Ketan Agarwal Murder Case. पेरेंट्स ने 20 वर्षीय सिया गोयल की शादी रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल के 26 वर्षीय बेटे केतन अग्रवाल से तय जरूर कर दी थी, लेकिन सिया किसी भी कीमत पर अपने प्रेमी क्रिकेटर चेतन चौधरी को छोडऩा नहीं चाहती थी. एक तरफ बेटे की शादी को भव्य तरीके से करने के लिए विशाल अग्रवाल ने 17 करोड़ रुपए में जयपुर में एक महल भी बुक करा दिया था. इतना ही नहीं, उन्होंने मेहमानों के सफर के लिए 2 स्पैशल विमान भी बुक करा दिए थे. तो वहीं दूसरी तरफ सिया अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को ठिकाने लगाने के लिए अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ ऐसी खौफनाक साजिश रच चुकी थी कि…
20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी का प्यार अटूट था. दोनों ही जीवन भर साथ रहना चाहते थे, लेकिन दोनों के आर्थिक स्तर में जमीनआसमान का अंतर था. सिया के पेरेंट्स को बेटी के लव अफेयर के बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने भागदौड़ कर सिया का रिश्ता एक धनाढ्य परिवार में तय कर दिया.
इस युवक का नाम केतन अग्रवाल था. सिया केतन अग्रवाल से शादी हरगिज नहीं करना चाहती थी. वह अपने पेरेंट्स से इस मंगनी का विरोध भी नहीं कर सकी. चूंकि सिया और चेतन एकदूसरे के साथ जीने और मरने की कसमें खा चुके थे, इसलिए दोनों ने मिल कर मंगेतर केतन से छुटकारा पाने के लिए चिंतन किया. एक दिन चेतन ने सिया से कहा, ”सिया, चलो हम कहीं दूर किसी दूसरे शहर में चल कर शादी रचा लेते हैं. बाद में जब स्थिति सामान्य हो जाएगी, तब वापस आ जाएंगे.’’
यह सुन कर सिया का मूड खराब हो गया. कहने लगी, ”कैसी बात करते हो तुम, जानते हो मेरी इतनी हाईप्रोफाइल फेमिली है. भाग कर शादी करने में मेरे परिवार की कितनी बदनामी होगी, इस का तुम्हें अंदाजा है?’’
”तो फिर तुम ही बताओ कि केतन से कैसे छुटकारा पाया जाए?’’ चेतन ने कहा.
”देखो, एक ही रास्ता है कि केतन को मौत के घाट उतार दिया जाए.’’ ”यह कैसे हो सकता है?’’
”जहर दे कर मार सकते हैं. उस की कार से एक्सीडेंट भी कराया जा सकता है और क्याक्या हो सकता है? यूट्यूब पर और क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज देख कर तुम भी चिंतन करो, मैं भी करती हूं. कोई भी ऐसा तरीका निकालो, जिस से केतन परलोक भी सिधर जाए और हम लोगों का नाम न आए और हम पर कोई शक भी न करे.’’ सिया गंभीर होते हुए बोली.
इतना तय कर के दोनों अपनेअपने घर चले गए और मिशन की तैयारी करने लगे.
जब से सिया गोयल की बुआ ने उस का रिश्ता 26 वर्षीय केतन अग्रवाल से तय करा दिया था. तभी से सिया एक गंभीर उलझन में फंस गई. उस समय उसे लगा कि अभी तो उस की उम्र कम है. हो सकता है अभी शादी में वक्त हो. पहले सगाई होगी. उस के 2-4 साल के बाद शादी होगी. तब तक केतन से शादी खत्म करने का कोई न कोई रास्ता भी निकल आएगा.
लेकिन सिया का यह अंदाजा गलत साबित हुआ. 11 फरवरी, 2026 को सिया गोयल और केतन अग्रवाल की सगाई हो गई. 25 नवंबर, 2026 का पंडित ने दोनों की शादी का मुहूर्त भी निकाल दिया.
मंगनी के बाद जब सिया अपने प्रेमी चेतन से मिलती है तो वह उसे उकसाते हुए कहता है कि तुम तो मुझ से शादी कर रही थी! तुम ने तो कसम खाई थी कि जिंदगी भर साथ रहेंगे, मरेंगे साथ, सब कुछ साथ करेंगे, लेकिन अब तो तुम पराई होने जा रही हो!
”देखो चेतन, मैं घर वालों को शादी के लिए मना नहीं कर पाई. अब तुम बताओ कि केतन को ठिकाने लगाने का कोई प्लान तैयार किया या नहीं? जो भी हो, प्लान जल्दी तैयार करो, फिर उसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा.’’
31 मई 2026 की बात है, केतन अपनी मंगेतर सिया को लोहागढ़ किला घुमाने ले गया. यह महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावला हिल स्टेशन के पास स्थित एक प्रसिद्ध पहाड़ी दुर्ग है. इस का इतिहास लगभग 2,000 साल पुराना है.
31 मई की वह दोपहर लोहागढ़ की चढ़ाई के लिए बेहद गर्म थी, लेकिन हवाओं में एक अलग ही बेचैनी थी. केतन, जो अपनी मंगेतर सिया को ले कर बेहद उत्साहित था, उसे सब से ऊंची चोटी ‘विंचू काटा’ की ओर ले गया.
सूरज की किरणें लोहागढ़ के पत्थरों से टकरा कर और भी तेज हो रही थीं. केतन, जो अपनी फिटनैस और ट्रैकिंग के शौक के कारण आगेआगे चल रहा था, वह पूरी तरह से बेखबर था कि उस के पीछे चल रही सिया के कदमों में प्यार कम और एक भयानक कशमकश ज्यादा है.
जैसे ही वे किले के सब से ऊंची चोटी पर पहुंचे, जहां से नीचे की खाई एक अंतहीन अंधेरे की तरह दिखाई दे रही थी, केतन उत्साह से चिल्लाया, ”देखो सिया, यहां से पूरा नजारा कितना अद्ïभुत दिखता है. यहां बैठते हैं, थोड़ी देर सुकून से बातें करेंगे.’’
केतन एक चट्टान के किनारे पर जा कर बैठ गया. वह अपनी खुशी में मग्न था, नीचे फैली हरियाली को निहार रहा था और भविष्य के सपने देख रहा था. उसे लगा कि वह अपनी मंगेतर के साथ जीवन के सब से खूबसूरत पलों में से एक जी रहा है. ठीक उसी पल, सिया उस के पास अपनी बांहों से उसे घेरे बैठी थी.
उस के दिमाग में अचानक एक विचार कौंधा, ”अगर मैं अभी इसे थोड़ा सा धक्का दे दूं, तो? क्या कोई देख पाएगा? क्या यह एक हादसा नहीं लगेगा?’’
बनाया हत्या का ब्लूप्रिंट
उस ने अपनी सांसें थाम लीं. केतन अभी भी उसी तरह बैठा था, बेफिक्र हो कर प्यारमोहब्बत की बातें कर रहा था. सिया के शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ी. उस का हाथ केतन के कंधे पर था. उस ने केतन की ओर देखा, एक क्षण के लिए दुनिया थम गई. उस का मन उस खाई की गहराई को माप रहा था और मन का दूसरा हिस्सा शायद उस अपराध की कल्पना से कांप रहा था.
केतन ने मुड़ कर उसे देखा और मुसकराते हुए कहा, ”क्या हुआ? तुम डरी हुई लग रही हो?’’
सिया ने अपना हाथ पीछे खींच लिया. उस दिन उस ने धक्का नहीं दिया. शायद डर की वजह से वह इतना साहस जुटा नहीं पाई या शायद इसलिए क्योंकि उस पल वह अकेली थी. इस के लिए उसे चेतन का साथ भी चाहिए था.
फिर भी वह 31 मई का दिन सिया के दिमाग में एक ‘ब्लूप्रिंट’ छोड़ गया था. नीचे उतरते वक्त, केतन अपनी मंगेतर का हाथ थामे आ रहा था, केतन सिया के प्यार में पागल हो चुका था.
देखने में सिया की तरफ से कोई कमी नजर नहीं आ रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे दोनों तरफ बराबर आग लगी हुई है, जबकि सिया का मन अब उस चट्टान पर वापस जाने की साजिशें बुन रहा था.
वह दिन सिर्फ एक सैर का अंत नहीं था, बल्कि एक जान को खत्म करने की उस सुनियोजित योजना की पहली कड़ी थी. वहां सब से ऊंची चोटी पर केतन को खतरनाक जगह बैठा देख सिया के मन में पहली बार उसे धक्का दे कर मारने का आइडिया आया.
सिया लोहागढ़ की ऊंचाई से वापस आई तो चेतन के पास गई. वह बहुत गुस्से में था. उस ने चेतन का हाथ थामने की कोशिश की, लेकिन चेतन ने झटक दिया.
”नहीं, चेतन! ऐसा नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो,’’ उस ने आगे कहा, ”वह मुझे बस घुमाने ले गया था. मेरा मन वहां बिलकुल नहीं था. मैं तो बस उस दिन का इंतजार कर रही हूं, जब मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो जाऊं. मुझे पता है कि वो क्या चाहता है, लेकिन मैं उसे सफल नहीं होने दूंगी. तुम चिंता मत करो सुहागरात जैसा दिन उस की जिंदगी में कभी नहीं आएगा.’’
सिया ने चेतन की आंखों में सीधे देखते हुए एक गहरी और डरावनी शांति के साथ कहा, ”मेरी बात सुनो. केतन का खेल खत्म हो जाएगा. मैं यहां यही बात करने आई हूं.’’
सिया की बात सुन कर चेतन का गुस्सा धीरेधीरे पिघल कर एक खतरनाक शांति में बदल गया. सिया ने बताया कि केतन को ऊंची पहाड़ी से धक्का दे कर उस की जीवनलीला समाप्त की जा सकती है. चेतन और प्रेमिका सिया में इस आइडिया को ले कर खूब चिंतन हुआ.
चेतन ने कहा कि यदि मैं साथ होता तो अपने दोनों के बीच का कांटा हमेशा के लिए निकल गया होता.
सिया ने कहा, ”अभी बिगड़ा क्या है? मैं उसे फिर उसी जगह पर ले कर जाऊंगी. आप साथ रहना. अपना क्रिकेट जैसा शानदार प्रदर्शन केतन को दुनिया से आउट करने के लिए हौसले और ताकत के साथ कर दिखाना.’’
इस तरह केतन को ऊंची पहाड़ी से धकेल कर उस की जीवन लीला समाप्त करने की योजना फाइनल हो गई.
यूं हुआ लव अफेयर
महाराष्ट्र के पुणे शहर का बिबवेवाड़ी इलाका आधुनिक रिहायशी कालोनियों और पुराने व्यावसायिक बाजारों का अनोखा संगम माना जाता है. यहां ड्राई फ्रूट्स, कपड़ों, इलेक्ट्रौनिक्स और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सैकड़ों दुकानें हैं. बिबवेवाड़ी के इसी व्यस्त बाजार में चेतन चौधरी की दुकान है.
उसी के पास सिया गोयल के पापा प्रवीण गोयल का भी औफिस है. यहां से बिजनैस संचालित होता है. लेकिन वहां इन लोगों की मुलाकात पहले नहीं हुई थी.
सिया का एक भाई साहिल गोयल है. साहिल गोयल क्रिकेट का शौकीन है. अच्छा क्रिकेट खेलता है और पुणे में अलगअलग क्लबों के साथ मैच खेलता था. इत्तेफाक से उसी इलाके का चेतन भी क्रिकेट खेलता था.
2024 में एक बड़ा मैच था. साहिल ने अपनी बहन सिया से कहा कि क्रिकेट का आज एक खास मैच है तुम चलोगी?
भाईबहन में भी दोस्ती और प्यार था. उस ने कहा, ”चलूंगी.’’
पहली बार सिया साहिल के साथ मैच देखने के लिए गई. साहिल की टीम में चेतन चौधरी भी था. सिया ने पूरा मैच देखा. उस दिन पहली बार खुद साहिल ने सिया को चेतन से मिलवाया. साहिल ने उन दोनों का परिचय कराया.
किसी ने नहीं सोचा था कि यह औपचारिक परिचय आने वाले समय की एक बड़ी त्रासदी बन जाएगा. उस दिन की मुलाकात बस ‘हायहैलो’ तक सीमित रही, लेकिन चेतन की नजरों में सिया के प्रति एक खास आकर्षण की चमक साफ देखी जा सकती थी.
इस के बाद कई मुलाकातें हुईं. क्रिकेट मैचों में भी सिया और चेतन का एक साथ आनाजाना लगा रहा. पिछले साल दिवाली पर साहिल ने पार्टी रखी. उस ने अपने दोस्तों को बुलाया. चेतन भी उस दिवाली पार्टी में आया.
पार्टी में साहिल के तमाम दोस्त थे और सिया भी पार्टी में मौजूद रही. उस पार्टी में पहली बार सिया और चेतन दोनों में एक तरह से प्यार हुआ. मौका मिलते ही चेतन ने धीरे से मुसकराते हुए पूछा, ”मैच याद है?’’
सिया ने खिलखिला कर जवाब दिया, ”हांहां, याद है. आप ने जो छक्का मारा था, वह छोटा रह गया था और कैच होने की वजह से आप आउट हो गए थे.’’
चेतन भी चूकने वाला कब था, ”उस ने कहा दिवाली के मौके पर आप मुझे कैच कर लो.’’
”मैं कैच करूंगी तो आप आउट नहीं होगे बल्कि गपच लिए जाओगे, क्योंकि यहां आप का छक्का बाउंड्री लाइन से बाहर है.’’
सिया की यह बात सुन कर चेतन शरमा गया. कहने लगा, ”आप को क्रिकेट की बहुत जानकारी है.’’
इस तरह इन दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया और फिर बहुत देर तक चलता रहा. इस के बाद फोन नंबर एक्सचेंज हुए.
दोनों बातचीत करने लगे. चेतन की 22 साल की ऊर्जा और सिया की 20 साल की चंचलता के बीच एक गहरा जुड़ाव पैदा हो गया.
बाद में साहिल को इस बात का अहसास हो चुका था कि चेतन और उस की बहन सिया एकदूसरे से प्यार करते हैं. यहां तक कि उन की एक बुआ को भी इस बात की भनक लग गई थी. एक वक्त ऐसा आया, जब साहिल गोयल को यकीन हो गया कि चेतन और सिया रिलेशनशिप में हैं. उस ने उसे 1-2 बार सिया से कहा भी, लेकिन सिया ने टाल दिया कि दोस्त है, फ्रेंड है.
बताते हैं कि साहिल और उस के फेमिली वाले सिया की हरकतों से परेशान हो गए थे. सभी ने मिलकर चिंतन किया. सामूहिक निर्णय लिया गया कि किसी अच्छे घर में सिया की शादी कर दी जाए. साहिल की बुआ रेणू मित्तल और फूफा नरेंद्र मित्तल को इस की जिम्मेदारी सौंपी गई.
इसी बीच उन के एक रिश्तेदार के यहां शादी थी. उस शादी में केतन के पापा विशाल अग्रवाल की फेमिली और सिया गोयल के फेमिली वाले भी पहुंचे थे. दोनों परिवार वाले एकदूसरे को बहुत सालों से जानते थे. नरेंद्र मित्तल विशाल अग्रवाल के चचेरे मामा थे.
नरेंद्र मित्तल ने सिया गोयल के लिए केतन अग्रवाल से रिश्ता चलाने की बात कही थी. विशाल अग्रवाल से कहा था कि आप अपने बेटे के साथ मेरे बहनोई की बेटी सिया गोयल की शादी करा दो. दोनों की जोड़ी अच्छी जमेगी.
क्योंकि नरेंद्र मित्तल चचेरे मामा थे तो विशाल अग्रवाल मना नहीं कर पाए. रिश्ते को अंजाम तक पहुंचने से पहले दोनों से पूछा गया था. दोनों को एकदूसरे को समझने के लिए टाइम भी दिया गया था. दोनों उस वक्त बहुत खुश थे. तभी जा कर मंगनी हुई थी.
केतन के परिवार को सिया का गारंटी कार्ड नरेंद्र मित्तल और रेनू मित्तल ने दिया था कि लड़की की हमारी पूरी गारंटी है. लड़की बहुत सभ्य है.
केतन के पापा विशाल ने कहा कि सिया की उम्र अभी कम है. अभी 20 साल की भी नहीं हुई है. तो आप इतनी जल्दी इस की शादी क्यों शादी कर रहे हो?
तो उन्होंने कहा कि हमें शादी आज नहीं तो कल करनी ही है. इस के बाद दोनों की जल्द ही शादी करने की बात तय हो गई.
17 करोड़ का महल
केतन और सिया की शादी नवंबर, 2026 में राजस्थान के उदयपुर में शाही अंदाज में होने वाली थी. मेहमानों के ठहरने के लिए जयपुर में 17 करोड़ रुपए का एक आलीशान महल बुक किया गया था.
शादी समारोह की भव्यता को देखते हुए, मेहमानों के सफर के लिए 2 स्पैशल विमान भी कर लिए गए थे. ये तैयारियां अग्रवाल परिवार की आर्थिक मजबूती और सामाजिक रुतबे तथा केतन के प्रति परिवार के प्रेम और स्नेह को दिखाती हैं.
यही वह मोड़ था, जहां उन की कहानी का ‘मीठापन’ कड़वाहट में बदलने लगा. चेतन चौधरी के लिए, सिया को खोने का विचार ही असहनीय था और सिया, जो अपने परिवार के दबाव और चेतन चौधरी के प्रति अपने लगाव के बीच फंसी थी, मानसिक रूप से वह अस्थिर होने लगी.
उन के बीच की बातचीत अब भविष्य की उन योजनाओं के इर्दगिर्द घूमने लगी, जिन में केतन अग्रवाल का कोई स्थान नहीं था.
चेतन से फोन पर घंटों की बातचीत और चैटिंग से जो कभी प्यार भरी बातें हुआ करती थीं, अब षड्यंत्रों का आधार बन गईं.
एक दिन सिया ने अपने प्रेमी चेतन को बताया कि 6 जून, 2026 को केतन, उस की बहन संजना और मेरे लिए इंडोनेशिया के बाली जाने का प्रीवेडिंग ट्रिप बुक कर चुका है. सिया और चेतन बहुत अच्छी तरह जानते थे कि अगर केतन विदेश चला गया तो वहां उसे मारना बहुत मुश्किल होगा.
सिया ने चेतन से कहा, ”6 जून से पहले ही केतन का काम तमाम करना होगा.’’
यहीं से हत्या की साजिश का पहला चरण शुरू हुआ. सिया 5 जून को फिर लोहागढ़ की पहाड़ी पर जाने के लिए केतन से जिद करने लगी. केतन मना करने लगा है तो उस ने कहा, ”कोई नहीं, हम चलेंगे और 2-4 घंटे में आ जाएंगे.’’
यह बात केतन ने अपने फेमिली वालों से कही तो पेरेंट्स ने यह कहते हुए मना कर दिया कि कल तुम्हें इंडोनेशिया जाना है. अभी तुम पहाड़ी पर जाओगे तो थक जाओगे. वहां ऊंची चढ़ाई है, कोई जरूरत नहीं है जाने की.
यह बात सिया को पता चली तो उस के होश उड़ गए.
अब सिया का पहला मकसद केतन को भारत में ही रोकना था, जिस से कि जल्दी से जल्दी केतन को इस ऊंची पहाड़ी पर ले जा कर धक्का दे कर उस की जीवन लीला समाप्त की जा सके.
बाली टूर किया फेल
6 जून, 2026 को केतन, केतन की बहन संजना, सिया और सिया का भाई साहिल, ये चारों घर से फ्लाइट पकडऩे के लिए मुंबई एयरपोर्ट निकले. ये सभी लोग प्रीवेडिंग के लिए बाली इंडोनेशिया जा रहे थे.
बाली जाने के लिए सब लोग मुंबई एयरपोर्ट की तरफ रवाना हुए. रास्ते में चाय पीने के लिए रुकने को कहा. सभी लोग लोनावला के पास एक फूड पौइंट पर रुके थे. यहीं पर सिया ने अपनी चाल चली और किसी तरह केतन का पासपोर्ट छिपा लिया.
जब केतन का पासपोर्ट गायब हुआ, तब किसी को भी सिया पर जरा भी शक नहीं हुआ. उस समय किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि इस के पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हो सकती है. उस दिन पुणे से मुंबई एयरपोर्ट जाने वाली गाड़ी के ड्राइवर वैभव जाधव ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे वह पुणे पहुंचा.
सभी मुंबई पुणे एक्सप्रैसवे पर रवाना हुए, तो सिया ने अचानक चाय पीने के बहाने एक फूड मौल पर रुकने को कहा. करीब 10 मिनट बाद वह वापस आई और ड्राइवर वैभव जाधव से कार की डिक्की खोलने को कहा. सिया ने केतन के बैग से उस का पासपोर्ट निकाला और अपनी जेब में रख लिया था.
एयरपोर्ट पर छोडऩे के करीब 2 मिनट बाद फोन आया कि केतन का पासपोर्ट शायद कैब में रह गया है. ड्राइवर ने कहा कि उस ने पूरी कार देख ली थी. पासपोर्ट नहीं मिला. इस के बावजूद उस से वीडियो कौल करवा कर पूरी कैब दिखवाई गई. फिर उसे दोबारा एयरपोर्ट बुलाया गया. जहां केतन और साहिल ने खुद कार की तलाशी ली, लेकिन पासपोर्ट कहीं नहीं मिला. सिया ने बैग से केतन का पासपोर्ट निकालने के बाद वाशरूम में जा कर फाड़ कर फेंक चुकी थी.
जब वे लोग एयरपोर्ट पहुंचे, तब चैकिंग के दौरान पता चला कि केतन का पासपोर्ट तो गायब है. मजबूरी में सभी को ट्रिप कैंसिल करनी पड़ी. केतन निराश हो कर पुणे लौट आया. अब हत्या की साजिश का फेज 2 शुरू होता है.
सिया ने अपने सासससुर और मंगेतर केतन से कहा कि इंडोनेशिया का कार्यक्रम रद्द हो गया तो जल्दी दूसरा पासपोर्ट निकलवाओ और बाली चलते हैं, नहीं तो फिर सब से अच्छा टूर लोहागढ़ की पहाड़ी का ही रहेगा.
केतन को ट्रैकिंग का शौक है, वहां मुझे भी बहुत आनंद आया था. होने वाली दुलहन का दिल रखने के लिए न चाहते हुए भी केतन ने 14 जून, 2026 का कार्यक्रम लोहागढ़ के किले पर जाने का तय कर लिया.
सिया ने अपने प्रेमी चेतन से यह सब बात बताई और योजना को क्रियान्वयन करने के लिए कहा. शातिरदिमाग चेतन ने कहा कि यह काम तुम्हें अकेले ही करना है. तुम्हारी मदद के लिए मैं दूर रह कर ही निगरानी करता रहूंगा.
14 जून, 2026 की सुबह लोहागढ़ की फिजाओं में मानसून की पहली फुहारों की महक थी. बादलों ने आसमान को एक धुंधली चादर से ढंक रखा था. लोहागढ़ की सीढिय़ां चढ़ते हुए केतन बारबार पीछे मुड़ कर सिया का हाथ थाम लेता था.
वह उसे संभल कर चलने के लिए कहता, अपनी मंगेतर की सुरक्षा को ले कर वह बहुत ज्यादा सचेत था. उसे क्या पता था कि जिस हाथ को वह सहारा देने के लिए पकड़ रहा है, वही हाथ उसे खाई में धकेलने के लिए आतुर है.
आखिरकार, सिया ने पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में पहुंच कर केतन के पास खड़ी हो कर सेल्फी लेने को कहा. जैसे ही उस ने फोटो के लिए हाथ आगे बढ़ाया, बड़ी फुरती से सिया सामने आई और केतन को धक्का दे दिया.
केतन लडख़ड़ा कर नीचे गिरता, इस से पहले एक पेड़ से टकराया और उस ने पेड़ को मजबूती से पकड़ लिया. अपना मिशन फेल होते देख वह तुरंत मंगेतर केतन के पास गई और उस को हाथ पकड़ कर ऊपर ले आई.
शातिरदिमाग सिया ने तुरंत नाटक किया और मंगेतर से कहा कि सांप आ गया था. मैं ने आप को सांप के काटने से बचाने के लिए हलका सा धक्का दिया था.
केतन अपनी मंगेतर से प्यार करता था और उसे सिया पर पूरा भरोसा भी था. उस ने सिया की इस झूठी कहानी को सच मान लिया. उसे लगा कि सिया ने उस की जान बचाई है. उसे अपनी मौत की साजिश का जरा भी शक नहीं हुआ. उस ने घर आ कर भी अपने पेरेंट्स से यह बात बताई और सिया की तारीफ की.
यूएस में की थी पढ़ाई
रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल अपनी फेमिली के साथ पुणे जिले के गहुंजे में रहते थे. केतन अग्रवाल उन का इकलौता बेटा था. हर मायने में वह एक आदर्श बेटा और करोड़ों रुपए के पारिवारिक कारोबार का उत्तराधिकारी था.

केतन अग्रवाल विदेश से पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था और परिवार के बिजनैस की जिम्मेदारी संभाल चुका था. वह पारिवारिक स्वामित्व वाली रियल एस्टेट कंपनी ‘सक्सेस ग्रुप’ का निदेशक होने के साथसाथ मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) भी था.
उस ने यूएस के बैबसन एफडब्ल्यू ओलिन ग्रैजुएट स्कूल औफ बिजनैस से उद्यमिता में मास्टर औफ साइंस की डिग्री पूरी की. इस से पहले उस ने सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी से बीबीए की डिग्री भी प्राप्त की थी.
26 साल की उम्र में केतन अग्रवाल उस मुकाम पर था, जहां ज्यादातर भारतीय परिवार अपने बेटे की जिंदगी का सब से खूबसूरत अध्याय शुरू होते देखना चाहते हैं.
सिया गोयल का परिवार पुणे के बिबवेवाड़ी (मार्केट यार्ड के निकट) स्थित ‘लीला कुंज’ नामक बंगले में रहता है.
सिया के पापा प्रवीण गोयल मुख्यरूप से ड्राईफ्रूट्स के थोक व्यापारी बताए गए हैं. जबकि मम्मी पूजा गोयल गृहिणी हैं.
चेतन चौधरी के फादर का नाम बाबूलाल चौधरी है. यह मारवाड़ी लोग जोधपुर के पलासनी गांव के रहने वाले हैं. बरसों पहले कारोबार के लिए यहां आए थे. पुणे में मार्केट यार्ड नाम के इलाके में चेतन के पापा बाबूलाल चौधरी की दुकान है.
इलाके में अधिकांश दुकानें मारवाड़-मेवाड़ के लोगों की हैं. जहां वे ड्राइफ्रूट्स और किराना का बिजनैस करते हैं. चेतन के फादर की दुकान के सामने ही सिया गोयल के फादर का औफिस भी है.
उक्त मामले में चेतन के एक चाचा, उदयराम चौधरी का भी नाम सामने आया है, उन्होंने भी बाबूलाल चौधरी की तर्ज पर मीडिया पर एकतरफा कहानी दिखाने का आरोप लगाया और चेतन को एक सीधासादा और अनुशासित युवक बताते हुए उस की बेगुनाही का दावा किया.
योजना को दिया अंजाम
19 जून को सिया का जन्मदिन था, जिस के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिसौर्ट बुक किया था. सिया के जन्मदिन को एक यादगार और आकर्षक बनाने की योजना बनाई गई थी.
18 जून को सिया ने प्रीवेडिंग शूट का बहाना बना कर उसे फिर लोहागढ़ चलने के लिए मजबूर किया.
लोहागढ़ किले में सिया मंगेतर केतन अग्रवाल के साथ थी. दोनों ट्रैकिंग का मजा ले रहे थे और किले पर तसवीरें खींच रहे थे.
उस दिन, जब केतन ने सिया का हाथ थामा और खाई की तरफ मुड़ा तो उसे अहसास भी नहीं था कि वह अपनी उस मंगेतर के साथ चल रहा है, जो उस की हत्या करने को आतुर है.
आसपास का माहौल बिलकुल शांत और सामान्य लग रहा था. उसी दौरान सिया ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को धक्का दे कर करीब 400 फीट गहरी खाई में गिरा दिया. उस के गिरते ही अचानक पहाड़ों के सन्नाटे को चीरते हुए जोर की चीख गूंजी. पल भर में ही मंजर बदल गया.
केतन किले की पहाड़ी से गहरी खाई में जा गिरा. इतनी ऊंचाई से पत्थरों पर गिरने के बाद बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी. सिया बहुत घबरा गई और रोतेबिलखते हुए पुलिस को मदद के लिए बुलाया.
घटना की जानकारी मिलने पर थोड़ी देर में थाना लोनावला पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए. मामला पहाड़ से खाई में गिरने का होने के कारण वहां पहुंचे पुलिसकर्मियों ने थाने के इंसपेक्टर दिनेश तायडे को सूचना दी. इंसपेक्टर दिनेश तायडे पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.
मामला गंभीर देख उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों को घटना की सूचना दी. कुछ ही देर में डीवाईएसपी गजानन टोम्पे भी घटनास्थल पर पहुंच गए. सूचना पा कर एसपी संदीप सिंह गिल ने भी वहां पहुंच कर घटनास्थल का मुआयना किया. मौके पर पहुंची पुलिस को सिया ने बताया कि उस का मंगेतर केतन अग्रवाल पहाड़ी पर किनारे पर जा कर सेल्फी ले रहा था. हवा का एक तेज झोंका आया. उसी दौरान अचानक उस का पैर फिसल गया और वो खाई में जा गिरा. शुरुआत में पूरा मामला ट्रैकिंग हादसे जैसा ही लग रहा था.
पुलिस ने भी अपनी शुरुआती जांच के बाद इसे एक्सीडेंटल डेथ मान लिया. मौत की वजह एक्सीडेंट दर्ज कर ली गई और फाइल बंद होने वाली थी कि अचानक हालत ने एक नया मोड़ लिया.
सुबह के पौने 11 बजे सिया की मम्मी पूजा का फोन केतन की मम्मी राखी के पास आया कि केतन फोर्ट से गिर गया है. उन्हें लगा सीढिय़ां चढ़तेचढ़ते कहीं ठोकर लगने से गिर गया होगा. इस के बाद राखी ने सिया को बहुत कौल की.
कई कौल बाद उस ने फोन उठाया तो केतन के पापा विशाल अग्रवाल ने पूछा, ”बेटा, केतन कहां से गिरा है?’’
सिया ने बताया, ”हम ऊपर पूरा फोर्ट चढ़ गए थे, सेल्फी लेते समय उन का पैर फिसल गया था. ऊपर से गिरे हैं.’’
सिया की बात सुनते ही विशाल अग्रवाल के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई.
उन के हाथ से फोन फिसलतेफिसलते बचा और उन के गले से एक चीख तक नहीं निकली. बस, आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा.
विशाल अग्रवाल की आवाज में जो सख्ती थी, वह पल भर में ही करुण विलाप में बदल गई. उन्हें लगा जैसे किसी ने उन के सीने पर वज्रपात कर दिया हो. वह पल उन के लिए पूरी जिंदगी का सब से लंबा और डरावना क्षण बन गया था.
उन का सारा संसार बिखर गया था. एक पल में ही घर की खुशियां मातम में बदल गईं और दिल की हर धड़कन सिर्फ केतन की सलामती की दुआ कर रही थी. घर का माहौल पलभर में बदल गया. विशाल ने बिना एक पल गंवाए पुणे से लोहागढ़ के लिए निकलने की तैयारी शुरू कर दी.
उन्हें उम्मीद थी कि शायद कहीं कोई गलतफहमी हो. उस सफर का हर किलोमीटर उन के लिए एक ऐसी आशंका से भरा था, जिसे कोई भी पेरेंट्स अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखना चाहते.
बीच रास्ते में ही सिया ने किसी पुलिस वाले से उन की बात कराई. विशाल अग्रवाल ने बताया हम वहां पहुंचे तो देखा कि सिया का कोई खास दुखी होने वाला अंदाज नहीं था. केतन का शव रेस्क्यू करने वाले सुनील गायकवाड़ ने बताया कि केतन के सिर पर गंभीर चोट थी.
खोपड़ी कुचली हुई थी और हाथ पैरों पर भी कई जगह चोट के निशान थे. अन्य लोग रो रहे थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन सिया गोयल शांत खड़ी थी. सुनील ने कहा कि शव को जंगल के रास्ते बाहर लाया गया.
सिया पर हुआ शक
पुलिस को 18 जून, 2026 की सुबह करीब साढ़े 10 बजे इस पूरी घटना की सूचना मिली थी. बचाव अभियान दोपहर साढ़े 12 बजे चलाया गया और करीब डेढ़ बजे शव एंबुलेंस में पहुंचाया गया था.
पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने डैडबौडी विशाल अग्रवाल को सौंप दी. पुलिस को इस मामले में दुर्घटना पर संदेह हो ही रहा था.
सिया सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करने के लिए फोटो के साथ कुछ मार्मिक लाइनें डाल रही थी. केतन की मौत के बाद, सिया ने जिस तरह का अभिनय किया, वह किसी भी थ्रिलर फिल्म को मात देने वाला था.
21 जून को केतन के फादर, रिश्तेदार और उन के दोस्त नवदीप जिंदल व तरुण मित्तल के साथ उस पहाड़ी पर गए, जहां से केतन गिरा था. वहां के हालात देख कर परिवार को समझ आ गया कि कोई इंसान वहां से गलती से नहीं फिसल सकता. तब उन्हें पहली बार शक हुआ था कि इस जगह को केतन की हत्या करने के लिए जानबूझ कर चुना गया.
3 दिन बाद जब सिया घर आई तो केतन की बहन ने घटना के बारे में उस से जानकारी करनी चाही, सिया से पूछा था कि वह कहां बैठी थी? केतन कैसे गिरा और किले के उस किनारे तक कैसे पहुंचा?
सिया ने किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया था. उस का रोना भी परिवार को बनावटी लगा था.
अगले दिन भी जब वह उन के घर आई, तब भी फेमिली वालों ने पूछा कि केतन का कौन सा पैर फिसला था, लेकिन वह चुप रही. सवालजवाब के दौरान शादी तय कराने वाली बुआ भी थी. वह सिया को वहां से धकियाती व खींचती हुई ले गई.
तब से वह पूरी तरह शक के घेरे में आ गई. परिवार में सलाहमशविरे के बाद विशाल अग्रवाल ने एसपी (देहात) संदीप सिंह गिल से जा कर अपनी बात कही.
पुलिस को पहले से ही यह वारदात संदिग्ध लग रही थी, क्योंकि केतन नियमित रूप से ट्रैकिंग करता था और उसे पहाड़ी इलाकों का अच्छा अनुभव था.
पुलिस इंतजार कर रही थी कि फेमिली वाले आ कर कोई तहरीर दें तो इस की जांच कराई जाए. विशाल अग्रवाल ने एसपी (देहात) संदीप सिंह गिल को तहरीर सौंप दी, जिस के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी.
पुलिस ने सिया के कौल रिकौर्ड खंगाले. एक मोबाइल नंबर पर पुलिस की नजर जम गई. उस पर जनवरी से केतन की हत्या वाले दिन सुबह 7 बजे तक सिया ने 2004 कौल्स में करीब 338 घंटे बातचीत की थी. यह नंबर पुणे के ही एक और व्यापारी परिवार के युवक चेतन चौधरी का था.
जांच में यह भी पता चला कि पहाड़ी से केतन अग्रवाल के नीचे गिरने से 34 मिनट पहले सिया ने चेतन चौधरी से ‘सीक्रेट कौल’ पर बात की थी.
जांच के दौरान पुलिस ने किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में एक संदिग्ध युवक दिखाई दिया, जिस ने भीषण गरमी में हुडी पहन रखी थी और हेडफोन के जरिए अपना चेहरा छिपाने की कोशिश किए हुए था.
पुलिस का माथा वहीं ठनक गया. ध्यान से देखने पर पता चला कि हुडी वाला युवक लगातार सिया और केतन का पीछा कर रहा था. इसी संदिग्ध गतिविधि ने पुलिस का ध्यान आकर्षित किया. पुलिस ने युवक की पहचान की. वह चेतन चौधरी था.
जांच आगे बढ़ाई तो कथित तौर पर सिया गोयल और उस के प्रेमी चेतन चौधरी की साजिश का परदाफाश हो गया. पुणे पुलिस द्वारा की जा रही जांच एक सुनियोजित साजिश की परतों को खोलती जा रही है.
इस के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन्हें 2 बार पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है. दोनों ने केतन अग्रवाल की सुनियोजित तरीके से हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. दोनों आरोपियों ने यह भी सोचा था कि केतन जिंदा बच भी जाएगा तो दिव्यांग तो जरूर हो जाएगा. तब सिया के पास उस से शादी नहीं करने का बहाना होगा.
जांच के दौरान कई पहलू सामने आए. इन में प्रेम संबंध, पैसों का लेनदेन और पहले से रची गई साजिश शामिल थी.
गिरफ्तारी के बाद उन्हें वडगांव मावल अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की जांच जारी रखने के लिए 29 जून तक 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया.
29 जून को उन की कस्टडी समाप्त होने वाली थी, लेकिन एसपी संदीप सिंह गिल ने बताया कि पुलिस ने अदालत से कहा था कि मामले की जांच अभी अधूरी है और कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल बाकी है. इस के लिए इन का पुलिस रिमांड जरूरी है. तब कोर्ट ने आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस कस्टडी 3 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी.
लगाए गंभीर आरोप
केतन अग्रवाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद 3 जुलाई 2026 शुक्रवार को एक बार फिर न्यायिक मजिस्ट्रैट प्रथम श्रेणी ए.एम. विभूति की अदालत में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. सुनवाई के दौरान पुलिस ने दोनों की 3 दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड मांगी थी.
दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुनने के बाद अदालत ने पुलिस की रिमांड अरजी खारिज करते हुए दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.
इस से पहले महाराष्ट्र प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने मुलाकात कर न्याय मांगा.
फडणवीस ने कहा कि सरकार दोषियों को कड़ी सजा दिलाने में, कोई कसर नहीं छोड़ेगी. महाराष्ट्र सरकार ने त्वरित अदालत की स्थापना को मंजूरी दी और वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया.
उज्ज्वल निकम 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य आरोपी कसाब को फांसी तक पहुंचाने और देश के कई हाईप्रोफाइल मामलों में सरकार का पक्ष रख चुके हैं.
27 जून को पुणे के गहूंजे स्थित बेलमंडो सोसाइटी में केतन को न्याय दिलाने के लिए एक विशाल कैंडल लाइट मार्च निकाला गया था. इस मार्च में केतन के दादा देवीचंद अग्रवाल भी अपनी कमजोर सेहत के बावजूद शामिल हुए थे.
पूरे पुणे और देश भर के लोगों में इस विश्वासघात को ले कर भारी आक्रोश और गुस्सा था. लोग लगातार सोशल मीडिया और सड़कों पर आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे थे.
विशाल अग्रवाल ने सिया के परिवार पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन का कहना था कि सिया को शराब पीने सहित कई बुरी आदतें थी और उस का परिवार भी उस के व्यवहार से परेशान था.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जब रिमांड की तिथि से एक दिन पूर्व यानी 2 जुलाई, 2026 को सिया गोयल को लोनावला स्थित उस के आलीशान आवास पर जांच के लिए ले गई थी तो वापसी में वहां एक बेहद शर्मनाक नजारा देखने को मिला.
खुद को चारों तरफ से मीडिया के कैमरों और भारी भीड़ से घिरा देख सिया गोयल अचानक अपना मानसिक संतुलन खो बैठी. उस ने बिना किसी पछतावे या डर के खुलेआम मीडियाकर्मियों और वहां मौजूद आम जनता की तरफ बेहद अश्लील इशारा करते हुए अपनी बीच वाली अंगुली (मिडिल फिंगर) दिखा दी.
सिया की यह बदतमीजी और हेकड़ी वहां मौजूद कैमरों में लाइव कैद हो गई.
सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. वीडियो में हाथों में बीयर जैसी बोतल लिए एक नाइट क्लब में किसी से फोन पर बातचीत करते दिख रही है.
इस दौरान उसे गालीगलौज करते और यह कहते सुना गया है कि पहले वह धोखा देता है फिर मुझे फोन करता है. मीडिया रिपोट्र्स में दावा किया गया कि यह वीडियो दिसंबर 2025 में रिकौर्ड किया गया था. सिया के इस व्यवहार को ले कर सोशल मीडिया में तरहतरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.
सिया ने पुलिस को बताया था कि केतन गंजा होने के कारण विग लगाता था और साथ में हकलाता भी था, इसलिए वह उस से शादी नहीं करना चाहती थी.
विशाल अग्रवाल ने कहा कि उन का बेटा विग का केवल एक छोटा सा पैच लगाता था और इस की जानकारी सगाई से पहले सिया और उस के फेमिली वालों को दे दी गई थी. उन्होंने कहा कि सिया को इस बात से कोई आपत्ति थी तो वह शादी से इनकार कर सकती थी. बेटे की जान लेने की क्या जरूरत थी?
घटना से ठीक 1 दिन पहले यानी 17 जून को सिया गोयल घर से झूठ बोल कर बाहर निकली और पुणे के कोडवा इलाके के थर्ड वेव कौफी कैफे में अपने बौयफ्रेंड चेतन चौधरी से मिली. कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरों में दोनों कैद हो गए.
पुलिस का कहना है कि यहां इन्होंने बैठ कर 18 तारीख को केतन की हत्या करने की पूरी साजिश रची थी. इस में यह भी शामिल था कि किले से धक्का देते समय सिया केतन की पहुंच से दूर रहे.
चेतन और सिया के बीच कथित तौर पर यह तय हुआ था कि केतन की हत्या के बाद, शक से बचने के लिए वह 3 साल तक शादी नहीं करेगी.
बताया जाता है कि इस के क्रियान्वयन के लिए शादी के कपड़ों की खरीदारी करने के बहाने करीब एक करोड़ रुपए अपने मंगेतर केतन से ले कर प्रेमी चेतन को दे चुकी थी.
रिमांड के दौरान ही पुलिस ने सिया को उस के घर ले कर गई. सिया के घर में तलाशी कर के वारदात वाले दिन उस के द्वारा पहने गए कपड़े भी बरामद कर लिए, जिन्हें अहम सबूत माना जा रहा है.
सिया और चेतन के बयानों में लगातार आ रहे भारी विरोधाभास और झूठ के पुलिंदे को देखते हुए पुणे पुलिस ने अदालत में सिया का पौलीग्राफ टेस्ट कराने की अरजी दे दी थी, क्योंकि सिया का आरोप था कि चेतन ने धक्का दिया है जबकि चेतन का कहना था कि सिया ने धक्का दिया है.
लेकिन आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह टेस्ट कराने से साफ इंकार कर दिया.
क्राइम का रीक्रिएशन
रिमांड के दौरान पुलिस सिया को लोहागढ़ फोर्ट ले कर गई थी. किस्मत का खेल देखिए. 10 दिन बाद एक बार फिर सिया उसी जगह पर जा कर खड़ी थी. यहां से चेतन को धक्का दिया गया था. आज वह उस की डमी को धक्का दे रही थी. सोचो, उस के दिमाग में क्या चल रहा होगा.
पुलिस डीवाईएसपी गजानन टोम्पे ने बताया कि घटनास्थल का पुनर्निर्माण करने के लिए पुलिस ने केतन अग्रवाल के बराबर वजन वाला एक डमी भी तैयार की थी. वारदात वाली जगह पर उस डमी को नीचे गिरा कर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया गया था.
उस के बाद पुलिस उस के प्रेमी चेतन चौधरी को भी उस की उसी पोशाक में लोहागढ़ किले में ले कर गई. जहां से उस ने केतन को धक्का दिया था. पुलिस ने चेतन के सामने भी क्राइम सीन को रीक्रिएट किया.
पुलिस की जांच के अनुसार चेतन पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक स्कूटी से पहुंचा था. उस ने कार का इस्तेमाल नहीं किया, ताकि टोल प्लाजा पर कार का रिकौर्ड न बने. पुलिस ने वह स्कूटी जब्त कर ली है.
शातिरदिमाग चेतन ने किले में प्रवेश करने का टिकट भी नहीं लिया था यह कह कर अंदर चला गया था कि वह यहां कसरत करने आया है. इस के अलावा घटना वाले दिन पहनी गई उस की हुडी और हैडफोन भी बरामद किए गए हैं.
जांच में जुटी पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी के एक कालेज के सहपाठी को अपनी हिरासत में लिया. आरोपीयों द्वारा सब से अधिक बात करने वालों में यह मोबाइल नंबर भी शामिल था. पुलिस को पुख्ता अंदेशा है कि इस व्यक्ति को केतन अग्रवाल की हत्या की खौफनाक साजिश के बारे में सब कुछ पहले से मालूम था.
सिया और चेतन ने मोबाइलों के चैट और मैसेज डिलीट किए थे, पुलिस लैब में उन्हें रिकवर करा रही है. इस में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि चेतन और सिया ने गुपचुप तरीके से विवाह भी कर लिया था.
दरअसल, सिया को चेतन पर शक हो रहा था कि कहीं केतन की हत्या होने के बाद चेतन ने उसे धोखा दिया तो वह कहीं की नहीं रहेगी. सिया ने चेतन से कहा कि पहले विवाह की रस्म अदा करो. उस के बाद केतन को पहाड़ी से नीचे धकेला जाएगा.
यह विचार सिया के दिमाग में इसलिए आया कि चेतन केतन को पहाड़ी से धकेलने की योजना में सिया को आगे कर रहा था. खुद परदे के पीछे रहना चाहता था.
पुलिस को संकेत मिले हैं कि विवाह पंजीकरण कार्यालय में अपना विवाह रजिस्टर्ड भी कराया था. विवाह कब और कहां तथा कैसे हुआ या नहीं हुआ, पुलिस इस की भी जांच कर रही है. पुलिस अधिक से अधिक सबूत जुटाने में लगी है.
इस हत्याकांड को ले कर महाराष्ट्र विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ. पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया था.
एनसीपी विधायक सुनील शेल्के ने सदन में मुद्ïदा उठाते हुए मांग की कि सिया के परिवार को भी इस हत्याकांड में आरोपी बनाया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की के परिवार ने उस के प्रेम संबंधों की बात केतन के परिजनों से छिपाई थी. चेतन और सिया दोनों जेल में थे.
यह अपराध की दुनिया का वह ‘शौर्टकट’ था, जिस ने केतन अग्रवाल की जान ले ली. सिया ने उस ‘परफेक्ट मर्डर’ की योजना बनाई, जिसे दुनिया एक ट्रैकिंग हादसा समझ ले.
उस ने और चेतन ने मिल कर हफ्तों तक इस खौफनाक साजिश को बुना. लोहागढ़ का किला, जो कभी शिवाजी महाराज की वीरता का प्रतीक था, सिया की नफरत और जुनून का गवाह बन गया.
पोते के सदमे में चल बसे दादा
केतन अग्रवाल की मौत के बाद दादा देवीचंद अग्रवाल लगातार गहरे सदमे में थे. उन की तबीयत बिगड़ती चली
गई. उन्हें पुणे के जुपिटर हौस्पिटल में भरती कराया गया, जहां डौक्टर उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन शायद उन का मन पहले ही टूट चुका था.
पेशेवर की तरह की प्लानिंग
14 जून की नाकामी के बाद 14 से 18 के बीच में सिया और चेतन एक बार दोनों इसी किले पर रेकी के लिए आए थे. दोनों ऊंची पहाड़ी पर जा कर खड़े हुए. दोनों ने बात
की कि किस पोजीशन में केतन को खड़ा करना है. कैसे उसे बातों में उलझाना है और फिर किस तरीके से अचानक धक्का देना है कि उसे संभलने का मौका ही न मिले.
यूट्यूब पर इस संबंध बहुत कुछ सर्च किया गया था. इतना ही नहीं क्राइम थ्रिलर फिल्म और वेब सीरीज भी देखी गई थीं. साथसाथ इन दोनों को एक डर भी था और वो यह कि कितनी भी हम एहतियात बरतें हो सकता है कि पुलिस को हम पर शक हो. हमारे रिश्तों पर शक हो. फिर हम से पूछताछ हो सकती है. ऐसे में उन दोनों को क्या जवाब देना है? बाकायदा सिया और चेतन ने पुलिस के प्रश्न और उन के उत्तर की भी तैयारी की.
प्लानिंग के तहत 18 जून को चेतन अपना मोबाइल अपनी शौप पर छोड़ कर आया, जिस से उस की लोकेशन अपनी दुकान की दिखाई दे. भीषण गरमी होने के बावजूद उस ने हुडी पहनी ताकि उसे कोई पहचान नहीं पाए.
फोर्ट में कितने सीसीटीवी कैमरे हैं. इन दोनों ने खुद अपनी आंखों से एकएक कैमरे को टटोलने की कोशिश की और अनजान बन कर लोगों से पूछा तो पता चला कि इस किले में कुल 3 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. एक मेन एंट्री पौइंट जहां पर यह हुडी में कैद हुआ था.
दूसरा बिलकुल सेंटर पौइंट पर जब स्केलेस से एंट्री से आधे रास्ते पर पहुंचते हैं. वहां एक प्लेटफार्म है. लोग थक जाते हैं, थोड़ी देर के लिए रुकते हैं.
तीसरा, जहां इस किले को जाने वाली सीढिय़ां खत्म हो जाती हैं. वहां भी एक प्लेटफार्म है, जो एक सेल्फी पौइंट है. चेतन ने क्या चालाकी की? उसे पता है कि एंट्री गेट पर सीसीटीवी कैमरा और उस में वो कैद होगा. तो 18 जून की सुबह जब वह गया तो उस कैमरे से अपना चेहरा छिपाने के लिए उस ने हुडी पहन ली. पीछे पिट्ठू बैग भी लटका लिया था.
जहां से धक्का दिया था, उस से ठीक पहले एक सुनसान जगह पर चेतन ने अपना हुडी उतार कर बैग में रख लिया. बैग से एक टीशर्ट निकाल कर पहन ली. इस के बाद जब फाइनली काम हो गया. चेतन ने थोड़ी दूर सन्नाटे में जा कर टीशर्ट उतारी और बैग में रख ली.
फिर से उस ने हुडी पहनी और फिर नीचे आया, क्योंकि ऊपर जाते वक्त वो हुडी में कैमरे में कैद हो चुका है. तो इसलिए वापसी में भी उसे हुडी में उस कैमरे में कैद होना था. और टीशर्ट इसलिए बदली कि अगर किसी ने गलती से उसे देख लिया या पता चल गया तो लोगों की नजरों में एक हुडी वाला शख्स और एक टीशर्ट वाला 2 अलगअलग शख्स हो जाएंगे.
इन दोनों की इतनी गहरी प्लानिंग थी, जैसे पेशेवर क्रिमिनल सोचते हैं. इन दोनों ने गूगल और यूट्यूब पर भी जा कर यह सर्च किया कि मौत के तरीके क्याक्या हैं? जिन में हम बच सके. पुलिस को शक न हो.
4 जुलाई, 2026 शनिवार रात करीब पौने 10 बजे डौक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार का कहना है कि पोते के वियोग का दर्द वह सहन नहीं कर पाए.
यह वही दादा थे, जो कुछ दिन पहले अपने पोते को न्याय दिलाने के लिए निकाले गए कैंडल मार्च में शामिल हुए थे. कांपते कदमों से भी वह न्याय की उम्मीद ले कर चले थे, लेकिन शायद उन के भीतर उम्मीद से ज्यादा दर्द था.
आज अग्रवाल परिवार दोहरी पीड़ा से गुजर रहा है. एक ओर केतन की कथित हत्या का न्याय मिलने का इंतजार, दूसरी ओर उस बुजुर्ग की कमी, जिस ने अपने पोते के गम में दुनिया को अलविदा कह दिया.
केतन के दादाजी, देवीचंद अग्रवाल, जिन्होंने शून्य से एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य खड़ा किया था, अपने पोते में अपना अक्स देखते थे. केतन उन के लिए सिर्फ एक वारिस नहीं, बल्कि उन के बुढ़ापे की लाठी और उस विरासत का भविष्य था, जिसे उन्होंने खूनपसीने से सींचा था. यह सिर्फ एक बीमारी नहीं बल्कि पोते के वियोग की वह आग थी, जो उन्हें धीरेधीरे कर के लील गई.
आखिर जिम्मेदार कौन
जांच में जब सिया से पूछताछ हुई तो उस की बातों में एक अजीब सी ठंडी सच्चाई थी. उस ने पुलिस के सामने कुबूल किया कि शादी तोडऩा मेरे लिए
एक विकल्प नहीं था. अगर मैं रिश्ता तोड़ती तो पूरा समाज मेरे पेरेंट्स की तरफ अंगुलियां उठाता. मेरे परिवार की प्रतिष्ठा के सामने मेरा अपना वजूद कुछ भी नहीं था. मेरे परिवार की गरिमा, मर्यादा, प्रतिष्ठा या सम्मान तुलनात्मक दृष्टि से केतन के परिवार से कम नहीं था.
कहते हैं कि अपने पेरेंट्स के आत्मसम्मान और गौरव के महत्त्व को समझने की भावना बेटियों में ज्यादा होती है. सिया के अंदर भी सामाजिक परंपराओं और परिवार से मिले संस्कार थे, जिस के कारण वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहती थी.
सिया के मन का यह ‘गणितÓ बहुत ही घातक था. उसे लगा कि यदि वह सगाई तोड़ती है तो वह एक ‘विद्रोहीÓ कहलाएगी, लेकिन अगर केतन ‘हादसेÓ का शिकार हो जाए तो वह एक ‘दुखी मंगेतरÓ बन कर सहानुभूति की हकदार होगी.
उस के लिए केतन का मरना, एक तय शादी के टूटने से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित रास्ता था.
केतन अग्रवाल का मामला केवल इसलिए चर्चा में नहीं आया कि एक युवा की असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हुई, बल्कि इस ने समाज की कई धारणाओं को भी झकझोर दिया.
लोगों ने फिर से यह सवाल पूछना शुरू किया कि क्या धनदौलत किसी परिवार को दुख से बचा सकती है? क्या भव्य शादी की तैयारियां अपने आप में भरोसे और मजबूत रिश्ते की गारंटी होती हैं? या फिर चमकती रोशनी और मुसकराती तसवीरों के पीछे भी ऐसी अनकही कहानियां छिपी हो सकती हैं, जिन का अंदाजा किसी को नहीं होता? समाज अब किस दिशा में जा रहा है? इस का जिम्मेदार कौन है? Ketan Agarwal Murder Case






