Haryana Crime Story. खुशियां तलाशने के लिए रजनी अपने पति पम्मी की आंखों में धूल झोंक कर जीजा बिट्टू के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी थी. पति ने विरोध किया तो रजनी ने जीजा के साथ पति के खिलाफ ऐसी चाल चली कि…
हरियाणा के करनाल शहर के सेक्टर-4 के पास डिवाइडर रोड पर सुबह से ही लोगों के आनेजाने का सिलसिला शुरू हो जाता है. 11 जून, 2016 की सुबह भी लोग उधर से निकले तो सड़क पर खून से लथपथ एक युवक का शव पड़ा दिखाई दिया. उस के ऊपर एक मोटरसाइकिल गिरी पड़ी थी. मामला दुर्घटना का लग रहा था, लेकिन लोगों को इस बात का अंदाजा हो गया था कि युवक की मौत हो चुकी है.
किसी ने इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी तो थाना सिटी के थानाप्रभारी मोहनलाल व चौकीइंचार्ज सतप्रकाश मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने मौका मुआयना किया तो चौंकी, क्योंकि उस युवक की गरदन, चेहरे व हाथ पर किसी धारदार हथियार से काटे जाने के निशान थे. इस के अलावा उस के सिर व चेहरे पर भी किसी भारी चीज से प्रहार किया गया था.
इस से यही लग रहा था कि हत्या को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई थी. किसी भी ऐंगल से वह दुर्घटना का मामला नहीं लग रहा था. खबर मिलने पर डीएसपी विवेक चौधरी भी वहां पहुंच गए थे.
घटनास्थल पर लोगों की भीड़ लग चुकी थी. उन्हीं में से एक ने मृतक युवक की शिनाख्त पम्मी के रूप में कर दी. पम्मी नजदीक की ही कटाबाग कालोनी निवासी सुमेर सिंह का एकलौता बेटा था. पुलिस ने उस के घर खबर भिजवाई तो घर में कोहराम मच गया.
घर वाले रोतेबिलखते घटनास्थल की तरफ चल दिए. इस के बाद तो कालोनी के अधिकांश लोग घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतक की पत्नी रजनी पर तो यह खबर बिजली बन कर गिरी थी. वह दहाड़े मार कर रो रही थी और रोतेरोते बेहोश हो जा रही थी. आसपड़ोस की महिलाएं उसे संभालने की कोशिश कर रही थीं.
पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी कर मोटरसाइकिल को कब्जे में ले कर पुलिस चौकी भिजवाया और लाश को पोस्टमार्टम के लिए कल्पना चावला राजकीय मैडिकल कालेज एवं अस्पताल भिजवा दिया. पुलिस ने मृतक के परिजनों से बात की तो उन्होंने किसी पर हत्या का शक जाहिर नहीं किया. पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली.
मामला हत्या का था, लिहाजा एसपी पंकज नैन ने थानाप्रभारी मोहनलाल को हत्या का जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए. इस जांच में सीआईए फर्स्ट के प्रभारी तेजतर्रार इंसपेक्टर दीपक कुमार को भी लगा दिया गया. दीपक ने पम्मी के घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि पम्मी सीधासादा था. उस का किसी से लड़ाईझगड़ा भी नहीं होता था. जबकि पुलिस ऐसा मानने को तैयार नहीं थी.
बहरहाल, पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि पम्मी की हत्या क्यों और किस ने की, उस की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती थी? मामला लूट का भी नहीं लग रहा था. पुलिस ने इलाके के आपराधिक और शराबी प्रवृत्ति के कुछ लोगों को उठा कर पूछताछ की. लेकिन उन से भी कोई सुराग नहीं मिला. 3 दिन बीत गए, पर पुलिस को हत्यारों से संबंधित कोई क्लू नहीं मिला.
पुलिस ने पम्मी के मोहल्ले के कुछ लोगों से बात की तो एक नई जानकारी यह मिली कि रजनी का जीजा बिट्टू अकसर उस के यहां आया करता था. पम्मी को शक था कि उस की पत्नी रजनी के अपने जीजा से गलत संबंध हैं. इसलिए वह पत्नी से इस बात का विरोध करता था.
यह पता चलने पर पुलिस को मामला कुछकुछ समझ आने लगा. पुलिस ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि रजनी के जीजा का नाम बिट्टू है और वह कुरुक्षेत्र के कस्बा लाडवा में रहता है. सीआईए प्रभारी दीपक कुमार अपनी टीम के साथ लाडवा स्थित बिट्टू के घर पहुंचे और पूछताछ के लिए उसे हिरासत में ले लिया.
पूछताछ में पहले तो उस ने पम्मी की हत्या में अपना हाथ होने से इनकार किया, लेकिन उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई तो वह झूठ के जाल में उलझता चला गया. अंतत: उस ने स्वीकार कर लिया कि पम्मी की हत्या उस ने रजनी के कहने पर अपने दोस्त रामबहादुर की मदद से की थी.
पुलिस टीम रामबहादुर और रजनी के यहां पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर थाने ले आई. जब तीनों से पम्मी की हत्या के बारे में विस्तार से पूछताछ की गई तो हत्या की चौंकाने वाली वजह निकल कर सामने आई.
दरअसल, पम्मी और रजनी का विवाह करीब 11 साल पहले हुआ था. रजनी देखने में सुंदर और तीखे नयननक्श वाली युवती थी. ऐसी खूबसूरत बीवी पा कर पम्मी खुश था. वह थोड़ाबहुत ही पढ़ालिखा था. लिहाजा नौकरी कर के अपने परिवार की आजीविका चलाता था. शादी के बाद वह मातापिता से अलग हो गया था. वक्त के साथ वह 3 बच्चों का पिता भी बन गया था.
घर की माली हालत ऐसी नहीं थी कि पम्मी पत्नी को हर तरह की सुखसुविधाएं उपलब्ध करा सके. जैसेतैसे जिंदगी की गाड़ी चल रही थी. यारदोस्तों की संगत में रह कर पम्मी ने शराब भी पीनी शुरू कर दी थी. रजनी उसे शराब पीने को मना करती थी, क्योंकि पति की यह आदत उस की हसरतों का गला घोंटती नजर आती थी.
रजनी का ही एक जीजा था बिट्टू. वह रसिकमिजाज व्यक्ति था. वह रजनी के यहां आताजाता था. कुछ दिनों से वह रजनी का मुरझाया सा चेहरा देख रहा था. एक दिन उस ने उस से पूछ लिया, ‘‘क्या बात है रजनी, आजकल तुम बड़ी उदास रहती हो. क्या तबीयत ठीक नहीं है?’’
‘‘तबीयत तो ठीक है जीजा,’’ रजनी ने उदासी भरे लहजे में जवाब दिया, ‘‘लेकिन जिन के नसीब में खुशियां नहीं होतीं, वे ऐसे ही रहते हैं.’’
‘‘मतलब… क्या पम्मी तुम्हें खुश नहीं रखता?’’
‘‘उन्हें शराब पीने से फुरसत मिले तब तो ध्यान दे पाएंगे. उन के लिए हम से भी ज्यादा जरूरी शराब है.’’ रजनी ने कहा.
‘‘ऐसी बात है तो मैं उसे समझाऊंगा.’’
‘‘कोई फायदा नहीं जीजाजी, मैं खुद उन्हें समझा कर थक चुकी हूं.’’
बिट्टू उस की बातों से उस के दिल का दर्द समझ गया. उसे अपनी पुरानी चाहत पूरी करने का मौका नजर आया. इसलिए उस ने रजनी के प्रति सहानुभूति दिखा कर समझाया तो वह सामान्य हो गई. रजनी को अपने जीजा की आंखों में अपने लिए चाहत नजर आई.
जब स्वार्थ वाले रिश्तों की सोच मिलती हो तो दिलों को करीब आते देर नहीं लगती. रजनी व बिट्टू के मामले में भी ऐसा ही हुआ. एक दिन मौका मिला तो बिट्टू ने रजनी के सामने अपने मन की बात जाहिर कर दी. रजनी तो पहले ही मन बनाए बैठी थी. फिर तो दोनों ने मर्यादा की दीवार गिरा दी. वे अपनेअपने रिश्तों को भी भूल गए थे. इस के बाद दोनों की मिलने की लालसा बढ़ती गई.
बिट्टू अब अकसर रात को रजनी के यहां रुकने लगा. वह उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. घर पर उस के आते ही रजनी चहकीचहकी रहती थी और उस की जम कर आवभगत करती थी. बिट्टू व पम्मी एक साथ शराब पीते थे. शराब को ले कर अकसर टोकाटाकी करने वाली रजनी ऐसे मौके पर खामोश रहती थी. पम्मी जब पी कर ज्यादा नशे में हो जाता तो देनों अपनी हसरतें पूरी कर लेते. पम्मी इस बात से अनभिज्ञ था कि उस की पत्नी क्या गुल खिला रही है. कभीकभी रजनी बहन से मिलने के बहाने अपने जीजा के घर चली जाती.
यह बात सच है कि तमाम कोशिशों के बाद भी इस तरह के नाजायज रिश्ते छिपाए नहीं जा सकते. आखिर एक दिन पम्मी को यह बात पता चल ही गई कि उस की गैरमौजूदगी में उस का साढ़ू उस के घर आता है. पम्मी को अब इस बात का शक हो गया कि आखिर वह उस की गैरमौजूदगी में ही क्यों आता है. इस बारे में उस ने पत्नी से पूछा तो वह झूठ बोलने लगी, ‘‘बिट्टू जीजाजी जब भी आते हैं, तुम्हारे सामने ही आते हैं. पीछे नहीं आते. किसी ने तुम्हें गलत जानकारी दी है.’’
रजनी ने यह बात बिट्टू को बताई तो दोनों ने कुछ दिनों तक मिलने में एहतियात बरती. लेकिन बाद वह फिर से मिलने लगे. बिट्टू दिन में चोरीछिपे रजनी से मिलने आता और चुपके से निकल जाता.
पम्मी पत्नी और उस के जीजाजी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था. उसे इस बात की पुख्ता जानकारी मिल रही थी कि उस का साढ़ू अभी भी उस के यहां आता है. एक दिन पम्मी घर आ रहा था तो उसे रास्ते में बिट्टू उस के घर की तरफ से आता दिखा. पम्मी का माथा ठनका. उस ने घर पहुंचने पर पत्नी से बिट्टू के बारे में पूछा तो वह साफ मुकर गई, ‘‘लगता है, तुम्हारे दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा है. तभी तो हर वक्त इस तरह की बातें सोचते रहते हो. वह यहां नहीं आए.’’
पम्मी ने अकेले में बच्चों से पूछताछ की तो उन्होंने बता दिया कि मौसाजी आए थे. पत्नी की इस बेगैरती पर उसे और भी गुस्सा आ गया. अपनी गलती मानने के बजाय रजनी उस से बहस करने लगी. इस पर पम्मी ने उस की जम कर पिटाई कर दी. इस के बाद तो पम्मी अकसर शराब पी कर उस की पिटाई करने लगा.
समय रहते यदि गलतियों को सुधार लिया जाए तो अंजाम बुरा नहीं होता. रजनी चाहती तो हालातों को किसी तरह संभाल सकती थी, लेकिन उस के कदम पूरी तरह बहक चुके थे. उस ने जीजा को ही अपनी बाकी की जिंदगी और खुशियों की मंजिल समझ लिया था. दोनों की मोबाइल पर बातें भी होती थीं.
अपने साथ होने वाली मारपीट के बारे में रजनी जब भी बिट्टू को बताती, वह तिलमिला कर रह जाता. रजनी व बिट्टू अपने रिश्ते को अनवरत बनाए रखना चाहते थे, लेकिन पम्मी उन के बीच बड़ी बाधा बन गया था. रजनी ने एक दिन बिट्टू से साफ कह दिया, ‘‘मैं अब और जुल्म नहीं सह सकती, तुम्हें मुझे पाना है तो पम्मी का कोई इंतजाम करना ही होगा.’’
बिट्टू पूरी तरह से अपनी साली रजनी के रंग में रंग गया था. उस ने उस से पम्मी को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का वादा कर लिया. योजना के अनुसार एक दिन बिट्टू पम्मी से मिला और नाटक करते हुए उस ने अपनी गलती मानी. इतना ही नहीं, उस ने अब भविष्य में कोई गलती न करने का वादा भी किया. पम्मी सीधा था. वह उस की बातों में आ गया.
10 जून को बिट्टू ने पम्मी को शराब की दावत दी तो वह खुश हो गया. इस बीच बिट्टू ने लाडवा के ही रहने वाले अपने दोस्त रामबहादुर को पम्मी की हत्या के लिए तैयार कर लिया. इस के लिए दोनों ने एक उस्तरा भी खरीद लिया.
10 जून की शाम पम्मी अपने घर से मोटरसाइकिल में पैट्रोल डलवाने का बहाना कर के निकला और करनाल बस स्टैंड पर पहुंच गया. वहां बिट्टू व रामबहादुर उस का पहले से ही इंतजार कर रहे थे. तीनों ने साथ बैठ कर शराब पी. उन्होंने पम्मी को जानबूझ कर अधिक शराब पिलाई. तब तक रात हो चुकी थी, इसलिए वे उसे छोड़ने के बहाने साथ चल दिए. जब वे डिवाइडर रोड पर पहुंचे तो किसी बहाने से बिट्टू ने उसे रुकने को कहा. उस वक्त सड़क सुनसान थी.
पम्मी रुका तो रामबहादुर ने उसे पकड़ लिया. इस बीच बिट्टू ने उस के चेहरे पर उस्तरे से वार कर दिए. खतरे का अहसास होते ही पम्मी ने विरोध किया. लेकिन शराब के नशे के चलते उस का विरोध हलका रहा. पम्मी नीचे गिरा तो उन्होंने उस के सिर पर वहीं पड़े भारी पत्थर से वार कर दिया. सिर फट जाने से वहां खून ही खून फैल गया और कुछ ही देर में पम्मी ने दम तोड़ दिया.
हत्या के बाद बिट्टू और रामबहादुर ने घटना को दुर्घटना का रूप देने के लिए मोटरसाइकिल उस के शरीर पर गिरा दी, साथ ही खून से सना पत्थर दूर फेंक दिया. इस के बाद दोनों वहां से फरार हो गए. उधर रजनी पूरी हकीकत से वाकिफ थी. अगली सुबह जैसे ही उसे पति की हत्या की खबर मिली, उस ने रोने और बेहोश होने का ड्रामा शुरू कर दिया.
तीनों अभियुक्तों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त उस्तरा व पत्थर बरामद कर लिया और तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
रजनी के कदम न बहके होते और बिट्टू ने साली से रशिकमिजाजी न दिखाई होती तो ऐसी नौबत शायद कभी न आती. उन के अनैतिक रिश्ते ने 2 परिवारों को तो बरबाद किया ही, बच्चों का भविष्य भी दांव पर लगा दिया. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हो सकी थी.
— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






