Agra Murder Case. जिस प्यार की खातिर मोइनुद्दीन ने अपना बसाबसाया घर बरबाद कर दिया, बाद में उन का वही प्यार उन के लिए मौत बन गया.

23 मई को आगरा के थाना ताजगंज के फेज वन के रहने वाले हाजी मोइनुद्दीन की पत्नी चांदनी बेगम ने थाने जा कर पति की गुमशुदगी दर्ज कराते हुए बताया कि 17 मई को वह बंगलुरु जाने को कह कर घर से निकले थे, लेकिन उस के बाद से न उन का कोई फोन आया है और न उन का कुछ हालचाल मिला है. इधर से फोन किया जाता है तो फोन बंद बताता है. कहीं उन का अपहरण तो नहीं हो गया है?

पुलिस ने मोइनुद्दीन की गुमशुदगी दर्ज कर काररवाई का आश्वासन दे कर चांदनी बेगम को घर भेज दिया. लेकिन न पुलिस ने कोई काररवाई की और न चांदनी बेगम ही दोबारा पता करने गईं. शुक्रवार की नमाज के बाद ताजगंज की मस्जिद में हाजी मोइनुद्दीन की सलामती की दुआ की गई तो इलाके वालों को उन की गुमशुदगी का पता चला.

सभी को इस बात की हैरानी हो रही थी कि आखिर हाजी मोइनुद्दीन का ऐसा कौन दुश्मन हो सकता है, जिस ने उन का अपहरण कर लिया. हाजी मोइनुद्दीन कोई छोटेमोटे आदमी नहीं थे. वह सैंडल के बहुत बड़े कारोबारी थे. देश के कई राज्यों में उन के कारखाने के बने सैंडल जाते थे. उन के कारखाने में करीब 5 सौ लोग काम करते थे. बंगलुरु में भी उन का एक विशाल शोरूम था. इसी वजह से वह अक्सर बंगलुरु आतेजाते रहते थे.

पुलिस तो कोई खास प्रयास नहीं कर रही थी, लेकिन घर वाले अपने हिसाब से उन की खोज कर रहे थे. वह बंगलुरु जाने की बात कह कर घर से निकले थे, इसलिए घर वाले वहां के व्यापारियों को फोन कर के उन के बारे में पता तो कर ही रहे थे, उन का बेटा मुबीन उन के बारे में पता करने वहां चला भी गया था.

घर वालों की ही मेहनत का नतीजा था कि 28 मई को पता चला कि थाना ऐत्मादपुर की पुलिस ने 18 मई को एक लाश बरामद की थी. घर वाले जब वहां पहुंचे तो पुलिस ने बताया कि लाश का तो अंतिम संस्कार कर दिया गया है. पुलिस ने उन्हें लाश के फोटो दिखाए तो पता चला कि वह लाश हाजी मोइनुद्दीन की ही थी. पुलिस ने पचकुंइयां के कब्रिस्तान में उन की लाश को दफना दिया था. घर वाले साथ आए लोगों के साथ कब्रिस्तान गए. कुछ लोग चाहते थे कि शव को कब्र से निकाल कर देखा जाए, लेकिन घर वालों ने इस तरह की कोई मांग नहीं की.

दरअसल, 18 मई को आगराटुंडला मार्ग पर आगरा से करीब 20 किलोमीटर दूर कस्बाथाना ऐत्मादपुर पुलिस को सूचना मिली कि ऐत्मादपुर के मोहल्ला सत्ता स्थित तालाब में एक सूटकेस पड़ा है. थाना पुलिस ने आ कर वह सूटकेस निकलवा कर खुलवाया तो उस में से एक लाश निकली. लाश पुरुष की थी, जिस की उम्र करीब 55 साल रही होगी.

लाश काफी क्षतविक्षत थी. मृतक के शरीर पर दर्जनों घाव थे. उस की नाक भी कटी हुई थी. इस से अंदाजा लगाया गया कि हत्यारा मृतक से काफी नफरत करता था. लाश पर कपड़े के नाम पर कत्थई रंग की बनियान और लुंगी थी. लाश के पास से ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिस से उस की शिनाख्त हो पाती. वहां का भी कोई व्यक्ति लाश की शिनाख्त नहीं कर सका तो पुलिस ने लाश के फोटो करा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

पुलिस ने लाश को शिनाख्त के लिए 21 मई तक रखवाए रखा. लेकिन जब उस की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पुलिस ने उसे लावारिस मान कर पंचकुइयां कब्रिस्तान में दफना दिया.

लेकिन 28 मई को लाश की शिनाख्त हो गई तो थाना ताजगंज में अपराध संख्या 558/2016 पर हाजी मोइनुद्दीन की हत्या का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई. इस की वजह यह थी कि हाजी मोइनुद्दीन की गुमशुदगी थाना ताजगंज में दर्ज थी. हत्या के इस मामले की जांच स्वयं थानाप्रभारी ए.के. सिंह कर रहे थे.

ए.के. सिंह ने मृतक हाजी मोइनुद्दीन की पत्नी चांदनी बेगम से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि घर से जाते समय वह पठानी सूट पहने थे, जबकि उन की लाश पर केवल कत्थई रंग की बनियान और नीली चैकदार लुंगी थी. आखिर उन के वे कपड़े कहां गए, जो वह घर से पहन कर गए थे.

ए.के. सिंह ने जब कस्बा ऐत्मादपुर के मोहल्ला सत्ता के रहने वालों से पूछताछ की तो पता चला कि लाश वाला सूटकेस सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार में ला कर फेंका गया था. लाश जिस तरह, जिस स्थिति में मिली थी, पुलिस का अंदाजा था कि मोइनुद्दीन की हत्या किसी खास ने ही की थी. उन्हें धोखे से मारा गया था.

एक शंका यह भी जताई जा रही थी कि उन का अपहरण हुआ होगा. लेकिन मोइनुद्दीन बड़े कारोबारी थे, इसलिए वह बड़ी होशियारी से रहते थे. अंजान लोगों के साथ कहीं जाने की कौन कहे, वह जल्दी से बात नहीं करते थे, इसलिए अपहरण की बात अफवाह लग रही थी.

पूछताछ में चांदनी बेगम ने बताया था कि 17 मई की रात 10 बजे फोन पर किसी से बात होने के बाद वह बंगलुरु के लिए निकले थे. उन के जाने के बाद 18 मई को वह अपने दोनों बेटों और बेटी के साथ बाराबंकी जियारत के लिए चली गई थी. 23 मई को वे सभी वहां से लौटे थे.

इस बीच मोइनुद्दीन से उन लोगों की कोई बात नहीं हुई. घर लौट कर जब उस ने उन्हें फोन किया तो फोन बंद मिला. उस ने अपने हिसाब से उन के बारे में पता किया. जब उन के बारे में कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली तो उस ने थाने जा कर उन की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

इसी बीच पुलिस को मुखबिरों से जानकारी मिली कि मोइनुद्दीन की हत्या में उस के बेटे मुबीन का हाथ हो सकता है. इस के बाद पुलिस ने चांदनी बेगम और मुबीन के मोबाइल फोन की लोकेशन पता कराई तो वह लखनऊ की मिली. जबकि चांदनी बेगम ने बताया था कि वह बेटों एवं बेटी के साथ जियारत के लिए बाराबंकी गई थी.

अब पुलिस को मुबीन के वापस आने का इंतजार था. 29 मई को वह बंगलुरु से लौटा तो पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. पुलिस की गिरफ्त में आते ही मुबीन को पसीने छूटने लगे. इस के बावजूद वह पूछताछ में पुलिस को गुमराह करता रहा.

पुलिस को उस पर शक था, इसलिए जब पुलिस ने उस के साथ थोड़ी सख्ती की तो उस ने सच उगल दिया. उस ने पिता की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर के बता दिया कि उस के इस अपराध में मां चांदनी बेगम तथा उस का एक दोस्त अभिनव शामिल था. इस काम में मदद के लिए उस ने उसे 50 हजार रुपए देने का वादा किया था.

अब यहां सोचने वाली बात यह थी कि मोइनुद्दीन जैसे आदमी की हत्या उन के बेटे और पत्नी ने क्यों की? जबकि उन के पास किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. पूछताछ में मुबीन ने पिता की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

आगरा के मेंटोला ढोलीखार के रहने वाले मोइनुद्दीन के पिता जूताचप्पल का कारोबार करते थे, इसलिए पढ़लिख कर उन्होंने भी पिता और भाइयों से अलग अपना सैंडिल बनवा कर सप्लाई करने का कारोबार कर लिया था. वह पढ़ रहे थे, तभी उन्हें साथ पढ़ने वाली चांदनी कुलश्रेष्ठ से प्यार हो गया था. पिता को जब उन के इस प्यार का पता चला तो उन्होंने जल्दी से अपने ही धर्म की लड़की से उन की शादी कर दी.

पिता के दबाव में मोइनुद्दीन ने उस लड़की से शादी तो कर ली थी, लेकिन दिल से वह उसे पत्नी स्वीकार नहीं कर सके. शादी के बाद भी उन के दिल में चांदनी ही बसी रही. यही वजह रही कि उन का पत्नी से कभी प्रेमिल संबंध बन नहीं पाया. ब्याहता पत्नी से उन्हें 2 बेटे भी हुए. इस के बावजूद संबंधों में मधुरता आने के बजाय कड़वाहट बढ़ती गई.

पति के रवैये से पत्नी खुश नहीं थी. अब तक उसे पता भी चल गया था कि पति के दिल में कोई और बसी है और अभी भी वह उस से मिलताजुलता है. आखिर चांदनी ने उसे तलाक दिलवा ही दिया. तलाक के बाद पत्नी अपने दोनों बेटों को ले कर मायके चली गई तो मोइनुद्दीन ने चांदनी से प्रेम विवाह कर लिया. घर वालों ने विरोध तो किया, लेकिन अब तक वह इतने सशक्त हो चुके थे कि सब का विरोध दब कर रह गया.

चांदनी से शादी के बाद मोइनुद्दीन ने और ज्यादा तरक्की की. चांदनी से उन्हें 2 बेटे और एक बेटी हुई. उन का सैंडिलों का कारोबार दक्षिण भारत के कई राज्यों में फैला था, इसलिए बंगलुरु में भी उन्होंने अपना एक शोरूम खोल लिया था. रहने के लिए उन्होंने ताजगंज में प्लौट खरीद कर उस में शानदार कोठी बनवाई. घर में सारी आधुनिक सुखसुविधाएं थीं ही, बच्चे भी अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे थे.

लेकिन अब तक मोइनुद्दीन के मन से चांदनी के प्यार का खुमार उतरने लगा था. इस की वजह यह थी कि पत्नी के हावभाव देख कर उन्हें उस पर शक होने लगा था. उसी बीच वह हज कर के लौटे तो उन की सोच एकदम से बदल गई. वह पूरी तरह से धार्मिक हो गए. शायद यही वजह थी कि उन्हें लगता था कि उन के दिए ऐशोआराम का उन की पत्नी और बच्चे दुरुपयोग कर रहे हैं. वह पत्नी और बच्चों पर सख्ती करने लगे.

पत्नी और बच्चों की आजादी पर रोक लगी तो वे विरोध पर उतर आए, क्योंकि अब उन्हें बंदिशें स्वीकार नहीं थीं. धीरेधीरे मोइनुद्दीन का गुस्सा बढ़ने लगा. नतीजा यह निकलता कि वह बातबात पर पत्नी और बच्चों की पिटाई करने लगे. यही नहीं, पत्नी और बच्चों को मिलने वाले खर्च में भी कटौती कर दी. इस के साथ वह अपने घर वालों से उम्मीद करने लगे कि वे भी उन्हीं की तरह धार्मिक हो जाएं.

जबकि पत्नी और बच्चे तो आजादी से रहे थे, इसलिए अब उन्हें यह सब स्वीकार नहीं था. उसी बीच मोइनुद्दीन को कहीं से पता चला कि उन का बड़ा बेटा मुबीन बालूगंज की रहने वाली किसी हिंदू लड़की से प्यार करता है. यह पता चलते ही वह भड़क उठे. जबकि मां को अपने बेटे के इस प्यार पर जरा भी ऐतराज नहीं था.

मुबीन ने जब पिता से कहा कि वह अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता है तो मोइनुद्दीन ने उसे काफिर कहते हुए उस की पिटाई कर दी. यही नहीं, उन्होंने साफसाफ कह दिया कि उन के जीतेजी उस लड़की से उस की शादी नहीं हो सकती.

मुबीन उस लड़की को सचमुच प्यार करता था, इसलिए उस ने तय कर लिया कि कुछ भी हो, वह शादी करेगा तो अपनी प्रेमिका से ही करेगा. इस के लिए अगर पिता को भी रास्ते में हटाना पड़ेगा तो वह पीछे नहीं हटेगा. क्योंकि उस ने प्रेमिका से वादा किया था कि कुछ भी हो, वह शादी उसी से करेगा. उसे न घर वालों की परवाह है और न दुनिया की.

पति के रवैये से चांदनी भी नाराज थी. वह भी बेटे के पक्ष में थी. पति ने उस के खर्च में भी कमी कर दी थी, इस के अलावा उस के बाहर आनेजाने पर भी रोक लगा दी थी. पति की सनक से वह भी परेशान थी. अपनी और बच्चों की आजादी पर भी उसे खतरा मंडराता महसूस हो रहा था.

मोइनुद्दीन को जब पता चला कि घर में कुछ अनचाहे लोगों का आनाजाना है तो उन की नाराजगी और बढ़ गई. उन्होंने पत्नी और बच्चों पर सख्ती बरतने के साथ उन के टीवी देखने पर भी पाबंदी लगा दी. हालात यह हो गए कि एक ओर मोइनुद्दीन थे तो दूसरी ओर पत्नी और बच्चे घर में हर समय तनाव बना रहता था, जिस से हर कोई परेशान था.

मुबीन तो किसी भी तरह पिता से मुक्ति चाहता था. लेकिन उन की हत्या कर के लाश को ठिकाने लगाने की हिम्मत उस में नहीं थी. इस के लिए उस ने रानीगंज के रहने वाले अपने दोस्त अभिनव से मदद मांगी. मदद के लिए उस ने उसे 50 हजार रुपए देने का वादा भी किया.

अभिनव साथ देने को राजी हो गया तो मुबीन ने पिता की हत्या की तैयारी कर ली. मां ने भी बेटे के इरादे पर सहमति प्रकट कर दी. अब उन्हें मौके की तलाश थी. मुबीन का सोचना था कि पिता की मौत के बाद करोड़ों की संपत्ति और कारोबार का मालिक वह बन जाएगा. उस के बाद वह ऐश से रहेगा. तब शायद उस ने यह नहीं सोचा था कि अपराध कर के बचना इतना आसान नहीं है.

17 मई की रात मुबीन ने फोन कर के अभिनव को अपने घर बुला लिया. एक तेज धारदार चाकू का इंतजाम उस ने पहले से ही कर रखा था. पिता से उसे सख्त नफरत थी, इसलिए वह उन की हत्या कर के अपनी नफरत की आग को बुझाना चाहता था.

घर वालों के इरादों से बेखबर मोइनुद्दीन आराम से खापी कर सो गए थे. रात के 12 बजे के आसपास मुबीन अभिनव के साथ उन के कमरे में गया और पूरी ताकत से गले पर चाकू का ऐसा वार किया कि विरोध करने की कौन कहे, वह चीख भी नहीं सके. छटपटा कर वह मर गए.

अपनी नफरत की आग को बुझाने के लिए मुबीन ने पिता के चेहरे से ले कर शरीर के हर हिस्से पर चाकू से वार किए. पोस्टमार्टम में उन के शरीर पर 29 घाव पाए गए थे. इस के बाद उस ने उन की नाक भी काट ली, जिसे उस ने सूटकेस की पौकेट में रख दी थी.

अब चिंता थी लाश को ठिकाने लगाने की और कानून तथा पुलिस से बचने की. काफी सोचविचार कर तय किया गया कि लाश को सूटकेस में भर कर कहीं दूर फेंक आया जाए. अभिनव के कुछ रिश्तेदार ऐत्मादपुर के मोहल्ला सत्ता में रहते थे. रिश्तेदारों के यहां आनेजाने में उस ने वहां स्थित गहरा तालाब देख रखा था.

उस ने मुबीन से कहा कि लाश को ले जा कर उसी तालाब में फेंक आते हैं.  दूर होने की वजह से कोई उस की शिनाख्त नहीं कर पाएगा तो मामला अपने आप शांत हो जाएगा. इस के बाद मोइनुद्दीन की लाश को बनियान और लुंगी में ही सूटकेस में भर कर कार की डिक्की में रख दिया. चांदनी बेगम काफी परेशान थीं, क्योंकि उन्हें लाश को ठिकाने लगाने की चिंता थी. उसी तनाव में उन्होंने बिस्तर और फर्श पर फैले खून को साफ किया. मोइनुद्दीन के बिस्तर की चादर, चाकू और जूतों को बोरे में डाल कर विभवनगर के नाले में फेंकवा दिया.

करीब 3 बजे मुबीन अभिनव के साथ अपनी सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार से ऐत्मादपुर की ओर चल पड़ा. जब वे सत्ता के पोखर के पास पहुंचे, तब तक सवेरा हो चुका था. उस समय तक गांव के कुछ लोग उठ चुके थे, इसलिए उन्होंने उन्हें वहां सूटकेस फेंकते देख लिया था. उन्हीं लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी थी.

हत्या कर के लाश को ठिकाने लगा कर मुबीन और अभिनव चांदनी बेगम के साथ लखनऊ चले गए. 23 मई को वहां से लौट कर चांदनी बेगम ने मोइनुद्दीन की गुमशुदगी दर्ज कराई तो दूसरी ओर मुबीन पिता की तलाश के बहाने बंगलुरु चला गया.

पूछताछ के बाद पुलिस ने मुबीन की निशानदेही पर बिस्तर की चादर, जूते और चाकू विभननगर के नाले से बरामद कर लिया था. इस के बाद पुलिस ने चांदनी बेगम, मुबीन और अभिनव को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

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