Chandigarh Murder Case: रूबी और अजय कुमार की अच्छीभली गृहस्थी थी, 3 बच्चे भी थे, लेकिन जब पतिपत्नी के बीच सुमन आया तो गृहस्थी नरक बन गई. जाहिर है, इस के बाद कुछ न कुछ तो ऐसा होना ही था, जो नहीं होना चाहिए था.
जब रूबी 16 साल की थी, तभी उस की शादी चंडीगढ़ निवासी अजय कुमार से हो गई थी. इस बात को 13 साल हो चुके हैं. रूबी का परिवार मूलत: बिहार का रहने वाला था. शादी के बाद अजय ने रूबी को बिहार में अपने मांबाप के पास रख छोड़ा था. नौकरी की वजह से वह अकेला चंडीगढ़ में रहता था. अजय चंडीगढ़ के साथ लगने वाले मोहाली के फेज-7 की एक गत्ता बनाने वाली फैक्ट्री में नौकरी करता था.
साल में 2 बार 10-10 दिनों की छुट्टी ले कर अजय अपने घर बिहार जाता रहता था. अब तक वह 3 बच्चों का पिता बन चुका था. करीब साल भर पहले वह बीवीबच्चों को अपने पास चंडीगढ़ ले आया था.
अजय ने चंडीगढ़ के सेक्टर-56 में अपना छोटा-सा मकान नंबर 589 ले लिया था. उस ने एक्टिवा स्कूटर भी खरीद रखा था. उस की दोनों लड़कियां और लड़का गांव के स्कूल में पढ़ते थे. वहां से नाम कटवा कर अजय ने तीनों का दाखिला चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल में करवा दिया था.
रूबी चुस्तदुरुस्त औरत थी. हर काम वह बहुत फुरती से करती थी. गांव में उस के पास साइकिल थी. चंडीगढ़ आ कर उस ने स्कूटर चलाना सीख लिया था. धीरेधीरे घर में यह रूटीन बन गया कि सुबह रूबी तीनों बच्चों को एक्टिवा स्कूटर पर बैठा कर स्कूल छोड़ आती. इस के बाद दोपहर के खाने का टिफिन तैयार कर के वह स्कूटर से ही पति को भी फैक्ट्री में दे आती. शाम को छुट्टी के बाद अजय लोकल बस से घर आता था.
वैसे तो रूबी पहले ही से फुर्तीली थी, अब स्कूटर होने की वजह से वह घर व बाहर के काम और भी जल्दी करने लगी थी. तीनों बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने की जिम्मेदारी तो उस की थी ही, छुट्टी वाले दिन ये लोग बच्चों को ले कर घूमने जाते तो रूबी खानेपीने का स्वादिष्ट सामान भी काफी मात्रा में तैयार कर के ले जाती थी.
पति को उस ने कभी किसी शिकायत का मौका नहीं दिया था. वक्त पर उठना, टाइम से खाना तैयार करना और बच्चों को उन के स्कूल और पति को उस की फैक्ट्री पहुंचाने में उस ने कभी कोताही नहीं की थी.
अजय अपनी बीवी से बहुत खुश था. यह बात उस की जुबान पर अकसर आया करती थी कि ऐसी औरतें बहुत खुशनसीब लोगों को मिलती हैं. फिर रूबी सुंदर भी थी. पति को रिझाने की हर कला उसे आती थी. पासपड़ोस की बुजुर्ग औरतें अपनी बहुओं को समझाते वक्त अकसर रूबी का ही उदाहरण दिया करती थीं.
खैर, अजय का वक्त अपने परिवार के साथ बहुत मजे से गुजर रहा था. उस ने बुरे वक्त की कल्पना तक नहीं की थी. पर एक दिन उस पर ऐसा बुरा वक्त आन पड़ा, जिस बारे में उस ने कभी सोचा तक न था.
उस दिन तारीख थी 14 मई, 2016. अलस्सुबह 5 बजे एक बुजुर्ग आदमी सैर करता हुआ सेक्टर-56 के सरकारी स्कूल के पास से निकला तो उस की निगाह एक जगह वीराने में सीवरेज गटर के पास पड़े सफेद रंग के बोरे पर चली गई.
वह बुजुर्ग रोजाना सुबह की सैर कर के वहां से निकला करता था. वह कोई जगह नहीं थी, जहां इस तरह बोरा वगैरह फेंक दिया जाए. उसे संदेह हुआ तो उस बोरे के पास पहुंच कर उसे टटोलने का प्रयास किया. उसे बोरे में इंसानी लाश होने की संभावना हुई तो उस ने तुरंत अपना मोबाइल निकाल कर इस की सूचना 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी.
थोड़ी देर में पीसीआर की एक गाड़ी वहां पहुंच गई. पुलिसकर्मियों ने मौके पर मौजूद बुजुर्ग से बात कर के इस की सूचना पलसौरा पुलिस चौकी को दे दी.
चौकी से हवलदार कुलदीप सिंह व 2 सिपाहियों परवीन कुमार और दविंदर कुमार के साथ सबइंसपेक्टर अमराओ सिंह मौके पर आ पहुंचे. बोरा खोला गया तो सफेद रंग के बोरे में एक अनजान शख्स की लाश निकली. उन्होंने तुरंत इस की सूचना थाना सेक्टर-39 में भिजवा कर मामला फ्लैश कर दिया.
थानाप्रभारी इंसपेक्टर दिलशेर सिंह चंदेल और इस थाना के अधिकार क्षेत्र में आने वाली चौकी पलसौरा के इंचार्ज सबइंसपेक्टर जसपाल सिंह के अलावा एएसपी (साउथ) डा. नवदीप सिंह बराड़ भी दलबल सहित मौके पर आ पहुंचे. अब तक वहां आसपास के काफी लोग इकट्ठा हो गए थे.
मौका मुआयना करते हुए इंसपेक्टर चंदेल ने सरकारी फोटोग्राफर बुलवा फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाई. फोरैंसिक टीम ने भी आ कर अपनी काररवाई शुरू कर दी. बोरे में से शव निकाल कर उस की पहचान करवाने के प्रयास किए गए, पर वहां मौजूद लोगों में से कोई भी शव को नहीं पहचान पाया. वह 35-36 साल के किसी व्यक्ति का शव था, जिसे मोटे कपड़े में लपेट कर बोरी में ठूंसा गया था. मृतक के चेहरे को तेजाब से जलाने का प्रयास किया गया था. इस वजह से सूरत एक तरह से विकृत हो गई थी.
इंसपेक्टर चंदेल ने सबइंसपेक्टर अमराओ सिंह से ही तहरीर ले कर थाने में अपराध क्रमांक 128 पर भादंवि की धाराओं 302 एवं 34 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा दी.
इस के बाद मौके की बारीकी से जांच की गई. इस जांच में पुलिस के हाथ कागज का एक टुकड़ा लगा, जिस पर मोहाली के फेज-7 की एक गत्ता फैक्ट्री का पता लिखा था. इस फैक्ट्री से कुछ लोगों को बुलवा कर पूछा गया तो उन्होंने बता दिया कि वह बोरा उन की फैक्ट्री का है और उस में मिलने वाला शव उन के साथ नौकरी करने वाले अजय कुमार का है.
इन्हीं लोगों ने फैक्ट्री में फोन कर के अजय के घर के बारे में पूछ कर उस के मकान नंबर 589, सेक्टर-56, चंडीगढ़ का पता हासिल कर लिया, साथ ही यह भी बताया कि अजय पिछले 2 दिनों से अपनी ड्यूटी पर नहीं आया था. फिलहाल शव का पंचनामा बना कर उसे मौर्चरी में रखवाने के लिए जनरल अस्पताल भिजवा दिया गया.
इंसपेक्टर चंदेल की निगरानी में एक पुलिसपार्टी तुरंत मृतक के पते पर पहुंची. वहां उन की मुलाकात रूबी से हुई. उस ने खुद को अजय कुमार की पत्नी बताया. घर पर 3 बच्चे भी थे, जो अजय और रूबी की संतान थे. वे उसी सेक्टर के सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, मगर उस रोज सैकेंड सैटरडे की छुट्टी होने की वजह से स्कूल नहीं गए थे. अपने बयान में रूबी ने बताया कि उस के पति 12 मई की सुबह तैयार हो कर ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकले थे, मगर अभी तक वापस नहीं लौटे थे.
‘‘तुम ने इस बारे में पति के दफ्तर से पता किया या फिर पुलिसचौकी में मिसिंग रिपोर्ट लिखवाई?’’ सबइंसपेक्टर जसपाल सिंह ने पूछा. ‘‘नहीं सर, मैं ने यह सब नहीं किया. इस की एक वजह थी.’’ रूबी ने कहा. ‘‘क्या वजह थी?’’ इंसपेक्टर चंदेल ने पूछा.
‘‘वह सर, ऐसा था कि उस दिन किसी बात पर मेरा अपने पति से थोड़ा मनमुटाव हो गया था. वह मुझ से नाराज हो कर पैदल ही मुंह फुलाए घर से चले गए थे. मैं ने सोचा कि गुस्सा ठंडा होने पर खुद ही वापस आ जाएंगे.’’ रूबी ने स्वाभाविक अंदाज में बताया.
‘‘वह ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकले थे या कहीं और जाने को, इस बात का पता लगाने की कोशिश की थी तुम ने?’’ इंसपेक्टर चंदेल ने पूछा. ‘‘पता क्या करवाना था साहब, ड्यूटी पर जाने के टाइम से निकले थे तो वहीं गए होंगे.’’ ‘‘ड्यूटी पर गए थे तो शाम को हमेशा की तरह उन्हें वापस लौटना चाहिए था, मगर नहीं लौटे.’’ ‘‘हां सर, लौटे तो नहीं.’’
‘‘फिर अगले दिन भी नहीं लौटे?’’ ‘‘जी सर, अगले दिन भी नहीं लौटे.’’ ‘‘ऐसे में तुम्हें उन की कोई फिक्र नहीं हुई?’’
‘‘ऐसा है सर, फिक्र करने से क्या होता. वैसे भी वह कोई बच्चे तो थे नहीं. न मैं ने उन से कोई झगड़ा किया था. झगड़ा शुरू करने वाले भी वही थे.’’ तभी पास खड़ी उस की बड़ी लड़की बोल पड़ी, ‘‘नहीं अंकल, पापा तो मम्मी को समझा रहे थे, झगड़ा मम्मी ने शुरू किया था. पहले भी मम्मी हमारे पापा से लड़ती रहती थीं.’’
वह बच्ची इतनी छोटी नहीं थी कि उस की बात पर तवज्जो न दी जाती. इंसपेक्टर चंदेल ने उस से प्यार से पूछा, ‘‘बेटे, तुम्हारी मम्मी तुम्हारे पापा से किस बात पर झगड़ती थीं?’’
‘‘सुमन भैया की वजह से. पापा उन्हें पसंद नहीं करते थे, मम्मी ने उसे ज्यादा ही सिर चढ़ा रखा है.’’ बच्ची ने तपाक से कहा.
इस से पहले कि इंसपेक्टर चंदेल रूबी से सुमन भैया की बाबत कुछ पूछते, वह खुद ही बोल उठी, ‘‘सुमन रिश्ते में हमारा भतीजा है सर. कभीकभार हम लोगों से मिलने आ जाया करता था. मगर मेरे पति को उस का यहां आना पसंद नहीं था. बस इसी बात को ले कर हमारा कुछेक दफा झगड़ा हुआ था. हर दफा झगड़े के बाद वह रूठ कर चले जाते थे. फिर 2-3 दिनों बाद खुद ही वापस लौटते थे.’’
‘‘मगर इस दफा वह नहीं लौटेंगे.’’ कहने के साथ ही इंसपेक्टर चंदेल रूबी को अपने साथ जनरल अस्पताल ले गए.
वहां मौर्चरी में रखा गया अजय का शव निकलवा कर उसे दिखाया गया तो वह शव की पहचान अपने पति के रूप में करते हुए दहाड़ मार कर रो पड़ी. फिर वह बेहोश सी हो कर वहीं जमीन पर लेट गई.
अब तक सारा मामला इंसपेक्टर चंदेल की समझ में आ चुका था. मगर बिना किसी सबूत के वह किसी पर हाथ नहीं डाल सकते थे. उन्होंने रूबी को अस्पताल से दवा वगैरह दिलवा कर वापस घर भिजवा दिया. इस के बाद उन्होंने उस के घर के आसपास की दुकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की.
सीसीटीवी की फुटेज में रूबी 13 व 14 मई, 2016 की रात में 12 बज कर 14 मिनट और 16 सैकेंड पर एक आदमी को पिछली सीट पर बिठा स्कूटर पर जाती दिखाई दे गई. पीछे बैठे आदमी ने अपने हाथों से एक गोल सी चीज संभाल रखी थी.
यह सबूत काफी था. उसी शाम रूबी को उस के घर से उठा लिया गया. थाने में पूछताछ का पहला दौर शुरू होते ही रूबी ने अपना गुनाह मानते हुए इस अपराध में 2 और लोगों के शामिल होने की बात बता दी. उसी रात पहले सुमन कुमार और फिर कुलप्रकाश नाम के लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया.
अगली सुबह अदालत से कस्टडी रिमांड ले कर तीनों से गहराई से पूछताछ की गई. इस पूछताछ से इस अपराध की लोमहर्षक दास्तान कुछ इस तरह सामने आई—
रूबी जब बिहार के अपने ससुराल के गांव में पति के बिना रहती थी तो उस के अपने से 6 साल छोटे सुमन कुमार से अवैधसंबंध हो गए थे. दूर की रिश्तेदारी में वह अजय कुमार का भतीजा लगता था. इसलिए इन दोनों के संबंधों पर कभी किसी को कोई शक नहीं हुआ. दोनों एक दूसरे की बांहों में जाने को व्याकुल रहते थे.
अजय जब रूबी को अपने साथ चंडीगढ़ ले आया तो दोनों को एकदूसरे की याद सताने लगी. सुमन का जीजा कुलप्रकाश भी चंडीगढ़ में नौकरी करते हुए उसी मकान की ऊपरी मंजिल में रहता था, जिस में रूबी अपने पति व बच्चों के साथ रह रही थी. नौकरी तलाश करने के बहाने सुमन अपने इस जीजा के पास आ गया. इस तरह वह और रूबी फिर से एकदूसरे के करीब आ गए. बच्चों के स्कूल और बड़ों के काम पर जाने के बाद इन की मौज रहती थी.
पति को खुश रखने का हरसंभव प्रयास करते हुए रूबी ने पासपड़ोस में भी अपना अच्छा प्रभाव बना रखा था. यों भी वह और सुमन काफी होशियारी से काम लेते थे.
लेकिन एक दिन जल्दी घर आ जाने पर अजय ने उन दोनों को आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ लिया. सुमन को डांट कर भगाने के बाद उस ने रूबी की भी खूब खबर ली. पतिपत्नी के बीच का यह झगड़ा उन के बच्चों के स्कूल से आने के बाद तक चलता रहा.
इस के बाद अजय अक्सर ही टाइमबेटाइम घर आने लगा. घर पर सुमन भले ही न मिलता, लेकिन पतिपत्नी के बीच झगड़ा फिर से शुरू हो जाता. रूबी और सुमन की मुलाकातों पर पहरा लग गया था. ऊपर से रोज का झगड़ा. मौका देख कर रूबी ने सुमन से मुलाकात कर के इस समस्या का हल ढूंढने को कहा. जबकि अब अजय को रास्ते से हटाने के अलावा दूसरा कोई हल नहीं था. बहरहाल दोनों ने अजय को मौत के घाट उतारने की योजना बना ली.
योजना के अनुसार, 12 मई को छुट्टी के बाद तीनों बच्चों को रूबी कोई बहाना कर के अपने एक परिचित परिवार के यहां छोड़ आई. दरअसल उस दिन अजय को तेज बुखार था. दवा दिलवाने के बाद रूबी ने उसे सुला दिया. उसी रात सुमन चाकू ले कर उन के यहां आ पहुंचा. उस वक्त अजय गहरी नींद में था. रूबी ने चाकू से उस के गले पर वार किए.
जब वह तड़पने लगा तो उस ने और सुमन ने उस के गले में दुपट्टा डाल कर कस दिया. मर जाने का इत्मीनान हो जाने पर उस के शव को मोटे कपड़े में लपेट कर घर में पड़े सफेद रंग के बोरे में ठूंस दिया. इस बोरे को एक तरफ रख कर दोनों मौजमस्ती में डूब गए. 24 घंटे तक शव घर में ही पड़ा रहा तो उस में से दुर्गंध उठने लगी.
13 मई की रात में चंडीगढ़ जबरदस्त आंधी तूफान का शिकार हुआ था. इस भयावह मौसम की परवाह न कर के रूबी ने आधी रात में अपना एक्टिवा स्कूटर नंबर सीएच 04 6583 निकाला और पति के शव वाले बोरे के साथ सुमन को ले कर एक गटर के पास पहुंची.
इन की योजना शव को गटर में फेंकने की थी, मगर उस का ढक्कन इन से खुल नहीं पाया. फलस्वरूप शव वाला बोरा वहीं फेंक कर ये लोग वापस घर आ गए. आ कर भी इन्होंने अपनी रासलीला रचाई थी.
कुलप्रकाश का कसूर यह था कि उसे सुमन और रूबी के संबंधों की जानकारी थी. अजय की हत्या कर दिए जाने के बाद सुमन उसे बुला कर लाया था तो उस ने न केवल शव को पैक करने में इन की मदद की थी, बल्कि खूनआलूदा कपड़े व चाकू वगैरह भी ले जा कर अलगअलग जगहों पर छिपा दिए थे, जो बाद में पुलिस ने निशानदेही कर के बरामद कर लिए थे.
पुलिस रिमांड की समाप्ति के बाद तीनों को फिर से अदालत पर पेश कर के न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेज दिया गया, जहां से इन की जमानत अभी नहीं हो पाई थी. इंसपेक्टर चंदेल ने इन के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर अदालत में दाखिल कर दिया था. Chandigarh Murder Case
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






