Bihar Love Crime Story. गुलशन का अपनी उम्र से आधी से भी कम उम्र के राफे पर दिल आया तो उसे फंसाने में उसे देर नहीं लगी. लेकिन ऐसे संबंधों का परिणाम हमेशा गलत ही हुआ है, इसलिए यहां भी वही हुआ.

7 मार्च, 2016 की सुबह बिहार के जिला भागलपुर के टीएनबी कालेज परिसर में छात्रछात्राओं का आना अभी शुरू हुआ था कि किसी ने कालेज के उत्तर की ओर उगी झाडि़यों में एक महिला की लाश देखी. इस के बाद तो सभी अपनी पढ़ाई भूल कर लाश देखने पहुंच गए. कुछ लेक्चरार और प्रशासन के लोग भी वहां आ गए थे.

कालेज प्रशासन ने इस बात की सूचना थाना विश्वविद्यालय को दी तो थाना परिसर में ही होने की वजह से थानाप्रभारी समरेंद्र कुमार तुरंत पुलिस बल के साथ लाश के पास पहुंच गए. लाश और घटनास्थल के निरीक्षण में उन्होंने देखा कि मृतका के सिर को ईंट से कुचला गया था. लाश के पास ही खून से सनी वह ईंट पड़ी थी.

तीखे नयननक्श वाली वह खूबसूरत युवती सलवारकुरता पहने थी. उस की उम्र 35-36 साल रही होगी. लाश के बालों में एक टूटा हुआ सोने की माला फंसा था, शायद वह खींचने में टूट गया था.

किसी हड़बड़ी की वजह से हत्यारा उसे उठा नहीं सका. घटनास्थल पर संघर्ष के निशान भी दिखाई दे रहे थे. इस का मतलब मृतका ने जान बचाने के लिए काफी संघर्ष किया था. वहां एक जोड़ी हवाई चप्पलें पड़ी थीं, शायद वे मृतका की थीं.

पुलिस का अंदाजा था कि हत्यारों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया होगा और पहचान छिपाने के लिए हत्या कर दी होगी. समरेंद्र कुमार ने घटना की सूचना एसएसपी विवेक कुमार और डीएसपी शहरयार अख्तर को दे दी थी. इसी सूचना के आधार पर ये अधिकारी डौग स्क्वौयड और फोरैंसिक टीम को साथ ले कर घटनास्थल पर आ गए थे.

पुलिस लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश कर रही थी कि तभी एक आदमी हांफता हुआ भीड़ को चीरता लाश के पास पहुंचा और उसे देख कर जोरजोर से रोने लगा. पता चला कि मृतका उस की पत्नी शगुफ्ता थी, जो पिछली रात साढ़े 7 बजे घर से निकली थी तो लौट कर नहीं गई थी.

पूछताछ में पता चला कि उस आदमी का नाम मोहम्मद असलम था. वह थाना तातरपुर के मोहल्ला दाउदचक में रहता था. वह कोई प्राइवेट नौकरी करता था. उस का काफी बड़ा मकान था, जिस में उस ने कई किराएदार रख रखे थे. उस की पत्नी शगुफ्ता परवीन उर्फ गुलशन ही किराए का हिसाब रखती थी.

कल शाम को किसी का फोन आने पर वह यह कह कर घर से निकली थी कि थोड़ी देर में लौट कर आ जाएगी. लेकिन वह गई तो लौट कर नहीं आई. उस का मोबाइल फोन भी बंद हो गया था. उस ने पत्नी की तलाश शुरू कर दी. वह जहांजहां उठतीबैठती थी, रात में ही उस ने उन जगहों पर पता किया, लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला.

इस के बाद वह थाना तातरपुर गया और पत्नी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. रात ज्यादा हो गई तो वह घर लौट गया. सवेरा होते ही एक बार फिर वह बेटियों को किराएदारों की देखरेख में छोड़ कर पत्नी की खोज में निकल पड़ा. वह पत्नी की तलाश में इधरउधर भटक रहा था कि 10 बजे के करीब उसे किसी से पता चला कि टीनएबी कालेज परिसर में एक महिला की लाश मिली है.

लाश के बारे में सुन कर असलम का कलेजा धड़क उठा. पत्नी को ले कर उस के मन में बुरे खयाल आने लगे. वह टीएनबी कालेज की ओर भागा. लाश का चेहरा बुरी तरह कुचला था, इस के बावजूद कपड़ों से वह पहचान गया था. लाश उस की पत्नी गुलशन की थी. असलम रोने लगा. पुलिस ने उसे समझाबुझा कर चुप कराया और पूछताछ शुरू की.

इस पूछताछ में उस ने बताया कि गुलशन अपना मोबाइल ले कर आई थी. लेकिन लाश के पास कोई मोबाइल फोन नहीं मिला था. इस का मतलब हत्यारे उस का मोबाइल फोन साथ ले गए थे.

पुलिस ने काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर जिला अस्पताल भिजवा दिया. गुलशन की लाश थाना विश्वविद्यालय में मिली थी, लेकिन उस की गुमशुदगी थाना तातरपुर में दर्ज थी, इसलिए हत्या के इस मामले की जांच थाना तातरपुर पुलिस को सौंप दी गई. पुलिस ने गुमशुदगी के मामले को हत्या में बदल कर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

थानाप्रभारी अजय कुमार ने जांच की जिम्मेदारी खुद संभाली. अगले दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो पता चला कि हत्या गला दबा कर की गई थी. हत्या करने के बाद सिर को ईंट से कुचला गया था. यह भी पता चला कि उस के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था.

अजय कुमार ने गुलशन के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. उस के नंबर पर जो आखिरी फोन आया था, उस के बारे में पता किया गया तो वह नंबर भी गुलशन के ही नाम था. इस का मतलब हत्यारे गुलशन के करीबी थे. क्योंकि पिछले काफी दिनों से उस नंबर पर गुलशन की दिन में कईकई बार लंबीलंबी बातें होती थीं.

उस दिन उसी नंबर से बात होने के बाद गुलशन घर से निकली थी तो लौट कर नहीं आई थी. हत्या के 2 दिनों बाद भी अजय कुमार के हाथ कोई सुराग नहीं लगा तो उन्होंने मामले के खुलासे के लिए मुखबिरों को लगा दिया. इसी के साथ सूत्र की तलाश में वह मृतका के घर जा पहुंचे.

अजय कुमार ने असलम की बड़ी बेटी शाइस्ता को बुला कर प्यार से पूछा, ‘‘बेटा, तुम्हारे घर में कौनकौन रहता है?’’

‘‘अम्मीअब्बू, हम दोनों बहनें और किराएदार बशीर अंकल.’’

‘‘अब्बू क्या करते हैं?’’

‘‘प्राइवेट नौकरी करते हैं.’’

‘‘अब्बू के घर से जाने के बाद तुम्हारे घर कौनकौन आता था?’’

‘‘अब्बू के जाने के बाद दोपहर के समय अम्मी से मिलने मोहल्ले की कई औरतें आती थीं. वे घंटे, 2 घंटे बैठ कर चली जाती थीं.’’

‘‘इन के अलावा और कौन आता था मिलने?’’

‘‘इन के अलावा राफे भाईजान आते थे.’’

‘‘यह कौन है, कहां रहता है?’’

‘‘हमारे पड़ोस में रहते हैं. अब्बू के जाने के बाद अम्मी अक्सर उन्हें बुला लेती थीं. दोनों खूब हंसहंस कर बातें करते थे.’’

‘‘मम्मी और राफे भाईजान कैसीकैसी बातें करते थे?’’ अजय कुमार ने पूछा तो शाइस्ता इस सवाल का जवाब नहीं दे सकी. इस के बाद उन्होंने असलम से पूछताछ की. लेकिन उस से भी कुछ खास पता नहीं चला. इस पूछताछ में यह जरूर पता चला कि असलम और गुलशन के बीच किसी बात को ले कर अनबन चल रही थी. असलम पत्नी से खुश नहीं था, यह उस की बातचीत में भी झलक रहा था.

शाइस्ता से जो जानकारी मिली थी, उसी को आधार बना कर अजय कुमार ने जांच आगे बढ़ाई. उन्होंने राफे को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. वह अभी लड़का ही था. उस की उम्र 15-16 साल रही होगी. इसलिए उसे देख कर वह हैरान रह गए.

उन्होंने उस पर एक सरसरी नजर डाल कर उस की आंखों में आंखें डालीं तो उस ने अपनी नजरें झुका लीं. उस के चेहरे का रंग सफेद पड़ गया. इस से उन्हें समझते देर नहीं लगी कि दाल में कुछ काला जरूर है. उन्होंने गुलशन की हत्या से जुड़े कुछ सवाल किए तो उन के जवाब देने में उस की जुबान लड़खड़ा गई.

अजय कुमार उसे ले कर काफी हैरान थे. इस की वजह यह थी कि राफे और गुलशन की उम्र में दूने का अंतर था. मासूम और भोलाभाला सा दिखने वाला राफे आखिर गुलशन की हत्या क्यों करेगा? लेकिन उस के चेहरे के उड़े रंग और लड़खड़ाती जबान ने उस पर शक करने के लिए मजबूर कर दिया था.

उन्होंने अपने मुखबिरों से उस पर नजर रखने को कहा और उसे घर भेज दिया. मुखबिरों ने अजय कुमार को जो बताया, उसे सुन कर वह हैरान रह गए. पता चला कि मोहम्मद राफे के अपनी उम्र से दोगुनी उम्र की गुलशन से कई महीनों से मधुर संबंध थे.

इसी संबंध की वजह से गुलशन ने अपने नाम से सिम खरीद कर उसे बात करने के लिए दिया था. इधर कुछ दिनों से दोनों के बीच किसी बात को ले कर तनाव चल रहा था, जिस से राफे उस से दूर भाग रहा था. राफे की यही दूरी गुलशन से सहन नहीं हो रही थी.

मुखबिरों से मिली जानकारी हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए काफी थी. इस के बाद पुलिस ने इस बात का पता लगा लिया कि घटना वाली रात मोहम्मद राफे किसी लड़के के साथ टीएनबी कालेज परिसार में देखा गया था. पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटा कर राफे को पूछताछ के लिए एक बार फिर थाने बुला लिया.

राफे के थाने आने पर पूछताछ के लिए एसएसपी विवेक कुमार भी थाने आ गए. अधिकारियों द्वारा की गई पूछताछ में राफे ने छकाया तो बहुत, लेकिन अंतत: उसे गुलशन की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करना पड़ा. उस ने बताया कि उसी ने अपने दोस्त मोहम्मद आसिफ उर्फ श्यादे की मदद से गुलशन की हत्या की थी. क्योंकि उस ने उसे इस तरह मजबूर कर दिया था कि उस की हत्या के अलावा उस के पास कोई दूसरा उपाय नहीं बचा था. उस ने गुलशन की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी.

35 वर्षीया शगुफ्ता परवीन उर्फ गुलशन बिहार के जिला भागलपुर के थाना तातरपुर के मोहल्ला दाउदचक में पति मोहम्मद असलम और 2 बेटियों के साथ रहती थी. वह खूबसूरत तो थी ही, इस के अलावा उस के शरीर की बनावट ऐसी थी कि 2 बेटियों की मां होने के बावजूद वह लड़की लगती थी.

इस के अलावा वह शौकीन भी काफी थी, जिस से हमेशा सजधज कर रहती थी. जबकि उस का पति असलम उस के एकदम उलटा था. वह चमकदमक से दूर एकदम सादगी से रहता था. जबकि धनदौलत की उस के पास कमी नहीं थी.

उस का 2 मंजिला आलीशान मकान था, जिस का निचला हिस्सा उस ने किराए पर पर उठा रखा था. किराए से उसे ठीकठाक आमदनी हो रही थी. वह खुद भी इतना कमा लेता था कि परिवार का खर्च आराम से चल जाता था.

कामधाम की वजह से असलम ज्यादातर घर के बाहर ही रहता था. इस बीच घर में क्या होता है, कौन आता है और कौन जाता है उसे कुछ पता नहीं चलता था. उस के किराएदारों में एक मोहम्मद बशीर भी था. कसरती शरीर का 35 साल का बशीर खूबसूरत और गबरू जवान था. अभी उस का निकाह भी नहीं हुआ था.

गुलशन का दिल बशीर पर आ गया. उसे पाने के लिए मन मचला तो गुलशन उसे अपने कमरे में बुलाने लगी.

जल्दी ही बशीर को पता चल गया कि मकान मालकिन क्या चाहती है? मिलन की आग दोनों तरफ भड़की तो एक दिन दोनों ने मिल कर उस दिन को यादगार बना दिया. स्त्रीदेह का आनंद पा कर बशीर गुलशन का दीवाना हो गया. इस तरह सालों तक दोनों के बीच मधुर संबंध बने रहे. इस की भनक असलम को नहीं लग पाई.

गुलशन के पड़ोस में ही मोहम्मद राफे रहता था. गोराचिट्टा राफे देखने में काफी खूबसूरत लगता था. वह 10वीं में पढ़ता था. भाईबहनों में वह सब से छोटा था. उस के अब्बू प्राइवेट नौकरी करते थे. दोनों परिवारों में खूब पटती थी, इसलिए राफे अकसर गुलशन के घर आता रहता था. गुलशन से उस की पटती भी खूब थी.

रंगीनमिजाज गुलशन की नीयत राफे को देख कर खराब हो गई. जबकि उस के मन में क्या चल रहा है, राफे इस से अंजान था, राफे उसे भाभी कहता था, इसलिए गुलशन उस से मजाक ही नहीं करने लगी, बल्कि छेड़छाड़ भी करने लगी. एक दिन दोपहर को जब बेटियां स्कूल में थी तो राफे आ गया. अच्छा मौका देख कर गुलशन ने उसे भी वह सुख दे दिया, जो उसे अभी तक नहीं मिला था.

राफे के जीवन में आते ही गुलशन ने बशीर को लिफ्ट देना कम कर दिया. अब वह उस के बजाय राफे के बारे में ज्यादा सोचने लगी. राफे से वह हर घड़ी बात करना चाहती थी, इसलिए उस ने उस के लिए मोबाइल फोन ही नहीं खरीद दिया, अपने नाम से सिम भी खरीद कर दे दिया. मोबाइल हो जाने से गुलशन जब चाहती, उस से बातें कर लेती. उस का मोबाइल गुलशन ही रिचार्ज कराती थी.

गुलशन राफे पर इस कदर फिदा थी कि वह उस से भाग चलने को कहने लगी. राफे भले ही गुलशन को चाहता था, लेकिन इस का मतलब यह नहीं था कि वह अपनी उम्र से दोगुनी औरत को ले कर भाग जाता. उस ने उस के साथ भागने से मना कर दिया. गुलशन ने राफे को भाग चलने के लिए काफी मनाया, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ.

इस पर गुलशन ने उसे धमकाया कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो वह उसे मोहल्ले में यह कह कर बदनाम कर देगी कि उस ने उस के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की है. इस के बाद उस का क्या होगा, वह अच्छी तरह जानता है.

गुलशन की इस धमकी से राफे डर गया और उस ने उस के घर आना बंद कर दिया. यही नहीं, उस ने अपने संबंधों की बात गुलशन की बड़ी बेटी शाइस्ता से बता भी दिया. लेकिन जब शाइस्ता ने कहा कि उसे सब पहले से ही पता है तो वह हैरान रह गया. उस की हैरानी तब और बढ़ गई, जब शाइस्ता ने बताया कि उस की अम्मी ने उस धमका रखा था, इसलिए उस ने किसी से यह बातें नहीं बताईं.

राफे ने गुलशन द्वारा दी गई धमकी की बात अपने दोस्त मोहम्मद आसिफ उर्फ श्यादे को बताई तो उस ने कहा कि उस के जीतेजी उसे उस से छुटकारा नहीं मिल सकेगा. इसी बात पर राफे ने गुलशन की हत्या का इरादा बना कर उस से मदद मांगी. वह उस का जिगरी दोस्त था. दोनों एक ही स्कूल में साथसाथ पढ़ते भी थे. राफे दसवीं में था और आसिफ बारहवीं में. दोनों अगलबगल रहते भी थे. श्यादे को दोनों की प्रेमकहानी का पता पहले से था, इसलिए श्यादे उस की मदद को तैयार हो गया. काफी सोचविचार कर राफे और श्यादे ने गुलशन को कहां मारना है, यह भी तय कर लिया. अब उन्हें मौके की तलाश थी.

गुलशन राफे से बात करना चाहती थी, लेकिन वह उस का फोन रिसीव ही नहीं कर रहा था. जबकि वह उस से मिलने के लिए बेचैन थी. 5 मार्च, 2016 की शाम 5 बजे के करीब गुलशन ने राफे को फोन किया तो उस ने उस का फोन रिसीव नहीं किया. थोड़ी देर बाद उस ने खुद गुलशन को फोन कर के टीएनबी कालेज बुला लिया.

राफे से बात होने के बाद उस से मिलने को बेचैन गुलशन ने शाइस्ता से थोड़ी देर में लौटने को कहा और घर से निकल कर रिक्शे से टीएनबी कालेज जा पहुंची. कालेज के गेट पर ही राफे अपने दोस्त आसिफ उर्फ श्यादे के साथ खड़ा था. गुलशन आई तो तीनों दीवार फांद कर अंदर गए और पैदल चलते हुए सुनसान झाडि़यों के बीच पहुंच गए.

गुलशन को यह कुछ अजीब लगा. वह पूछने के लिए पलटी तो राफे ने उसे अपनी मजबूत बांहों से पकड़ कर जमीन पर पटक दिया. उस के गिरते ही आसिफ ने उस के दोनों पैरों को अपने हाथों से पकड़ लिया तो राफे ने उस का गला पकड़ लिया.

गुलशन ने गला छुड़ाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हुई. आखिर राफे उस की जान लेने में कामयाब हो गया. उसे इतने पर भी संतोष नहीं हुआ. उस ने वहीं पड़ी ईंट उठा कर उस के सिर पर कई वार कर दिए. जब उसे भरोसा हो गया कि गुलशन के बचने की अब कोई उम्मीद नहीं है तो उस ने उस के गले की माला खींचना चाहा.

संयोग से माला टूट गया तो आधा हिस्सा गुलशन के बालों में उलझ कर रह गया. आधा माला और उस का मोबाइल वह साथ लेता गया, ताकि पुलिस उस तक पहुंच न सके. वहां से दोनों अपनेअपने घर चले गए. मोबाइल उन्होंने एक नाले में फेंक दिया जिस से किसी को उन पर शक न हो. लेकिन कानून के हाथों से वे बच नहीं सके.

पुलिस ने राफे के घर से गुलशन का आधा माला बरामद कर लिया. लेकिन बहुत ढूंढने पर भी नाले से गुलशन का मोबाइल फोन नहीं मिला. पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें बालसुधार गृह भेज दिया गया. इस तरह एक औरत की अय्याशी में 2 बच्चों की जिंदगी बरबाद हो गई, जिन्होंने अभी जिंदगी के सही मायने भी नहीं समझे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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