Nagpur kidnapping case. नागपुर सिटी के रहने वाले जयराम गोपाल यादव ने अपने दोस्तों कुणाल रमेश शाहू और आयुष मोहन शाहू के साथ मिल कर अपने परिचित के बेटे अथर्व दिलीप नानोरे का 50 लाख रुपए की फिरौती के लिए किडनैप कर लिया. यह फिरौती इन्हें आसानी से मिल सकती थी, लेकिन इस दौरान ऐसा कांड हो गया कि तीनों को खुद को बचाना मुश्किल हो गया. उन के साथ ऐसा क्या हुआ और क्या वे फिरौती वसूल पाए? पढ़ें, सोशल क्राइम की यह स्टोरी.
आरेंज सिटी नागपुर में रात के करीब 8 बज रहे थे. ग्राहक न होने के कारण जयराम गोपाल यादव चौक पर लगी अपनी सब्जी की दुकान समेटने लगा. वह यादव समाज से ताल्लुक रखता था. वैसे जयराम को इलैक्ट्रिशिन की भी थोड़ीबहुत जानकारी थी. वह खाली समय में इलैक्ट्रिशियन का भी काम करता था.
गिट्टीखदान बस्ती गवलीपुरा में ही गोपाल यादव का पूरा परिवार रहता था. उस का बड़ा बेटा वीरू गोपाल यादव सब्जी की मालवाहक गाड़ी चलाता था. वहीं छोटा बेटा जयराम गोपाल यादव अपने पिता के साथ सब्जी की दुकान में हाथ बंटाता था.
गिट्टीखदान बस्ती के गवलीपुरा में ही दिलीप मधुकर नानोरे का भरापूरा परिवार भी रहता है. दोमंजिला बिल्डिंग में सब मिलजुल कर साथ रहते थे.
ठाकुर समाज से ताल्लुक रखने वाले दिलीप मधुकर नानोरे सब्जी का थोक धंधा करते थे. दिलीप मधुकर नानोरे से ही सब्जीभाजी खरीद कर गोपाल चौक पर लगी अपनी दुकान में बेचता था. इस वजह से जयराम गोपाल यादव का दिलीप के घर में आनाजाना था.
दिलीप मधुकर की पत्नी रेवती दिलीप नानोरे जयराम गोपाल को अपने घर का सदस्य जैसा मानती थी. जयराम गोपाल को दिलीप मधुकर का पूरा परिवार जानता था. दिलीप के घर का छोटामोटा लाइट फिटिंग का काम भी जयराम कर देता था. दिलीप का छोटा बेटा अथर्व गोपाल को ‘दादा’ कह कर बुलाता था.
अथर्व दिलीप नानोरे नागपुर के सेंट विंसेंट पलौटी स्कूल में 8वीं कक्षा में पढ़ रहा था. 2 मार्च, 2026 की रात की बात थी. हलकी ठंड से पूरा नागपुर शहर सराबोर था. ग्राहक न होने की वजह से जयराम गोपाल यादव अपनी दुकान समेटने लगा था.
वह अपनी दुकान बंद ही कर रहा था कि उस का दोस्त केतन कुणाल शाहू जो इलैक्ट्रिशियन का काम करता था, उस से मिलने दुकान पर आया. थोड़ी देर के बाद उस का तीसरा दोस्त आयुष मोहन शाहू भी अपनी मालवाहक गाड़ी से दुकान में मिलने आ गया.
गाड़ी को एक तरफ पार्क कर के वह दोनों दोस्तों की तरफ बढ़ा. अपने दोस्तों को देख कर जयराम गोपाल खुशी से फूला नहीं समाया और खुशी से बोला, ”चलो, ठंड लग रही है. सामने की टपरी पर चल कर एकएक कप चाय पीते हैं.’’
बच्चे का किडनैप
तीनों दोस्त मिल कर चौक पर स्थित चाय की टपरी पर जा कर चाय पीते हुए बतियाने लगे. जयराम गोपाल यादव अपने दोस्तों से बोला, ”यार, अब धंधे में कोई मजा नहीं रहा है. अब ऐसा कोई काम करते हैं कि रातोंरात लखपति बन जाएं और जिंदगी भर की कड़की से छुटकारा मिल जाए.’’
जयराम गोपाल यादव की बात सुन कर केतन कुणाल शाहू और आयुष मोहन शाहू ने भी कहा, ”हां यार, कब तक फटेहाल जिंदगी जीते रहेंगे? कुछ ऐसा काम करते हैं कि जिंदगी संवर जाए.’’
तीनों दोस्त काफी देर तक बातचीत करते रहे. फिर जयराम गोपाल यादव ने कहा, ”चलो, बस्ती में होलिका दहन है. बस्ती में चल कर मजा करते हैं. कल धूलिवंदन (धुलेंडी या रंग वाली होली) भी है, थोड़ा रंग गुलाल उड़ाएंगे. उस के बाद में सोचते हैं.’’
इतना कह कर जयराम गोपाल यादव ने चाय वाले को चाय के रुपए दिए और फिर तीनों बस्ती की तरफ रवाना हो गए.
दूसरे दिन तीनों ने धूलिवंदन पर जम कर होली खेली और शराब के जाम छलकाए. शराब के नशे में जयराम गोपाल ने अपने दोस्तों से कहा, ”यार, मेरे पापा दिलीप मधुकर नानोरे से थोक में सब्जी खरीदते हैं. वह काफी धन्नासेठ है. क्यों न उस के छोटे बेटे को किडनैप कर लें. फिरौती के 50 लाख रुपए वसूल कर फिर उस को वापस लौटा देंगे.’’
तीनों ने मिल कर अथर्व दिलीप नानोरे का 50 लाख रुपए की फिरौती के लिए किडनैप करने का प्लान बना लिया. एक महीने तक जयराम गोपाल इसी ताक में रहता था कि अथर्व अकेले में मिले और मैं इसे ले कर गायब हो जाऊं. लेकिन अथर्व के साथ परिवार का कोई न कोई सदस्य मौजूद रहता था, इसलिए जयराम गोपाल अपने प्लान को अंजाम नहीं दे पा रहा था.
पूरा एक महीना बीत गया. फिर 2 अप्रैल, 2026 को हनुमान जयंती का त्यौहार था. दोपहर के समय तीनों दोस्ती गड्डीगोदाम के एक मैडिकल स्टोर में गए और बेहोश करने वाले 2-3 स्प्रे और चूहे मारने वाली पाउडर के पैकेट खरीद लिए. फिर वापस आ कर टाटा एस 4 मालवाहक गाड़ी का बंदोबस्त किया और समय का इंतजार करने लगा.
शाम 4 बजे से ही अथर्व अपनी बस्ती में हनुमान जयंती शोभायात्रा की तैयारी कर रहा था. शाम होतेहोते हनुमान जयंती की शोभायात्रा का कार्यक्रम शुरू हो गया और रात 11 बजे तक चलता रहा.
हनुमान जयंती की शोभायात्रा में अथर्व को देख कर जयराम गोपाल की आंखों में चमक आ गई. दोनों मिल कर शोभायात्रा में नाचते रहे, फिर नाचतेनाचते जयराम गोपाल ने अथर्व नानोरे से कहा, ”चलो, मुझे बाथरूम लगी है, कर के आते हैं.’’
दोनों थोड़ी दूरी पर जा कर लघुशंका से निपटे कि तभी जयराम गोपाल यादव के दोनों दोस्त केतन कुणाल शाहू और आयुष मोहन शाहू आ कर बोले, ”अरे जयराम, अपने पास गाड़ी है. चलो, कोराड़ी मंदिर घूम कर आते हैं. फिर गाड़ी वापस कर देंगे.’’
जयराम गोपाल ने अथर्व से कहा, ”चल अथर्व, कोराड़ी मंदिर चलते हैं और माता के दर्शन कर के आते हैं.’’
गाड़ी में घूमने की अभिलाषा अथर्व रोक नहीं सका. फिर जयराम दादा के साथ जाने में हर्ज ही क्या है, मन ही मन सोच कर अथर्व चलने को तैयार हो गया. चारों टाटा एस 4 गाड़ी में सवार हो कर मंदिर की ओर चल पड़े.
काफी देर घुमाने के बाद आयुष मोहन ने कोराड़ी न जा कर गाड़ी गोरेवाड़ा जंगल में खड़ी कर दी. 14 वर्षीय अथर्व ने जयराम से सवाल किया, ”अरे दादा, हम जंगल में क्यों रुक गए?’’
फिर गाड़ी का दरवाजा खोल कर अथर्व सड़क पर उतर गया. जंगल देख कर मन ही मन वह घबरा भी रहा था. अथर्व को गाड़ी से उतरते देख तीनों दोस्त भी गाड़ी से उतर गए. वहीं जयराम अथर्व को समझाने का प्रयास करने लगा, लेकिन अथर्व सड़क पर जोरजोर से चिल्लाने लगा.
अथर्व को चिल्लाते हुए देख कर केतन शाहू और आयुष शाहू ने उस को मजबूती से पकड़ लिया. तभी जयराम ने अपने बैग से बेहोश करने वाली स्प्रे निकाल कर अथर्व के चेहरे पर स्प्रे किया, लेकिन अथर्व पर उस स्प्रे का कोई असर नहीं हुआ.
वह दोनों के शिकंजे से अपने आप को बचाने की भरपूर कोशिश करता रहा. तभी जयराम ने अपने बैग से चूहे मारने वाले पाउडर से अथर्व को बेहोश करना चाहा, लेकिन अथर्व पर इस का भी कोई असर नहीं हुआ.
मामला बिगड़ता देख और पकड़े जाने के डर से जयराम गोपाल यादव ने अपने गले का अंगौछा निकाला और अथर्व के गले में डाल कर धीरेधीरे खींचने लगा. जयराम सोच रहा था कि अथर्व किसी तरह बेहोश हो जाए और अपना फिरौती का काम बन जाए, लेकिन बाजी पलट गई. जयराम का अंगौछा अथर्व के लिए फांसी का फंदा बन गया और दम घुटने से उस की मौत हो गई.
केतन और आयुष ने जैसे ही अथर्व को छोड़ा, अथर्व सिर के बल सड़क पर गिर पड़ा. अथर्व को मरा देख कर तीनों दोस्तों के होश उड़ गए. आननफानन में तीनों ने अथर्व के शव को उठा कर गाड़ी में रखा और बस्ती की ओर चल पड़े. गाड़ी को बस्ती के परिसर में खड़ा कर के केतन शाहू और आयुष शाहू अपनेअपने घर चले गए. जयराम यादव अपने घर न जा कर हनुमान जयंती की शोभायात्रा में शामिल होने के लिए चला गया.
इधर बस्ती में अथर्व दिलीप नानोरे के गुम हो जाने से दिलीप मधुकर नानोरे के घर का माहौल बिगड़ गया. अथर्व के फेमिली वाले चाचा, मामा, भाई सभी जयराम से अथर्व के बारे में पूछने लगे. लेकिन जयराम यादव बोला कि मुझे कुछ भी नहीं मालूम.
फेमिली हुई परेशान
अथर्व को ढूंढने के लिए पूरा परिवार रात भर जुटा रहा. साथ में जयराम यादव भी उन के साथ घूमता रहा. अथर्व का कहीं पता नहीं चला.
आखिर मजबूर हो कर नानोरे परिवार के सभी लोगों ने पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने की मंशा जताई और फिर अगले दिन सुबह 8 बजे के करीब गिट्टीखदान पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी.
पुलिस ने 14 वर्षीय अथर्व की गुमशुदगी दर्ज कर उस की तलाश शुरू कर दी. उधर अथर्व के फेमिली वाले भी उसे ढूंढने में लगे रहे. समय बीतता रहा, लेकिन अथर्व का कोई पता नहीं चला तो फेमिली वालों में आक्रोश भर गया. उन्होंने असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर नवीनचंद्र रेड्डी से मुलाकात कर अथर्व को तलाश कराने की मांग की. उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस उपायुक्त शऊल माकणीकर की निगरानी में क्राइम ब्रांच और वाहन चोरी विरोधी दस्ते को शामिल कर दरजन भर जांच टीम बनाईं.
असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर नवीनचंद्र रेड्डी, एडिशनल पुलिस कमिश्नर (साउथ) वसंत परदेसी, राजेंद्र दाभांडे उपायुक्त शऊल माकणीकर, नित्यानंद झा और एसीपी अभिजीत पाटिल ने अपनेअपने तरीके से अथर्व दिलीप नानोरे को ढूंढने की भरपूर कोशिश की और मामले की तह तक पहुंचने का भरपूर प्रयास किया.
2 दिनों तक अथर्व दिलीप नानोरे का शव टाटा एस 4 गाड़ी में ही पड़ा रहा. 4 अप्रैल 2026 की सुबह 4 बजे जयराम गोपाल यादव ने अपने घर से 3-4 बोरे लिए और अपने दोस्त केतन शाहू और आयुष शाहू के साथ गाड़ी में रखे अथर्व के शव को बोरे में भर कर शव को ठिकाने लगाने निकल पड़े.
कलमेश्वर भरतवाडा रेलवे क्रौसिंग के समीप शव को डाल कर लौट आए. फिर बस्ती पहुंच कर गाड़ी में लगे खून को साफ किया और तीनों दोस्त बस्ती से फरार हो गए.
सुबह 8 बजे के करीब जब गिट्टीखदान थाना पुलिस को पता चला कि कलमेश्वर भरतवाडा के रेलवे क्रौसिंग के पास बोरे में बंधा एक शव है तो पुलिस दल बिना समय गंवाए उस जगह पर पहुंचा, जहां बोरे में बंधा हुआ शव था. पुलिस ने जैसे ही बोरे को खोला तो अथर्व का शव देख कर सभी सकते में आ गए, क्योंकि अथर्व का फोटो पुलिस पहले से ही था.
पुलिस ने अथर्व के फेमिली वालों को भी वहां बुला लिया. अपने छोटे भाई अथर्व की लाश देख कर बड़ा भाई अंश नानोरे वहीं बेहोश हो गया. नानोरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
पुलिस दल ने अथर्व के शव को पोस्टमार्टम के लिए हौस्पिटल भेज दिया. अथर्व दिलीप नानोरे का शव मिलने की खबर पूरी बस्ती में फैल गई. सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए. बस्ती में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई.
पुलिस पूरी तरह से हरकत में आ गई. उस की हत्या किस ने की, यह जानने के लिए सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. एक स्थान पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में पुलिस को वारदात का सुराग मिल ही गया. फिर मुख्य आरोपी जयराम गोपाल यादव को गिरफ्तार कर लिया गया.
पहले तो जयराम गोपाल यादव पुलिस को बदलबदल कर बयान देता रहा. आखिर में जब पुलिस ने सख्ती की तो उस ने सच उगल दिया.
उस ने 50 लाख की फिरौती के लिए अथर्व दिलीप नानोरे के अपहरण से ले कर हत्या की वारदात का पूरा सिलसिलेवार बयान दे दिया. पुलिस ने उस के दोस्तों केतन कुणाल शाहू और आयुष मोहन शाहू को भी गिरफ्तार कर लिया.
अन्य कौन हैं आरोपी
अथर्व की मम्मी रेवती दिलीप नानोरे का मानना है कि अपहरण और हत्या के मामले में और भी लोग शामिल हैं और फिर जयराम का बड़ा भाई वीरू गोपाल यादव हत्या के बाद से गायब है. जयराम गोपाल का पूरा परिवार बस्ती छोड़ कर गायब हो गया है.
पहले वीरू गोपाल यादव, दिलीप मधुकर नानोरे के यहां मालवाहक गाड़ी चलाता था. किसी बात को ले कर दोनों में अनबन हो गई थी, इसलिए वीरू को दिलीप ने काम से निकाल दिया था. अथर्व की मम्मी रेवती का कहना है कि यह सिर्फ 50 लाख की फिरौती के लिए प्लान नहीं है. इस के पीछे किसी और का मास्टरमाइंड है. ये तीनों आरोपी तो सिर्फ मोहरे हैं. फिरौती से ले कर अपहरण तक का प्लान किसी और का है.
शक की सूई वीरू गोपाल यादव पर भी है, क्योंकि उस के फादर पर दिलीप मधुकर नानोरे का पहले से ही एक लाख रुपए का कर्ज था. फिर वीरू की शादी के लिए और एक लाख रुपए की मांग की गई. वीरू और उस के पिता गोपाल यादव पूरे दिन दिलीप मधुकर नानोरे के यहां बैठे रहे. आखिर उन की मजबूरी को देखते हुए दिलीप मधुकर नानोरे ने 50 हजार रुपए नकद दिए थे.
इस से पहले भी फिरौती के लिए किडनैप करने की क्षेत्र में अनेक घटनाएं हो चुकी हैं. ऐसी घटनाओं को पड़ोसी या परिचित ही अंजाम देते हैं. सोचने वाली बात यह है कि संपन्न घरों के लोग किस पर भरोसा करें, किस पर नहीं.
नागपुर शहर की गिट्टीखदान थाने की पुलिस ने फिरौती के लिए अपहरण व हत्या का मामला दर्ज कर के 15 दिनों तक तीनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया. उस के बाद उन्हें नागपुर न्यायालय में पेश किया गया.
न्यायालय ने तीनों आरोपियों जयराम गोपाल यादव, केतन उर्फ कुणाल रमेश शाहू और आयुष मोहन शाहू को जेल भेज दिया. कथा लिखने तक पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही थी. Nagpur kidnapping case






