MP Murder Mystery. आनंद प्रियंका को जंगल में मंगल मनाने के लिए ले गया था, लेकिन उस के विरोध की वजह से वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सका. इस के बाद ऐसा क्या हुआ कि आनंद को प्रियंका का मर्डर करना पड़ा.
मध्य प्रदेश के जिला बैतूल की परसी सतपुड़ा की पहाडि़यों में दूरदूर तक फैली वनसंपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तैनात फौरेस्ट औफिसर दिनरात जंगल पर पैनी नजर रखते हैं. इस के लिए वे जंगल में गश्त करते रहते हैं. 16 नवंबर, 2015 को भी रोज की तरह फौरेस्ट औफिसर एम.एस. राणा और डिप्टी रेंज फौरेस्ट औफिसर अजीत ठाकुर भौंरा बीट इलाके में सघन चेकिंग अभियान के लिए गश्त पर निकले थे.
अधिकारियों की यह टीम घने जंगल में सूखी नदी ढाबे के सामने वाले जंगल में गश्त कर रही थी, तभी मुख्यमार्ग से लगभग 200 मीटर अंदर उन्हें एक मानव कंकाल पड़ा दिखाई दिया. मानव कंकाल का इस तरह मिलना गंभीर मामला था, इसलिए उन्होंने इस बात की सूचना तुरंत थाना शाहपुरा पुलिस को दे दी. सूचना मिलने के बाद थानाप्रभारी राजेंद्र दुर्बे मौके पर पहुंचे और उस मानव कंकाल को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि कंकाल किसी 25-26 साल की युवती का था, जिस की मौत लगभग एक महीने पहले हुई थी. कंकाल के सिर की हड्डियां बुरी तरह से टूटी हुई पाई गई थीं, इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती की हत्या की आशंका व्यक्त की गई थी.
दूसरी ओर कंकाल मिलने की सूचना जब बैतूल के एसपी राकेश जैन को मिली तो उन्होंने इस बात को गंभीरता से लिया और मामले की तह तक पहुंचने के लिए थाना शाहपुरा पुलिस को इस मामले की गंभीरता से जांच का आदेश दिया.
आगे की जांच के लिए मृतका की पहचान जरूरी थी, जो इतनी आसान नहीं थी. लेकिन संयोग से जैसे ही जंगल में युवती के कंकाल के मिलने की खबर अखबारों में छपी, सारणी के शोभापुरी कालोनी का रहने वाला प्रदीप थाना शाहपुरा पहुंचा और थानाप्रभारी राजेंद्र दुर्बे से मिल कर बताया कि उस की 27 वर्षीया बहन प्रियंका पिछले साल 10 अक्तूबर, 2015 से लापता है. उस ने थाने में उस की गुमशुदगी भी दर्ज करा रखी है.
पुलिस ने प्रदीप को कंकाल के पास से मिले कपड़े और दूसरी अन्य चीजें दिखाईं तो उस ने उस सामान की पहचान अपनी बहन प्रियंका के सामान के रूप में कर दी. इस का मतलब जंगल में मिला मानव कंकाल उस की बहन प्रियंका का था.
प्रदीप ने पुलिस को बताया था कि उस की बहन प्रियंका पहले इंदौर में नौकरी करती थी. लेकिन कुछ दिनों बाद वह नौकरी छोड़ कर घर आ गई थी. 10 अक्तूबर को वह कोई प्रतियोगी परीक्षा देने भोपाल गई थी. उसे उसी दिन लौट आना था, लेकिन वह लौट कर नहीं आई.
उस ने मोबाइल पर संपर्क करना चाहा, लेकिन काफी कोशिश के बाद भी संपर्क नहीं हो सका. रात करीब साढ़े 10 बजे प्रियंका का फोन आया कि वह बुधनी के जंगल में है. वह वहां कैसे पहुंची और क्या कह रही, प्रदीप यह पूछना चाहता था. लेकिन उस के सवाल करने से पहले ही फोन कट गया.
उस ने पलट कर फोन किया तो उस का स्विच औफ हो चुका था. जब उस का फोन भी नहीं लगा और न वह लौट कर आई तो प्रदीप अपने घर वालों के साथ तीन दिनों तक जंगल में उस की तलाश करता रहा. जब प्रियंका का कुछ पता नहीं चला तो 14 अक्तूबर, 2015 को उस ने थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी.
प्रदीप के अनुसार, प्रियंका का कंकाल उस की गुमशुदगी के लगभग 40 दिनों बाद मिला था. शिनाख्त होने के बाद जांच में तेजी आ गई. जांच को आगे बढ़ाने के लिए थाना शाहपुरा पुलिस ने सब से पहले प्रियंका के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस से पता चला कि जिस रात प्रियंका लापता हुई थी. उस दिन शाम के 5 बजे से रात के 1 बज कर 39 मिनट तक उस के नंबर पर लगातार एक मोबाइल नंबर से बातें हुई थीं.
पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह मंडीदीप के पास इंडस टाउन के रहने वाले अनिल का निकला. पुलिस ने अनिल को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उस से पुलिस को कोई खास जानकारी नहीं मिली. पुलिस ने प्रियंका के घर वालों से पूछताछ की तो उन का कहना था कि वे अनिल को नहीं जानते. लेकिन प्रियंका की लगातार उस से फोन पर बात हुई थी.
इस का मतलब अनिल और प्रियंका में कोई न कोई संबंध जरूर था. लेकिन पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने अनिल को निर्दोष पाया तो उसे क्लीनचिट दे दी थी.
इस के बाद प्रियंका की हत्या का मामला ठंडे बस्ते में चला गया. लेकिन 7 महीने बाद अचानक प्रियंका का लापता मोबाइल इटारसी के रेलवे स्टेशन इलाके में चालू हो गया तो आरोपी को पकड़ने के लिए भौंरा चौकीप्रभारी कमलेश रघुवंशी, हैडकांस्टेबल शंकर मीणा, सिपाही पूनम तिवारी और गजराज को ले कर इटारसी रेलवे स्टेशन के आसपास की खाक छानने लगे.
काफी मेहनत के बाद यह पुलिस टीम उस आदमी तक पहुंच गई, जिस के पास प्रियंका का मोबाइल फोन था, उस का नाम आनंद तिवारी उर्फ रामस्वरूप चंडाल था. पूछताछ में उस ने बताया था कि वह मूलरूप से सागर जिले के बीना के पास बसे गुनगा गांव का रहने वाला था. इस समय वह इटारसी में रह रहा था.
पहले तो आनंद ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि प्रियंका के साथ जबरदस्ती करने के चक्कर में उस ने प्रियंका की हत्या कर दी थी.
इस की वजह यह थी कि प्रियंका ने उस के साथ संबंध बनाने से मना तो किया ही, बाद में पुलिस में शिकायत करने की धमकी दे दी थी, इसीलिए भारी पत्थर से सिर कुचल कर उस ने उस की हत्या कर दी थी.
इस के बाद थाना शाहपुर पुलिस ने आनंद की निशानदेही पर झाडि़यों से खून सना वह पत्थर बरामद कर लिया था, जिस से प्रियंका की हत्या की की गई थी. पूछताछ में आनंद ने प्रियंका की हत्या की जो कहानी सुनाई थी, इस प्रकार थी.
10 अक्तूबर, 2015 की शाम आनंद इटारसी जाने के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर खड़ा था, तभी उस की नजर प्रियंका पर पड़ी. प्रियंका को अकेली देख कर उस ने उस से बात करने की कोशिश की तो ऐतराज करने के बजाय प्रियंका जल्दी ही उस से खुल गई. प्रियंका को सारणी जाना था, इसलिए आनंद ने उस से अपने साथ इटारसी चलने को कहा.
उस ने उस से कहा कि वहां से वह उसे सड़क के रास्ते उस के घर पहुंचा देगा. प्रियंका उस के साथ जाने को तैयार हो गई. इस की वजह यह थी कि उस समय बैतूल जाने के लिए वहां कोई सीधी ट्रेन नहीं थी. आनंद उसे इटारसी ले आया और वहां से उसे 4 पहिया वाहन से ले कर भौंरा स्थित सूखी नदी ढाबे पर पहुंचा.
दोस्त से मिलने के बहाने आनंद ने प्रियंका को गाड़ी से उतार लिया और जंगल के अंदर ले गया, जहां उस ने प्रियंका से शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा जाहिर की. आनंद की इस हरकत पर वह भड़क उठी. आनंद ने उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, लेकिन उस के विरोध की वजह से वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सका.
अंत में आनंद ने हार मान ली और अपने कपड़े पहनने लगा. तभी प्रियंका ने पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी तो वह डर गया. उसे लगा कि अब इसे खत्म कर देने में ही भलाई है, इसलिए उस ने वहीं पड़ा एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस के सिर पर पटक कर उस की हत्या कर दी. प्रियंका की हत्या कर के वह उस का मोबाइल और अन्य सामान ले कर इटारसी चला गया.
घटना के 8-9 महीने बीत जाने के बाद आनंद को लगा कि पुलिस को इस हत्या के बारे में कुछ पता नहीं चला है, इसलिए उस ने प्रियंका का मोबाइल चालू कर लिया. तब उसे पता नहीं था कि उस की यह गलती उसे इतनी भारी पड़ जाएगी.
पूछताछ के बाद पुलिस ने आनंद तिवारी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.






