Police Station Murder. इस दुनिया में पिता और बेटी का रिश्ता सब से अधिक प्यारा और अनमोल कहा गया है. एक बेटी के लिए उस का पिता उस का पहला हीरो और रक्षक होता है, तो फिर सत्यकुमार चौहान ने अपनी सब से छोटी प्यारी बेटी शिवानी की पुलिस थाने में, पुलिस की मौजूदगी में चाकू से गोद कर हत्या क्यों कर डाली?
सत्यकुमार चौहान उत्तर प्रदेश के बांदा जिला मुख्यालय से लगभग 43 किलोमीटर दूर बदौसा कस्बे की इंदिरा कालोनी का निवासी था. वह अपने नाम के अनुरूप ही बचपन से संस्कारी था. उस के अंदर बड़ों के लिए सम्मान और छोटों के लिए प्यार रहता था, लेकिन इस के साथ ही वह सख्त अनुशासनप्रिय और अपने धर्म के लिए समर्पण का भाव भी रखने वाला व्यक्ति था. अपने परिवार में उस ने इसी व्यवहार को लागू भी किया था.
उस के परिवार में पत्नी रत्ना देवी के अलावा एक बेटा और 2 बेटियां थीं. उस ने अपने सब से बड़े बेटे का नाम सत्यवान चौहान रखा था. जिस की उम्र अभी करीब 29 वर्ष है. वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गुजरात के सूरत शहर में रह कर एक फैक्ट्री में काम करता है.
सत्यकुमार ने अपनी दूसरी बेटी का नाम पूनम रखा था. जिस की उम्र करीब 24 वर्ष है. वह शादीशुदा है.
उस की तीसरी बेटी शिवांज जो करीब 19 वर्ष की थी और वह अविवाहित थी.
सत्यकुमार चौहान अपने कस्बे में दरजी का काम करता था. वह अपने पेशे के प्रति वक्त का बड़ा पाबंद था. वादे के अनुसार सही समय पर वह ग्राहकों को उन के कपड़े तैयार कर सौंप देता था.
वह स्वभाव से काफी सरल और अपने काम से काम रखने वाला, अपने आप ही में खोया रहने वाला इंसान था. लेकिन पिछले कई हफ्तों से वह बहुत ही टेंशन में अपनी जिंदगी गुजार रहा था. उस के ग्राहकों को भी काफी समय से उन के कपड़े ठीक समय पर नहीं मिल पा रहे थे. उस का व्यवहार भी काफी चिड़चिड़ा सा हो गया था.
पहले तो वह 3-4 दिन में रात को खाना खाते समय एकदो पैग लगा लिया करता था, मगर अब तो शराब पीना उस का रोज का ही काम हो गया था.
अब उस के कस्बे वालों के साथसाथ आसपास के क्षेत्र के लोग इस बात को जान चुके थे कि सत्यकुमार चौहान की सब से छोटी बेटी शिवानी 18 मई, 2026 को कस्बे के अपने एक दलित प्रेमी के साथ घर छोड़ कर भाग चुकी है.
सत्यकुमार के पेशे में जो उस के प्रतिद्वंदी थे, वे सारे के सारे उसे हिकारत और मजाक उड़ाने के इरादे से उस से विभिन्न सवालजवाब करते रहते थे.
इस के अलावा कस्बे के अन्य लोग भी अकसर जानबूझ कर उस की बेटी और उस के कथित प्रेमी के बारे में ऊलजुजूल बातें कर उसे जलील करते रहते थे. सत्यकुमार उन सब की बातों का कोई जवाब नहीं देता था. बस अपने अंदर ही कुढ़ता रहता था, इसलिए वह अब अपना अधिकतर समय अपनी दुकान में ही गुजारने लगा.
11 जून, 2026 को रोज की तरह सत्यकुमार अपनी दिनचर्या में व्यस्त दोपहर को ग्राहकों के कपड़े सिल रहा था, तभी उस का बचपन का दोस्त रामस्वरूप उस की दुकान पर आ पहुंचा.
रामस्वरूप ने आते ही उस से कहा, ”सत्यकुमार, मैं ने आज सुना है कि तुम्हारी बेटी और उस के प्रेमी ललित को मध्य प्रदेश से पकड़ लिया है. देख भाई, मैं तेरा बचपन का दोस्त रहा हूं, इसीलिए तुझे बताने और समझाने आ गया. अब जमाना बदल गया है, हमें भी अब जमाने के अनुसार खुद को ढालना है. इसलिए कल जब तुम और तुम्हारी पत्नी थाने जाओगे तो अपनी बेटी से प्यार से बात करना. बेटी मान जाए तो अच्छी बात है, लेकिन यदि वह अपनी जिद पर अड़ी रहती है तो भाई तू फिर अपने दिमाग को शांत रखना. याद रख, तेरी बेटी अब बालिग हो चुकी है. पुलिस या कानून उसी बात को मानेगा जो आज के कानून में है.’’ यह कह कर उस का दोस्त रामस्वरूप वहां से चला गया.
रामस्वरूप सरकारी नौकरी पर भी था. बचपन से आज तक वह सत्यकुमार को हर मामले में अपनी निष्पक्ष राय दिया करता था और रामस्वरूप की सलाह को अकसर सत्यकुमार मान भी लिया करता था, लेकिन उस दिन अपने दोस्त की बात सत्यकुमार को बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी थी.
वह सोचने लगा कि अगर रामस्वरूप की खुद की बेटी किसी के साथ भागी होती तो क्या वह ऐसा कर सकता था, जैसा वह उसे समझा कर गया है. उस का अब काम में चाह कर भी मन नहीं लग रहा था. उस ने तुरंत एक पैंट कमीज का कपड़ा नाप के अनुसार काटा और उसे अपनी दुकान के कारीगरों को दे कर बाजार जाने की बात कह कर दुकान से निकल गया.
तभी रास्ते में सत्यकुमार की मुलाकात अपने कस्बे के 2 पुराने दोस्तों से हो गई, जो दूर खेत में एक पेड़ के नीचे बैठ कर शराब पी रहे थे, वे दोनों रवि और करण थे, जिन के साथ कभीकभार सत्यकुमार अपनी दुकान में या किसी खोखे में एकदो पैग लगा लिया करता था. तभी करण की नजर सत्यकुमार पर पड़ गई तो उस ने आवाज दे कर उसे अपने पास बुला लिया.
जब सत्यकुमार उन के पास पहुंचा तो रवि और करण ने देखा कि सत्यकुमार की स्थिति अत्यधिक तनाव में नजर आ रही थी. ऐसा लग रहा था, जैसे वह अंदर ही अंदर गर्म पानी की तरह खौल रहा हो.
”अरे भाई सत्यकुमार, टेंशन में इतना मत रहो. आजकल के बच्चे तो बस अपनी मनमानी करने में लगे हुए हैं. तुम पहले 2 घूंट ले कर अपना गला तर कर लो.’’ रवि डिस्पोजल गिलास में शराब भर कर उसे पकड़ाते हुए बोला.
सत्यकुमार एक ही घूंट में गिलास की पूरी शराब गटक गया. रवि उस के गिलास में फिर से शराब डाल ही रहा था कि तभी सत्यकुमार ने उसे मना करते हुए कहा, ”रवि भाई, मैं एक जरूरी काम से बड़े बाजार जा रहा हूं. फिर मिलते हैं.’’
”देखो सत्यकुमार भाईसाहब, सुना है पुलिस तुम्हारी बेटी और उस लफंगे लड़के को पकड़ लाई है. थाने में जा कर जरा समझदारी से काम लेना, प्यार से अपनी बेटी को समझाना, शायद तुम्हारा कहा मान जाए,’’ किशन ने उसे समझाते हुए कहा.
सत्यकुमार वहां से तुरंत खड़ा हो गया और आगे बढ़ गया. मगर जातेजाते उस के कानों में रवि की यह बात आ ही गई थी. रवि किशन से कह रहा था, ”यार किशन, हमारे सत्यकुमार भैया तो बेचारे बहुत सीधेसादे, कम बोलने वाले इंसान हैं, यदि मेरी बेटी किसी दलित के साथ घर से भागी होती तो मैं उस के टुकड़े कर देता.’’
सत्यकुमार ने भी मन ही मन अब पूरा निश्चय कर लिया था कि वह पहले प्यार से अपनी बेटी को समझाएगा, लेकिन वह नहीं मानेगी तो उसे इस दुनिया में जीने का कोई हक भी नहीं है. उस ने अपने परिचित की दुकान से एक बटन वाला चाकू खरीदा और देर शाम को घर आ गया.
घर पर आते ही उस की पत्नी रन्नो देवी ने उसे बताया कि अभी कुछ देर पहले थाने से 2 पुलिस वाले आए थे. बता रहे थे कि उन की पुलिस टीम शिवानी और ललित को मध्य प्रदेश से पकड़ लाए हैं. हम दोनों को कल सुबह थाने आने को कहा है.
यह सुन कर सत्यकुमार अपने कमरे में गया. उस ने जम कर शराब पी, खाना खाया और बिस्तर पर पसर गया, लेकिन उसे फिर भी नींद नहीं आई. वह बेचैनी से सारी रात करवटें बदलता रहा.
12 जून, 2026 शुक्रवार के दिन पुलिस की टीम ने प्रेमी ललित और उस की प्रेमिका शिवानी को मध्य प्रदेश के सतना जिले के बरौंधा (बरौंधा घाटी) क्षेत्र से बरामद किया था, जिस के बाद दोनों का बयान लेने के लिए जिला बांदा के बदौसा थाने में ले कर आ गई थी. इसी बीच पुलिस ने शिवानी और ललित के फेमिली वालों को भी बातचीत के लिए थाने बुला लिया था.
बदौसा थाना पुलिस ने वहां पर सुविधा के लिए काउंसलर को भी बुलवा लिया था.
पुलिस ने पहले तो फेमिली वालों के साथ मिल कर दोनों प्रेमी और प्रेमिका से विस्तृत पूछताछ की. पूछताछ के दौरान शिवानी और ललित ने अपनी मरजी और बालिग होने के नाते शादी करने की बात स्वीकारी और साथ ही उन्होंने विवाह से संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को दिखाए. अब पुलिस शिवानी के मैडिकल और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान कराने की तैयारी में जुट गई.
इसी दौरान काउंसलर ने शिवानी, उस के पापा सत्यकुमार और मम्मी रन्नो देवी को अकेले में बात करने की परमिशन दे दी. तीनों एक अलग कमरे में चले गए, जहां पहले मम्मी रन्नो देवी ने शिवानी को इस संबंध में एक बार और सोचने को कहा, लेकिन शिवानी चुपचाप अपनी मम्मी की नसीहत गरदन झुका कर सुनती रही, उस ने कुछ भी जवाब नहीं दिया.
अब सत्यकुमार अपनी कुरसी से खड़ा हो कर बेटी शिवानी के सामने आ गया और शिवानी से बोला, ”देख बेटी, ऐसे फैसले कभीकभी अपने लिए, अपने परिवार के लिए और हमारे समाज के लिए बहुत दुखदायी बन जाते हैं. आज मेरी स्थिति यह हो गई है कि मैं अपने मोहल्ले और कस्बे में सिर उठा कर नहीं चल सकता. ललित हम से नीची जाति का है. ऐसा है, तुम ने शादी कर ली है, फिर भी कोई बात नहीं बिगड़ी है. तुम अब इसे तुरंत तलाक दे दो, मैं तुम्हारी शादी अपनी बिरादरी के लड़के से धूमधाम से करवा दूंगा.’’
इस पर शिवानी तुरंत बोली, ”पापा, आप ये कैसी बात कर रहे हो, ललित अब मेरा पति परमेश्वर है. पापा, जातियां भगवान नहीं बनाता, बल्कि इंसान ही जातियां बनाता है. ललित चाहे जिस जाति का हो, मैं ने उस से बाकायदा शादी की है. अब जब वह मेरा पति है तो मैं उसी के साथ जीऊंगी और उसी के साथ मरूंगी. यह मेरा आखिरी फैसला है.’’
यह बात सुनते ही सत्यकुमार का माथा घूम गया. उस ने कमर में छिपाया हुआ चाकू निकाला और थाने में बैठी शिवानी पर ताबड़तोड़ वार करने लगा.
इधर काउंसलिंग की पूरी तैयारी हो चुकी थी. इस के बाद शिवानी को वन स्टौप सेंटर भेजे जाने की तैयारी हो रही थी, लेकिन तभी शिवानी और उस की मम्मी रन्नो देवी की चीखपुकार सुन कर वहां पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने आरोपी सत्यकुमार को मय चाकू के हिरासत में ले लिया.
पुलिस ने गंभीर रूप से घायल शिवानी को तुरंत अतर्रा सीएचसी पहुंचाया. वहां प्राथमिक उपचार के बाद शिवानी को बांदा के मैडिकल कालेज रेफर कर दिया गया, जहां उपचार के दौरान उस की मौत हो गई.
थाने के अंदर अपनी बेटी की चाकू मार कर हत्या करने वाले पिता सत्यकुमार चौहान पर थाना बदौसा में 12 जून, 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 103 (हत्या) के तहत केस दर्ज कर लिया गया.
शुरुआत में जब शिवानी घायल थी, तब पुलिस ने सत्यकुमार के खिलाफ धारा 109 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया था. लेकिन जब अस्पताल में इलाज के दौरान शिवानी की मौत हो गई तो मृतका की मम्मी रन्नो देवी की तहरीर पर इस केस में हत्या की धारा 103 जोड़ दी गई थी.
उधर शिवानी की हत्या देख कर रन्नो हतप्रभ रह गई थी और अपनी बेटी को फर्श पर गिरे देख बेहोश हो गई थी. बाद में रन्नो ने पुलिस और मीडिया को बताया कि 18 मई, 2026 को वह अपने मायके किसी समारोह में गई थी. जब वह मायके से वापस घर आई तो उसे पता चला कि उस की सब से छोटी बेटी शिवानी घर से लापता है.
बाद में हमें यह जानकारी मिली कि वह हमारे ही कस्बे के ललित वर्मा के साथ फरार है. हम ने 18 मई, 2026 को बदौसा थाने में बेटी को ललित वर्मा द्वारा उसे घर से भगाए जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.
पुलिस ने शिवानी और ललित को मध्य प्रदेश से पकड़ लिया था और 12 जून को ललित के फेमिली वालों के साथसाथ हमें भी थाने बुलवाया गया था. जब मुझे और मेरे पति को शिवानी से अकेले में बात करने की अनुमति मिली तो मैं ने भी अपनी बेटी शिवानी को काफी समझाया, लेकिन उस ने मेरी बातों का जवाब तक नहीं दिया.
रन्नो चौहान ने आगे बताया कि 18 मई, 2026 को शिवानी के घर से भागने के बाद मेरे पति सत्यकुमार बहुत दुखी और परेशान रहने लगे थे. जब मेरे पति ने 12 जून को शिवानी को अकेले में ललित से तलाक लेने की बात कही तो शिवानी ने साफसाफ कह दिया था कि वह अब ललित के साथ ही जिंदगी गुजारेगी.
उस के बाद भी मेरे पति ने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही. शिवानी ने पुलिस के और हमारे सामने साफसाफ कह दिया था कि उस ने अपनी मरजी से ललित वर्मा के साथ शादी की है और उसी के साथ रहेगी. इसी बात पर गुस्सा हो कर मेरे पति ने चाकू निकाल कर शिवानी को मार डाला.
इस घटना के तुरंत बाद मृतका शिवानी की मम्मी रन्नो चौहान ने खुद आगे आ कर अपने पति सत्यकुमार चौहान के खिलाफ तहरीर दर्ज कराई, जिस के आधार पर पुलिस ने आरोपी सत्यकुमार चौहान को गिरफ्तार कर लिया था.
बांदा के बदौसा थाने के अंदर हुई शिवानी चौहान की औनर किलिंग मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि शिवानी के पेट पर हुआ चाकू का वार इतना गहरा था कि उस का लीवर ही फट गया था. आरोपी पिता ने अपनी बेटी के पेट में 3 इंच गहरा चाकू घोंप डाला था, जिस की वजह से उस का लीवर ही बुरी तरह से डैमेज हो गया था.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शिवानी के शरीर पर चाकू के कई वार पाए गए. उस के पेट पर 2 गहरे घाव थे. इस के अलावा हमले को रोकने की कोशिश में उस की बाईं कोहनी और हथेली पर भी गंभीर चोटें आई थीं.
यदि युवकयुवती ने अरेस्टिंग स्टे (गिरफ्तारी पर रोक) ले लिया था, जिस का नोटिस भी बसौदा थाने में 10 जून को ही आ चुका था तो पुलिस को यह अधिकार ही नहीं था कि वह उन दोनों को गिरफ्तार करे. अहम सवाल यह है कि पुलिस संरक्षण में थाने के भीतर भला कैसे किसी की हत्या हो सकती है?
बदौसा थाने के अंदर यह गंभीर वारदात होने से पुलिसकर्मियों की लापरवाही साफ उजागर हुई थी, जिस के लिए सीओ (सदर) सौरभ सिंह को इस मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई थी.
13 जून, 2026 शनिवार को सीओ (अतर्रा) एवं सीओ (सदर) ने दोबारा घटनास्थल की जांच करने के साथ फोरैंसिक टीम से साक्ष्य संकलित कराए थे. उस के बाद इस गंभीर लापरवाही के आरोप में बांदा के एसपी पलाश बंसल ने बदौसा थाने के प्रभारी अजीत प्रताप सिंह, घटना के दिन दिवस अधिकारी रहे एसआई सुरेंद्र कुमार मिश्रा और महिला कांस्टेबल राखी को लाइन हाजिर कर दिया.
एसपी पलाश बंसल ने बताया कि घटना के समय ये तीनों पुलिसकर्मी थाने में ही उपस्थित रहे थे. उन के थाने में रहने से जांच प्रभावित हो सकती थी, इसीलिए इन के खिलाफ काररवाई की गई है.
सीओ (सदर) की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की काररवाई सुनिश्चित की जाएगी. इस के साथ ही बबेरू कोतवाली के एसएसआई राधाकृष्ण तिवारी को बदौसा थाने का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है.
बरछा बदौसा, इंद्रा कालोनी निवासी सत्यकुमार चौहान का अपना दरजी का अच्छा काम था. उस के परिवार में पत्नी रन्नो चौहान के अलावा एक बेटा व 2 बेटियां थीं. परिवार में सब से छोटी बेटी शिवानी थी, जो घर में सब की लाडली थी. घर वालों ने उसे पढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन वह केवल 10वीं की परीक्षा किसी तरह से पास कर पाई थी. उस के बाद उस ने पेरेंट्स को बता दिया कि वह आगे नहीं पढऩा चाहती. अब वह कोई कोर्स वगैरह करेगी. इस के बाद शिवानी सिलाई, कढ़ाई और बुनाई का कोर्स करने लगी थी.
एक बार मोहल्ले में शिवानी की एक सहेली की बड़ी बहन की शादी का समारोह हो रहा था. शिवानी भी इस समय खूब बनठन कर आई थी. सभी की नजरें उसी पर थीं. तभी उस की नजर डीजे बजा रहे एक आकर्षक युवक पर पड़ी तो उस ने देखा कि वह युवक बस उसे ही देखे जा रहा था. डीजे में गाने बज रहे थे. युवक और युवतियां डीजे पर जम कर डांस करने में लगे थे. क्योंकि बारात अब तक आ चुकी थी, तभी डीजे वाला युवक शिवानी को अकेले कुरसी पर बैठे देख कर उस के पास आ गया तो शिवानी एकदम से सकपका उठी थी.
उस ने उस युवक के चेहरे की ओर देखा और पूछा, ”जी, कहिए क्या काम है?’’
उस युवक ने जल्दी से कहा, ”देखिए, मैं अपनी पसंद का एक गाना लगाना चाहता है. मुझे पूरी उम्मीद है कि आप को भी यह गाना जरूर पसंद आएगा.’’
शिवानी ने भी मुसकराते हुए अपनी गरदन हिला कर हां कह दिया.
वह अजनबी युवक लगभग दौड़ते हुए डीजे के पास पहुंच गया और उस ने गाना बंद कर के वहां एक नया गाना लगा दिया, जिस के बोल थे, ‘हम बने, तुम बने एक दूजे के लिए’.
ये गाना लगते ही वहां पर उपस्थित घराती और बाराती सब के सब जम कर डांस करने लगे थे. हर उम्र के जोड़े उस गाने में मस्त होने लगे थे. फोटोग्राफर अलगअलग एंगलों से पोज लेने में लग गए, लेकिन दूसरी तरफ शिवानी और वह युवक जिस का नाम ललित था, बगैर पलकें झुकाए एकदूसरे की ओर देख कर मुसकराते जा रहे थे. शायद इसी को किशोरवय उम्र का पहला प्यार भी कहते हैं.
उस दिन के बाद से दोनों में लुकाछिपी का प्यार चलने लगा था. ये अब एकदूसरे से भी मिलने लगे थे. इसी बीच दोनों के बीच आपस में पूरा परिचय भी हुआ, शिवानी ने अपने घरपरिवार बारे में ललित को सब कुछ बता दिया था.
यह भी बता दिया था कि घर पर सभी उसे बचपन से ही प्यार से नोनिया के नाम से पुकारते हैं. उधर ललित वर्मा के घर में उस के पापा रामकृपाल वर्मा, मम्मी मीरा वर्मा, बड़ा भाई विनोद और एक बड़ी बहन पूजा थी. ललित का बड़ा भाई विनोद व बड़ी बहन पूजा का विवाह हो चुका था. ललित के पापा रामकृपाल वर्मा विद्युत विभाग में संविदा के तौर पर लाइनमैन की नौकरी करते थे.
धीरेधीरे ऐसे ही 4 वर्ष कैसे गुजर गए, इस का किसी को पता भी नहीं चल सका. ललित अब डीजे में काम करने के साथ साथ अन्य काम भी करने लगा था. अब शिवानी के घर पर उस की शादी के लिए रिश्ते भी आने लगे थे. जब एक दिन शिवानी ने रिश्तों वाली बात ललित वर्मा को बताई तो अगले ही पल उस की आंखों से आंसू बहने लगे थे.
देखते ही वह बोली, ”अरे, तुम्हारी आंखों से तो आंसू टपकने लगे.’’ कह कर शिवानी अपने दुपट्टा से उस की आंखों से आंसू पोंछने लगी.
”शिवानी, मैं ने तुम से पहले भी कई बार कहा था कि अब मुझ से बातें न किया करो, मिला मत करो. कहीं कभी किसी की नजर पड़ गई तो तुम्हारे लिए रिश्ता करने में बड़ी परेशानी सामने आ सकती है. वैसे भी अब वक्त आ चुका है कि अपने रास्ते बदल लें. यही हम दोनों के लिए ठीक रहेगा,’’ ललित ने बड़ी उदासी से कहा.
”अच्छा ललित, एक बात बताओ, जब मेरी कहीं शादी हो गई तो क्या तुम भी शादी कर लोगे?’’ शिवानी ने पूछा.
”नहीं शिवानी, कभी नहीं. मैं बस तुम्हारी यादों में अपना पूरा जीवन गुजार दूंगा. तुम हमेशा सुखी और खुश रहो, यही मैं हमेशा दुआ मांगता रहता हूं.’’ ललित ने बोला.
”अरे पगले, तुम ने यह सोच भी कैसे लिया कि मैं तुम्हें छोड़ कर कहीं और शादी कर सकती हूं. अच्छा, यह बताओ, तुम्हारी अब कितनी उम्र हो चुकी है?’’ शिवानी ने पूछा.
”मेरी उम्र अभी 20 साल की हो गई है, वैसे तुम ये सब क्यों पूछ रही हो?’’ ललित ने बोला.
”तुम 20 साल के हो और अभी मैं 18 साल की हूं. अगले साल तुम 21 और मैं 19 साल की हो जाऊंगी. हम फिर शादी कर लेंगे,’’ शिवानी ने कहा.
”शिवानी, कभीकभी तुम भी बड़ी बेसिरपैर की बातें करने लगती हो. देखो, तुम चौहान हो यानी कि ठाकुर और मैं वर्मा हूं तो भला हम दोनों की शादी कैसे हो सकती है?’’ ललित ने कहा.
”देखो ललित, प्यार आपसी समझ, सम्मान और भरोसे पर ही खरा उतरता है. इन भावनाओं का किसी जाति या मजहब से कोई लेनादेना भी नहीं है. जब 2 लोग परस्पर एकदूसरे से सच्चा प्यार करते हैं तो वे एकदूसरे के दिल को दिखते हैं न कि उस की जाति या समाज के बनाए नियमों को देखते हैं.’’ शिवानी ने कहा.
”लेकिन शिवानी, हमारे इस कदम से तुम्हारे फेमिली वाले तो बहुत नाराज हो जाएंगे. वैसे भी तुम्हारे पिताजी काफी गुस्सेबाज लगते हैं.’’ ललित बोला.
”मुझे यह बात अच्छी तरह से पता है. मुझे भी अपने पापा से मालूम नहीं क्यों इतना डर लगता है. बचपन से ही मेरे बारे में हर फैसले पापा ने ही किए हैं. किस लड़की के साथ खेलना है, किस के साथ नहीं. क्या पहनना है, क्या नहीं पहनना है. जब कभी मैं ने आज तक उन की बात नहीं माना तो उन्होंने मुझ पर बहुत गुस्सा किया है. पर मेरे पास इस का एक प्लान है.’’ शिवानी ने कहा.
”पता नहीं तुम भी कैसेकैसे प्लान बनाती रहती हो शिवानी, पर अभी तुम मुझे इस प्लान के बारे में बताओ कि हमें आगे क्या करना होगा?’’ ललित ने उत्सुकता से पूछा.
”देखो ललित, अब हमारे पास पूरा एक साल पड़ा है. इस में हमें खुद के लिए पैसा जमा करना है. अगले साल तुम भी पूरे 21 साल के हो जाओगे और हमारे पास खूब सारा पैसा भी इकट्ठा हो जाएगा, उस के बाद हम दोनों घर से भाग जाएंगे और शादी कर लेंगे. वहीं कहीं पर कुछ न कुछ नौकरी या रोजगार कर लेंगे. यहां कभी लौट कर ही नहीं आएंगे, इसलिए न तो तुम अपने घर से पैसे या गहने चुरा कर जाओगे, न ही मैं ले जाऊंगी. समझ रहे हो न तुम कि मेरे कहने का मतलब क्या है?’’ शिवानी ने कहा.
”हां, मैं अच्छी तरह से समझ गया हूं कि यदि हम अपने घर कुछ कीमती सामान या पैसे ले कर घर से भाग जाएंगे तो हमारे फेमिली वाले उल्टा ही हमारे ऊपर केस कर डालेंगे,’’ ललित ने कहा.
”वैसे लगता है कि अब तुम धीरेधीरे काफी समझदार होते जा रहे हो.’’ शिवानी मुसकराते हुए बोली.
”ये सब तुम्हारी संगत का असर है,’’ ललित ने कहा.
”वैसे तुम भी कम समझदार नहीं हो. तुम से भी मैं रोज कुछ न कुछ अच्छा सीखती रहती हूं. वैसे एक बात बताऊं?’’ शिवानी ने पूछा.
”जल्दी से बता भी दो न, तुम्हारा ये जो भी सस्पेंस होता है, उसे भी जल्द से जल्द सुन लेना चाहता हूं. तुम अगर ये अपना नया सस्पेंस नहीं बताओगी तो सचमुच आज रात भर मैं ठीक से सो भी नहीं पाऊंगा.’’ ललित ने अधीर होते हुए बोला.
”बात यह है मेरे दोस्त और हमेशा के लिए हमसफर,तभी मैं कई सालों से यह प्लान बनाने में अकेले लगी हुई थी. आज जब तुम ने बात छेड़ दी है तो मुझे अब इस रहस्य का परदाफाश करना ही पड़ेगा. देखो, जब मैं ने तुम्हें पहली बार डीजे बजाते हुए देखा था तो मैं उस दिन से ही दिल ही दिल तुम से प्यार करने लगी थी. जब से मुझे यह बात पता चली कि तुम्हारी और हमारी जाति अलगअलग है तो मैं ने अपने मन में तुम्हें ही वरण करने का आखिरी फैसला कर लिया था.
”पता है पिछले 4 सालों से इसी प्यार को अंतिम मुकाम देने के लिए मैं ने अपनी मेहनत से कमाए हुए और अपने भाई द्वारा दिए गए रुपए अलगअलग गुल्लकों में संभाल कर रखे हैं, ताकि यदि कभी तुम्हारे साथ कभी भागना भी पड़ जाए तो चिंता की जरूरत ही न हो. पता है ललित, अब तक मैं अपनी अलगअलग गुल्लकों में 78,200 रुपए जमा कर चुकी हूं.’’ शिवानी ने चहकते हुए कहा.
”शिवानी इतने रुपयों से हमारा काम बनने वाला नहीं है. जब से मैं कामधंधा कर के पैसे कमाने लगा था तो मैं ने अपनी मेहनत के पैसे अपनी मम्मी और पापाजी के हाथों में दिए, लेकिन उन्होंने मेरे पैसे लेने से साफसाफ इंकार कर दिया. उस के बाद मेरे पापा ने बैंक में मेरे नाम पर एक एकाउंट खुलवा दिया, जिस का एटीएम भी ला कर मुझे दे दिया. अब जब कभी मुझे पैसों की जरूरत होती है तो अपने एटीएम से पैसे निकाल लेता हूं. पता है शिवानी, मेरे एकाउंट में इस समय 3 लाख रुपए से अधिक हो चुके हैं, लेकिन इन पैसों से हमारा काम बनने वाला नहीं है. तुम ने यह काम अच्छा किया कि अपनी प्लानिंग के बारे में मुझे बता दिया. अब मैं एक साल के अंदर अपनी कड़ी मेहनत से इतने पैसे जमा कर लूंगा कि हमें कुछ सालों तक काम करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. जब तुम ने इतना सोचा है तो क्या मैं कभी पीछे रह सकता हूं.’’
जब ललित ने यह बात कही तो शिवानी ने आगे बढ़ कर ललित को अपनी बाहों में ले लिया. उस के बाद जैसे ही ललित की उम्र 21 वर्ष की पूरी हुई तो दोनों ने घर से भागने का अपना अंतिम फैसला ले लिया था.
18 मई की सुबह जैसे ही शिवानी की मम्मी रन्नो चौहान अपने मायके एक समारोह में शामिल होने के लिए गई तो शिवानी चौहान ने ललित को फोन कर आज ही भागने का प्लान बता दिया था. इस बीच ललित बैंक गया और उस ने अपने एकाउंट से इतने पैसे निकाल लिए जो उन के लिए पर्याप्त थे. उस के बाद वे दोनों अपनेअपने घरों से निकल लिए.
घर से भागने के बाद सब से पहले शिवानी और ललित ने एक मंदिर में प्रेम विवाह कर लिया. कानूनी तौर पर अपने विवाह को और अधिक पुख्ता करने के लिए उन्होंने अपनी शादी का रजिस्ट्रैशन भी कोर्ट में करवा लिया, ताकि उन्हें भविष्य में कोई अलग न कर सके. शिवानी और ललित 18 मई, 2026 से मध्य प्रदेश के सतना जिले के बरौंधा घाटी में छिप कर रह रहे थे. वहां पर शादी के बाद वे दोनों पतिपत्नी की तरह रहने लगे थे.
इधर जब रन्नो देवी 18 मई, 2026 की शाम को अपने मायके से घर पहुंची तो उसे शिवानी के भागने की खबर लगी कि वह अपने प्रेमी ललित के साथ फरार हो गई है. रन्नो देवी ने उसी दिन शाम को बदौसा थाने में ललित वर्मा के विरुद्ध अपनी बेटी शिवानी का बरगला कर अपने साथ भगाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी, उस के बाद पुलिस उन दोनों की तलाश में जुट गई थी.
मुखबिर की सूचना पर बदौसा थाना पुलिस ने इस प्रेमी जोड़े को मध्य प्रदेश के सतना से सकुशल बरामद कर लिया और उन दोनों को वापस बदौसा थाने ले कर आ गई. पुलिस शिवानी का मैडिकल टेस्ट कराने और उस के कोर्ट में बयान दर्ज कराने की तैयारी करने में लग गई थी.
इसी बीच पुलिस ने शिवानी और ललित के फेमिली वालों को भी बातचीत के लिए बदौसा थाने में बुलवा लिया था. शिवानी ने पुलिस व अपने परिवार को साफसाफ बता दिया था कि उन दोनों का विधिवत विवाह मंदिर में और उस के बाद कोर्ट में भी हो चुका है.
इसी बीच थाने के अंदर काउंसलिंग सत्र के दौरान शिवानी के पेरेंट्स ने उसे समझाने का प्रयास किया. उस के बाद शिवानी के पापा सत्यकुमार चौहान ने अपनी बेटी शिवानी को उन की इज्जत का वास्ता और दोनों परिवारों के बीच ऊंचनीच का वास्ता दे कर शिवानी को तलाक देने का दबाब बनाया. लेकिन शिवानी ने अपने पिता की बात को मानने से साफसाफ इंकार कर दिया. शिवानी अपनी जिद पर अड़ी रही. इसी बात पर बुरी तरह से आहत होने के बाद गुस्से में आ कर सत्यकुमार चौहान ने अपने कमर में पहले से ही छिपाया हुआ बटन वाला चाकू निकाला और अपनी बेटी शिवानी पर ताबड़तोड़ वार दिए, जिस की इलाज के दौरान मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी सत्यकुमार चौहान को हथियार के साथ मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था.
ललित की मम्मी मीरा वर्मा का कहना है कि बेटे सहित हम सभी परिवार जनों को यह भय है कि जिस पिता ने थाने में घुस कर अपनी बेटी को सरेआम मार डाला, वह निर्दयी इंसान जेल से बाहर आने के बाद हमारे परिवार को कैसे बख्शेगा. इसलिए हमारे परिवार को सुरक्षा देनी चाहिए.
वहीं जांच अधिकारी सीओ सौरभ सिंह का कहना था कि अभी मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस के आधार पर ही आगे की काररवाई की जाएगी और इस गंभीर मामले में सभी पक्षों के बयान लिए जाएंगे.
उधर दूसरी ओर प्रेमी पति ललित वर्मा के पुराने रिहायशी घर के बाहर कथा संकलन तक पुलिस का पहरा था. अभियुक्त सत्यकुमार चौहान के जेल जाने के बाद भी ललित और उस का परिवार अभी भी भय के साए में जी रहा है. उन का कहना है कि पुलिस जब थाने के अंदर भी सुरक्षा नहीं दे सकी तो बाहर कैसे बचा पाएगी.
धर्म और जाति के नाम पर ऊंचनीच का भेदभाव सदियों से चली आ रही एक सामाजिक बुराई है. इज्जत, धर्म, जाति, आनबानशान के नाम पर जान लेने वाले लोगों के अपनेअपने तर्क हैं. उन की खुद की पंचायतें हैं और अपने नियमकायदे और अपने कानून हैं. इन लोगों ने नई सभ्यता, विज्ञान और तरक्की और भौतिक सुखों को तो अपना लिया, लेकिन अभी तक भी ये लोग यह बात बरदाश्त नहीं कर सके कि उन की बहनबेटी किसी गैरजाति, गैरधर्म के युवक के साथ अपनी जिंदगी की अनमोल खुशी पा सके.
बांदा जिले के बसौदा थाने में शुक्रवार 12 जून, 2026 को जो कुछ भी अमानवीय कृत्य हुआ, उस ने सिर्फ एक युवती की जान ही नहीं ली, बल्कि हमारे वर्तमान समाज की उस सोच को भी बेनकाब कर दिया, जो बेटियों को आज भी अपनी इच्छा से जीवन चुनने का अधिकार देने को तैयार नहीं है. युवती बालिग थी, उस ने अपनी पसंद से विवाह किया था और वह अपने पति के साथ जीना और रहना चाहती थी, लेकिन पिता के लिए शायद बेटी की इच्छा से बड़ा सवाल उस की कथित सामाजिक प्रतिष्ठा थी, जिसे वह बिलकुल भी ठेस नहीं लगाना चाहता था.
जब बेटी ने घर लौटने से इंकार कर दिया तो पिता ने तर्क नहीं, बल्कि हथियार चुना. जिस का परिणाम यह हुआ कि एक नौजवान बेटी की सांसें थम गईं और एक बाप सलाखों के पीछे पहुंच गया.
विडंबना देखिए, जिस पिता ने बेटी को जन्म दिया, उसी ने उस की जिंदगी छीन ली. आखिर सम्मान किस का बचा? बेटी चली गई, परिवार बिखर गया और पिता हत्यारा कहलाया. यह लोमहर्षक घटना बताती कि जब अहंकार रिश्तों पर हावी हो जाता है, तब खून के रिश्ते भी खून बहाने से नहीं हिचकते. यह घटना एक चेतावनी है, क्योंकि बेटियों को संपत्ति समझने और उन की इच्छाओं को कुचलने वाली सोच आज भी जिंदा है. जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, तब तक ऐसे थाने, अदालतें और अस्पताल समाज की असफलता की गवाही ऐसे ही देते रहेंगे.
आज ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं, जहां किसी का बेटा किसी गैरजाति की लड़की को भगा कर शादी कर घर लाया हो और उस बेटे के पेरेंट्स ने ससम्मान उसे बेटी मान कर अपनाया हो. जब तक हमारे समाज के लोग खुद आगे आ कर औनर किलिंग (शान के नाम पर हत्या) और छुआछूत जैसी कुप्रथाओं का विरोध नहीं करेंगे, तब तक केवल कानून से इसे रोकना मुश्किल है.
वह जगह जहां पर हर कोने पर दरजनों पुलिस वाले खड़े हों, जहां हर व्यक्ति आ कर अपनी तकलीफ बता रहा हो, उस पुलिस स्टेशन को सब से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन बांदा जिले का बदौसा थाना एक 19 वर्षीय युवती के लिए उस की कब्रगाह बन गया. यह केवल इसीलिए हुआ कि आज पुलिस अकसर पंचायत वाला काम करने लगी है, यानी कि सब कुछ जानने के बावजूद भी समझौते का काम कराने लगती है. खुद पंच बन जाती है.
युवक और युवती बालिग थे तो भी पुलिस उन दोनों को उन के परिवार सहित काउंसलिंग के लिए क्यों बुला रही थी, जबकि इस केस में पुलिस को उन की काउंसलिंग कराने के बजाए उन्हें सुरक्षा देने का काम करना था.
वहां पर एक तरफ तो भय से ग्रसित बेटी थी और दूसरी तरफ था उस का आग उगलता परिवार, बिना कोई खतरा भांपे युवती को उस के पेरेंट्स के साथ एक ही कमरे में समझौते के लिए बिना तलाशी लिए बैठा दिया गया. पुलिस की मौजूदगी ने उस परिवार के गुस्से को शांत नहीं किया, बल्कि आमनेसामने वाली उस स्थिति में उन्हें एक अंतिम और हताश कदम उठाने के लिए उकसा डाला था. वह कदम इतना भयानक था कि पिता द्वारा बेटी के सीने में सीधे चाकू घोंप दिया गया था. उस हत्यारे ने इस बात की कोई परवाह भी नहीं की कि वह उस समय थाने के अंदर खड़ा है. उस के लिए उस समय सम्मान बचाने का जुनून कानून से कहीं अधिक बड़ा हो गया था.
कानूनी प्रक्रिया पर ये जो आज सामाजिक पंचायतें हावी होती जा रही हैं, यही ऐसी त्रासदियों का मुख्य कारण बनती जा रही हैं. एक पुलिस थाने को जिसे समाज में कानून और सुरक्षा का सब से मजबूत प्रतीक माना जाता है, यदि वह ऐसी चरम अपराध को नहीं रोक सकता तो क्या समाज के सब से कमजोर और असुरक्षित वर्गों के लिए सुरक्षित स्थान की धारणा अब केवल भ्रम मात्र बन कर रह गई है. Police Station Murder






