Hindi Love Story. संदीप उर्फ छोटे और अंजू साथसाथ खेले, बढ़े और पढ़े थे. जवान हुए तो दोनों एकदूसरे से प्रेम करने लगे. गांवों में आज भी एक ही गांव के लड़केलड़की के प्यार को स्वीकार नहीं किया जाता. जब यही अंजू और छोटे के साथ हुआ तो…
अंजू और संदीप ने साथसाथ जीने की कसमें खाई थीं. लेकिन जब घर वालों ने उन पर दबाव डाला तो उन्होंने साथ जीने के बजाय साथसाथ मरने का
फैसला कर लिया. छोटे जब अपने ट्यूबवेल पहुंचा तब शाम के 7 बज रहे थे. अंजू ने वायदा किया था कि वह 8 बजे तक ट्यूबवेल पर जरूर पहुंच जाएगी. काफी दिनों से घर में कैद रही अंजू को एक दिन पहले जरा सा मौका मिला था, तभी उस ने घर के पास से गुजर रहे छोटे से ट्यूबवेल पर मिलने की बात कर ली थी.
अंजू की सूरत देखने को तरस रहे छोटे को उस की सूरत देख कर उस समय थोड़ा सुकून जरूर मिल गया था लेकिन मिलन की आग भड़क उठी थी. उस ने वह रात करवटें बदलबदल कर काटी. इतना ही नहीं, उस का दिन भी इधरउधर भटकते हुए बेचैनी में बीता. यही वजह थी वह एक घंटे पहले ही ट्यूबवेल पर पहुंच गया था. छोटे की नजर बारबार उसी राह पर जा रही थी, जिधर से अंजू को आना था. छोटे काफी दिनों से अंजू से मिल नहीं पाया था, इसलिए उसे यह इंतजार बहुत भारी लग रहा था. आखिर किसी तरह वक्त बीता और रात के अंधेरे में खेतों के बीच की उस पगडंडी पर एक छाया आती दिखाई दी. छोटे को लगा, वह अंजू ही है. क्योंकि उस समय उस के अलावा कोई और नहीं आ सकता था.
मिलन की चाह में छोटे का दिल तेजी से धड़का तो वह खुद को रोक नहीं पाया और उस के कदम उस ओर बढ़ गए, जिधर से अंजू आ रही थी. लपक कर वह अंजू के पास पहुंचा तो प्रेम दीवानी अंजू छोटे के सीने में समा गई. छोटे अंजू को बांहों में ले कर उसे प्यार करने लगा.
काफी दिनों बाद दोनों ने एकदूसरे को जी भर कर देखा था. थोड़ी देर तक लिपटे रहने के बाद अंजू ने अलग होते हुए कहा, ‘‘जुदाई के ये दिन मैं ने कैसे काटे हैं, मैं ही जानती हूं. अगर तुम्हारा प्यार न होता तो मैं जहर खा कर जान दे देती.’’
‘‘यह जिंदगी तुम्हारी मोहब्बत की सौगात न होती तो मैं भी मर गया होता.’’ कह कर छोटे ने एक बार फिर अंजू को सीने से लगा लिया.
‘‘छोटे, तुम्हें बता दूं कि आज मैं हमेशाहमेशा के लिए अपना घरपरिवार, नातेरिश्तेदार, सब कुछ छोड़ कर तुम्हारे पास आ गई हूं. अब जीवित घर वापस नहीं जा सकती.’’ अंजू ने कहा.
‘‘घर नहीं जाओगी, तो फिर कहां जाओगी?’’ छोटे ने पूछा.
‘‘घर से किसी को बिना कुछ बताए. इस तरह चोरी से आने के बाद वापस जाने का मतलब है मौत. अब मैं अकेली मरना नहीं चाहती. तुम्हारे साथ जीनेमरने की कसमें खाई हैं तो अब हम जिएंगे तो साथसाथ और मरेंगे तो साथसाथ.’’
छोटे ने अंजू को हैरानी से देखा. उस ने आगे कहा, ‘‘छोटे, आज मैं यहां तुम्हारी दुलहन बनने आई हूं. तुम्हारे नाम का सिंदूर मैं साथ लाई हूं. इसलिए आज तुम मेरी मांग में सिंदूर भर कर मुझे अपनी दुलहन बना लो.’’ अंजू ने कागज की 2 पुडि़यां, जिन्हें वह दुपट्टे के छोर से बांध कर लाई थी, खोल कर एक पुडि़या अलग रख दी और दूसरी पुडि़या छोटे की ओर बढ़ाते हुए बोली, ‘‘लो भर दो मेरी मांग.’’
छोटे ने चुटकी में सिंदूर ले कर अंजू की मांग भर दी.
अंजू ने खुश हो कर छोटे को बांहों में भर कर कहा, ‘‘अब मैं तुम्हारी दुलहन बन गई.’’
‘‘इस दूसरी पुडि़या में क्या है अंजू?’’ अलग रखी पुडि़या की ओर इशारा कर के छोटे ने पूछा.
‘‘बता दूंगी, अभी कोई जल्दी नहीं है. तुम ने मुझे दुलहन तो बना लिया, पर अपनी दुलहन की हसरतें भी पूरी करो, जिस के लिए दुलहन पिया के घर जा कर रात होने का इंतजार करती है. जिस की तमन्ना वह सयानी होते ही मन में पालने लगती है. उसी तमन्ना के लिए वह तनमन से पति को समर्पित हो जाती है.’’
छोटे की समझ में नहीं आ रहा था कि अंजू को क्या हो गया है? पहले कभी वह इतना नहीं बोली?
‘‘क्या सोचने लगे छोटे? मांग में सिंदूर भर कर तुम ने मुझे दुलहन तो बना दिया, लेकिन…’’ कह कर अंजू छोटे से लिपट गई.
चारों ओर दूरदूर तक फैला रात का सन्नाटा, 2 प्यासे प्रेमियों की तड़प को और भी बढ़ा रहा था. एकदूसरे से मिले कई दिन हो गए थे. छोटे उस से मिलने ही तो यहां आया था. आज अंजू ने दुलहन बन कर खुला निमंत्रण दिया तो भला छोटे कैसे पीछे रहता.
एक बार नहीं कई बार तन की प्यास बुझाने के बाद, जब घर वापस जाने की बात आई तो घर जाने के बजाय दोनों ने मौत को गले लगाना उचित समझा. साथसाथ जीना उन के लिए संभव नहीं था. इसलिए उन्होंने साथसाथ मरने का निर्णय कर लिया.
इस का इंतजाम अंजू घर से कर के चली थी. एक पुडि़या में वह सिंदूर लाई थी, तो दूसरी में जहर, जिसे उस ने एक किनारे रख दिया था. उस दूसरी पुडि़या को खोलते हुए अंजू ने हंस कर कहा, ‘‘तुम पूछ रहे थे कि इस पुडि़या में क्या है? तो सुनो इस में जहर है.’’
अंजू जहर ले कर आई है, यह जान कर छोटे मुसकराया. उस के बाद दोनों ने पुडि़या का आधाआधा जहर अपनीअपनी हथेली पर रखा और खा लिया.
अलीगढ़ जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर थाना जवां के गांव सौंगरा में रहते थे, अंजू और छोटे. दोनों गांव की गलियों में खेलतेकूदते बड़े हुए थे. दोनों को पता ही नहीं चला, कब जवान हो गए. पड़ोसी थे, इसलिए एकदूसरे से छिपनेछिपाने की कोई बात नहीं थी. अंजू जहां होशियार और चंचल थी, वहीं छोटे गंवार.
अंजू के दिल में कब छोटे के लिए प्यार ने दस्तक दे दी, उसे पता ही नहीं चला. कुछ दिनों तक तो गंवार छोटे उस की बातों और नजरों का अर्थ ही नहीं समझ पाया, पर उसे इतना जरूर लगता था कि अंजू उसे अन्य लड़कियों से अलग तरह से देखती है. फिर भी उसे इस बात का अहसास नहीं हुआ कि अंजू उसे ले कर कुछ अलग ही सपने देख रही है.
इस का अहसास छोटे को उस दिन हुआ, जिस दिन गांव में कबड्डी की प्रतियोगिता थी. आसपास के गांवों की कई टीमें भी कबड्डी खेलने आई थीं. कबड्डी का शौकीन छोटे भी गांव की टीम में कबड्डी खेलता था. लड़कियां कबड्डी देखने नहीं जाती थीं. उस दिन गांव की लड़कियां भी कबड्डी देखने चली गई थीं. उन में अंजू भी थी. उसे देख कर छोटे ने पूछा, ‘‘तुम यहां क्या करने आई हो?’’
‘‘कबड्डी देखने आई हूं और क्या करूंगी?’’ अंजू ने कहा, ‘‘तुम कैसे खेलते हो, यह देखने आई हूं.’’
छोटे चुप रह गया. कबड्डी का खेल शुरू हुआ. तीसरे राउंड में खेलने उतरी छोटे की टीम. अंजू की वजह से वह पूरे जोश में था. अपनी टीम को आगे रखने की वजह से उस की वाहवाह हो रही थी. यह देख कर अंजू बहुत खुश थी.
सामने वाली टीम में एक ऐसा भी खिलाड़ी था, जिसे अभी तक कोई नहीं पकड़ पाया था. पूरे जोश के साथ जब वह कबड्डीकबड्डी बोलते हुए आया तो छोटे ने कैंची डाल कर उसे ऐसा पटका कि वह चित हो गया. इस तरह छोटे की टीम जीत गई.
अगले दिन अंजू का छोटे से आमनासामना हुआ तो उस ने छोटे को बधाई देते हुए कहा, ‘‘तुम्हारी पकड़ तो कमाल की है, भई.’’
‘‘अंजू यह भी कोई पकड़ थी, अरे जिसे पकड़ने के लिए मैं बेचैन रहता हूं, उसे पकड़ ही नहीं पा रहा हूं.’’ छोटे ने कहा.
‘‘दिल से कभी कोशिश की होती तो जरूर पकड़ लेते. हर जगह ताकत ही नहीं काम आती, कहींकहीं दिल और दिमाग भी लगाना पड़ता है.’’ अंजू ने मुसकरा कर कहा.
‘‘बात दिल और दिमाग की नहीं है. डर की है. मुझे डर लगता है.’’ छोटे ने कहा.
अगले दिन छोटे एक बच्चे को गोद में लिए बर्फ का गोला बनवा रहा था. ठेला अंजू के घर के सामने खड़ा था. बर्फ वाला बर्फ घिस रहा था, तभी बर्फ का गोला लेने अंजू भी घर से निकली. छोटे को वहां खड़ा देख कर उस ने बर्फ वाले से कहा, ‘‘पहले मुझे गोला देना.’’
‘‘भैया पहले से खड़े हैं. इन की बर्फ ही घिस रहा हूं, इसलिए पहले तुम्हें नहीं दे सकता. इन के बाद ही तुम्हें दूंगा.’’ बर्फ वाले ने कहा.
‘‘कुछ भी हो, मैं यही गोला लूंगी, जिस के लिए तुम बर्फ घिस रहे हो.’’
‘‘इन्हें ही दे दो ताऊ.’’ छोटे ने कहा.
‘‘देखा न ताऊ, यह डर गए.’’ अंजू ने छोटे को तिरछी नजरों से ताकते हुए कहा.
बर्फ वाले का गोला तैयार हो गया था, इसलिए उस ने अंजू की ओर उसे बढ़ाते हुए कहा, ‘‘लो लाली, तुम्हीं ले लो.’’
अंजू ने गोला ले कर छोटे की गोद में जो बच्चा था, उसे देते हुए कहा, ‘‘पहले छोटे के बच्चे को, उस के बाद बड़ों को.’’
‘‘यह मेरा बच्चा है?’’ छोटे आंखें तरेरते हुए बोला.
‘‘जिस की गोद में उसी का बच्चा.’’ छोटे की तरफ एक आंख दबा कर अंजू हंस दी.
‘‘कभी तुम भी गोद में आ कर देखो.’’ छोटे धीरे से बोला.
‘‘गोद में बिठाने की हिम्मत हो तो आज रात ट्यूबवेल पर मिलना.’’ अंजू बोली.
अंजाम से बेखबर इस तरह दोनों के प्यार की शुरुआत हो गई. सब की नजरें बचा कर दोनों प्रेमी मिलने लगे. जल्दी ही उन की हालत यह हो गई कि एकदूसरे को देखे बिना चैन नहीं मिलता था. प्यार बढ़ा तो दोनों ने साथसाथ जीनेमरने की कसमें खा लीं. प्यार भला कभी छिपा है तो इन का कैसे छिपता. बचने की तमाम कोशिश के बाद भी दोनों के प्यार के चर्चे गांव में होेने लगे तो दोनों के घर वालों को भी उन के प्यार के बारे में पता चल गया.
मांबाप ने जब अंजू से पूछा तो उस ने सफाई में कहा कि यह लोगों के मन का भ्रम है. ऐसा कुछ भी नहीं है. लोग झूठी अफवाह उड़ा रहे हैं. किसी से बोल लेने का मतलब यह नहीं हुआ कि उस के साथ गलत काम कर रहे हैं.’’
अगर कोई बात न हो तो बतंगड़ कैसे बनेगी? कुछ तो होगा ही तभी लोग कह रहे हैं. यह सोच कर अंजू के घर वालों ने उस की निगरानी शुरू कर दी. इस के बावजूद अंजू और छोटे के मिलनेजुलने में कमी नहीं आई. रात हो या दिन आंधी हो या तूफान, छोटे के बुलाने पर अंजू उस जगह पहुंच जाती, जहां छोटे उसे बुलाता.
चोरी आखिर चोरी होती है. होली का दिन था. पूरा गांव होली के रंग में सराबोर था, वहीं अंजू अपने प्रेमी छोटे से होली खेलने वहां जा पहुंची, जहां दोनों का होली मिलन तय हुआ था. प्रेमरंग में पूरी तरह डूबी अंजू को आखिर किसी ने देख लिया तो उस ने यह बात उस के घर वालों को बता दी.
घर वाले वहां पहुंचे तो अंजू को छोटे की गोद में लेटी बातें करते देख जल उठे. उन्होंने छोटे को पकड़ कर पीटना शुरू किया तो अंजू घर भाग आई. छोटे इस मामले को पुलिस में इसलिए नहीं ले गया, क्योंकि इस से अंजू की बदनामी होती.
इस के बाद अंजू के घर से बाहर आनेजाने पर पाबंदी लगा दी गई. यहां तक कि वह दरवाजे तक भी नहीं आ सकती थी. उस दिन अचानक वह दरवाजे पर आई तो छोटे दिख गया. तभी उन्होंने ट्यूबवेल पर मिलने का प्रोग्राम बना लिया था.
2 मई, 2016 को तय प्रोग्राम के अनुसार, रात 8 बजे अंजू घर वालों की आंखों में धूल झोंक कर छोटे से मिलने उस के ट्यूबवेल पर पहुंच गई थी. जब घर वालों को उस के घर से गायब होने का पता चला तो गुपचुप तरीके से वे उस की तलाश करने लगे. पर पूरी रात ढूंढ़ने पर भी वे उसे ढूंढ़ नहीं पाए.
रात में जब छोटे भी घर नहीं पहुंचा तो उस का भाई मनोज सुबह को थोड़ा जल्दी ट्यूबवेल पर जा पहुंचा. वहां अंजू और छोटे को तड़पते देख मनोज की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई. उस ने फोन कर के चाचा बाबूलाल को बुलाया. गांव वालों को इस का पता भी नहीं चल पाया. दोनों को तत्काल अलीगढ़ मैडिकल कालेज पहुंचाया गया. छोटे के जहर खाने की खबर चुपचाप परिवार को दे दी गई थी. इसलिए घर की औरतें भी ताला बंद कर के मैडिकल पहुंच गईं.
दूसरी ओर रात भर ढूंढ़ने के बाद जब अंजू का कुछ पता नहीं चला तो घर वाले थाने पहुंच गए. उन्होंने थानाप्रभारी छोटेलाल को पूरी बात बता कर संदीप उर्फ छोटे, उस के भाई मनोज और उन के चाचा बाबूलाल के खिलाफ अंजू को बहलाफुसला कर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी.
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद छोटेलाल ने इस मामले की जांच एसआई अवधराज सिंह सेंगर को सौंप दी. जांच की जिम्मेदारी मिलते ही अवधराज सिंह अंजू को तलाश करने के लिए निकल पड़े. वह संदीप के घर पहुंचे तो वहां ताला लगा था. वह खाली हाथ लौट आए.
दोपहर में थाना जवां पुलिस को अलीगढ़ मैडिकल कालेज से सूचना मिली कि गांव सोंगरा की रहने वाली अंजू और उस के प्रेमी संदीप ने जहर खा लिया है.
अंजू की मौत हो चुकी है, जबकि छोटे को गंभीर हालत में उस के घर वाले दिल्ली ले गए हैं.
अवधराज सिंह ने इस बात की जानकारी अंजू के घर वालों को दी और खुद पुलिस वालों के साथ मैडिकल कालेज जा पहुंचे. तब तक अंजू के घर वाले भी वहां पहुंच गए थे. लिखापढ़ी के बाद अंजू की लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. उसी दिन पोस्टमार्टम हो गया तो घर वालों ने उस की लाश को गांव ला कर अंतिम संस्कार कर दिया.
संदीप को बचाने के लिए भले ही उस के घर वाले दिल्ली ले गए थे, लेकिन वहां के डाक्टर भी उसे बचा नहीं सके.
इस तरह अंजू और संदीप साथसाथ जी नहीं पाए तो साथसाथ मौत को गले लगा लिया था. जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी.






