Extra Marital Affair Crime. सीमा और मुकेश का अच्छाभला परिवार था. पति ने अपना मकान तक पत्नी के नाम करा दिया था. लेकिन सीमा को अपना किराएदार लोकेश ऐसा मन भाया कि उस ने पति को…  

10 जुलाई, 2014 की सुबह की बात है. सुबह 8 बजे का समय रहा होगा. इंदौर के थाना वाणगंगा में उस समय ड्यूटी पर सबइंसपेक्टर आर.एल. मिश्रा मौजूद थे. तभी किसी ने फोन कर के सूचना दी कि गणेश धाम कालोनी के पास रेलवे लाइन पर एक युवक का शव पड़ा है. फोन करने वाले ने संभावना व्यक्त की कि संभवत: वह ट्रेन से कट गया है. आर.एल. मिश्रा ने यह सूचना थाना प्रभारी योगेश सिंह तोमर को दे दी.

योगेश तोमर ने उस रात गश्त की थी इसलिए वह घर पर ही थे. रेलवे ट्रैक पर लाश पड़ी होने की सूचना मिलते ही वह थाने आ गए और सबइंसपेक्टर आर.एल. मिश्रा और 2 सिपाहियों को साथ ले कर उस जगह जा पहुंचे जहां लाश पड़ी होने की सूचना थी. वहां पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी.

रेलवे लाइन पर पड़ी लाश किसी 35-36 वर्षीय व्यक्ति की थी. जिस के 2 टुकड़े हो चुके थे. योगेश सिंह तोमर ने लाश का मुआयना किया तो उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि मृतक ट्रेन से कट कर नहीं मरा, बल्कि किसी ने उस की हत्या कर के लाश वहां फेंकी है जो ट्रेन से 2 टुकड़ों में कट गई है. इस की वजह यह थी कि लाश पर चाकुओं के घाव थे और वहां पर खून वगैरह नहीं था, इस का मतलब उस की हत्या कहीं और कर के लाश वहां फेंकी गई थी.

पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फोरेंसिक टीम को बुला लिया था. इस टीम के मुखिया सुधीर शर्मा ने भी लाश का निरीक्षण करने के बाद यही बताया कि उस व्यक्ति की हत्या कहीं और की गई है. फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने वगैरह ले कर अपना काम कर लिया तो थानाप्रभारी ने लाश की जेबों की तलाशी ली.

मृतक की जेबों की तलाशी में कुछ कागजात मिले जिस से यह पता चल गया कि उस का नाम मुकेश है और उस के पिता का नाम राजाराम. नाम के साथसाथ उस का पता भी मिल गया. वह पास ही की गणेश धाम कालोनी का रहने वाला था.

थानाप्रभारी ने एक कांस्टेबल को मुकेश के घर भेज दिया ताकि उस के घर वालों को खबर की जा सके.

घटनास्थल का निरीक्षण करते समय अचानक योगेश सिंह तोमर की निगाह पटरी किनारे की एक जगह पर पड़ी. वहां घास पर घसीटे जाने के निशान थे. खून की कुछ बूंदें भी नजर आ रही थी. योगेश कुमार और आर.एल. मिश्रा घिसटने के उस निशान के सहारे आगे बढ़े तो उन्हें रेलवे पटरी से करीब 50 मीटर दूर वह जगह मिल गई जहां मुकेश की हत्या की गई थी. वहां घास पर ढेर सारा खून पड़ा हुआ था. इस का मतलब उस जगह मुकेश की हत्या कर के लाश पटरी पर डाल दी गई थी.

पुलिस टीम ने थोड़ी और छानबीन की तो वहीं एक जोड़ी खून सने कपड़े और एक चाकू भी पड़ा मिल गया. पुलिस ने लिखापढ़ी के बाद दोनों चीजें जब्त कर लीं. प्राथमिक काररवाई के बाद पुलिस जब लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी कर रही थी तभी मृतक की पत्नी वहां आ गई. वह मुकेश के घर भेजे गए कांस्टेबल के साथ आई थी.

पति के शव को पहचान कर वह फूटफूट कर रोने लगी. पुलिस ने उसे जैसेतैसे शांत कर के मुकेश की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. पता चला मुकेश की पत्नी का नाम सीमा था. उस ने बताया कि उस का पति रोजाना की तरह अपने काम पर गया था. लेकिन वापस नहीं आया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने सीमा को घर भेज दिया.

थाना प्रभारी योगेश सिंह तोमर ने अपने एक सिपाही से गुप्त रूप से छानबीन करने को कहा. ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें सीमा की गतिविधियों पर संदेह हो रहा था. लोगों से बातचीत के बाद उस सिपाही ने बताया कि मोहल्ले के लोगों के अनुसार सीमा के लोकेश के साथ अवैश संबंध थे. लोकेश भी उसी कालोनी में रहता था. सिपाही लोकेश का पता भी ले आया था.

थाना प्रभारी योगेश सिंह लोकेश के घर गए. लेकिन वह घर पर नहीं था. उस की पत्नी से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि लोकेश अपने साढ़ू के साथ शिरडी गया हुआ है. उस ने यह भी बताया कि वह 3-4 दिन में लौटने को कह कर गया है.

लोकेश के बारे में पूछताछ कर के योगेश सिंह थाने लौट आए. सीमा को वह अपने साथ लेते आए थे, तब तक उस का रोनाधोना बंद हो गया था. लोकेश के साथ उस के अवैध संबंधों की बात पता चलने के बाद उन का उस पर संदेह बढ़ गया था. इसलिए उन्होंने सीमा से सीधा सवाल किया, ‘‘लोकेश से तेरे क्या संबंध हैं?’’

सवाल सुन कर सीमा के चेहरे पर घबराहट के भाव झलक आए. फिर भी वह खुद को संभाल कर बोली, ‘‘लोकेश मेरे पति के दोस्त हैं, पहले वह हमारे घर में किराए पर रहते थे. बाद में उन्होंने दूसरी जगह किराए का कमरा ले लिया था.’’ इस पर थानाप्रभारी ने उसे सोचने का बिना मौका दिए पूछा, ‘‘क्यों?’’

‘‘लोकेश के परिवार के लिए हमारे यहां जगह कम पड़ने लगी थी, इसलिए उन्होंने दूसरी जगह कमरा ले लिया.’’

लेकिन तोमर साहब इस से संतुष्ट नहीं हुए. वे समझ गए कि सीमा उन्हें बरगलाने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने उस का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया. उन्होंने उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर चेक कीं तो यह बात स्पष्ट हो गई कि वह और लोकेश आपस में बात करते थे. घटना वाली रात भी दोनों के बीच बात हुई थी.

काल डिटेल्स से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई थी, इसलिए पुलिस ने सीमा से सख्ती से पूछताछ की. नतीजतन वह टूट गई और उस ने स्वीकार कर लिया कि मुकेश की हत्या लोकेश ने ही की है और इस योजना में वह भी शामिल थी.

मुकेश की हत्या का खुलासा होने के बाद थानाप्रभारी योगेश तोमर ने एक पुलिस टीम लोकेश उर्फ जोगेश्वर की तलाश में लगा दी. अगले दिन जब वह शिरडी से वापस लौटा तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उस का सामना सीमा से कराया गया.

सीमा को पुलिस की गिरफ्त में देख कर वह भी टूट गया. उस ने स्वीकार कर लिया कि मुकेश मालवीय की हत्या उस ने अपने साढ़ू मुकेश के साथ मिल कर की थी और योजना में सीमा भी शामिल थी. दोनों से विस्तृत पूछताछ के बाद जो खुलासा हुआ, उस से कहानी कुछ इस तरह बनती है.

मुकेश मालवीय अपनी पत्नी सीमा के साथ इंदौर की गणेश धाम कालोनी में रहता था. दोनों का एक बेटा था. मुकेश एक कपड़ा फैक्ट्री में नौकरी कर के अपने परिवार की गुजरबसर करता था.

करीब एक वर्ष पहले निमाड़ जिले का रहने वाला लोकेश काम की तलाश में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ इंदौर आया. इन लोगों को किराए के कमरे की जरूरत थी. मुकेश मालवीय के मकान में एक कमरा खाली था. उस ने वह कमरा लोकेश को दे दिया. लोकेश अपनी पत्नी और बच्चों के साथ इंदौर में रह कर नौकरी करने लगा.

साथ रहतेरहते मुकेश मालवीय की पत्नी सीमा और लोकेश के बीच अवैध संबंध बन गए. दरअसल मुकेश जिस फैक्ट्री में काम करता था, वहां उस की नाइट ड्यूटी होती थी. उस की पत्नी सीमा रात को अकेली रहती थी. लोकेश ने इसी का फायदा उठाया था. धीरेधीरे सीमा लोकेश की दीवानी होती गई.

लोकेश और सीमा के अवैध संबंध तो बन गए थे लेकिन दिक्कत यह थी कि आसपास कई परिवार रहते थे, ऊपर से लोकेश की पत्नी और बच्चे भी उसी मकान में रह रहे थे. फलस्वरूप दोनों खुल कर नहीं मिल पाते थे.

लोकेश और सीमा की दीवानगी तो बढ़ती जा रही थी, लेकिन वे चाह कर भी खुल कर नहीं मिल पाते थे. यह बात सीमा को कुछ ज्यादा ही अखरती थी.

इसी वजह से एक दिन सीमा ने लोकेश से कहा, ‘‘इस तरह चोरीछिपे मिलने में कोई मजा नहीं है. प्यार पर कोई बंदिश नहीं होनी चाहिए. इसलिए कुछ ऐसा करो कि हम अपनी इच्छानुसार खुल कर मिल सकें.’’

‘‘मैं ऐसा क्या कर सकता हूं?’’ लोकेश ने पूछा तो सीमा बोली, ‘‘मैं मुकेश से तलाक ले कर तुम से शादी कर लेती हूं.’’

‘‘और मेरी पत्नी का क्या होगा?’’ लोकेश ने पूछा तो सीमा बोली, ‘‘तुम भी अपनी पत्नी को छोड़ दो. दोनों तरफ से रास्ता साफ हो जाएगा.’’

सीमा के प्रति दीवानगी लोकेश के मन में भी थी. लेकिन जैसा वह कह रही थी वैसा करना आसान नहीं था. इसलिए उस ने सीमा से कहा कि वह उसे सोचने का मौका दे. सीमा ने उसे मौका भी दिया, लेकिन जब वह ऐसा नहीं कर सका तो सीमा ने उस से कहा, ‘‘अब एक ही उपाय बचा है कि मुकेश को रास्ते से हटा दिया जाए. वह नहीं रहेगा तो हम आराम से मिल सकेंगे. कोई डर भी नहीं रहेगा.’’

यह सुन कर लोकेश डर गया. उस ने बात को घुमाने की कोशिश की, लेकिन सीमा उस पर दबाव बनाते हुए बोली, ‘‘कैसे क्या करना है, यह तुम सोचो. मैं केवल इतना चाहती हूं कि यह काम तुम हर हाल में करो.’’

‘‘मैं पकड़ा जाऊंगा, मुझे फांसी हो जाएगी,’’ लोकेश ने अपना डर जाहिर किया तो सीमा ने उसे समझाया, ‘‘कुछ नहीं होगा, मैं हूं न तुम्हारे साथ.’’

जैसेजैसे समय बीत रहा था वैसेवैसे सीमा की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. दूसरी तरफ उन दोनों के रिश्तों को ले कर मोहल्ले में कानाफूसी होने लगी थी. यह बात जब मुकेश मालवीय को पता चली तो वह आश्चर्यचकित रह गया. उसे उम्मीद नहीं थी कि उस की छत के नीचे रहने वाला लोकेश उस की पीठ में छुरा भोंक रहा है. उस ने अपनी पत्नी सीमा को तो डांटा ही, लोकेश से भी दो टूक कह दिया, ‘‘अब मैं तुम्हें अपने घर में नहीं रख सकता. तुम अपना ठिकाना कहीं और ढूंढ लो.’’

इस बात को ले कर दोनों के बीच थोड़ी कहासुनी भी हुई, लेकिन मुकेश ने ज्यादा बात बढ़ाना ठीक नहीं समझा. लोकेश ने कोशिश की तो उसे मोहल्ले में ही दूसरा मकान मिल गया. वह मुकेश का कमरा खाली कर के नए मकान में चला गया. लेकिन इस के बावजूद सीमा के साथ उस के संबंध पूर्ववत ही बने रहे.

कुछ दिन तो चैन से गुजरे, लेकिन सीमा को फिर बेचैनी होने लगी. आखिर उस ने एक दिन लोकेश को धमकी दे डाली. उस ने उस से दो टूक कह दिया, ‘‘देखो लोकेश, या तो तुम मुकेश को ठिकाने लगा कर मुझे अपना लो, नहीं तो मैं जहर खा कर जान दे दूंगी और तुम्हें फंसा दूंगी.’’

यह सुन कर लोकेश के होश उड़ गए. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि करे तो क्या करे. उस ने सीमा को समझाने की कोशिश की, ‘‘सीमा, हम दोनों ही शादीशुदा हैं. तुम एक बेटे की मां हो. मेरे भी 3 बच्चे हैं. बेहतर है, जैसे चल रहा है हम वैसे ही चलने दें. क्या जरूरत है ऐसा पाप सिर लेने की?’’

लेकिन सीमा कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी. उस ने एक दिन फिर लोकेश के सामने अपनी बात रखी, ‘‘मेरे पास एक प्लान है. इस से सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी.’’

लोकेश ने योजना पूछी तो सीमा ने बताया, ‘‘रोजाना दिन ढलने के बाद मुकेश कपड़ा फैक्ट्री में अपनी ड्यूटी पर जाता है. तब तक अंधेरा घिर आता है. उस का रास्ता भी सुनसान है. तुम रेलवे ट्रैक के पास छिप कर बैठ जाना. जब वह वहां से गुजरे तो बात करने के बहाने रोक लेना और चाकू मार कर उसे लगा देना ठिकाने. जब वह मर जाए तो लाश रेल की पटरी पर डाल देना. ट्रेने आतीजाती रहती हैं, इस से लाश कट जाएगी. लोग यही समझेंगे कि वह ट्रेन से कट कर मर गया है. तुम पर कोई इल्जाम नहीं आएगा. जब पुलिस पूछताछ करेगी तो मैं बात संभाल लूंगी.’’

लोकेश सोच में पड़ गया. वह समझ नहीं पा रहा था कि उसे क्या जवाब दे. उसे चुप देख सीमा बोली, ‘‘मुकेश के मरने के बाद हम अपने इस मकान में मौज से रहेंगे.’’

‘‘तुम्हारा मकान?’’ लोकेश ने चौंक कर पूछा तो सीमा बोली, ‘‘इस में चौंकने वाली क्या बात है, यह मकान मेरे ही नाम तो है. 8 लाख कीमत है इस मकान की.’’

‘‘लेकिन मेरी पत्नी और बच्चों का क्या होगा?’’ लोकेश ने सवाल किया तो सीमा ने उसे समझाया, ‘‘उन्हें अपने गांव भेज देना. हम दोनों मौज से यहां रहेंगे.’’

8 लाख के मकान के लालच ने लोकेश को सोचने के लिए मजबूर कर दिया. सीमा ने जो योजना बताई थी, वह भी अच्छी थी. उस ने इस बारे में गहराई से सोचा तो उसे अपने साढ़ू मुकेश (उस का नाम भी मुकेश था) की याद आई. वह जिला निमाड़ के गांव कन्नौद का रहने वाला था, उस ने अपने साढ़ू मुकेश के बारे में सीमा को बताया तो उस ने कोई ऐतराज नहीं किया.

सीमा से बातचीत के बाद लोकेश ने अपने साढ़ू मुकेश को फोन कर के इंदौर बुला लिया. लोकेश ने अपनी योजना साढ़ू को बताई तो वह उस का साथ देने के लिए तैयार हो गया. योजना बन चुकी थी. अब उसे अमल में लाना था.

3 दिन तक रेकी करने के बाद लोकेश और उस के साढ़ू ने मुकेश को 10 जुलाई को ठिकाने लगाने का निश्चय किया. इस के लिए उन्होंने बाजार से एक बड़ा सा चाकू भी खरीद लिया.

जिस दिन मुकेश की हत्या की योजना थी उस दिन लोकेश और उस के साढ़ू मुकेश ने मोहल्ले में यह बात फैला दी कि वे लोग शिरडी जा रहे हैं.

उस शाम अंधेरा पड़े जब मुकेश घर से निकला तो सीमा ने यह बात लोकेश को बता दी. उस से  फोन पर बात करने के बाद लोकेश और उस का साढ़ू लाइन के पास जा कर छिप गए.

करीब साढ़े 8 बजे जब मुकेश अपने स्कूटर से रेलवे ट्रैक के पास पहुंचा तो लोकेश ने उसे आवाज दे कर रोक लिया. वह रुक गया तो लोकेश उस के पास जा कर बोला, ‘‘मुझे तुम से माफी भी मांगनी है और दो बातें भी करनी हैं.’’

उस वक्त लोकेश का साढ़ू मुकेश झाड़ी में छिपा हुआ था. मुकेश मालवीय ने बात करने में कोई बुराई नहीं समझी. वह अपना स्कूटर खड़ा कर के उस से बात करने लगा. लोकेश बात करतेकरते उसे झाड़ी तक ले गया.

जैसे ही वे दोनों झाड़ी के पास पहुंचे लोकेश के साढ़ू ने उसे दबोच कर उस का मुंह बंद कर लिया, उसी वक्त लोकेश ने चाकू निकाल कर मुकेश मालवीय की छाती पर भरपूर वार किया.

मुकेश लहूलुहान हो कर वहीं गिर गया. इस के बावजूद उस ने विरोध करने की कोशिश की तो लोकेश ने उस के पेट पर 2-3 वार किए. फलस्वरूप उस की मौत हो गई.

इस तरह मुकेश मालवीय को ठिकाने लगाने के बाद वे दोनों उस की लाश को घसीट कर रेलवे लाइन पर ले गए. लाश रेलवे लाइन पर रख कर दोनों ने अपने खून से सने कपड़े बदले और ट्रेन के आने का इंतजार करने लगे. खून सने कपड़े और चाकू उन्होंने वहीं एक झाड़ी में फेंक दिए.

थोड़ी देर में ट्रेन आई और मुकेश की लाश के 2 टुकड़े हो गए. इस के बाद लोकेश ने मोबाइल से काम हो जाने की सूचना सीमा को दे दी. इस के बाद दोनों हत्यारे वहीं से शिरडी चले गए. उधर सीमा सच्चाई का पता लगाने के लिए घर से निकल कर पैदल ही उस जगह तक गई जहां मुकेश की लाश पड़ी थी. लाश देख कर उसे विश्वास हो गया कि काम हो गया है. वह पैदल ही घर लौट आई.

मुकेश के पिता राजाराम अपनी पत्नी सायरबाई और 2 बेटों संजय व मनोज के साथ विट्ठल नगर में रहते थे. बेटे की मौत का समाचार सुन कर वे भी गणेशधाम आ गए.

राजाराम ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेच कर तीनों भाइयों में बराबर बांट दी थी. मुकेश ने अपने हिस्से के पैसे से गणेशधाम कालोनी में 3 कमरों का घर बनवा लिया था. लेकिन सीमा ने 2012 में लड़झगड़ कर यह मकान अपने नाम करा लिया था.

विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने लोकेश और सीमा को अदालत पर पेश कर के जेल भेज दिया.

इस घटना के बाद सीमा तो जेल चली गई, रह गया उस का 8 वर्षीय बेटा चिंटू. उसे उस का मामा अपने साथ ले गया. सीमा और लोकेश जेल में हैं. जब कि दूसरा हत्यारा लोकेश का साढ़ू मुकेश अभी फरार है.    Extra Marital Affair Crime

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— 2014 में प्रकाशित

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...