Child Kidnapping Case. बेरोजगारी से तंग आ कर राधिका ने अपने भाई और सहेली के साथ मिल कर अपनी गरीबी दूर करने का जो शार्टकट रास्ता अपनाया, वह एकदम फिल्मी निकला. उन्होंने बैंक लूटने जैसी कई योजनाएं बनाईं, लेकिन सफलता नहीं मिली. आखिर उन्होंने लाखों रुपए पाने के लिए अगला कदम उठाया, ङ्क्षकतु आधुनिक तकनीकी जांच के आगे उन की योजना बालू की भीत साबित हुई और सभी 5 घंटे के भीतर इस तरह दबोच लिए गए कि

इंदौर का रहने वाला विनीत प्रजापति (22 वर्ष) पिछले कई महीने से बेरोजगार चल रहा था. उसे एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिली थी. वह कंपनी 6 महीने बाद ही बंद हो गई. असल में वह कंपनी फरजी थी, जिस में काम करने का विनीत को पैसा भी नहीं मिला.

विनीत की बहन राधिका प्रजापति (19 साल) भी साधारण पढ़ीलिखी थी. वह टेलीकौलिंग का काम करती थी. इस काम में उसे भी बहुत कम पैसा मिलता था. महीने 2 महीने में नौकरी छूट जाती थी. दोनों भाईबहन आर्थिक तंगी को ले कर परेशान रहते थे. उन के घर की माली हालत भी काफी दयनीय थी.

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एक रोज विनीत दुखी मन से बहन से बोला, ”ऐसे कब तक चलेगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा है?’’

”सभी जगह ठगबेइमान बैठे हैं…प्राइवेट कंपनी वाले काम करवा कर भी पैसा नहीं देते हैं.’’ राधिका बोली.

”क्या करूं? तुम ही कोई उपाय सोचो… गरीबी दूर कैसे हो?’’ विनीत उदासी के साथ बोला.

”हमारे पास थोड़ी सी पूंजी हो जाए, तब हम लोग अपना कोई काम कर सकते हैं.’’ राधिका बोली.

”पूंजी कहां से आएगी? तुम जो कमाती हो उस से तो किसी तरह घर का खर्च पूरा हो पाता है.’’ विनीत बोला.

”लेकिन भैया कुछ तो उपाय करना होगा… ऐसे कब तक चलेगा. पहले मैं तुम्हारे लिए किसी नौकरी के बारे में पता करती हूं.’’ राधिका बोली.

”हांहां, पता कर लो, तुम्हारे साथ टेलीकौलिंग करने वाली और भी तो लड़कियां होंगी.’’ विनीत बोला.

राधिका की एक हमउम्र सहेली तनीषा सेन (20 वर्ष) पहले उस के साथ ही काम करती थी. वह पहले फ्लिपकार्ट में थी. वहां से जौब छोड़ कर एक दुकान में सेल्सगर्ल लग गई थी. राधिका ने उस से अपने 12वीं पास भाई के लिए कोई नौकरी पता करने के लिए कहा.

तनीषा खुद अपने पति की बेरोजगारी की समस्या से परेशान थी. सहेली के भाई के लिए कैसे नौकरी पता करती? उस का ड्राइवर पति ललित पिछले 6 महीने से नौकरी तलाश रहा था. फिर भी राधिका ने तनीषा से बात करने का मन बना लिया.

अगले दिन ही राधिका की मुलाकात तनीषा से हुई. उस ने तनीषा से अपने दिल की बात कही तो तनीषा ने भी अपने मन की बात उसे बता दी. थोड़ी देर उन के बीच उदासी और चुप्पी का माहौल बना रहा. अचानक तनीषा की नजर सामने एक बैंक के साइनबोर्ड पर पड़ी. चहकती हुई बोली, ”लगता है, हमें ढेर सारे पैसों के लिए बैंक ही लूटना पड़ेगा.’’ ”वह कैसे?’’ राधिका ने सवाल किया.

”अरे, मैं तो मजाक कर रही हूं…हम ऐसा कैसे कर सकती हैं?’’ तनीषा बोली.

”मजाक नहीं है तनीषा, तू बिलकुल सही बोल रही है. बैंक में ही तो बहुत सारा पैसा होता है. सोचती हूं उसे लूट लिया जाए तो हमारी गरीबी दूर हो सकती है.’’ राधिका बोली.

”तो फिर इस का प्लान बनाएं? मैं ललित से बात करूं क्या?’’ तनीषा बोली. ”हांहां, बात कर न अपने हसबैंड से…मैं भी अपने भाई से इस बारे में बताती हूं.’’

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दोनों सहेलियों की बैंक लूटने की मजाकमजाक में शुरू हुई बात ललित और विनीत तक जा पहुंची. इसे दोनों ने गंभीरता से लिया और जल्द ही इस पर योजना बनाने के लिए एक मीटिंग तक कर ली.

मीटिंग में यह बात सामने आई कि बैंक लूटने में काफी खतरा है. इस से आसान तो यही रहेगा कि क्यों न किसी ज्वैलर्स के शोरूम को ही लूट लिया जाए.

इस योजना पर सभी की सहमति बन गई. यह भी तय हो गया कि कौन ग्राहक बन कर शोरूम में जाएगा और कौन लूट का काम करेगा. उस के बाद लूटा हुआ माल ले कर वे फरार हो जाएंगे.

इस योजना को कार्यरूप देने के लिए उन्होंने कई बैठकें कीं, लेकिन इस के लिए उन्हें हथियार और गाड़ी का इंतजाम करने की जरूरत महसूस हुई. इस पर राधिका ने ही सवाल किया कि हथियार के इंतजाम करने के लिए हम लोगों के पास पैसे नहीं हैं. इसलिए कोई वैसी योजना बनाई जाए, जिस में कुछ भी खर्च न करना पड़े.

तनीषा बोली, ”तब तो एक ही योजना है, जिस में कोई पैसा नहीं लगता है.’’ ”क्या…क्या? जल्दी बताओ.’’ राधिका चहकती हुई बोली. ”किडनैप!’’ तनीषा बोली.

”हां, सही तो कह रही है…किसी अमीर फेमिली के बच्चे का किडनैप कर लो और उसे फोन कर 15-20 लाख रुपए फिरौती के झटक लो.’’ ललित बोला. ”और इस में पुलिस केस का भी अधिक खतरा नहीं रहता है.’’ विनीत तुरंत बोला.

”राधिका क्या कहती हो? इस पर तैयारी शुरू की जाए?’’ तनीषा बोली. ”हांहां, हम लोग इस के लिए तैयार हैं.’’ विनीत और ललित एक साथ बोल पड़े.

जल्द ही भाईबहन और पतिपत्नी ने शातिराने अंदाज में बच्चे के किडनैप करने की योजना बना डाली.

बात 23 अप्रैल, 2026 की है. शाम के वक्त मध्य प्रदेश के शहर इंदौर के लालाराम नगर क्षेत्र में 9 वर्षीय नैतिक सोनकर और 11 वर्षीय सम्राट एक पार्क में क्रिकेट खेल रहे थे. वहां राधिका और तनीषा भी मौजूद थीं. उन्होंने बच्चों को नाश्ता और पालतू जानवर दिखाने का लालच दिया. बच्चे उन की बात का भरोसा कर उन के साथ चल दिए.

23 अप्रैल की रात 8 बजे तक इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र में बसे लालाराम नगर में सब कुछ  सामान्य था. किंतु एक घंटे बाद इलाके में रहने वाले 9 और 11 साल के 2 बच्चों के किडनैप की खबर से पूरे इलाके में हलचल मच गई.

लालाराम नगर में अधिकांश निम्नमध्यम वर्गीय परिवार रहते हैं. इसलिए ऐसे 2 परिवारों के मासूम बच्चों के किडनैप की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी. दरअसल, हुआ यह कि यह दोनों बच्चे रोज की तरह तिरुपति खेल मैदान में मोहल्ले के बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे.

यह इन का रोज का काम था, मगर जब उस रोज अंधेरा घिरने तक दोनों बच्चे अपने घर वापस नहीं लौटे, तब दूसरे बच्चों ने बताया कि उन को एक लड़की तोता, खरगोश दिखाने के लिए ले गई थी.

यह सूचना थाना पलासिया में दी गई तो टीआई सुरेंद्र सिंह रघुवंशी ने इस मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने सीनियर औफिसर्स को इंफार्मेशन देने के बाद एक टीम इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में लगा दी.

एक कैमरे की फुटेज में दोनों बच्चे एक युवती के साथ जाते दिखाई दिए. यह देख कर पुलिस के साथसाथ मोहल्ले वाले भी बच्चों की खोज में जुट गए.

लेकिन इस से पहले कि उन का कुछ पता चल पाता, रात लगभग 11 बजे किडनैप हुए एक बच्चे की मम्मी के फोन पर वीडियो कौल आई. कौल करने वालों ने बच्चों को छोडऩे के लिए 15 लाख रुपए की फिरौती की मांग की.

जिन 2 बच्चों का किडनैप हुआ था, उन में एक के फादर गन्ने के रस का ठेला लगाते थे, जबकि दूसरे के फादर रामायण मंडली में ढोलक बजाने का काम करते थे. ऐसे में इन परिवारों के लिए इतने पैसों का इंतजाम करना आसान नहीं था, इसलिए किडनैपर ने जिस महिला को फोन कर के फिरौती मांगी थी, वह उस के सामने बारबार हाथपैर जोड़ रही थी.

इस मुसीबत की घड़ी में लालाराम नगर में रहने वाले सभी परिवार एकजुट हो गए. जिस के पास जो कुछ था, सब ला कर पीडि़त परिवार को सौंप दिया. कुछ ही देर में साढ़े 7 लाख रुपए जमा हो गए. इसलिए परिवार ने बदमाशों से अनुरोध किया कि वे इतना पैसा ले कर उन के बच्चों को छोड़ दें. इस से अधिक पैसा वे नहीं दे पाएंगे. जबकि किडनैपर्स 15 लाख से कम पर राजी नहीं हो रहे थे.

इधर किडनैपर्स और पीडि़त परिजनों के बीच फिरौती की रकम को ले कर बात चल रही थी, उधर पुलिस भी अपने स्तर से काररवाई करने में लगी हुई थी. एसीपी तुषार सिंह के नेतृत्व में पलासिया, संयोगिता गंज, छोटी ग्वालटोली, राजेंद्र नगर, द्वारकापुरी, तुकोगंज आदि थानों की पुलिस टीमें अपने काम में लग चुकी थीं.

दरअसल, फिरौती के लिए जिस फोन नंबर से कौल आई थी, उस की लोकेशन राजेंद्र नगर की मिल रही थी. इसलिए पुलिस का पूरा ध्यान राजेंद्र नगर पर था.

इस के अलावा अपहरण के स्थान से राजेंद्र नगर तक जाने वाले रास्तों में पडऩे वाले इलाके में भी पुलिस सतर्क थी. साइबर टीम लगातार काम कर रही थी, जिस के चलते पता चला कि जिस नंबर से आरोपी पीडि़त परिवार से वाट्सऐप चैट कर रहे थे, वह राजेंद्र नगर थाना इलाके के दत्तनगर में ऐक्टिव था.

इसे ध्यान में रख कर बड़ी संख्या में पुलिस दत्तनगर में चारों तरफ फैल कर एकएक मकान पर नजर टिका चुकी थी. पूरी तरह यह एक गहन अभियान बन गया था. इस दौरान पुलिस टीम ने पाया कि आधी रात हो जाने के बाद भी एक मकान की लाइट बारबार जल रही है और बंद हो रही है.

पुलिस ने शक के आधार पर वहां दबिश दी तो वहां किडनैप किए गए दोनों बच्चों के साथ 19 साल की राधिका नाम की युवती पाई गई. इस तरह पुलिस को 5 घंटे में ही दोनों अपहृत बच्चों को मुक्त करने में सफलता मिल गई थी.

राधिका को गिरफ्तार कर लिया गया था. उस से पूछताछ की गई. तब उस ने अपने 3 साथी सगे भाई विनीत, अपनी सहेली तनीषा और उस के पति ललित के नाम बताए. पुलिस ने उसी समय छापेमारी कर अन्य 3 आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया.

Child Kidnapping Case

दोनों बच्चे जैसे ही किडनैपर्स के चंगुल से छूट कर अपनेअपने घर आए तो पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया. बच्चों ने बहलाफुसला कर साथ ले जाने की बात बताई. उन्होंने बताया कि कुछ दिनों से एक युवती खेल के मैदान में आ रही थी.

वह भी बच्चों के साथ खेल में शामिल हो जाती थी. बच्चे उन्हें दीदी कह कर बुलाने लगे थे. घटना के रोज उसी दीदी ने उन्हें तोता, खरगोश और कुत्तों के बच्चे देने की बात बोल कर अपने साथ ले गई थी. वे उन्हें कुछ दूर तक पैदल, फिर कार में बैठा कर ले गई थी. घर ले जा कर उन्होंने उन को खानेपीने के लिए भी दिया. इसी बीच एक बच्चे से उस की मम्मी का फोन नंबर लिया था.

बच्चों ने यह भी बताया कि जब पुलिस आई तो दीदी ने कहा था कि बदमाश आ गए हैं, तुम लोग छिप जाओ और शोर मत करना. दीदी के कहने पर हम लोग गैलरी में चादर ओढ़ कर छिप गए थे.

दूसरी तरफ आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में किडनैप की पूरी कहानी इस प्रकार बताई—

राधिका को पहले से मालूम था कि तिरुपति ग्राउंड में रईस परिवारों के बच्चे खेलने आते हैं, इसलिए प्लान बना कर 2 दिनों तक तनीषा ने वहां रेकी की और बच्चों को मोबाइल पर जानवरों के वीडियो दिखा कर उन से दोस्ती करने के बाद 11 अप्रैल, 2026 को उन में से 2 बच्चों को अपने साथ ले गई.

लेकिन यहां बच्चों की पहचान करने में उस से गलती हो गई, जिस से उस ने 2 मजदूर परिवार के बच्चों का किडनैप कर लिया.

पुलिस द्वारा किडनैप में इस्तेमाल किए गए कई मोबाइल फोन जब्त किए गए. पुलिस जांच में पाया गया कि किडनैप की साजिश पहले से रची गई थी.

घटना से 3-4 दिन पहले से ही तनीषा सेन उस गार्डन के आसपास घूम रही थी. उस ने पपी, कबूतर, सफेद चूहे, खरगोश और बिल्लियों की कहानियां सुना कर और अपने फोन पर जानवरों के वीडियो दिखा कर धीरेधीरे बच्चों से दोस्ती कर ली थी. विनीत ने बच्चों से वादा किया कि अगर वे उन के साथ चलेंगे तो उन्हें ये जानवर तोहफे में मिलेंगे. यह सुन कर बच्चे बिना किसी शक के उन के जाल में फंस गए.

तनीषा सेन ने एक कैब बुलाई और दोनों बच्चों को राजेंद्र नगर इलाके के एक फ्लैट में ले गई, जहां उस ने उन के वीडियो बनानी शुरू कर दी.

जब उस रात दोनों बच्चों ने कहा कि उन्हें भूख लगी है तो उस ने उन्हें खिलाने के लिए दूध में सेवइयां बनाईं. एसीपी सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि बच्चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया.

बचाए जाने के तुरंत बाद दोनों बच्चों को मैडिकल जांच के लिए एमवाई हौस्पिटल ले जाया गया और बाद में उन्हें उन के पेरेंट्स को सौंप दिया गया.

पुलिस ने चारों आरोपियों राधिका, उस के भाई विनीत, सहेली तनीषा सेन और तनीषा के पति ललित को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

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