IAS Topper Story. जिंदगी में कुछ खास करने के लिए मेहनत और लगन ही नहीं बल्कि जुनून भी जरूरी है. गौरव अग्रवाल में ऐसा ही जुनून था. तभी तो उन्होंने सवा करोड़ सालाना पैकेज की नौकरी छोड़ कर आईएएस की परीक्षा दी और देश भर में टौप किया. 

प्रीति की शादी मात्र 8 दिन पहले हुई थी, 4 जून 2014 को. शादी के लिए उन के पति गौरव अग्रवाल को महज 8 दिनों की छुट्टी मिली थी, उन में से भी 2 दिन दिल्ली में निकल गए थे. पतिपत्नी सही मायनों में महज 4 दिन ही साथ रह सके. लेकिन सवाल पति के कैरियर का था, इसलिए प्रीति ने कोई गिलाशिकवा नहीं किया. हां, जब गौरव हैदराबाद जा रहे थे तो इतना जरूर कहा था, ‘‘अपने जुनून में कोई कमी मत आने देना, मैं हर स्थिति में आप के साथ हूं. सफलता खुदबखुद आप के पैर चूमेगी.’’

दरअसल, शादी के समय गौरव अग्रवाल की हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकेडमी में आईपीएस की ट्रेनिंग चल रही थी, जिस की वजह से शादी के लिए उन्हें महज 8 दिनों की छुट्टी मिली थी. इन 8 दिनों में से 2 दिन उन्हें दिल्ली में इसलिए गुजारने पड़े, क्योंकि एक दिन उन का इंटरव्यू था और दूसरे दिन फिजिकल टेस्ट. जिस वक्त गौरव के गायत्रीनगर, जयपुर स्थित घर में शादी की रस्में चल रही थीं, उस समय वह दिल्ली में थे.

बहरहाल, गौरव अग्रवाल पत्नी को घर छोड़ कर हैदराबाद चले गए. अभी उन्हें गए 4 दिन ही हुए थे कि चमत्कार हो गया. 12 जून को प्रीति घर में ही थीं और बेसब्री से पति के फोन का इंतजार कर रही थीं. तभी अचानक मोबाइल की घंटी बजी तो प्रीति ने फोन उठा कर देखा. स्क्रीन पर गौरव के मुसकराते हुए फोटो के साथ उन्हीं का नंबर नजर आ रहा था. प्रीति के चेहरे पर मुसकराहट खेलने लगी. उन्होंने जल्दी से फोन रिसीव करते हुए कहा, ‘‘यस बौस, बताइए क्या समाचार है?’’

‘‘प्रीति, मैं ने टौप किया है यार. काश! इस वक्त तुम मेरे पास होतीं तो…’’ गौरव खुशी से चहक रहे थे.

प्रीति को यह तो पूरा विश्वास था कि गौरव का जुनून उन्हें उन की मंजिल तक ले जाएगा, लेकिन यह उन्होंने सोचा भी नहीं था कि रिजल्ट की लिस्ट में उन का नाम सब से ऊपर होगा. इसीलिए एकदम से यकीन नहीं हो रहा था. उन्होंने गौरव से पूछा, ‘‘फिर से बोलो?’’

‘‘लगता है, यकीन नहीं हो रहा. मैं सच कह रहा हूं, मैं ने इंडिया भर में टौप किया है. मम्मीपापा से भी बता दो, इंतजार कर रहे होंगे. और हां, अगर संभव हो तो आज की ही फ्लाइट पकड़ कर हैदराबाद आ जाओ, मुझ से यह खुशी अकेले पच नहीं रही है. मिल कर जश्न मनाएंगे.’’

यह इतनी बड़ी खुशी थी, जिसे मन में दबा कर ज्यादा देर तक नहीं रखा जा सकता था. इसलिए प्रीति ने गौरव से कहा, ‘‘ठीक है, कर लिया यकीन. अब बाद में बात करूंगी, पहले मम्मीपापा को खुशखबरी दे दूं.’’

हालांकि यकीन न करने की कोई बात नहीं थी. फिर भी प्रीति सासससुर को खुशखबरी देने से पहले रिजल्ट अपनी आंखों से देख लेना चाहती थी. इस के लिए उन्होंने अपना लैपटौप औन कर के इंटरनेट लगाया और संघ लोक सेवा आयोग की साइट खोली. साइट पर सिविल सर्विस एग्जाम-2013 का रिजल्ट घोषित कर दिया गया था. प्रीति को गौरव का रोल नंबर पता था. उन्होंने रोल नंबर डाल कर चैक किया तो रिजल्ट सामने आ गया. गौरव ने वाकई टौप किया था.

पति का रिजल्ट देख कर प्रीति का अंगअंग खिल गया. खुशी मन में नहीं समा रही थी. वह दौड़ीदौड़ी सासससुर के पास गईं और उन के पैर छू कर यह खुशखबरी उन्हें सुना दी. गौरव के पिता सुरेशचंद और मां सुमन खुश हो कर बोले, ‘‘यह तो पता था कि गौरव आईएएस में निकल जाएगा, लेकिन इतनी धूमधाम से निकलेगा यह नहीं सोचा था. यह सब तुम्हारे शुभ कदमों का फल है बहू.’’

बेटे ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की थी सो खुशी स्वाभाविक ही थी. सुरेशचंद्र गुप्ता ने उसी वक्त ड्राइवर को बुलाया और पर्स से पैसे निकाल कर देते हुए बोले, ‘‘जा कर मिठाई ले आ. …और हां, देख कर सब से अच्छी वाली लाना.’’

ड्राइवर के जाते ही उन्होंने अपनी पत्नी सुमन से कहा, ‘‘अब तुम यह खुशखबरी नातेरिश्तेदारों और मोहल्ले वालों को सुना दो.’’

अभी पतिपत्नी के बीच यह बातचीत चल ही रही थी कि टीवी पर चल रहे न्यूज चैनल पर फ्लैश लाइन लिखी आने लगी, ‘जयपुर के गौरव अग्रवाल ने सिविल सर्विस परीक्षा में देश भर में टौप किया.’ सुरेशचंद्र गुप्ता ने कई न्यूज चैनल बदल कर देखे, सभी पर यही फ्लैश लाइन आ रही थी.

इस के बाद किसी को बताने की जरूरत ही नहीं पड़ी. खुदबखुद बधाई देने वालों के फोन आने लगे.

15 अगस्त, 1984 को जन्मे गौरव अग्रवाल को यह उपलब्धि यूं ही हासिल नहीं हो गई थी. इस के पीछे गौरव की मेहनत भी थी और आईएएस बनने का जुनून भी.

गौरव के पिता सुरेशचंद्र गुप्ता मूलरूप से राजस्थान के जिला करौली के गांव भनकपुरा के रहने वाले हैं और जयपुर डेयरी में बतौर मैनेजर (इंजीनियरिंग) तैनात हैं. उन की 2 ही संताने हैं—गरिमा और गौरव. गरिमा की शादी हो चुकी है और वह अमेरिका में रहती हैं.

गौरव बचपन से ही पढ़नेलिखने में कुशाग्र थे. उन्होंने शुरुआती शिक्षा जयपुर के मालवीय नगर स्थित सेंट एंसल्स स्कूल से प्राप्त की. इस के बाद 2002 में उन का चयन आईआईटी कानपुर में हो गया. आईआईटी कानपुर से उन्होंने कंप्यूटर साइंस में टौप पोजीशन में बीटेक की डिग्री हासिल की. टौपर रहने के बावजूद गौरव पर कुछ बनने का जुनून छाया रहा. इस के बाद उन्होंने वर्ष 2008 में आईआईएम लखनऊ से पीजी डिप्लोमा किया. आईआईएम में गौरव गोल्ड मेडलिस्ट रहे.

बीटेक व मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद गौरव को हांगकांग की कंपनी सिटी ग्रुप में इनवेस्टमेंट बैंकर के रूप में सवा करोड़ रुपए के सालाना पैकेज पर नौकरी मिल गई. लेकिन हांगकांग में इतने शानदार पैकेज पर नौकरी करते हुए भी गौरव का जुनून कम नहीं हुआ.

उन्हें हर वक्त यही लगा रहता था कि कुछ खास करना है. उन की चाहत भी थी और सपना भी कि आईएएस बनें. अपने इसी जुनून की वजह से गौरव 2011 में वापस भारत लौट आए. वापस लौट कर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विस परीक्षा-2012 की तैयारी शुरू कर दी. पहले ही प्रयास में गौरव को देश की इस सर्वोच्च परीक्षा में सफलता भी हासिल हो गई. उन्हें 244वीं रैंक मिली और उन का चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए हो गया.

आईपीएस में चयन के बाद 14 दिसंबर, 2013 को गौरव की सगाई अजमेर जिले के नसीराबाद में रहने वाले डा. राजेंद्र ऐरन की बेटी प्रीति से हो गई. आईपीएस बनने और प्रीति से सगाई के बाद भी गौरव का जुनून कम नहीं हुआ. वह तो बस किसी भी तरह आईएएस बनना चाहते थे. इस के लिए उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे. गौरव की मंगेतर प्रीति जयपुर के ही एक मैडिकल कालेज में मैडिकल के पोस्ट ग्रैजुएशन कोर्स की फाइनल इयर की छात्रा थीं. प्रीति को गौरव की चाहत का पता चला तो उन्होंने उन्हें प्रोत्साहित किया.

प्रीति के भावनात्मक सहयोग और प्रोत्साहन से गौरव को काफी बल मिला. इसी के साथ गौरव ने संघ लोक सेवा आयोग की 2013 की सिविल सर्विस परीक्षा के लिए आवेदन कर दिया. गौरव और प्रीति की शादी भले ही नहीं हुई थी, लेकिन मोबाइल व इंटरनेट के जरिए वे एकदूसरे से जुड़े रहते थे.

प्रीति गौरव को बराबर प्रोत्साहित करती रहती थीं. गौरव ने दूसरी बार सिविल सर्विस की परीक्षा दी. उन के पेपर बहुत अच्छे हुए. इस बार गौरव को पूरा यकीन था कि उन्हें अच्छी रैंक मिलेगी और उन का चयन आईएएस में हो जाएगा.

गौरव और प्रीति की शादी 4 जून को होनी थी. लेकिन शादी से पहले ही गौरव का आईपीएस की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद पहुंचने का बुलावा आ गया. वह ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद चले गए. ट्रेनिंग के चलते ही शादी की तारीख पास आ गई तो गौरव को छुट्टी के लिए एप्लीकेशन देनी पड़ी. उन्हें केवल 8 दिनों की छुट्टी मिली.

8 दिनों की छुट्टी में गौरव ने 30 मई को दिल्ली जा कर सिविल सर्विस परीक्षा के अंतिम चरण का साक्षात्कार दिया. गौरव की कहानी खास इसलिए भी है, क्योंकि जब जयपुर में उन के घर पर उन की शादी के मांगलिक कार्यक्रम चल रहे थे, तब वह दिल्ली में इंटरव्यू दे रहे थे.

खैर, उन का इंटरव्यू भी बहुत अच्छा हुआ. इंटरव्यू के बाद गौरव जयपुर आ गए. 4 जून को गौरव व प्रीति की शादी हो गई. शादी के अगले ही दिन गौरव का मैडिकल होना था. इस के लिए उन्हें फिर दिल्ली जाना पड़ा. हैदराबाद की ट्रेनिंग से छुट्टी केवल 8 दिनों की मिली थी. इन्हीं 8 दिनों में गौरव की सारी दुनिया बदल गई.

शादी के बाद प्रीति अपनी ससुराल जयपुर के गायत्रीनगर आ गईं. लेकिन गौरव 3-4 दिन ही जयपुर में रुक सके. छुट्टियां खत्म होने के कारण उन्हें ट्रेनिंग पर हैदराबाद जाना पड़ा. हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान ही 12 जून को गौरव को आईएएस एग्जाम में टौपर बनने की सूचना मिली.

ज्ञातव्य हो कि यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में 4 साल बाद कोई पुरुष अभ्यर्थी टौपर बना है. इस से पहले महिला अभ्यर्थी ही टौपर रही हैं. इस परीक्षा में 1122 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं. प्रारंभिक परीक्षा में देश भर में 7 लाख 76 हजार 565 आवेदकों में से 3 लाख 23 हजार 949 ने भाग लिया था. राजस्थान को 24 साल बाद सिविल सर्विस परीक्षा में नंबर-1 बनने का गौरव हासिल हुआ है.

आईएएस में चयनित गौरव अग्रवाल का कहना है कि विदेश में पैसा बहुत था, लेकिन मैं चाहता था कि प्रशासनिक सेवा में आ कर देश और समाज के लिए कुछ करूं. मैं ने बदलाव के लिए आईएएस बनने का लक्ष्य तय किया. वह कहते हैं कि उन्हें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जरूर थी, लेकिन टौपर बनने की उम्मीद नहीं थी.

गौरव आम व्यक्ति के लिए कुछ करना चाहते थे. उन्हें लगता था कि आईआईटियन बनने और मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने के बाद भी वह समाज के लिए कुछ खास नहीं कर पाएंगे. इसलिए वह आईएएस बनना चाहते थे. पहली बार में आईपीएस बनने के बाद भी गौरव को संतुष्टि नहीं मिली तो वह आईएएस बनने के लिए फिर से प्रयास में जुट गए. और आखिर दूसरे प्रयास में उन्हें अपनी मंजिल मिल ही गई. IAS Topper Story

— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित

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