्ला को दे दी.
प्रमोद कुमार शुक्ला तुरंत वहां पहुंचे और गेट का ताला तोड़वा कर अंदर दाखिल हुए तो विनीता और उस का पति संदीप एक कमरे में सहमे हुए खड़े मिले. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया. थाने ला कर दोनों से अलगअलग पूछताछ की गई तो विनीता ने आसानी से अपना अपराध स्वीकार कर के बताया कि मनीष तिवारी ने उस के सामने ऐसे हालात पैदा कर दिए थे कि उस के पास उस की हत्या करने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं बचा था.
सन 2010 में विनीता उर्फ लवली का विवाह कानपुर की कौशलपुरी कालोनी के रहने वाले संदीप सिंह से हुआ था. संदीप के पिता बैंक में मैनेजर थे. जबकि उस के एक भाई लखीमपुर की एक चीनी मिल में मैनेजर हैं तो एक भाई आईपीएस हैं. विनीता ने यही सोचा था कि इस तरह के शिक्षित परिवार में उस की शादी हो रही है तो वहां वह खुश रहेगी. लेकिन शादी के बाद उस के सारे सपनों पर पानी फिर गया. इस की वजह यह थी कि उस के पति संदीप का आचरण ठीक नहीं था.
वह एक नंबर का लोफर था. दिन भर शराब पीना, आवारागर्दी करना उस के स्वभाव में था. संदीप नहीं सुधरा तो मांबाप ने उसे तीसरी मंजिल दे कर अलग कर दिया. विनीता ने पति को बहुत समझाया, पर उस पर पत्नी के समझाने का कोई असर नहीं पड़ा.
जेठ से विनीता की परेशानी देखी नहीं गई तो वह उसे 7 हजार रुपए महीने खर्च देने लगे. उस में से भी संदीप जोरजबरदस्ती कर के शराब पीने के लिए रुपए छीन लेता था. मकान निजी था, इसलिए किराया नहीं देना पड़ता था. इसलिए विनीता किसी तरह परिवार का भरणपोषण कर रही थी.
पिछले साल जन्माष्टमी पर कानुपर के प्रसिद्ध जेके मंदिर में अपनी 5 साल की बेटी को ले कर विनीता घूमने गई थी तो वहीं झूला झूलते समय उस की मुलाकात मनीष तिवारी से हुई. दोनों में परिचय होने के बाद जब मनीष तिवारी को पता चला कि विनीता पढ़ीलिखी है और उसे आर्थिक प्रौब्लम है तो उस ने उसे अपने प्रभाव से शिक्षा मित्र की नौकरी लगवाने का भरोसा दिया.
विनीता को लगा कि मनीष चूंकि सत्ताधारी पार्टी का नेता है, इसलिए अपनी पहुंच से उस की नौकरी लगवा सकता है. इस के बाद विनीता सपनों में खोई रहने लगी. उसे लगता था कि यदि शिक्षा मित्र की नौकरी मिल गई तो जेठ पर आश्रित नहीं होना पड़ेगा और स्वयं नौकरी कर के परिवार का भरणपोषण कर लेगी. यही सोच कर विनीता ने मनीष तिवारी को अपने घर का पता और मोबाइल नंबर दे दिया.
विनीता अपनी बच्ची के साथ घर लौट आई. अगले दिन ही मनीष ने फोन कर के कहा, ‘‘दीदी, मैं आप के घर के नीचे सड़क पर खड़ा हूं.’’
विनीता तुरंत नीचे आई और मनीष को अपने साथ ऊपर ले गई. उस समय विनीता का पति संदीप भी घर में ही था. उस ने पति से मनीष का परिचय कराया, साथ ही शिक्षा मित्र के पद पर नौकरी दिलवाने वाली बात भी बताई.
नौकरी पाने के लालच में विनीता और संदीप भावुक हो उठे. उन्होंने मनीष का खूब स्वागतसत्कार किया. इस के बाद मनीष विनीता के घर बेरोकटोक आनेजाने लगा. मनीष उम्र में छोटा था, इसलिए वह विनीता को दीदी कहता था. दीदी जैसे पवित्र रिश्ते की वजह से विनीता और उस के पति को उस पर संदेह करने जैसी कोई बात नहीं लगी थी.
कुछ ही दिनों में मनीष विनीता के घर के सदस्य की भांति घुलमिल गया. जबकि उस के मन में कुछ और ही था. जल्दी ही विनीता के सामने उस की आंखों में वासना के डोरे तैरने लगे. विनीता ने उस के हावभाव से सब समझ भी लिया. लेकिन सतर्क होने के बजाय वह उस की भावनाओं के अनुरूप उस की वासना को हवा देने लगी.
फिर एक दिन मौका मिलते ही मनीष ने अपनी इच्छा पूरी कर ली. संदीप नशे में धुत घर में पड़ा सोया करता था. इसी का फायदा उठाते हुए मनीष नींद की गोलियां ला कर विनीता को दे देता. जब उसे विनीता से मिलना होता वह संदीप की चाय में नींद की गोलियां मिलवा देता, जिस से संदीप 3-4 घंटे के लिए बेसुध हो कर सो जाता. उस के बाद वे निश्चिंत हो कर अपना काम कर लेते थे.
धीरेधीरे विनीता पर मनीष तिवारी का ऐसा जादू छा गया कि मनीष उस से जैसा कहता, वह वैसा ही करने लगी. इस के बाद मनीष ने मोबाइल फोन से उस की अश्लील वीडियो बनाई, तब भी उस ने विरोध नहीं किया.
लेकिन इधर 3-4 महीने से अचानक मनीष के आचार एवं व्यवहार में परिवर्तन आ गया, वह विनीता से पैसों की मांग करने लगा. विनीता खुद परेशान रहती थी, इस के बावजूद उस की मांग पूरी करती थी. मनीष के रुपए मांगने का सिलसिला बढ़ता गया, उस के पैसे मांगने का तरीका विनीता को वसूली जैसा लगने लगा तो वह तनाव में रहने लगी.
मनीष की इस हरकत से विनीता के दिल में उस के प्रति घृणा एवं नफरत पैदा हो गई. क्योंकि मनीष विनीता को चलताफिरता एटीएम एवं सैक्स की गुडि़या समझने लगा था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह मनीष से किस तरह से पीछा छुड़ाए. एक दिन विनीता ने उसे पैसे देने से मना किया तो उस ने उसे धमकी दी कि वह उसे एक लाख रुपए तुरंत दे, वरना वह उस की अश्लील वीडियो फेसबुक पर डाल देगा, जिस से वह घरपरिवार और समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी.
मनीष की इस धमकी से विनीता के होश उड़ गए. उस ने अपनी तमाम मजबूरियां बता कर रुपए न होने की बात कह कर पिंड छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन मनीष नहीं माना. दूसरी ओर संदीप सिंह को पत्नी व मनीष तिवारी के मिलनेजुलने एवं बातें करने का तरीका अच्छा नहीं लग रहा था. उसे दोनों पर शक भी होने लगा था. उस ने ऐतराज जताते हुए विनीता से कहा कि वह मनीष का आना बंद करा दे.
विनीता ने मनीष से यह बात कही तो वह संदीप की अनुपस्थिति में उस के घर आने लगा. शक होने पर संदीप अपनी बेटी से बहलाफुसला कर मनीष के बारे में पूछ लेता था. जब संदीप को पता चलता कि उस की गैरमौजूदगी में मनीष आया था तो वह विनीता से झगड़ने लगता. यही नहीं, उस ने धमकी भी दे दी थी कि जिस दिन घर में मनीष मिल गया, वह उसे ऐसा सबक सिखाएगा कि वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएगा.
घटना के एक सप्ताह पहले मोहल्ले में संदीप और मनीष का आमनासामना हो गया तो संदीप उस से झगड़ने लगा, बात हाथापाई तक पहुंच गई. उस से लड़झगड़ कर संदीप घर पहुंचा तो विनीता का मोबाइल छीन लिया, ताकि वह मनीष से बात न कर सके. इस के बाद विनीता ने एक सस्ता सा मोबाइल खरीद लिया. उस मोबाइल से वह केवल मनीष से ही बातें करती थी. बात करने के बाद वह मोबाइल छिपा कर रख देती थी.
जब कभी मनीष को उस से मिलने के लिए आना होता, वह उसे फोन कर देता था. इस के बाद मनीष बड़ी सतर्कता से उस के यहां आता और अपनी इच्छा पूरी कर के चला जाता था.
2 जून, 2016 की शाम 4 बजे अचानक मनीष अपनी मोटरसाइकिल से विनीता के यहां पहुंचा. संदीप उस समय दूसरे कमरे में सो रहा था. दबे पांव वह विनीता के पास पहुंचा और अपनी इच्छा पूरी करने की बात कही तो विनीता ने दबी आवाज में कहा, ‘‘संदीप बराबर वाले कमरे में सो रहा है.’’
मनीष नहीं माना. वह विनीता से जोरजबरदस्ती करने लगा. विनीता ने किसी तरह उसे समझाया. लेकिन अपनी जिद पर अड़े मनीष ने उसे नींद की 6 गोलियां देते हुए कहा कि यह इन्हें तुरंत संदीप को चाय में मिला कर पिला दे.
विनीता मनीष की हरकतों से बुरी तरह ऊब चुकी थी. उसे उस की इन हरकतों से एक दिन परिवार उजड़ जाने का डर लगने लगा था. इसलिए उस ने उस दिन मनीष को अपने रास्ते से हटाने का निर्णय कर लिया और किचन में जा कर मैंगो जूस बनाया, जिस में उस ने नींद की वे सारी गोलियां डाल कर उसे मनीष को पिला दी. कुछ ही देर में मनीष पर गोलियों का असर हुआ तो उस की आंखें झपकने लगीं. जब उसे लगा कि विनीता ने जानबूझ कर नींद की गोलियां उसे दी हैं तो गुस्से में वह विनीता के कपड़े फाड़ने लगा.
विनीता में दबी प्रतिशोध की ज्वाला भड़क उठी. वह घर में रखी कपड़े कूटने वाली मुंगरी उठा लाई और मनीष के सिर पर मारा तो वह बेहोश हो कर गिर पड़ा. इस के बाद उस ने सिलबट्टा उठा कर बेहोश पड़े मनीष के सिर पर दे मारा, जिस से उस का सिर फट गया. इस के बाद उस के सीने पर बैठ कर दोनों हाथों से उस की गरदन तब तक दबाए रखी, जब तक वह मर नहीं गया.
दूसरी ओर सिलबट्टे की आवाज से संदीप की नींद टूट गई थी. जब वह उस कमरे आया तो विनीता ने सारी कहानी उसे बता दी. घर में लाश देख कर संदीप डर गया. वह सिर्फ यही कह रहा था कि अब क्या किया जाए? डरी हुई विनीता ने अपने भाई को फोन कर के घर बुलाया.
हत्या का मामला होने से विनीता के भाई ने हाथ खड़े कर दिए. भाई का सहारा न मिलने के बाद विनीता ने पति की मदद से एक चादर में मनीष की लाश लपेट कर रख दी. रात एक बजे के आसपास दोनों ने लाश को नीचे उतारा और कार की डिक्की में रख कर सनिगंवा की ओर चल पड़े. मौका देख कर गायत्रीनगर में सुनसान देख कर एक खाली प्लौट में लाश फेंक कर घर लौट आए.
पूछताछ के बाद पुलिस ने विनीता और संदीप की निशानदेही पर उन के घर से हत्या में प्रयुक्त मुंगरी, सिलबट्टा, विनीता के फटे कपड़े और कार बरामद कर ली थी. इस के बाद दोनों को 8 जून, 2016 को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी की जमानत नहीं हो सकी थी.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






