True Crime Story. सत्येंद्र की हत्या के मामले में पुलिस ने जल्दबाजी में एक ऐसे प्रतिष्ठित आदमी को जेल भेज दिया, जिस की इस मामले में कोई भूमिका नहीं थी. पुलिस की इस लापरवाही से उन्हें 3 महीने जेल में तो रहना ही पड़ा, बदनामी हुई अलग से…
3 साल पहले जितेंद्र अग्निहोत्री ने मकान का ग्राउंड फ्लोर महिंद्रा वालों को किराए पर दिया था, जिस में महिंद्रा वालों ने सोमालिका एजेंसी के नाम से अपना शोरूम खोला था. नीचे महिंद्रा का शोरूम था, ऊपर वाले हिस्से में जितेंद्र खुद पत्नी और बेटे के साथ रहते थे. वह किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे, इसलिए सुबह निकलते थे तो शाम को ही लौटते थे.
पिछले साल शोरूम के मैनेजर के रूप में कंपनी ने सत्येंद्र शर्मा को भेजा. वह अलीगढ़ के रहने वाले थे. सन 2000 से वह महिंद्रा में नौकरी कर रहे थे. उन की गिनती कंपनी के विश्वसनीय कर्मचारियों में थी. हाथरस में वह रामननगर में किराए का मकान ले कर पत्नी और बच्चों के साथ रहते थे.
सत्येंद्र शर्मा स्मार्ट तो थे ही, उन का व्यक्तित्व भी काफी आकर्षक था. इसी वजह से वह किसी को भी पल भर में अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे. लेकिन मकान मालिक जितेंद्र अग्निहोत्री उन से काफी खफा रहते थे. कभी वह भी उन से काफी प्रभावित थे. यही वजह थी कि दोनों का उठनाबैठना तो होता ही था, जबतब सत्येंद्र उन के घर भी आतेजाते रहते थे.
पहले जितेंद्र सत्येंद्र को जब अपने घर बुलाते थे, तभी वह उन के घर जाते था. लेकिन बाद में वह उन की अनुपस्थिति में भी उन के घर आनेजाने लगे थे. इस की वजह यह थी कि जितेंद्र की पत्नी निधि से भी उन की बातचीत ही नहीं होने लगी थी, बल्कि दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी.
जितेंद्र की अनुपस्थिति में जब सत्येंद्र उन के घर जाते, घंटों बैठ कर निधि से बातें करते रहते. उस समय उन दोनों के अलावा घर में कोई और नहीं होता था, इसलिए दोनों खुल कर हर तरह की बातें करते थे. अगर किसी वजह से सत्येंद्र ऊपर न जा पाते तो दोनों फोन पर बातें कर लेते थे.
बातचीत का सिलसिला बढ़ा तो कुछ और ही रूप लेने लगा. इस की वजह यह थी कि सत्येंद्र के मन में निधि के लिए कुछ और ही विचार आने लगे थे, जिसे कहने से वह डर रहे थे. लेकिन दिल में कोई बात आ जाए तो आदमी उसे ज्यादा दिनों तक दबा कर भी नहीं रख पाता. आखिर एक दिन सत्येंद्र ने निधि से दिल की बात कह ही दी, ‘‘निधि, मैं तुम से प्यार करने लगा हूं.’’
निधि के मन में भी कुछ ऐसा ही था, इसलिए उस ने सहज रूप से सत्येंद्र के प्यार को स्वीकार कर लिया. तब शायद वह यह भूल गई थी कि वह शादीशुदा ही नहीं, एक बच्चे की मां भी है. उस ने यह भी नहीं सोचा कि इस नाजायज संबंध का उस की बसीबसाई गृहस्थी पर क्या असर पड़ेगा?
निधि ने सारी मर्यादाओं, शरमलिहाज को ताक पर रख कर सत्येंद्र से नाजायज संबंध बना लिए. नौकरी की वजह से दिन भर बाहर रहने वाले जितेंद्र को भनक तक नहीं लगी कि जिसे वह दोस्त मानता है, उस ने उस के दांपत्य में सेंध लगा दी है. इस गलत काम में वह भी शामिल है, जिस का उस से विश्वास का रिश्ता है. जिस ने जिंदगी भर ईमानदारी से रिश्ते को निभाने की कसमें खाई हैं.
जैसेजैसे दिन बीत रहे थे, निधि और सत्येंद्र की हिम्मत बढ़ती जा रही थी. दोनों खुल कर मिलने लगे थे. मौका मिलने पर दोनों घूमने भी निकल जाते थे. सत्येंद्र की अपनी कार थी ही, इसलिए उस के साथ जाने में निधि को कोई परेशानी भी नहीं होती थी.
निधि का संबंध सत्येंद्र से बना तो वह जितेंद्र के प्रति लापरवाह होने लगी. उस के व्यवहार में आए बदलाव को जितेंद्र महसूस भी कर रहा था, पर ऐसा क्यों हो रहा है, इस बात का पता उसे नहीं चल रहा था. जबकि निधि कुछ और ही सपने देख रही थी, इसलिए वह पति के बजाय प्रेमी पर ज्यादा ध्यान देने लगी थी.
हालांकि उसे पता था कि उस के इस प्यार का कोई भविष्य नहीं है. क्योंकि वह भी शादीशुदा और एक बच्चे की मां थी तथा उस का प्रेमी सत्येंद्र भी. इस के बावजूद वह दिल पर काबू नहीं रख पा रही थी. वही हाल सत्येंद्र का भी था.
दोनों ही परिणाम की चिंता किए बगैर एकदूसरे के प्यार में डूबे थे. शायद इसीलिए किसी दिन निधि ने सत्येंद्र से पूछा, ‘‘सत्येंद्र, हम दोनों के बीच जो रिश्ता है, इस का भविष्य और मतलब क्या है?’’
‘‘निधि, कुछ रिश्तों का न कोई मतलब होता है और न भविष्य. फिर भी वे बेनामी रिश्ते चलते रहते हैं.’’ जवाब में सत्येंद्र ने कहा.
‘‘क्या तुम मुझे हमेशा इसी तरह प्यार करते रहोगे?’’
‘‘क्यों नहीं निधि, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मैं कहीं भी रहूंगा, तुम्हें हमेशा इसी तरह प्यार करता रहूंगा, क्योंकि तुम्हारी छवि मेरी आंखों में ही नहीं, दिल में इस तरह बस चुकी है कि अब यह धूमिल नहीं हो सकती.’’ सत्येंद्र ने कहा.
ये ऐसी बातें हैं, जिन्हें हर प्रेम करने वाला कहता है, जबकि ऐसे मामलों में हकीकत कुछ और ही होती है. दूसरी ओर पत्नी के व्यवहार और उदासीनता से जितेंद्र बेचैन था. कारण उस की समझ में नहीं आ रहा था. वह इसी सोच में डूबा था कि एक दिन उस के किसी शुभचिंतक ने उसे बताया कि उस ने उस की पत्नी को सत्येंद्र की गाड़ी में उस के साथ जाते देखा था.
यह ऐसी बात थी, जिसे सुन कर कोई भी पति बेचैन हो उठता. जितेंद्र भी बेचैन हो उठा. उस ने घर आते ही निधि से पूछा, ‘‘तुम सत्येंद्र के साथ कहीं बाहर गई थी क्या?’’
‘‘नहीं तो, मैं उस के साथ बाहर क्यों जाऊंगी?’’ निधि ने सत्येंद्र के साथ जाने की बात से साफ मना कर दिया.
निधि ने भले ही सत्येंद्र के साथ जाने से मना कर दिया था, लेकिन जितेंद्र जानता था कि पत्नी झूठ बोल रही है, क्योंकि जिस ने यह बात बताई थी, वह झूठ नहीं बोल सकता था. एक तो वह पत्नी के व्यवहार से पहले से ही शक कर रहा था, उस के इस झूठ से उस का शक और बढ़ गया. एक दिन वह दोपहर में अचानक घर आ गया. संयोग से उस समय सत्येंद्र उस के घर में बैठा था. उसे अपने घर में बैठा देख कर जितेंद्र ने पूछा, ‘‘भाई, तुम यहां कैसे?’’
जितेंद्र के इस सवाल पर सत्येंद्र हड़बड़ा गया. बात को संभालने की कोशिश करते हुए उस ने कहा, ‘‘ऐसे ही निधि से मिलने चला आया था.’’
‘‘लेकिन आज के बाद मेरी अनुपस्थिति में तुम मेरे घर बिलकुल मत आना. मैं नहीं चाहता कि तुम मेरी पत्नी से मिलो. तुम्हारी दोस्ती मुझ से है, न कि मेरी पत्नी से. मुझे लगता है कि तुम दोस्ती का नाजायज फायदा उठा रहे हो. यह ठीक नहीं है.’’ जितेंद्र ने कहा.
जितेंद्र की बातों से सत्येंद्र को समझते देर नहीं लगी कि उसे उस पर शक हो गया है. वह तुरंत वहां से चला गया. उस के जाने के बाद निधि ने कहा, ‘‘तुम्हें सत्येंद्र से इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी.’’
‘‘क्या कहा,’’ जितेंद्र गुस्से में बोला, ‘‘वह मेरा रिश्तेदार है, जो उसे बुला कर घर में बैठाती हो?’’
इसी के साथ जितेंद्र ने निधि को 2-4 तमाचे जड़ दिए. इस के बाद निधि और जितेंद्र के संबंधों में खटास आ गई. जितेंद्र ने कभी गलती से भी नहीं सोचा था कि निधि उस के साथ बेवफाई कर सकती है. सत्येंद्र का उस के घर भले ही आनाजाना बंद हो गया था, लेकिन फोन से निधि से उस की बातें होती रहती थीं. मौका मिलने पर घर के बाहर उन की मुलाकातें भी हो जाती थीं.
जितेंद्र भोला नहीं था. वह जानता था कि ऐसे संबंधों में लोग इतने ढीठ हो जाते हैं कि उन्हें कितना भी समझाया जाए, रोका जाए, वे अपनी आदत से बाज नहीं आते. ऐसे लोगों को न घरपरिवार की इज्जत का खयाल रहता है न बच्चों और पति का. ये इतने स्वार्थी हो जाते हैं कि इन्हें सिर्फ अपना स्वार्थ दिखाई देता है. इसलिए उसे लगता था कि सत्येंद्र निधि का पीछा आसानी से नहीं छोड़ेगा.
यही सब सोच कर जितेंद्र ने निधि को स्पष्ट धमकी दे दी थी कि अगर उस ने सत्येंद्र से किसी भी तरह का संबंध रखा तो वह उस से अपने संबंध खत्म कर लेगा. पति की इस धमकी से निधि बुरी तरह डर गई थी. वह सत्येंद्र के साथ अपनी नई गृहस्थी बसाने के सपने देख रही थी, लेकिन जब उस ने यह बात सत्येंद्र से कही तो उस ने कहा, ‘‘निधि, मेरा बसाबसाया घरपरिवार है, मैं उसे कैसे उजाड़ सकता हूं.’’
‘‘यह तुम्हें मुझ से संबंध बनाने से पहले सोचना चाहिए था. जब तुम्हें अपनी बीवी और बच्चों की इतनी ही चिंता थी तो मुझ से संबंध क्यों बनाया था?’’ निधि गुस्से में बोली.
‘‘इस में जितना दोष मेरा है, उतना ही तुम्हारा भी, इसलिए तुम सारा दोष मेरे अकेले पर नहीं डाल सकती.’’ सत्येंद्र ने कहा.
सत्येंद्र की इस बात से निधि को गहरा झटका लगा. वह समझ गई कि अगर अब उस ने सत्येंद्र को नहीं छोड़ा तो वह कहीं की नहीं रहेगी, क्योंकि पति ने पहले ही धमकी दे दी थी कि अगर उस ने सत्येंद्र से किसी तरह के संबंध रखे तो वह उस से संबंध खत्म कर लेगा. जबकि प्रेमी उस से सिर्फ मतलब का संबंध रखने की बात कर रहा था. निधि अब सत्येंद्र से पीछा छुड़ाना चाहती थी. जबकि सत्येंद्र उस का पीछा छोड़ना नहीं चाहता था.
जितेंद्र को लगा कि सत्येंद्र से छुटकारा मिलना आसान नहीं है तो उस ने एजेंसी के मालिक से शिकायत कर दी कि सत्येंद्र की हरकतें ठीक नहीं हैं, इसलिए उस का तबादला कहीं दूसरी जगह करा दें.
एजेंसी के मालिक के सामने भी जितेंद्र और सत्येंद्र में कई बार कहासुनी हो चुकी थी, इसलिए उस ने सत्येंद्र का तबादला अलीगढ़ की ही सासनी स्थित दूसरी ब्रांच में करा दिया. सासनी आने के बाद सत्येंद्र का निधि से मिलना मुश्किल हो गया.
निधि भी अब उस से मिलना नहीं चाहती थी. यही वजह थी कि जब उस ने निधि से मिलने को कहा तो उस ने मिलने से साफ मना करते हुए कहा, ‘‘उन संबंधों का कोई मतलब नहीं है, जो रेत की नींव पर टिके हों. तुम्हें मेरी भावनाओं से नहीं सिर्फ शरीर से मतलब है. जो मेरी भावनाओं की कद्र न करे, उस के लिए यह शरीर भी नहीं है.’’
निधि इस तरह बदल जाएगी, सत्येंद्र ने कभी नहीं सोचा था. निधि के इस व्यवहार ने उसे क्षुब्ध कर दिया. जबकि दूसरी ओर निधि ने तय कर लिया था कि अब वह कभी भी सत्येंद्र से नहीं मिलेगी. वह समझ गई थी कि सत्येंद्र उस के प्रति जरा भी गंभीर नहीं है. वह उसे सिर्फ मौजमस्ती के लिए इस्तेमाल कर रहा है.
जनवरी के पहले सप्ताह में कुछ लोगों ने मंडी समिति के पीछे साईं धाम कालोनी में एक लाश देखी तो इस की सूचना थाना हाथरस गेट पुलिस को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी राजेश्वर प्रसाद त्यागी पुलिस बल ले कर घटनास्थल पर आ पहुंचे. लाश के निरीक्षण में उन्होंने देखा कि लाश के गले में अंगौछा बंधा है. इस का मतलब था कि हत्या उसी अंगौछे से गला घोंट कर की गई थी.
लाश की तलाशी में पैंट की जेब से कार की चाबी, कुछ सिक्के और सिगरेट का एक पैकेट मिला. वहां मौजूद लोगों में से कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर सका. इस के बाद घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया तो वहां कुछ लोगों ने उस की शिनाख्त अलीगढ़ के थाना हसायन के तरसरा के रहने वाले सत्येंद्र शर्मा के रूप में कर दी.
शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने सत्येंद्र के घर वालों को हत्या की सूचना दी तो उन के भाई सचिन और मुकेश घर के अन्य लोगों के साथ अस्पताल आ पहुंचे और लाश की पहचान अपने भाई के रूप में कर दी. सभी का रोरो कर बुरा हाल था. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर सत्येंद्र की किसी से क्या दुश्मनी थी, जो उस ने उन की हत्या कर दी.
राजेश्वर प्रसाद त्यागी ने घर वालों से पूछताछ की तो सचिन ने बताया कि भाई साहब 11 बजे अपनी आल्टो कार से घर में भाभी से यह कह कर निकले थे कि वह जितेंद्र अग्निहोत्री और अश्विनी सूरी से मिलने जा रहे हैं. उन लोगों ने फोन कर के उन्हें मिलने के लिए बुलाया है.
देर रात तक जब वह घर नहीं लौटे तो घर वालों ने उन्हें फोन किया, लेकिन उन का फोन औफ था. जिस से बात नहीं हो सकी. बात न होने से सभी परेशान हो उठे. वे थाने जाने के बारे में सोच रहे थे कि उन्हें सत्येंद्र की हत्या की सूचना मिली.
इस के बाद पुलिस अपनी काररवाई पूरी कर थाने आई तो सचिन ने सत्येंद्र की हत्या का मुकदमा जितेंद्र अग्निहोत्री और अश्विनी सूरी के खिलाफ दर्ज करा दिया.
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस जितेंद्र अग्निहोत्री और अश्विनी सूरी को पूछताछ के लिए थाने ले आई. अश्विनी सूरी हाथरस के जानेमाने व्यक्ति थे, इसलिए पुलिस जब उन्हें हिरासत में ले कर थाने ले आई तो जानने वालों को बड़ी हैरानी हुई.
थाने आने पर जब उन्हें पता चला कि वह हत्या जैसे संगीन मामले में फंसे हैं तो वह फूटफूट कर रोने लगे. उन्होंने पुलिस से बहुत कहा कि हत्या के इस मामले से उन का कोई लेनादेना नहीं है. इस के बावजूद पुलिस कुछ सुनने को तैयार नहीं थी. जबकि शहर के तमाम प्रतिष्ठित लोगों ने ही नहीं, कुछ नेताओं ने भी उन की सिफारिश करते हुए उन्हें निर्दोष बताया, इस के बावजूद पुलिस ने उन्हें नहीं छोड़ा.
दरअसल, अश्विनी सूरी ने जितेंद्र की बिल्डिंग के बगल वाले प्लौट में शोरूम बनवाया था, जिस में उन्होंने कशिश टायर वर्ल्ड के नाम से टायरों की दुकान खोली थी. जब यह शोरूम बन रहा था, उन का जितेंद्र के साथ काफी उठनाबैठना था. इसी वजह से पुलिस ने आरोप लगाया था कि निधि के सत्येंद्र से ही नहीं, अश्विनी सूरी से भी नाजायज संबंध थे. इसी वजह से सत्येंद्र की हत्या में अश्विनी सूरी ने साथ दिया था.
अश्विनी सूरी पर पुलिस ने जो आरोप लगाया था, उस का पुलिस को कड़ा विरोध झेलना पड़ा था, इस के बावजूद पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया था. पुलिस का कहना था कि सत्येंद्र ने जब निधि को साथ ले जाने से मना किया तो निधि ने उस से संबंध रखने से साफ मना कर दिया. इस के बाद भी सत्येंद्र निधि को संबंध बनाए रखने के लिए मजबूर करता रहा. जब निधि किसी भी कीमत पर तैयार नहीं हुई तो सत्येंद्र ने धमकी दी कि उस के पास निधि के कुछ ऐसे फोटो हैं, जिन्हें वह सब को दिखा देगा तो वह किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी. यही नहीं, वह उस के चेहरे पर तेजाब फेंक कर उस का चेहरा भी बिगाड़ देगा. सत्येंद्र की इन्हीं धमकियों से तंग आ कर जितेंद्र ने उसे रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. इस के बाद अश्विनी सूरी और पत्नी की मदद से जितेंद्र ने उस की हत्या कर दी.
पुलिस की इस कहानी को अश्विनी सूरी ने एकदम झूठी करार दिया था. वह खुद को निर्दोष कह ही रहे थे, शहर के भी तमाम लोग उन्हें निर्दोष मानते हुए पुलिस पर बराबर दबाव बना रहे थे कि उन्हें किसी तरह छुड़वाया जाए. उसी बीच नए एसपी अजयपाल शर्मा आए तो जब लोगों ने उन से इस मामले की जांच दोबारा करवाने को कहा तो स्थितियों को देखते हुए उन्होंने इस मामले की जांच दोबारा करवाई.
पुलिस ने इस मामले के हर पहलू पर बारीकी से जांच की तो पता चला कि अश्विनी सूरी जितेंद्र अग्निहोत्री के साथ उठतेबैठते जरूर थे, लेकिन उन का न तो निधि से कोई संबंध था और न ही इस हत्या में उन की कोई भूमिका थी. इस बार जांच में पुलिस को पता चला कि घटना वाली रात निधि के पिता संघेश उस के घर पर ठहरे थे.
पुलिस ने संघेश को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की तो उस ने सत्येंद्र की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि बेटीदामाद के बीच तनाव को देखते हुए उस ने यह कदम उठाया था. निधि सत्येंद्र से किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहती थी, जबकि वह उसे बदनाम करने की धमकी दे कर उसे ब्लैकमेल कर रहा था.
उस दिन वह गंगा स्नान कर के लौटा तो रात निधि के घर रुक गया. रात में अचानक उस की आंखें खुलीं तो उसे निधि के कमरे से आवाजें आती सुनाई दीं. वह उधर गया तो उस ने निधि के कमरे में सत्येंद्र को देखा. वह निधि के साथ आपत्तिजनक स्थिति में था. उस दृश्य को देख कर वह सन्न रह गया. इस के बाद गुस्से में उस ने अपने अंगौछे से सतयेंद्र का गला घोंट दिया.
गुस्से में उस ने सत्येंद्र की हत्या तो कर दी, लेकिन लाश देख कर वह बुरी तरह डर गया. इस के बाद निधि और जितेंद्र के साथ मिल कर वह लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचने लगा. काफी सोचविचार कर निधि और जितेंद्र ने लाश को उस की कार में रख दिया, तो वह उसे ले जा कर समिति के पास स्थित साईं धाम कालोनी में फेंक आया. इस के बाद वह उस की कार को ले जा कर चमन बिहार में खड़ी कर आया और अपने घर चला गया.
संघेश के इस बयान से साफ हो गया कि सत्येंद्र की हत्या में अश्विनी सूरी की कोई भूमिका नहीं थी. इस के बाद पुलिस ने अश्विनी सूरी को निर्दोष करार दे दिया. लेकिन निर्दोष होते हुए भी उन्हें 18 अप्रैल तक यानी 3 महीने जेल में रहना पड़ा. पुलिस ने जल्दबाजी में एक निर्दोष को जेल भेज कर 3 महीने तक जेल में रख कर दंड तो भोगवाया ही, बदनामी कराई अलग से.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






