Noida Honey Trap Case. सुमन ने अपने साथियों के साथ मिल कर नेता अवधेश मिश्रा को ब्लैकमेल करने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन अवधेश ने पुलिस के पास जा कर उस का सारा खेल बिगाड़ दिया.

अपनी सफेद रंग की डीएल-13 सीसी 2442 नंबर की होंडा इमेज कार के इंडीकेटर जलाए अवधेश मिश्रा जीआईपी मौल की पार्किंग में सब से अलग खड़ी किए ड्राइविंग सीट पर बैठा बेचैनी से पहलू बदल रहा था. कभी उस की नजर गाड़ी के दोनों ओर लगे मैजिक मिरर पर जाती तो कभी कलाई घड़ी या फिर बगल की सीट पर रखे मोबाइल फोन पर. बेचैनी काफी बढ़ गई तो वह होंठों ही होंठों में बड़बड़ाया, ‘किसी भी चीज की एक हद होती है, 10 बजे आने को कहा था, 11 बज रहे हैं. न खुद आई और न फोन किया. मैं फोन करता हूं तो उठाती भी नहीं है.’

न जाने कितनी बार अवधेश के मन में आया कि अब उसे वापस चले जाना चाहिए. लेकिन सुमन से मिलने की लालसा उसे रोक देती कि थोड़ी देर और इंतजार कर ले. शायद वह आ ही जाए. ऐसा करतेकरते उसे लगा कि उसे चले जाना चाहिए, अब वह नहीं आएगी.

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उस ने कार स्टार्ट भी कर ली. लेकिन तभी उस की नजर मैजिक मिरर पर गई तो पीछे से सुमन आती दिखाई दे गई. सुमन को आते देख उस का गियर पर गया हाथ रुक गया. सुमन करीब आई और कार का दरवाजा खोल कर उस की बगल वाली सीट पर बैठते हुए बोली, ‘‘आई एम रियली वैरी सौरी. क्या करती, ट्रैफिक जाम में इस तरह से फंस गई कि समय पर पहुंच ही नहीं सकी.’’

‘‘तुम फोन नहीं कर सकती थी तो कम से कम मेरा ही फोन उठा लिया होता. मन को संतोष हो जाता.’’ अवधेश ने झल्ला कर कहा.

‘‘सौरी तो कह दिया, अब क्या मेरी जान ले कर संतोष होगा.’’ सुमन ने मुसकराते हुए कहा. ‘‘अच्छा, अब यह बताओ कि चलना कहां है?’’ अवधेश ने पूछा.

‘‘हम ने जहां चलने के लिए पहले से तय कर रखा है.’’ सुमन ने अवधेश की आंखों में आंखें डाल कर मुसकराते हुए कहा. ‘‘इस का मतलब आज पूरी तैयारी कर के आई हो. ठीक है, वहीं चलते हैं. आज का तुम्हारा पूरा दिन मेरे लिए है न?’’ अवधेश ने पूछा.

‘‘हां भई, अब चलो. वैसे भी देर हो गई है. और देर मत करो.’’ बेचैन सी होते हुए सुमन ने कहा. ‘‘ठीक है बाबा, चल रहा हूं.’’ कह कर अवधेश ने गाड़ी आगे बढ़ा दी.

बातें करते हुए दोनों 15-20 मिनट में निठारी स्थित ‘सूर्या गेस्टहाउस’ जा पहुंचे. अवधेश ने गेस्टहाउस में कमरा बुक कराया और सुमन के साथ कमरे में चला गया. अवधेश कमरे में पहुंचा ही था कि सुमन ने पर्स से मोबाइल निकाला और कोने में जा कर बात करने लगी. उसे फोन पर बात करते देख अवधेश ने कहा, ‘‘कहा तो था कि आज का पूरा दिन मेरे लिए है. यह बीच में कौन आ गया, फोन कर के किस से बात कर रही हो?’’

सुमन ने फोन काट कर कहा, ‘‘सौरी, कुछ जरूरी काम था, फोन कर के उसी के लिए कह रही थी. अब न किसी को फोन करूंगी, न किसी का फोन रिसीव करूंगी. चाहो तो इसे अपने पास रख लो.’’ सुमन ने अपना मोबाइल फोन अवधेश की ओर बढ़ाते हुए कहा.

‘‘इसे अपने पास ही रखो.’’ अवधेश ने कमरे में पडे़ बेड पर बैठ कर जूते उतारते हुए कहा.

जूते वगैरह उतार कर दोनों ने हाथमुंह धोए और बेड पर आ कर बैठे ही थे कि चायनाश्ता आ गया. चायनाश्ते का और्डर अवधेश कमरा बुक कराते समय ही दे आया था. चायनाश्ता करने के बाद लड़का बरतन उठाने आया तो अवधेश ने खाने का आर्डर देते हुए कहा. ‘‘खाना 2 बजे ले आना. और हां, इस बीच बिलकुल डिस्टर्ब मत करना.’’

इस तरह एकांत में अवधेश सुमन से बहुत दिनों बाद मिला था, इसलिए वह उस के साथ का एक भी पल बेकार नहीं जाने देना चाहता था. उस ने अपने तो कपड़े उतारे ही, सुमन के भी कपड़े उतार कर उसे बांहों में भर लिया. अवधेश सुमन को पा कर दीनदुनिया भूलता, उस के पहले ही कमरे में होने वाली चहलपहल सुन कर वह एकदम से सुमन से अलग हो गया.

अवधेश ने दरवाजे की ओर देखा तो उसे कमरे के अंदर 2 युवक और एक महिला दिखाई दी. उन में से एक युवक के हाथों में वीडियो कैमरा था. उन्हें देख कर अवधेश सन्न रह गया. वह समझ गया कि बंद कमरे में उस ने सुमन के साथ जो किया है, वह सब कैमरे में रिकौर्ड हो चुका है. झटके से उस ने खुद को चादर से ढका और गुस्से में बोला, ‘‘तुम लोग कौन हो और इस कमरे में यह क्या कर रहे हो?’’

तीनों खिलखिला कर हंसने लगे. अवधेश उन्हें हैरानी से ताक रहा था. सुमन उस के बगल से उठी और आराम से कपड़े पहन कर उन तीनों के बगल जा खड़ी हुई. उस ने भी हंसी में उन लोगों का साथ दिया तो अवधेश को समझते देर नहीं लगी कि यह सब सुमन का ही कियाधरा है. उस ने सुमन को घूरते हुए कहा, ‘‘तो यह सब तुम्हारी साजिश थी?’’ ‘‘बड़ी जल्दी समझ गए.’’ सुमन ने कुटिल मुसकान बिखेरते हुए कहा.

अवधेश नादान नहीं था. उसे पता था कि यह सब क्यों किया गया है. इसलिए उन के कुछ कहने से पहले ही उस ने पूछा, ‘‘तुम लोग चाहते क्या हो?’’

‘‘पहले तो हम तुम्हें लूटना चाहते हैं.’’ कह कर उन लोगों ने अवधेश की पैंट से पर्स निकाल उस में रखे 12 हजार रुपए निकाल कर अपनी जेब में रख लिए. इस के बाद उस की कार की चाबी ले कर दोनों में से एक युवक ने कहा, ‘‘हम जो चाहते हैं, अब तुम वह सुनो. किसी को कुछ बताए बगैर तुम्हें हम लोगों को 4 लाख रुपए देने होंगे. अगर तुम ने पैसे नहीं दिए तो हम ने तुम्हारी सुमन के साथ जो वीडियो बनाई है, वह ‘यूट्यूब’ पर डाल देंगे. इस के बाद तुम्हारा यह खेल सारी दुनिया देखेगी.

‘‘यही नहीं, हम एक काम और करेंगे. इस में से कुछ फोटो बनवा कर तुम्हारी पत्नी को भी दे आएंगे. वह भी देख लेगी कि उस के पतिपरमेश्वर क्याक्या करते हैं. अगर तुम्हारा मन इतने से भी नहीं भरेगा तो इस फिल्म को टीवी पर चला कर सब को दिखा देंगे. तब तुम इस तरह बदनाम हो जाओगे कि किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे. अब तुम जानो कि तुम्हें अपनी इज्जत प्यारी है या 4 लाख रुपए. तुम हमें पैसे दे दो, हम तुम्हें यह फिल्म वापस कर देंगे.’’

‘‘अगर तुम लोगों ने ऐसा किया तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगा.’’ अवधेश ने हाथ जोड़ कर कहा. ‘‘अगर तुम मुंह दिखाने लायक रहना चाहते हो तो 4 लाख रुपए दे दो.’’ उसी युवक ने कहा.

‘‘4 लाख रुपए… इतनी बड़ी रकम का इंतजाम मैं कहां से करूंगा?’’ अवधेश गिड़गिड़ाया. ‘‘बदनामी से बचना है, तो रुपयों का इंतजाम करना पड़ेगा.’’ इस बार सब ने एक साथ कहा.

अवधेश मिन्नतें करता रहा, लेकिन उन लोगों पर कोई असर नहीं हुआ. उन में से एक ने अवधेश की चादर खींच कर कहा, ‘‘जब अय्याशी कर रहे थे तो तुम्हें पता नहीं था कि पैसे कहां से आएंगे. सारा मजा मुफ्त में ही लेना चाहते थे.’’

इस के बाद उसी युवक ने अवधेश के पास आ कर उस के गाल पर जोरदार थप्पड़ मार कर कहा, ‘‘एक बात का ध्यान रखना. अगर तुम पुलिस के पास गए तो तुम्हारी यह फिल्म सारी दुनिया देखेगी.’’

इस के बाद अवधेश को उसी तरह छोड़ कर वे चारों हंसते हुए कमरे से बाहर निकल गए. अवधेश की कार की चाबी भी वे साथ ले गए थे. गेस्टहाऊस की पार्किंग में खड़ी उस की कार को ले कर वे चले गए.

अपनी करनी पर अवधेश पछता रहा था. उस का दिमाग काम नहीं कर रहा था. काफी देर तक वह उसी तरह बैठा सोचता रहा कि अब क्या करे. काफी सोचविचार के बाद दिमाग कुछ दुरुस्त हुआ तो उस ने उठ कर कपडे़ पहने और खुद को दुरुस्त कर के क्षेत्रीय थाना सेक्टर-39 जा पहुंचा.

थानाप्रभारी धर्मेंद्र चौधरी से मिल कर उस ने अपना परिचय दिया. लेकिन सच्चाई बताने के बजाय उस ने एक दूसरी ही कहानी बता कर थाना सेक्टर-39 में रिपोर्ट दर्ज करा दी. उस ने थानाप्रभारी को बताया, ‘‘पिछले कई दिनों से कोई फोन कर के मुझ से मिलने की गुजारिश कर रहा था. मैं ने उसे औफिस में आ कर मिलने को कहा. लेकिन औफिस आने में उस ने असमर्थता व्यक्त की.

‘‘जब वह बारबार मिलने के लिए कहने लगा तो मैं ने उस से मिलने का मन बना लिया. उसी से मिलने के लिए मैं 11 बजे के करीब नोएडा स्थित जीआईपी मौल अपनी गाड़ी से पहुंच गया. तय प्रोग्राम के अनुसार वहां गेट के बाहर खड़े हो कर उस का इंतजार करने लगा. उसे फोन किया तो इस बार दूसरी ओर से किसी महिला की आवाज आई. महिला की आवाज सुन कर मैं चौंका.’’

महिला ने कहा, ‘‘आप इंतजार कीजिए. मैं थोड़ी देर में पहुंच रही हूं.’’

थोड़ी देर बाद एक लड़की अवधेश की कार के पास आई. वह उसे पहचानता नहीं था. उस ने उसे पहचानने की कोशिश की, लेकिन पहचान नहीं सका. लड़की कार का दरवाजा खोल कर उस की बगल वाली सीट पर बैठ कर बोली, ‘‘सर, मैं आप से पहली बार मिल रही हूं, लेकिन मैं अपनी इस पहली मुलाकात को यादगार बनाना चाहती हूं.’’

लड़की ने उसे काफी प्रभावित किया था. वह उस की बात पर विचार कर ही रहा था कि तभी लड़की के मोबाइल पर किसी का फोन आया. लड़की ने फोन रिसीव कर के कहा, ‘‘मैं अभी एक जरूरी मीटिंग में हूं, बाद में फोन करना.’’

इतना कह कर लड़की ने फोन काट दिया. इस के बाद उस ने कहा, ‘‘सर, मैं आप की जनभावना पार्टी में शामिल हो कर पार्टी की कार्यकर्ता बनना चाहती हूं, क्योंकि राजनीति में मुझे बहुत रुचि है.’’

वह लड़की अभी उस से बातें कर रही थी कि 2 लड़के आ कर वहां खड़े हो गए. उन के साथ एक महिला भी थी. उन तीनों को देख कर अवधेश की कार में बैठी लड़की ने हाथ हिलाते हुए कहा, ‘‘आइए, मैं आप लोगों का ही इंतजार कर रही थी.’’

अवधेश कुछ समझ पाता, उस के पहले ही बगल में बैठी लड़की अपनी ओर का दरवाजा खोल कर जैसे ही उतरी, तुरंत उस का परिचित युवक उस की जगह पर बैठ गया. दोनों महिलाएं पीछे की सीट पर बैठ गईं तो दूसरा युवक अवधेश को धकेल कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया.

अब वह दोनों युवकों के बीच फंस गया था. उन लोगों ने उसे चुप रहने की धमकी दे कर उस की कार तेज रफ्तार से भगा दी. चलती गाड़ी में ही उन्होंने उस के पर्स से 12 हजार रुपए निकाल लिए. थोड़ी दूर जाने के बाद उसे जान से मारने की धमकी दे कर उसे भी कार से उतार दिया और खुद कार ले कर फरार हो गए. उस के बाद किसी तरह पूछतेपाछते हुए वह थाने तक पहुंचा है. इतना सब बता कर अवधेश ने अपनी कार दिलाने की गुजारिश की.

बात पूरी होतेहोते अवधेश की आंखें छलक पड़ी थीं. उसे इस तरह परेशान देख कर थानाप्रभारी ने उसे आश्वासन दे कर अपराध संख्या 19/2014 पर भादंवि की धारा 392, 386, 120बी, 34 के तहत मुकदमा दर्ज करा कर इस मामले की जांच जीआईपी के चौकीप्रभारी सबइंसपेक्टर विवेक शर्मा के नेतृत्व में एक टीम बना कर सौंप दी. उन की इस टीम में कांस्टेबल सिंकू चौधरी, ओमप्रकाश राय, सुदेश कुमार और महिला कांस्टेबल चित्रा चौधरी को शामिल किया गया था.

सबइंसपेक्टर विवेक शर्मा ने उस मोबाइल नंबर पर फोन मिलाया तो वह बंद मिला. उन्होंने उस नंबर को सर्विलांस पर लगवाने के साथ उस की आईडी निकलवाई तो पता चला कि वह नंबर सुहैल खान के नाम था, जो दिल्ली के मंडावली इलाके में रहता था. पुलिस अवधेश को साथ ले कर उस पते पर पहुंची तो वहां उसे सुमन मिली.

अवधेश ने सुमन को पहचान कर पुलिस को बताया कि दोनों महिलाओं में एक यही थी. पुलिस सुमन को नोएडा ले आई. पूछताछ में सुमन ने अपने अन्य साथियों के बारे में बता दिया. इस के बाद पुलिस ने उस के साथियों मनोज कुमार, नीरज और शालिनी की तलाश में कई जगहों पर छापे मारे, लेकिन वे पुलिस के हाथ नहीं लगे. शायद उन्हें सुमन के पकड़े जाने की भनक लग गई थी, इसलिए वे अपनेअपने ठिकानों से फरार हो चुके थे.

सुमन से की गई पूछताछ में अवधेश मिश्रा को लूटने और ब्लैकमेल करने की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी.

दरअसल अवधेश मिश्रा ने अपने लूटे जाने के बारे में पुलिस को जो बताया था, वह पूरी तरह से सच नहीं था. उस की कार और रुपए जरूर अभियुक्त ले गए थे, लेकिन उस ने अपने अपहरण की कोशिश की जो बात पुलिस को बताई थी, वह झूठ थी. इस मामले में सच्चाई यह थी.

इस कहानी की शुरुआत 5-6 साल पहले हुई थी. तब सुमन की शादी नहीं हुई थी. 33 वर्षीया सुमन अपने परिवार के साथ दिल्ली के पांडवनगर के गणेशनगर में रहती थी. उस के पड़ोस में ही मूलरूप से झारखंड का रहने वाला अवधेश मिश्रा भी अपने परिवार के साथ रहता था. 45 वर्षीय अवधेश मिश्रा इलाके का जानामाना आदमी था. इस की वजह यह थी कि वह ‘जनभावना पार्टी’ का राष्ट्रीय अध्यक्ष था.

सुमन भाईबहनों में सब से बड़ी थी, इसलिए घर या बाहर के कामों के लिए ज्यादातर उसे ही बाहर जाना पड़ता था. जब कभी किसी सरकारी दफ्तर का काम होता था, वह काम आसानी से हो जाए, इस के लिए वह अवधेश मिश्रा की मदद लेती थी. चूंकि अवधेश नेता था, इसलिए कैसा भी काम होता था, वह एक बार में ही करवा देता था.

लगातार अवधेश से मिलने की वजह से सुमन की उस से अच्छी जानपहचान हो गई थी. सुमन देखने में भी ठीकठाक थी और पढ़ीलिखी होने की वजह से बातें भी ढंग से करती थी. इसलिए अवधेश जब उसे देखता, उस का दिल उस के लिए मचल उठता था. यही वजह थी कि वह उसे चाहत से एकटक ताकता रहता था.

सुमन भी बच्ची नहीं थी, जो वह अवधेश की नजरों को न पहचानती. धीरेधीरे उसे अवधेश का इस तरह ताकना अच्छा लगने लगा था. अब तक सुमन 23 साल की हो चुकी थी. आकर्षक कदकाठी की सुमन बहुत अच्छी लगती थी. अवधेश तो पहली ही मुलाकात में उसे दिल दे चुका था. लेकिन सुमन को इस बात की जानकारी देर से हुई थी.

एक दिन सुमन अवधेश के पास किसी काम से गई तो वह उसे टकटकी लगाए देखता रहा. तब सुमन ने उसे टोका, ‘‘सर, आप मुझे इस तरह क्यों ताक रहे हैं?’’

अवधेश चाह कर भी दिल की बात नहीं छिपा सका. सुमन ने जब दोबारा अपना सवाल दोहराया तो उस ने सुमन का हाथ थाम कर दिल की बात कह दी, ‘‘सुमन, मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. अगर तुम जैसी सुंदर लड़की मेरे जीवन में आई होती तो शायद मैं दुनिया का सब से खुशकिस्मत इंसान होता. लेकिन अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है. अगर तुम चाहो तो मेरी यह जिंदगी अभी संवर सकती है.’’

‘‘सर, आप यह कैसी बातें कर रहे हैं. कहां आप और कहां मैं. फिर आप शादीशुदा ही नहीं, बालबच्चेदार हैं. अगर आप की पत्नी और बच्चों को इस बारे में पता चल गया तो वे मेरे और आप के बारे में क्या सोचेंगे.’’ सुमन ने कहा.

‘‘तुम्हें इस की चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्हें कभी पता ही नहीं चल पाएगा. तुम सिर्फ यह बताओ कि तुम मुझ से प्यार करती हो या नहीं?’’ अवधेश ने कहा.

सुमन ने हामी में सिर हिला दिया तो अवधेश ने उस का हाथ अपनी दोनों हथेलियों के बीच ले कर सहलाते हुए कहा, ‘‘सुमन, तुम कितनी अच्छी हो. अब देखना मैं तुम्हारे लिए क्याक्या करता हूं. तुम्हें मैं वह हर खुशी दूंगा, जो अब तब तुम्हें नहीं मिली.’’

सुमन के कपोल लाल हो गए. उस ने आंखें झुका लीं तो अवधेश ने एक हाथ की अंगुलियों से उस की ठुड्डी ऊपर उठा कर कहा, ‘‘इस तरह शरमाने से तो तुम्हारी सुंदरता और बढ़ गई.’’

इस के बाद सुमन अकसर एकांत में अवधेश से मिलने लगी तो अवधेश ने इस का लाभ भी उठा लिया. अवधेश तो इस मामले का खिलाड़ी था. कुंवारी सुमन को भी जब एक बार शारीरिक सुख मिला तो वह इसे बारबार पाने के लिए बेचैन रहने लगी. यही वजह थी कि जब भी उसे मौका मिलता, वह अवधेश के पास पहुंच जाती.

सुमन अवधेश को खुश करने लगी तो अवधेश भी उस का हर तरह से खयाल रखने लगा. वह उसे अपनी कार में बैठा कर घुमाताफिराता, महंगे रेस्टौरेंटों में खाना खिलाता, उपहार खरीद कर देता. इस सब से सुमन को लगने लगा कि उस के जीवन में बहार आ गई है. अवधेश उसे इसी तरह जीवन का हर सुख देता रहेगा.

धीरेधीरे पूरा एक साल बीत गया. सुमन का अवधेश से तो प्रेमसंबंध चल ही रहा था, उसी बीच उस की दिल्ली के ही मंडावली के रहने वाले सुहैल खान से जानपहचान हुई तो वह उस से भी प्यार करने लगी. फिर उस ने घर वालों की मरजी के खिलाफ जा कर उस से शादी कर ली.

सुहैल अकेला ही रहता था और गुजरबसर के लिए छोटामोटा काम करता था. सुमन ने भले ही सुहैल से शादी कर ली थी, लेकिन वह अवधेश को भूल नहीं पाई थी. उसे जब भी मौका मिलता था, वह अवधेश से मिलने पहुंच जाती थी. बड़े सपने देखने वाली सुमन की हर जरूरत अवधेश पूरी कर रहा था. घर पर पति नहीं होता था, सुमन उसे घर भी बुला लेती थी.

सुमन के पड़ोस में ही शालिनी रहती थी. 36 वर्षीया शालिनी के पति विजय सिंह की काफी पहले मौत हो चुकी थी. पति की मौत के बाद अपने गुजरबसर के लिए वह एक पत्रिका के औफिस में नौकरी करने लगी थी. पड़ोस में रहने की वजह से शालिनी और सुमन में जल्दी ही गहरी दोस्ती हो गई थी. दोस्त होने की वजह से दोनों एकदूसरे से अपने दिल की बात बता दिया करती थीं.

किसी दिन जब शालिनी ने अवधेश को सुमन के घर से निकलते देखा तो उत्सुकतावश उस के बारे में पूछ लिया. तब सुमन ने शालिनी से अपने और अवधेश के संबंधों के बारे में बता कर कहा कि यह आदमी बहुत पैसे वाला है. यह सुन कर शालिनी के दिमाग में तुरंत एक ऐसी योजना आई, जिस से अवधेश से मोटा माल मिल सकता था. उस ने तुरंत कहा, ‘‘यार सुमन, यह आदमी पैसे वाला है तो इस से तुझे क्या मिलता है. आता है, मुफ्त में मजा ले कर चला जाता है. यह तेरे पास तभी तक आएगा, जब तक इस का मन नहीं भरता. जिस दिन इस का मन भर जाएगा, दूध की मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देगा. यही नहीं, तुझे पहचानने से भी इंकार कर देगा.’’

‘‘क्या कह रही हो शालिनी? अवधेश ऐसा नहीं है.’’ सुमन ने कहा. ‘‘अभी तेरे पास आ रहा है न, इसलिए तुझे ऐसा लग रहा है.’’

‘‘तो फिर क्या किया जा सकता है? मैं उसे मना भी नहीं कर सकती, क्योंकि वह मेरी बहुत सी जरूरतें पूरी करता है.’’ ‘‘ऐसा कर, तू ने उसे जो सुख दिया है, उस की कीमत वसूल कर ले.’’ शालिनी ने कहा, ‘‘अच्छा एक बात बता, तू उस से एक लाख रुपए मांगेगी तो क्या दे देगा?’’

‘‘नहीं देगा.’’ सुमन ने पूरे विश्वास के साथ कहा. ‘‘अब तू खुद ही सोच, किसी होटल में 4 रोटियां खिला दीं, 2-4 उपहार दे दिए और बदले में तेरे साथ मजे लेता रहा. उस मजे की यही कीमत है?’’ शालिनी ने समझाया.

शालिनी की इन बातों ने सुमन को सोचने पर मजबूर कर दिया. उसे सोच में डूबी देख कर शालिनी ने कहा, ‘‘सुमन तू मेरी बात मान तो मेरे पास ऐसे ठरकी लोगों को सबक सिखाने का एक रास्ता है.’’

‘‘वह क्या?’’ सुमन ने पूछा. ‘‘उस से मोटी रकम ऐंठ कर मस्ती से जी.’’ शालिनी ने कहा.

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इस के बाद शालिनी ने सुमन को जो समझाया, उस से सुमन की आंखों में चमक आ गई. उसे लगा कि शालिनी ठीक कह रही है. सुमन ने सहमति जाहिर कर दी, लेकिन जब उसे लगा कि अगर अवधेश पुलिस के पास चला गया तो शालिनी ने कहा, ‘‘ऐसे ठरकी पुलिस के पास नहीं जाते, क्योंकि उन्हें खुद की बदनामी का डर रहता है. ऐसे लोग परदे के पीछे कुछ भी करते रहें, लेकिन सब के सामने साफसुथरा बने रहना चाहते हैं. अवधेश भी पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं कर पाएगा.’’

‘‘लेकिन हम दोनों यह सब करेंगे कैसे?’’ सुमन ने पूछा. ‘‘तुझे इस की चिंता करने की जरूरत नहीं है. मेरे कुछ परिचित हैं, जो प्रेस में काम करते हैं. मैं उन से आज ही बात कर लूंगी.’’ शालिनी ने कहा.

‘‘अच्छा, मनोज, जिस के साथ तुम रहती हो?’’ सुमन ने कहा. ‘‘हां, वह बहुत तेज आदमी है, सब कुछ आसानी से कर लेगा. अब तू वही कर, जैसा मैं कहूं.’’ शालिनी ने कहा.

सुमन वह सब करने को तैयार हो गई, जैसा शालिनी ने कहा था. अगले दिन शालिनी मनोज को अपने साथ ले कर सुमन के घर आई. मनोज ‘साधना टीवी’ में नौकरी करता था. उस के पिता का नाम बख्तावर सिंह था, जो मंडावली में रहते थे. वैसे वह उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला था. शालिनी उसी के साथ रहती थी.

बातचीत में मनोज ने सुमन को यकीन दिलाया कि वह अपने एक दोस्त के साथ मिल कर अवधेश मिश्रा को इस तरह फांसेगा कि मजबूरन वह मोटी रकम उन्हें थमा देगा. इस के बाद मनोज ने नीरज मेहरा नाम के अपने एक दोस्त को अपनी इस योजना में शामिल कर लिया. वह साधना चैनल में कैमरा मैन था और इटावा का रहने वाला था.

उन्होंने जो योजना बनाई थी, उसी के तहत 12 दिसंबर, 2013 को सुमन ने अवधेश को फोन कर के उस के साथ गेस्टहाउस या होटल में रंगरलियां मनाने को कहा. अवधेश तुरंत तैयार हो गया. इस के बाद अवधेश ने नोएडा में मिलने की योजना बनाई. दोनों वहीं मिले. इस के बाद अवधेश सुमन को अपनी कार से निठारी स्थित सूर्या गेस्टहाउस ले गया, जहां दोनों एक कमरे में ठहरे.

अवधेश अपने और सुमन के कपड़े उतार कर उस में डूब गया. दूसरी ओर मनोज कैमरा लिए सब कुछ उस में कैद करता रहा. अवधेश सुमन से मिलने की खुशी में इस कदर खोया था कि उसे पता ही नहीं चला कि उस के साथ कौन सा खेल खेला जा रहा है1 वह यह भी नहीं जान पाया था कि 3 लोग कब उस के कमरे में आ कर छिप गए थे. बाद में पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में सुमन ने बताया था कि अवधेश जब बाथरूम गया था, तब उस ने तीनों को कमरे के अंदर कर लिया था.

जब तक अवधेश को शालिनी, मनोज और नीरज के कमरे में आने की भनक लगती, तब तक उस के और सुमन के शारीरिक संबंधों की रिकौर्डिंग हो चुकी थी. इसी के बल पर उन्होंने उस की पर्स से 12 हजार रुपए निकाल कर कार की चाबी तो ले ही ली, 4 लाख रुपए की और मांग की.

अवधेश फंस तो चुका ही था, उस ने उन्हें बहकाना चाहा. लेकिन जब उसे लगा कि वह बच नहीं पाएगा, तब वह पुलिस के पास पहुंच गया. बहरहाल उस ने पुलिस को बताई तो झूठी कहानी, लेकिन उस की इसी झूठी कहानी पर ब्लैकमेलर पकड़े गए. उस के बाद पुलिस को असली कहानी का पता चला. शायद वह बदनामी के डर से पुलिस के पास जाता भी न, लेकिन कार की वजह से पुलिस के पास जाना पड़ा.

सुमन के बयान के आधार पर पुलिस ने मनोज कुमार, शालिनी और नीरज की गिरफ्तारी के लिए छापे मारे. 9 जनवरी, 2014 की सुबह 6 बजे मुखबिर की सूचना पर मनोज कुमार अैर शालिनी को न्यू अशोकनगर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

इन्हीं के साथ नीरज भी था, लेकिन वह भागने में कामयाब हो गया. अवधेश की गाड़ी भी बरामद हो गई थी. पूछताछ में शालिनी और मनोज कुमार ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.

पुलिस ने पूछताछ के बाद सुमन, शालिनी और मनोज कुमार को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. पुलिस नीरज की तलाश कर रही है.

अवधेश ने जो किया, उस के लिए वह शर्मिंदा है. उस की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वह पत्नी और बच्चों से क्या कह कर माफी मांगे. मीडिया में खबर आने के बाद वह अपने घर से नहीं निकल रहा है.

— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित

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