Kanpur Murder Case. जीशान ने उमर की पत्नी के साथ जो किया था, उस से बचने के लिए अगर उमर ने दिल के बजाय दिमाग से सोचा होता तो शायद और भी रास्ते निकल आते.

जीशान अपने भांजे शानू के पैर की ड्रेसिंग करने नहीं आया तो उस की बड़ी बहन अलीशा ने पहले उसे फोन किया, फोन बंद मिला तो उस ने उस की खोजखबर करवाई. लेकिन जब उस का कुछ पता नहीं चला तो अलीशा को लगा कि वह किसी जरूरी काम से कहीं बाहर चला गया होगा, घंटे-2 घंटे में लौट कर ड्रेसिंग कर देगा. यही सोच कर वह अपने कामकाज में लग गई. शाम के 5 बज गए और जीशान नहीं आया तो उसे चिंता हुई. चूंकि उस के पति एहसान किसी जरूरी काम से अहमदाबाद गए हुए थे और घर में कोई दूसरा बड़ाबूढ़ा नहीं था, इसलिए अलीशा ने पड़ोस में रहने वाले समीर को मोहल्ला मकबरा स्थित अपने दूसरे मकान पर जीशान के बारे में पता करने के लिए भेज दिया.

अलीशा के उस दूसरे 4 मंजिला मकान में कुल 6 कमरे थे, जिन में नीचे की 2 मंजिलों में 3 किराएदार अपने परिवार के साथ रहते थे. उस के ऊपर की तीसरी और चौथी मंजिल के 3 कमरों में 2 लड़के और उस का छोटा भाई जीशान हैदर रहता था. जीशान की खोज में आया समीर दूसरी मंजिल पर पहुंचा तो तीसरी मंजिल पर जाने वाले दरवाजे पर ताला लगा था. वह वहीं रुक गया. तभी उसे वहां कुछ सड़ने जैसी बदबू महसूस हुई. ताला बंद होने की वजह से वह ऊपर नहीं जा सका तो नीचे रहने वाले किराएदारों से जीशान के बारे में पूछा. लेकिन वे लोग जीशान के बारे में कुछ नहीं बता सके.

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जब समीर को जीशान के बारे में कुछ पता नहीं चला तो लौट कर उस ने अलीशा को बताया कि तीसरी मंजिल पर जाने वाले दरवाजे पर ताला लगा है, इसलिए वह जीशान के कमरे तक पहुंच नहीं सका. लेकिन ऊपर से लाश के सड़ने जैसी बदबू आ रही थी. यह सुन कर अलीशा परेशान हो उठी. उस के दिल में छोटे भाई को ले कर तरहतरह की आशंकाएं उठने लगीं. वह खुद तो वहां नहीं जा सकी, लेकिन मोहल्ले के 2 अन्य लड़कों को बुला कर कहा, ‘‘तुम लोग समीर के साथ वहां जा कर तीसरी मंजिल पर जाने वाले दरवाजे का ताला तोड़ कर ऊपर के सभी कमरों को ठीक से देखना. मुझे किसी गड़बड़ी की आशंका हो रही है.’’

समीर ने दोनों लड़कों के साथ जा कर तीसरी मंजिल पर जाने वाले दरवाजे का ताला तोड़ दिया. इस के बाद वह चौथी मंजिल पर पहुंचा तो वहां बने गोदामनुमा कमरे में जीशान हैदर की खून से लथपथ क्षतविक्षत लाश पड़ी देख कर डर गया. उस के साथ आए दोनों लड़के भी डर गए थे. उन्होंने लगभग भागते हुए आ कर यह बात अलीशा को बताई तो छोटे भाई की हत्या की खबर सुन कर अलीशा जोरजोर से रोने लगी.

उस के रोने की आवाज सुन कर मोहल्ले वाले इकट्ठा हो गए. धीरेधीरे यह बात पूरे मोहल्ले में फैल गई. अलीशा रोते हुए मकबरा स्थित अपने मकान की ओर भागी. उसी बीच किसी ने इस हत्या की जानकारी थाना ग्वालटोली पुलिस को दे दी थी. जानकारी मिलते ही थानाप्रभारी मोहम्मद अशरफ वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दे कर पुलिस बल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे.

जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां भारी भीड़ जमा हो चुकी थी. उस में काफी तनाव भी था. थानाप्रभारी ने इस बात की जानकारी पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) दिनेश कुमार पी. को दी तो कानूनव्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्होंने थाना बजरिया, चमनगंज, कोहना के थानाप्रभारियों को पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचने का आदेश दिया. थोड़ी देर में वह खुद भी फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे.

फोरैंसिक टीम को जांच के दौरान कमरे से जैलोकेन के इंजेक्शन, सिरिंज और रबर की एक जोड़ी चप्पल मिली. टीम ने उसे अपने कब्जे में ले लिया. फोरैंसिक टीम का काम खत्म हो गया तो पुलिस अपना काम करने लगी. कमरे में मिले जैलोकेन के इंजेक्शन से आशंका व्यक्त की गई कि मृतक जीशान की हत्या बेहोश कर के की गई थी.

हत्या बड़ी ही क्रूरता से की गई थी. उस का सिर और चेहरा इस तरह से कुचला गया था कि उस की एक आंख फूट गई थी. सिर का भेजा भी बाहर निकल आया था. नाजुक अंगों को भी हत्यारे ने बुरी तरह क्षतविक्षत किया था. यही नहीं, मृतक के पेट में लोहे की जो रौड घुसी थी, लगता था उस के पेट के ऊपर रख कर किसी भारी चीज से ठोंकी गई थी.

लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने पंचनामा तैयार कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए हैलेट अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद उस मकान में रहने वाले सभी किराएदारों और पड़ोसियों से पूछताछ की गई. पुलिस ने काफी प्रयास किया, लेकिन इस पूछताछ में हत्या से संबंधित ऐसी कोई भी जानकारी पुलिस को नहीं मिली, जिस से हत्यारे तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाता.

जीशान की हत्या की सूचना पा कर उस के बड़े भाई मोहम्मद इरफान घर वालों के साथ रात 10 बजे थाना ग्वालटोली पहुंच गए थे. इस के बाद उन्हीं की तहरीर पर थानाप्रभारी मोहम्मद अशरफ ने जीशान की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्होंने इरफान से पूछताछ शुरू की. इस पूछताछ में इरफान ने जो बताया, उस के अनुसार वह उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के कस्बा सफीपुर के मोहल्ला सराय खुर्रम के रहने वाले डा. हसन असगरी उर्फ शम्मू का बेटा था. भाईबहनों में उस के अलावा उस के 2 भाई इमरान और मृतक जीशान के अलावा 2 बहनें थीं.

भाइयों में 29 वर्षीय जीशान सब से छोटा था. पढ़ाईलिखाई के साथ वह पिताजी की उन के काम में मदद करता था, जिस की वजह से उसे बीमारियों और उन के इलाज के बारे में काफी जानकारी हो गई थी. लेकिन उस का मन न पढ़ाईलिखाई में लगा, न पिताजी के साथ काम करने में. इस की वजह यह थी कि वह इलेक्ट्रीशियन बनना चाहता था. समय मिलने पर वह मोटर वाइंडिंग और इलेक्ट्रिक के अन्य काम सीखता रहता था. जब वह बिजली के सारे कामों में निपुण हो गया तो कमाईधमाई करने के लिए कानपुर के ग्वालटोली में रहने वाले अपने बहनोई एहसान के यहां चला गया. यह लगभग 10 साल पहले की बात थी.

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पुलिस को शक था कि जीशान की हत्या प्रेमप्रसंग, लेनदेन या किसी रंजिश की वजह से हुई थी. लेकिन इन में से सब से ज्यादा संभावना थी कि उस की हत्या प्रेमप्रसंग को ले कर हुई थी, क्योंकि जिस तरह क्रूरता के साथ उस की हत्या की गई थी, ऐसा अकसर प्रेमप्रसंग या अवैध संबंधों के मामलों में होता था. पुलिस जीशान के दोस्तोंपरिचितों से पता करने लगी कि उस का किसी से प्रेम संबंध तो नहीं था. क्योंकि इस तरह की बातें लोग दोस्तों से जरूर बताते हैं.

पूछताछ करतेकरते 2 दिन बीत गए. इसे बीच पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची. इस से इलाके में तनाव बढ़ने लगा. जब इस बात की जानकारी एसपी (पश्चिम) दिनेश कुमार पी. को हुई तो उन्होंने मामले की जांच के लिए आननफानन एक पुलिस टीम गठित कर दी, जिस में थाना ग्वालटोली, कर्नलगंज, कोहना के थानाप्रभारियों के अलावा क्राइम ब्रांच के कुछ तेजतर्रार अधिकारियों को भी शामिल किया गया.

इस पुलिस टीम ने सब से पहले जीशान और उस के कुछ मित्रों के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स के अध्ययन के बाद पुलिस को उस में मिले एक नंबर पर संदेह हुआ. पुलिस ने उस नंबर के मोबाइन फोन की लोकेशन निकलवाई तो पता चला कि घटना वाले दिन वह फोन कानपुर में ही था, जबकि वह नंबर महाराष्ट्र का था. इस में अहम बात यह थी कि घटना से पहले उस की लोकेशन जहां कानपुर और घटनास्थल के आसपास थी, वहीं घटना घटने के बाद वह फोन बंद कर दिया गया था.

जांच टीम ने उस नंबर के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह नंबर उत्तर प्रदेश के जिला मऊ के थाना घोसी के रहने वाले मोहम्मद उमर शाद के नाम था, जो वर्तमान में परिवार के साथ महाराष्ट्र के जिला थाणे के थाना नालासोपारा के अचोल रोड स्थित एमडीनगर के किसराज स्कूल के नजदीक साईंनाथ अपार्टमेंट के रूम नंबर 103 में रहता था. इसी के साथ यह भी पता चला कि कानपुर के ग्वालटोली के मोहल्ला मकबरा के रहने वाले अब्बास की बेटी रीनू से उस का निकाह हुआ था.

पुलिस ने अब्बास से पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘मेरे दामाद मोहम्मद उमर शाद के मृतक जीशान से दोस्ताना संबंध थे. लेकिन वह तो इधर 6 महीने से कानपुर आया ही नहीं है.’’

लेकिन पुलिस को सर्विलांस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार उमर शाद घटना वाले दिन कानपुर में ही था. पुलिस समझ गई कि अब्बास या तो झूठ बोल रहा है या उस के आने का इसे पता नहीं है. यही बात उमर की पत्नी रीनू ने भी पुलिस को बताई थी. बहरहाल पुलिस को अब्बास, उस की बेटी रीनू और दामाद मोहम्मद उमर शाद पर शक हो गया. पुलिस ने छानबीन की तो सचमुच मामला अवैध संबंध का निकला.

अवैध संबंध की बात सामने आते ही मोहम्मद उमर शाद को कानपुर लाने के लिए एक पुलिस टीम थाणे के लिए रवाना हो गई. लेकिन पुलिस टीम के वहां पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया. पुलिस को वहां से उस का मोबाइल नंबर मिल गया, जिसे सर्विलांस पर लगा कर उस की लोकेशन पता की जाने लगी. फिर सर्विलांस के माध्यम से ही उस की लोकेशन पता कर के घंटाघर रेलवे स्टेशन से उसे गिरफ्तार कर लिया गया. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने जीशान की हत्या की जो कहानी पुलिस को बताई, वह इस प्रकार थी.

मूलरूप से जिला मऊ के थाना घोसी के रहने वाले मोहम्मद उमर शाद के पिता सालों पहले मुंबई जा कर रहने लगे थे. उन्हीं के साथ उन का परिवार भी रहता था. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 6 बेटे और 2 बेटियां थीं. उन्हीं में एक उमर शाद भी था. वह मुंबई में बच्चों की साइकिल बनाने वाली फैक्ट्री में नौकरी करता था.

चूंकि वह उत्तर प्रदेश का रहने वाला था, इसलिए आज भी उस के तमाम रिश्तेदार उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों में रह रहे हैं. यही वजह थी कि 7 साल पहले उस की शादी कानपुर के ग्वालटोली के मोहल्ला मकबरा के रहने वाले अब्बास की बेटी रीनू के साथ हो गई थी. अब तो वे 2 बच्चों के मांबाप भी बन चुके हैं.

पिछले साल अचानक रीनू की तबीयत खराब हुई तो वह इलाज कराने के इरादे से उमर से अनुमति ले कर अपने देवर मुन्ना के साथ कानपुर आ गई. कुछ दिन कानपुर में रहने के बाद मुन्ना मुंबई वापस गया तो उस ने अपने बड़े भाई उमर शाद से कहा, ‘‘भइया, मुझे लगता है कि कानपुर में भाभी का उन्हीं के मोहल्ले के रहने वाले एक लड़के से गलत संबंध है.’’

‘‘ऐसा तुम्हें कैसे लगा?’’ उमर शाद ने मुन्ना से पूछा.   ‘‘उन दोनों के बातव्यवहार से,’’ मुन्ना ने कहा, ‘‘हमारे खयाल से भाभी को कानपुर भेजना ठीक नहीं है.’’

भाई की इन बातों ने उमर शाद को बेचैन कर दिया, क्योंकि पत्नी का सालोंसाल का पलपल का साथ, बातचीत और नजदीकियों से भाई की बातों पर उसे विश्वास नहीं हुआ था. लेकिन वह पुरुष था. पुरुष का मन शंकालु होता है, इसलिए भाई की बातें सोचसोच कर वह रातदिन बेचैन रहने लगा.

जब यह बेचैनी कुछ ज्यादा ही परेशान करने लगी तो वह 2 महीने की छुट्टी ले कर कानपुर अपनी ससुराल आ गया और जीशान तथा अपनी पत्नी रीनू पर नजर रखने लगा. उसी बीच उसे मोहल्ले के कुछ लड़कों से पता चला कि रीनू और जीशान के बीच शारीरिक संबंध ही नहीं हैं, बल्कि जीशान ने अपने उन संबंधों की वीडियो क्लिपें भी बना रखी हैं.

इस बात ने उमर की बेचैनी और बढ़ा दी. सच्चाई का पता लगाने के लिए उस ने जीशान से दोस्ती गांठ ली. वह किसी भी तरह उस के मोबाइल में पड़ी रीनू और उस की वीडियो क्लिपें देखना चाहता था. इस के लिए वह जीशान के साथ उस के कमरे पर रुका भी, लेकिन जीशान ने मोबाइल में कोड लगा रखा था, इसलिए वह उस की मेमोरी को खोल नहीं सका. धीरेधीरे उस की उलझन बढ़ती ही जा रही थी.

इसी तरह छुट्टी खत्म हो गई और उमर मुंबई चला गया. कानपुर में रहते हुए उस ने रीनू से भले ही कुछ नहीं कहासुना था, लेकिन उस के दिमाग में यह बात पूरी तरह बैठ गई थी कि उस की पत्नी का जीशान से संबंध है. इसलिए इस बात को ले कर वह बुरी तरह परेशान रहने लगा था.

दूसरी ओर जीशान चाहता था कि अगर रीनू का उमर से तलाक हो जाए तो वह हमेशाहमेशा के लिए उस की हो जाएगी. इस के लिए वह अपने करीबी मित्रों से उमर शाद के मोबाइल पर फोन करवा कर अपने और रीनू के शारीरिक संबंधों की बात कहलवाने लगा था. उसे लगता था कि यह जान कर उमर अपनी पत्नी रीनू को तलाक दे देगा.

उमर शाद रीनू से बेहद प्यार करता था, इसलिए वह किसी भी सूरत में उसे छोड़ना नहीं चाहता था. लेकिन रीनू और जीशान के संबंधों को ले कर जब भी उस के पास कोई फोन आता, वह बुरी तरह तिलमिला उठता था. ऐसे में वह गुस्से में अपने शरीर को किसी धारदार चीज से काट लेता. इस के बाद भयानक पीड़ा उठती तो पत्नी के गैरमर्द के संबंधों की तिलमिलाहट धीरेधीरे शांत हो जाती. एक बार तो उस ने पत्नी की इस बेवफाई पर जान तक देने की कोशिश की, लेकिन किसी तरह वह बच गया.

उमर शाद खुद इतना परेशान और बेचैन रहता था, लेकिन उस के पास इन अनैतिक संबंधों का कोई प्रमाण नहीं था, इसलिए वह इस बारे में पत्नी से कुछ पूछ नहीं पा रहा था. लेकिन जब उस की बेचैनी हद से ज्यादा बढ़ गई तो उस ने रीनू से उस के और जीशान के अवैध संबंधों तथा अश्लील वीडियो क्लिपों के बारे में पूछ ही लिया.

तब रीनू ने रोते हुए कहा, ‘‘मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है. इस की वजह से मैं कई महीनों से भयानक मानसिक पीड़ा की आग में दिनरात जल रही हूं. औरत हूं, इसलिए अपने साथ हुए धोखे के बारे में तुम से बताने की हिम्मत नहीं कर सकी. बस, यही मुझ से गलती हुई है.’’

‘‘तुम्हारे साथ यह सब कैसे हुआ, तुम ने कभी बताने की कोशिश क्यों नहीं की?’’ उमर शाद ने कहा.

‘‘कहा न, हिम्मत ही नहीं पड़ रही थी. अब आप सब जान ही गए हैं तो आप को सारी सच्चाई बताए देती हूं.’’ रीनू ने कहा.

इस के बाद रीनू ने उमर को जो बताया, वह कुछ इस प्रकार था.

पिछले साल जून में बीमार होने पर मुन्ना रीनू को कानपुर ले कर आया तो मुन्ना की पीठ में दाने निकल आए थे, जिस की पीड़ा से वह काफी परेशान था. तब अब्बास ने रीनू से कहा कि वह उसे जीशान को दिखा कर उस के लिए मैडिकल स्टोर से दवा मंगा ले.

रीनू ने पड़ोसी जीशान को फोन कर के घर बुला लिया. उस ने मुन्ना को देख कर कहा, ‘‘यह एक गंभीर चर्मरोग है. इस की दवा मुझे मालूम नहीं है. ऐसा करो, तुम मेरे कमरे पर आ जाओ. मैं लैपटौप में देख कर इस के लिए दवा लिख देता हूं.’’   यह कह कर जीशान चला गया.

मुन्ना की पीठ में निकले दानों में भयंकर जलन हो रही थी. उस की परेशानी रीनू से देखी नहीं जा रही थी. घर में उस के अब्बा या कोई भाई नहीं था, इसलिए मजबूरी में उसे ही जीशान के कमरे पर जाना पड़ा. जून की भयंकर गरमी में चौथी मंजिल तक सीढि़यां चढ़तेचढ़ते उस की जुबान सूख गई. कमरे में सामने ही मेज पर पानी की बोतल रखी थी. रीनू ने पानी पीने के लिए जैसे ही बोतल उठाई, जीशान ने कहा, ‘‘यह जूठी है, इसलिए इस का पानी तुम्हारे पीने लायक नहीं है. मैं तुम्हारे लिए नीचे से दूसरा ठंडा पानी लाए देता हूं.’’

जीशान भाग कर नीचे गया और रीनू के लिए एक गिलास ठंडा पानी ले आया. उसे पीते ही रीनू को चक्कर सा आया और वह बेहोश हो कर गिर पड़ी. इस के बाद उस के साथ क्या हुआ, उसे पता नहीं चला. थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो वह दवा की पर्ची ले कर घर आ गई. जब उस के ऊपर से बेहोशी का असर पूरी तरह से हटा तो उसे लगा कि जीशान ने उसे पानी में कोई नशीली चीज पिला कर उस के साथ गलत काम किया है. उस के साथ क्या हुआ होगा, वह जान तो गई, लेकिन वह शादीशुदा थी, इसलिए इज्जत ही नहीं, अपनी गृहस्थी बचाए रखने के लिए उस ने यह बात किसी से नहीं कही.

रीनू ने सोचा कि जो होना था, वह हो गया. लेकिन अब आगे से वह जीशान को इस तरह का कोई मौका नहीं देगी. लेकिन जीशान नादान नहीं था. उस ने रीनू को कब्जे में रखने के लिए उस से संबंध बनाने की वीडियो क्लिप बना ली थी. उसी को ले कर वह तीसरे दिन रीनू के घर आ धमका. उस ने रीनू को एकांत में ले जा कर हंसते हुए उसे वह अश्लील वीडियो क्लिप दिखा कर कहा, ‘‘अब तुम्हें वही करना होगा, जो मैं कहूंगा. अगर तुम ने मना किया तो यह वीडियो क्लिप मैं मोहल्ले में सभी को दिखा दूंगा.’’

‘‘जीशान, तुम ऐसा कतई मत करना, वरना मेरा हंसताखेलता घरपरिवार बिखर जाएगा. मेरे बच्चों की जिंदगी बरबाद हो जाएगी. खुदा के लिए इसे डिलीट कर दो.’’

‘‘ठीक है, तुम कहती हो तो डिलीट कर दूंगा, लेकिन बदले में तुम्हें मुझे खुश करना होगा.’’ जीशान ने शर्त रखी.

न चाहते हुए भी रीनू को जीशान की बात माननी पड़ी. इस बार भी जीशान ने अपने और रीनू के शारीरिक संबंधों की वीडियो क्लिप बना ली. फिर तो सिलसिला सा चल पड़ा. क्लिपों को डिलीट करने की बात कह कर वह रीनू से शारीरिक संबंध बनाता रहा. यही नहीं, वह हर बार की वीडियो क्लिप भी बना लेता था. इस तरह जीशान के जाल में रीनू बुरी तरह फंसती चली गई.

यह सब रीनू अपने घरपरिवार और बच्चों के भविष्य के लिए कर रही थी. उसे यह भी पता था कि उस का पति उसे जान से ज्याद प्यार करता है. अगर ऐसे में उसे जीशान और उस के संबंधों के बारे में पता चल गया तो वह यह सब बरदाश्त नहीं कर पाएगा. इसी वजह से वह जीशान के चंगुल में फंसती चली गई थी. जब रीनू को लगा कि अब वह जीशान के चंगुल से मुक्त नहीं हो पाएगी तो उस ने आत्महत्या के बारे में भी सोचा. लेकिन बच्चों के भविष्य को देखते हुए वह ऐसा नहीं कर सकी.

उमर को जब जीशान की असलियत का पता चला तो उसे उस पर बहुत गुस्सा आया. उसे लगा कि जब तक यह आदमी जिंदा रहेगा, उस की पत्नी को ब्लैकमेल करते हुए वह उस की देह से खेलता रहेगा. यही नहीं, अपने दोस्तों के बीच उस की इज्जत का तमाशा भी बनाएगा. अब यह सब तभी बंद होगा, जब उसे मार दिया जाए.

उमर के दिमाग में जीशान को मारने की बात आई तो उस ने उस की हत्या की योजना बना डाली. फिर उसी योजना के तहत 29 दिसंबर को ट्रैवल बैग में एक लोहे की रौड रख कर वह पुष्पक एक्सप्रेस से कानपुर आ गया. वह दोपहर 1 बजे के करीब कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर उतरा. ससुराल जाने के बजाए वह स्टेशन के बाहर होटल में कमरा ले कर ठहर गया.

रात 10 बजे उमर शाद बैग ले कर होटल से बाहर निकला. उस समय भयंकर ठंड पड़ रही थी, जिस से सड़कों पर लगभग सन्नाटा पसरा था. एक रिक्शा ले कर वह मकबरा के लिए चल पड़ा. 11 बजे के आसपास वह मकबरा पहुंचा तो मोहल्ले में पूरी तरह सन्नाटा था. वह अपनी ससुराल जाने के बजाय सीधे जीशान के कमरे  पर चला गया. एकबारगी उमर को अपने कमरे पर देख कर जीशान ने हैरानी से पूछा, ‘‘अरे उमर भाईजान, इतनी रात को अचानक यहां कैसे?’’

‘‘मुंबई से आ रहा हूं. कोहरे की वजह से ट्रेन लेट हो गई. यहां आया तो देखा गलीमोहल्ले में सन्नाटा पसरा है. ससुराल वाले रजाई में दुबके होंगे. उन्हें परेशान करने के बजाय सीधे आप के कमरे पर चला आया. सोचा, रात आप के साथ गुजार लूं, सुबह ससुराल चला जाऊंगा.’’ हंसते हुए उमर ने कहा.

‘‘कोई बात नहीं, यह भी आप का ही घर है. कपड़े उतार कर रजाई में आ जाओ. बड़ी ठंड है.’’ जीशान ने कहा.

कपड़े उतार कर उमर जीशान के साथ लेट गया. कुछ देर दोनों बातें करते रहे. बातें करतेकरते जीशान तो सो गया, लेकिन उमर जागता रहा. क्योंकि वह तो प्रतिशोध की आग में जल रहा था. जब उसे यकीन हो गया कि जीशान सो गया है तो वह धीरे से उठा. उस ने मुंबई से लाई लोहे की रौड बैग से निकाली और गहरी नींद सो रहे जीशान के सिर पर पूरी ताकत से एक के बाद एक कई वार कर दिए.

सिर पर गहरी चोट लगने से जीशान चीख भी नहीं सका और इस दुनिया से विदा हो गया. इस के बाद प्रतिशोध की आग में जल रहे उमर ने रजाई हटा कर उस के पुरुषांग पर भी कई वार किए. इस पर भी उसे संतोष नहीं हुआ तो उस ने साथ लाई रौड को पत्थर से ठोंकठोंक कर खूंटे की तरह उस के पेट में घुसेड़ दिया.

यह सब कर के उमर ने जीशान का मोबाइल फोन उठाया और तीसरी मंजिल के दरवाजे पर ताला लगा कर नीचे आ गया. वहां से सीधे वह रेलवे स्टेशन पहुंचा और मुंबई जाने वाली ट्रेन पकड़ कर अपने घर चला गया. पुलिस से बचने के लिए उस ने जीशान और अपना मोबाइल फोन तथा दोनों सिम तोड़ कर रास्ते में कहीं फेंक दिए.

उमर ने जीशान की हत्या का अपराध स्वीकार कर के हत्या की वजह भी पुलिस को बता दी थी. इस के बाद थानाप्रभारी मोहम्मद अशरफ ने उस के खिलाफ जीशान की हत्या का मुकदमा दर्ज कर 6 जनवरी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Kanpur Murder Case

इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

—मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में महिलाओं के नाम बदले हुए हैं.

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