Murder for Property. 33 वर्षीय हिमांक मित्तल रोहतक में एक बड़े प्राइवेट हायर सेकेंडरी स्कूल का मालिक था. इस के अलावा उस के पेरेंट्स उस के लिए सैकड़ों करोड़ की संपत्ति छोड़ कर गए थे. जिस भाईबहन के रिश्ते को हमारे समाज में आज भी त्याग और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है तो आखिर उस भाई ने 8.5 लाख रुपए की सुपारी दे कर अपनी सगी बड़ी बहन मनीषा मित्तल की हत्या क्यों करा दी?
हिमांक और गोविंद का बचपन से ही बड़ा याराना रहा था, भले ही उन की उम्र में 3 साल का अंतर रहा हो, किंतु एक जैसी आदतें और एक जैसे विचारों के कारण उन दोनों में काफी निकटता आ गई थी. पढ़ाई भी उन्होंने एक ही कालेज से की थी.
पढ़ाई पूरी करने के बाद हिमांक ने अपना रोहतक का एम.एस. सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल पूरी तरह से संभाल लिया था तो दूसरी ओर गोविंद भी बिजनैस करने लगा था. लेकिन उन दोनों की दोस्ती पर फिर भी कोई फर्क नहीं आया था. वे हर सप्ताह या हर दूसरेतीसरे दिन जरूर मिलते थे और आपस में अपने दुखसुख बांटने के साथसाथ शराब की पार्टियां भी करते रहते थे.
तभी कोरोना महामारी का प्रकोप आ गया था. कोरोना काल के दौरान मार्च 2020 में हिमांक के पेरेंट्स की मृत्यु हो गई थी.
इस दौरान भी गोविंद हिमांक के साथ अपना कंधे से कंधा मिला कर खड़ा रहा था, जिस के कारण हिमांक के दिल में अपने जिगरी दोस्त गोविंद के प्रति और भी गहरी हो गई थी.
हिमांक का काफी बड़ा कारोबार था. उस के फादर उस के लिए करोड़ों रुपए की संपत्तियां छोड़ कर गए थे, जिसे संभालना उस के अकेले के वश में नहीं हो पा रहा था. इसलिए सब से पहले हिमांक ने गोविंद को अपने रोहतक स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मैनेजमेंट में शामिल किया और उस के बाद गोविंद को अपना बिजनैस पार्टनर भी बना लिया, जिस के कारण उन दोनों के बीच और भी अधिक निकटता आ गई थी. दोनों का एकदूसरे के घर में आनाजाना नियमित रूप से हो गया था.
यह मई 2026 आखिरी हफ्ते की बात है. गोविंद ने कई बार हिमांक को फोन किया, परंतु हिमांक उस का फोन ही नहीं उठा रहा था. उस शाम गोविंद ने अपना काम जल्दीजल्दी निपटाया और एक व्हिस्की की बोतल और तंदूरी चिकन ले कर सीधे हिमांक से मिलने उस के घर चला गया.
गोविंद ने दरवाजे पर बेल बजाई तो नौकर ने आ कर दरवाजा खोला. गोविंद सीधे हिमांक के बैडरूम में चला गया. वहां पर उस ने देखा कि हिमांक ने कमरे में जीरो वाट का बल्ब जला रखा था और आरामदायक कुरसी पर अपना सिर कुरसी पर टिकाए बड़ी गंभीर अवस्था में कुछ सोच रहा था.
”गुड इवनिंग हिमांक भाई, कहो कैसे हो?’’ गोविंद ने कमरे में घुसते हुए कहा.
”अरे गोविंद तुम? कब आए? तुम्हारा काम कैसा चल रहा है?’’ हिमांक ने उस से कई प्रश्न कर डाले थे.
”यार हिमांक भाई! आप ने इतने सारे सवाल कर डाले, पर अपने बारे में तो बताओ कि आजकल तुम किस दुनिया में खोए रहते हो. कितनी बार मैं ने आप को फोन किया, मगर तुम ने फोन तक भी उठाना जरूरी नहीं समझा. मुझ से नाराजगी है क्या?’’ गोविंद ने पूछा.
”यार गोविंद, तुम से क्यों नाराज होऊंगा मैं. मैं तो अपनी जिंदगी से ही अब नाराज हो गया हूं. हर दिन एक नया केस, एक नई पेशी. मेरी दीदी ने तो मेरा जीना ही हराम कर के रख दिया है. एक तो उस ने अपनी मरजी से शादी की, पूरे समाज में हमें नीचा दिखाया. अब शिमला वाले स्कूल में भी कब्जा जमा कर बैठ गई है. यार गोविंद, कभीकभी तो मेरा मन करता है कि मैं आत्महत्या कर लूं. मैं बहुत परेशान हो चुका हूं.’’ कहते हुए हिमांक फूटफूट कर रोने लगा था.
”हिमांक भाई! ऐसी बातें नहीं करते. मरें तुम्हारे दुश्मन. मेरे होते हुए तुम कभी ऐसी बात अपने दिमाग में लाना भी मत. जब तक मैं हूं, तुम्हें कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है. चलो, अब जल्दी से हाथमुंह धो कर फ्रेश हो जाओ, आज मैं पार्टी की पूरी व्यवस्था कर के आया हूं.’’ कहते हुए गोविंद रसोई से कांच के गिलास, ट्रे और फ्रिज से सोडा निकालने लगा.
इस बीच हिमांक बाथरूम में हाथमुंह धोने और फ्रेश होने चला गया था. जब हिमांक बाथरूम से वापस लौट कर आया, तब तक गोविंद ने मेज पर गिलास में व्हिस्की, तंदूरी चिकन, मूंगफली, नमकीन और सलाद सजा कर रख दिया था.
दोनों धीरेधीरे शराब पीने लगे. हिमांक चुपचाप गंभीर बना शराब के घूंट लगा रहा था, जबकि गोविंद चाहता था कि हिमांक कुछ बातें करे और नौरमल हो जाए. इसलिए उस ने हिमांक से पूछा, ”हिमांक भाई, जब तुम बातें करते हो तो मुझे बहुत अच्छा लगता है, इसलिए कुछ बात तो करो यार.’’
”गोविंद यार, अब तुम से क्या छिपाऊं. मैं दिनरात बस अपनी किस्मत को कोसता रहता हूं कि मेरी दीदी कब मेरी जान छोड़ेगी. पता है न हमारा कालेज, संजौली, शिमला में है. यह पूरे 10 एकड़ में है. टूरिस्ट प्लेस है, वहां की कीमत करोड़ों में है, लेकिन मेरी बड़ी बहन उस प्रौपर्टी पर सांप की तरह कुंडली मार कर बैठी हुई है.’’ हिमांक ने कहा.
”हिमांक भाई, अच्छा एक बात तो बताओ कि आज तुम्हारे शिमला वाले कालेज और जमीन की कीमत कितनी होगी?’’ गोविंद ने पूछा.
”यार, आज के हिसाब से उस की कीमत कम से कम 500 करोड़ तो है ही, उस से भी ज्यादा हो सकती है. इसलिए तो कईकई रात मैं चैन से सो भी नहीं पाता हूं. वैसे तुम यह सब क्यों पूछ रहे हो गोविंद?’’ हिमांक ने पूछा.
”हिमांक भाई! यदि तुम्हारी दीदी ही रास्ते से हट जाए तो ये सब प्रौपर्टी आप की तो हो जाएगी न?’’ गोविंद ने कहा.
”यार गोविंद, वह रास्ते से भला कैसे हट जाएगी. अरे भाई! उसी ने तो मेरा खून पी रखा है. क्या तुम्हारे पास कोई आइडिया या प्लान है उसे रास्ते से हटाने का?’’ हिमांक ने पूछा.
”मेरे पास एक बहुत बड़ा फुलप्रूफ प्लान है, जिस से तुम्हारे रास्ते का कांटा हमेशाहमेशा के लिए दूर हो जाएगा.’’ गोविंद ने धीरे से कहा.
”यार गोविंद, अपना प्लान अब मुझे जल्दी से बता भी दो. अब इस खुशी की खबर को सुन कर मुझ से तो बिलकुल भी सब्र नहीं हो पा रहा है.’’ हिमांक ने उत्सुकता से कहा.
”हिमांक भाई, इस काम के लिए आप को जेब ढीली करनी पड़ेगी और इस के साथ ही अपने शरीर पर कुछ कष्ट भी सहने पड़ सकते हैं.’’ गोविंद ने कहा.
”यानी कि तुम्हारा मतलब है कि मुझे अपनी बहन को रास्ते से हटाने के लिए सुपारी देनी होगी. यही मतलब है न तुम्हारा?’’ हिमांक ने कहा.
”वैसे हिमांक भाई, आप समझदार काफी हैं. बहुत जल्दी समझ गए आप. आप एकदम सही कह रहे हैं.’’ गोविंद ने शराब का घूंट लगाते हुए कहा.
”यार गोविंद, कभीकभी तुम बेसिरपैर की बातें करने लगते हो. तुम्हें यह बात अच्छी तरह से पता भी है कि मेरी बहन ने मेरे खिलाफ कई शिकायतें भी दर्ज करा रखी हैं कि मुझ से उसे जान का खतरा है. जैसे ही इस का राज सामने आएगा, मेरे गले में फांसी का फंदा पड़ जाएगा. यार गोविंद आखिर तुम कैसे दोस्त हो? दोस्त को ही सूली पर चढ़ा रहे हो?’’ हिमांक ने गुस्से में कहा.
”हिमांक भाई, मैं आप का एक ऐसा सच्चा दोस्त हूं जो आप को कभी भी छोड़ नहीं सकता. मैं ने अभीअभी आप को कहा था न कि आप को इस कांड के लिए अपने खुद के शरीर पर भी चोट सहन करनी पड़ेगी. यही तो मेरा तुरुप का इक्का है.’’ गोविंद ने कहा.
”यार गोविंद, यह चोट गहरा चोट अपने शरीर में खाने में इस का सुपारी से क्या लेनादेना है?’’ हिमांक ने गिलास के शराब को पीते हुए कहा.
”हिमांक भाई, आप के ऊपर एक घातक हमला होगा और आप हौस्पिटल में एडमिट हो जाएंगे. पत्रकार और पुलिस आप से पूछेगी कि आप पर यह घातक हमला किस ने कराया है तो आप यह कह देना कि हो सकता है यह हमला मेरी बहन या मेरे जीजा ने कराया है. उसी बीच भाई के हत्यारे तुम्हारी बड़ी बहन को गोलियों से मार डालेंगे.
”बस पुलिस इसी बात को सुलझाने में लगी रहेगी कि इन दोनों भाईबहनों को मार कर कोई और भी इस संपत्ति के पीछे पड़ा है. जैसे ही तुम्हारी बहन इस दुनिया से रुखसत हो जाएगी, तुम औटोमैटिक 500 करोड़ रुपए की संपति के अकेले वारिस हो जाओगे. ‘‘ गोविंद ने अपना गिलास हिमांक के गिलास से टकराते हुए कहा.
”यार, दोस्त हो तो तुम जैसा. आज मुझे सचमुच गर्व हो रहा है कि तुम ही मेरे सच्चे दोस्त हो.’’ हिमांक ने ठहाका लगाते हुए कहा.
”हिमांक भाई, दोस्ती की बात तो ठीक है मगर मैं आप का बिजनैस पार्टनर भी हूं. अब आप बताइए, इस डील में मुझे क्या मिलेगा?’’ गोविंद ने अपनी मंशा साफसाफ जाहिर कर दी थी.
”यार गोविंद, तुम्हें मैं हमेशा हर डील के लिए 10 प्रतिशत देता रहा हूं. यहां भी तुम्हारा 10 परसेंट पक्का है यार!’’ हिमांक ने कहा.
”देखो हिमांक भाई, यह बिजनैस डीलिंग काफी रिस्की है. इसलिए इस डील में मुझे 30 प्रतिशत प्रौपर्टी में हिस्सा चाहिए. शूटरों का इंतजाम, आप के ऊपर हमला और उस के बाद आप के ऊपर कोई भी आंच न आने देना, यह बड़ा जोखिम का काम है. इसलिए मुझे इस डील में अपना पूरा 30 परसेंट हिस्सा चाहिए!’’ गोविंद ने साफसाफ कह दिया था.
”देखो भाई गोविंद, यह कम रकम नहीं है. मान भी जाओ यार, 20 फीसदी दे दूंगा. मान भी जाओ न मेरे भाई.’’ हिमांक ने बिजनैस डील करते हुए कहा.
”हिमांक भाई, आप ने सुपारी दी आप तो बच जाओगे, मगर मैं शूटरों का इंतजाम करूंगा. मेरा रिस्क आप से कहीं अधिक ज्यादा है. आप के साथ मेरा बचपन से दोस्ती का रिश्ता रहा है, इसीलिए मैं ने आप से केवल 30 प्रतिशत ही मांगा है. किसी दूसरे के साथ मैं ऐसा सौदा सपने में सोच भी नहीं सकता.’’ गोविंद ने कहा.
”ठीक है गोविंद भाई! 500 करोड़ का 30 प्रतिशत 150 करोड़ होता है. जाओ तुम्हारे लिए यह डील मंजूर है.’’ कहते हुए हिमांक ने गोविंद से डील पक्की कर ली थी.
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में शनिवार 13 जून, 2026 की देर शाम एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई. जहां संजौली स्थित हाउसिंग बोर्ड कालोनी में सरस्वती पैराडाइज इंटरनैशनल पब्लिक स्कूल के गेट पर स्कूल की एडमिनिस्ट्रेटर मनीषा मित्तल की गोली मार कर निर्मम हत्या कर दी गई.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मनीषा मित्तल जैसे ही अपने स्कूल के मुख्य द्वार से बाहर निकलीं, तभी अचानक 2 नकाबपोश व्यक्ति संकरे पहाड़ी रास्ते पर दिखाई दिए, जो मुख्य सड़क को स्कूल के प्रवेश द्वार से जोड़ता है. दोनों नकाबपोशों में से एक ने मनीषा को पीछे से गोली मारी और कुछ ही क्षणों के बाद दूसरे नकाबपोश ने मनीषा को सामने आ कर गोली मार दी, जिस से वह तुरंत ही जमीन पर गिर पड़ी.
उस दिन स्कूल में छुट्टी होने के कारण स्कूल में कोई नहीं था. स्कूल के गेट पर अकेला खड़ा सुरक्षा गार्ड यशपाल हमलावरों को गोली चलाते देख चुका था, परंतु उस के पास कोई हथियार न होने के कारण वह कुछ न कर सका.
यशपाल ने बताया कि यह सब इतना जल्द हुआ कि मैं यह सब देख कर स्तब्ध खड़ा रह गया था. उन दोनों नकाबपोशों ने अपने चेहरे पर मास्क लगा रखे थे. वे दोनों अचानक कहीं से आए और जब तक मैं कुछ प्रतिक्रिया कर पाता, वे दोनों मनीषा मैडम को गोली मार कर भाग चुके थे.
इस जघन्य हत्याकांड के बाद सूचना मिलते ही शिमला पुलिस के एसपी गौरव सिंह, एडिशनल एसपी अभिषेक धीमान, एसडीपीओ मेहर पंवार, संजौली थाने के एसएचओ जसवंत सिंह, फोरैंसिक विशेषज्ञ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए.
पुलिस व फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया. हमलावरों ने मनीषा मित्तल पर 3 गोलियां चलाई थीं, जिन में से एक गोली उन के सिर पर मारी गई थी. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, परंतु उन्होंने दम तोड़ दिया था. पुलिस ने मनीषा के शव का पंचनामा बना कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और इस निर्मम हत्याकांड का खुलासा करने के लिए एसपी गौरव सिंह के निर्देश पर तुरंत एक जिला पुलिस टीम का गठन कर दिया.
घटना के बाद संजौली पुलिस थाना पुलिस ने मृतका के पति डा. सुभाष यादव और मौके पर मौजूद एकमात्र चश्मदीद गवाह स्कूल के सुरक्षाकर्मी यशपाल के बयानों को आधार बना कर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ संजौली थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत धारा 103(1) (हत्या) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.
इस के साथ ही वारदात में अवैध हथियारों का इस्तेमाल होने के कारण आम्र्स एक्ट की विभिन्न धाराओं को भी केस में जोड़ दिया गया. इस के अतिरिक्त पुलिस टीम ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगालने शुरू कर दिए.
मनीषा मित्तल मर्डर केस में संजौली वार्ड (वार्ड नंबर 24) के स्थानीय पार्षद कुलदीप ठाकुर ने घटनास्थल पर पहुंच कर मुख्यरूप से यह मुद्ïदा उठाया कि मृतका मनीषा मित्तल अपनी 17 वर्षीय बेटी के साथ स्कूल परिसर पर अकेली रहती थी. मम्मी की मौत के बाद अब यह बच्ची अकेली पड़ गई है, इसलिए शिमला पुलिस सर्वप्रथम इस बच्ची को समुचित सुरक्षा प्रदान करना चाहती थी.
पुलिस पूछताछ में मनीषा मित्तल के पति डा. सुभाष यादव ने पुलिस को बताया कि मनीषा का अपने छोटे भाई रोहतक निवासी हिमांक मित्तल के साथ वर्ष 2021 से प्रौपर्टी को ले कर विवाद चल रहा था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रौपर्टी विवाद के चलते ही उन के भाई ने इस वारदात को अंजाम दिया है.
इस बीच मनीषा मित्तल के कुछ पुराने वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे थे, जिस में उन्होंने अपने भाई हिमांक मित्तल और हिमांक के पार्टनर गोविंद से अपनी जान का खतरा होने का दावा किया था. वीडियो में मनीषा साफसाफ यह कहते हुए दिखाई दे रही थी कि पुलिस को मैं ने फोन किया तो पुलिस कहती है कि जब लड़ाई होगी, तब हम आएंगे.
वह आगे कहती है कि ये पुलिस वाले लोग क्या मेरी मदद तब करेंगे, जब वे लोग मुझे मार डालेंगे? मैं यहां शिमला के स्कूल में अपनी बेटी के साथ भय के माहौल में दिन गुजार रही हूं. मैं ने यहां तक कि एसएसपी सर को भी फोन किया था, परंतु फिर भी मेरी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई.
इस के अलावा मृतका मनीषा मित्तल ने पारिवारिक संपत्ति विवाद को ले कर 4 अप्रैल, 2026 को शिमला में एक प्रैस कौन्फ्रेंस भी की थी. प्रैस कौन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अपने ही परिवार के सदस्य पर स्कूल के मालिकाना हक हड़पने और संपत्ति विवाद को ले कर गंभीर आरोप लगाए थे.
मनीषा का आरोप था कि संजौली स्थित यह स्कूल उन के पिता ने शुरू किया था. पिता की मृत्यु के बाद, उन के परिवार के करीबी सदस्य और भाई उन्हें स्कूल की संपत्ति और मालिकाना हक में उन का जायज हिस्सा देने से रोक रहे हैं. उन्होंने इस विवाद के कारण अपनी जान को खतरा बताया था.
स्थानीय नागरिकों और पड़ोसियों का भी यह कहना था कि मनीषा मित्तल कई बार अपनी सुरक्षा की मांग ले कर एसपी कार्यालय में भी गई थीं. स्थानीय निवासी कह रहे थे कि इस तरह दिनदहाड़े एक महिला की हत्या होना काफी गंभीर मामला है, जो स्थानीय पुलिस की असंवेदनशीलता को उजागर करता है. उन सभी ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और हत्या के आरोपियों को जल्द से जल्द पकडऩे की मांग की.
इस के बाद तुरंत शिमला पुलिस की टीम रोहतक हिमांक के घर पर पहुंच गई तो उस ने शिमला पुलिस से खुद को पीडि़त बताते हुए यह दावा भी किया कि उस के ऊपर भी हमला हुआ है और इस हमले में उस के हाथपैर तक टूट गए हैं. उस ने पुलिस से कहा कि उस का मनीषा मर्डर से कुछ लेनादेना नहीं है. उस की तो अपनी बहन से पिछले कई सालों से कोई बातचीत तक नहीं हुई थी.
उस ने कहा कि 13 जून की रात 11 बजे रोहतक में उस के एक पूर्व स्टाफ सदस्य ने फोन कर के उसे इस घटना की जानकारी दी थी. उस ने बताया कि उस की बहन कुछ वर्षों से कुछ गलत लोगों के संपर्क में आ गई थी और हो सकता है कि उन्हीं लोगों द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया हो.
इस के साथ ही हिमांक मित्तल ने सोशल मीडिया पर खुद पर से शक हटाने के लिए एक वीडियो भी जारी किया. उस ने वीडियो में अपनी मृतका बहन पर ही गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मनीषा ने मेरी जिंदगी नर्क बनाई हुई थी. प्रौपर्टी क्लेम के लिए मनीषा ने हिमांक के ऊपर कई केस दर्ज करवा रखे थे. उस ने समाज के सामने खुद को निर्दोष दिखाने के लिए बारबार दोहराया कि पिछले 16 सालों से मनीषा के साथ उस की कोई बातचीत या संपर्क नहीं था.
अपने वीडियो में हिमांक ने यह भी दावा किया कि मनीषा शिमला वाले स्कूल की संचालिका नहीं थी. वह स्कूल एक सोसाइटी के अधीन है, जिस का प्रधान खुद हिमांक है.
15 जून, 2026 को पोस्टमार्टम के बाद मनीषा का शव उन के परिजनों को सौंप दिया गया. संजौली, शिमला के श्मशान घाट में उन का अंतिम संस्कार उन के पति डा. सुभाष यादव और उन की 17 वर्षीय बेटी के द्वारा किया गया. इस अवसर पर वहां उपस्थित सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गई थीं.
मनीषा मित्तल की हत्या के बाद रविवार 14 जून, 2026 को उन के पति डा. सुभाष यादव शिमला पहुंचे थे और बेटी की मौजूदगी में मनीषा के शव का आईजीएमसी में पोस्टमार्टम करवाया गया था. इस दौरान जब पुलिस ने नाबालिग बेटी को पिता के साथ जाने को कहा तो उस ने इंकार कर दिया. इस को देखते हुए नियमों के तहत पुलिस ने बेटी को प्रशासन के सुपुर्द कर दिया, जहां पर उस की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है.
मनीषा मित्तल केस अब काफी संवेदनशील होता जा रहा था. जनता पुलिस पर सवाल पर सवाल खड़े करती जा रही थी. इसलिए इस लोमहर्षक मर्डर को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला पुलिस द्वारा विभिन्न दिशाओं में एक साथ जांच को आगे बढ़ाने के लिए कई विशेष टीमों का गठन कर दिया गया था.
जांच के दौरान पुलिस की टीमों द्वारा प्रत्यक्षदर्शियों एवं अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए. इस के साथ ही इलेक्ट्रौनिक डाटा, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया.
उपरोक्त जांच और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस जांच में यह पुष्टि हुई कि दोनों शूटरों ने हत्या से एक महीना पहले स्कूल के रास्तों, मनीषा के स्कूल से आनेजाने के समय और अन्य गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया था.
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि दोनों हत्यारे हरियाणा से थे, जो एक सफेद रंग की स्विफ्ट कार में शिमला आए थे. अपनी पहचान छिपाने और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए दोनों आरोपियों द्वारा अपने हरियाणा नंबर के वाहन पर हिमाचल प्रदेश का फरजी पंजीकरण नंबर (एचपी 10 सीरीज) लगाया गया था. पुलिस टीम ने गाड़ी के वास्तविक नंबर और मालिक की पहचान की.
इस के बाद एक टीम ने एक विशेष अभियान के तहत रोहतक (हरियाणा) से दोनों हत्यारों आशीष अहलावत (पुत्र सुरेंद्र सिंह, निवासी ग्राम दुजाना, जिला झज्जर, हरियाणा आयु 22 वर्ष) और दूसरे हत्यारा दीपक (25 वर्ष, पुत्र सुरेंद्र सिंह, निवासी सुनारिया खुर्द, तहसील और जिला रोहतक, हरियाणा) को वारदात के 35 घंटे के बाद गिरफ्तार कर लिया.
शिमला पुलिस ने दोनों शूटरों आशीष अहलावत और दीपक को कुल 10 दिनों तक पुलिस रिमांड में रखा. शिमला पुलिस ने इन 10 दिनों की रिमांड को 2 चरणों में हासिल किया था.
हरियाणा के रोहतक से गिरफ्तारी के बाद 16 जून, 2026 को दोनों हत्यारों को शिमला की चक्कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पहले उन दोनों को 7 दिनों की पुलिस रिमांड में भेजा गया. यह रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद 22 जून, 2026 को पुलिस ने दोनों को दोबारा कोर्ट में पेश किया, जिस के बाद अदालत ने उन की पुलिस रिमांड को 3 दिन के लिए और बढ़ा दिया गया.
दोनों शूटरों ने सुपारी (कौन्ट्रैक्ट किलिंग) की बात कबूली और यह स्वीकार किया कि मनीषा मित्तल की सुपारी उन्होंने 8.5 लाख रुपए में ली थी. शूटरों ने बताया कि इस काम के लिए उन्हें अब तक 70 हजार रुपए मिल चुके थे, जिस में से 50 हजार रुपए उन्हें नकद मिले थे और 20 हजार रुपए उन के खाते में ट्रांसफर किए गए थे.
उन्होंने यह भी साफसाफ कहा कि वे दोनों सीधे तौर पर मृतका मनीषा मित्तल के भाई हिमांक मित्तल को जानते तक नहीं थे. उन्हें तो हिमांक के बिजनैस पार्टनर गोविंद ने ही इस काम के लिए हायर किया था.
पूछताछ के दौरान उन दोनों ने यह भी खुलासा किया कि वारदात के लिए इस्तेमाल की गई स्विफ्ट कार गोविंद ने ही किराए पर ले कर उन्हें उपलब्ध कराई थी. पुलिस नाकों से बचने के लिए उन्होंने रोहतक में ही शिमला जाते वक्त हरियाणा के नंबर की जगह फरजी नंबर प्लेट (एचपी 10) कार पर लगा दिया था.
उन्होंने आगे यह भी बताया कि आपस में गोविंद से बातें करते समय वे वर्चुअल (इंटरनेट) कौल का इस्तेमाल कर रहे थे. गोविंद उन्हें मनीषा की हर गतिविधि पर नजर रखने और उस की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए डिजिटल एक्सेस भी दिया हुआ था. उन्होंने बताया कि 13 जून, 2026 को हत्या वाले दिन वे अपने मोबाइल फोन पर मनीषा की लाइव लोकेशन ट्रेस कर रहे थे.
जैसे ही मनीषा संजौली स्थित सरस्वती पैराडाइज स्कूल के गेट से बाहर निकलीं, दोनों ने आगे बढ़ कर काफी नजदीक से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थी.
उन्होंने यह बात भी कुबूली कि हत्या करने के तुरंत बाद वे दोनों मुख्य हाइवे या टोल प्लाजा के बजाय हिमाचल के अंदरूनी और लिंक रोड का उपयोग कर भाग गए, ताकि वे पुलिस के बैरियरों में न फंस सकें.
शूटरों के इस कुबूलनामे और उन के बैंक ट्रांजैक्शन की कडिय़ों को जोड़ते हुए शिमला पुलिस ने बाद में मुख्य मास्टरमाइंड और मृतका मनीषा मित्तल के सगे छोटे भाई हिमांक मित्तल और उस के सहयोगी व बिजनैस पार्टनर गोविंद को रोहतक, हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया.
10.3 एकड़ में फैले शिमला के संजौली में स्थित सरस्वती पैराडाइज स्कूल की स्थापना वर्ष 2005 में हिमांक और मनीषा मित्तल के पिता व मनीषा मित्तल के पिता व मनीषा मित्तल ने की थी, जबकि रोहतक में एम.एस. सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना मनीषा और हिमांक के पिता धर्मपाल मित्तल ने वर्ष 1979 में की थी.
धर्मपाल मित्तल और उन की बेटी मनीषा मित्तल ने शिमला के संजौली स्थित सरस्वती पैराडाइज स्कूल को चलाने के लिए एक सोसाइटी का गठन भी किया था, जिस का नाम पैरामाउंट पब्लिक स्कूल इंटरनैशनल सोसाइटी रखा गया था और इस की वाइस प्रेसिडेंट वर्ष 2007 से मनीषा मित्तल ही रही थीं.
हिमांक और मनीषा के रिश्ते में पहली बार कड़वाहट तब आई थी, जब वर्ष 2007 में मनीषा ने लव मैरिज की थी. असल में रोहतक में एक बार किसी दोस्त के माध्यम से मनीषा की मुलाकात डा. सुभाष यादव से हुई, जो वर्ष 2007 में रोहतक के सुप्रसिद्ध पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेस से जनरल मैडिसिन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे. दोनों में मुलाकातें बढऩे लगीं और आपस में प्रेम बढऩे लगा तो दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. इस के बाद मनीषा ने डा. सुभाष यादव से प्रेम विवाह कर लिया.
मनीषा ने डा. सुभाष के साथ लव मैरिज तो कर ली, लेकिन मनीषा के परिवार ने इसे स्वीकार नहीं किया. मनीषा के पेरेंट्स और छोटा भाई हिमांक इस विवाह से खुश नहीं थे. वहीं हिमांक का यह मानना था कि डा. सुभाष यादव ने मनीषा से विवाह केवल प्रौपर्टी पाने के लिए किया है.
कई वर्षों तक मनीषा के परिवार ने मनीषा को घर पर तक नहीं बुलाया, लेकिन मनीषा अपने मातापिता को बराबर फोन करती रहती थी. बाद में जब मनीषा को बेटी हुई तो मनीषा के पेरेंट्स का दिल पिघल गया, वे अपनी पोती को देखने के लिए लालायित हो गए.
इस प्रकार एक बार फिर से मनीषा अपने पेरेंट्स से मिलने उन के पास जाने लगी थी, लेकिन हिमांक को मनीषा का घर आना बिलकुल भी पसंद नहीं था, वह मनीषा से कभी बात तक नहीं करता था.
कोरोना काल में मनीषा के पेरेंट्स काफी बीमार हो गए थे. मनीषा ने उन की दिल से सेवा भी की थी, लेकिन कोरोना काल में उन दोनों की मृत्यु हो गई थी. अपने पेरेंट्स की मौत के बाद हिमांक ने रोहतक और संजौली, शिमला दोनों ही स्कूलों का संचालन अपने हाथ में ले लिया था.
हिमांक का यह कृत्य मनीषा को बिलकुल भी स्वीकार नहीं था. इसलिए उस ने अपने छोटे भाई हिमांक से मातापिता की प्रौपर्टी में हिस्सा मांग लिया. इस के बाद भाईबहन के आपसी रिश्ते बिगडऩे शुरू हो गए, क्योंकि हिमांक ने कुछ भी हिस्सा देने से साफसाफ इंकार कर दिया था.
मनीषा ने इस के बाद सीधे कोर्ट का रुख किया, क्योंकि वह भी उसी घर की बेटी थी और उस का भी अपने मातापिता की संपत्ति पर उतना ही अधिकार बनता था, जितना कि उस के भाई हिमांक का था.
मनीषा मित्तल ने जहां फादर के मरने पर खाली हुई जगह को भरने के लिए नई गवर्निंग बौडी व नए सदस्यों के लिए अप्लाई किया तो मनीषा का आवेदन ही खारिज कर दिया गया. उस के बाद मनीषा मित्तल ने अपने छोटे भाई हिमांक मित्तल पर कई गंभीर आरोप लगाए थे.
मनीषा ने हिमांक पर मातापिता के फरजी साइन कर के करोड़ों रुपए गबन करने का आरोप लगाया था. मनीषा ने कहा था कि 2007 में उन के फादर धर्मपाल मित्तल ने उसे 15 अगस्त, 2007 को सरस्वती पैराडाइज स्कूल संजौली, शिमला का वाइस प्रेसिडेंट बनाया था, जबकि हिमांक मित्तल कहता है कि वह इस स्कूल का प्रेसिडेंट है.
उस के बाद मनीषा ने अपना वीडियो प्रैस के सामने जारी करते हुए कहा था कि संजौली स्थित सरस्वती पैराडाइज स्कूल में गलत तरीके से चुनाव कराए गए थे. तहसीलदार ने उस समय केवल 3 लोगों को ले कर जारी करते हुए कहा था कि अपने लोगों को ले कर आ जाओ, हम चुनाव करवा देंगे. जबकि वर्ष 2005 से ले कर 2023 तक जो भी सदस्य रहे थे, उन सभी को तहसीलदार द्वारा लेटर दिया जाना चाहिए था. जब मैं ने खुल कर इस गलत प्रक्रिया का विरोध किया तो मेरी एक भी नहीं सुनी गई और धोखाधड़ी से चुनाव करवा दिए गए.
मनीषा ने यह आरोप भी लगाया था कि हिमांक मित्तल, गोविंद व एक महिला कर्मचारी ने झूठी रिपोर्ट दर्ज कर के उस के खिलाफ केस दर्ज करवाया था. जब पुलिस ने पूरी जांचपड़ताल की तो जांच के बाद हिमांक मित्तल व उस के साथियों के खिलाफ कलंदरा दिया गया.
असल में कलंदरा समाज में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा उठाया गया ऐहतियाती कदम होता है, जिस में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती बल्कि आरोपी की पूरी जानकारी और विवाद की रिपोर्ट (कलंदरा) अपने रिकौर्ड में दर्ज कर लेती है.
मनीषा मित्तल ने यह आरोप भी लगाया था कि सरस्वती पैराडाइज स्कूल के प्रिंसिपल नीरज वर्मा के साथ मिल कर हिमांक मित्तल ने गुंडागर्दी व अशांति का माहौल बना रखा था. मनीषा मित्तल ने आगे बताया था कि जब वह चुनाव की धांधली के आरोप को ले कर कोर्ट गई तो दिनांक 14 दिसंबर, 2025 को कोर्ट से यह निर्णय आया कि चुनाव में काफी गड़बडिय़ां की गई हैं, चुनाव गलत प्रक्रिया से कराए गए हैं.
कोर्ट का फैसला ले कर फिर मनीषा शिमला के एसपी के पास गई, जिस के बाद एसएचओ की मौजूदगी में 26 जनवरी, 2026 को मनीषा की अपने स्कूल में एंट्री हो पाई थी.
इधर मनीषा का अपने छोटे भाई हिमांक मित्तल के साथ कोर्ट में केस चल रहे थे तो उधर दूसरी ओर मनीषा और उस के पति डा. सुभाष यादव के आपसी संबंध वर्ष 2024 से खराब होने लगे थे. इस दौरान मनीषा ने कई बार अपने पति डा. सुभाष यादव पर मारपीट व प्रताडऩा का आरोप लगाते हुए शिकायतें कीं.
अभी वर्तमान में डा. सुभाष यादव के खिलाफ मनीषा व उन की बेटी का रोहतक, हरियाणा कोर्ट में मेंटेनेंस (भरण पोषण) का केस चल रहा था. इन दोनों की एक 17 वर्षीय नाबालिग बेटी भी है, जो अपनी मम्मी मनीषा मित्तल के साथ रह रही थी जो फिलहाल प्रशासन की सुरक्षा में है.
लव मैरिज की रंजिश और 500 करोड़ की प्रौपर्टी हथियाने के लिए हिमांक ने गोविंद के साथ मिल कर रची साजिश, शिमला के संजौली में सरस्वती पैराडाइज स्कूल की संचालिका की सरेआम हुई हत्या का असली मास्टरमाइंड उस का सगा भाई हिमांक मित्तल ही था. हिमांक मित्तल ने लव मैरिज की रंजिश, संपत्ति हथियाने और बहन द्वारा बिजनैस विवाद के चलते अपने दोस्त और बिजनैस पार्टनर गोविंद के साथ मिल कर बेहद शातिर तरीके से अपनी सगी बड़ी बहन के मर्डर का प्लान बनाया था.
रोहतक और शिमला में सरस्वती स्कूल के नाम से काफी बेशुमार प्रौपर्टी है, जिस के मालिक हिमांक और मनीषा केवल 2 लोग थे. हिमांक ने सारी प्रौपर्टी अकेले हड़पने के लिए ही मनीषा की मौत का षडयंत्र रचा था. मर्डर प्लान के मुताबिक हिमांक मित्तल ने शूटरों को सुपारी देने के लिए घटना के कुछ दिन पहले ही गोविंद के बैंक खाते में 8 लाख 50 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे.
गोविंद ने फिर इस रकम का इस्तेमाल कर हरियाणा से 2 पेशेवर कौन्ट्रैक्ट किलर्स आशीष अहलावत और दीपक को काम पर रखा. गोविंद ने दोनों शूटरों को एडवांस पैसे 70 हजार रुपए जिस में 50 हजार रुपए नकद व 20 हजार रुपए यूपीआई के एकाउंट में ट्रांसफर किए. इस के अलावा गोविंद ने दोनों शूटरों को पिस्तौल और वारदात के लिए एक स्विफ्ट कार का बंदोबस्त भी किया.
13 जून, 2026 को जब मनीषा की हत्या हुई तो शिमला पुलिस ने तुरंत 2 नकाबपोश हत्यारों की पहचान करने के लिए जांच शुरू कर दी थी. इस जघन्य हत्या की पूरी घटना स्कूल के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी.
पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि दोनों हत्यारों ने अपनी सफेद रंग की स्विफ्ट कार को मुख्य सड़क पर, ढलान से 50 मीटर नीचे पार्क किया था और फिर वे दोनों पैदल ही चल कर स्कूल के गेट तक पहुंचे थे. आसपास के अन्य सीसीटीवी कैमरों में कार की फुटेज कैद हो गई थी, हालांकि कार के आगेपीछे फरजी नंबर प्लेट लगी हुई थी.
मनीषा मित्तल के स्कूल के गेट से बाहर निकलते ही दोनों हत्यारे ठीक उसी समय स्कूल के प्रवेश द्वार के बाहर कैसे आ गए, यह एक बड़ा गंभीर प्रश्न था?
लेकिन पुलिस जांचकर्ताओं को पता था कि इसी सवाल का जवाब इस रहस्य को सुलझाने में अवश्य मददगार साबित होगा, इसलिए अब पुलिस ने हमलावरों के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के मकसद से स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकौर्डर (डीवीआर) को तुरंत जब्त कर उस की विस्तृत जांच करनी शुरू कर दी.
पुलिस टीम को आश्चर्य तब हुआ, जब उन्हें एक अप्रत्याशित सुराग मिला. पुलिस टीम ने देखा कि कैमरे पीयरटूपीयर (पी2पी) नेटवर्किंग से लैस थे, जिस से लाइव फुटेज को दूर से देखा जा सकता था. और उस लाइव फीड तक पहुंच रखने वाला व्यक्ति मनीषा का छोटा भाई हिमांक मित्तल था.
हिमांक मित्तल शिमला के सरस्वती पैराडाइज इंटरनैशनल स्कूल का चेयरमैन था, इसीलिए उस के पास स्कूल के सीसीटीवी कैमरों का पीयरटूपीयर (पी2पी) लाइव एक्सेस था. रोहतक में बैठ कर हिमांक अपनी बड़ी बहन मनीषा की पलपल की मूवमेंट को लाइव देख रहा था.
उस ने इस सीसीटीवी का एक्सेस गोविंद को दिया, जिस ने आगे दोनों शूटरों को मनीषा की लाइव लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी उपलब्ध कराई, ताकि वे दोनों सही समय पर हमला कर सकें.
खुद पर शक न जा सके, इस के लिए भी हिमांक मित्तल ने एक गहरी चाल चली थी. पहली जून, 2026 को उस ने रोहतक के पास अज्ञात युवकों से खुद पर हमला करवाया, जिस में उस के दोनों पैर और एक हाथ फ्रैक्चर हो गया था.
कानून और पुलिस की नजरों में खुद को बेकसूर साबित करने के लिए उस ने ‘एलिबाई’ (घटना के वक्त किसी और जगह होने का पक्का सबूत) बनाने की सोची.
हिमांक मित्तल हत्या की पूरी स्क्रिप्ट पहले ही तैयार कर चुका था. वह यह अच्छी तरह से जानता था कि मनीषा की हत्या के बाद पहला शक उसी के ऊपर जाएगा, क्योंकि मनीषा ने पहले ही वीडियो जारी कर और प्रैस कौन्फ्रेंस कर अपने छोटे भाई हिमांक से अपनी जान को खतरा बताया था.
पहली जून, 2026 को इस कथित हमले के बाद हिमांक मित्तल ने किसी और को नहीं, बल्कि अपने सब से करीबी दोस्त और बिजनैस पार्टनर गोविंद को फोन कर के मौके पर बुलाया था.
जब पुलिस ने अस्पताल में हिमांक के बयान दर्ज किए, तब भी गोविंद वहां मौजूद था. पूरी तरह बैड पर रहने के दौरान अस्पताल में केवल गोविंद को ही हिमांक से मिलने की इजाजत थी, ताकि दोनों मिल कर मनीषा मित्तल मर्डर प्लान को आगे कोऔर्डिनेट कर सकें.
इस के अलावा हिमांक मित्तल और गोविंद ने हिमांक के ऊपर हुए हमले के दौरान लगी चोटें इतनी गंभीर दिखाईं, ताकि पुलिस को रत्तीभर भी शक न हो कि कोई व्यक्ति अपनी बहन की हत्या के लिए खुद के हाथपैर तक तुड़वा सकता है.
13 जून, 2026 को जब शिमला में मनीषा की हत्या हुई, तब हिमांक रोहतक के अस्पताल में पूरी तरह से बेड रेस्ट पर था. उस ने शिमला पुलिस के सामने यह दावा भी किया था कि जो खुद चलनेफिरने में लाचार है और खुद अस्पताल में भरती है, वह इतनी दूर शिमला में भला मर्डर कैसे करा सकता है.
जब शिमला पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस और 8 लाख 50 हजार रुपए के बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर गोविंद को रोहतक से गिरफ्तार किया तो पुलिस रिमांड के दौरान गोविंद टूट गया. गोविंद ने कुबूल किया कि मनीषा के मर्डर की साजिश को छिपाने के लिए ही पहली जून, 2026 को हिमांक पर कथित हमला कराने की यह प्लानिंग पहले ही रची गई थी.
इस सच के सामने आने के बाद, शिमला पुलिस ने 24 जून, 2026 को हिमांक मित्तल को रोहतक अस्पताल के बैड से ही गिरफ्तार कर लिया. हिमांक शारीरिक रूप से कोर्ट आने के लिए फिट नहीं था, इसलिए शिमला पुलिस ने वीडियो कौन्फ्रेंसिंग के जरिए उस की रिमांड ली और उस के बयान ले कर उसे सीधे जेल भेज दिया.
कहते हैं कि कानून की नजरों से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता, चाहे साजिश कितनी भी डिजिटल, हाईटेक या शातिर ही क्यों न हो, पुलिस तफ्तीश के सामने वह टिक नहीं पाती. हिमांक मित्तल ने इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए खुद को अस्पताल के बैड तक पहुंचा दिया, शार्पशूटरों की सुपारी खुद से न दिला कर अपने दोस्त से दिलाई और लाइव सीसीटीवी फीड का इस्तेमाल किया.
हिमांक मित्तल को लगा था कि वह एक ‘परफेक्ट मर्डर’ की स्क्रिप्ट लिख चुका है, लेकिन इस के बावजूद भी उस ने कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर डालीं, जिस के कारण आज वह सलाखों के पीछे है.
मनीषा मित्तल मर्डर केस रिश्तों के टूटने, रिश्तों के अंत, लालच और प्रशासनिक ढिलाई का एक ऐसा दर्दनाक और भयावह उदाहरण है, जो हमें और हमारे समाज को कई गंभीर सबक सिखाता है.
वर्तमान समय में भौतिकतावाद और अंधा लालच हमारे खूनी रिश्तों तक का अंत कर रहा है. लगभग 500 करोड़ की संपत्ति को पाने के लिए एक भाई ने ही अपनी सगी बहन की जान ले ली.
यह समाज में आज बढ़ती उस मानसिकता को दिखाता है जहां पैसा, खून के रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं से ऊपर हो गया है. यह मर्डर केस याद दिलाता है कि बच्चों को केवल सफल या अमीर बनाना काफी नहीं है, उन में नैतिक मूल्य और पारिवारिक सरोकार जगाना भी बेहद जरूरी है.
आज भी हमारे समाज में महिलाओं को संपत्ति में कानूनी हक करने के लिए परिवार के भीतर ही कड़ा विरोध झेलना पड़ता है. समाज को यह स्वीकार करना होगा कि बेटियों और बहनों का भी संपत्ति में उतना ही वैध अधिकार है जितना कि बेटों का होता है.
मनीषा मित्तल ने कई बार सोशल मीडिया, प्रैस कौन्फ्रेंस और खुद पुलिस में जा कर अपनी जान को खतरा बताया था, लेकिन पुलिस ने फिर भी ढुलमुल रवैया अपना कर मनीषा की करुण पुकार को नजरअंदाज कर दिया. Murder for Property






