Motivational Story: पूरी तरह दृष्टिहीन होने के बावजूद बेनो जहां भारत की सब से कठिन और सर्वोच्च परीक्षा पास कर के आईएफएस बनीं, वहीं स्कोलिओसिस जैसी बीमारी से पीडि़त होने के बावजूद इरा ने इस परीक्षा में सर्वोच्च स्थान ला कर सब को चौंका दिया. अक्षमता इन दोनों की राह में बाधा नहीं बनी.

तमिलनाडु के एक साधारण परिवार में बेटी का जन्म हुआ तो पड़ोसी, दोस्त और रिश्तेदार बधाई देने आए. बेटी पैदा होने की खुशी मनाई जाती, उस के पहले ही मां ने बेटी के चेहरे को गौर से देखा. उन्हें बच्ची में कुछ गड़बड़ लगा. उन्हें जो गड़बड़ लगा था, उस ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था. बच्ची जिस तरह देख रही थी, उस से मां को लगा कि बच्ची की आंखों में रौशनी नहीं है. डाक्टरों को दिखाया गया तो उन्होंने कहा कि बच्ची पूरी तरह दृष्टिहीन है. इस का कोई इलाज भी नहीं है.

मातापिता अवाक रह गए. अब उन के वश में कुछ नहीं था. लेकिन यह कोई पहली घटना नहीं थी, जो वे इस का मातम मनाते. दुनिया में तमाम दृष्टिहीन लोग हैं और बढि़या जीवन जी रहे हैं. यही सोच कर मां ने बेटी को गले से लगाते हुए तय किया कि वह उस के जीवन को प्यार से इस तरह रौशन कर देंगी कि उसे कभी अहसास नहीं होगा कि वह देख नहीं सकती. आखिर उन्होंने किया भी वही. उस दृष्टिहीन बच्ची के पिता ल्यूक एंटोनी चार्ल्स रेलवे में नौकरी करते थे. मां पद्मजा पढ़ीलिखी थीं, लेकिन घर में रह कर घरगृहस्थी संभालती थीं. दोनों ने बड़े प्यार से बेटी का नाम बेनो जेफाइन रखा.

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