Noida Murder Case. समाजवादी पार्टी के युवा नेता अनिल यादव की सज्जनता का फायदा उठाते हुए शातिर और महत्त्वाकांक्षी हिना ने अपने गुनाह छिपा कर उस के घर तक पैठ बना ली. अनिल ने हर तरह से उस की मदद तो की ही, मांगने पर 6 लाख रुपए उधार भी दे दिए. लेकिन जब रुपए लौटाने की बात आई तो… 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका देश की राजधानी दिल्ली से सटा उत्तरप्रदेश का जिला गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिस तेजी से विकास कर रहा है, उतनी ही तेजी से वहां अपराध का ग्राफ भी बढ़ रहा है. सच है, जहां पैसा होगा वहां अपराध भी होगा. क्योंकि ये दोनों साथसाथ चलते हैं. पुलिस के सजग रहने के बावजूद कब कौन किस तरह के अपराध का शिकार हो जाए, कोई नहीं जानता.

20 अप्रैल, 2014 को उत्तरप्रदेश में सत्तासीन समाजवादी पार्टी के युवा नेता और नगर के महासचिव अनिल यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. रात सवा 8 बजे के करीब उस की पत्नी सुनीता को हिना ने फोन कर के बताया, ‘‘अनिल की हत्या हो गई है और उन की लाश मेरे फ्लैट में पड़ी है.’’

हिना की बात सुन कर सुनीता के होश उड़ गए. वह हड़बड़ा कर बोली, ‘‘क…क्… क्या?’’

सुनीता कुछ और पूछ पाती, उस से पहले ही दूसरी ओर से फोन काट दिया गया. उस ने पलट कर फोन मिलाया, लेकिन दूसरी ओर से फोन नहीं उठाया गया. इस अनहोनी से सुनीता कांप उठी. कुछ देर पहले ही अनिल हिना के फ्लैट पर जाने की बात कह कर घर से निकला था. अनिल अपनी पत्नी और 2 बेटों, आर्यन तथा अवि के साथ सेक्टर-71 के एक अपार्टमेंट में रहता था.

सुनीता ने अपने देवर सुनील को फोन कर के यह बात बताई तो वह भी घबरा गया. सुनील अपने रिश्ते के भाई सुभाष को साथ ले कर थोड़ी ही देर में हिना के सेक्टर-71 स्थित डी-20/2 नंबर के फ्लैट पर पहुंच गया.

फ्लैट के दरवाजे पर बाहर से कुंडा लगा था. सुनील ने कुंडा खोला तो अंदर का नजारा देख कर उस के होश उड़ गए. अनिल फर्श पर सीधा अचेत पड़ा था. उस के बाएं हाथ की कलाई पर कटे के निशान थे. होंठ और चेहरा नीला पड़ा हुआ था. गले पर भी दबाने का निशान था. इस के अलावा फर्श पर खून के धब्बे भी थे.

सुनील ने सुभाष की मदद से अनिल को कार में डाला और सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल ले गए. वहां के डाक्टरों ने अनिल को भरती करने से मना कर दिया तो वे उसे ले कर मेट्रो अस्पताल गए, जहां डाक्टरों ने चैक कर के उसे मृत घोषित कर दिया.

अनिल की मौत की खबर से उस के घर में कोहराम मच गया. घर वाले और नातेरिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए. घटना की सूचना पा कर कोतवाली सेक्टर-58 के प्रभारी एस.के. यादव भी मौके पर जा पहुंचे.

मामला सत्तारूढ़ दल के युवा नेता से जुड़ा था, इसलिए पुलिस अधीक्षक योगेश सिंह, पुलिस उपाधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव भी मौके पहुंच गए थे. जिस फ्लैट में घटना घटी थी, उस का सामान बिखरा हुआ था. वहां शराब की 2 खाली बोतलें और कुछ गिलास रखे थे.

पीले रंग की एक चुन्नी बैड के ठीक ऊपर पंखे से लटक रही थी. चुन्नी में नीचे की ओर फंदा नहीं था. पहली ही नजर में लग रहा था कि हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी.

इस बीच पुलिस ने अनिल की लाश को अस्पताल से पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया था. अनिल के घर वाले रिपोर्ट दर्ज कराने कोतवाली पहुंचे तो पुलिस ने सुबह आने को कहा. अगले दिन अनिल के घर वालों ने हिना और उस के साथियों के खिलाफ कोतवाली सेक्टर 58 में अनिल की हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया.

पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने अनिल की लाश को उस के घर वालों के हवाले कर दिया. कोतवाली प्रभारी एस.के. यादव की कार्यशैली से अनिल के घर वाले काफी नाराज थे, क्योंकि अभी तक वह उन से मिले तक नहीं थे.

अनिल की हत्या और कोतवाली प्रभारी की कार्यशैली से क्षुब्ध घर वालों ने कुछ लोगों के साथ मिल कर सड़क पर जाम लगा दिया और इंसपेक्टर के खिलाफ काररवाई कर के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग करने लगे.

इस हंगामें की सूचना पुलिस अधिकारियों को मिली तो वे मौके पर पहुंच गए. उन्होंने जाम लगाने वालों को समझाबुझा कर जांच थाना सेक्टर-20 की थानाप्रभारी रीता यादव को सौंप दी.

पुलिस ने अनिल के घर वालों से पूछताछ की तो पता चला कि हिना अनिल की परिचित थी. उसे वह फ्लैट अनिल ने ही किराए पर दिलाया था. हिना पर उस के 6 लाख रुपए उधार थे. वह उन्हें लेने गया था, तभी उस की हत्या कर दी गई थी.

अनिल नोएडा से सटे गांव बहलोलपुर के रहने वाले छोटेलाल यादव का बेटा था. छोटेलाल के परिवार में पत्नी सरोज के अलावा 3 बेटियां कृष्णा, मोनिका, सोनी और 2 बेटे अनिल तथा सुनील थे.

छोटेलाल के पास ठीकठाक जमीन थी. नोएडा बसा तो उन की सारी जमीन प्राधिकरण ने ले ली. छोटेलाल सुलझे हुए व्यक्ति थे. उन्हें जमीन के मुआवजे के रूप में जो पैसा मिला, उस से उन्होंने प्रौपर्टी की खरीदफरोख्त का काम शुरू कर दिया था.

इस के लिए छोटेलाल ने नोएडा में अपना औफिस भी बना रखा था. प्रौपर्टी के काम में उन के बेटे भी उन का हाथ बंटाते थे. अनिल को राजनीति में रुचि थी, इसलिए बीए करने के बाद वह राजनीति में आ कर समाजवादी पार्टी से जुड़ गया. उस का युवाओं में खासा प्रभाव था, इसलिए पार्टी ने उसे महानगर इकाई का सचिव बना दिया था.

मामला गंभीर था. एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने अपने अधीनस्थों को इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने का आदेश दिया. कोतवाली प्रभारी रीता यादव हिना की तलाश में जुट गईं. जानकारियों के आधार पर पुलिस ने उस के कई ठिकानों पर दबिश दी, परंतु वह हाथ नहीं लगी.

प्रौपर्टी डीलर जगदीप सिंह गिल को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की गई, क्योंकि उसी के माध्यम से हिना को फ्लैट किराए पर दिलाया गया था. लेकिन उस से पूछताछ में पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची.

इसी बीच पुलिस को खबर मिली कि हिना अदालत में आत्मसमर्पण की फिराक में है. उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने 29 अप्रैल को अदालत के बाहर अपना जाल बिछाया, लेकिन पुलिस को चकमा दे कर वह बुर्के में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश हो गई. उसे न्यायिक हिरासत में लुक्सर स्थित जिला जेल भेज दिया गया.

अगले दिन कोतवाली प्रभारी रीता यादव ने जेल जा कर हिना से पूछताछ की. जेल में उस ने अनिल की हत्या में अपना हाथ होने से साफ मना कर दिया. जेल में हिना पर कोई दबाव नहीं बनाया जा सकता था. वैसे भी वह काफी तेजतर्रार लग रही थी, इसलिए रीता यादव ने अदालत में उस के रिमांड की अर्जी लगाई.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनितचंद्र ने अर्जी मंजूर कर के 7 मई को हिना को 12 घंटे के पुलिस रिमांड पर दे दिया. हिना बहुत ही शातिर थी. पूछताछ में पहले तो वह पुलिस को बरगलाती रही, लेकिन जब उस ने देखा कि वह बचने वाली नहीं है तो वह फूटफूट कर रोने लगी.

पुलिस ने हिना को चुप करा कर लंबी पूछताछ की. इस पूछताछ में चौंकाने वाली जो कहानी निकल कर सामने आई, उस में अनिल ने अपनी सज्जनता और विश्वास की कीमत जान दे कर चुकाई थी.

हिना खान उर्फ रूबी कौसर मूलरूप से जिला मुरादाबाद के एक गांव के रहने वाले साबिद खान की बेटी थी. साबिद के परिवार में पत्नी शकीला के अलावा 5 बच्चे थे. हिना उन में सब से अधिक महत्वाकांक्षी थी. बचपन से ही वह ठाठबाट से रहने के सपने देखती आई थी.

साबिद की हैसियत ऐसी नहीं थी कि वह अपने बच्चों की हर ख्वाहिश पूरी कर पाता. आर्थिक तंगियों से जूझ कर उस ने किसी तरह बच्चों को बड़ा किया. बेटे काम से लग गए तो उस ने दोनों बड़ी बेटियों का निकाह कर दिया.

उसी बीच साबिद का इंतकाल हो गया तो परिवार की जिम्मेदारी बेटों पर आ गई. बाप के मरने के बाद हिना के दोनों भाई आपराधिक प्रवृत्ति के हो गए. तीसरी तक पढ़ी हिना अब तक जवान हो चुकी थी. वह काफी खूबसूरत थी.

भाइयों की वजह से पुलिस आए दिन घर पर दबिशें देने लगी तो परिवार में बिखराव की स्थिति बन गई. पुलिस जब बहुत ज्यादा परेशान करने लगी तो शकीला हिना और बेटों को ले कर दिल्ली आ गई और मौजपुर में रहने लगी.

दिल्ली बिलकुल हिना के सपनों जैसी थी. यहां के लोगों की चमकदमक वाली जीवनशैली, ऊंची इमारतें और उन के पास खड़ी महंगी कारें, इन सब ने हिना को खूब लुभाया. गांव में रह कर उस ने कभी सोचा भी नहीं था कि दुनिया इस तरह की भी है. हिना भले ही न के बराबर पढ़ी थी, लेकिन भाईबहनों में वह सब से ज्यादा तेजतर्रार थी.

गरीबी की वजह से हिना ने अपने जिन सपनों को कुचला था, दिल्ली आ कर वह उन्हें पूरा करना चाहती थी. खूबसूरत हिना को तमाम आंखें ताकती रहती थीं. इस से उसे जल्दी ही अपनी अहमियत का अंदाज हो गया.

हिना किसी भी तरह ऐशोआराम की जिंदगी हासिल करना चाहती थी. उसी बीच उस की दोस्ती आसिफ से हो गई. आसिफ हिना पर खूब पैसे खर्च करता था. वह उस के साथ दिल्ली के पार्कों और रेस्टोरेंटों में घूमती जरूर रही, लेकिन वह उस की मंजिल नहीं थी.

आसिफ को हिना की सच्चाई का पता तब चला, जब उस ने दरियागंज के रहने वाले एक अन्य युवक से दोस्ती कर ली. आसिफ को यह बात बेहद नागवार गुजरी. आखिर एक दिन संदिग्ध हालातों में उस ने आत्महत्या कर ली.

समय अपनी गति से चलता रहा और हिना उस के साथ खुले आकाश में पंख फैला कर उड़ने की कोशिश रहती रही.

दरियागंज के जिस युवक के साथ हिना ने दोस्ती और प्यार का सफर शुरू किया था, वक्त के साथ वह भी उसे छोटा मोहरा नजर आने लगा. लेकिन ऐसे लोग उसे बेहतरीन जिंदगी से रूबरू करा कर उस की अहमियत का अंदाजा जरूर कराते थे.

हिना ऐसे ही लोगों की बदौलत ऊंचाइयों को छूना चाहती थी. उस के संपर्क बढ़े तो उस ने उसे भी किनारे लगा दिया. उस युवक ने हिना के रवैए से आहत हो कर जहर खा लिया. लेकिन उस की किस्मत अच्छी थी कि समय पर इलाज मिल गया, जिस से वह बच गया.

अब तक हिना के सपनों को पंख लग चुके थे. वह पैसे वाले लोगों को इस्तेमाल करना भी सीख गई थी. उस की जिंदगी में इस तरह के लोग आतेजाते भी रहे. उधर शकीला उस का निकाह करना चाहती थी. हिना ने भी सोचा कि शायद निकाह से ही जिंदगी आराम से कट जाए, इसलिए उस ने निकाह कर लिया. निकाह के साल भर बाद उसे एक बेटी भी पैदा हुई.

हिना का पति उस की हसरतों को पूरी नहीं कर पा रहा, जिस से दोनों में अनबन रहने लगी. फिर जल्दी ही दोनों अलग हो गए. हिना बेटी को अपने साथ ले आई. वह कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिस से जिंदगी आराम से कटे,  क्योंकि उस का हर शौक महंगा था.

हिना की बहन मुमताज का भी पति से विवाद रहता था, जिस से वह भी मायके में ही रहती थी. जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए दोनों बहनों ने गाजियाबाद की ओर रुख किया. उन्होंने दिल्ली बौर्डर पर स्थित पौश इलाके वसुंधरा के सेक्टर-4 में एक फ्लैट किराए पर लिया और कुछ लोगों से संपर्क कर के प्रौपर्टी का धंधा शुरू कर दिया.

हिना खूबसूरत तो थी ही, तेजतर्रार भी थी. उसे लोगों से काम निकालने का हुनर भी बखूबी आता था, जिस से वह ठीकठाक कमाई करने लगी थी. यह सन 2011 की बात है.

उसी दौरान हिना के तार नकली नोटों के कारोबारियों से जुड़ गए. उस का संपर्क रफीक, नुरैन व मोइनुद्दीन से हुआ. ये तीनों नेपाल से बंगलादेश के रास्ते नकली नोट ला कर भारत के अलगअलग हिस्सों में खपाते थे. ये नकली नोट पाकिस्तान से आते थे. रफीक बिहार के गोपालगंज जिले का रहने वाला था तो नुरैन और मोइनुद्दीन उत्तरप्रदेश के देवरिया के रहने वाले थे.

भारत में 1 लाख रुपए नकली नोट 35 हजार रुपए में दिए जाते थे. दिल्ली या उस के आसपास के इलाकों तक आतेआते इन की कीमत 50 हजार रुपए हो जाती थी. 15 हजार के फायदे के लिए लोग हिना से डील करने लगे.

दिल्ली और उस के आसपास के इलाकों में नकली नोटों की तस्करी की पूरी जिम्मेदारी हिना और मुमताज के हाथों में थी. उन के पास पैसा आने लगा तो रातोंरात उन के रंगढंग बदल गए. हिना के फ्लैट में सुखसुविधा की हर चीज आ गई. उस ने बढि़या कार भी खरीद ली.

दोनों बहनें प्रौपर्टी के बिजनैस की आड़ में नकली नोटों का धंधा कर रही थीं. राष्ट्रद्रोह का काम कर के वे ठाठ से रह रही थीं.  बड़ेबड़े तस्कर उन से फोन पर संपर्क करते थे. उन तक नोट पहुंचाने का काम रफीक, नुरैन और मोइनुद्दीन करते थे. नकली नोट ट्रेन द्वारा ले जाए जाते थे, जबकि डील बसअड्डे पर होती थी. हिना के पास अब दौलत की कमी नहीं थी. अनापशनाप पैसा आया तो उसे शेखी बघारने का चस्का लग गया.

वेटर से ले कर दुकानदारों तक को वह हजार-पांच सौ का नोट देती तो बचे रुपए वापस नहीं लेती थी. लोग रुपए लौटाने लगते तो वह गर्व से कहती, ‘‘रख लीजिए, अगर हम ने बचे हुए रुपए वापस लिए तो यह हमारी तौहीन होगी.’’

दुकानदार या वेटर उसे ताकते रह जाते और उस की दरियादिली के कायल हो जाते. हिना का पर्स हमेशा नोटों से भरा रहता था. वह सौ, 2 सौ रुपए के सामान के भी हजार रुपए दे देती थी.

आखिर मुखबिरों के जरिए यह बात पुलिस तक पहुंच गई. थाना लिंक रोड पुलिस ने जांच की तो पता चला कि हिना और मुमताज नकली नोटों की तस्करी से जुड़ी हैं.

तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने तुरंत काररवाई करने का आदेश दिया. पुलिस ने जानकारियां जुटा कर अपना जाल बिछाया और 23 अप्रैल, 2013 को कौशांबी बसअड्डे से हिना, उस की बहन मुमताज, रफीक, नुरैन और मोइनुद्दीन को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वे नोटों का लेनदेन कर रहे थे.

पुलिस ने इन लोगों के कब्जे से 7 लाख रुपए के नकली नोट बरामद किए. इन नोटों में 5 लाख 100 के और बाकी 5 सौ के नोट थे. पूछताछ में पता चला कि अब तक ये लोग लाखों के नकली नोट खपा चुके थे. गाजियाबाद पुलिस द्वारा नकली नोटों की अब तक की यह सब से बड़ी बरामदगी थी.

इस की सूचना गृह मंत्रालय, खुफिया एजेंसियों एनआईए, आईबी और रा को भी दी गई. हिना से गहन पूछताछ की गई. उस के बाद सभी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें डासना जेल भेज दिया गया.

हिना के लिए जेल की जिंदगी गरीबी के दिनों से भी ज्यादा बदतर थी. वह बाहर आने के लिए छटपटा रही थी. लेकिन उस का कोई भी ऐसा अपना नहीं था, जो उस की जमानत कराता. जेल में ही उस की मुलाकात वर्षा से हुई. वर्षा भी किसी अपराध में जेल में बंद थी. एक ही बैरक में होने की वजह से उन में दोस्ती हो गई थी.

जेल में वर्षा से मिलने उस के तमाम परिचित आते रहते थे. जबकि हिना से मिलने कोई नहीं आता था. वर्षा से मिलने अनिल यादव भी आता था. अनिल को देखते ही हिना ताड़ गई थी कि वह न सिर्फ पैसे वाला है, बल्कि शरीफ भी है. उसी को ध्यान में रखते हुए हिना ने एक दिन वर्षा से कहा कि वह किसी भी तरह उस की जमानत करा दे.

‘‘लेकिन मैं तो खुद ही जेल में हूं. ऐसे में मैं तुम्हारी जमानत कैसे करा सकती हूं?’’ वर्षा ने कहा.

‘‘अगर तुम चाहो तो जेल में रहते हुए भी यह काम करा सकती हो.’’ ‘‘वह कैसे?’’ वर्षा ने पूछा.

‘‘वह जो तुम से मिलने आए थे, क्या नाम था उन का?’’ ‘‘अनिल यादव, वह बहुत अच्छे आदमी हैं.’’

‘‘वह तो देख कर ही लग रहा था. उन से कह कर मेरी जमानत करा दो. मम्मी कह रही थीं कि जमानती तो मिल गए हैं, लेकिन इतने पैसे नहीं हैं कि वह वकील कर लें.’’

‘‘ठीक है, इस बार आएंगे तो मैं बात कर के तुम्हारी मुलाकात करा दूंगी. हो सकता है, तुम्हारी जमानत करवा ही दें.’’

कुछ दिनों बाद अनिल वर्षा से मिलने गया तो उस ने हिना की मुलाकात उस से करा दी. हिना ने उस से इस तरह दुखड़ा रोया कि वह उस की बातों में आ गया.

हिना का भोलाभाला चेहरा देख कर अनिल को लगा कि यह मुसीबत की मारी है. मन में दया आ गई और उस ने उसे मदद का आश्वासन दे दिया. हिना ने मां का पता अनिल को दे दिया था. अनिल के मन में दूसरों के लिए कुछ करने का भाव था, इसलिए दिल्ली जा कर वह हिना की मां से मिला.

संतान कैसी भी हो, मांबाप के मन में उस के लिए हमेशा तड़प होती है. शकीला का भी यही हाल था. अनिल ने हिना की जमानत के लिए पैसे तो दिए ही, वकील का भी इंतजाम करा दिया. शकीला ने जमानती की व्यवस्था कर के उस की जमानत करा ली. इस के बाद हिना ने बाहर आ कर अपनी बहन मुमताज की भी जमानत करा ली.

जेल में रहते हुए हिना ने सोचा था कि अब वह कोई ऐसा काम नहीं करेगी, जिस से फिर उसे जेल जाना पड़े. लेकिन बाहर आते ही उस के इरादे बदल गए. उस ने अनिल से संपर्क बनाए रखा, क्योंकि उस से उस के कुछ सपने पूरे हो सकते थे.

सीधासादा अनिल आसानी से बातों में आ जाने वाला इंसान था. उस की इसी कमजोर नस को हिना ने पकड़ लिया था. जेल से आने के बाद वह मां के ही पास रह रही थी.

शकीला ने हिना को खूब समझाया. लेकिन वह पाईपाई के लिए मोहताज थी. उसे जिंदगी की शुरुआत फिर से करनी थी. अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वह कुछ करने के बारे में सोचने लगी. उस की एक बहन शहनाज संभल कस्बे में ब्याही थी. उस के पति का इंतकाल हो चुका था. हिना उस के यहां गई और एक ज्वैलर्स की दुकान पर खरीद के बहाने गहनों पर हाथ साफ कर दिया. उस की बदकिस्मती थी कि वह रंगेहाथों पकड़ी गई. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया.

जिस परेशानी से हिना ने किसी तरह पीछा छुड़ाया था, वही फिर उस के गले पड़ गई इस के लिए वह खुद ही जिम्मेदार थी. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी उस की आजादी छिन जाएगी.  मुरादाबाद में उस का कोई अपना नहीं था, इसलिए जमानत का भी इंतजाम नहीं हो सकता था.

लेकिन शातिर हिना ने इस का इंतजाम कर लिया. उसी जेल में जिला बिजनौर के कस्बा नजीबाबाद का हिस्ट्रीशीटर नाजिम बंद था. नजीबाबाद कोतवाली में उस की हिस्ट्रीशीट खुली हुई थी. जेल में भी वह दबंगई से रह रहा था. हिना को नाजिम काम का आदमी लगा तो उस ने उस पर निशाना साध दिया. नाजिम को भी हिना अच्छी लगी. उस ने उस से दोस्ती कर ली.

हिना ने नाजिम से दोस्ती अपना काम निकालने के लिए की थी. इस के अलावा उस जैसा आदमी प्रौपर्टी के धंधे में भी काम आ सकता था. हिना उस से मिल कर अपना दर्द बयां करने लगी.

लेकिन नाजिम भी कम चलाक नहीं था. हिना ने जब उस से कहा कि वह उसे पसंद करती है. अगर वह उस की जमानत करा देगा तो वह उस की अहसानमंद रहेगी. नाजिम ने उस की जमानत कराने का वादा करते हुए कहा, ‘‘हिना, तुम्हें पसंद तो मैं भी करता हूं और तुम्हारी जमानत भी करा दूंगा. लेकिन बाहर निकल कर तुम्हें मुझ से निकाह करना पड़ेगा.’’

हिना को जरूरत थी, इसलिए उस ने हामी भर दी. नाजिम हिना पर फिदा तो था ही, उस से निकाह कर के उसे पुलिस से बचने का एक नया ठिकाना भी मिल सकता था. इसलिए उस ने अपने लोगों और वकील से संपर्क कर के हिना की जमानत करा दी.

हिना की यह हकीकत जान कर शकीला काफी नाराज थी. घर आने पर उस ने हिना को डांटाफटकारा तो वह घर छोड़ कर चली गई. वह अनिल से मिली और उसे अपनी परेशानी बताते हुए कहा, ‘‘अनिल, मुझे तुम्हारा सहारा चाहिए. मां से लड़ाई हो गई है. मेरे पास रहने की भी कोई जगह नहीं है.’’

अनिल भला आदमी था. हिना को परेशान देख कर वह उसे अपने फ्लैट पर ले गया. मामला एक जवान लड़की का था, इसलिए घर वालों ने उस से हिना के बारे में पूछा. तब अनिल ने उसे अपने दोस्तों की दोस्त बता कर घर में ही रहने की व्यवस्था करा दी. हिना तेज तो थी ही, उस ने कुछ ही देर में लच्छेदार बातें कर के अनिल की पत्नी सुनीता को वश में कर लिया.

हिना अनिल के घर में परिवार के सदस्य की तरह रहने लगी. इस बीच रिश्तेदारी में जाने के बहाने वह नाजिम से मिलने जेल भी गई. दोबारा जेल जाने की बात हिना ने अनिल से छिपा ली थी. अनिल प्रौपर्टी का काम करता था. हिना को भी इस का अच्छा तजुर्बा था, इसलिए अनिल ने उस से ऐसा ही कुछ करने को कहा तो उस ने नोएडा विकास प्राधिकरण में अनिल के रसूख और अपनी सुंदरता के दम पर पकड़ बनानी शुरू कर दी.

किसी भी बाहरी लड़की को घर में रखना ठीक नहीं था. फिर हिना भी वहां नहीं रहना चाहती थी, इसलिए उस ने अनिल से कोई किराए का फ्लैट दिलाने को कहा. अनिल ने उसे प्रौपर्टी डीलर जगदीप सिंह गिल के माध्यम से सेक्टर-71 स्थित फ्लैट नंबर डी-20/2 साढ़े 5 हजार रुपए महीना किराए पर दिला दिया.

उस फ्लैट में अनिल ने जरूरी सामान की भी व्यवस्था करवा दी तो हिना उस में शिफ्ट हो गई. तब तक नाजिम की जमानत हो चुकी थी. दोनोें की फोन पर बातें होती ही रहती थीं, जब तब मिलते भी रहते थे. प्रौपर्टी के काम से हिना खर्च भर के लिए कमा लेती थी. एक दिन हिना अनिल के साथ बैठी थी तो उस ने कहा, ‘‘तुम ने मेरी बहुत मदद की है. बस एक मदद और कर दो.’’

‘‘क्या?’’ ‘‘मैं ब्यूटीपार्लर का काम जानती हूं. मैं अपना ब्यूटीपार्लर खोलना चाहती हूं. इस के लिए मुझे 6 लाख रुपए चाहिए. मैं तुम्हारे रुपए धीरेधीरे कर के लौटा दूंगी.’’ हिना ने कहा.

‘‘ठीक है, बड़ी रकम का मामला है, इसलिए थोड़ा सोचने का वक्त दो.’’

हिना को ले कर अनिल के परिवार में कोई मतभेद नहीं था. सभी उसे पसंद करते थे. घर में रुपयों का लेनदेन अनिल के पिता के हाथों में था. घर में किसी को भी पैसों की जरूरत होती थी तो वह उन्हीं से पैसे मांगता था.

अनिल ने हिना के पैसे मांगने की बात पिता को बताई तो वह उसे पैसे देने को तैयार हो गए. उन्होंने अनिल को 6 लाख रुपए दे दिए तो अनिल ने वे रुपए हिना को दे दिए.

पैसे मिलते ही हिना को एक बार फिर पंख लग गए. उस ने अपना दायरा बढ़ाना शुरू किया. वह प्राधिकरण में लोगों के अटके काम कराने के साथ ठेके दिलाने लगी. प्राधिकरण और प्रौपर्टी के धंधे से जुडे़ लोगों में हिना की एक अलग पहचान बन गई. उसी बीच उस की दोस्ती संदीप और रफीक से हो गई. ये दोनों गाजियाबाद के रहने वाले थे.

हिना अकेली ही रहती थी, इसलिए उस के दोस्तों का उस के फ्लैट पर आनाजाना शुरू हो गया. फ्लैट पर खानेपीने की पार्टियां भी होने लगीं. स्टेटस व दायरा बढ़ाने के लिए वह 3-3 मोबाइल फोनों का इस्तेमाल करती थी. महंगे शौकों की लत उसे पहले से ही थी. वह खूब बनसंवर कर रहती थी.

ब्यूटीपार्लर में हिना का एक बार का खर्च 10 से 20 हजार रुपए आता था. वह स्पा व मसाज थैरेपी भी लेती थी. उस ने अनिल से जो रुपए ब्यूटीपार्लर खोलने के लिए थे, उन्हें वह अपने रईसी शौकों में उड़ाने लगी.

बाहर आते ही नाजिम हिना से निकाह के लिए कहने लगा. दूसरी ओर अनिल की छोटी बहन मोनिका की शादी तय हो गई. 8 मई, 2014 को उस का विवाह होना था. हिना ने एक बार फिर अनिल की शराफत का फायदा उठाया. उस ने कहा कि वह एक लड़के से प्रेम करती है और उस से निकाह करना चाहती है.

अनिल को इस में भला क्या आपत्ति होती. सुनीता भी चाहती थी कि उस का घर बस जाए. उस ने हिना को निकाह का जोड़ा खरीदवाया.

जनवरी में बिजनौर जा कर उस ने नाजिम से निकाह कर लिया. अनिल भी उस के साथ था. उसे क्या पता था कि हिना खुद तो शातिर है ही, जिस से निकाह कर रही है वह भी हिस्ट्रीशिटर है. नाजिम ने उस से बताया था कि वह दिल्ली में नौकरी करता है.

निकाह के बाद नाजिम हिना के फ्लैट पर आनेजाने लगा. चूंकि नाजिम की नीयत साफ नहीं थी, इसलिए हिना के फ्लैट पर आनेजाने वाले उस के दोस्तों से उसे कोई दिक्कत नहीं थी. समय अपनी गति से चलता रहा.

अनिल की बहन की शादी थी, इसलिए उस ने हिना से अपने पैसे मांगे. ब्यूटीपार्लर तो मात्र बहाना था, हिना ने अनिल से रुपए ऐश की जिंदगी जीने के लिए लिए थे. उस ने सोचा था कि कहीं से अचानक पैसे मिलेंगे तो वह अनिल के रुपए लौटा देगी.

हिना अनिल को टालने लगी. लेकिन जब अनिल लगातार अपने पैसे मांगने लगा तो हिना को परेशानी होने लगी. उस के पास रुपए थे नहीं जो लौटा देती. टालने की एक सीमा होती है. हद पार हो गई तो अनिल ने एक दिन धमकी वाले अंदाज में कहा, ‘‘मेरी बहन की शादी है और मुझे हर हाल में रुपए चाहिए. मैं ने हर बुरे वक्त में तुम्हारी मदद की है, इसलिए मैं नहीं चाहता कि मुझ से तुम्हें कोई परेशानी हो.’’

‘‘मैं समझती हूं अनिल लेकिन…’’ ‘‘लेकिनवेकिन कुछ नहीं, तुम मेरे रुपए जल्दी लौटा दो, बस.’’

हिना जानती थी कि अनिल रसूखदार नेता है. अगर वह चाहे तो किसी भी हद तक जा सकता है. उस ने इस मुद्दे पर नाजिम से बात की तो उस ने अनिल को रास्ते से हटाने की खतरनाक सलाह दे डाली. हिना इस के लिए तैयार भी हो गई. उस ने यह भी नहीं सोचा कि अनिल ने उस की कितने बुरे वक्त पर मदद की थी. इस के बाद हिना ने अनिल को खत्म करने की जो योजना बनाई, उस में उस ने रफीक और संदीप को भी शामिल कर लिया.

योजना बना कर 20 अप्रैल, 2014 की शाम हिना ने अनिल को फोन किया कि वह आ कर अपने रुपए ले जाए. अनिल साढ़े 8 बजे के करीब स्कूटी से हिना के फ्लैट पर पहुंचा. तो वहां शराब की महफिल सजी थी. महफिल में नाजिम, रफीक और संदीप शामिल थे. यह सब देख कर अनिल को गुस्सा आ गया. उस ने हिना को बुराभला कह कर अपने रुपए मांगे.

अनिल की हिना और वहां मौजूद लोगों से बहस हो गई. वे तो वहां उसे मारने की योजना बना कर ही बैठे थे. अनिल के साथ वहां जो होने वाला था, उस के बारे में उस ने सपने में भी नहीं सोचा था. सभी एकदम से अनिल पर टूट पड़े.

अनिल ने खुद को छुड़ाना चाहा तो पीछे की ओर गिर गया. इस से उस के सिर में चोट लग गई. सब ने अनिल की हत्या का इरादा बना रखा था, इसलिए उस का गला दबा कर उसे मार दिया. इस के बाद उन्होंने उस के बाएं हाथ की कलाई काट दी.

धक्कामुक्की में मेज का शीशा टूट गया था. हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उन्होंने बैड के ऊपर  लगे पंखे से चुन्नी लटका दी. लेकिन जल्दबाजी में ऐसा कर नहीं पाए. अपना काम कर के नाजिम, संदीप और रफीक चले गए. इस के बाद हिना ने अनिल की पत्नी सुनीता को फोन कर के फ्लैट में लाश पड़ी होने की सूचना दे दी.

अनिल का भाई जब वहां पहुंचा तो हिना भी फरार हो चुकी थी. पुलिस ने दबाव बनाया तब उस ने वकील की मदद से 29 अप्रैल को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था.

पुलिस ने हिना की निशानदेही पर वह चाकू भी बरामद कर लिया था, जिस से अनिल के हाथ को काटा गया था. रिमांड अवधि खत्म होने पर कोतवाली प्रभारी रीता यादव ने हिना को अदालत में पेश किया, जहां से उसे पुन: जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक पुलिस अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार नहीं कर सकी थी. उन की सरगर्मी से तलाश की जा रही थी. अनिल ने हिना को पहचानने में भूल कर दी, यही उस के लिए मुसीबत बन गया. Noida Murder Case

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